मोहम्मद रफी के एक एवरग्रीन गाने ने पलट दी थी हिंदी सिनेमा की बाजी, धर्मेंद्र को मिला नया मुकाम तो फीका पड़ा राजेश खन्ना का जादू

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के सुनहरे दौर में संगीतकारों, गायकों और अभिनेताओं के बीच की आपसी केमिस्ट्री ने कई बड़े सितारों के करियर की दिशा तय की है। सत्तर के दशक की शुरुआत में जब बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना बैक टू बैक 15 ब्लॉकबस्टर फिल्में देकर सफलता के शिखर पर थे, तब उनकी फिल्मों में पार्श्वगायन के लिए किशोर कुमार पहली पसंद बन चुके थे। अधिकांश बड़े संगीत निर्देशकों द्वारा किशोर दा को प्राथमिकता दिए जाने के कारण, उस दौर के दिग्गज गायक मोहम्मद रफी का करियर कुछ समय के लिए डगमगाने लगा था। लेकिन साल 1973 में आई एक फिल्म और उसके एक सदाबहार गीत ने फिल्म इंडस्ट्री के पूरे परिदृश्य को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। यह ऐतिहासिक बदलाव अभिनेता धर्मेंद्र की मुख्य भूमिका वाली फिल्म लोफर के माध्यम से देखने को मिला था। इस फिल्म में संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के निर्देशन में मोहम्मद रफी ने आज मौसम बड़ा बेईमान है गीत को अपनी जादुई आवाज दी थी। धर्मेंद्र और अभिनेत्री मुमताज पर फिल्माया गया यह रोमांटिक गीत रिलीज होते ही देश भर में एक बड़ा कल्ट क्लासिक साबित हुआ। इस एकल गीत की लोकप्रियता ने सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और यह उस दौर से लेकर आज तक भारतीय सिनेमा के सबसे पसंदीदा सदाबहार रोमांटिक गानों की सूची में शीर्ष पर बना हुआ है। इस गाने की अभूतपूर्व सफलता ने मोहम्मद रफी के करियर को एक नई और बेहद मजबूत संजीवनी प्रदान करने का काम किया। इस जबरदस्त वापसी के बाद फिल्म जगत के तमाम दिग्गज संगीतकारों ने एक बार फिर रफी साहब की तरफ रुख करना शुरू कर दिया और उन्हें बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए साइन किया जाने लगा। वहीं दूसरी ओर, इस फिल्म की बड़ी कामयाबी ने अभिनेता धर्मेंद्र के पैर भी इंडस्ट्री में मजबूती से जमा दिए। लोफर की सफलता के बाद धर्मेंद्र को बड़े बैनर्स की फिल्मों के ढेरों ऑफर्स मिलने लगे, जिससे हिंदी सिनेमा में एक्शन और रोमांस का एक नया दौर शुरू हुआ। इस संगीत सफर में आए बदलाव का सीधा असर तत्कालीन सुपरस्टार राजेश खन्ना के करियर पर भी देखने को मिला। इसी कालखंड के दौरान फिल्म इंडस्ट्री का झुकाव राजेश खन्ना के रोमांटिक अंदाज से हटकर धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की एंग्री यंग मैन और एक्शन इमेज की तरफ बढ़ने लगा था। साल 1975 में रिलीज हुई निर्देशक रमेश सिप्पी की ऐतिहासिक फिल्म शोले ने इस बदलाव पर अंतिम मुहर लगा दी थी। शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की जोड़ी ने जो इतिहास रचा, उसने राजेश खन्ना के स्टारडम के दौर को काफी पीछे धकेल दिया और उनके करियर का ग्राफ तेजी से नीचे आने लगा। सिनेमाई विश्लेषकों के अनुसार, लोफर फिल्म का वह एक गाना महज एक हिट ट्रैक नहीं था, बल्कि वह बॉलीवुड में दो बड़े युगों के बीच का टर्निंग पॉइंट था। उसने जहां एक तरफ भारतीय संगीत के सबसे सुरीले गायक मोहम्मद रफी को उनका खोया हुआ सिंहासन वापस दिलाया, वहीं दूसरी तरफ धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए आगे का रास्ता साफ किया। यही कारण है कि आज भी जब हिंदी सिनेमा के सबसे प्रभावशाली गानों और गानों से बदलने वाली स्टार्स की किस्मत का जिक्र होता है, तो मोहम्मद रफी और धर्मेंद्र के इस जुगलबंदी को सबसे पहले याद किया जाता है।
दांबुला ट्राई-सीरीज में अफगानिस्तान के खिलाफ मैदान पर उतरेगी इंडिया-ए, वैभव सूर्यवंशी के आईपीएल वाले तूफानी अंदाज का फैंस को इंतजार

नई दिल्ली। श्रीलंका की धरती पर आयोजित की जा रही ए-टीमों की त्रिकोणीय एकदिवसीय सीरीज का रोमांच अपने चरम पर पहुंच गया है। प्रतियोगिता के महत्वपूर्ण मुकाबले में आज इंडिया-ए की टीम का सामना अफगानिस्तान-ए के साथ होने जा रहा है। इस मुकाबले को लेकर क्रिकेट जगत में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है, क्योंकि भारतीय टीम में घरेलू और आईपीएल स्तर के कई उभरते हुए सितारे शामिल हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की चयन समिति ने इस दौरे पर युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में खुद को परखने का एक बड़ा मंच प्रदान किया है, जहां सभी की निगाहें भारत की नई ओपनिंग जोड़ी और टीम के रणनीतिक प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं। मैच के मुख्य आकर्षण भारत के 15 वर्षीय युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी बने हुए हैं, जिन्होंने हाल ही में समाप्त हुए इंडियन प्रीमियर लीग के 2026 सीजन में अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया था। राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए इस बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज ने पूरे टूर्नामेंट में अपनी आक्रामक शैली का लोहा मनवाया था। उन्होंने सीजन के 16 मैचों में सर्वाधिक 776 रन बनाकर प्रतिष्ठित ऑरेंज कैप अपने नाम की थी। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 237.30 का रहा था, जो टी-20 क्रिकेट के इतिहास में किसी भी शीर्ष क्रम के बल्लेबाज के लिए बेहद असाधारण माना जाता है। उनके इसी फॉर्म को देखते हुए अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाले इस मैच में भारतीय फैंस को एक बार फिर बड़ी पारियों और आतिशी बल्लेबाजी की उम्मीद है। हालांकि इस ट्राई-सीरीज के पहले मुकाबले में श्रीलंका-ए के खिलाफ खेलते हुए भारतीय शीर्ष क्रम पूरी तरह लड़खड़ा गया था। उस मैच में वैभव सूर्यवंशी महज 14 रन बनाकर पवेलियन लौट गए थे, जिससे टीम इंडिया को शुरुआती झटके लगे थे। लेकिन क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि एक या दो पारियों की विफलता इस युवा खिलाड़ी के आत्मविश्वास को कम नहीं कर सकती। तकनीकी रूप से सक्षम और लंबी पारियां खेलने में माहिर सूर्यवंशी अपनी पुरानी गलतियों से सीख लेकर इस मुकाबले में नई शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। दांबुला की पिच आमतौर पर शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद करती है, जिससे भारतीय ओपनर्स के संयम और शॉट चयन की कड़ी परीक्षा होगी। दूसरी ओर विपक्षी टीम अफगानिस्तान-ए को हल्के में आंकना भारतीय टीम के लिए बड़ी भूल साबित हो सकता है। अफगानी टीम के पास कई ऐसे विश्वस्तरीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाज मौजूद हैं जो किसी भी मजबूत बल्लेबाजी क्रम को ध्वस्त करने की क्षमता रखते हैं। विशेषकर सीमित ओवरों के क्रिकेट में अफगानिस्तान की ए-टीम ने पिछले कुछ समय में बेहतरीन खेल दिखाया है। ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए क्रीज पर समय बिताना होगा और पावरप्ले का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करना होगा। कप्तान और टीम प्रबंधन ने मैच से पहले रणनीति को लेकर लंबी चर्चा की है, जिसमें मध्यक्रम को मजबूती देने और अंत के ओवरों में तेजी से रन बटोरने पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस त्रिकोणीय श्रृंखला में आगे की राह तय करने के लिहाज से भारत के लिए यह मुकाबला जीतना बेहद अनिवार्य माना जा रहा है। युवा खिलाड़ियों के पास खुद को राष्ट्रीय चयनकर्ताओं की नजरों में बनाए रखने का यह सबसे बेहतरीन अवसर है। यदि वैभव सूर्यवंशी और उनके साथी बल्लेबाज आज के मैच में अफगानिस्तान के गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ एक बड़ा स्कोर खड़ा करने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टीम की स्थिति सीरीज में काफी मजबूत हो जाएगी। पूरे देश के क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें आज दोपहर शुरू होने वाले इस हाई-वोल्टेज मुकाबले के लाइव स्कोरकार्ड और भारतीय टीम के प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।
विद्या बालन ने की माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी की तारीफ, सोशल मीडिया पर दिया खास रिव्यू

नई दिल्ली । नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई डार्क कॉमेडी थ्रिलर फिल्म ‘मां बहन’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ फिल्म जगत से भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन ने भी फिल्म की सराहना करते हुए इसकी स्टारकास्ट और कहानी की प्रशंसा की है। विद्या बालन ने सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, “आपकी तो मां-बहन एक हो गई नेटफ्लिक्स पर।” इसके साथ ही उन्होंने फिल्म में मुख्य भूमिकाएं निभाने वाली माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा की केमिस्ट्री को बेहद मनोरंजक और प्रभावशाली बताया। विद्या की यह प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और फिल्म के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म ‘मां बहन’ की रिलीज से पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि इस प्रोजेक्ट के लिए शुरुआत में विद्या बालन से संपर्क किया गया था। हालांकि बाद में यह भूमिका माधुरी दीक्षित के हिस्से में चली गई। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन विद्या द्वारा फिल्म की खुलकर तारीफ किए जाने को उनके पेशेवर दृष्टिकोण और सहकर्मियों के प्रति सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि विद्या बालन और फिल्म के निर्देशक सुरेश त्रिवेणी पहले भी साथ काम कर चुके हैं। दोनों ने चर्चित फिल्म तुम्हारी सुलु में साथ काम किया था, जिसे दर्शकों और समीक्षकों दोनों का अच्छा समर्थन मिला था। इसके बाद वे जलसा में भी साथ नजर आए। ऐसे में विद्या और सुरेश त्रिवेणी के बीच लंबे समय से मजबूत पेशेवर संबंध रहे हैं। फिल्म ‘मां बहन’ की कहानी एक ऐसी गायिका मां के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे समाज अक्सर संदेह और पूर्वाग्रह की नजर से देखता है। उसकी जिंदगी तब अप्रत्याशित मोड़ लेती है जब उसके पड़ोसी की मौत उसके घर में हो जाती है। इस मुश्किल परिस्थिति में उसकी दोनों बेटियां उसकी मदद के लिए सामने आती हैं। इसके बाद कहानी रहस्य, हास्य और भावनात्मक उतार-चढ़ाव के साथ आगे बढ़ती है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखती है। फिल्म का निर्देशन सुरेश त्रिवेणी ने किया है, जबकि निर्माण विक्रम मल्होत्रा और सुरेश त्रिवेणी ने संयुक्त रूप से किया है। फिल्म में माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और धरना दुर्गा के अलावा रवि किशन भी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देते हैं। विशेष बात यह है कि इस फिल्म के माध्यम से पहली बार माधुरी दीक्षित और तृप्ति डिमरी ने एक साथ स्क्रीन साझा की है। फिल्म में माधुरी ने तृप्ति की मां का किरदार निभाया है। एक साक्षात्कार में माधुरी ने बताया था कि उन्होंने यह भूमिका इसलिए स्वीकार की क्योंकि यह पारंपरिक फिल्मी मां के किरदारों से अलग और अधिक जटिल व्यक्तित्व वाला चरित्र है। फिल्म की अनूठी कहानी, दमदार अभिनय और हास्य-रोमांच से भरपूर प्रस्तुति को देखते हुए ‘मां बहन’ को ओटीटी दर्शकों से अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह फिल्म लोकप्रियता के नए आयाम स्थापित कर पाती है या नहीं।
अंतरिक्ष में ग्रहों का बड़ा फेरबदल: 28 जून से मंगल-गुरु की युति बदलेगी कई राशियों की तकदीर, धन और उन्नति के प्रबल योग

नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों का गोचर और उनकी युति मानव जीवन के साथ-साथ संपूर्ण चराचर जगत को गहराई से प्रभावित करती है। इसी कड़ी में आगामी 28 जून को अंतरिक्ष में एक बेहद महत्वपूर्ण और दुर्लभ ज्योतिषीय घटना घटने जा रही है। ग्रहों के सेनापति और ऊर्जा के कारक मंगल देव तथा देवताओं के गुरु और ज्ञान के प्रदाता बृहस्पति की स्थिति में होने वाला बदलाव एक महासंयोग को जन्म दे रहा है। इन दोनों बड़े ग्रहों के आपसी संबंध और दृष्टि से ब्रह्मांड में ‘लाभ दृष्टि राजयोग’ का निर्माण होने जा रहा है जिसे ज्योतिषीय गणनाओं में अत्यंत परोपकारी और भाग्य को बदलने वाला माना गया है। इस विशिष्ट राजयोग के सक्रिय होते ही कई राशियों के जीवन में सकारात्मकता का संचार होने की उम्मीद जताई जा रही है। ज्योतिषविदों का मानना है कि मंगल की शक्ति और गुरु की कृपा का यह अनूठा मिलन आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलताएं लेकर आता है। इस अवधि के दौरान रुकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी और व्यापारिक क्षेत्र में निवेश करने वाले लोगों को अप्रत्याशित लाभ मिलने के संकेत हैं। खासकर नौकरीपेशा जातकों के लिए यह समय पदोन्नति और कार्यस्थल पर मान-सम्मान में वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे उनकी लंबे समय से चली आ रही आर्थिक तंगी दूर होने की संभावना प्रबल हो जाती है। ग्रहों के इस महापरिवर्तन का असर विभिन्न प्रदेशों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी देखने को मिलेगा। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस राजयोग के प्रभाव से कृषि और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। शासन और प्रशासन के स्तर पर लिए गए नीतिगत निर्णय जनता के लिए हितकारी साबित हो सकते हैं। चूंकि बृहस्पति को ज्ञान और न्याय का कारक माना जाता है और मंगल को पराक्रम का, इसलिए इस अवधि में लिए गए साहसिक और सूझबूझ से भरे फैसले समाज में स्थिरता और समृद्धि लाने का काम करेंगे। जमीन-जायदाद और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में भी इस दौरान बड़ा उछाल देखा जा सकता है। पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन के दृष्टिकोण से भी यह लाभ दृष्टि राजयोग कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाला है। जिन जातकों की कुंडली में इन दोनों ग्रहों की स्थिति अनुकूल है, उन्हें पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों के लिए भी यह समय उच्च शिक्षा के नए अवसर प्रदान करने वाला साबित होगा। बौद्धिक क्षमताओं में विकास होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को बड़ी सफलता हाथ लग सकती है। स्वास्थ्य के लिहाज से भी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को इस दौरान राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है, क्योंकि मंगल शारीरिक ऊर्जा को बढ़ाता है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी यह कालखंड बेहद पवित्र माना जा रहा है। गुरु और मंगल का यह शुभ संयोग समाज में परोपकार, दान-पुण्य और मांगलिक कार्यों की रूपरेखा तैयार करेगा। विभिन्न क्षेत्रों में इस योग के कारण मांगलिक आयोजन संपन्न होंगे जिससे सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा। कुल मिलाकर, 28 जून से शुरू होने वाला यह ज्योतिषीय घटनाक्रम न केवल व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की तकदीर बदलने की क्षमता रखता है, बल्कि व्यापक आर्थिक और सामाजिक सुधारों की दृष्टि से भी इसे एक मील का पत्थर माना जा रहा है।
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा: केंद्र सरकार ने E22 से E30 श्रेणी के ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी की समाप्ति का किया ऐलान

नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए E22, E25, E27 और E30 श्रेणी के पेट्रोल पर लगने वाली केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) और संबंधित उपकर को समाप्त करने का निर्णय लिया है। सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है तथा भारत अपने ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को तेज कर रहा है। सरकारी घोषणा के अनुसार, जिन पेट्रोल उत्पादों में 22 प्रतिशत से 30 प्रतिशत तक एथेनॉल मिश्रित होगा, उन पर अब एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। इस कदम का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल में अधिक मात्रा में एथेनॉल के उपयोग को प्रोत्साहित करना और वैकल्पिक ईंधन के माध्यम से ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाना है। भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में शामिल है और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयातित तेल के माध्यम से पूरा करता है। ऐसे में एथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने से आयातित पेट्रोलियम उत्पादों की मांग में कमी आने की संभावना है। इससे देश का विदेशी मुद्रा व्यय कम हो सकता है और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बल मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्साइज ड्यूटी समाप्त होने से तेल विपणन कंपनियों को लागत के स्तर पर राहत मिलेगी। इससे एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उत्पादन और वितरण को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि अंतिम उपभोक्ताओं को कीमतों में कितनी राहत मिलेगी, यह तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिर भी उद्योग जगत का मानना है कि यह फैसला ईंधन कीमतों को स्थिर रखने में सहायक साबित हो सकता है। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है। एथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से किया जाता है। एथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों की उपज के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। पिछले कुछ वर्षों में सरकार लगातार एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ा रही है और पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित ईंधन न केवल आयातित तेल पर निर्भरता कम करता है, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टि से भी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माना जाता है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायता मिल सकती है। कुल मिलाकर, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी समाप्त करने का फैसला ऊर्जा सुरक्षा, कृषि विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर ईंधन बाजार, तेल कंपनियों और किसानों पर किस रूप में दिखाई देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
हिंदी सिनेमा में डबल रोल का अनोखा ट्रेंड: जब बॉलीवुड के इन टॉप एक्टर्स ने एक ही स्क्रीन पर निभाया बाप और बेटे का दमदार रोल

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में पटकथाओं की मांग और निर्देशकों के प्रयोगों ने समय-समय पर अभिनेताओं को अपनी अभिनय क्षमता की सीमाओं को लांघने का अवसर दिया है। बॉलीवुड में दोहरे किरदारों यानी डबल रोल का चलन दशकों पुराना है, लेकिन इस विधा में सबसे कठिन और प्रभावकारी प्रयोग तब माना जाता है जब एक ही अभिनेता को एक ही फिल्म के भीतर पिता और पुत्र दोनों की भूमिकाएं निभानी पड़ती हैं। यह प्रयोग न केवल अभिनेता के कौशल की परीक्षा लेता है बल्कि दर्शकों को भी एक ही पर्दे पर दो अलग-अलग पीढ़ियों के दृष्टिकोण को देखने का अवसर देता है। हाल के वर्षों में कई ऐसे बड़े अभिनेताओं ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने किरदारों से सिनेमाघरों में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस फेहरिस्त में सबसे पहला और सबसे मजबूत नाम हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन का आता है। उन्होंने अपने लंबे और शानदार करियर में कई बार इस तरह के चुनौतीपूर्ण प्रयोगों को पर्दे पर जीवंत किया है। फिल्म सूर्यवंशम में ठाकुर भानुप्रताप सिंह और उनके सीधे-सादे बेटे हीरा ठाकुर के रूप में उनका अभिनय आज भी टेलीविजन संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन चुका है। इसके अलावा उन्होंने अदालत, आखिरी रास्ता और महान जैसी फिल्मों में भी पिता और पुत्र की भूमिकाएं बहुत ही संजीदगी के साथ निभाई थीं। महान फिल्म में तो उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए पिता और दो बेटों का ट्रिपल रोल निभाकर सबको हैरत में डाल दिया था। वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता शाहरुख खान ने भी इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज कराया है। फिल्म इंग्लिश बाबू देसी मैम में बहुआयामी भूमिकाएं निभाने के बाद, उन्होंने हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म जवान में इस कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इस फिल्म में उन्होंने कैप्टन विक्रम राठौड़ के रूप में एक निडर पिता और आजाद के रूप में एक न्यायप्रिय बेटे का किरदार निभाया था। दोनों किरदारों के बीच का तालमेल और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी दमदार थी कि दर्शकों ने सिनेमाघरों में तालियों और सीटियों के साथ इसका स्वागत किया और फिल्म ने कमाई के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस प्रकार के किरदारों को निभाने में एक्शन और फिक्शन फिल्मों के सुपरस्टार ऋतिक रोशन भी पीछे नहीं रहे हैं। उन्होंने अपनी बेहद लोकप्रिय सुपरहीरो फ्रेंचाइजी कृष और कृष 3 में एक साथ दो पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। एक तरफ जहां उन्होंने मानसिक रूप से विशेष और बाद में बुजुर्ग हो चुके वैज्ञानिक पिता रोहित मेहरा का किरदार निभाया, वहीं दूसरी तरफ शक्तिशाली और रक्षक बेटे कृष्णा उर्फ कृष के रूप में भी खुद को स्थापित किया। एक ही फ्रेम में दो अलग उम्र और शारीरिक हाव-भाव वाले किरदारों को एक साथ निभाना ऋतिक रोशन के करियर के सबसे बेहतरीन प्रयोगों में गिना जाता है। समकालीन अभिनेताओं में रणबीर कपूर ने भी इस श्रेणी में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने बड़े बजट की पीरियड ड्रामा फिल्म शमशेरा में पिता और पुत्र की दोहरी भूमिका निभाई थी। फिल्म में उन्होंने डकैत शमशेरा और उसके विद्रोही बेटे बल्ली के किरदारों को निभाने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से काफी मेहनत की थी। भले ही फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली हो, लेकिन रणबीर कपूर के इस दोहरे प्रयास और अभिनय की समीक्षकों द्वारा काफी सराहना की गई थी। इसी तरह एक्शन स्टार जॉन अब्राहम ने भी अपनी फिल्म सत्यमेव जयते के दूसरे भाग में इसी तरह का प्रयोग दोहराया था, जहां उन्होंने एक किसान पिता और उसके जुड़वां बेटों की तिहरी भूमिका निभाई थी। वहीं अभिनेता सलमान खान की फिल्म वीर में भी एक ऐसी ही कहानी देखने को मिली थी, जिसमें पिता के निधन के बाद बेटे का किरदार कहानी को आगे बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, अक्षय कुमार जैसे कलाकार भी अपनी आने वाली फिल्मों और पिछले कुछ प्रोजेक्ट्स में इस तरह के किरदारों की संभावनाओं को टटोलते नजर आए हैं। कुल मिलाकर, एक ही फिल्म में पिता और बेटे का किरदार निभाना बॉलीवुड एक्टर्स के लिए हमेशा से अपनी बहुमुखी प्रतिभा साबित करने का सबसे बड़ा जरिया रहा है।
होर्मुज तनाव से उछला कच्चा तेल, 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचा ब्रेंट; पेट्रोल-डीजल कीमतों पर बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रमों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। तेल बाजार में बढ़ती अनिश्चितता के कारण निवेशकों और आयातक देशों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं। बाजार आंकड़ों के अनुसार ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 95 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। वहीं अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड में भी तेजी देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल आपूर्ति मार्गों को लेकर पैदा हुई आशंकाओं ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है, जिसके चलते कीमतों में तेजी आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर समुद्री मार्ग से होने वाले तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का सैन्य तनाव या आपूर्ति बाधित होने की आशंका सीधे तेल बाजार को प्रभावित करती है। रिपोर्टों के अनुसार हालिया घटनाओं के बाद निवेशकों ने आपूर्ति जोखिम को लेकर सतर्क रुख अपनाया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है। हालांकि बाजार की दिशा काफी हद तक आने वाले दिनों में राजनीतिक और सैन्य घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशक हर नए घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी महत्वपूर्ण मानी जाती है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का असर परिवहन, उद्योग और महंगाई पर पड़ सकता है। हालांकि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल की दरों से तय नहीं होतीं, बल्कि इनमें कर, परिवहन लागत, विनिमय दर और तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति भी अहम भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भविष्य में ईंधन कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि फिलहाल किसी तत्काल मूल्य वृद्धि को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। देश के प्रमुख महानगरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे शहरों में ईंधन दरों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के कारण उपभोक्ताओं और उद्योग जगत की निगाहें तेल बाजार पर टिकी हुई हैं। आर्थिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, वैश्विक मांग और आपूर्ति संतुलन तथा प्रमुख तेल उत्पादक देशों की नीतियां कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय करेंगी। ऐसे में ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का दौर कुछ समय तक जारी रह सकता है।
बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह के समर्थन में उतरे पंजाबी स्टार एमी विर्क, 'डॉन 3' विवाद को लेकर निर्माताओं पर साधा निशाना

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में फिल्मों के हिट और फ्लॉप होने के साथ ही निर्माताओं और कलाकारों के समीकरण किस तरह बदलते हैं, इसका एक बड़ा उदाहरण हालिया विवाद में देखने को मिल रहा है। पंजाबी फिल्म उद्योग के जाने-माने अभिनेता और गायक एमी विर्क ने बॉलीवुड सुपरस्टार रणवीर सिंह के पक्ष में खड़े होते हुए फिल्म ‘डॉन 3’ के निर्माताओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक विशेष साक्षात्कार के दौरान उन्होंने खुलकर कहा कि जब अभिनेता का समय खराब चल रहा था और उनकी कुछ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लगातार असफल हो रही थीं, तब निर्माताओं ने उनके साथ अपनी फिल्म की शूटिंग शुरू करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। इस पूरे विवाद की जड़ें फिल्म ‘डॉन 3’ की घोषणा और उसके बाद बदले हालातों से जुड़ी हुई हैं। लगभग तीन साल पहले घोषित हुई इस बहुप्रतीक्षित फिल्म का निर्माण कार्य काफी समय तक अटका रहा। इसी बीच रणवीर सिंह की नई फिल्म ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और वह देश की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शुमार हो गई। एमी विर्क का कहना है कि जैसे ही रणवीर की इस फिल्म ने सफलता के नए आयाम छुए, वैसे ही निर्माताओं ने ‘डॉन 3’ पर जल्द से जल्द काम शुरू करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया ताकि वे अभिनेता की नई स्टार वैल्यू का आर्थिक लाभ उठा सकें। विवाद तब और गहरा गया जब ‘धुरंधर’ की भारी सफलता के तुरंत बाद रणवीर सिंह ने किन्हीं कारणों से ‘डॉन 3’ परियोजना से खुद को अलग कर लिया। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने फिल्म की आउटडोर लोकेशंस की रेकी, अनुमति और अन्य प्री-प्रोडक्शन कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए थे, जो अभिनेता के हटने से पूरी तरह बर्बाद हो गए। इस नुकसान की भरपाई के लिए निर्माण कंपनी ने अभिनेता से 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की मांग की है। हालांकि रणवीर सिंह ने शुरुआत में इस मांग को खारिज करते हुए आंशिक समझौते के तहत केवल 10 करोड़ रुपये देने की पेशकश की थी, जिसे निर्माताओं ने स्वीकार नहीं किया। इस गतिरोध के बीच मनोरंजन उद्योग की प्रमुख संस्था फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने भी हस्तक्षेप किया था और अभिनेता के खिलाफ असहयोग का निर्देश जारी किया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। मध्य प्रदेश सहित देश भर के फिल्म वितरकों और सिनेमा जगत के विशेषज्ञों की इस पूरे मामले पर पैनी नजर बनी हुई है। एमी विर्क ने इस वित्तीय मांग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि यदि निर्माताओं को लगता है कि उनका वास्तविक नुकसान हुआ है तो वे मामूली बकाया राशि लेकर मामला सुलझा सकते हैं, न कि इतनी बड़ी रकम का दबाव बनाएं। उन्होंने अभिनेता को कानूनी राह अपनाने और किसी भी दबाव के आगे न झुकने की सलाह दी है। साक्षात्कार के दौरान विर्क ने रणवीर सिंह के साथ अपने पुराने संबंधों और उनकी हालिया व्यक्तिगत खुशियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘धुरंधर’ की सफलता और रणवीर के घर बेटी के जन्म के बाद उनकी अभिनेता से लंबी बातचीत हुई थी, जिसमें रणवीर ने फिल्म के लिए की गई अपनी कड़ी मेहनत को साझा किया था। विर्क ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा इतिहास की सबसे सफल फिल्म का मुख्य हिस्सा उनका एक करीबी दोस्त है। फिलहाल यह विवाद अदालती नोटिसों और कानूनी दांव-पेंच के बीच फंसा हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मनोरंजन जगत का यह बड़ा विवाद किस मोड़ पर जाकर थमता है।
बॉलीवुड की नई रिलीज फिल्मों की रफ्तार पड़ी धीमी, 'है जवानी तो इश्क होना है' और 'बंदर' के कलेक्शन में लगातार छठे दिन भारी गिरावट

नई दिल्ली । देश के सिनेमाघरों में चल रही बॉक्स ऑफिस की जंग में इस समय क्षेत्रीय और हिंदी सिनेमा के बीच एक बड़ा फासला देखने को मिल रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्म जगत की नई पेशकश ने अपनी जबरदस्त व्यावसायिक पकड़ का प्रदर्शन करते हुए दो सौ करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होने की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ भारी-भरकम स्टार कास्ट और बड़े निर्देशकों के मार्गदर्शन में बनी बॉलीवुड की दो प्रमुख फिल्में दर्शकों की कमी के कारण सिनेमाघरों में अपनी पकड़ खोती जा रही हैं। वर्किंग डेज की शुरुआत के साथ ही इन दोनों हिंदी फिल्मों के दैनिक प्रदर्शन ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो फिल्म वितरकों और निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन गई है। मेगास्टार राम चरण और जान्हवी कपूर की मुख्य भूमिकाओं से सजी फिल्म ‘पेद्दी’ अपनी रिलीज के पहले दिन से ही बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है। दक्षिण भारतीय राज्यों के साथ-साथ हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी इस फिल्म की मांग लगातार बनी हुई है। अपनी रिलीज के सातवें दिन भी इस फिल्म ने संतोषजनक कमाई करते हुए बाजार में अपनी निरंतरता साबित की है, जबकि इसके छठे दिन का प्रदर्शन भी काफी मजबूत रहा था। अब तक के कुल संकलन के आंकड़ों को देखा जाए तो यह फिल्म बहुत जल्द एक नया रिकॉर्ड कायम करने की तरफ बढ़ रही है। इस मजबूत व्यावसायिक प्रदर्शन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बेहतर विषय-वस्तु और मजबूत स्टार वैल्यू वाली फिल्मों को दर्शक पूरे देश में हाथों-हाथ ले रहे हैं। इसके विपरीत बॉलीवुड के बड़े सितारों से सजी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘है जवानी तो इश्क होना है’ का जादू बॉक्स ऑफिस पर फीका पड़ता दिखाई दे रहा है। नामचीन सितारों की मौजूदगी और अनुभवी निर्देशन के बावजूद फिल्म छठे दिन अपनी रफ्तार को बरकरार रखने में नाकाम रही। पांचवें दिन के मुकाबले छठे दिन इसके कलेक्शन में बड़ी गिरावट देखने को मिली है, जिससे इसका कुल कारोबार अब तक काफी सीमित रह गया है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों से आ रही रिपोर्ट के अनुसार शाम के शो में दर्शकों की संख्या में काफी कमी आई है, जिसने फिल्म के आगे के सफर को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया है। वहीं इसी सप्ताह रिलीज हुई बॉलीवुड की एक अन्य प्रयोगधर्मी और डार्क थ्रिलर फिल्म ‘बंदर’ बॉक्स ऑफिस पर पूरी तरह पस्त नजर आ रही है। गंभीर किरदारों और सस्पेंस से भरपूर होने के बावजूद यह फिल्म शुरुआत से ही दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में नाकाम साबित हुई है। अपनी रिलीज के छठे दिन इस फिल्म का कलेक्शन बेहद निराशाजनक रहा, जो इसकी कुल लागत और उम्मीदों के लिहाज से बहुत मामूली है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि सीमित प्रचार और मुख्यधारा के दर्शकों से जुड़ाव की कमी के कारण इस फिल्म का कुल संकलन अब तक के सबसे निचले स्तर पर बना हुआ है। मौजूदा व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहांत में भी ‘पेद्दी’ का दबदबा इसी तरह जारी रह सकता है क्योंकि दर्शकों के बीच इसकी लोकप्रियता और माउथ पब्लिसिटी काफी मजबूत है। दूसरी तरफ हिंदी बेल्ट की दोनों फिल्मों को अपनी साख बचाने के लिए आने वाले दिनों में असाधारण प्रदर्शन करने की जरूरत होगी, जिसकी संभावना फिलहाल बेहद कम दिखाई दे रही है। सिनेमाघरों के मालिक भी अब अपना पूरा ध्यान उस फिल्म पर केंद्रित कर रहे हैं जो लगातार फुटफॉल दे रही है, जिससे आने वाले दिनों में स्क्रीन्स की संख्या में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
Sunny Leone CID Notice: ₹2400 करोड़ निवेश घोटाले की जांच में अभिनेत्री सनी लियोनी को CID का नोटिस, एजेंसी ने मांगी भुगतान संबंधी जानकारी

Sunny Leone CID Notice: नई दिल्ली । कर्नाटक में कथित 2,400 करोड़ रुपये के शिवम एसोसिएट्स निवेश घोटाले की जांच के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री सनी लियोनी का नाम भी चर्चा में आ गया है। हालांकि जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभिनेत्री को भेजा गया नोटिस केवल जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल उनके खिलाफ किसी प्रकार की धोखाधड़ी या आपराधिक गतिविधि का आरोप नहीं लगाया गया है। मामले की जांच कर रही कर्नाटक क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) कथित निवेश योजना से जुड़े वित्तीय लेनदेन और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि वह यह समझने का प्रयास कर रही है कि निवेशकों से जुटाई गई कथित राशि का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया गया और उसका अंतिम लाभ किसे प्राप्त हुआ। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स के प्रमोटर और मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे शिवानंद नीलनवर द्वारा निर्मित एक कन्नड़ फिल्म में अभिनेत्री सनी लियोनी ने विशेष प्रस्तुति दी थी। इसी संदर्भ में एजेंसी ने अभिनेत्री से उस प्रदर्शन के लिए प्राप्त भुगतान और उससे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी मांगी है। अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2023 में रिलीज हुई कन्नड़ फिल्म ‘चैंपियन’ के एक गीत में प्रस्तुति देने के लिए अभिनेत्री को भुगतान किया गया था। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भुगतान का स्रोत क्या था और क्या उसका संबंध कथित निवेश योजना से जुड़ी किसी वित्तीय गतिविधि से था। हालांकि एजेंसी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केवल भुगतान प्राप्त करना किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं बनाता और जांच का उद्देश्य तथ्यों की पुष्टि करना है। सीआईडी के अनुसार, शिवम एसोसिएट्स और उससे जुड़े लोगों पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर बिना आवश्यक अनुमति के निवेश और जमा योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों से धन एकत्र किया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में हजारों निवेशकों से धन जुटाए जाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी अब उन सभी वित्तीय लेनदेन की समीक्षा कर रही है जो इस कथित नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक अपराधों की जांच में एजेंसियां अक्सर उन सभी व्यक्तियों या संस्थाओं से जानकारी मांगती हैं जिनके साथ संबंधित पक्षों का वित्तीय लेनदेन हुआ हो। ऐसे नोटिस का उद्देश्य तथ्यों का सत्यापन करना होता है और इसे किसी व्यक्ति की संलिप्तता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड तथा भुगतान संबंधी सूचनाओं की जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, सनी लियोनी के खिलाफ इस समय किसी प्रकार के अपराध में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इस पूरे मामले पर मनोरंजन जगत और निवेशकों की नजर बनी हुई है, जबकि जांच एजेंसियां कथित घोटाले के वित्तीय पहलुओं को खंगालने में जुटी हैं।