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भोपाल को ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की तैयारी: 4 बड़ी कॉलोनियों में 100% PNG कनेक्शन पर फोकस, चार इमली भी योजना में शामिल

मध्‍य प्रदेश । राजधानी भोपाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर जारी चुनौतियों के बीच प्रशासन ने शहर को धीरे-धीरे ‘सिलेंडर फ्री’ बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। खाद्य विभाग और गैस वितरण एजेंसियों ने उन क्षेत्रों में पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन को बढ़ावा देने की योजना बनाई है, जहां गैस पाइपलाइन का नेटवर्क पहले से उपलब्ध है या तेजी से विस्तार किया जा रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, शहर में थिंक गैस कंपनी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य किया जा रहा है। होशंगाबाद रोड, बावड़ियाकलां, सलैया, अवधपुरी, अयोध्या बायपास और साकेत नगर जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में घरों तक पीएनजी कनेक्शन पहुंच चुके हैं। अब प्रशासन का लक्ष्य इन क्षेत्रों में अधिकतम परिवारों को पाइप्ड गैस नेटवर्क से जोड़ना है। योजना के तहत फिलहाल चार प्रमुख आवासीय परियोजनाओं और कॉलोनियों पर विशेष फोकस किया गया है। इनमें केराल केनसिप, सौम्या पार्कलैंड, सागर लेक व्यू होम्स और आकृति ग्रीन शामिल हैं। रणनीति यह है कि इन क्षेत्रों में 100 प्रतिशत कनेक्शन सुनिश्चित करने के बाद अगले चरण में अन्य कॉलोनियों को शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि चरणबद्ध तरीके से कार्य करने से गैस नेटवर्क का विस्तार अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और वीआईपी इलाकों में शामिल चार इमली और 74 बंगला क्षेत्रों में भी गैस पाइपलाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत लोगों के सरकारी आवास स्थित हैं। अधिकांश हिस्सों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूरा होने के बाद यहां भी कनेक्शन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रशासन का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश में पिछले कुछ महीनों से एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मांग और आपूर्ति के बीच अंतर के कारण कई उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि पीएनजी नेटवर्क के विस्तार से घरेलू गैस की आपूर्ति अधिक स्थिर और सुविधाजनक हो सकेगी। खाद्य विभाग के अनुसार, शहर की 172 से अधिक कॉलोनियों के सामने गैस पाइपलाइन नेटवर्क पहुंच चुका है। कई क्षेत्रों से लोग स्वयं भी पीएनजी कनेक्शन के लिए आवेदन कर रहे हैं। भविष्य में पुराने भोपाल और अन्य घनी आबादी वाले इलाकों तक भी इस नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है। सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइन के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पीएनजी लाइन उपलब्ध होगी, वहां निर्धारित समयसीमा के भीतर कनेक्शन लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। केंद्र सरकार ने भी गैस इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार को गति देने के लिए कई प्रक्रियाओं को सरल बनाया है, जिससे पाइपलाइन नेटवर्क तेजी से विकसित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी व्यवस्था से उपभोक्ताओं को सिलेंडर बुकिंग, डिलीवरी और गैस खत्म होने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। साथ ही यह व्यवस्था दीर्घकालिक रूप से अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प के रूप में भी देखी जा रही है। हालांकि इसके साथ उपभोक्ताओं के सामने पारंपरिक एलपीजी और पीएनजी के बीच विकल्प चुनने का सवाल भी महत्वपूर्ण बना रहेगा।

