अब इस राज से पर्दा उठाते हुए अली असगर ने बताया कि यह फैसला जितना प्रोफेशनल था उससे कहीं ज़्यादा पर्सनल भी था उन्होंने एक बातचीत के दौरान कहा कि उनके इस किरदार का असर उनके परिवार खासकर बच्चों पर पड़ने लगा था जो उनके लिए बेहद मेहनतीदेह था
अली ने खुलासा किया कि उनके बच्चों को स्कूल में इस वजह से चिढ़ाया जाता था उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे फिल्मों में डायलॉग होता है मेरा बाप चोर है उसी तरह उनके बेटे को लेकर बच्चे कहते थे मेरा बाप औरत है यह सुनना उनके लिए एक पिता के रूप में बेहद कठिन था और दब से उनके मन में बदलाव की शुरुआत हुई
उन्होंने यह भी बताया कि समस्या सिर्फ दब तक सीमित नहीं थी बल्कि उन्हें लगातार एक ही तरह के किरदार ऑफर किए जा रहे थे कॉमेडी शो में उन्हें बार बार महिला किरदार निभाने को कहा जाता था जिससे उनकी क्रिएटिव सैटिस्फैक्शन भी प्रभावित हो रही थी अली ने कहा कि कलाकार होने के रिश्तेदार वह अलग-अलग तरह के रोल करना चाहते थे लेकिन उन्हें बार-बार उसी इमेज में ढाल दिया जाता था
उन्होंने अपने एक्सपीरियंस को शेयर करते हुए कहा कि हर वीकेंड जब वह कॉमेडी शो करते थे तो उन्हें दो अलग-अलग एक्ट में भी महिला किरदार ही निभाने को कहा इससे उन्हें फील होने लगा कि उनकी पहचान लिमिटेड हो रही है और इंडस्ट्री उन्हें एक ही नजर से देख रही है उन्होंने यह भी कहा कि कलाकार को वैरायटी चाहिए और वह सिर्फ एक ही तरह का काम करते रहना नहीं चाहते थे
गौरतलब है कि अली असगर ने साल 2017 में शो छोड़ा था उस समय यह कहा गया था कि उन्होंने क्रिएटिव बदलावों के कारण यह फैसला लिया है लेकिन अब सामने आई सच्चाई इस फैसले को एक नई नजर देती है
अली असगर का करियर सिर्फ कॉमेडी तक लिमिटेड नहीं रहा है उन्होंने कई पॉपुलर टीवी शो जैसे कहानी घर घर की और दूसरे प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है इसके अलावा फिल्मों में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है और कई चर्चित फिल्मों में नजर आ चुके हैं उनकी बची हुई फिल्म और टीवी प्रोजेक्ट्स भी इस बात का सबूत हैं कि उन्होंने खुद को एक ही छवि तक सीमित नहीं रखा बल्कि नए प्रयोग करने की कोशिश की है
यह कहानी सिर्फ एक कलाकार के फैसले की नहीं है बल्कि उस जिम्मेदारी की भी है जो एक पिता अपने परिवार के प्रति महसूस करता है अली असगर का यह कदम दिखाता है कि कभी कभी सफलता से ज्यादा जरूरी अपने करीबियों की भावनाएं होती हैं और यही असली जीत होती है