नाइटक्लब विवाद के बीच इंग्लैंड टीम में बड़ा बदलाव, बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन दूसरे टेस्ट से बाहर

नई दिल्ली । न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी दूसरे टेस्ट मैच से पहले इंग्लैंड क्रिकेट टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। टीम के नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन को दूसरे टेस्ट के लिए घोषित स्क्वॉड में शामिल नहीं किया गया है। यह निर्णय हाल ही में सामने आए कथित नाइटक्लब विवाद और उससे जुड़ी जांच के बीच लिया गया है। वहीं, अनुभवी बल्लेबाज जो रूट को टीम की अंतरिम कप्तानी सौंपी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह मामला पहले टेस्ट मैच में इंग्लैंड की जीत के बाद हुए जश्न से जुड़ा है। बताया गया है कि खिलाड़ी पहले ड्रेसिंग रूम और बाद में लंदन के एक पब में मौजूद थे। इसके बाद कुछ खिलाड़ी चेल्सी स्थित एक नाइटक्लब पहुंचे, जहां देर रात कथित रूप से एक झड़प की घटना सामने आई। रिपोर्ट्स में बेन स्टोक्स, गस एटकिंसन, इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) की सुरक्षा टीम के एक सदस्य और एक रग्बी खिलाड़ी का नाम सामने आया है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि स्टोक्स और एटकिंसन सीधे तौर पर किसी शारीरिक झड़प में शामिल नहीं थे। घटना में सुरक्षा दल का एक सदस्य घायल हुआ था, लेकिन मामले में पुलिस हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं पड़ी और फिलहाल किसी आपराधिक कार्रवाई की संभावना भी नहीं जताई गई है। इसके बावजूद घटना ने इंग्लैंड क्रिकेट के भीतर अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर बहस छेड़ दी है। ईसीबी और संबंधित संस्थाएं इस मामले की जांच कर रही हैं। जांच पूरी होने तक स्टोक्स और एटकिंसन को दूसरे टेस्ट की टीम से बाहर रखा गया है। रिपोर्टों के अनुसार एटकिंसन की अनुपस्थिति को औपचारिक निलंबन नहीं माना जा रहा, बल्कि यह कदम जांच प्रक्रिया और खिलाड़ी के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इस बीच जो रूट को टीम की कमान सौंपना इंग्लैंड क्रिकेट के लिए एक सुरक्षित और अनुभवी विकल्प माना जा रहा है। रूट इससे पहले 2017 से 2022 के बीच इंग्लैंड की टेस्ट टीम की कप्तानी कर चुके हैं और उनके नेतृत्व में टीम ने कई महत्वपूर्ण जीत दर्ज की थीं। ऐसे में न्यूजीलैंड के खिलाफ अहम मुकाबले में उनकी वापसी को टीम के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक बेन स्टोक्स फिलहाल मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं और उन्होंने अपनी स्थिति तथा भविष्य को लेकर विचार करने के लिए कुछ निजी समय मांगा है। दूसरी ओर क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों की नजरें ईसीबी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे आगे की तस्वीर साफ हो सकेगी। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब इंग्लैंड क्रिकेट टीम पहले से ही अपने प्रदर्शन, अनुशासन और टीम संस्कृति को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि पहले टेस्ट से पहले मुख्य कोच ब्रेंडन मैकुलम ने खिलाड़ियों को देर रात तक बाहर रहने और अनुशासनहीनता से बचने की सलाह दी थी। अब दूसरे टेस्ट से ठीक पहले सामने आए इस विवाद ने टीम प्रबंधन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। न्यूजीलैंड के खिलाफ द ओवल में 17 जून से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट में इंग्लैंड की टीम नए नेतृत्व में मैदान पर उतरेगी। इस मुकाबले के साथ-साथ सभी की नजरें जांच के नतीजों और बेन स्टोक्स की भविष्य की भूमिका पर भी बनी रहेंगी।
TMC-कांग्रेस विलय की अटकलें तेज, ममता को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और अभिषेक को महासचिव पद की पेशकश की चर्चा

नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के संभावित विलय की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। दिल्ली में गांधी परिवार और बनर्जी परिवार के बीच हुई हालिया मुलाकातों के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि दोनों दलों की ओर से अब तक किसी भी प्रकार के विलय या औपचारिक समझौते की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से सामने आ रही खबरों ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि यदि भविष्य में तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय होता है, तो पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा सकती है। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव दिया गया है। वहीं, टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को कांग्रेस महासचिव पद की पेशकश किए जाने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। विलय की संभावनाओं को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यह प्रक्रिया कितनी व्यावहारिक होगी। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि टीएमसी के भीतर कुछ नेताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद उभरकर सामने आए हैं। कुछ बागी नेताओं की ओर से पार्टी के भीतर असंतोष की बात कही जा रही है। हालांकि इन दावों पर भी पार्टी नेतृत्व की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि विपक्षी दलों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है तो कांग्रेस और टीएमसी के बीच बेहतर तालमेल महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी संदर्भ में हालिया बैठकों को देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन मुलाकातों में विपक्षी एकता, INDIA गठबंधन की रणनीति और पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि बातचीत केवल गठबंधन तक सीमित है या भविष्य में किसी बड़े राजनीतिक समीकरण की भी संभावना है। इस बीच टीएमसी के कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के कांग्रेस में विलय की अटकलों को खारिज किया है। उनका कहना है कि तृणमूल कांग्रेस अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखेगी। दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ नेताओं का मानना है कि यदि ऐसा कोई प्रस्ताव आता है तो इससे विपक्षी राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि पश्चिम बंगाल कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय बताई जा रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार फिलहाल स्थिति पूरी तरह अटकलों और सूत्रों पर आधारित है। दोनों दलों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और कांग्रेस नेतृत्व की ओर से आने वाले दिनों में दिए जाने वाले बयानों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी। फिलहाल इतना तय है कि दिल्ली में हुई मुलाकातों ने विपक्षी राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और आगामी दिनों में इस विषय पर और स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है।
रोहित शर्मा रचेंगे नया इतिहास, वनडे में भारत के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने के करीब

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के दिग्गज बल्लेबाज और पूर्व कप्तान रोहित शर्मा एक बार फिर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज कराने जा रहे हैं। भारत और अफगानिस्तान के बीच 13 जून से शुरू हो रही तीन मैचों की वनडे सीरीज के पहले मुकाबले में मैदान पर कदम रखते ही रोहित शर्मा भारत के लिए वनडे क्रिकेट खेलने वाले सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन जाएंगे। इसके साथ ही वह 37 साल पुराना एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लेंगे। धर्मशाला में खेले जाने वाले पहले वनडे मुकाबले के दौरान रोहित शर्मा की उम्र 39 साल और 44 दिन होगी। इसी के साथ वह पूर्व भारतीय क्रिकेटर और 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य मोहिंदर अमरनाथ का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे। अमरनाथ ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच वर्ष 1989 में खेला था, उस समय उनकी उम्र 39 साल और 36 दिन थी। अब लगभग चार दशक बाद यह रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम दर्ज होने जा रहा है। हाल ही में फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद रोहित शर्मा भारतीय टीम से जुड़े हैं और चयनकर्ताओं तथा टीम प्रबंधन का भरोसा बनाए रखने में सफल रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ समय में चोट और फिटनेस को लेकर चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन रोहित ने अपनी मेहनत और प्रतिबद्धता से साबित किया है कि वह अभी भी भारतीय टीम के लिए अहम भूमिका निभाने में सक्षम हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ यह सीरीज भारतीय टीम के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टीम के दो प्रमुख खिलाड़ी विराट कोहली और हार्दिक पांड्या चोट के कारण इस श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं। ऐसे में रोहित शर्मा जैसे अनुभवी खिलाड़ी की मौजूदगी टीम को मजबूती प्रदान करेगी। युवा खिलाड़ियों से सजी भारतीय टीम में उनका अनुभव निर्णायक साबित हो सकता है। रोहित शर्मा पहले ही टी20 अंतरराष्ट्रीय और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं। अब उनका पूरा ध्यान वनडे क्रिकेट पर केंद्रित है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी नजर वर्ष 2027 में होने वाले आईसीसी क्रिकेट विश्व कप पर है। रोहित की इच्छा भारत को एक और विश्व कप खिताब दिलाकर अपने शानदार करियर को यादगार तरीके से समाप्त करने की हो सकती है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ चुनौतियां भी बढ़ती हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का लगातार दबाव, फिटनेस बनाए रखने की जरूरत और युवा खिलाड़ियों से प्रतिस्पर्धा रोहित के सामने बड़ी परीक्षा होगी। इसके बावजूद उनका अनुभव, तकनीक और बड़े मैचों में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें भारतीय टीम का महत्वपूर्ण सदस्य बनाए हुए है। आईपीएल 2026 में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन वनडे क्रिकेट में उन्होंने लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। यही कारण है कि टीम प्रबंधन और प्रशंसकों को उनसे आगामी मुकाबलों में भी बड़ी पारियों की उम्मीद है। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज में रोहित शर्मा सिर्फ रन बनाने के लिए नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने के लिए भी मैदान पर उतरेंगे। भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों की निगाहें इस उपलब्धि पर टिकी रहेंगी।
ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच तेज: सीबीआई को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मिली, महिला आयोग ने जेल में की गिरिबाला सिंह से मुलाकात

मध्य प्रदेश। एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में जांच लगातार आगे बढ़ रही है। मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गई है और अब एजेंसी मेडिकल, डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों का मिलान कर विभिन्न तथ्यों की पड़ताल कर रही है। इसी बीच मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम ने भोपाल सेंट्रल जेल पहुंचकर न्यायिक हिरासत में बंद ट्विशा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह से मुलाकात की। महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने जेल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान महिला वार्ड, अस्पताल, रसोईघर, पुस्तकालय, आर्ट एंड क्राफ्ट सेंटर तथा ब्यूटी पार्लर सहित विभिन्न व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। आयोग की टीम ने गिरिबाला सिंह से भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली। आयोग के अनुसार गिरिबाला सिंह ने किसी प्रकार की परेशानी या शिकायत नहीं बताई और कहा कि उन्हें जेल में कोई विशेष समस्या नहीं है। निरीक्षण के दौरान गिरिबाला सिंह पुस्तकालय से संबंधित एक पुस्तक पढ़ती हुई दिखाई दीं। महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि बातचीत के दौरान वह शांत रहीं और आयोग को ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि उन्हें जेल में किसी प्रकार की विशेष सुविधा उपलब्ध कराई जा रही हो। आयोग ने जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की। दूसरी ओर सीबीआई मामले के विभिन्न पहलुओं को जोड़ने में जुटी हुई है। जांच एजेंसी को मिली दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर अब मेडिकल रिकॉर्ड, फोरेंसिक साक्ष्य और डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच में कथित रूप से प्रेग्नेंसी, मेडिकल उपचार, शरीर पर मिले चोटों के निशान तथा घटनास्थल से जुड़े अन्य तथ्यों का परीक्षण किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसी ने अभी तक किसी निष्कर्ष की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से प्राप्त चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो, वीडियो तथा डिलीट किए गए डेटा की भी जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य घटनाक्रम की पूरी श्रृंखला को समझना और उपलब्ध साक्ष्यों का वैज्ञानिक विश्लेषण करना है। मामले में ट्विशा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अंकुर पांडे ने प्रारंभिक जांच प्रक्रिया और कुछ दस्तावेजी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि घटनास्थल से जब्त सामग्री और जांच प्रक्रिया में कुछ गंभीर विसंगतियां रही हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच से जुड़े कुछ दस्तावेज आरोपियों तक समय से पहले पहुंचने की आशंका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों पर जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, गिरिबाला सिंह की ओर से जिला न्यायालय में विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अधिवक्ताओं द्वारा वकालतनामा प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया के तहत विधिक सेवा प्राधिकरण से अनुमति मांगी है। फिलहाल सीबीआई मामले की सभी कड़ियों को जोड़ने और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच में जुटी हुई है। जांच एजेंसी का कहना है कि वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच की जा रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी।
बुधवार के वास्तु उपाय: गणपति की कृपा से खुलेंगे तरक्की के रास्ते, घर में आएगी सुख-समृद्धि

नई दिल्ली । सनातन परंपरा में बुधवार का विशेष महत्व माना गया है। यह दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बुधवार को विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और कुछ विशेष वास्तु उपाय अपनाने से जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का आगमन होता है। वहीं वास्तु शास्त्र भी इस दिन को सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और घर-परिवार में खुशहाली लाने के लिए महत्वपूर्ण मानता है। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार बुधवार के दिन घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। माना जाता है कि स्वच्छ और व्यवस्थित घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार अधिक होता है। घर के मुख्य द्वार को साफ रखकर वहां रंगोली बनाना या हरे रंग के पौधे लगाना शुभ माना जाता है। मुख्य द्वार से ही घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है, इसलिए इसे अव्यवस्थित या गंदा नहीं रखना चाहिए। बुधवार को हरे रंग का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि यह रंग बुध ग्रह का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घर में हरे रंग के पौधे लगाना, हरे वस्त्र पहनना या पूजा में हरे रंग की वस्तुओं का उपयोग करना लाभकारी माना जाता है। तुलसी का पौधा विशेष रूप से शुभ माना गया है। यदि घर में तुलसी का पौधा है तो बुधवार को उसकी पूजा करने और दीपक जलाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार बुधवार को घर के उत्तर दिशा क्षेत्र पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उत्तर दिशा को बुध ग्रह की दिशा माना गया है। इस दिशा को साफ-सुथरा और खुला रखना शुभ फलदायी माना जाता है। यदि उत्तर दिशा में अनावश्यक सामान रखा हो तो उसे हटा देना चाहिए। ऐसा करने से धन और करियर से जुड़े अवसरों में वृद्धि होने की मान्यता है। भगवान गणेश की पूजा भी बुधवार के दिन अत्यंत शुभ मानी जाती है। सुबह स्नान के बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, मोदक और हरे रंग के फूल अर्पित करने से बुद्धि, विवेक और सफलता की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि गणेश जी विघ्नहर्ता हैं और उनकी कृपा से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्यवसाय और नौकरी से जुड़े लोगों के लिए यह उपाय विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। आर्थिक उन्नति के लिए बुधवार को हरी मूंग का दान करना भी शुभ माना गया है। जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां, हरे वस्त्र या हरी मूंग दान करने से बुध ग्रह मजबूत होता है और आर्थिक समस्याओं में राहत मिलने की संभावना बढ़ती है। इसके साथ ही पक्षियों को दाना डालना और गाय को हरा चारा खिलाना भी पुण्यदायी माना गया है। यदि घर में लगातार तनाव या नकारात्मकता महसूस हो रही हो तो बुधवार को कपूर और लौंग जलाकर पूरे घर में उसकी सुगंध फैलाना लाभकारी माना जाता है। यह उपाय वातावरण को शुद्ध करने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने में सहायक माना जाता है। कुल मिलाकर बुधवार का दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि वास्तु के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय घर में सुख-शांति, समृद्धि और सकारात्मकता लाने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से इन उपायों का पालन करने से जीवन में संतुलन और सफलता के नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं।
सोने की चमक पड़ी फीकी! गोल्ड ETF में टूटा लगातार निवेश का सिलसिला, निवेशकों ने की मुनाफावसूली

नई दिल्ली । सोने में निवेश को लेकर निवेशकों का रुख मई महीने में बदलता दिखाई दिया है। लगातार 13 महीनों तक मजबूत निवेश आकर्षित करने वाले गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से मई 2026 में 725 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी दर्ज की गई। इसके साथ ही एक वर्ष से अधिक समय से जारी सकारात्मक निवेश प्रवाह का सिलसिला टूट गया। वित्तीय बाजार के विशेषज्ञ इस बदलाव को निवेशकों की रणनीति में आए परिवर्तन और सोने की ऊंची कीमतों से जोड़कर देख रहे हैं। हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग के कारण सोने की कीमतों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई थी। इसी वजह से गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों की रुचि लगातार बनी हुई थी। हालांकि मई में पहली बार ऐसी स्थिति सामने आई जब निवेशकों ने इस श्रेणी से बड़ी मात्रा में धन निकालना शुरू किया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने और मुनाफा सुरक्षित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचने के बाद कई निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी। जब किसी एसेट में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तब निवेशक अक्सर अपने निवेश का एक हिस्सा निकालकर लाभ सुरक्षित करते हैं। गोल्ड ईटीएफ में आई निकासी को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है। बाजार जानकारों के अनुसार, हाल के महीनों में इक्विटी बाजारों में भी निवेश के अवसर बढ़े हैं। कई शेयरों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने अपने धन का कुछ हिस्सा सोने से निकालकर अन्य परिसंपत्तियों की ओर स्थानांतरित करना शुरू किया है। इससे गोल्ड ईटीएफ में निवेश की रफ्तार स्वाभाविक रूप से धीमी हुई है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि निवेशकों के लिए सोने में निवेश बनाए रखने की अवसर लागत बढ़ी है। फिक्स्ड इनकम निवेश विकल्पों पर बेहतर प्रतिफल मिलने और अन्य परिसंपत्तियों में संभावित अवसर दिखाई देने के कारण कुछ निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ से दूरी बनानी शुरू की। इसके अलावा, बाजार में भविष्य के रिटर्न को लेकर अधिक संतुलित दृष्टिकोण भी देखने को मिल रहा है। हालांकि मई में निकासी दर्ज की गई, लेकिन यह तस्वीर का केवल एक पक्ष है। दूसरी ओर गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट लगातार बढ़ता रहा। इसका अर्थ यह है कि सोने की कीमतों में वृद्धि का असर फंडों की कुल परिसंपत्तियों पर सकारात्मक रूप से दिखाई दिया। इससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों का भरोसा पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, बल्कि निवेश की गति में अस्थायी बदलाव देखने को मिला है। वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि सोना अब भी निवेश पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मुद्रास्फीति और भू-राजनीतिक जोखिमों के दौर में निवेशक इसे सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में देखते हैं। इसलिए अल्पकालिक निकासी को दीर्घकालिक रुझान में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मई के आंकड़े यह जरूर संकेत देते हैं कि निवेशक अब अधिक सतर्क और रणनीतिक दृष्टिकोण अपना रहे हैं। वे केवल सुरक्षित निवेश पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न परिसंपत्तियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। आने वाले महीनों में सोने की कीमतों, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और घरेलू बाजार के रुझानों के आधार पर गोल्ड ईटीएफ में निवेश की दिशा तय होगी।
फोन पर ऑर्डर, घर तक डिलीवरी: देवास में अवैध शराब सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, 79 हजार की शराब जब्त

मध्यप्रदेश। देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत आबकारी विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम को बड़ी सफलता मिली है। अधिकारियों ने एक ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जो मोबाइल फोन के माध्यम से ऑर्डर लेकर ग्राहकों तक शराब पहुंचाने का काम कर रहा था। कार्रवाई के दौरान करीब 79 हजार रुपये मूल्य की 84 बल्क लीटर अवैध शराब जब्त की गई है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग को मुखबिर से सूचना मिली थी कि शहर के जयप्रकाश नगर क्षेत्र में एक मकान से अवैध शराब का कारोबार संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने संबंधित स्थान पर दबिश दी। तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई, जिसके बाद मौके पर मौजूद अमित राठौर नामक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कथित रूप से मोबाइल फोन के जरिए ग्राहकों से संपर्क करता था। ग्राहकों से ऑर्डर प्राप्त होने के बाद शराब को तय स्थानों पर पहुंचाया जाता था। अधिकारियों के अनुसार यह गतिविधि एक संगठित डिलीवरी व्यवस्था की तरह संचालित की जा रही थी। हालांकि पूरे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने के लिए जांच जारी है। आबकारी विभाग का कहना है कि आरोपी के कब्जे से बरामद शराब को जब्त कर लिया गया है और उसके स्रोत की भी जांच की जा रही है। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि शराब कहां से लाई जा रही थी और इसकी आपूर्ति किन क्षेत्रों तक की जा रही थी। अधिकारियों के मुताबिक अवैध शराब का कारोबार केवल बिक्री तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसके पीछे अक्सर एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय रहता है, इसलिए मामले की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों ने आरोपी के मोबाइल फोन को भी जब्त कर लिया है। पुलिस अब कॉल डिटेल्स और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आरोपी के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और उसके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड से इस अवैध कारोबार के दायरे और अवधि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। आबकारी और पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। अधिकारियों ने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और अवैध कारोबार को किसी भी स्थिति में पनपने नहीं दिया जाएगा। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क के आकार और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
पीएम मोदी के रिकॉर्ड कार्यकाल पर राघव चड्ढा की टिप्पणी, बोले- आज के दौर में लगातार जनादेश हासिल करना कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री बने रहने के नए रिकॉर्ड को लेकर देश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। इस उपलब्धि पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने भी अपनी टिप्पणी देते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण क्षण बताया और प्रधानमंत्री मोदी तथा देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल की परिस्थितियों की तुलना की। राघव चड्ढा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4,399 दिनों तक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया है। उनके अनुसार यह केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की जटिलताओं और मतदाताओं के लगातार विश्वास का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल, बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक और विविधताओं से भरे देश में लगातार जनसमर्थन बनाए रखना किसी भी नेता के लिए आसान नहीं होता। उन्होंने अपने वक्तव्य में भारत की जनसंख्या, सामाजिक विविधता और चुनावी प्रणाली का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में करोड़ों मतदाता हैं, जिनकी प्राथमिकताएं, अपेक्षाएं और राजनीतिक सोच अलग-अलग हो सकती हैं। ऐसे परिदृश्य में एक ही नेतृत्व को लगातार कई चुनावों में समर्थन मिलना लोकतांत्रिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। राघव चड्ढा ने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ने अलग-अलग दौर में देश का नेतृत्व किया। उनके अनुसार स्वतंत्रता के बाद का राजनीतिक वातावरण और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियां एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती दशकों में राजनीतिक समीकरण अलग थे, जबकि वर्तमान समय में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव, गठबंधन राजनीति और तीव्र राजनीतिक प्रतिस्पर्धा चुनावी परिदृश्य को अधिक जटिल बनाती है। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक दौर में मतदाताओं की अपेक्षाएं पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो चुकी हैं। सूचना प्रौद्योगिकी, सोशल मीडिया, क्षेत्रीय मुद्दों और तेज राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण किसी भी सरकार के लिए लगातार जनसमर्थन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में लगातार तीन आम चुनावों में नेतृत्व के प्रति भरोसा जताया जाना विशेष महत्व रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह रिकॉर्ड भारतीय राजनीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा। लगातार तीन चुनावों में राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बनाए रखना और लंबे समय तक सत्ता में बने रहना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में उल्लेखनीय उपलब्धि माना जाता है। यही कारण है कि इस उपलब्धि पर विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राघव चड्ढा ने अपने बयान में भारतीय मतदाताओं की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है और लगातार जनादेश किसी भी नेतृत्व के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी के नए रिकॉर्ड ने एक बार फिर भारतीय राजनीति में नेतृत्व, जनादेश और लोकतांत्रिक निरंतरता को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में भी यह उपलब्धि राजनीतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से चर्चा का विषय बनी रहने की संभावना है।
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने पर देवास में कांग्रेस का धरना, भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश। राज्यसभा चुनाव को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में जारी हलचल के बीच कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने के विरोध में देवास में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। बुधवार को शहर कांग्रेस इकाई के नेतृत्व में पुष्कर मंडूक तालाब के समीप धरना आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का यह धरना करीब पांच घंटे तक चला। इस दौरान पार्टी नेताओं ने नामांकन पत्र निरस्त किए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंताजनक बताया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राज्यसभा चुनाव जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक कदम प्रतीत होता है। धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनावी मुकाबले से बाहर करने के उद्देश्य से साजिश रची गई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना चाहिए और चुनावी प्रक्रिया किसी भी प्रकार के पक्षपात या दबाव से मुक्त होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि नामांकन पत्र निरस्त होने की घटना लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतंत्र के इतिहास का एक “काला दिन” बताते हुए कहा कि यदि ऐसी घटनाओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो लोकतांत्रिक परंपराओं को नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा विषय मानती है। धरने में शहर कांग्रेस जिला अध्यक्ष प्रयास गौतम सहित पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी और इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाएगी। उन्होंने निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करने और पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की मांग भी उठाई। धरना-प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी और प्रशासन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों तक अपनी आपत्तियां पहुंचाने का प्रयास किया। पार्टी नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराना जनता और राजनीतिक दलों का संवैधानिक अधिकार है तथा वे इसी अधिकार के तहत अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। फिलहाल राज्यसभा चुनाव और नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति में और भी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। वहीं कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह इस मामले को लेकर अपना विरोध आगे भी जारी रखेगी।
सीएम डीके शिवकुमार ने सेब खाकर समर्थकों पर फेंके, वीडियो वायरल, बीजेपी बोली- यह व्यवहार कांग्रेस की सोच का आईना

नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में मुख्यमंत्री एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सेब खाते हुए और बाद में उसे समर्थकों की दिशा में उछालते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है और विपक्ष ने इसे जनता के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। यह घटना मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र कनकपुरा में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान की बताई जा रही है। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने क्षेत्र में पहुंचे डीके शिवकुमार के स्वागत के लिए स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए विभिन्न प्रकार की तैयारियां की गई थीं। समारोह के दौरान मुख्यमंत्री को सेबों से तैयार एक विशेष माला पहनाई गई थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के अनुसार यह माला आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी और स्वागत के प्रतीक के रूप में तैयार की गई थी। बाद में मुख्यमंत्री ने माला से कुछ सेब निकालकर खाए और फिर उन्हें समर्थकों की ओर उछाल दिया। इसी दौरान रिकॉर्ड किया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और देखते ही देखते राजनीतिक बहस का विषय बन गया। वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। भाजपा नेताओं ने इसे जनता और समर्थकों के प्रति अनुचित व्यवहार बताते हुए मुख्यमंत्री की आलोचना की। विपक्ष का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं से संयमित और सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा की जाती है तथा इस प्रकार की घटनाएं गलत संदेश देती हैं। भाजपा ने इस मुद्दे को राजनीतिक तौर पर भी उठाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि जनता किसी भी जनप्रतिनिधि को सम्मान और विश्वास के आधार पर चुनती है, इसलिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके साथ व्यवहार भी उसी भावना के अनुरूप होना चाहिए। भाजपा ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेतृत्व की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर कांग्रेस समर्थकों का कहना है कि घटना को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उनका तर्क है कि कार्यक्रम का माहौल उत्सवपूर्ण था और मुख्यमंत्री ने समर्थकों के उत्साह के बीच सहज प्रतिक्रिया दी थी। समर्थकों का मानना है कि वीडियो के एक हिस्से के आधार पर पूरे घटनाक्रम का मूल्यांकन करना उचित नहीं होगा। इस बीच सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोगों ने इसे सामान्य और अनौपचारिक व्यवहार बताया है, जबकि अन्य ने इसे सार्वजनिक पद की गरिमा से जोड़कर देखा है। यही कारण है कि यह मामला केवल राजनीतिक विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सोशल मीडिया बहस का भी हिस्सा बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी और राजनीतिक माहौल में इस प्रकार की घटनाएं अक्सर प्रतीकात्मक महत्व हासिल कर लेती हैं। कई बार छोटे घटनाक्रम भी व्यापक राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाते हैं और दल उन्हें अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं। फिलहाल डीके शिवकुमार का यह वीडियो कर्नाटक की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं जारी रहने की संभावना है।