पश्चिम एशिया संकट गहराया तो महंगा हो सकता है तेल, सप्लाई पर दबाव के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया नया खतरा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बिगड़ते संबंधों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल आपूर्ति को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा तनाव और बढ़ता है तथा स्थिति व्यापक संघर्ष में बदलती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों, ऊर्जा कंपनियों और आयातक देशों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। तेल की कीमतों में हालिया तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार संभावित आपूर्ति बाधाओं को लेकर सतर्क हो चुका है। यदि हालात और बिगड़ते हैं तो ऊर्जा लागत में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र विश्व तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या परिवहन व्यवधान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है। तेल उत्पादन और निर्यात में बाधा आने की आशंका के कारण बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। यही वजह है कि निवेशक लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। माना जा रहा है कि क्षेत्र में तेल उत्पादन और परिवहन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मार्ग दबाव में हैं। यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे कीमतों में तेजी आना स्वाभाविक माना जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों का अनुमान है कि गंभीर संकट की स्थिति में कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकता है। हालांकि फिलहाल कुछ ऐसे कारक भी हैं जो बाजार को पूरी तरह अस्थिर होने से बचा रहे हैं। प्रमुख देशों के रणनीतिक तेल भंडार, वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग और कुछ बड़े उपभोक्ता देशों द्वारा आयात में संतुलन बनाए रखने के प्रयासों से बाजार को अस्थायी राहत मिली हुई है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यदि भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ते हैं तो ये उपाय लंबे समय तक पर्याप्त साबित नहीं होंगे। ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहता। तेल की कीमतों में तेजी का सीधा प्रभाव परिवहन, विनिर्माण, विमानन और उपभोक्ता वस्तुओं की लागत पर पड़ता है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है और कई देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है। विशेष रूप से ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन सकती है। पिछले कुछ महीनों में वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़े प्रभाव ने बाजार को पहले ही संवेदनशील बना दिया है। आपूर्ति में कमी और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है। निवेशकों को आशंका है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और तनाव कम होता है तो बाजार को राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर यदि टकराव बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार के साथ-साथ विश्व अर्थव्यवस्था पर भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर टिकी हुई हैं।

एमपी में सड़क हादसों का भयावह आंकड़ा: एक साल में 1 लाख से ज्यादा दुर्घटनाएं, हर 10 में से 6 पीड़ित युवा

मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में सड़क हादसों का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। डायल-108 एंबुलेंस सेवा की ताजा रिपोर्ट ने प्रदेश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में प्रदेशभर में 1,03,294 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि इन हादसों का सबसे ज्यादा शिकार युवा वर्ग हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक 16 से 30 वर्ष आयु वर्ग के लोग कुल दुर्घटनाओं में 61 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहे। इसके बाद 31 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 24 प्रतिशत लोग हादसों का शिकार बने। वहीं 46 से 60 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत, 0 से 15 वर्ष आयु वर्ग की 4 प्रतिशत और 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की 3 प्रतिशत दर्ज की गई। जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो सागर जिला सड़क हादसों के मामले में प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां एक वर्ष के दौरान 6,061 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इसके बाद इंदौर में 4,853 और भोपाल में 4,546 सड़क हादसे सामने आए। इसके अलावा छिंदवाड़ा, जबलपुर, धार और रीवा जैसे जिलों में भी तीन हजार से अधिक दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो बढ़ती सड़क असुरक्षा की ओर संकेत करती हैं। महीनेवार विश्लेषण में मई 2025 सबसे चिंताजनक महीना साबित हुआ, जब 12,047 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। जून और जुलाई में दुर्घटनाओं की संख्या में कुछ कमी देखी गई, लेकिन अगस्त के बाद फिर से बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया। त्योहारों के मौसम में अक्टूबर और नवंबर के दौरान भी हादसों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों और अधिकारियों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार हैं। इनमें ओवर स्पीडिंग, शराब पीकर वाहन चलाना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना, ट्रैफिक नियमों की अनदेखी, सड़क के ब्लैक स्पॉट, गड्ढे, क्षमता से अधिक सवारी बैठाना तथा लापरवाही और स्टंटबाजी प्रमुख हैं। डायल-108 एंबुलेंस सेवा के वरिष्ठ प्रबंधक तरुण सिंह परिहार के अनुसार, दुर्घटनाओं के बाद गंभीर चोटों का बड़ा कारण हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग न करना है। उन्होंने लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाने की अपील की है। वहीं भोपाल आरटीओ जितेंद्र शर्मा का कहना है कि सड़क हादसों की सबसे बड़ी वजह ओवर स्पीडिंग है। उनके अनुसार यदि वाहन चालक निर्धारित गति सीमा का पालन करें तो सड़क दुर्घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। हाल के दिनों में भोपाल में हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने भी लोगों का ध्यान सड़क सुरक्षा की ओर आकर्षित किया है। पुलिस के अनुसार तेज रफ्तार बाइक के डिवाइडर से टकराने की घटना में दो मेडिकल छात्रों की मौत हो गई थी। यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि सड़क पर थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल सख्त कानून ही नहीं, बल्कि जनजागरूकता, बेहतर सड़क ढांचा और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार भी उतना ही जरूरी है। बढ़ते हादसों के बीच सड़क सुरक्षा अब प्रदेश के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है।

