बैंक ग्राहक के झोले पर ब्लेड मारकर उड़ाए 60 हजार, सात दिन में महिला गिरफ्तार

मध्यप्रदेश। देवास जिले के उदयनगर क्षेत्र में बैंक ग्राहक के झोले को ब्लेड से काटकर 60 हजार रुपये चोरी करने के मामले का पुलिस ने सात दिन के भीतर खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया है और उसके कब्जे से चोरी गई पूरी राशि बरामद करने की बात कही है। मामले के खुलासे में सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस के अनुसार घटना 2 जून 2026 की है। पीपलपाटी निवासी चम्पालाल यादव ट्रैक्टर की किश्त जमा करने के लिए 60 हजार रुपये लेकर उदयनगर स्थित एसबीआई बैंक पहुंचे थे। शिकायत के मुताबिक बैंक में राशि जमा करने के दौरान हाट बाजार क्षेत्र में किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनके झोले को ब्लेड या किसी नुकीली वस्तु से काट दिया और उसमें रखी नकदी निकाल ली। घटना का पता चलने पर पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस ने बैंक परिसर और आसपास के हाट बाजार क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। फुटेज में एक महिला संदिग्ध गतिविधियों में शामिल दिखाई दी। पुलिस के मुताबिक विभिन्न स्थानों पर लगे कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो फुटेज के आधार पर महिला की पहचान करने का प्रयास किया गया। तकनीकी विश्लेषण और निगरानी के बाद पुलिस महिला तक पहुंचने में सफल रही। पुलिस ने आरोपी महिला की पहचान सुधा पति शिवचरण सिसोदिया, निवासी कड़ियां सांसी, थाना बोड़ा, जिला राजगढ़ के रूप में की है। पुलिस का कहना है कि आरोपी को 9 जून को सीहोर जिले के सलकनपुर क्षेत्र से हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान महिला ने कथित रूप से चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। इसके बाद उसके कब्जे से चोरी गए 60 हजार रुपये बरामद कर जब्त कर लिए गए। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इस मामले में त्रिनेत्रम अभियान के तहत लगाए गए सीसीटीवी कैमरे काफी उपयोगी साबित हुए। कैमरों में दर्ज फुटेज के आधार पर संदिग्ध की पहचान और उसकी गतिविधियों का पता लगाया गया। पुलिस का कहना है कि आधुनिक तकनीक और निगरानी व्यवस्था के कारण अपराधों की जांच में तेजी आई है और आरोपियों तक पहुंचना पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है। मामले की जांच पुलिस अधीक्षक पुनीत गेहलोत के निर्देश पर की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरनारायण बाथम, एसडीओपी बागली संजय सिंह बैस के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी विजेन्द्र सिंह सोलंकी के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई थी। टीम ने विभिन्न पहलुओं की जांच करते हुए आरोपी महिला को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। पुलिस ने नागरिकों से भीड़भाड़ वाले बाजारों, बैंक परिसरों और सार्वजनिक स्थानों पर नकदी लेकर जाते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। साथ ही किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने का आग्रह किया है। फिलहाल पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
नामांकन मंजूर होने पर विधानसभा परिसर में हंगामा, परिमल नथवाणी को लेकर आमने-सामने आए कांग्रेस और भाजपा

नई दिल्ली । झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं। चुनावी प्रक्रिया के बीच निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी के नामांकन को वैध घोषित किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। नामांकन को लेकर पहले से जारी बहस अब खुलकर राजनीतिक टकराव में बदलती दिखाई दे रही है। विधानसभा परिसर में कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के प्रदर्शन ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा में ला दिया है। राज्यसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के दौरान परिमल नथवाणी के दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। जांच के दौरान कुछ आपत्तियों के कारण उनके नामांकन को तत्काल अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी और मामले की समीक्षा की जा रही थी। इस वजह से राजनीतिक हलकों में लगातार अटकलों का दौर जारी रहा। हालांकि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद नामांकन को वैध मान लिया गया, जिसके बाद विवाद और