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प्रधानमंत्री मोदी 20 जून को किसानों के खातों में भेजेंगे 18,880 करोड़ रुपये, पीएम-किसान की 23वीं किस्त के साथ कई कृषि योजनाओं को भी मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 जून को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 23वीं किस्त जारी करेंगे। इस अवसर पर देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में लगभग 18,880 करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किए जाएंगे। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली के माध्यम से किसानों तक पहुंचेगी, जिससे उन्हें बिना किसी बिचौलिए के आर्थिक सहायता उपलब्ध हो सकेगी। प्रधानमंत्री पश्चिम बंगाल के हुगली जिले स्थित तारकेश्वर से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के दौरान केवल पीएम-किसान योजना की किस्त जारी नहीं की जाएगी, बल्कि कृषि, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन, शिलान्यास और लोकार्पण भी किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य पूर्वी भारत, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, को विकास की नई गति प्रदान करना है। पीएम-किसान योजना देश के करोड़ों किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहारा बन चुकी है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6,000 रुपये की सहायता तीन समान किस्तों में प्रदान की जाती है। 2019 में शुरू हुई इस योजना के माध्यम से अब तक देशभर के किसानों को 4.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की जा चुकी है। 23वीं किस्त जारी होने के बाद यह आंकड़ा और अधिक बढ़ जाएगा। इस कार्यक्रम के दौरान कृषि क्षेत्र में तकनीकी बदलाव को बढ़ावा देने वाली कई नई पहलों का शुभारंभ भी किया जाएगा। डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीटेक आधारित सुविधाओं को विस्तार दिया जाएगा, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक, बेहतर डेटा प्रबंधन और स्मार्ट कृषि समाधान उपलब्ध हो सकेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना जैसी योजनाओं को भी नई दिशा मिलेगी। कृषि सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का भी विस्तार किया जाएगा। इन योजनाओं की संयुक्त लागत लगभग 12,200 करोड़ रुपये बताई गई है। सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान करीब 1.10 करोड़ किसानों को फसल बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। इसके अंतर्गत लगभग 30 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बीमा कवरेज में शामिल किया जाएगा, जबकि 28,140 करोड़ रुपये मूल्य की फसलों को सुरक्षा प्रदान करने की योजना है। पश्चिम बंगाल को भी इस कार्यक्रम से विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य के 45 लाख से अधिक किसानों को लगभग 907 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्राप्त होगी। इससे राज्य में पीएम-किसान योजना के तहत वितरित कुल राशि 15,000 करोड़ रुपये से अधिक हो जाएगी। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और बीमा सुरक्षा का यह संयोजन किसानों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा तथा कृषि निवेश को बढ़ावा देगा। केंद्र सरकार का कहना है कि कृषि, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और तकनीकी नवाचारों को एक साथ आगे बढ़ाकर किसानों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आगामी कार्यक्रम को इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, सुरक्षा और आधुनिकता को नई गति मिलने की उम्मीद है।

WhatsApp अब सिर्फ मैसेजिंग ऐप नहीं, Meta ने भारत में लॉन्च किया प्रीमियम ‘WhatsApp Plus’; ₹79 महीने में मिलेंगे एक्सक्लूसिव फीचर्स, AI रणनीति से जुड़ा बड़ा कदम