शेयरधारकों को नकदी लौटाने की तैयारी, लेकिन बाजार का भरोसा कमजोर; विप्रो के सामने आय वृद्धि और मुनाफे की चुनौती बरकरार

नई दिल्ली । देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल विप्रो इन दिनों निवेशकों और बाजार विश्लेषकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। कंपनी ने 15,000 करोड़ रुपये के बड़े शेयर बायबैक कार्यक्रम की शुरुआत की है, लेकिन इसके बावजूद उसके शेयरों पर दबाव कम होता नजर नहीं आ रहा। बायबैक शुरू होने के साथ ही कंपनी के शेयर में गिरावट दर्ज की गई और यह कई वर्षों के निचले स्तर तक पहुंच गया। बाजार में हालिया कमजोरी के बीच विप्रो का प्रदर्शन व्यापक सूचकांकों की तुलना में अधिक कमजोर दिखाई दिया है। पिछले कुछ कारोबारी सत्रों में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी है। वर्ष 2026 में अब तक कंपनी के शेयर मूल्य में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जा चुकी है, जिससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा है। कंपनी ने शेयरधारकों को अतिरिक्त नकदी लौटाने के उद्देश्य से बायबैक योजना लागू की है। इसके तहत बड़ी संख्या में शेयर वापस खरीदे जाएंगे। बायबैक का उद्देश्य बाजार में उपलब्ध कुल शेयरों की संख्या को कम करना और शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन करना माना जाता है। आमतौर पर ऐसी योजनाओं से प्रति शेयर आय और अन्य वित्तीय संकेतकों में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। कंपनी का कहना है कि उसके पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और वह पूंजी आवंटन की रणनीति के तहत निवेशकों को लाभ पहुंचाना चाहती है। बायबैक में छोटे निवेशकों के लिए भी एक हिस्सा सुरक्षित रखा गया है, जिससे खुदरा निवेशकों को भागीदारी का अवसर मिल सके। हालांकि बाजार की प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि निवेशक फिलहाल कंपनी के भविष्य के कारोबार पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में कंपनी को कई परिचालन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बड़े ग्राहकों से मिलने वाले कारोबार में अपेक्षित वृद्धि नहीं होने और कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लागू होने में देरी जैसी परिस्थितियां राजस्व वृद्धि पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़ी मांग में कमजोरी भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती है। आईटी उद्योग इस समय वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में बढ़ते निवेश के कारण कंपनियों को नए अवसर तो मिल रहे हैं, लेकिन साथ ही प्रतिस्पर्धा और लागत का दबाव भी बढ़ रहा है। विप्रो भी इसी चुनौतीपूर्ण माहौल में अपनी विकास रणनीति को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े सौदों का वास्तविक वित्तीय लाभ मिलने में समय लग सकता है। ऐसे में निकट अवधि में आय वृद्धि सीमित रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही कर्मचारियों के वेतन, नए प्रोजेक्ट्स की लागत और उभरती तकनीकों में निवेश से लाभप्रदता पर भी असर पड़ सकता है। इसके बावजूद कंपनी की मजबूत वैश्विक उपस्थिति, विविध ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं में बढ़ता फोकस भविष्य के लिए सकारात्मक पहलू माने जा रहे हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि बायबैक कार्यक्रम के बाद कंपनी अपने कारोबारी प्रदर्शन और विकास योजनाओं को किस तरह आगे बढ़ाती है। आने वाली तिमाहियों के वित्तीय नतीजे निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संकेतक साबित हो सकते हैं।

