बांग्लादेश में पत्रकार गिरफ्तारी से मचा बवाल ,प्रेस स्वतंत्रता पर फिर उठे सवाल
नई दिल्ली । बांग्लादेश की राजधानी ढाका में पत्रकारों के खिलाफ की गई हालिया कार्रवाई ने देश की मीडिया स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है। मामला स्थानीय सरकार ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्रालय के राज्य मंत्री मीर शाहे आलम से जुड़ी एक कथित भ्रष्टाचार रिपोर्ट से संबंधित बताया जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साइबर सुरक्षा अधिनियम के तहत एक पत्रकार को गिरफ्तार किया गया है और छह अन्य पत्रकारों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
गिरफ्तार किए गए पत्रकार की पहचान दैनिक अग्रजात्रा प्रतिदिन के कार्यवाहक संपादक रेजानुर इस्लाम के रूप में हुई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार उन्हें गाजीपुर सदर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया और बाद में न्यायालय के आदेश पर जेल भेज दिया गया। यह पूरी कार्रवाई उस रिपोर्ट से जुड़ी बताई जा रही है जिसमें राज्य मंत्री पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे और जिसे कथित रूप से मानहानिकारक बताया गया।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस मामले में शिकायत बोगरा प्रेस क्लब से जुड़े एक सदस्य की ओर से दर्ज कराई गई थी जिसके बाद अदालत ने जांच और एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद संपादक प्रकाशक और रिपोर्टरों सहित कुल छह लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई। जिन लोगों पर मामला दर्ज हुआ है उनमें प्रकाशक मेहदी हसन न्यूज एडिटर अशरफ अली फारूकी रिपोर्टर सालेह कैसर बोगरा के रिपोर्टर मोहम्मद शम्स और जिला रिपोर्टर सब्बीर हसन शामिल हैं।
आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में राज्य मंत्री को भ्रष्टाचार विवाद से जोड़कर पेश किया गया था जिसे शिकायतकर्ता ने झूठा और मानहानिकारक बताया। दूसरी ओर इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक और मीडिया हलकों में चिंता बढ़ गई है। अवामी लीग ने इस गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए कहा है कि आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को आपराधिक मामला बनाना प्रेस की स्वतंत्रता के लिए खतरे का संकेत है।
पार्टी ने यह भी कहा कि पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है और ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई स्वतंत्र मीडिया के लिए स्थान को सीमित कर सकती है। मीडिया संगठनों और पत्रकार समूहों में भी इस घटना को लेकर चिंता व्यक्त की जा रही है क्योंकि इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी तरफ प्रशासन का कहना है कि कानून के तहत मानहानि और गलत रिपोर्टिंग के मामलों में कार्रवाई की जाती है
और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता। इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में पत्रकार सुरक्षा और साइबर कानूनों के उपयोग को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या यह विवाद मीडिया और सरकार के बीच तनाव को और बढ़ाएगा या किसी समाधान की ओर ले जाएगा।