नई दिल्ली । भारत के डिजिटल संचार बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी कंपनी Meta ने भारतीय यूजर्स के लिए WhatsApp Plus नामक प्रीमियम सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च कर दी है। इस नई सेवा के तहत यूजर्स को कई अतिरिक्त और विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनके लिए उन्हें प्रति माह 79 रुपये का शुल्क देना होगा। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि WhatsApp का सामान्य संस्करण पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेगा और उसके मौजूदा फीचर्स में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। भारत WhatsApp के सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है, जहां करोड़ों लोग रोजाना इस प्लेटफॉर्म का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक संवाद के लिए करते हैं। ऐसे में WhatsApp Plus को कंपनी की नई कारोबारी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य प्रीमियम सेवाओं के जरिए अतिरिक्त राजस्व अर्जित करना है। नई सेवा के तहत यूजर्स को अपने WhatsApp अनुभव को अधिक व्यक्तिगत बनाने का अवसर मिलेगा। प्रीमियम सदस्य अपनी पसंद के अनुसार ऐप की थीम बदल सकेंगे और मोबाइल स्क्रीन पर दिखाई देने वाले WhatsApp आइकन को भी नया रूप दे सकेंगे। इसके अलावा विशेष स्टिकर्स और एक्सक्लूसिव रिंगटोन्स जैसी सुविधाएं भी केवल सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध रहेंगी। कंपनी ने चैट मैनेजमेंट से जुड़े फीचर्स में भी सुधार किया है। WhatsApp Plus उपयोगकर्ताओं को अधिक संख्या में चैट्स पिन करने की सुविधा मिलेगी, जिससे महत्वपूर्ण बातचीत को आसानी से शीर्ष पर रखा जा सकेगा। साथ ही चैट सूची को बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने के लिए अतिरिक्त विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएंगे। Meta का मानना है कि ये फीचर्स उन यूजर्स के लिए उपयोगी साबित होंगे जो WhatsApp का व्यापक और नियमित उपयोग करते हैं। WhatsApp Plus की शुरुआत के साथ कंपनी नए ग्राहकों को एक महीने का निःशुल्क ट्रायल भी उपलब्ध करा रही है। ट्रायल अवधि समाप्त होने के बाद सब्सक्रिप्शन स्वतः नवीनीकृत हो सकता है। इसलिए उपयोगकर्ताओं को अपनी सदस्यता की स्थिति पर ध्यान देना होगा, विशेषकर तब जब वे सेवा को जारी नहीं रखना चाहते हों। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल प्रीमियम फीचर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि Meta की व्यापक कृत्रिम बुद्धिमत्ता रणनीति का भी हिस्सा है। पिछले कुछ समय में कंपनी ने AI आधारित सेवाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश किया है। WhatsApp में Meta AI के एकीकरण के बाद कंपनी के सर्वर और तकनीकी संसाधनों पर खर्च बढ़ा है। ऐसे में WhatsApp Plus को आय के नए स्रोत के रूप में देखा जा रहा है, जो भविष्य की तकनीकी परियोजनाओं को वित्तीय आधार प्रदान कर सकता है। डिजिटल उद्योग के जानकारों का कहना है कि दुनिया भर में कई टेक कंपनियां अब फ्रीमियम मॉडल की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें मूल सेवाएं मुफ्त रहती हैं जबकि उन्नत सुविधाओं के लिए भुगतान करना पड़ता है। Meta का यह कदम भी उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय उपभोक्ता इन अतिरिक्त सुविधाओं के लिए मासिक शुल्क देने को कितना तैयार होते हैं। भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील बाजार में किसी भी प्रीमियम सेवा की सफलता उसके वास्तविक उपयोग और ग्राहकों को मिलने वाले अतिरिक्त लाभों पर निर्भर करती है। फिलहाल Meta ने स्पष्ट कर दिया है कि WhatsApp Plus पूरी तरह वैकल्पिक सेवा है और सामान्य उपयोगकर्ताओं के लिए WhatsApp का अनुभव पहले की तरह निशुल्क और उपलब्ध बना रहेगा।

टेलीग्राम पर केंद्र का सख्त रुख, हाई कोर्ट में कहा- आतंकी गतिविधियों और अपराधों का प्रमुख माध्यम बन रहा प्लेटफॉर्म

नई दिल्ली । देश में लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। एक ओर केंद्र सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध और परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा का हवाला देते हुए प्लेटफॉर्म पर अस्थायी प्रतिबंध के अपने फैसले का बचाव कर रही है, वहीं दूसरी ओर कंपनी इस कार्रवाई को न्यायालय में चुनौती दे रही है। इस पूरे मामले ने डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दिल्ली हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। सरकार की ओर से कहा गया कि यह प्लेटफॉर्म कई मामलों में अपराधियों और असामाजिक तत्वों के लिए सुविधाजनक माध्यम बनता जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इसकी कुछ तकनीकी विशेषताएं ऐसी हैं, जिनके कारण संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को बताया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद ही कार्रवाई की गई है। अधिकारियों के अनुसार इस विषय पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने विभिन्न पहलुओं का परीक्षण किया था। समिति ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट, तकनीकी मूल्यांकन और प्लेटफॉर्म से जुड़े जोखिमों का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं। सरकार का दावा है कि निर्णय किसी एक घटना के आधार पर नहीं बल्कि व्यापक सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर लिया गया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठाया कि क्या किसी एक वर्ग या उद्देश्य की सुरक्षा के लिए व्यापक स्तर पर उपयोगकर्ताओं के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है। यह सवाल डिजिटल युग में नागरिक अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बीच संतुलन की जटिलता को दर्शाता है। अदालत ने इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनीं और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर विशेष रूप से चिंता का विषय हैं। इनमें संदेशों और उनसे जुड़े समय संबंधी विवरणों में बदलाव की क्षमता को लेकर सवाल उठाए गए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसे फीचर जांच प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं और संवेदनशील मामलों में तथ्यात्मक सत्यापन को जटिल बना सकते हैं। इसी आधार पर सरकार ने प्लेटफॉर्म की जवाबदेही को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। टेलीग्राम का पक्ष है कि किसी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग के लिए पूरी सेवा को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंपनी का मानना है कि अपराध रोकने के लिए तकनीकी सहयोग और नियामकीय उपाय बेहतर विकल्प हो सकते हैं। कंपनी यह भी कह रही है कि किसी प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने से समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं होती, क्योंकि गलत गतिविधियों में शामिल लोग अन्य डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी कर सकते हैं। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में हाल के महीनों में सामने आए कुछ संवेदनशील मामलों और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया जा रहा है। इन्हीं चिंताओं के मद्देनजर सरकार ने सीमित अवधि के लिए प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया था। इस फैसले का असर देश के करोड़ों उपयोगकर्ताओं पर पड़ा, जिनमें छात्र, व्यवसायी, कंटेंट क्रिएटर और सामान्य उपभोक्ता शामिल हैं। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म के संचालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी जवाबदेही और डिजिटल अधिकारों से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।