भारत में AI क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार, TCS और Anthropic की साझेदारी से हजारों कर्मचारियों को मिलेगा उन्नत AI प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच देश की प्रमुख आईटी कंपनी टीसीएस ने एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम उठाया है। कंपनी ने एआई क्षेत्र की अग्रणी संस्था एंथ्रोपिक के साथ साझेदारी कर अपने डिजिटल परिवर्तन अभियान को नई दिशा देने का फैसला किया है। इस सहयोग का उद्देश्य विभिन्न उद्योगों में एआई आधारित समाधानों के विकास को गति देना और ग्राहकों को उन्नत तकनीकी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस साझेदारी के तहत टीसीएस अपने लगभग 50 हजार कर्मचारियों को Claude AI प्लेटफॉर्म तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। इस पहल का लाभ इंजीनियरिंग, वित्त, कानूनी सेवाओं, विपणन, बिक्री और अन्य महत्वपूर्ण विभागों में कार्यरत पेशेवरों को मिलेगा। कंपनी का मानना है कि कर्मचारियों को अत्याधुनिक एआई उपकरणों से जोड़ने से उत्पादकता बढ़ेगी और जटिल कार्यों को अधिक दक्षता के साथ पूरा किया जा सकेगा। टीसीएस इस सहयोग के अंतर्गत एक विशेष विशेषज्ञ टीम का गठन भी करेगी, जो Claude एआई मॉडल पर आधारित नए तकनीकी समाधान विकसित करेगी। कंपनी को इन एआई क्षमताओं और टूल्स तक शुरुआती पहुंच मिलने से वह अपने ग्राहकों के लिए तेजी से नवाचार करने की स्थिति में होगी। इससे एंटरप्राइज ग्राहकों को अत्याधुनिक एआई तकनीकों का लाभ अपेक्षाकृत कम समय में मिल सकेगा। दोनों कंपनियां मिलकर बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी प्रशासन, जीवन विज्ञान, विमानन, दूरसंचार और चिकित्सा प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करेंगी। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा जहां डेटा सुरक्षा, विश्वसनीयता और नियामकीय अनुपालन सर्वोच्च प्राथमिकता रखते हैं। ऐसे क्षेत्रों में एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना इस साझेदारी का प्रमुख लक्ष्य माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को एआई टूल्स से जोड़ना भविष्य की कार्यशैली को बदल सकता है। इससे न केवल कर्मचारियों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि संगठन के भीतर नवाचार और समस्या समाधान की क्षमता भी मजबूत होगी। आधुनिक व्यवसायों में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह कदम उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। यह साझेदारी ग्राहकों के लिए भी कई नए अवसर लेकर आएगी। कंपनियां ऐसे एआई समाधान विकसित करेंगी जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पुराने तकनीकी ढांचे को आधुनिक बनाने और ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इससे डिजिटल परिवर्तन परियोजनाओं की गति बढ़ने और परिचालन लागत को कम करने की संभावना भी जताई जा रही है। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार के बीच यह सहयोग भारत के तकनीकी क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वैश्विक स्तर पर एआई अपनाने की बढ़ती मांग के बीच भारतीय आईटी कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही हैं। टीसीएस और एंथ्रोपिक की यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई आधारित समाधान व्यवसायों की कार्यप्रणाली को व्यापक रूप से प्रभावित करेंगे। ऐसे में बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, उन्नत प्लेटफॉर्म तक पहुंच और उद्योग-विशिष्ट समाधानों का विकास कंपनियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार कर सकता है।

TMC में बड़ी टूट के संकेत? बागी सांसदों की भूपेंद्र यादव से मुलाकात, 19 सांसदों की सूची से मचा सियासी हड़कंप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिख रही है। पार्टी में असंतोष के बीच कई बागी नेताओं ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से उनके आवास पर मुलाकात की। इस बैठक में टीएमसी के कुछ बागी सांसद भी मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार, इस बैठक में प्रतिमा मंडल, माला रॉय, मिताली बाग और सयानी घोष शामिल रहीं। बताया जा रहा है कि यह बैठक करीब एक घंटे तक चली, जिसमें राजनीतिक हालात और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के भीतर असंतोष केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब कई सांसद भी बागी रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि 19 सांसदों की एक सूची सामने आई है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख नाम भी शामिल हैं। बताया यह भी जा रहा है कि इन सांसदों ने अपने हस्ताक्षर के साथ एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। इस सूची के सामने आने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसद हैं। ऐसे में यदि 19 सांसदों के बागी होने का दावा सही साबित होता है, तो यह पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक संकट माना जा रहा है। उधर, कोलकाता में पार्टी के बागी विधायक और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बने ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 64 विधायक उनके समर्थन में हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी विधायक जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष को अपना पत्र सौंपेंगे और एक अलग राजनीतिक पहचान के साथ काम करेंगे। ऋतब्रत बनर्जी, जिन्हें 3 जून को टीएमसी से निष्कासित किया गया था, को विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दी है। उनके अनुसार, उनका गुट अब पश्चिम बंगाल के हितों को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करेगा। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दावों ने राज्य की राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।

Gold ETF से निवेशकों ने निकाले ₹725 करोड़, मुनाफावसूली के बीच Silver ETF में बढ़ा निवेश

नई दिल्ली। कुछ महीने पहले तक सोना और चांदी निवेशकों की पहली पसंद बने हुए थे। तेजी से बढ़ती कीमतों और शानदार रिटर्न के चलते बड़ी संख्या में निवेशकों ने गोल्ड और सिल्वर ETF में पैसा लगाया था। सोशल मीडिया से लेकर वित्तीय सलाहकारों तक, हर जगह इन निवेश विकल्पों की चर्चा थी। हालांकि अब तस्वीर बदलती नजर आ रही है। सोने और चांदी की कीमतों में हालिया नरमी के बीच निवेशकों का उत्साह भी कम हुआ है। गोल्ड ETF में निवेश घटने लगा है और मई 2026 में इस श्रेणी से भारी निकासी दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर सिल्वर ETF में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। गोल्ड ETF से ₹725 करोड़ की निकासीभारतीय म्यूचुअल फंड संघ (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में गोल्ड ETF से ₹725 करोड़ की शुद्ध निकासी हुई। इसके विपरीत अप्रैल में इस श्रेणी में ₹3,040 करोड़ का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया था। लगभग एक साल तक लगातार निवेश आकर्षित करने के बाद गोल्ड ETF में यह पहला बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि निकासी के बावजूद गोल्ड ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मजबूत बना हुआ है। पिछले वर्ष की तुलना में इसका आकार तीन गुना बढ़कर करीब ₹1.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जो निवेशकों के बीच सोने की दीर्घकालिक मांग को दर्शाता है। क्यों बढ़ी मुनाफावसूली?बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने में आई इस कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को लेकर बदली उम्मीदें शामिल हैं। INVasset PMS के बिजनेस हेड हर्षल दासानी के अनुसार, बाजार अब महंगाई से बचाव के लिए सोना खरीदने की रणनीति से हटकर ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों के आधार पर निवेश का मूल्यांकन कर रहा है। अमेरिका के मजबूत रोजगार आंकड़ों ने इस संभावना को कमजोर किया है कि फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में आक्रामक दर कटौती करेगा। उन्होंने कहा कि सोना कोई नियमित आय या रिटर्न नहीं देता। ऐसे में जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत होते हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है। इसके अलावा, हाल के महीनों में सोने की कीमतों में तेज उछाल के बाद वैश्विक स्तर पर निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली भी बढ़ी है। लॉन्ग टर्म में सोना अब भी अहमविशेषज्ञों का मानना है कि अल्पकालिक दबाव के बावजूद पोर्टफोलियो में जोखिम संतुलन और सुरक्षा के लिए सोना अब भी महत्वपूर्ण निवेश विकल्प बना हुआ है। हालांकि हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा लाभ बुक करने का दौर जारी है। सिल्वर ETF में बनी रही चमकजहां गोल्ड ETF से निवेशकों ने पैसा निकाला, वहीं सिल्वर ETF में मजबूत निवेश देखने को मिला। मई 2026 के दौरान सिल्वर ETF में ₹2,133 करोड़ का निवेश दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद और निवेशकों की बढ़ती रुचि इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। दासानी के मुताबिक, सौर ऊर्जा, विद्युतीकरण और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां चांदी की दीर्घकालिक मांग को समर्थन दे रही हैं। हालांकि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों की दिशा भी अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व की नीतियों पर निर्भर करेगी। नोट: सोना या चांदी समेत किसी भी निवेश विकल्प में पैसा लगाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें।

'झिलमिल सितारों का आंगन होगा' गीत के फिल्मांकन के समय कगार पर थी दो बड़े सितारों की जान, धर्मेंद्र की सूझबूझ से बची अभिनेत्री राखी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर की यादें जितनी दिलचस्प हैं, उतनी ही रोमांचित करने वाली उनकी शूटिंग से जुड़ी कहानियां भी हैं। सत्तर के दशक में तकनीकों और विशेष प्रभावों की कमी के कारण अक्सर निर्देशकों को वास्तविक लोकेशंस पर जाकर ही जोखिम भरे दृश्य फिल्माने पड़ते थे। ऐसा ही एक अविस्मरणीय और डरा देने वाला वाकया अभिनेता धर्मेंद्र और दिग्गज अभिनेत्री राखी के साथ घटित हुआ था। दोनों कलाकार अपनी एक बेहद मशहूर फिल्म के रोमांटिक गीत की शूटिंग कर रहे थे, जहां अचानक प्रकृति के एक अनपेक्षित खतरे से उनका आमना-सामना हो गया और सेट पर मौजूद सभी लोगों की जान हलक में आ गई थी। यह पूरी घटना निर्देशक राजश्री प्रोडक्शंस की साल 1970 में रिलीज हुई सुपरहिट फिल्म जीवन मृत्यु के फिल्मांकन के समय की है। इस फिल्म का एक बेहद लोकप्रिय और कालजयी गीत झिलमिल सितारों का आंगन होगा दर्शकों के बीच आज भी उतना ही पसंद किया जाता है। आनंद बक्शी के लिखे और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के मधुर संगीत से सजे इस गीत को महान गायक मोहम्मद रफी और स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। इस बेहद शांत और रोमांटिक मिजाज के गाने को एक खूबसूरत झील के बीच नाव के ऊपर फिल्माया जा रहा था, जहां दोनों मुख्य कलाकार स्क्रिप्ट के अनुसार एक-दूसरे के आकर्षण में पूरी तरह डूबे हुए थे। शेड्यूल के मुताबिक जब कैमरे रोल हो रहे थे और धर्मेंद्र व राखी नाव पर सवार होकर रोमांटिक शॉट दे रहे थे, तभी अचानक पानी में कुछ संदिग्ध हलचल शुरू हुई। किनारे पर खड़े क्रू मेंबर्स और कैमरे के पीछे मौजूद टीम ने जब ध्यान से देखा, तो उनके होश उड़ गए क्योंकि एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ सीधे कलाकारों की छोटी सी नाव की तरफ बढ़ रहा था। जंगली जानवर को इतने करीब देखकर सेट पर हड़कंप मच गया और चीख-पुकार मचने की स्थिति पैदा हो गई। नाव बीच पानी में होने के कारण दोनों ही स्टार्स बेहद असुरक्षित स्थिति में थे और जरा सी चूक एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। ऐसी विपरीत और जानलेवा परिस्थिति में अभिनेता धर्मेंद्र ने गजब के साहस और सूझबूझ का परिचय दिया। मगरमच्छ को नाव के बिल्कुल करीब पाकर उन्होंने घबराने के बजाय सबसे पहले अभिनेत्री राखी को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उन्होंने राखी को पकड़कर धीरे से नाव के उस कोने से हटाया जिसके पास मगरमच्छ मंडरा रहा था और उन्हें सुरक्षित छोर पर ले आए। हालांकि इस भयानक घटना से दोनों ही कलाकार अंदर से काफी डर गए थे, लेकिन पेशेवर प्रतिबद्धता दिखाते हुए उन्होंने स्थिति सामान्य होने के बाद अपना काम जारी रखा और उस खूबसूरत गाने की शूटिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया। उल्लेखनीय है कि इसी फिल्म जीवन मृत्यु के जरिए अभिनेत्री राखी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा था और धर्मेंद्र के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। बाद में इस जोड़ी ने ब्लैकमेल और क्षत्रिय जैसी कई अन्य यादगार फिल्मों में भी साथ काम किया, जिनके गाने जैसे पल पल दिल के पास आज भी एवरग्रीन माने जाते हैं। धर्मेंद्र ने खुद कई सालों बाद एक टेलीविजन रियलिटी शो के मंच पर इस मगरमच्छ वाली घटना का जिक्र करते हुए पुरानी यादों को ताजा किया था। यह किस्सा साबित करता है कि परदे पर दिखने वाले खूबसूरत नजारों के पीछे कलाकारों को कितनी कठिन और खतरनाक परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था।

ट्रंप के दामाद की लग्जरी परियोजना पर अल्बानिया में विरोध, हजारों लोग सड़कों पर उतरे

