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चंद्रमा का अप्रैल गोचर: कैसे प्रभावित होंगे आपकी राशि और जीवन के फैसले

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और रोजमर्रा के फैसलों का मुख्य कारक माना गया है। जब चंद्रमा किसी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसका असर व्यक्ति के मूड, सोच, जीवन और वित्तीय निर्णयों पर सीधे पड़ता है। यही कारण है कि चंद्र गोचर को दैनिक ज्योतिष में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। अप्रैल 2026 में चंद्रमा कुल 19 बार नक्षत्र बदलने वाला है। महीने की शुरुआत 1 अप्रैल को हस्त नक्षत्र से होगी, जबकि आखिरी गोचर 30 अप्रैल को चित्रा नक्षत्र में होगा। इतने ज्यादा नक्षत्र परिवर्तन के कारण यह महीना कई राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव और अवसर लेकर आ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जब चंद्रमा शुभ नक्षत्र में होता है, तो जीवन में धन लाभ, नई संभावनाएं और मानसिक शांति मिलती है, जबकि अशुभ स्थिति में मन बेचैन रह सकता है और खर्च बढ़ सकते हैं। राशियों पर चंद्र गोचर का असर मेष राशि मेष राशि वालों के लिए अप्रैल का महीना अनुकूल रहेगा। धन लाभ के योग बनेंगे और रुके हुए कार्य पूरे होंगे। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिलेंगे। आत्मविश्वास बढ़ेगा और परिवार का माहौल खुशहाल रहेगा। वृषभ राशि वृषभ राशि के लिए यह महीना आर्थिक रूप से मजबूत रहने वाला है। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं। काम में सम्मान मिलेगा और परिवार का सहयोग भी बना रहेगा। मानसिक शांति बनी रहेगी और यात्रा से भी लाभ होने की संभावना है। मिथुन राशि मिथुन राशि के जातकों को किस्मत का साथ मिलेगा। नौकरी और व्यापार में तरक्की के योग हैं। धन आने के नए रास्ते खुलेंगे और नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। परिवार और रिश्तों में सुधार आएगा। कर्क राशि कर्क राशि वालों को अप्रैल में थोड़ी सतर्कता बरतनी होगी। खर्च बढ़ने की संभावना है और काम में बाधाएं आ सकती हैं। मानसिक अशांति से बचने के लिए सोच-समझकर निर्णय लें। स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें। सिंह राशि सिंह राशि के लिए यह समय सफलता और मान-सम्मान लेकर आएगा। करियर में तरक्की होगी और धन लाभ के मौके मिलेंगे। समाज में मान-सम्मान बढ़ेगा और अधिकारी सहयोग करेंगे, जिससे आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। अप्रैल के इस गोचर में चंद्रमा के बार-बार नक्षत्र बदलने से राशियों पर अलग-अलग असर देखने को मिलेगा। ज्योतिषियों का सुझाव है कि इस महीने शुभ नक्षत्रों में महत्वपूर्ण निर्णय लें और अशुभ समय में बड़े वित्तीय या व्यावसायिक कदम टालें, ताकि जीवन में स्थिरता और संतुलन बना रहे।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा रियल एस्टेट को मिलेगा बड़ा बूस्ट, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट करेगा विकास को प्रेरित

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी बढ़त मिलने की उम्मीद है। नई नोएडा के अनुसार, एयरपोर्ट की शुरुआत से डेवलपर्स का भरोसा बढ़ेगा और नए आवासीय प्रोजेक्ट्स की संख्या में तेजी से आएगी। रियल एस्टेट पर असर:ग्रेटर नोएडा ने 2025 में ग्रेटर नोएडा के कुल रेजिडेंशियल लॉन्च का 28% हिस्सा हासिल किया, जो 2021 में 19% था। नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग 2021 में 4,415 यूनिट से बढ़कर 2025 में 14,000 यूनिट हो गई। हाउसिंग सेल्स में ग्रेटर नोएडा का योगदान 2025 में 12,903 यूनिट रहा, जो 2021 के 10,685 यूनिट से बढ़ा। नेशनल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव विजय के अनुसार, यह एयरपोर्ट ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास रियल एस्टेट के लिए टर्निंग पॉइंट साबित होगा।विभागीय शिशिर बैजल के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट खेड़ा के एविएशन और शहरी विकास को नया रूप देगा और क्षेत्र में संतुलित शहरी विस्तार को बढ़ावा देगा। निरंतरता और विकास:सड़क, मेट्रो और रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) जैसी मल्टीमॉडल निरंतरता एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।आवेदकों के अनुसार, नए एयरपोर्ट जैसे जेवर भी यात्रियों को आकर्षित करेंगे और एरोट्रोपोलिस आधारित विकास को गति देंगे। जेवर एयरपोर्ट न केवल हवाई यातायात को संतुलित करेगा, बल्कि ग्रेटर नोएडा और खेड़ा में हाउसिंग डिमांड, प्रॉपर्टी प्लेसमेंट और रियल एस्टेट निवेश को भी नई ऊंचाई देगा। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र खेड़ा का प्रमुख सेकेंडरी एयरपोर्ट हब बन सकता है।