युद्ध का नया कमांडर बना AI! 96 घंटे में 2,000 ठिकानों पर हमलों के दावे से बढ़ी चिंता, बदल रही वैश्विक युद्ध की तस्वीर

नई दिल्ली । आधुनिक युद्ध की परिभाषा तेजी से बदल रही है और अब केवल मिसाइल, टैंक या लड़ाकू विमान ही किसी सैन्य शक्ति की पहचान नहीं रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने युद्धक्षेत्र में अपनी ऐसी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी है, जिसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के दौरान सामने आए दावों ने यह संकेत दिया है कि भविष्य के युद्धों में AI की भूमिका निर्णायक हो सकती है। संघर्ष के दौरान ऐसी रिपोर्टें सामने आईं कि अमेरिकी सैन्य अभियानों में उन्नत AI तकनीकों का उपयोग किया गया। दावा किया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणालियों ने बेहद कम समय में बड़ी मात्रा में सैन्य सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित लक्ष्यों की पहचान करने और अभियान की गति बढ़ाने में सहायता की। इससे युद्ध संचालन की पारंपरिक अवधारणाओं पर नई चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि AI की सबसे बड़ी ताकत विशाल डेटा को कुछ ही सेकंड में प्रोसेस करने की क्षमता है। आधुनिक युद्ध में उपग्रह चित्रों, ड्रोन फीड, रडार संकेतों, संचार नेटवर्क और खुफिया सूचनाओं से लगातार डेटा प्राप्त होता है। AI इन जानकारियों का विश्लेषण कर कमांडरों को तेजी से निर्णय लेने में मदद कर सकता है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख सैन्य शक्तियां अब AI आधारित रक्षा प्रणालियों में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। युद्धक्षेत्र में ड्रोन तकनीक का बढ़ता प्रभाव भी इसी परिवर्तन का हिस्सा माना जा रहा है। विशेष रूप से ड्रोन स्वॉर्म तकनीक ने सैन्य रणनीति को नया आयाम दिया है। इस व्यवस्था में बड़ी संख्या में ड्रोन एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर काम करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर अपनी भूमिकाएं स्वतः बदल सकते हैं। यदि कोई ड्रोन नष्ट हो जाए तो दूसरा उसकी जिम्मेदारी संभाल लेता है। इससे हमले अधिक प्रभावी और लचीले बन जाते हैं। AI का प्रभाव केवल भौतिक युद्ध तक सीमित नहीं है। साइबर युद्ध के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। आधुनिक सुरक्षा ढांचे में AI नेटवर्क पर होने वाले संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने, साइबर हमलों को रोकने और संवेदनशील प्रणालियों की निगरानी करने में मदद कर रहा है। दूसरी ओर, यही तकनीक साइबर हमलों को अधिक जटिल और प्रभावशाली बनाने के लिए भी इस्तेमाल की जा सकती है। इस कारण साइबर सुरक्षा अब वैश्विक रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार आने वाले वर्षों में AI आधारित युद्ध मॉडल और अधिक विकसित हो सकते हैं। भविष्य में ऐसी प्रणालियां देखने को मिल सकती हैं जो इंसानी सैनिकों, स्वायत्त ड्रोन, रोबोटिक वाहनों और निगरानी नेटवर्क के बीच समन्वय स्थापित कर युद्ध संचालन को अधिक तेज और सटीक बनाएंगी। इससे सैन्य अभियानों की गति और प्रभावशीलता दोनों में वृद्धि होने की संभावना है। हालांकि इस तकनीकी प्रगति के साथ गंभीर नैतिक और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि घातक हथियारों को पूरी तरह स्वायत्त निर्णय लेने की क्षमता दे दी गई तो जवाबदेही, नियंत्रण और मानव सुरक्षा से जुड़े बड़े प्रश्न खड़े हो सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया भर में AI आधारित सैन्य तकनीकों के नियमन और अंतरराष्ट्रीय मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। स्पष्ट है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गई है। यह वैश्विक सुरक्षा, सैन्य रणनीति और शक्ति संतुलन का नया केंद्र बनती जा रही है। आने वाले समय में युद्ध केवल सैनिकों और हथियारों से नहीं, बल्कि एल्गोरिद्म, डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्षमता से भी तय होते दिखाई दे सकते हैं।

