देवास के जंगल में चल रही थी अवैध पटाखा फैक्ट्री, पुलिस की दबिश में सुतली बम और बारूद जब्त

देवास । मध्यप्रदेश के देवास जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। यहां घने जंगल के बीच अवैध रूप से संचालित हो रही पटाखा फैक्ट्री का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मौके पर दबिश देकर भारी मात्रा में सुतली बम, बारूद और पटाखा बनाने की सामग्री जब्त की है। हालांकि अभी तक इस अवैध फैक्ट्री के संचालक का खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। यह मामला उदयनगर थाना क्षेत्र के पोलखाल जंगल का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार आदिवासी क्षेत्र के घने जंगल में टीन शेड के नीचे दो अवैध पटाखा फैक्ट्रियां संचालित की जा रही थीं। इसकी सूचना पुलिस को मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके पर छापा मारा। पुलिस अधीक्षक पुनीत गहलोत के निर्देशन में एडिशनल एसपी एच.एन. बाथम, उदयनगर थाना प्रभारी सी.एल. रायकवार और अधिकारी बी.डी. वीरा सहित पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। जब पुलिस टीम जंगल में पहुंची तो वहां टीन शेड के नीचे पटाखे बनाने का काम चल रहा था और कई मजदूर भी मौके पर मौजूद मिले। छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी मात्रा में सुतली बम और बारूद से भरे पैकेट बरामद हुए। इसके अलावा पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कागज, धागे, केमिकल और अन्य उपकरण भी मौके से जब्त किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक मौके से हजारों की संख्या में सुतली बम और विस्फोटक सामग्री बरामद हुई है। फिलहाल बरामद सामग्री की गिनती और जांच की प्रक्रिया जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध फैक्ट्री का संचालन कौन कर रहा था और इसमें कितने लोग शामिल हैं। प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि घने जंगल में फैक्ट्री संचालित करने के पीछे मकसद प्रशासन और पुलिस की नजरों से बचना हो सकता है। फिलहाल पुलिस मजदूरों से पूछताछ कर रही है और फैक्ट्री संचालक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रूसी तेल को लेकर अमेरिका पर ईरान का तंज, कहा- 'भारत समेत दुनिया के सामने भीख मांग रहा अमेरिका'

तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने रूसी तेल के मुद्दे पर अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो अमेरिका (United States) पहले भारत समेत कई देशों पर रूस (Russia) से तेल आयात रोकने के लिए दबाव बना रहा था, वही अब दुनिया के देशों से रूसी कच्चा तेल खरीदने की गुहार लगा रहा है। अराघची ने यह टिप्पणी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर की। उन्होंने अपनी पोस्ट में Financial Times की एक रिपोर्ट भी साझा की, जिसमें कहा गया है कि ईरान से जुड़े युद्ध ने रूस की तेल इंडस्ट्री को बड़ा फायदा पहुंचाया है। अमेरिका पर साधा निशाना अराघची ने पोस्ट में लिखा कि अमेरिका ने महीनों तक India को रूस से तेल आयात बंद करने के लिए धमकाया। लेकिन ईरान के साथ दो हफ्ते के युद्ध के बाद अब White House दुनिया के देशों—जिनमें भारत भी शामिल है—से रूसी कच्चा तेल खरीदने की अपील कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप को लगा था कि ईरान के खिलाफ कथित अवैध युद्ध का समर्थन करने से उसे रूस के खिलाफ अमेरिका का साथ मिलेगा। रूसी तेल खरीदने पर अस्थायी राहत अराघची की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी वित्त मंत्री Scott Bessent ने हाल ही में कहा कि अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने पर लगे प्रतिबंध में अस्थायी ढील देने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि वित्त विभाग ने 30 दिनों के लिए उस रूसी तेल को खरीदने की अनुमति दी है जो पहले से समुद्र में मौजूद है। कुछ दिन पहले भारत को भी इसी तरह की राहत दी गई थी। बेसेंट के मुताबिक, इस फैसले का उद्देश्य वैश्विक तेल आपूर्ति को बनाए रखना और ऊर्जा बाजार में स्थिरता लाना है। उन्होंने कहा कि इससे रूस को कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि जिस तेल को मंजूरी दी गई है वह पहले से ही समुद्र में है। ईरान युद्ध से रूस को बड़ा फायदा वहीं Financial Times की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान से जुड़े युद्ध और तेल संकट के कारण रूस को रोजाना लगभग 150 मिलियन डॉलर (करीब 1389 करोड़ रुपये) की अतिरिक्त कमाई हो रही है। इसकी एक वजह यह भी बताई जा रही है कि ईरान ने Strait of Hormuz को बंद कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संघर्ष के शुरुआती 12 दिनों में ही रूस ने तेल निर्यात से लगभग 1.3 से 1.9 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय अर्जित की। यदि मौजूदा कीमतें इसी तरह बनी रहती हैं तो महीने के अंत तक Moscow को 3.3 अरब से 5 अरब डॉलर तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
पश्चिम बंगाल चुनाव: ममता का चौका या कमल का कमाल? घुसपैठ और एसआईआर के मुद्दों के बीच दिलचस्प जंग

कोलकाता। West Bengal में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सियासी माहौल गर्म हो गया है। पिछली बार आठ चरणों में हुए मतदान के विपरीत इस बार केवल दो चरणों में चुनाव होने की संभावना ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की पार्टी All India Trinamool Congress लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर इतिहास रचेगी या Bharatiya Janata Party पहली बार सत्ता का दरवाजा खोल पाएगी। मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से ही सियासी संग्राम छिड़ा हुआ है। भाजपा कानून-व्यवस्था, घुसपैठ और 15 साल की कथित एंटी-इन्कम्बेंसी को बड़ा मुद्दा बनाकर मैदान में उतरी है, जबकि ममता बनर्जी मुस्लिम मतदाताओं के समर्थन को मजबूत बनाए रखने की कोशिश में जुटी हैं। राज्य में मुस्लिम आबादी करीब 28 प्रतिशत मानी जाती है, जो चुनावी समीकरण में अहम भूमिका निभाती है। भाजपा की नजर सत्ता पर तीन देशों—Bhutan, Nepal और Bangladesh—से घिरे इस राज्य में भाजपा पिछले ढाई दशक से सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। पिछले चुनाव में पार्टी ने Communist Party of India (Marxist) सहित वाम दलों और Indian National Congress को पीछे छोड़ते हुए मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था, लेकिन सरकार बनाने का सपना अधूरा रह गया। इस बार भाजपा ने घुसपैठ, जनसांख्यिकीय बदलाव और भ्रष्टाचार को प्रमुख मुद्दा बनाया है। साथ ही पिछले चुनाव से सबक लेते हुए पार्टी ने दलबदल कर आए नेताओं की जगह पुराने कार्यकर्ताओं को टिकट देने की रणनीति अपनाई है। 36 सीटों पर कांटे की टक्कर राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार पिछले चुनाव में करीब 36 सीटों पर जीत का अंतर 5,000 वोट से भी कम था। कई सीटों पर तो हार-जीत कुछ सौ वोटों से तय हुई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि इन सीटों पर थोड़ा सा भी वोटों का झुकाव बदला तो सत्ता का गणित पूरी तरह बदल सकता है। उत्तर बंगाल और जंगलमहल पर फोकस भाजपा खासतौर पर उत्तर बंगाल और जंगलमहल क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। Cooch Behar, Alipurduar, Jalpaiguri और Darjeeling जैसे जिलों में पिछले चुनाव में उसे अच्छी सफलता मिली थी। वहीं ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं, किसानों और गरीब वर्ग के लिए चलाई गई कल्याणकारी योजनाओं को चुनावी मैदान में अपनी सबसे बड़ी ताकत बता रही है। मुस्लिम वोट बैंक पर नजर मुस्लिम वोट बैंक बंगाल की राजनीति में निर्णायक माना जाता है। इसे साधे रखने के लिए ममता बनर्जी लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। एसआईआर के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क और संसद तक विरोध जताना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा आदिवासी, मतुआ और महिला मतदाताओं को एकजुट कर पिछली बार के लगभग सात प्रतिशत वोट अंतर को कम करने की कोशिश में है। राज्य में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari भी घुसपैठ के मुद्दे पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। नए समीकरण भी बना सकते हैं असर इस बार मुस्लिम वोटों के नए समीकरण पर भी सबकी नजर है। मुर्शिदाबाद क्षेत्र में Humayun Kabir की पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी, Asaduddin Owaisi की All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (एआईएमआईएम) और Abbas Siddiqui की Indian Secular Front (आईएसएफ) के बीच संभावित गठबंधन की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि यह समीकरण तृणमूल के लिए कुछ इलाकों में चुनौती बन सकता है। राष्ट्रीय राजनीति पर भी नजर विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल राज्य की सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तृणमूल अपना किला बचा पाएगी या भाजपा पहली बार बंगाल की सत्ता तक पहुंचने में कामयाब होगी।
ऑस्कर 2026: माइकल बी जॉर्डन और जेसी बकले बने बेस्ट एक्टर-एक्ट्रेस

वाशिंगटन। वॉशिंगटन। अमेरिकी फिल्म जगत के सबसे प्रतिष्ठित समारोह 98वें ऑस्कर अवॉर्ड का आयोजन लॉस एंजिल्स स्थित Dolby Theatre में किया गया। 98वें ऑस्कर समारोह में फिल्म One Battle After Another का दबदबा देखने को मिला। इस फिल्म ने बेस्ट पिक्चर सहित कुल छह पुरस्कार अपने नाम किए। 98वें ऑस्कर अवॉर्ड में लियोनार्डो डिकैप्रियो की ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ का दबदबा देखने को मिला। ‘वन बैटल आफ्टर अनदर’ ने बेस्ट फिल्म समेत कुल 6 अवॉर्ड अपने नाम किए। जबकि रियान कूगलर की ‘सिनर्स’ को 4 ऑस्कर अवॉर्ड मिले। माइकल बी जॉर्डन को ‘सिनर्स’ के लिए बेस्ट एक्टर और जेसी बकले को ‘हैमनेट’ के बेस्ट अभिनेत्री का अवॉर्ड मिला। यहां जानते हैं 98वें ऑस्कर्स में किस-किसने मारी बाजी? विजेताओं की पूरी लिस्ट बेस्ट फिल्म – वन बैटल आफ्टर अनदर बेस्ट एक्टर – माइकल बी जॉर्डन (सिनर्स) बेस्ट एक्ट्रेस – जेसी बकले (हैमनेट) बेस्ट डायरेक्टर – पॉल थॉमस एंडरसन (वन बैटल आफ्टर अनदर) बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर – शॉन पेन (वन बैटल आफ्टर अनदर) बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस – एमी मैडिगन (वेपन्स) बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म – सेंटीमेंटल वैल्यू बेस्ट एडिटिंग – वन बैटल आफ्टर अनदर बेस्ट ओरिजिनल स्क्रीनप्ले – सिनर्स (रयान कूगलर) बेस्ट एडॉप्टेड स्क्रीनप्ले – वन बैटल आफ्टर अनदर (पॉल थॉमस एंडरसन) बेस्ट ओरिजिनल सॉन्ग – गोल्डन (के-पॉप डेमन हंटर्स) (ईजेएई, मार्क सोननब्लिक, जूंग ग्यू क्वाक, यू द्वारा)
‘रामायण’ में ‘पंचायत’ के प्रह्लाद चा की एंट्री? कुंभकर्ण के रोल में नजर आ सकते हैं फैसल मलिक

मुंबई। निर्देशक नितेश तिवारी (Nitesh Tiwari) की मेगा बजट फिल्म रामायण (Ramayana) को लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसके बजट, तकनीक और स्टार कास्ट को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान श्रीराम की भूमिका निभाते नजर आएंगे, जबकि Sai Pallavi माता सीता का किरदार निभाएंगी। वहीं Yash रावण और Sunny Deol हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे। कुंभकर्ण के रोल में फैसल मलिक! रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकप्रिय वेब सीरीज Panchayat में ‘प्रह्लाद चा’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता Faisal Malik को फिल्म में रावण के भाई कुंभकर्ण की भूमिका के लिए चुना गया है। बताया जा रहा है कि उन्होंने इस किरदार के लिए फिल्म का पहला शेड्यूल भी पूरा कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई के प्राइम फोकस स्टूडियो में कुंभकर्ण के इंट्रोडक्शन सीन की शूटिंग की गई, जिसमें रावण की भूमिका निभा रहे यश भी मौजूद थे। सूत्रों का कहना है कि फैसल मलिक की लंबाई और व्यक्तित्व इस किरदार के लिए बिल्कुल फिट बैठते हैं। इंटरनेशनल टीम के साथ शूटिंग बताया जा रहा है कि फिल्म के कई हिस्सों की शूटिंग एक इंटरनेशनल तकनीकी टीम के साथ की जा रही है। हाई-एंड वीएफएक्स और ग्राफिक्स के जरिए इसे बड़े पैमाने पर तैयार किया जा रहा है, जिसकी तुलना James Cameron की फिल्म Avatar जैसी भव्य