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नीरज चोपड़ा की वापसी पर दुनिया की नजर, 92.62 मीटर फेंक चुके श्रीलंकाई स्टार रूमेश से आज होगी महामुकाबला

नई दिल्ली । भारतीय एथलेटिक्स प्रेमियों की निगाहें शुक्रवार को दोहा डायमंड लीग 2026 पर टिकी रहेंगी, जहां ओलंपिक और विश्व मंच पर देश का नाम रोशन कर चुके स्टार जैवलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा लंबे अंतराल के बाद प्रतिस्पर्धी मैदान में वापसी करेंगे। पिछले साल सितंबर में विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के बाद पीठ की चोट के कारण वह किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले पाए थे। ऐसे में उनकी वापसी को लेकर खेल जगत में उत्साह के साथ-साथ उत्सुकता भी बनी हुई है। हालांकि नीरज की राह आसान नहीं होगी। इस बार उनके सामने पाकिस्तान के ओलंपिक चैंपियन अरशद नदीम नहीं होंगे, लेकिन श्रीलंका के उभरते हुए स्टार रूमेश थरंगा पाथिराजे सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने खड़े हैं। रूमेश ने इस सीजन रोम डायमंड लीग में 92.62 मीटर का शानदार थ्रो कर न केवल अपना नाम 90 मीटर क्लब में दर्ज कराया, बल्कि विश्व जैवलिन इतिहास में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। 24 वर्षीय रूमेश इस समय दुनिया के सबसे बेहतरीन फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों में गिने जा रहे हैं। उनका 92.62 मीटर का थ्रो एशियाई एथलेटिक्स के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। उन्होंने इस सीजन कई प्रतियोगिताओं में लगातार 89 मीटर से अधिक दूरी तक भाला फेंका है और हाल ही में प्रतिष्ठित गोल्डन स्पाइक मीट का खिताब भी अपने नाम किया था। दूसरी ओर नीरज चोपड़ा भी दोहा के मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर चुके हैं। मई 2025 में उन्होंने इसी ट्रैक पर पहली बार 90 मीटर की बाधा पार करते हुए 90.23 मीटर का थ्रो किया था। हालांकि उस प्रतियोगिता में जर्मनी के जूलियन वेबर ने 91.06 मीटर के साथ उन्हें पीछे छोड़ दिया था। इस बार नीरज की कोशिश न केवल शानदार वापसी करने की होगी, बल्कि अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब पहुंचने की भी होगी। मुकाबले से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नीरज ने कहा कि उन्होंने वापसी को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं की। करीब डेढ़ महीने पहले उन्होंने फिर से नियमित थ्रो करना शुरू किया और अंतिम ट्रेनिंग सत्र के बाद ही दोहा में खेलने का फैसला लिया। उन्होंने बताया कि वह खुद को पूरी तरह फिट महसूस कर रहे हैं और अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए तैयार हैं। नीरज और रूमेश के बीच अब तक दो मुकाबले हुए हैं और दोनों खिलाड़ियों ने एक-एक बार एक-दूसरे को पीछे छोड़ा है। ऐसे में दोनों के बीच हेड-टू-हेड रिकॉर्ड 1-1 से बराबर है। यही वजह है कि इस भिड़ंत को इस सीजन के सबसे रोमांचक जैवलिन मुकाबलों में से एक माना जा रहा है। दोहा डायमंड लीग में केवल नीरज और रूमेश ही नहीं, बल्कि विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, केशोर्न वॉलकॉट, जैकब वाडलेच, कर्टिस थॉम्पसन और जूलियस येगो जैसे दिग्गज खिलाड़ी भी हिस्सा ले रहे हैं। ऐसे में प्रतिस्पर्धा बेहद कड़ी रहने वाली है। भारतीय समयानुसार यह मुकाबला शुक्रवार रात 11 बजे के बाद शुरू होगा। चोट के बाद नीरज की यह वापसी केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों से पहले उनकी तैयारी और फिटनेस की भी बड़ी परीक्षा होगी।

डिजिटल इंडिया से ग्लोबल लीडरशिप तक , पीएम मोदी ने पेरिस में गिनाईं उपलब्धियां कहा आकांक्षाओं का नया भारत भविष्य की दिशा तय कर रहा है