मई में बॉक्स ऑफिस पर 1138 करोड़ की बारिश, ‘करुप्पु’ और ‘दृश्यम 3’ बने गेमचेंजर, बॉलीवुड की 8 बड़ी फिल्में हुईं फ्लॉप

नई दिल्ली । मई 2026 का महीना भारतीय फिल्म उद्योग के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा। बॉक्स ऑफिस पर कुल 1138 करोड़ रुपये का कारोबार दर्ज किया गया, जिसने यह साबित कर दिया कि दर्शक आज भी अच्छी कहानी और मजबूत कंटेंट को हाथोंहाथ लेते हैं। हालांकि इस कमाई का बड़ा हिस्सा कुछ चुनिंदा फिल्मों के खाते में गया, जबकि कई बहुप्रतीक्षित बॉलीवुड फिल्में उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं। महीने की सबसे बड़ी सफलता साउथ सिनेमा के नाम रही। तमिल एक्शन-ड्रामा ‘करुप्पु’ ने रिलीज के साथ ही बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार प्रदर्शन किया। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों का शानदार समर्थन मिला। दमदार कहानी, जबरदस्त एक्शन और मजबूत स्टारकास्ट की बदौलत फिल्म ने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शानदार कारोबार किया। इसके अलावा ‘दृश्यम 3’ ने भी दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज पैदा किया और अपनी रिलीज के बाद लगातार रिकॉर्ड तोड़ कमाई दर्ज की। मोहनलाल स्टारर ‘दृश्यम 3’ ने न सिर्फ मलयालम सिनेमा बल्कि पूरे भारतीय बॉक्स ऑफिस में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। फिल्म की कहानी, सस्पेंस और जॉर्जकुट्टी के किरदार की लोकप्रियता ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह रही कि फिल्म कई क्षेत्रों में हाउसफुल शो के साथ आगे बढ़ती रही। दूसरी ओर बॉलीवुड के लिए मई का महीना निराशाजनक साबित हुआ। बड़े सितारों और भारी-भरकम प्रचार के बावजूद कई फिल्में दर्शकों को प्रभावित नहीं कर पाईं। रिपोर्ट के अनुसार बॉलीवुड की करीब आठ फिल्में बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप साबित हुईं। इनमें कुछ ऐसी फिल्में भी शामिल रहीं जिनसे निर्माताओं को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन कमजोर कहानी, खराब वर्ड ऑफ माउथ और साउथ फिल्मों के दबदबे के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि अब दर्शकों की पसंद में बड़ा बदलाव आया है। केवल स्टार पावर के दम पर फिल्में सफल नहीं हो रही हैं, बल्कि कंटेंट और मनोरंजन का स्तर सबसे बड़ा फैक्टर बन चुका है। यही कारण है कि क्षेत्रीय सिनेमा लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और हिंदी फिल्मों को कड़ी टक्कर दे रहा है। मई महीने की रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि भारतीय सिनेमा में साउथ इंडस्ट्री का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। ‘करुप्पु’ और ‘दृश्यम 3’ जैसी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर कमाल किया, बल्कि यह भी साबित किया कि अच्छी कहानी भाषा की सीमाओं से परे होती है। इन फिल्मों ने हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी शानदार प्रदर्शन किया। कुल मिलाकर मई 2026 भारतीय बॉक्स ऑफिस के लिए यादगार महीना रहा। जहां कुछ फिल्मों ने सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित किए, वहीं कई बड़े बैनरों और सितारों को दर्शकों की बेरुखी का सामना करना पड़ा। आने वाले महीनों में भी बॉक्स ऑफिस पर इसी तरह की कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है, जहां कंटेंट ही असली किंग साबित होगा।

सोशल मीडिया से दूरी और डिजिटल शांति का नया विकल्प, लॉन्च हुआ Commodore Callback 8020; Android Apps सपोर्ट के साथ Flip Phone ने खींचा ध्यान

