मामला पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त कर्मचारी कौशल किशोर राठौर से जुड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि विभाग ने लंबे समय तक उन्हें उनके पद के अनुरूप वेतन नहीं दिया। न्याय पाने के लिए उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया। यह मामला निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां हर स्तर पर फैसला कर्मचारी के पक्ष में आया। अदालतों ने विभाग को बकाया वेतन और एरियर का भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश दिए थे।
विभाग ने वर्ष 2013 तक के एरियर का भुगतान तो कर दिया, लेकिन 2014 से लेकर रिटायरमेंट तक की लगभग 36 लाख रुपए की राशि रोक ली गई। लगातार आदेशों और नोटिसों के बावजूद जब भुगतान नहीं हुआ, तो कौशल किशोर राठौर ने अवमानना और इजरा याचिका दायर की। इसके बाद न्यायालय ने विभाग के खिलाफ वसूली और कुर्की की कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए।
फरियादी कौशल किशोर राठौर ने बताया कि फरवरी में हुई पहली कुर्की के दौरान विभागीय अधिकारियों ने अदालत में लिखित में यह भरोसा दिया था कि दो महीने के भीतर पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसी कारण कोर्ट की टीम को दोबारा पीडब्ल्यूडी कार्यालय पहुंचकर कुर्की की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।
बुधवार को न्यायालय की टीम ने विभागीय संपत्तियों का आकलन किया और आवश्यक दस्तावेजी कार्रवाई पूरी की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 31 दिसंबर 2026 तक कुर्की के माध्यम से पूरी राशि वसूलकर कर्मचारी को भुगतान सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह मामला सरकारी विभागों द्वारा अदालत के आदेशों की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। यदि विभाग ने अब भी भुगतान नहीं किया, तो आने वाले समय में विभाग की अन्य संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद विभागीय हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अदालत अब इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई के मूड में नहीं है और आदेशों की अवहेलना पर आगे और कठोर कदम उठाए जा सकते हैं।