प्रदर्शन कर रहे अभिभावकों का कहना है कि बच्चों का नामांकन अचानक बदले गए नियमों के कारण अटक गया है। कई बार स्कूल आने-जाने के बावजूद उन्हें पहले आश्वासन दिया गया था कि एडमिशन होगा, लेकिन बाद में नियमों का हवाला देकर प्रवेश रोक दिया गया। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि अब स्कूल प्रशासन केवल मेरिट और नए चयन मानकों के आधार पर एडमिशन दे रहा है, जिससे कई योग्य छात्र बाहर हो गए हैं।
अभिभावक सुनीता देवी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके बच्चों की पढ़ाई यहीं से शुरू हुई थी, लेकिन अब उन्हें दूर-दराज के स्कूलों में भेजने की मजबूरी बन रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अच्छे स्कूलों में सिर्फ विशेष वर्ग या आर्थिक रूप से मजबूत परिवारों के बच्चों को ही पढ़ने का अधिकार है। उन्होंने यह भी चिंता जताई कि दूर स्कूल जाने से बच्चों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर स्कूल प्रशासन ने साफ किया है कि यह स्कूल अब मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, इसलिए नामांकन प्रक्रिया में सख्त नियम लागू किए गए हैं। प्रिंसिपल मनीष कुमार सिंह ने बताया कि कक्षा 9 में कुल 180 सीटें निर्धारित हैं और सीमित सीटों के कारण सभी छात्रों को प्रवेश देना संभव नहीं है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में NMMS परीक्षा पास करने वाले छात्रों को प्राथमिकता देने का प्रावधान था, लेकिन बाद में नई SOP के तहत मेरिट और परीक्षा परिणाम के आधार पर ही प्रवेश प्रक्रिया तय की गई। इसके तहत दो बार टेस्ट और मार्कशीट के आधार पर चयन प्रक्रिया पूरी की गई है।
प्रशासन का कहना है कि इस बार प्राइवेट स्कूलों के छात्रों को भी सीमित रूप से ही शामिल किया गया है और नियमों के अनुसार ही एडमिशन दिया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन का यह भी कहना है कि संसाधनों की सीमा को देखते हुए अधिक छात्रों का नामांकन करना संभव नहीं है, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
स्थिति को देखते हुए स्कूल परिसर में तनाव का माहौल बना हुआ है। अभिभावक लगातार सीट बढ़ाने और सभी योग्य छात्रों को प्रवेश देने की मांग कर रहे हैं, जबकि स्कूल प्रशासन नियमों का हवाला देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है। अब इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की संभावना जताई जा रही है।