नई दिल्ली । स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग और लगातार बढ़ते स्क्रीन टाइम के बीच टेक्नोलॉजी बाजार में एक अलग सोच वाला डिवाइस सामने आया है। Commodore ने अपना नया Callback 8020 Flip Phone लॉन्च किया है, जिसे उन लोगों के लिए तैयार किया गया है जो आधुनिक तकनीक का लाभ तो चाहते हैं, लेकिन सोशल मीडिया, अनावश्यक नोटिफिकेशन और लगातार ऑनलाइन रहने की आदत से दूरी बनाना चाहते हैं। कंपनी इसे पारंपरिक फीचर फोन और आधुनिक स्मार्टफोन के बीच का संतुलित विकल्प बता रही है। डिजिटल जीवनशैली में बढ़ती व्यस्तता और स्मार्टफोन पर बढ़ती निर्भरता के बीच Callback 8020 को एक ऐसे उपकरण के रूप में पेश किया गया है जो उपयोगकर्ताओं को डिजिटल विकर्षणों से राहत दिलाने का प्रयास करता है। इस फोन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, वेब ब्राउजर और ईमेल जैसी सुविधाओं को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया है, ताकि उपयोगकर्ता का ध्यान केवल आवश्यक संचार और सीमित डिजिटल गतिविधियों पर केंद्रित रहे। फोन की कीमत 499 डॉलर रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 42 हजार रुपये के बराबर है। हालांकि इस कीमत पर बाजार में कई उन्नत स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, लेकिन कंपनी का लक्ष्य सीधे स्मार्टफोन बाजार से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। इसके बजाय यह उन उपभोक्ताओं को आकर्षित करना चाहती है जो तकनीक का उपयोग नियंत्रित और संतुलित तरीके से करना चाहते हैं। Callback 8020 की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्राइवेसी-केंद्रित ऑपरेटिंग सिस्टम माना जा रहा है। कंपनी का दावा है कि यह डिवाइस पारंपरिक एंड्रॉयड सिस्टम का उपयोग किए बिना भी अधिकांश एंड्रॉयड एप्लिकेशन चलाने में सक्षम है। इसके अलावा उपयोगकर्ता चाहें तो फोन की टचस्क्रीन सुविधा को पूरी तरह बंद कर सकते हैं, जिससे डिवाइस का अनुभव और अधिक सरल तथा सीमित हो जाता है। फोन में T9 स्टाइल टेक्स्टिंग, हाई-डेफिनिशन ऑडियो सपोर्ट, एफएम रेडियो और एलईडी नोटिफिकेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं भी दी गई हैं। इन फीचर्स का उद्देश्य उपयोगकर्ता को आवश्यक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जबकि उसे अनावश्यक डिजिटल व्यस्तताओं से दूर रखना है। कंपनी का मानना है कि आधुनिक उपयोगकर्ता अब केवल अधिक फीचर्स नहीं, बल्कि बेहतर डिजिटल संतुलन भी चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के वर्षों में डिजिटल डिटॉक्स की अवधारणा तेजी से लोकप्रिय हुई है। लगातार सोशल मीडिया उपयोग, नोटिफिकेशन और ऑनलाइन गतिविधियों के कारण मानसिक तनाव, ध्यान भंग होने और उत्पादकता में कमी जैसी समस्याओं पर चर्चा बढ़ी है। ऐसे माहौल में सीमित लेकिन उपयोगी फीचर्स वाले फोन फिर से बाजार में अपनी जगह बना रहे हैं। फ्लिप फोन की वापसी को केवल पुरानी तकनीक के प्रति आकर्षण के रूप में नहीं देखा जा रहा है। युवा उपयोगकर्ता इन्हें सोशल मीडिया से दूरी बनाने और स्क्रीन टाइम कम करने के साधन के रूप में अपना रहे हैं, जबकि वरिष्ठ नागरिक इनके आसान उपयोग और सरल इंटरफेस को पसंद कर रहे हैं। फोन को बंद करने के लिए फ्लिप को बंद करना भी कई लोगों को एक स्पष्ट डिजिटल विराम का अनुभव देता है। तकनीकी बाजार में Callback 8020 जैसे उत्पाद यह संकेत दे रहे हैं कि भविष्य की प्रतिस्पर्धा केवल अधिक शक्तिशाली स्मार्टफोन बनाने तक सीमित नहीं रहेगी। उपयोगकर्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं को देखते हुए अब ऐसे उपकरणों की मांग भी बढ़ सकती है जो तकनीक और व्यक्तिगत जीवन के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करने का प्रयास करें।

शाहरुख खान ने 7 साल पहले ही कर दी थी ‘तारक मेहता’ की भविष्यवाणी! दिलीप जोशी और चंपकलाल का अनोखा कनेक्शन हुआ वायरल