नई द‍िल्‍ली । फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित एक भव्य सामुदायिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए भारत की तेजी से बदलती तस्वीर और उसकी वैश्विक भूमिका को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि फ्रांस में बसे भारतीय न केवल दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत कर रहे हैं बल्कि 21वीं सदी के भारत फ्रांस संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने प्रवासी भारतीयों की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेहनत और योगदान भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती प्रदान कर रहे हैं। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने में सफलता मिली है और देश ने विकास के कई नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत का सकल घरेलू उत्पाद दोगुना हुआ है जबकि निर्यात में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। मोबाइल निर्माण के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है और आज देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का विकास केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं है बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी एक बड़ी कहानी है। उन्होंने बताया कि देश में एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी हुई है और विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बड़ा विस्तार हुआ है। हाईवे निर्माण की गति पहले की तुलना में कई गुना बढ़ी है जबकि मेट्रो नेटवर्क ने रिकॉर्ड स्तर पर विस्तार किया है। इन प्रयासों ने देश में कनेक्टिविटी को मजबूत किया है और विकास को नई रफ्तार दी है। डिजिटल इंडिया अभियान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने डिजिटल तकनीक को जनसामान्य तक पहुंचाने में बड़ी सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि देश में करोड़ों नागरिकों को यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी उपलब्ध कराई गई है जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाया जा रहा है। मेडिकल रिकॉर्ड अब सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध हैं जिससे मरीजों और स्वास्थ्य संस्थानों दोनों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि देश के दूरदराज गांवों तक हाई स्पीड इंटरनेट पहुंच जाएगा लेकिन आज यह वास्तविकता बन चुकी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत की आकांक्षाओं का नया दौर है जहां लोगों की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं। अब लोग केवल मूलभूत सुविधाओं से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि बेहतर जीवन स्तर और विश्वस्तरीय सुविधाओं की अपेक्षा रखते हैं। जहां बिजली पहुंची है वहां लोग स्मार्ट जीवनशैली चाहते हैं। जहां रेल पहुंची है वहां हाई स्पीड कनेक्टिविटी की मांग है और जहां इंटरनेट पहुंचा है वहां लोग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा डिजिटल नवाचार में नेतृत्व की आकांक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि आज का भारत अपने नागरिकों के सपनों को साकार करने के साथ साथ भविष्य का मजबूत इकोसिस्टम भी तैयार कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में देशों के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गए हैं बल्कि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है। दुनिया के देश विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और स्थिर साझेदारी की तलाश में हैं। ऐसे समय में भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले वर्षों में भारत विकास नवाचार और वैश्विक सहयोग के नए मानक स्थापित करेगा और विश्व मंच पर अपनी भूमिका को और अधिक मजबूत बनाएगा।

रिटायरमेंट से लौटेंगे जॉन सीना? WWE दिग्गज बोले- एलन मस्क ही बदल सकते हैं मेरा फैसला