तेज हो गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर गंभीर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नामांकन से जुड़े जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए थे, उनकी पर्याप्त और पारदर्शी जांच होनी चाहिए थी। पार्टी के नेताओं का आरोप है कि विभिन्न राज्यों में समान परिस्थितियों में अलग-अलग निर्णय लिए जा रहे हैं, जिससे निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है। नामांकन को मंजूरी मिलने की सूचना सामने आते ही कांग्रेस कार्यकर्ता विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन के लिए पहुंच गए। हाथों में झंडे और बैनर लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की तथा फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए मामले की पुनर्समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए विरोध प्रदर्शन का जवाब प्रदर्शन से ही दिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत संचालित होती है तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा लिया गया निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है। पार्टी का आरोप है कि कांग्रेस चुनावी माहौल को प्रभावित करने के उद्देश्य से अनावश्यक विवाद पैदा कर रही है। विधानसभा परिसर के बाहर दोनों पक्षों की सक्रियता ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया। विभिन्न नेताओं ने अपने-अपने पक्ष में बयान दिए और चुनावी प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग दावे किए। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को केवल एक संसदीय चुनाव न रहने देकर उसे व्यापक राजनीतिक बहस का विषय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनावों में संख्या बल के साथ-साथ राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में किसी उम्मीदवार के नामांकन को लेकर उठे विवाद का प्रभाव केवल चुनावी गणित तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह दलों की रणनीति और राजनीतिक धारणा को भी प्रभावित करता है। फिलहाल परिमल नथवाणी का नामांकन वैध घोषित होने के बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन इस फैसले को लेकर पैदा हुआ विवाद अभी थमता दिखाई नहीं दे रहा। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की रणनीति, चुनावी समीकरण और संभावित प्रतिक्रियाएं इस मुद्दे को और अधिक महत्वपूर्ण बना सकती हैं। राज्यसभा चुनाव के बीच झारखंड की राजनीति में यह मामला फिलहाल सबसे चर्चित विषयों में शामिल हो गया है।
तीन गोलियां लगने के बाद भी डटे रहे मोर्चे पर: लश्कर आतंकी को ढेर करने वाले सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी का रीवा में भव्य स्वागत

मध्यप्रदेश। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा शौर्य चक्र से सम्मानित किए जाने के बाद सीआरपीएफ जवान संजय तिवारी बुधवार को अपने गृह जिले रीवा पहुंचे, जहां उनका भव्य और भावनात्मक स्वागत किया गया। सिरमौर तहसील के डेलही गांव निवासी संजय तिवारी के सम्मान में रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए। ढोल-नगाड़ों की गूंज, फूल-मालाओं की बारिश और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच विंध्य के इस वीर सपूत का अभिनंदन किया गया। संजय तिवारी को यह प्रतिष्ठित वीरता पुरस्कार जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान दिखाए गए अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए प्रदान किया गया है। सुरक्षा बलों को एक विशेष अभियान के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों की मौजूदगी की सूचना मिली थी। इसके बाद क्षेत्र की घेराबंदी कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। अभियान के दौरान आतंकियों ने अचानक सुरक्षा बलों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी, जिससे स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई। मुठभेड़ के दौरान संजय तिवारी अग्रिम हमला दल का हिस्सा थे। भारी गोलीबारी के बीच उन्होंने साहसपूर्वक आगे बढ़ते हुए मोर्चा संभाले रखा। इस दौरान उनके बांह, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में तीन गोलियां लगीं। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी पोजीशन नहीं छोड़ी और जवाबी कार्रवाई जारी रखी। उनके साहस और दृढ़ संकल्प के चलते एक आतंकी को मार गिराने में सफलता मिली। रीवा पहुंचने पर मीडिया से बातचीत में संजय तिवारी ने कहा कि उनके लिए देश सर्वोपरि है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ के दौरान लगी चोटों की उन्हें कोई चिंता नहीं थी। उनका एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि आतंकी किसी भी हालत में बचकर न निकल पाए। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई उनके कर्तव्य का हिस्सा है और इसी भावना के साथ उन्होंने अभियान को अंजाम दिया। संजय तिवारी की इस उपलब्धि पर पूरे विंध्य क्षेत्र में गर्व का माहौल है। उनके स्वागत के लिए स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या स्टेशन पहुंची। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया और उनके साहस को राष्ट्रभक्ति का प्रेरणादायक उदाहरण बताया। इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्रा ने कहा कि संजय तिवारी ने अपने शौर्य, साहस और समर्पण से न केवल रीवा और विंध्य क्षेत्र, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि तीन गोलियां लगने के बावजूद जिस तरह संजय ने मोर्चा संभाले रखा, वह देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह साबित करता है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए हमारे जवान किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहते हैं। संजय तिवारी की वीरता की यह कहानी केवल एक सैनिक के साहस का उदाहरण नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा की उस भावना को भी दर्शाती है, जो भारतीय सुरक्षा बलों को दुनिया की सबसे सक्षम और सम्मानित सेनाओं में शामिल करती है। रीवा की धरती अपने इस वीर पुत्र की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रही है।
रुपए दोगुने करने का झांसा, सैकड़ों निवेशक परेशान: दंपती पर करोड़ों की कथित ठगी का आरोप

मध्यप्रदेश। रीवा में निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच देकर कथित रूप से करोड़ों रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक दंपती ने लोगों को आकर्षक निवेश योजना का भरोसा दिलाकर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया और बाद में फरार हो गया। मामले में कार्रवाई नहीं होने से नाराज पीड़ित बुधवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और प्रदर्शन करते हुए आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ितों के अनुसार असलम और उसकी पत्नी अबला सुल्ताना उर्फ नंदा ने लोगों को कम समय में रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया था। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर उनका विश्वास जीता गया, जिससे क्षेत्र के अन्य लोग भी इस योजना से जुड़ते चले गए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी जमा पूंजी निवेश कर दी। आरोप है कि बाद में जब निवेशकों ने अपनी राशि वापस मांगनी शुरू की तो आरोपियों ने टालमटोल करना शुरू कर दिया और फिर संपर्क से बाहर हो गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस कथित ठगी से करीब 200 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। कई परिवारों ने वर्षों की मेहनत से जोड़ी गई बचत निवेश की थी, जबकि कुछ लोगों ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर भी रकम लगाई थी। आरोपियों के कथित रूप से फरार होने के बाद अब इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित असलम अंसारी ने बताया कि दंपती ने निवेशकों को बेहतर रिटर्न का भरोसा दिलाया था। शुरुआती दौर में कुछ लोगों को भुगतान मिलने से लोगों का भरोसा बढ़ गया और अधिक लोग निवेश करने लगे। हालांकि बाद में रकम वापस मांगने पर उन्हें लगातार आश्वासन दिया जाता रहा, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद आरोपियों के गायब होने की बात सामने आई। एक अन्य पीड़िता जन्नत खान ने बताया कि उन्होंने अपनी वर्षों की बचत इस योजना में निवेश की थी। उनके कहने पर परिवार के अन्य सदस्यों ने भी रकम लगाई थी। अब न तो पैसा वापस मिल रहा है और न ही आरोपियों के बारे में कोई जानकारी मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं अपनी जीवनभर की जमा पूंजी खोने के कारण गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रही हैं। प्रदर्शन के दौरान पीड़ितों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने तथा निवेशकों की राशि