नई दिल्ली । टेलीविजन के सबसे लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ को शुरू हुए लगभग दो दशक होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी इसकी लोकप्रियता बरकरार है। शो के हर किरदार ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है, खासकर जेठालाल और उनके पिता चंपकलाल की जोड़ी। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए हैं। यह वीडियो साल 2001 में रिलीज हुई फिल्म ‘वन 2 का 4’ का है, जिसमें बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान के साथ अभिनेता दिलीप जोशी भी नजर आए थे। दिलीप जोशी आज भले ही ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में जेठालाल के किरदार के लिए पहचाने जाते हों, लेकिन इससे पहले उन्होंने कई फिल्मों और टीवी शो में छोटे-बड़े किरदार निभाए थे। वायरल हो रहे इस वीडियो में एक दिलचस्प संयोग देखने को मिलता है। फिल्म ‘वन 2 का 4’ में दिलीप जोशी जिस किरदार को निभा रहे थे, उसका नाम ‘चंपक’ था। एक दृश्य में शाहरुख खान उनसे टकरा जाते हैं और गुस्से में उन्हें ‘चंपक की औलाद’ कहकर संबोधित करते हैं। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही संवाद आने वाले वर्षों में एक मजेदार संयोग के रूप में चर्चा का विषय बन जाएगा। दरअसल, सात साल बाद जब 2008 में ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ शुरू हुआ, तो दिलीप जोशी ने जेठालाल का किरदार निभाया और शो में उनके पिता का नाम चंपकलाल रखा गया। इस तरह फिल्म में शाहरुख खान द्वारा कहा गया संवाद मानो भविष्यवाणी की तरह सच साबित होता नजर आया। यही वजह है कि सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को देखकर इसे एक मजेदार संयोग और ‘भविष्यवाणी’ बता रहे हैं। वायरल क्लिप में दिखाया गया है कि दिलीप जोशी का किरदार सीढ़ियों के नीचे सो रहा होता है। तभी शाहरुख खान वहां से गुजरते हुए उससे टकरा जाते हैं और कहते हैं, “चंपक की औलाद, कितनी बार कहा है कि सीढ़ियों के सामने बिस्तर मत लगाया कर।” यह संवाद अब इंटरनेट पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। फिल्म ‘वन 2 का 4’ का निर्देशन शशिलाल के. नायर ने किया था। फिल्म में शाहरुख खान, जूही चावला और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारे नजर आए थे। हालांकि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं दिखा सकी, लेकिन इसके कुछ दृश्य आज भी दर्शकों को याद हैं। फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने दिया था। वहीं ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ की बात करें तो यह शो 2008 से लगातार दर्शकों का मनोरंजन कर रहा है। गोकुलधाम सोसाइटी की कहानी, पड़ोसियों के बीच प्यार, सामाजिक संदेश और हल्की-फुल्की कॉमेडी ने इसे भारतीय टेलीविजन का सबसे लंबे समय तक चलने वाला और पसंदीदा शो बना दिया है। अब शाहरुख खान और दिलीप जोशी से जुड़ा यह पुराना वीडियो एक बार फिर लोगों को मनोरंजन के साथ-साथ हैरान भी कर रहा है।

‘दृश्यम 3’ से ‘धुरंधर 2’ तक, इस वीकेंड OTT पर मनोरंजन का डबल डोज, रिलीज हो रही हैं 7 दमदार फिल्में-सीरीज

नई दिल्ली । वीकेंड का इंतजार कर रहे ओटीटी प्रेमियों के लिए इस बार खुशखबरी है। 19 जून को विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर एक से बढ़कर एक फिल्में और वेब सीरीज रिलीज हो रही हैं। इस सप्ताह दर्शकों को सस्पेंस, थ्रिलर, रोमांस, कॉमेडी और एक्शन का भरपूर मिश्रण देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि कई बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट्स भी इसी शुक्रवार डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दस्तक दे रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा ‘दृश्यम 3’ की हो रही है। मोहनलाल स्टारर यह बहुप्रतीक्षित फिल्म पहले ही दर्शकों के बीच उत्सुकता पैदा कर चुकी है। जीतू जोसेफ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में जॉर्जकुट्टी की कहानी एक बार फिर नए मोड़ के साथ आगे बढ़ती नजर आएगी। फिल्म मलयालम के साथ अन्य भाषाओं में भी स्ट्रीम हो रही है और इसे इस सप्ताह की सबसे बड़ी ओटीटी रिलीज माना जा रहा है। स्पाई थ्रिलर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘धुरंधर 2: द रिवेंज’ एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है। रणवीर सिंह अभिनीत यह फिल्म पहले से ही दर्शकों के बीच चर्चा में है। अब इसका इंटरनेशनल ‘अनम्यूटेड वर्जन’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज किया जा रहा है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। फिल्म में दमदार एक्शन, रोमांच और रहस्य का भरपूर तड़का देखने को मिलेगा। इमोशनल और रोमांटिक ड्रामा के शौकीनों के लिए ‘ठुकरा के मेरा प्यार’ का दूसरा सीजन भी इसी सप्ताह आ रहा है। पहले सीजन को दर्शकों ने खूब सराहा था और अब नए सीजन में रिश्तों की उलझनें, अधूरी मोहब्बत, बदला और भावनात्मक संघर्ष की कहानी को आगे बढ़ाया जाएगा। सीरीज में कई नए ट्विस्ट और सरप्राइज दर्शकों को बांधे रखने का काम करेंगे। वहीं, अपराध और सस्पेंस से भरपूर ‘अब होगा हिसाब’ भी इस वीकेंड की खास पेशकश है। शाहीर शेख अभिनीत यह सीरीज एक ऐसे शख्स की कहानी है जो अपने लापता भाई की तलाश में मानव तस्करी के बड़े नेटवर्क तक पहुंच जाता है। पंजाब की पृष्ठभूमि पर बनी यह कहानी अपराध, भ्रष्टाचार और न्याय की लड़ाई को दर्शाती है। तेलुगु दर्शकों के बीच लोकप्रिय ‘सेव द टाइगर्स’ का तीसरा सीजन भी 19 जून को रिलीज हो रहा है। कॉमेडी और पारिवारिक ड्रामा से भरपूर यह सीरीज एक बार फिर दर्शकों को हंसाने और गुदगुदाने के लिए तैयार है। मुख्य कलाकारों की तिकड़ी नए मजेदार हालातों में नजर आएगी। इंटरनेशनल कंटेंट पसंद करने वालों के लिए कोरियन ड्रामा ‘हसबैंड्स इन एक्शन’ एक दिलचस्प विकल्प है। यह कहानी दो ऐसे पुरुषों की है जो एक ही महिला से जुड़े हुए हैं और उसके अपहरण के बाद उसे बचाने के लिए मजबूरी में साथ आते हैं। एक्शन, ड्रामा और हास्य का मिश्रण इसे खास बनाता है। इसके अलावा रोमांटिक फिल्मों के शौकीनों के लिए ‘वॉयसमेल्स फॉर इसाबेल’ भी रिलीज हो रही है। यह एक भावनात्मक प्रेम कहानी है जिसमें गलत पते पर पहुंचे वॉयसमेल दो अनजान लोगों को एक-दूसरे के करीब ले आते हैं। फिल्म रिश्तों, यादों और प्रेम की संवेदनशील कहानी को खूबसूरती से प्रस्तुत करती है। कुल मिलाकर यह वीकेंड ओटीटी दर्शकों के लिए मनोरंजन का पूरा पैकेज लेकर आया है। चाहे आपको सस्पेंस पसंद हो, रोमांस, कॉमेडी या फिर एक्शन, इस शुक्रवार हर स्वाद के लिए कुछ न कुछ मौजूद है।