नई दिल्ली । WWE के इतिहास के सबसे लोकप्रिय सुपरस्टार्स में शामिल जॉन सीना एक बार फिर सुर्खियों में हैं। भले ही वह आधिकारिक तौर पर इन-रिंग करियर को अलविदा कह चुके हों, लेकिन उनके एक हालिया बयान ने रेसलिंग फैंस के बीच नई उम्मीद जगा दी है। सीना ने मजाकिया अंदाज में कहा है कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें रिटायरमेंट से वापस आने के लिए मना सकता है, तो वह दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क हैं। पिछले वर्ष अपने विदाई दौरे के बाद जॉन सीना ने WWE रिंग को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम मुकाबले में उन्हें गुंथर के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। यह मुकाबला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि सीना ने अपने करियर के आखिरी मैच में टैप आउट किया था। हालांकि रिंग से दूरी बनाने के बावजूद वह WWE से पूरी तरह अलग नहीं हुए हैं और रेसलमेनिया 42 तथा बैकलैश 2026 जैसे बड़े आयोजनों में विशेष भूमिकाओं में नजर आ चुके हैं। हाल ही में सैन एंटोनियो में आयोजित स्पेसकॉन कार्यक्रम के दौरान जब एक प्रशंसक ने उनसे पूछा कि क्या वह भविष्य में WWE में वापसी कर सकते हैं, तो सीना ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि वह किसी भी चीज की सौ प्रतिशत गारंटी नहीं दे सकते। लेकिन फिलहाल अगर कोई उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए मना सकता है तो वह एलन मस्क हैं। उन्होंने मजाक में कहा कि इसके लिए मस्क को अपनी अपार संपत्ति का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ेगा। जब तक ऐसा नहीं होता, वह खुद को पूरी तरह रिटायर्ड मानते हैं। सीना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा बटोरी है। कई फैंस इसे मजाक के रूप में देख रहे हैं, जबकि कुछ प्रशंसकों को अब भी उम्मीद है कि WWE का यह दिग्गज किसी खास अवसर पर रिंग में वापसी कर सकता है। इस दौरान जॉन सीना ने अपने रिटायरमेंट टूर को लेकर भी बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह विचार पूरी तरह उनका अपना था। सबसे पहले उन्होंने ही WWE अधिकारियों के सामने विदाई दौरे का प्रस्ताव रखा था। कंपनी को इस योजना को अंतिम रूप देने और लागू करने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा। सीना का मानना था कि उनके लंबे और सफल करियर का समापन एक यादगार तरीके से होना चाहिए और इसी सोच के साथ उन्होंने यह योजना बनाई। उन्होंने ‘द जॉन सीना क्लासिक’ टूर्नामेंट को लेकर भी दिलचस्प जानकारी साझा की। सीना ने बताया कि इस टूर्नामेंट का विचार भी उनका ही था। इसे लेकर WWE के चीफ कंटेंट ऑफिसर ट्रिपल एच के साथ कई दौर की चर्चा हुई। पिछले कई महीनों से इसकी रूपरेखा तैयार की जा रही है और अब इसे आगे बढ़ाने की दिशा में काम हो रहा है। फिलहाल जॉन सीना भले ही रिंग से दूर हों, लेकिन WWE यूनिवर्स में उनकी लोकप्रियता आज भी बरकरार है। उनके बयान और भविष्य की योजनाओं को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि रिटायरमेंट के बाद भी जॉन सीना WWE की सबसे चर्चित हस्तियों में शामिल हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या भविष्य में कोई ऐसा अवसर आता है जब फैंस उन्हें एक बार फिर रिंग में मुकाबला करते हुए देख सकेंगे।

जून में फिर घिरे उद्धव ठाकरे! सांसदों के बाद विधायकों में टूट की आशंका, ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ की चर्चाओं से महाराष्ट्र की सियासत गरमाई

नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में जून का महीना एक बार फिर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए चुनौती लेकर आया है। वर्ष 2022 में जून के महीने में ही एकनाथ शिंदे की बगावत ने शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था और राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल आया था। चार साल बाद जून 2026 में एक बार फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने राजनीतिक संकट गहराता दिखाई दे रहा है। इस बार शुरुआत सांसदों की बगावत से हुई है और अब चर्चा विधायकों की संभावित टूट को लेकर हो रही है। हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ विधायक भी पाला बदल सकते हैं। यही वजह है कि महाराष्ट्र की राजनीति में तथाकथित ‘ऑपरेशन टाइगर-2’ को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों ने इन चर्चाओं को और बल दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 22 जून से शुरू होकर 10 जुलाई तक चलने वाले महाराष्ट्र विधानमंडल के मानसून सत्र के दौरान या उसके बाद राज्य की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है। ऐसे समय में उद्धव ठाकरे के लिए अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को एकजुट बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) के पास वर्तमान में 20 विधायक हैं, जबकि विधान परिषद में उसके छह सदस्य हैं। महाविकास आघाड़ी (एमवीए) के भीतर भी उद्धव ठाकरे की पार्टी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी मानी जाती है। कांग्रेस के पास 16 विधायक और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के पास 10 विधायक हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 57 विधायक और विधान परिषद में आठ सदस्य हैं, जिससे उनका संगठनात्मक और राजनीतिक आधार कहीं अधिक मजबूत दिखाई देता है। इसी बीच शिवसेना के विधायक कृपाल तुमाने के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (यूबीटी) के 20 में से 16 विधायक शिंदे नेतृत्व के संपर्क में हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इससे पार्टी में संभावित असंतोष और टूट की चर्चाओं को हवा मिली है। दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने कहा है कि उनकी पार्टी कोई ‘ऑपरेशन टाइगर’ नहीं चला रही है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई नेता या जनप्रतिनिधि स्वेच्छा से उनके साथ जुड़ना चाहता है तो उसका स्वागत किया जाएगा। इस बयान को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बदलते समीकरणों को देखते हुए आने वाले सप्ताह बेहद अहम माने जा रहे हैं। यदि विधायकों में किसी प्रकार की टूट होती है तो इसका असर केवल शिवसेना (यूबीटी) पर ही नहीं, बल्कि पूरे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी की राजनीति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सभी की निगाहें अब मानसून सत्र और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।