वापस दिलाने की मांग की। कई महिलाओं ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि कथित ठगी के कारण उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हुई है। मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्राप्त शिकायतों के आधार पर जांच की जाएगी और तथ्यों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से पीड़ितों को जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। फिलहाल पीड़ितों का कहना है कि जब तक आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होती और उनकी राशि वापस दिलाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेंगे। मामले की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि हो सकेगी।
एनडीए की मेगा बैठक में जुटे देशभर के दिग्गज नेता, 12 साल की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर होगा मंथन

नई दिल्ली । केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बुधवार को राजधानी में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में हुई इस मेगा बैठक में गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य सरकार की उपलब्धियों की समीक्षा करना, विकास योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करना और आने वाले वर्षों के लिए रणनीतिक दिशा तय करना रहा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति विशेष आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उन्होंने गठबंधन नेताओं के साथ विचार-विमर्श किया। इस दौरान केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, सुशासन, बुनियादी ढांचा विकास, सामाजिक कल्याण योजनाओं और आर्थिक प्रगति से जुड़े विषयों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक को शासन और संगठन दोनों दृष्टिकोणों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे नेताओं ने अपने-अपने राज्यों में चल रही विकास परियोजनाओं और प्रशासनिक पहलों की जानकारी साझा की। साथ ही केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव पर भी विचार किया गया। बैठक का उद्देश्य केवल उपलब्धियों का उल्लेख करना नहीं, बल्कि आगामी चुनौतियों और संभावित अवसरों की पहचान करना भी था। राजनीतिक दृष्टि से भी इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गठबंधन नेतृत्व आने वाले समय में विकास, जनकल्याण और प्रशासनिक सुधारों को लेकर एक साझा दृष्टिकोण प्रस्तुत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में विभिन्न राज्यों के अनुभवों और सुझावों को भी महत्व दिया गया। नेताओं ने शासन की प्रभावशीलता बढ़ाने और आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ अधिक व्यापक रूप से पहुंचाने पर जोर दिया। बैठक में शामिल नेताओं के अनुसार, देश में आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, परिवहन नेटवर्क, स्वास्थ्य सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के क्षेत्र में हुए कार्यों पर विशेष चर्चा की गई। इसके अलावा भविष्य में निवेश, रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण विकास को गति देने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ। गठबंधन नेतृत्व का मानना है कि विकास आधारित राजनीति आने वाले समय में भी उसकी प्राथमिकता बनी रहेगी। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और लंबे कार्यकाल को लेकर भी चर्चा हुई। नेताओं ने उनके नेतृत्व में विभिन्न क्षेत्रों में हुए बदलावों और नीतिगत पहलों का उल्लेख किया। कई वक्ताओं ने केंद्र और राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद की अवधारणा को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार की बैठकें केवल संगठनात्मक मजबूती का मंच नहीं होतीं, बल्कि नीति निर्माण और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को तय करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा होते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलती है। भारत मंडपम में आयोजित यह बैठक आने वाले समय की राजनीतिक और प्रशासनिक दिशा को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देने वाली मानी जा रही है। सरकार की उपलब्धियों की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं पर हुआ मंथन इस बात का संकेत है कि गठबंधन नेतृत्व विकास, सुशासन और जनसंपर्क को आगे भी अपनी प्राथमिकताओं में बनाए रखना चाहता है।
एक ही दिन में बुझ गए दो जीवन: रीवा के कारोबारी की मौत के बाद पत्नी भी नहीं सह सकीं सदमा

मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश के रीवा और उत्तराखंड के पिथौरागढ़ से सामने आई एक मार्मिक घटना ने दो परिवारों को गहरे शोक में डुबो दिया है। रीवा के युवा कारोबारी प्रदीप सोनी की अचानक हुई मौत के कुछ समय बाद उनकी पत्नी वैशाली खड़ायत की भी मृत्यु हो गई। एक ही दिन में हुई इन दोनों घटनाओं ने परिजनों, मित्रों और स्थानीय लोगों को भावुक कर दिया है। जानकारी के अनुसार प्रदीप सोनी रीवा के अनंतपुर क्षेत्र स्थित अपने घर में अकेले रह रहे थे। उनकी पत्नी वैशाली कुछ दिनों के लिए अपने मायके उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में गई हुई थीं। रविवार को जब लंबे समय तक प्रदीप का मोबाइल फोन बंद मिला और उनसे संपर्क नहीं हो पाया, तो परिजनों को चिंता हुई। परिवार के सदस्य उनके घर पहुंचे, लेकिन दरवाजा नहीं खुलने पर अंदर प्रवेश किया गया। वहां प्रदीप मृत अवस्था में मिले। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और चिकित्सकीय टीम मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में चिकित्सकों ने कार्डियक अरेस्ट की आशंका जताई है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों के अनुसार प्रदीप और वैशाली का विवाह वर्ष 2021 में हुआ था। दोनों के बीच गहरा भावनात्मक जुड़ाव था और परिवार के लोग उन्हें एक-दूसरे के प्रति बेहद समर्पित बताते हैं। प्रदीप के पिता परमानंद सोनी ने बताया कि परिवार के लिए यह घटना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि बेटे की अचानक हुई मृत्यु ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। इधर उत्तराखंड में मौजूद वैशाली को पति के निधन की सूचना मिली तो वह गहरे सदमे में चली गईं। परिजनों के अनुसार सूचना मिलने के कुछ समय बाद वह घर से निकल गईं। बाद में उनका शव जाजरदेवल थाना क्षेत्र के एक जलाशय के पास मिला। मौके से उनका मोबाइल फोन और अन्य निजी सामान भी बरामद हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं के बाद सोनी परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक ही दिन में बेटे और बहू को खो देने से परिवार के सदस्य गहरे सदमे में हैं। रिश्तेदारों और परिचितों का लगातार घर पहुंचना जारी है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच में किसी प्रकार की आपराधिक आशंका सामने नहीं आई है। दोनों राज्यों की पुलिस अपने-अपने स्तर पर घटनाओं की जांच कर रही है और सभी तथ्यों को ध्यान में रखकर कार्रवाई की जा रही है। इस घटना के साथ ही युवाओं में बढ़ते हृदय संबंधी जोखिमों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित दिनचर्या और स्वास्थ्य संबंधी अन्य कारक हृदय रोगों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। चिकित्सकों का सुझाव है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर ऐसे जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। फिलहाल यह घटना एक ऐसे परिवार की त्रासदी बनकर सामने आई है, जिसने कुछ ही घंटों के अंतराल में अपने दो प्रिय सदस्यों को खो दिया। पूरे घटनाक्रम ने लोगों को भावनात्मक रूप से झकझोर दिया है और हर किसी की संवेदनाएं शोकग्रस्त परिवार के साथ हैं।
बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, बागी सांसदों और नेतृत्व संघर्ष के बीच शत्रुघ्न सिन्हा ने क्यों साध रखी है खामोशी?

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तेज हलचल देखने को मिल रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित मतभेदों और विभिन्न सांसदों के रुख को लेकर जारी चर्चाओं के बीच सबसे अधिक ध्यान जिस नाम पर केंद्रित है, वह वरिष्ठ अभिनेता और सांसद शत्रुघ्न सिन्हा हैं। पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों पर जहां कई नेता खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, वहीं शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान वरिष्ठ नेताओं का सार्वजनिक रुख काफी महत्व रखता है। ऐसे समय में जब पार्टी के भीतर विभिन्न समूहों और नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज है, शत्रुघ्न सिन्हा का कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक पर्यवेक्षकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। उनकी खामोशी को अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। शत्रुघ्न सिन्हा लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति का सक्रिय चेहरा रहे हैं। केंद्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद उन्होंने क्षेत्रीय राजनीति में भी अपनी पहचान बनाई। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी सक्रिय मौजूदगी को पार्टी नेतृत्व के विश्वास का प्रतीक माना जाता रहा है। यही कारण है कि वर्तमान परिस्थितियों में उनका रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि शत्रुघ्न सिन्हा फिलहाल परिस्थितियों का आकलन करने में जुटे हो सकते हैं। अनुभवी राजनेताओं की कार्यशैली अक्सर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय घटनाक्रम को पूरी तरह समझने और उसके बाद निर्णय लेने की होती है। इसी कारण उनकी चुप्पी को जल्दबाजी में किसी एक पक्ष के समर्थन या विरोध के रूप में नहीं देखा जा रहा है। दूसरी ओर कुछ राजनीतिक जानकार इसे रणनीतिक दूरी बनाए रखने की कोशिश भी मानते हैं। उनका कहना है कि किसी भी आंतरिक विवाद के दौरान कई वरिष्ठ नेता सार्वजनिक बयानबाजी से बचते हैं ताकि बाद में संगठनात्मक एकता की संभावनाएं प्रभावित न हों। ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा का मौन एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है कि वे फिलहाल किसी गुटीय संघर्ष का हिस्सा नहीं बनना चाहते। बंगाल की राजनीति में हाल के वर्षों में शत्रुघ्न सिन्हा की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। चुनावी राजनीति में उनकी सफलता और पार्टी के प्रति उनकी सार्वजनिक प्रतिबद्धता ने उन्हें महत्वपूर्ण नेताओं की श्रेणी में स्थापित किया है। इसलिए राजनीतिक हलकों में यह भी माना जा रहा है कि उनका अगला कदम परिस्थितियों को देखते हुए काफी सोच-समझकर उठाया जाएगा। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अनुभवी नेता अक्सर बदलते घटनाक्रमों के बीच संतुलित रुख अपनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे नेताओं का लक्ष्य केवल तत्काल राजनीतिक लाभ नहीं होता, बल्कि दीर्घकालिक राजनीतिक प्रासंगिकता और विश्वसनीयता भी होती है। शत्रुघ्न सिन्हा की वर्तमान स्थिति को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। फिलहाल उनकी चुप्पी ने जितने सवाल खड़े किए हैं, उतने ही राजनीतिक अनुमान भी पैदा किए हैं। आने वाले दिनों में यदि वे सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखते हैं तो उससे न केवल उनकी राजनीतिक रणनीति स्पष्ट होगी, बल्कि पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं की दिशा पर भी असर पड़ सकता है। तब तक उनकी खामोशी बंगाल की राजनीति में चर्चा और विश्लेषण का विषय बनी रहने की संभावना है।
जब घर से रूठकर लापता हो गए थे लाडले श्याम सुंदर दास: जानिए कैसे एक लाचार पिता की मार्मिक वेदना ने रचे भारतीय सिनेमा के दो कालजयी गीत

नई दिल्ली । संगीत और मानवीय संवेदनाओं का रिश्ता बेहद गहरा और रूहानी होता है। अक्सर जिन गीतों को सुनकर लोग झूम उठते हैं या जिन्हें विशुद्ध रूप से रोमांटिक विरह गीत मान लिया जाता है, उनके सृजन के पीछे कभी-कभी किसी रचनाकार की जिंदगी का सबसे बड़ा और असहनीय व्यक्तिगत दर्द छिपा होता है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में साल 1957 और 1959 के दौर में लिखे गए दो कालजयी गीतों— ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए’ और ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ के साथ भी कुछ ऐसा ही जुड़ा हुआ है। इन गीतों को दशकों से लोग प्रेम की वेदना समझकर गाते आ रहे हैं, लेकिन वास्तव में ये बोल एक लाचार पिता के अपने कलेजे के टुकड़े से बिछड़ने की तड़प से पैदा हुए थे। इस भावुक कर देने वाली कहानी के केंद्र में महान गीतकार पंडित भरत व्यास और उनका परिवार है। भरत व्यास का बेटा श्याम सुंदर दास स्वभाव से बेहद संवेदनशील और उनका अत्यधिक लाडला था। एक दिन किसी घरेलू बात पर पिता से मामूली नाराजगी के बाद वह गुस्से में बिना बताए घर छोड़कर कहीं चला गया। शुरुआत में लगा कि वह जल्द लौट आएगा, लेकिन जब दिन बीतने लगे तो परिवार की चिंता गहरे डर में बदल गई। बेटे को ढूंढने के लिए भरत व्यास ने हर संभव जतन किए, अखबारों में विज्ञापन दिए, पोस्टर छपवाए और हर धार्मिक स्थल पर मन्नतें मांगीं, लेकिन बेटे का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। इकलौते बेटे के इस तरह अचानक लापता हो जाने के गम ने पंडित भरत व्यास को भीतर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वे गहरे डिप्रेशन और एक आत्म-अपराधबोध के जाल में फंस गए, जिसके कारण उन्होंने बाहरी दुनिया और अपने काम से पूरी तरह दूरी बना ली। वे दिन-रात गुमसुम रहने लगे। इसी मानसिक संकट के बीच एक फिल्म निर्माता उनके पास एक गीत लिखवाने की दरख्वास्त लेकर पहुंचे, जिसे भरत व्यास ने मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण गुस्से में मना कर दिया। बाद में उनकी पत्नी के समझाने और संबल देने पर वे काम करने के लिए राजी हुए और उन्होंने फिल्म ‘जनम जनम के फेरे’ के लिए एक गीत लिखा। अपने इसी मानसिक तनाव और बेटे की तलाश में भटकने के दर्द को उन्होंने पन्नों पर उतारा, जो आगे चलकर ‘जरा सामने तो आ ओ छलिए, छुपा-छुपा के नखरे दिखाए’ के रूप में सामने आया। लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी की जादुई आवाजों से सजे इस गीत ने रेडियो पर आते ही लोकप्रियता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए, लेकिन इस बड़ी कामयाबी के बाद भी भरत व्यास का बेटा वापस नहीं लौटा था। इसके बाद साल 1959 में फिल्म ‘रानी रूपमति’ के लिए गीत लिखते समय भी उनके दिल का वह पुराना जख्म फिर हरा हो गया और उन्होंने बेटे को पुकारते हुए ‘आ लौट के आजा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं’ जैसा मर्मस्पर्शी गीत लिख डाला। सिनेमाई पर्दे पर जब इन गानों को दर्शाया गया, तो दर्शकों ने इसे नायक-नायिका के विरह का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण माना। हालांकि, इन गीतों के बोलों को यदि एक पिता और लापता बेटे के संदर्भ में ध्यान से पढ़ा जाए, तो रचनाकार की आत्मा का रोना साफ महसूस होता है। इस बेहद दर्दनाक कहानी का अंत सुखद रहा क्योंकि ‘आ लौट के आजा मेरे मीत’ गीत की अभूतपूर्व सफलता और देश भर में गूंजने के कुछ समय बाद, उनका बेटा श्याम सुंदर दास आखिरकार सकुशल अपने पिता के पास वापस लौट आया, जिससे भरत व्यास के जीवन का सबसे लंबा और कठिन इंतजार हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
बिजली खंभे की स्टे तार में उतरे करंट से 6 वर्षीय मासूम की मौत, गांव में आक्रोश

मध्यप्रदेश। जबलपुर जिले के ग्राम कुड़रिया में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। घर के पास लगे बिजली खंभे की स्टे तार में कथित रूप से करंट आने से छह वर्षीय बालक की मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली व्यवस्था में लंबे समय से खामियां थीं, जिनकी शिकायतें संबंधित विभाग तक पहुंचाई गई थीं, लेकिन समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई। जानकारी के अनुसार ग्राम कुड़रिया निवासी संदीप काछी का छह वर्षीय पुत्र श्लोक काछी मंगलवार को घर के बाहर गया था। इसी दौरान वह बिजली खंभे के पास पहुंचा, जहां खंभे को सहारा देने वाली स्टे तार में कथित रूप से करंट प्रवाहित हो रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक तार के संपर्क में आते ही बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया। काफी समय तक बच्चे के घर नहीं लौटने पर परिजनों को चिंता हुई और उसकी तलाश शुरू की गई। इसी बीच ग्रामीणों ने बच्चे को बिजली खंभे के पास अचेत अवस्था में पड़ा देखा। सूचना मिलते ही परिजन और गांव के लोग मौके पर पहुंचे तथा तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया। हालांकि चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा और पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों ने घटना के लिए बिजली विभाग की कथित लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि संबंधित खंभे और विद्युत लाइन में पहले भी तकनीकी समस्या की शिकायत की गई थी। ग्रामीणों के अनुसार कई बार विभागीय कर्मचारियों और लाइनमैन को इसकी जानकारी दी गई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में कई स्थानों पर बिजली के तार और उपकरण जर्जर स्थिति में हैं। बरसात और तेज हवाओं के बाद यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सुरक्षा संबंधी समस्याओं की अनदेखी के कारण यह दुखद हादसा हुआ। घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी है और वे जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में मर्ग कायम कर लिया गया है और सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है। वहीं बिजली विभाग के अधिकारियों को भी घटना की जानकारी दे दी गई है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि विद्युत व्यवस्था में किसी प्रकार की तकनीकी खराबी या लापरवाही थी या नहीं। हादसे के बाद ग्रामीण क्षेत्र में बिजली सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि गांव में विद्युत लाइनों और खंभों का व्यापक निरीक्षण कराया जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। फिलहाल पूरे गांव की संवेदनाएं शोकाकुल परिवार के साथ हैं और सभी की नजर जांच रिपोर्ट तथा आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।
साउथ सुपरस्टार चिरंजीवी की लाडली ने झेले जिंदगी के सबसे कड़े इम्तिहान: पहले पति की अचानक मौत और दूसरी शादी के टूटने की भावुक दास्तान

नई दिल्ली । भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के सबसे प्रतिष्ठित और रसूखदार परिवारों में से एक, मेगास्टार चिरंजीवी के ‘कोनिडेला परिवार’ को हमेशा उनकी एकजुटता और सफलता के लिए जाना जाता है। हालांकि, इसी परिवार के मुख्य स्तंभ और ग्लोबल स्टार राम चरण की छोटी बहन श्रीजा कोनिडेला की व्यक्तिगत जिंदगी स्क्रीन पर दिखने वाली चमक-दमक से बिल्कुल उलट, भारी भावनात्मक संघर्षों और दुखों से भरी रही है। हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आए उनके कुछ भावुक बयानों के बाद, एक बार फिर उनकी जिंदगी के वे कड़वे पन्ने चर्चा में आ गए हैं, जिन्होंने उन्हें कम उम्र में ही गहरे मानसिक दर्द से गुजरने पर मजबूर कर दिया था। श्रीजा की जिंदगी का पहला बड़ा और विवादास्पद मोड़ तब आया जब वे महज 19 वर्ष की थीं। साल 2007 में उन्होंने अपने तत्कालीन बॉयफ्रेंड सिरीश भारद्वाज के साथ शादी करने के लिए अपने परिवार की मर्जी के खिलाफ जाकर घर से भागने का फैसला किया था। उस दौर में इस हाई-प्रोफाइल कदम ने पूरे दक्षिण भारतीय मीडिया और राजनीतिक गलियारों में भारी तहलका मचा दिया था। सुरक्षा कारणों से इस युवा जोड़े को कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा था। इस शादी से श्रीजा ने एक बेटी को जन्म दिया, लेकिन कुछ ही वर्षों में उनके रिश्ते में कड़वाहट आ गई और उन्होंने सिरीश पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी रूप से दूरी बना ली। बाद में, सिरीश भारद्वाज के अचानक हुए निधन ने श्रीजा को जिंदगी का पहला बड़ा झटका और दर्द दिया। इस दर्दनाक दौर से उबरने में उनके पिता चिरंजीवी और भाई राम चरण ने उनका पूरा साथ दिया और उन्हें वापस परिवार में ससम्मान शामिल किया। जीवन को एक नया मौका देने के उद्देश्य से, कोनिडेला परिवार ने साल 2016 में बेहद भव्य स्तर पर श्रीजा की दूसरी शादी का आयोजन किया। उनकी यह शादी उनके बचपन के दोस्त और बिजनेसमैन कल्याण देव के साथ हुई थी, जिसमें देश भर की बड़ी हस्तियों ने शिरकत की थी। शादी के बाद दोनों के घर एक बेटी का जन्म हुआ और कुछ समय तक सब कुछ बेहद सामान्य और खुशहाल नजर आ रहा था, जिससे प्रशंसकों को लगा कि श्रीजा की जिंदगी में अब स्थिरता आ चुकी है। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और श्रीजा की यह दूसरी शादी भी लंबे समय तक नहीं टिक सकी। शादी के कुछ साल बाद ही दोनों के बीच वैचारिक मतभेद इस कदर बढ़ गए कि उन्होंने एक-दूसरे से पूरी तरह दूरी बना ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से एक-दूसरे की तस्वीरें हटाने और उपनाम बदलने के बाद इस रिश्ते के टूटने की आधिकारिक पुष्टि भी हो गई। अपनी दूसरी शादी का भी इस तरह दर्दनाक और असमय अंत देखना श्रीजा के लिए एक बहुत बड़ा मानसिक आघात था, जिसने उन्हें भीतर तक झकझोर कर रख दिया था। मौजूदा समय में, दो शादियों के बेहद कड़वे और दर्दनाक अनुभवों से गुजरने के बाद श्रीजा पूरी तरह से एकांत में अपनी दोनों बेटियों की परवरिश कर रही हैं। एक सिंगल मदर के रूप में अपनी बेटियों के भविष्य को संवारने में जुटी श्रीजा ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत दर्द को साझा करते हुए बताया था कि कैसे जीवन की इन कठिन परिस्थितियों ने उन्हें अंदर से मजबूत बनाया है। मुश्किल समय में उनका पूरा परिवार, विशेषकर उनके भाई राम चरण, एक मजबूत ढाल की तरह उनके साथ खड़े हैं, ताकि वे अपने जीवन के इस सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से बाहर निकलकर एक नई और सकारात्मक शुरुआत कर सकें।