PhonePe Wallet पर नया चार्ज बना चर्चा का विषय, 12 महीने निष्क्रिय रहने पर लग सकती है फीस; UPI यूजर्स में बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । देश में डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ रहा है और करोड़ों लोग रोजमर्रा के लेनदेन के लिए UPI आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसी बीच PhonePe Wallet से जुड़ी एक जानकारी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गई है। वायरल दावों के अनुसार, यदि कोई उपयोगकर्ता लंबे समय तक अपने PhonePe Wallet का इस्तेमाल नहीं करता है, तो उस पर निष्क्रियता शुल्क लगाया जा सकता है। इस दावे के सामने आने के बाद डिजिटल भुगतान करने वाले कई उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और सवाल पैदा हो गए हैं। हाल के दिनों में विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ स्क्रीनशॉट साझा किए गए, जिनमें कथित तौर पर यह जानकारी दिखाई गई कि यदि PhonePe Wallet लगातार 12 महीने तक निष्क्रिय रहता है तो उस पर तिमाही आधार पर शुल्क लगाया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह शुल्क हर तीन महीने में अधिकतम 100 रुपये तक हो सकता है। इस सूचना के वायरल होते ही बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसकी वैधता और प्रभाव को लेकर चर्चा शुरू कर दी। दरअसल, कई उपभोक्ता PhonePe का उपयोग केवल UPI ट्रांजैक्शन के लिए करते हैं और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि ऐप के भीतर एक अलग डिजिटल वॉलेट सुविधा भी उपलब्ध है। PhonePe Wallet एक प्रीपेड डिजिटल वॉलेट है, जिसमें उपयोगकर्ता पहले से धनराशि जोड़कर विभिन्न भुगतान कर सकते हैं। यह बैंक खाते से सीधे होने वाले UPI भुगतान से अलग व्यवस्था पर काम करता है और विशेष रूप से छोटे तथा त्वरित लेनदेन को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल वॉलेट सेवाओं में निष्क्रिय खातों के रखरखाव को लेकर शुल्क की व्यवस्था नई बात नहीं है। कई वित्तीय और फिनटेक प्लेटफॉर्म लंबे समय तक उपयोग न होने वाले खातों के लिए प्रशासनिक या रखरखाव शुल्क से संबंधित शर्तें रखते हैं। हालांकि किसी भी शुल्क को लागू करने से पहले संबंधित नियम, शर्तें और उपयोगकर्ता को दी जाने वाली सूचना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया है कि यदि वे PhonePe Wallet को बंद करना चाहते हैं तो उन्हें पहले केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी पड़ सकती है। इसी वजह से कुछ उपभोक्ताओं ने इस व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की है। हालांकि इस विषय पर अंतिम निर्णय और प्रक्रिया संबंधित प्लेटफॉर्म की आधिकारिक शर्तों पर निर्भर करती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चर्चा केवल PhonePe Wallet से जुड़ी हुई है। सामान्य UPI भुगतान, जिसमें बैंक खाते से सीधे पैसे भेजे या प्राप्त किए जाते हैं, उस पर इस प्रकार के शुल्क का कोई प्रभाव नहीं बताया गया है। यानी जो उपयोगकर्ता केवल UPI के माध्यम से लेनदेन करते हैं और डिजिटल वॉलेट का उपयोग नहीं करते, उनके लिए नियमित भुगतान सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में उपभोक्ताओं के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वे किसी भी वित्तीय प्लेटफॉर्म की शर्तों, शुल्क संरचना और सेवा नियमों को समय-समय पर समझते रहें। इससे अनावश्यक शुल्क, भ्रम और संभावित असुविधा से बचा जा सकता है। फिलहाल PhonePe Wallet से जुड़ी इस चर्चा ने डिजिटल भुगतान क्षेत्र में निष्क्रिय खातों और उनसे जुड़े नियमों पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