हवाई चप्पल से आसमान तक भारत की उड़ान मोदी युग में 90 नए एयरपोर्ट से बदली तस्वीर

नई दिल्ली: पिछले एक दशक में भारत ने विकास के कई आयाम छुए हैं लेकिन हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में जो बदलाव देखने को मिला है वह सबसे उल्लेखनीय माना जा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास का अहम आधार बनाया और इसका परिणाम आज साफ नजर आता है। जहां वर्ष 2014 में देश में केवल 74 ऑपरेशनल एयरपोर्ट थे वहीं वर्ष 2026 तक यह संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। यह सिर्फ आंकड़ों का बदलाव नहीं बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए बड़े परिवर्तन की कहानी है। हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया है। यह एयरपोर्ट न केवल दिल्ली एनसीआर का दूसरा अंतरराष्ट्रीय हब है बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास का नया केंद्र भी बनने जा रहा है। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की है जिसे भविष्य में 7 करोड़ तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस परिवर्तन के पीछे सबसे बड़ी भूमिका उड़ान योजना की रही है जिसने छोटे शहरों और दूरदराज के क्षेत्रों को पहली बार हवाई नक्शे पर जगह दिलाई। पहले जहां हवाई यात्रा केवल संपन्न वर्ग तक सीमित थी वहीं अब आम नागरिक भी कम कीमत में फ्लाइट का लाभ उठा रहा है। इस योजना के तहत लाखों लोगों ने पहली बार हवाई यात्रा का अनुभव किया है जिससे यात्रा संस्कृति में भी बड़ा बदलाव आया है। सरकार ने ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नीति के तहत कई नए एयरपोर्ट को मंजूरी दी और पुराने बंद पड़े एयरपोर्ट को भी दोबारा चालू किया। सिक्किम का पाक्योंग एयरपोर्ट से लेकर गोवा का मोपा एयरपोर्ट और अब जेवर एयरपोर्ट तक यह विस्तार एक सुनियोजित रणनीति का परिणाम है। इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय ने इस विकास को गति दी है। एयरपोर्ट केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र भी बनते हैं। जहां भी नया एयरपोर्ट बना वहां रोजगार के अवसर बढ़े पर्यटन को बढ़ावा मिला और स्थानीय व्यापार को नई ऊर्जा मिली। जेवर एयरपोर्ट जैसे प्रोजेक्ट से आसपास के शहरों जैसे आगरा मेरठ अलीगढ़ और मथुरा को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे कृषि उत्पाद और उद्योगों को भी वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। भविष्य की बात करें तो सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 350 से 400 एयरपोर्ट तैयार करने का है। इसके तहत हेलिपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि देश का कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से वंचित न रहे। यह पूरी रणनीति विकसित भारत के विजन का हिस्सा है जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ माना गया है। स्पष्ट है कि भारत की यह एयरपोर्ट क्रांति केवल संख्या बढ़ाने की कहानी नहीं बल्कि एक ऐसे बदलाव की मिसाल है जिसने आम आदमी को आसमान से जोड़ा है और देश की अर्थव्यवस्था को नई उड़ान दी है।