नई दिल्ली। अल्बानिया में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर की प्रस्तावित लग्जरी रिजॉर्ट परियोजना को लेकर विरोध तेज हो गया है। राजधानी तिराना में बुधवार को हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह परियोजना पर्यावरण और राष्ट्रीय हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। करीब 5 अरब यूरो की लागत से प्रस्तावित यह परियोजना ज़्वेर्नेक (Zvernec) क्षेत्र के पास विकसित की जानी है। यह इलाका एक संरक्षित वेटलैंड के नजदीक स्थित है, जहां फ्लेमिंगो, सील और समुद्री कछुओं समेत कई दुर्लभ जीव-जंतु पाए जाते हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर पर्यटन परियोजना शुरू होने से इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर असर पड़ सकता है। विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों ने “अल्बानिया इज नॉट फॉर सेल” और “न्यू अल्बानिया” जैसे नारे लगाए। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एदी रामा के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और शहर के प्रमुख बुलेवार्ड पर लंबी रैली निकाली। प्रदर्शन में शामिल लिआंड लाकरोरी ने कहा कि ज़्वेर्नेक परियोजना को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। उनके अनुसार यह मामला पिछले 35 वर्षों से चली आ रही अपारदर्शी व्यवस्था का प्रतीक बन गया है और अब जनता बदलाव चाहती है। यह विवाद प्रधानमंत्री एदी रामा के लिए भी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है। वर्ष 2013 से सत्ता में मौजूद रामा की सरकार पर विपक्ष और आलोचक भ्रष्टाचार को प्रभावी ढंग से नियंत्रित न कर पाने तथा स्वास्थ्य सेवाओं जैसी बुनियादी सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं करने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री रामा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि परियोजना आगे बढ़ेगी और इसके क्रियान्वयन में सभी नियमों का पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। रामा ने विशेष अभियोजन कार्यालय SPAK का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संस्था ने हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच शुरू की है। इसके बावजूद सरकार के प्रति लोगों का अविश्वास कम नहीं हुआ है। इसी वर्ष भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उपप्रधानमंत्री बेलिंडा बल्लुकु के खिलाफ भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। बाद में उन्हें पद से हटा दिया गया, लेकिन जनता की नाराजगी बनी हुई है। प्रदर्शनकारी फैबियो ब्राकाज का कहना है कि देश लंबे समय से एक जैसी राजनीति देख रहा है और अब नागरिक बेहतर प्रशासन तथा अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि जैरेड कुशनर और उनकी पत्नी इवांका ट्रंप इस परियोजना के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। कुछ वर्ष पहले दोनों ने नौका यात्रा के दौरान अल्बानिया का दौरा किया था, जिसके बाद यहां निवेश की योजना बनाई गई। पिछले महीने निर्माण स्थल के आसपास बाड़ लगाए जाने के बाद स्थानीय लोगों का विरोध और तेज हो गया। बढ़ते दबाव के चलते बाड़ हटानी पड़ी, लेकिन परियोजना को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

एमपी में प्री-मानसून का असर तेज, 34 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी, 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। बुधवार को 20 से अधिक जिलों में मौसम ने करवट ली, जबकि गुरुवार के लिए मौसम विभाग ने ग्वालियर और जबलपुर संभाग सहित 34 जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान हवाएं 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती हैं। मौसम विभाग का कहना है कि अगले सप्ताह मानसून के सक्रिय होने तक प्रदेश में प्री-मानसून का प्रभाव बना रहेगा। गुरुवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना भी जताई गई है। हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।हालांकि कई क्षेत्रों में आंधी और बारिश की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन गर्मी का असर अभी भी पूरी तरह कम नहीं हुआ है। बुधवार को खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम, ट्रफ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन के कारण मौसम में लगातार बदलाव हो रहा है। इसी के चलते 13 जून को ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया गया है। इन जिलों में आंधी-बारिश की संभावनागुरुवार को ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में आंधी और बारिश होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में हवा की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है। इन इलाकों में गर्मी का असर रहेगाइंदौर, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, भोपाल, विदिशा, सीहोर और राजगढ़ जिलों में गर्मी का असर बना रह सकता है। 6 जिलों में ओलावृष्टि का अलर्टमौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में गुरुवार को ओले गिरने की संभावना जताई है। वहीं 13 जून को ग्वालियर, भिंड, दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर और दमोह जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।