फिल्मों से की जा रही है। हालांकि दूसरे भाग के बड़े युद्ध दृश्यों की शूटिंग अभी बाकी है। दिवाली 2026 पर रिलीज की तैयारी रिपोर्ट्स के अनुसार ‘रामायण’ का पहला भाग Diwali 2026 के आसपास रिलीज किया जा सकता है, जिसे लेकर फैंस के बीच काफी उत्सुकता है। हालांकि अब तक फैसल मलिक की कास्टिंग को लेकर फिल्म की टीम की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। वहीं कुछ रिपोर्ट्स में Raghav Juyal के रावण के बेटे मेघनाद की भूमिका निभाने की भी चर्चा है, लेकिन इसकी भी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। फिल्म में Ravi Dubey, Kajal Aggarwal, Arun Govil, Rakul Preet Singh और Lara Dutta जैसे कलाकारों के भी शामिल होने की खबरें सामने आ चुकी हैं।
ऑस्कर 2026: व्हाइट गाउन में छाईं प्रियंका चोपड़ा, निक जोनस संग रेड कारपेट पर दिखी शानदार केमिस्ट्री

वाशिंगटन। हॉलीवुड के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समारोह ऑस्कर 2026 (Academy Awards) में भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा (Priyanka Chopra) ने अपने स्टाइल और ग्लैमर से सबका ध्यान खींच लिया। ऑस्कर 2026 के रेड कारपेट पर वह अपने पति और सिंगर Nick Jonas के साथ पहुंचीं, जहां दोनों की शानदार केमिस्ट्री चर्चा का विषय बन गई। व्हाइट गाउन में स्टनिंग अंदाज प्रियंका चोपड़ा ने इस खास मौके के लिए Dior का कस्टम व्हाइट गाउन चुना। फेदर डिटेलिंग वाले इस आउटफिट ने उनके लुक को ड्रामेटिक और एलिगेंट बना दिया। एक्ट्रेस ने मोनोटोन स्टाइल में फिटेड कोर्सेट टॉप, थाई-हाई स्लिट स्कर्ट और फेदर ट्रिम्स के साथ अपना ग्लैमरस अंदाज पेश किया। उन्होंने अपने लुक को Bvlgari के शानदार डायमंड नेकलेस से पूरा किया। हल्के मेकअप और ओपन स्लीक हेयरस्टाइल के साथ प्रियंका बेहद खूबसूरत नजर आईं। वहीं निक जोनस वेलवेट ब्लैक सूट में उनके साथ परफेक्ट मैच करते दिखाई दिए। रेड कारपेट पर दोनों ने फोटोग्राफर्स को कई पोज दिए। बतौर प्रेजेंटर हुईं शामिल इस साल प्रियंका ऑस्कर समारोह में बतौर प्रेजेंटर शामिल हुईं। उनके साथ हॉलीवुड के कई बड़े सितारे जैसे Anne Hathaway, Robert Downey Jr. और Gwyneth Paltrow भी मंच पर नजर आए। निक के हाथ का कलावा बना चर्चा का विषय ऑस्कर समारोह में शामिल होने से पहले निक जोनस ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह पानी पीते नजर आए। इस वीडियो में उनके हाथ पर बंधा कलावा लोगों का ध्यान खींचता दिखा। सोशल मीडिया पर फैंस ने मजाक में उन्हें “परफेक्ट इंडियन जीजू” तक कह दिया। वर्क फ्रंट वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा की पिछली रिलीज हॉलीवुड फिल्म The Bluff थी, जिसमें उनके अभिनय को सराहा गया। वहीं उनकी आने वाली हिंदी फिल्म निर्देशक S. S. Rajamouli के निर्देशन में बन रही वाराणसी है। इस फिल्म में उनके साथ Mahesh Babu और Prithviraj Sukumaran भी नजर आएंगे।
बेंगलुरु कैफे में ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ का सनसनीखेज बिल, लेमनेड पर भी 5% अतिरिक्त शुल्क, सोशल मीडिया पर मचा बवाल

नई दिल्ली। बेंगलुरु के थियो कैफे का एक बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने लोगों का ध्यान रेस्टोरेंट बिलिंग प्रैक्टिस और बढ़ती लागत की तरफ खींचा है। इस बिल में दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज जोड़ा गया, जो ग्राहकों के लिए चौंकाने वाला रहा। ग्राहक ने दो मिंट लेमनेड ऑर्डर किए, जिनकी कीमत 179 रुपये प्रत्येक थी। कुल सबटोटल 358 रुपये बनी, जिसमें पहले 5% डिस्काउंट (17.90 रुपये) लागू किया गया। इसके बाद स्टैंडर्ड GST (CGST 2.5% + SGST 2.5%) जोड़ा गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिल में अतिरिक्त 5% गैस क्राइसिस चार्ज (17.01 रुपये) भी शामिल किया गया, जिससे अंतिम बिल 374 रुपये तक पहुंच गया। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँसोशल मीडिया यूजर्स ने इस बिल पर जमकर मज़ाक उड़ाया। कई ने टिप्पणी की कि “लेमनेड बनाने में कौन सी गैस लगी?” और “शायद लेमनेड को फिज़्जी बनाया गया होगा।” कुछ ने इसे कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा बताते हुए चेताया कि यदि ऐसे चार्ज अनिवार्य हैं, तो 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। अन्य यूजर्स ने कहा कि यदि यह वैकल्पिक होता, तो ग्राहक इसे समझ सकते थे, लेकिन अनिवार्य चार्ज अधिकारहीन और अनुचित माना जा रहा है। पृष्ठभूमि: LPG संकट और बढ़ती लागतदेश के कई हिस्सों में LPG सिलेंडर की कमी ने रेस्टोरेंट्स और कैफे की लागत बढ़ा दी है। बेंगलुरु में भी कई स्थानों पर कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे होटल और कैफे ग्राहकों से अलग से गैस चार्ज वसूल रहे हैं। हालांकि लेमनेड जैसी ड्रिंक आमतौर पर गैस पर नहीं बनाई जाती, लेकिन बढ़ती कीमतों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण कुछ कैफे ने गैस क्राइसिस चार्ज लागू किया। मिश्रित प्रतिक्रिया और बहसकुछ लोगों ने कैफे का समर्थन किया, कहा कि गैस की कमी में यह समझदारी भरा कदम हो सकता है। वहीं, अधिकांश यूजर्स ने इसे ग्राहक हित और पारदर्शिता के खिलाफ बताया। सोशल मीडिया पर यह घटना कंज्यूमर राइट्स, बिलिंग पारदर्शिता, महंगाई और व्यवसाय की चुनौतियों पर बहस छेड़ने का कारण बनी है। बेंगलुरु के थियो कैफे ने दो मिंट लेमनेड पर 5% गैस क्राइसिस चार्ज लगाया। बिल की कुल राशि 374 रुपये तक पहुंची, जिसमें डिस्काउंट और GST शामिल हैं। सोशल मीडिया पर इसे अनुचित व्यापारिक प्रथा और मज़ाक बताया गया। बढ़ती LPG कमी और लागत ने रेस्टोरेंट्स को नए चार्ज लगाने पर मजबूर किया। घटना ने कंज्यूमर राइट्स और बिलिंग पारदर्शिता पर बहस को जन्म दिया। इस तरह, बेंगलुरु की यह घटना दिखाती है कि महंगाई, गैस संकट और सप्लाई चेन की चुनौतियाँ आम ग्राहकों तक कैसे सीधे असर डाल रही हैं, और व्यवसायों को अपने बिलिंग मॉडल में बदलाव करने पर मजबूर कर रही हैं।
EC ने चुनाव की घोषणा के तत्काल बाद पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और गृह सचिव बदले

कोलकाता। विधानसभा चुनाव (Assembly Elections.) की घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल (West Bengal ) के मुख्य सचिव (Bengal Chief Secretary) और गृह सचिव (Home Secretary) को बदलने का फैसला किया है। चुनाव की तारीखों के एलान के बाद रविवार रात आयोग ने यह आदेश जारी किया। आयोग के निर्देश के अनुसार राज्य की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह अब दुष्यंत नारियावाला को नया मुख्य सचिव बनाया गया है। इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह संघमित्रा घोष को नया गृह सचिव नियुक्त किया गया है। हटाए जा सकते हैं डीपीपी और सीपी भीइस बीच, सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर भी हटाए जा सकते हैं। चुनाव की घोषणा होते ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है। इस दौरान चुनाव आयोग को प्रशासनिक स्तर पर कई विशेष अधिकार मिल जाते हैं। आयोग जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक पदों पर तैनात अफसरों के तबादले या बदलाव का आदेश दे सकता है। पिछले चुनावों में भी आयोग ने कई जिलों के पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों को बदला था। कोलकाता पुलिस आयुक्त सहित कई वरिष्ठ पदों पर भी चुनाव से पहले तबादले के उदाहरण मिलते रहे हैं। हालांकि इस स्तर के शीर्ष पदों पर बदलाव हाल के वर्षों में बहुत कम देखने को मिला है। दुश्यंत नरियाला बने नए मुख्य सचिवनए मुख्य सचिव बनाए गए दुश्यंत नारियावाला वर्ष 1993 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। इससे पहले वह राज्य सरकार के उत्तर बंगाल विकास विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा उन्होंने आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी संभाली है। अतिरिक्त प्रभार के रूप में वह पहले सिंचाई विभाग का कामकाज भी देख चुके हैं। अब नंदिनी चक्रवर्ती को पद से हटाकर आयोग ने दुष्यंत नारियावाला को ही राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। चुनाव आयोग ने उन्हें सोमवार दोपहर तीन बजे तक अपना पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है। संघमित्रा घोष को मिली गृह सचिव की जिम्मेदारीवहीं राज्य के नए गृह सचिव के रूप में संघमित्रा घोष को नियुक्त किया गया है। गृह विभाग चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है, इसलिए यह पद काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा मतदानगौरतलब है कि पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के चुनाव की तारीखों का एलान रविवार (15 मार्च) को चुनाव आयोग ने कर दिया। निर्वाचन आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य में चरणबद्ध तरीके से अधिसूचना जारी होने से लेकर नामांकन दाखिल करने और मतदान की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख जारी कर दी। इसके मुताबिक, बंगाल में इस बार सिर्फ दो चरणों में ही चुनाव कराया जाएगा। 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को राज्य में मतदान होगा। वहीं, चार मई को मतगणना तय की गई है। चुनाव कार्यक्रम के तहत पहले चरण की अधिसूचना 30 मार्च को जारी की जाएगी, जबकि दूसरे चरण की अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। पहले चरण के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अप्रैल तय की गई है, वहीं दूसरे चरण के लिए 9 अप्रैल तक नामांकन किया जा सकेगा। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच क्रमशः 7 अप्रैल और 10 अप्रैल को होगी। वहीं उम्मीदवार पहले चरण के लिए 9 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 13 अप्रैल तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं। आदर्श आचार संहिता क्या है?आदर्श आचार संहिता राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के मार्गदर्शन के लिए निर्धारित किए गए मानकों का एक ऐसा समूह है जिसे राजनैतिक दलों की सहमति से तैयार किया गया है। आदर्श आचार संहिता में चुनाव आयोग की भूमिका अहम होती है। संविधान के अनुच्छेद 324 के अधीन संसद और राज्य विधानमंडलों के लिए स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनावों का आयोजन चुनाव आयोग का सांविधानिक कर्तव्य है। आदर्श आचार संहिता कितने दिनों तक लागू रहती है?चुनाव आयोग द्वारा चुनाव तारीखों की घोषणा की तारीख से इसे लागू किया जाता है और यह चुनाव प्रक्रिया के पूर्ण होने तक लागू रहती है। लोकसभा चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता पूरे देश में, जबकि विधानसभा चुनावों के दौरान पूरे राज्य में लागू होती है।
नेपाल में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दामों में भारी वृद्धि, जानें कितनी बढ़ी कीमतें

काठमांडू। ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध (Iran and US-Israeli War) के साथ खाड़ी देशों की वर्तमान स्थिति का हवाला देते हुए नेपाल (Nepal) में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में भारी वृद्धि (Increase Petroleum Products Prices) की घोषणा की गई है. नेपाल ऑयल निगम की रविवार देर रात तक चली बैठक में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया गया. निगम द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और आपूर्ति प्रबंधन में आ रही चुनौतियों के कारण यह निर्णय लिया गया है. नई दरें आज रात 12 बजे से लागू कर दी गई हैं। नए मूल्य समायोजन के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 31 रुपये प्रति लीटर, डीजल में 54 रुपये प्रति लीटर तथा एलपीजी गैस में 296 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी की गई है। मूल्य वृद्धि के बाद अब पेट्रोल की कीमत 188 रुपये प्रति लीटर, डीजल की कीमत 196 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी गैस का मूल्य 2,126 रुपये प्रति सिलेंडर तय किया गया है। निगम ने कहा है कि हाल के समय में मध्य पूर्व और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि हुई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है। प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया है कि नेपाल जैसे पेट्रोलियम उत्पादन न करने वाले देश के लिए अंतरराष्ट्रीय मूल्य वृद्धि का सीधा असर पड़ता है. इससे पहले भी वैश्विक परिस्थितियों के कारण आपूर्ति प्रणाली प्रभावित हुई थी और निगम को इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को भुगतान करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था. निगम ने मौजूदा समय में भी नेपाल को निरंतर पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति जारी रखने के लिए इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन का आभार व्यक्त किया है। नेपाल ऑयल निगम ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को देखते हुए पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों में यह समायोजन किया गया है, ताकि आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखा जा सके।
UAE में भ्रामक वीडियो पोस्ट करने के आरोप में 35 लोग गिरफ्तार… 19 भारतीय भी शामिल

दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates.- UAE) में सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो (Misleading and Fake Videos) पोस्ट करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया है। इन आरोपियों में 19 भारतीय नागरिक (19 Indian Citizens) भी शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों ने क्षेत्रीय तनाव के बीच इंटरनेट पर ऐसी सामग्री साझा की जिससे लोगों में भ्रम और डर फैल सकता था। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAM के अनुसार, सभी आरोपियों को तेज सुनवाई (फास्ट-ट्रैक ट्रायल) के लिए अदालत में पेश किया जाएगा। डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद कार्रवाईयूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की सख्त निगरानी के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग झूठी और भ्रामक जानकारी फैलाकर सार्वजनिक व्यवस्था और देश की स्थिरता को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे और उन्होंने अलग-अलग तरीकों से भ्रामक सामग्री पोस्ट की। पहला समूह: असली वीडियो के साथ भ्रामक दावेपहले समूह के 10 लोगों ने वास्तविक वीडियो क्लिप पोस्ट किए, जिनमें देश के हवाई क्षेत्र में मिसाइलों के गुजरने या उन्हें रोकने के दृश्य दिखाए गए थे। इन वीडियो के साथ ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े गए जिससे यह लगे कि देश पर हमला हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार इससे लोगों में डर और घबराहट फैल सकती थी। इस समूह में 5 भारतीय, 1 पाकिस्तानी, 1 नेपाली, 2 फिलीपीन नागरिक और 1 मिस्र का नागरिक शामिल है। दूसरा समूह: एआई से बनाए गए फर्जी वीडियोदूसरे समूह के 7 लोगों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके विस्फोट, मिसाइल हमलों और आग लगने जैसे नकली दृश्य तैयार किए। इन वीडियो में राष्ट्रीय झंडे और तारीखें भी जोड़ी गईं ताकि लोग इन्हें असली समझ लें। कई वीडियो ऐसे थे जिन्हें दूसरे देशों की घटनाओं से जोड़कर यूएई का बताया गया। इस समूह में पांच भारतीय, एक नेपाली और एक बांग्लादेशी शामिल हैं। तीसरा समूह: दूसरे देश की सैन्य कार्रवाई का प्रचारतीसरे समूह के 6 लोगों पर एक ऐसे देश की सैन्य कार्रवाई और नेतृत्व की तारीफ करते हुए सामग्री साझा करने का आरोप है जिसे यूएई ने शत्रुतापूर्ण राज्य बताया है। इस समूह में पांच भारतीय और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल है। इसके अलावा दो और भारतीयों पर भी इसी तरह के आरोप लगाए गए हैं। पहले भी 10 लोगों की गिरफ्तारी का आदेशइससे पहले शनिवार को भी 10 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिनमें दो भारतीय शामिल थे। अभियोजन पक्ष ने सभी आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें हिरासत में भेज दिया गया है। सख्त सजा का प्रावधानयूएई के कानून के अनुसार, इस तरह के अपराधों में कम से कम एक साल की जेल और एक लाख दिरहम (लगभग 22 लाख रुपये) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अटॉर्नी जनरल अल शम्सी ने कहा कि हालिया क्षेत्रीय तनाव का फायदा उठाकर झूठी जानकारी फैलाने की कोशिश की गई, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता को खतरा हो सकता था।