ट्रंप ने युद्ध नायकों को दिया , मेडल ऑफ ऑनर सम्मान समारोह में गूंजा शौर्य

नई द‍िल्‍ली । अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के भीतर एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया जिसमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीन पूर्व सैनिकों को देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान मेडल ऑफ ऑनर प्रदान किया। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया गया जिन्होंने अलग अलग युद्धों में अदम्य साहस और असाधारण कर्तव्य निष्ठा का परिचय दिया। सम्मान पाने वालों में रिटायर्ड मरीन मेजर जेम्स कैपर्स जूनियर रिटायर्ड आर्मी मेजर निकोलस डॉकरी तथा मरणोपरांत सम्मानित मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू रिप्ले शामिल रहे। समारोह के दौरान पूरे माहौल में शौर्य और बलिदान की गूंज महसूस की गई तथा अमेरिकी सैन्य इतिहास की गौरवशाली परंपरा को याद किया गया। राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था का आधार उसके वीर सैनिक हैं जो अपने जीवन को जोखिम में डालकर देश की रक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि मेडल ऑफ ऑनर उन चुनिंदा लोगों को मिलता है जिन्होंने युद्ध के मैदान में असाधारण बहादुरी दिखाई है। इस अवसर पर उन्होंने तीनों सैनिकों के योगदान को प्रेरणादायक बताया और कहा कि उनका साहस आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल है। जेम्स कैपर्स जूनियर को 1967 में वियतनाम युद्ध के दौरान किए गए एक जोखिम भरे टोही मिशन के लिए यह सम्मान दिया गया। उस समय वे सेकंड लेफ्टिनेंट थे और उनकी टीम को दुश्मन के बड़े ठिकाने की जानकारी जुटाने का कार्य सौंपा गया था। मिशन के दौरान उनकी यूनिट पर लगातार हमले हुए और कई सैनिक घायल हो गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैपर्स ने नेतृत्व संभाले रखा और अपने साथियों को सुरक्षित निकालने की रणनीति तैयार की। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हवाई सहायता का समन्वय किया और अपने मिशन को पूरा करने की कोशिश जारी रखी। मरीन कर्नल जॉन डब्ल्यू रिप्ले को यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया। वर्ष 1972 में उत्तरी वियतनाम के हमले के दौरान उन्होंने एक महत्वपूर्ण पुल को नष्ट करने का साहसिक निर्णय लिया ताकि आगे बढ़ रही दुश्मन सेना को रोका जा सके। भारी गोलाबारी के बीच उन्होंने विस्फोटक सामग्री स्थापित की और लगातार कई घंटों तक जोखिम उठाते रहे। उनके इस कार्य ने दुश्मन की रणनीति को विफल कर दिया और कई सैनिकों की जान बचाई। दूसरी ओर मेजर निकोलस डॉकरी को 2012 में अफगानिस्तान के कपिसा प्रांत में हुए संघर्ष के दौरान उनके अद्वितीय साहस के लिए सम्मानित किया गया। तालिबान के हमले के बीच उन्होंने घायल साथियों की जान बचाने के लिए स्वयं को खतरे में डाला। उन्होंने न केवल मोर्चे पर नेतृत्व किया बल्कि अपने घायल साथी को बचाने के लिए अपने शरीर से सुरक्षा कवच की तरह कार्य किया। उनकी बहादुरी ने युद्ध के मैदान में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। समारोह के अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका अपने उन नायकों का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने देश के लिए अपना जीवन दांव पर लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि जब देश अपनी स्थापना की 250वीं वर्षगांठ की ओर बढ़ रहा है तब ऐसे वीरों का सम्मान और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

मई 2026 बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट: ‘करुप्पू’ बनी नंबर-1, साउथ फिल्मों का दबदबा, टॉप-5 में कई बड़े नाम शामिल

नई दिल्ली । मई 2026 भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बेहद शानदार साबित हुआ। इस महीने रिलीज हुई कई बड़ी फिल्मों ने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि बॉक्स ऑफिस पर भी रिकॉर्डतोड़ कमाई की। अब ओरमैक्स मीडिया द्वारा जारी की गई मई 2026 की बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि इस बार साउथ सिनेमा का जलवा सबसे ज्यादा देखने को मिला। टॉप-5 सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की सूची में तमिल, मलयालम, हिंदी, हॉलीवुड और मराठी सिनेमा की फिल्मों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई। इस सूची में पहला स्थान तमिल सुपरस्टार सूर्या की फिल्म ‘करुप्पू’ ने हासिल किया है। 14 मई को रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 299 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। आरजे बालाजी के निर्देशन में बनी यह फैंटेसी एक्शन ड्रामा फिल्म पुलिस व्यवस्था, भ्रष्ट न्याय प्रणाली और समाज में कमजोर वर्गों के शोषण जैसे गंभीर मुद्दों को उठाती है। फिल्म में सूर्या और तृषा कृष्णन की जोड़ी को भी काफी सराहा गया। दूसरे स्थान पर मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘दृश्यम 3’ रही। 21 मई को रिलीज हुई इस सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म ने 133 करोड़ रुपये की कमाई की। जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया। मोहनलाल के साथ मीना, अंसिबा हसन, एस्तेर अनिल और आशा शरथ जैसे कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। तीसरे स्थान पर बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख की ऐतिहासिक फिल्म ‘राजा शिवाजी’ रही। 1 मई को रिलीज हुई इस फिल्म ने भी 133 करोड़ रुपये का कारोबार किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन और संघर्ष पर आधारित इस फिल्म में रितेश देशमुख के अलावा जेनेलिया देशमुख, सलमान खान, संजय दत्त, अभिषेक बच्चन, विद्या बालन और भाग्यश्री जैसे कई बड़े कलाकार नजर आए। फिल्म को इसके भव्य निर्माण और दमदार प्रस्तुतिकरण के लिए सराहा गया। चौथे नंबर पर हॉलीवुड फिल्म ‘ऑब्सेशन’ रही, जिसने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 102 करोड़ रुपये की कमाई की। मनोवैज्ञानिक हॉरर और थ्रिलर शैली की इस फिल्म ने अपनी रहस्यमयी कहानी और सस्पेंस से दर्शकों को बांधे रखा। फिल्म एकतरफा प्रेम और जुनून के खतरनाक परिणामों को बेहद प्रभावी तरीके से दिखाती है। पांचवें स्थान पर मराठी फिल्म ‘देओल बैंड 2’ रही, जिसने 90 करोड़ रुपये का कारोबार किया। यह फिल्म ग्रामीण महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं, आत्महत्या और आस्था-अनास्था के संघर्ष को केंद्र में रखती है। निर्देशक प्रवीण तारडे की इस फिल्म को सामाजिक संदेश और भावनात्मक प्रस्तुति के लिए काफी सराहना मिली। मई 2026 की यह रिपोर्ट दर्शाती है कि अब दर्शक केवल स्टार पावर नहीं, बल्कि मजबूत कहानी और प्रभावशाली कंटेंट को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही कारण है कि विभिन्न भाषाओं की फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारतीय सिनेमा की विविधता और ताकत को फिर से साबित किया है।