'देऊळ बंद 2' के लिए फरिश्ता बने शाहरुख खान, बढ़े बजट के बीच माफ कर दिया लाखों का बिल

नई दिल्ली । मराठी सिनेमा की चर्चित फिल्म ‘देऊळ बंद 2’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन कर रही है। फिल्म ने कमाई के नए रिकॉर्ड बनाते हुए 80 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन हासिल कर लिया है। दर्शकों से मिल रहे जबरदस्त प्यार के बीच अब फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा सामने आया है, जिसमें बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान की दरियादिली की चर्चा हो रही है। फिल्म के निर्देशक और अभिनेता प्रवीण तरडे ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि ‘देऊळ बंद 2’ के निर्माण के दौरान उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। खासतौर पर फिल्म की कलर ग्रेडिंग का खर्च उनके अनुमान से कहीं अधिक बढ़ गया था। उन्होंने बताया कि फिल्म की पोस्ट-प्रोडक्शन प्रक्रिया के लिए शाहरुख खान की कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की सेवाएं ली गई थीं। प्रवीण तरडे के मुताबिक शुरुआत में कलर ग्रेडिंग का बजट लगभग 12 लाख रुपये तय किया गया था, लेकिन फिल्म की शूटिंग और तकनीकी जरूरतों के बढ़ने के साथ यह खर्च बढ़कर करीब 42 लाख रुपये तक पहुंच गया। मराठी फिल्म इंडस्ट्री के लिहाज से यह एक बड़ी राशि थी और निर्माता-निर्देशक के लिए इसे वहन करना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब यह जानकारी शाहरुख खान तक पहुंची तो उन्होंने सबसे पहले अपनी टीम से फिल्म के बारे में पूछा। शाहरुख जानना चाहते थे कि फिल्म कैसी बनी है और दर्शकों पर उसका क्या प्रभाव पड़ रहा है। टीम ने उन्हें बताया कि फिल्म बेहद अच्छी है और भावनात्मक रूप से लोगों को जोड़ने वाली कहानी पेश करती है। इसके बाद शाहरुख खान ने अपनी टीम से कहा कि अगर फिल्म इतनी अच्छी है तो पैसों को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करनी चाहिए। प्रवीण तरडे के अनुसार, शाहरुख ने मजाकिया लेकिन भावुक अंदाज में कहा, “बिल माफ करो। पिक्चर अच्छी है ना? दे दो। यह मराठी फिल्म है, पैसों की बात बाद में देख लेंगे।” शाहरुख खान के इस कदम ने न केवल फिल्म की टीम का मनोबल बढ़ाया, बल्कि यह भी दिखाया कि वह क्षेत्रीय सिनेमा और अच्छी कहानियों को कितना महत्व देते हैं। यही वजह है कि यह किस्सा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी शाहरुख खान की खूब सराहना हो रही है। वहीं, ‘देऊळ बंद 2’ की सफलता की बात करें तो फिल्म ने मराठी सिनेमा में नई मिसाल कायम की है। लगभग 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 80 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन हासिल कर लिया है। फिल्म में प्रवीण तरडे, महेश मांजरेकर, मोहन जोशी, स्नेहल तरडे, प्रसाद ओक, ओम भुटकर और मंगेश देसाई जैसे कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं। यह फिल्म साल 2015 में आई ‘देऊळ बंद’ का सीक्वल है। पहले भाग को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया था और अब दूसरा भाग उससे भी बड़ी सफलता हासिल करता नजर आ रहा है। फिल्म की रिकॉर्डतोड़ कमाई और शाहरुख खान से जुड़ा यह किस्सा दोनों ही इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं।