'सिंधिया राजघराना' संपत्ति विवाद: प्रतिमा राणा की गैरमौजूदगी से फिर टली सुनवाई, मौसियों पर लगाए ये बड़े आरोप
ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के विवाद मामले में प्रतिमा राणा की गैरमौजूदगी से सुनवाई टल गई।

Scindia Property Dispute: ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की हजारों करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़ा पारिवारिक विवाद एक बार फिर अदालत में अटक गया है। करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति से जुड़े इस मामले में 4 नवंबर को अहम सुनवाई होनी थी। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ (दिवंगत पद्मावती राजे) की बेटी प्रतिमा राणा को अदालत में अपने बयान दर्ज कराने थे, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने से सुनवाई आगे बढ़ गई।
प्रतिमा राणा ने आरोप लगाया है कि उनसे धोखे से समझौता प्रस्ताव यानी राजीनामे पर हस्ताक्षर कराए गए थे। अदालत ने उनकी आपत्ति पर उन्हें अपना पक्ष रखने और सबूत पेश करने का अवसर दिया है। ऐसे में अब समझौते पर आगे की कार्रवाई उनके बयान और अदालत के रुख पर निर्भर करेगी।
मौसियों पर धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप
प्रतिमा राणा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया और अपनी तीन मौसियों वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे पर धोखे से दस्तखत कराने का आरोप लगाया है।
वहीं, तीनों मौसियों ने अदालत में जवाब दाखिल कर इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि समझौते पर सभी की सहमति से हस्ताक्षर किए गए थे। उनके पक्ष की ओर से यह भी बताया गया कि दस्तखत के बाद परिवार के सदस्य साथ रहे, डिनर किया और तस्वीरें भी खिंचवाई थीं।
ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से भी अदालत में कहा गया है कि समझौते पर हस्ताक्षर आपसी सहमति से हुए थे और इसमें कोई धोखाधड़ी नहीं की गई।
पहले एकपक्षीय घोषित हुई थीं प्रतिमा और कनिका
संपत्ति विवाद की शुरुआत वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ दायर सिविल मुकदमे से हुई थी। इसमें पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी का दावा किया गया था।
मामले में सिंधिया परिवार की दिवंगत सदस्य पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी और प्रतिमा राणा को भी पक्षकार बनाया गया था। हालांकि, अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण दोनों को पहले एकपक्षीय यानी एक्स पार्टी घोषित कर दिया गया था।
अब प्रतिमा राणा ने अदालत में आवेदन देकर दोबारा अपना पक्ष रखने का अवसर मांगा है। उनका कहना है कि समझौते पर हस्ताक्षर धोखे से कराए गए थे। चूंकि उनकी मां पद्मावती राजे भी संपत्ति में हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों के दावे और आपत्तियां मामले में अहम हो गई हैं।
समझौते पर प्रतिमा की आपत्ति से बढ़ी कानूनी उलझन
परिवार के सदस्यों के बीच तैयार हुए समझौता प्रस्ताव को विवाद का समाधान माना जा रहा था। लेकिन प्रतिमा राणा की आपत्ति के बाद अब अदालत को उनके आरोपों और पेश किए जाने वाले सबूतों पर विचार करना होगा।
एक तरफ तीनों मौसियों का कहना है कि समझौता सहमति से हुआ था, वहीं प्रतिमा राणा ने हस्ताक्षर की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। अदालत में दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों की जांच के बाद ही समझौते की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
78 साल पुराने 'द कोवेनेंट' पर भी टिकी नजर
इस मामले में 78 साल पुराना ऐतिहासिक दस्तावेज ‘द कोवेनेंट’ भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह दस्तावेज मध्य भारत की रियासतों के विलय से जुड़ा है। इसकी नोटरी से प्रमाणित प्रति अदालत में पेश किए जाने की जानकारी दी गई है।
दस्तावेज में रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और पूर्व शासकों को मिलने वाले प्रिवी पर्स से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख है। संपत्ति विवाद में इस दस्तावेज की शर्तों और उनके कानूनी प्रभाव पर भी विचार किया जा सकता है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रतिमा राणा के अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण 4 नवंबर की सुनवाई में उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। उनके आरोपों के समर्थन में सबूत पेश किए जाने और दूसरे पक्ष के जवाब के बाद ही अदालत आगे की प्रक्रिया तय करेगी।
करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति से जुड़े इस विवाद में अब मुख्य सवाल यही है कि समझौते पर प्रतिमा राणा की आपत्ति का कानूनी आधार क्या है और अदालत इस पर क्या फैसला देती है।