Aaj Ka Rashifal 19 June 2026: कुंभ राशि वालों को मिलेगी खुशखबरी, कन्या राशि के लोग खर्चों पर रखें नियंत्रण

नई दिल्ली । 19 जून 2026 का दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार कई राशियों के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया है। कुछ जातकों को करियर और कारोबार में नई उपलब्धियां मिल सकती हैं, जबकि कुछ को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की आवश्यकता होगी। पारिवारिक जीवन, स्वास्थ्य, शिक्षा और नौकरी के क्षेत्र में भी कई राशियों को लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष राशि के जातकों के लिए दिन नई शुरुआत और आत्मविश्वास से भरा रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा तथा नई खरीदारी के योग बन सकते हैं। वृष राशि वालों के लिए लंबित कार्यों को पूरा करने का समय है। अनुभवी लोगों की सलाह लाभकारी साबित होगी। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। कार्य संबंधी यात्राएं सफलता दिला सकती हैं। मिथुन राशि के जातकों को पेशेवर और निजी जीवन में संतुलन बनाए रखने का अवसर मिलेगा। नई जिम्मेदारियां सफलता के साथ निभाएंगे। सामाजिक दायरा बढ़ेगा और महत्वपूर्ण लोगों से मुलाकात हो सकती है। कर्क राशि के लिए दिन शुभ संकेत लेकर आया है। घर में मांगलिक कार्यों की योजना बन सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और धन लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। करियर में भी नई संभावनाएं सामने आएंगी। सिंह राशि वालों का प्रभाव और सम्मान बढ़ेगा। नेतृत्व क्षमता के कारण कार्यस्थल पर विशेष पहचान मिलेगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता प्राप्त होगी और आर्थिक लाभ के योग बने रहेंगे। कन्या राशि के जातकों को खर्चों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी गई है। बजट से अधिक खर्च आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। विदेश, कानून या लंबी दूरी से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत होगी। धैर्य और समझदारी से काम लें। तुला राशि वालों के लिए करियर और व्यापार में उन्नति के संकेत हैं। आत्मविश्वास से लिए गए फैसले लाभदायक साबित होंगे। रिश्तों में मधुरता बढ़ेगी और लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। वृश्चिक राशि के लोगों को पद, प्रतिष्ठा और सम्मान में वृद्धि मिलने के योग हैं। प्रभावशाली लोगों से संपर्क भविष्य में लाभ पहुंचा सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी। धनु राशि के लिए दिन भाग्यवृद्धि का संकेत दे रहा है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। धन संबंधी शुभ समाचार मिलने की संभावना है और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। मकर राशि वालों को नियम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है। जोखिम भरे निवेश या बड़े फैसलों से फिलहाल दूरी बनाए रखें। स्वास्थ्य और खानपान पर विशेष ध्यान दें। कुंभ राशि के जातकों के लिए दिन काफी अनुकूल रहेगा। परिवार में खुशियों का माहौल रहेगा और दांपत्य जीवन में मधुरता बढ़ेगी। कार्यक्षेत्र में आपकी उपलब्धियों की सराहना होगी। हालांकि आर्थिक लेनदेन में हड़बड़ी से बचें और सोच-समझकर निर्णय लें। मीन राशि वालों को मेहनत और सतर्कता के साथ आगे बढ़ना होगा। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। वाणी में संयम रखें और सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। इससे सफलता के नए रास्ते खुलेंगे। कुल मिलाकर 19 जून का दिन अधिकांश राशियों के लिए प्रगति और अवसर लेकर आएगा। सही निर्णय, धैर्य और सकारात्मक सोच आपके लिए सफलता के द्वार खोल सकती है।