रुपये के मूल्य और बाजार नियंत्रण के लिए RBI ने बैंकों को दिए सख्त निर्देश

नई दिल्ली भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपये में गिरावट को लेकर निवेश और सट्टेबाजी (स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग) पर शेयरों के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी उद्यमों के रूप में काम करने वाले बैंकों को दिन के अंत तक रुपये में अपने ओपन इन्वेस्टमेंट के लिए 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने का ऑर्डर दिया गया है। मुख्य कारण और समय:अमेरिकी-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण व्यापार घाटा बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।शुक्रवार को पहली बार 94 प्रति डॉलर से नीचे और करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। अब तक अमेरिकी-ईरान संघर्ष के बाद कुल गिरावट 4% से अधिक हो गई है।ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति शेयर से ऊपर बनी है, जो कि अक्टूबर में रेटिंग 70 डॉलर से काफी ज्यादा है। इससे भारत का अहित बिल और बैचलर पर दबाव बढ़ गया। आरबीआई की कार्रवाई और निर्देश:सभी सरकारी बैंक इस दैनिक सीमा को 10 अप्रैल तक लागू करेंगे।बाजार की स्थिति के अनुसार आवश्यकतानुसार यह सीमा कीटनाशक भी हो सकती है।विशेषज्ञ का कहना है कि रुपये में गिरावट जारी रहने का मानक और सख्त कदम उठाया जा सकता है।रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) का उपयोग किया है, जिससे उसकी हस्तक्षेप क्षमता कुछ सीमित हो गई है। भविष्यवाणी और बाजार का प्रभाव:एमके ग्लोबल ग्लोबल की रिपोर्ट के मुताबिक, रुपये में आने वाले समय में सुराजाकर करीब 91 प्रति डॉलर तक जा सकते हैं।10 साल के सरकारी बॉन्ड की उपज सीमा 6.83% से लेकर 6.65% तक हो सकती है।वैश्विक तेल की फार्मास्युटिकल स्थिरांक, तो चालू खाता घाटा (सीएडी) में वृद्धि हो सकती है और इसका असर आर्थिक विकास और अनुपात पर पड़ सकता है। आरबीआई का यह कदम बाजार में सट्टेबाजी और रुपये के परमिट पर नियंत्रण के लिए है। नए नियम के लागू होने के बाद रुपये में स्थिरता आने और विदेशी मुद्रा बाजार में जोखिम कम होने की उम्मीद है।

IPL 2026 के सेमीफाइनल की रेस में चार दावेदार, अंबाती रायडू ने किया खुलासा

नई दिल्ली आईपीएल 2026 का आयोजन 28 मार्च से होने जा रहा है। पहला मुकाबला फाइनल चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला जाएगा। इस बीच क्रिकेट विशेषज्ञ अंबाती रायडू ने चार टीमों के नाम बताए हैं, जो इस सीजन तक पहुंच सकते हैं। रायडू की भविष्यवाणी:उनके अनुसार, आईपीएल 2026 के टिकटों की रेटिंग के आधार पर कट किया जा सकता है: आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर) – पिछले सीजन में 18 साल के सुपरस्टार्स का समापन आईपीएल 2025 का खिताब जीतने वाली टीम के रूप में हुआ। सिल्वर पैटीदार की एडवांस में टीम टाइटल का बचाव करने उतरेगी।मुंबई इंडियंस (मुंबई इंडियंस) – मुंबई में दिवाली मनाने वालों ने आईपीएल 2025 में दूसरे क्वालिफायर तक का सफर तय किया था। टीम के पास रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव, रयान रिकेल्टन, क्विंटन डी कॉक, तिलक वर्मा और धाकड़ बल्लेबाज जैसे हॉलिडे मौजूद हैं। ऑक्शन में शेरफेन राडारफोर्ड की भागीदारी के बाद टीम का प्रदर्शन क्रम और भी मजबूत हुआ। भी ऑनलाइन नजर आ रही है। नेशनल सुपर जायंट्स (लखनऊ सुपर जायंट्स) – ऋषभ पंत की टीम में मिशेल मार्श और एडेन मार्शम जैसे स्टार खिलाड़ी हैं। निकोलस फुलअलोन किसी भी मैच का रुख बदल सकते हैं। इस बार नॉमिनी का रॉकेट हमला भी काफी स्टाम्पधारी दिख रहा है। कोलकाता नाइट राइडर्स (कोलकाता नाइट राइडर्स) – टीम का बेस्ट ऑर्डर आईपीएल 2026 में जबरदस्त नजर आ रही है। टिम सीफर्ट और फिन एलन ने हाल ही में टी20 विश्व कप 2026 में शानदार प्रदर्शन किया। केकर ने इसमें कैमरून ग्रीन को भी शामिल किया है, जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी में दोनों योगदान दे सकते हैं। हालांकि हर्षित राणा और आकाश दीप के आउट होने से एक छोटा सा ड्रॉइंग दिख रहा है। रायडू के अनुसार, आईपीएल 2026 की शुरुआत में इस बार आरसीबी, मुंबई इंडियंस, लखनऊ सुपर जायंट्स और केकेआर के व्यापारी बने रहने की संभावना है। इन टीमों के स्टार खिलाड़ी और फ़्लोरिडा फ़्लोरिडा के खिलाड़ी इस सीज़न में सबसे आगे रह सकते हैं।

कामदा एकादशी 2026: चैत्र महीने की अंतिम एकादशी का व्रत कब और कैसे रखें

नई दिल्ली । सनातन धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। वर्ष भर में आने वाली प्रत्येक एकादशी का अपना विशेष महत्व है। चैत्र माह की पहली एकादशी पापमोचनी बीत चुकी है। अब इस माह की दूसरी एकादशी यानी कामदा एकादशी 2026 रविवार, 29 मार्च को रखी जाएगी। कामदा एकादशी का आध्यात्मिक महत्व कामदा एकादशी का नाम ही यह दर्शाता है कि यह व्रत भक्तों की इच्छाओं और कामनाओं को पूर्ण करने वाला है। हिन्दू शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु की भक्ति और श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। कामदा एकादशी कब रखी जाएगी ज्योतिषीय गणना के अनुसार, चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च सुबह 8:45 बजे से शुरू होकर 29 मार्च सुबह 7:46 बजे तक रहेगी। इसी आधार पर कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च, रविवार को रखा जाएगा। कामदा एकादशी का शुभ मुहूर्त भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष पूजा का मुख्य शुभ मुहूर्त 29 मार्च सुबह 6:00 बजे से 7:30 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना गया है। कामदा एकादशी की पूजा विधि प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें। दिन भर भगवान विष्णु के भजन, कथा और कीर्तन में मन लगाएं। रात्रि में जागरण करें और भक्ति भाव से भगवान का स्मरण करें। अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक व्रत का पारण करें। कामदा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की भक्ति और श्रद्धा से करने से न केवल जीवन की कठिनाइयों का नाश होता है, बल्कि यह मानसिक शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

ईरानी हमलों के बीच कुदरत का कहर बुर्ज खलीफा पर गिरी बिजली

नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव और अनिश्चितता के माहौल के बीच दुबई से एक चौंकाने वाला दृश्य सामने आया है जिसने लोगों को हैरान कर दिया है दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा पर आसमान से तेज बिजली गिरने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है इस घटना ने न केवल स्थानीय लोगों बल्कि दुनियाभर के यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है । बताया जा रहा है कि शुक्रवार रात अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई इसी दौरान आसमान में जोरदार गर्जना के साथ बिजली कड़कने लगी और एक पल ऐसा आया जब बिजली सीधे बुर्ज खलीफा की चोटी पर गिरती हुई दिखाई दी यह पूरा नजारा दूर से रिकॉर्ड किया गया जिसमें अंधेरे आसमान के बीच चमकती बिजली और उसके ठीक नीचे खड़ा विशाल टावर बेहद भयावह लेकिन रोमांचक दृश्य पेश कर रहा था इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर यह तेजी से फैल गया कई यूजर्स ने इसे शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी कुछ लोगों ने इसे कुदरत की ताकत बताया तो कुछ ने इसे डरावना अनुभव कहा हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह का नुकसान या जनहानि नहीं हुई इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और अहम पहलू यह है कि हाल के दिनों में क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।  ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव और अमेरिका के साथ खींचतान के चलते खाड़ी देशों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है इससे पहले भी सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो सामने आए थे जिनमें दुबई के आसपास धमाकों और धुएं के गुबार देखे गए थे जिनको लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बुर्ज खलीफा पर बिजली गिरना कोई असामान्य घटना नहीं है क्योंकि इतनी ऊंची इमारतें अक्सर बिजली को अपनी ओर आकर्षित करती हैं खास बात यह है कि इस इमारत को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है टावर के शीर्ष पर विशेष लाइटनिंग रॉड लगाए गए हैं जो बिजली को सीधे अपनी ओर खींच लेते हैं और उसे सुरक्षित तरीके से जमीन में प्रवाहित कर देते हैं इससे इमारत और आसपास के इलाके को किसी भी संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है दुबई और आसपास के अन्य इलाकों जैसे अबू धाबी और शारजाह में भी इस दौरान मौसम अचानक बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश दर्ज की गई जिससे जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ कुल मिलाकर यह घटना जहां एक ओर प्राकृतिक शक्तियों की ताकत को दर्शाती है वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंजीनियरिंग और सुरक्षा उपायों की सफलता का भी उदाहरण पेश करती है जिसने इतनी बड़ी घटना को बिना किसी नुकसान के टाल दिया

WTO मंच पर भारत की आवाज: पीयूष गोयल ने consensus-based फैसलों की वकालत की

नई दिल्ली कैमरून के युंडे में विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मिनिस्ट्री मीटिंग (MC14) आयोजित की गई, जिसमें भारत ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को लेकर अहम रुख पेश किया। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सदस्यों से सर्वसम्मति (आम सहमति) के आधार पर निर्णय लेने की अपील की और कहा कि यही डब्ल्यूटीओ की मूल स्थापना है। ‘इको बताए गए नियम नहीं, जरूरी जरूरी’दूसरे दिन की बैठक में भारत का नेतृत्व करते हुए पीयूष गोयल ने स्पष्ट कहा कि किसी भी देश को ऐसे नियमों का पालन नहीं करना चाहिए, उन्होंने इस बात पर सहमति जताई। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्वसम्मति-आधारित निर्णय प्रक्रिया ही छात्रों और वैश्विक व्यापार प्रणाली को सुनिश्चित कर सकती है। भरोसा बहाल पर दिया जोरभारत ने स्थिर गतिरोध को समाप्त करने के लिए सदस्य देशों के बीच विश्वास बहाली की आवश्यकता बताई। सरकार का मानना ​​है कि जब तक देश के बीच मजबूत मजबूत नहीं होगा, तब तक प्रभावी निर्णय लेना कठिन रहेगा। बाकी बाधाओं की गहराई से समीक्षा करने की भी मांग की गई। भारत का रुखभारत ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने वाली सभी चर्चाएं शामिल, समावेशी और सदस्य देश के नेतृत्व में होनी चाहिए। भारत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि फ़्लोरिडा स्ट्रक्चर फ़्लोरिडा या ब्रेकडाउन बढ़ा हुआ है, तो वैश्विक व्यापार प्रणाली गंभीर रूप से प्रभावित होगी। पुरानी संस्थागत व्यवस्था की मांगभारत ने उरुग्वे दौर से आए तूफान को दूर करने की भी जरूरत बताई। साथ ही, खाद्य सुरक्षासार्वजनिक स्टॉक होल्डिंग (पीएसएच)स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (एसएसएम)सिक्के से जुड़ा मुद्दा जैसे लंबे समय से ऑटोमोबाइल विषयों को प्राथमिकता देने की बात कही। विवाद तंत्र शास्त्र पर चिंताभारत ने विश्व व्यापार संगठन के विवाद में चमत्कारिक तंत्र की ख़राब स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की। सरकार का कहना है कि यदि यह तंत्र प्रभावी नहीं रहेगा, तो सबसे पुराने दोस्त दोस्त बने रहेंगे और इससे छोटे और ग्रामीण इलाकों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। सामूहिक बैठकों में मजबूत आधार पर चर्चासम्मेलन के दौरान पीयूष गोयल ने अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, जॉर्जिया, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के सम्मेलनों से अलग-अलग मुलाकात की। इन बैठकों में व्यापार को मजबूत करने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई। समयबद्धन सुधारों की आवश्यकतासचिव राजेश अग्रवाल ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की आवश्यकता और स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने पर जोर दिया। भारत की पहली मंजिल पर अलॉटमेंट और ऑटोमोबाइल व्यापार की दिशाभारत का यह रूखा वैश्विक व्यापार में संतुलन, प्लॉट और सामाग्री सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

MP में EMI मॉडल पर सरकार, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए मुआवजा और कर्ज पर गंभीर सवाल

भोपाल: मध्यप्रदेश में छिंदवाड़ा हादसे के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य सरकार की मुआवजा नीति और प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सिंघार ने कहा कि प्रदेश में अब तक कोई समान कंपनसेशन पॉलिसी नहीं बनाई गई। उन्होंने बताया कि सरकार घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन पीड़ित व्यक्ति को विभागों के चक्कर लगाते रहना पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार को एक स्पष्ट और सरल मुआवजा नीति बनानी चाहिए, जिससे किसी दुर्घटना के पीड़ित परिवारों को तुरंत राहत मिल सके। सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सभा में शामिल न होने पर छिंदवाड़ा में अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की चेतावनी देने वाले पत्र जारी किए गए। इसके अलावा उन्होंने लाड़ली बहना योजना की राशि न मिलने की धमकी भी देने का आरोप लगाया। सिंघार ने कहा कि जिन टेंडरों में कमीशन मिलता है, उनके लिए सरकार तुरंत पॉलिसी बना देती है, लेकिन गरीब और पीड़ित परिवारों के लिए कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सरकार ऐसे मामलों के लिए कोई सिंगल विंडो सिस्टम बनाएगी ताकि जनता को लगातार विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ें। एलपीजी गैस और व्यापारियों के मुद्दे पर भी सिंघार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने एलपीजी गैस की अल्टरनेटिव पॉलिसी नहीं बताई और न ही यह स्पष्ट किया कि रिजर्व कितना है। इसके अलावा होटल व्यवसायियों और छोटे दुकानदारों के भविष्य और उनके व्यवसाय सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने सरकार की नीति पर सवाल खड़ा किया। सिंघार ने पिछले पांच वर्षों के आंकड़े पेश किए और बताया कि प्रदेश में 65 हजार से ज्यादा दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 14,791 लोगों की मौत हुई। इस मामले में मध्यप्रदेश देश में दूसरे नंबर पर है। उनके अनुसार यह स्थिति सीधे तौर पर सरकार की विफलता को दर्शाती है। नेता प्रतिपक्ष ने मध्यप्रदेश सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कर्ज लेने में माहिर हैं और प्रदेश को “EMI मॉडल” पर चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भाजपा सरकार ने विकास के नाम पर लाखों करोड़ का कर्ज लिया, लेकिन सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में हालात जस के तस हैं। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष खत्म होने तक चौथी बार 2,500 करोड़ का कर्ज लिया गया और इस साल कुल कर्ज 91,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। सिंघार ने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने तय कर लिया है कि प्रदेश को कर्ज में डुबोकर ही छोड़ेगी। सिंघार ने कहा कि जनता टैक्स पर टैक्स दे रही है, महंगाई झेल रही है, लेकिन सरकार बिना किसी रोडमैप और पारदर्शिता के कर्ज ले रही है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कर्ज किस योजना में लगा और इसका क्या परिणाम निकला। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को इसका जवाब देना होगा। सिंघार के अनुसार यह मुद्दा सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेताया कि अब गरीबों और पीड़ित परिवारों के हितों को प्राथमिकता दी जाए और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

इंदौरः महू में दर्दनाक हादसा, कार में आग लगने से 4 वर्षीय बच्चे की जलकर मौत

इंदौर । जिले के महू क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक दर्दनाक हादसे में चार वर्षीय बच्चे की कार में जलकर मौत हो गई। घटना सिमरोल थाना क्षेत्र की है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, चिराग नामक बच्चा अपने पिता संजय बढ़िया के साथ इंदौर-खंडवा रोड स्थित एक कार्यस्थल पर गया था। संजय, जो पेशे से मैकेनिक हैं, कार के बाहर काम में व्यस्त थे, जबकि बच्चा वाहन के अंदर बैठा हुआ था। इसी दौरान अचानक कार से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि पूरी कार कुछ ही देर में जलकर खाक हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन लपटों की तीव्रता के कारण वे सफल नहीं हो सके। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी। आग बुझाने के बाद कार के अंदर से बच्चे का जला हुआ शव बरामद किया गया। थाना प्रभारी कुलदीप खत्री के अनुसार, टीम के पहुंचने से पहले ही बच्चे ने दम तोड़ दिया था। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए महू सिविल अस्पताल भेजा गया है। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।