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अटारी-वाघा बॉर्डर पर ए आर रहमान ने लाइव प्रस्तुति देकर रचा नया इतिहास, बीएसएफ जवानों को समर्पित किया ऐतिहासिक कॉन्सर्ट

नई दिल्ली । देश की सीमाओं की रक्षा में मुस्तैद सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों को सम्मान देने और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुरों से सजाने के लिए अटारी-वाघा बॉर्डर एक ऐतिहासिक पल का गवाह बना। महान संगीतकार और ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा चौकी पर लाइव परफॉर्मेंस देकर एक नया इतिहास रच दिया है। इस अनूठे और भव्य कॉन्सर्ट का आयोजन देश के वीर जवानों को समर्पित करने के साथ-साथ एक विशेष सिनेमाई कलाकृति के प्रचार के उद्देश्य से किया गया था।

मशहूर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने अपनी बहुप्रतीक्षित आगामी फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रमोशन के लिए एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली रास्ता चुना। वे फिल्म की मुख्य संगीत टीम, जिसमें दिग्गज संगीतकार ए आर रहमान और लोकप्रिय पार्श्व गायक मोहित चौहान शामिल थे, के साथ सीधे भारत-पाकिस्तान की अटारी-वाघा सीमा पर पहुंचे। इस दौरान सीमा पर तैनात जवानों का हौसला बढ़ाने और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए एक विशेष म्यूजिकल ट्रिब्यूट का आयोजन किया गया, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावविभ्वल कर दिया।

अटारी बॉर्डर पोस्ट पर आयोजित इस लाइव कॉन्सर्ट के दौरान ए आर रहमान ने जब अपनी सुरीली और जादुई आवाज में कालजयी गीत ‘वंदे मातरम’ गाना शुरू किया, तो पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों और सुरों से गूंज उठा। सीमाओं की रक्षा करने वाले बीएसएफ के जवानों के लिए यह एक बेहद भावुक और गौरवशाली क्षण था। इस ऐतिहासिक प्रस्तुति में गायक मोहित चौहान ने भी सुर से सुर मिलाकर समां बांध दिया, जिससे वहां उपस्थित जवानों और दर्शकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।

फिल्म इंडस्ट्री में इस तरह के प्रमोशन को एक क्रांतिकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है, जहां व्यावसायिक लाभ से ऊपर उठकर राष्ट्र के प्रहरियों को केंद्र में रखा गया। इम्तियाज अली और ए आर रहमान की इस जोड़ी ने हमेशा अपने संगीत और फिल्मों से दर्शकों के दिलों को छुआ है, लेकिन इस बार सरहद पर दी गई इस लाइव प्रस्तुति ने कला और राष्ट्र सेवा के मेल की एक नई मिसाल पेश की है। सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों और जवानों ने इस सम्मान के लिए पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन न केवल संगीत की दुनिया में एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि इसने यह भी संदेश दिया है कि कला और संस्कृति देश के रक्षकों के योगदान की सदैव ऋणी रहेगी। अटारी बॉर्डर पर गूंजे ए आर रहमान के सुरों की गूंज और जवानों के चेहरों पर तैरती मुस्कान सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के मीडिया में लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है। देशभक्ति से ओतप्रोत यह कॉन्सर्ट आने वाले लंबे समय तक भारतीय संगीत और संस्कृति के इतिहास में याद रखा जाएगा।

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