योग से बनेगा बच्चों का मजबूत शरीर और तेज दिमाग जानें आसान असरदार आसन

नई दिल्ली । हर साल इक्कीस जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। योग केवल एक अभ्यास नहीं है बल्कि यह जीवन जीने की एक स्वस्थ पद्धति है। योग से शरीर मन और श्वास तीनों को संतुलन मिलता है। बच्चों के लिए योग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही होती है। बदलते मौसम में बच्चों को सर्दी जुकाम और संक्रमण जल्दी घेर लेते हैं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। नियमित योग अभ्यास से शरीर की इम्यूनिटी मजबूत होती है और बच्चे कम बीमार पड़ते हैं। धनुरासन बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस आसन को करने से शरीर की पाचन प्रणाली सक्रिय होती है और पेट संबंधी समस्याएं कम होती हैं। बच्चे जब नियमित रूप से धनुरासन का अभ्यास करते हैं तो उनकी रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है और शरीर में लचीलापन आता है। इस आसन में पेट के बल लेटकर पैरों को पीछे की ओर मोड़कर हाथों से पकड़ना होता है। धीरे धीरे सांसों के साथ शरीर को ऊपर उठाने से पूरे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर अधिक ऊर्जावान महसूस करता है। चक्रासन बच्चों के लिए एक प्रभावी योगासन है। यह आसन शरीर की शक्ति और संतुलन को बढ़ाता है। इस अभ्यास से नर्वस सिस्टम सक्रिय होता है और श्वसन क्षमता में सुधार आता है। नियमित अभ्यास करने से हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता बेहतर होती है। बच्चे जब खेल खेल में इस आसन को सीखते हैं तो उनकी शारीरिक क्षमता तेजी से विकसित होती है। इस आसन में सावधानी आवश्यक होती है ताकि गर्दन कलाई और कंधों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। सही मार्गदर्शन में यह आसन बच्चों के संपूर्ण विकास में सहायक होता है। शवासन योग का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण आसन माना जाता है। यह शरीर और मन दोनों को गहरी शांति प्रदान करता है। इस आसन को करने से तनाव और मानसिक थकान कम होती है। बच्चे जब पढ़ाई और खेल के बाद इस आसन का अभ्यास करते हैं तो उनका मन स्थिर होता है और ध्यान क्षमता बढ़ती है। शवासन में शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़कर सांसों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इससे नींद की गुणवत्ता में सुधार आता है और शरीर की ऊर्जा पुनः प्राप्त होती है। नियमित अभ्यास से बच्चों में एकाग्रता और आत्म नियंत्रण विकसित होता है। बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए योग एक सरल और प्रभावी साधन है। जब बच्चे रोजाना योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करते हैं तो उनका शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। योग केवल शरीर को मजबूत नहीं बनाता बल्कि यह मन को भी शांत और स्थिर रखता है। आज के समय में जब बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं तब योग उन्हें प्रकृति और अपने शरीर से जोड़ने का कार्य करता है। माता पिता और शिक्षक यदि बच्चों को छोटी उम्र से ही योग की आदत डालें तो उनका भविष्य अधिक स्वस्थ और संतुलित बन सकता है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक अवसर नहीं है बल्कि यह हमें यह याद दिलाता है कि योग को जीवन का हिस्सा बनाना कितना आवश्यक है। नियमित अभ्यास से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक मजबूती से कर पाते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में भारत ने रचा नया इतिहास, तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बना सेक्टर; एआई और डेटा सेंटर निर्माण से मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और अब यह देश से निर्यात होने वाली वस्तुओं की श्रेणी में तीसरे सबसे बड़े स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत के औद्योगिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस प्रगति को देश की आर्थिक मजबूती और दीर्घकालिक औद्योगिक रणनीति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। एक समय था जब इस क्षेत्र का लक्ष्य केवल शीर्ष दस निर्यात श्रेणियों में शामिल होना था, लेकिन लगातार बढ़ती उत्पादन क्षमता, निवेश और वैश्विक मांग के कारण यह क्रमशः आगे बढ़ते हुए अब तीसरे स्थान तक पहुंच गया है। वर्तमान में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण उद्योग लगभग 13 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है। इसी क्रम में महाराष्ट्र के पुणे स्थित रंजनगांव में एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण इकाई का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र आधुनिक तकनीकों पर आधारित उपकरणों के निर्माण के लिए विकसित किया गया है और इसे देश की तकनीकी अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नई इकाई घरेलू जरूरतों की पूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भी उत्पादन करेगी, जिससे भारत के निर्यात को अतिरिक्त बल मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई वर्तमान समय में वैश्विक आर्थिक विकास की प्रमुख शक्ति बनकर उभरी है। दुनिया भर में एआई आधारित डेटा सेंटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है और इनके संचालन के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का निर्माण भी अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह केवल उपभोक्ता बाजार तक सीमित न रहे, बल्कि एआई और डेटा सेंटर उद्योग के लिए जरूरी प्रमुख तकनीकी उपकरणों का उत्पादन भी देश के भीतर ही करे। उन्होंने बताया कि नई विनिर्माण इकाई में एआई सिस्टम, डेटा सेंटर उपकरण, 5जी नेटवर्किंग उत्पाद, उच्च क्षमता वाले नेटवर्किंग समाधान, औद्योगिक ऊर्जा प्रणाली इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल एवं उन्नत तकनीकी उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। इससे भारत की तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में उसकी भागीदारी और मजबूत होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में बढ़ोतरी केवल निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव रोजगार, कौशल विकास और स्थानीय उद्योगों पर भी पड़ता है। नई परियोजना के माध्यम से स्थानीय स्तर पर लगभग 11,000 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसके अलावा बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी वैश्विक तकनीकी आपूर्ति शृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा। इस परियोजना के माध्यम से स्थानीयकरण को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे कई इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों और घटकों का उत्पादन देश के भीतर किया जा सकेगा। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को नई संभावनाएं प्राप्त होंगी। साथ ही भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में भी वृद्धि होगी। उद्योग जगत के जानकारों का मानना है कि इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में लगातार हो रही प्रगति भारत को वैश्विक तकनीकी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एआई, डेटा सेंटर और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक वृद्धि, निर्यात क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।

अमेरिका-ईरान समझौते में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका चर्चा में, शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर के साथ कूटनीतिक सफलता का किया दावा

नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। इस समझौते को लेकर पाकिस्तान भी वैश्विक चर्चा का हिस्सा बन गया है, क्योंकि उसने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का दावा किया है। समझौते पर अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी मध्यस्थ के रूप में दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। समझौते के बाद पाकिस्तान सरकार की ओर से जारी संदेशों में इसे ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि यह समझौता कई महीनों से जारी तनाव और टकराव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, दोनों देशों द्वारा संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना इस बात का संकेत है कि जटिल अंतरराष्ट्रीय विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से भी संभव है। समझौते के प्रमुख बिंदुओं में क्षेत्रीय समुद्री मार्गों की सामान्य स्थिति बहाल करने और तनाव कम करने से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त होने की उम्मीद जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और पिछले कुछ समय से इसके संचालन को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बनी हुई थी। समझौते के बाद ऊर्जा बाजारों और वैश्विक व्यापार गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की जा रही है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस अवसर पर अमेरिका और ईरान दोनों देशों के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि समझौते तक पहुंचना आसान प्रक्रिया नहीं थी। उन्होंने इसे धैर्य, संवाद और राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय शांति केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि निरंतर कूटनीतिक प्रयासों और आपसी विश्वास निर्माण से सुनिश्चित की जा सकती है। हालांकि इस समझौते को लेकर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता तत्काल तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकता है, लेकिन इसकी दीर्घकालिक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संबंधित पक्ष इसके प्रावधानों का किस प्रकार पालन करते हैं। पिछले वर्षों में अमेरिका और ईरान के संबंधों में उतार-चढ़ाव और अविश्वास का लंबा इतिहास रहा है, जिसके कारण समझौते की स्थिरता को लेकर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक परिस्थितियां अत्यंत जटिल हैं, जहां कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के हित जुड़े हुए हैं। ऐसे में किसी भी समझौते की सफलता केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उसका प्रभाव व्यापक क्षेत्रीय संतुलन पर भी पड़ता है। इसी कारण आने वाले दिनों में विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाओं और आगे की कूटनीतिक गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। फिलहाल इस समझौते ने संघर्ष और टकराव के माहौल में संवाद की संभावना को मजबूत किया है। पाकिस्तान इसे अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर ध्यान केंद्रित किए हुए है कि समझौते के बाद क्षेत्र में वास्तविक स्थिरता और शांति स्थापित होती है या नहीं। आने वाले सप्ताह इस समझौते की प्रभावशीलता और इसके व्यापक परिणामों को समझने के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे।