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जूड बेलिंगहैम ने रचा इतिहास, चार बड़े इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय फुटबॉलर बने

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के युवा स्टार जूड बेलिंगहैम ने ऐसा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया, जिसने उन्हें यूरोपीय फुटबॉल के सबसे खास खिलाड़ियों की सूची में शामिल कर दिया है। इंग्लैंड ने ग्रुप एल के अपने पहले मैच में क्रोएशिया को 4-2 से हराकर टूर्नामेंट का शानदार आगाज किया, लेकिन इस जीत के साथ सबसे ज्यादा चर्चा बेलिंगहैम की ऐतिहासिक उपलब्धि की रही। 22 वर्षीय जूड बेलिंगहैम अब चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने अब तक दो फीफा वर्ल्ड कप और दो यूईएफए यूरो चैंपियनशिप में हिस्सा लिया है। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने जर्मनी के प्रतिभाशाली खिलाड़ी जमाल मुसियाला का रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया। बेलिंगहैम की यह उपलब्धि उनकी निरंतरता, प्रतिभा और कम उम्र में हासिल की गई सफलता का शानदार उदाहरण मानी जा रही है। क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में बेलिंगहैम ने न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया बल्कि मैदान पर भी अपनी उपयोगिता साबित की। उन्होंने एक शानदार गोल दागा और मिडफील्ड में टीम के खेल को नियंत्रित करते हुए इंग्लैंड की जीत में अहम भूमिका निभाई। कप्तान हैरी केन के दो गोलों के अलावा बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड के गोलों ने इंग्लैंड को 4-2 की मजबूत जीत दिलाई। बेलिंगहैम का अंतरराष्ट्रीय सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ था। उन्होंने मात्र 17 साल और 136 दिन की उम्र में इंग्लैंड की सीनियर टीम के लिए डेब्यू किया था। इंग्लैंड के इतिहास में उनसे कम उम्र में डेब्यू करने वाले सिर्फ दो खिलाड़ी—वेन रूनी और थियो वालकॉट—रहे हैं। इसके बाद उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन से खुद को टीम का अहम हिस्सा बना लिया। उनका पहला बड़ा टूर्नामेंट यूरो 2020 था, जहां उन्होंने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद उन्होंने फीफा वर्ल्ड कप 2022, यूरो 2024 और अब फीफा वर्ल्ड कप 2026 में हिस्सा लेकर यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया। इतनी कम उम्र में चार बड़े टूर्नामेंट खेलने की उपलब्धि इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में वह इंग्लैंड फुटबॉल के सबसे बड़े चेहरों में से एक बन सकते हैं। मैच के बाद बेलिंगहैम ने कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात है और हर बार इंग्लैंड की जर्सी पहनते समय वह अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके लिए राष्ट्रीय टीम की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण है और वह मैदान पर उतरते ही पूरी ऊर्जा के साथ खेलते हैं। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह सीजन काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन बड़े मैचों में टीम के लिए योगदान देना हमेशा उनकी प्राथमिकता रही है। चार बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेलने वाले सबसे युवा यूरोपीय खिलाड़ियों की सूची में अब जूड बेलिंगहैम शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उनके बाद जमाल मुसियाला, पेड्री, जेरेमी डोकू, माइकल ओवेन और लुकास पोडोल्स्की का नाम आता है। यह उपलब्धि न केवल बेलिंगहैम के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव है, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल के उज्ज्वल भविष्य का भी संकेत देती है।

मॉस्को पर यूक्रेन का बड़ा ड्रोन प्रहार, तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना; जेलेंस्की बोले- यह जवाबी कार्रवाई है

नई दिल्ली । रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों पक्ष सीधे एक-दूसरे की रणनीतिक और आर्थिक क्षमताओं को नुकसान पहुंचाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं। ताजा घटनाक्रम में यूक्रेन ने मॉस्को क्षेत्र पर व्यापक ड्रोन हमला कर रूस की सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी है। इस कार्रवाई के बाद रूस की राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है, जबकि कई हवाई अड्डों पर उड़ानों के संचालन को अस्थायी रूप से प्रभावित करना पड़ा। रिपोर्टों के अनुसार यूक्रेन द्वारा किए गए इस हमले का मुख्य लक्ष्य एक महत्वपूर्ण तेल रिफाइनरी और ऊर्जा ढांचे से जुड़े ठिकाने थे। हमले के बाद रिफाइनरी क्षेत्र से उठते धुएं और आग की तस्वीरें सामने आईं, जिन्होंने इस कार्रवाई की गंभीरता को उजागर किया। ऊर्जा क्षेत्र को निशाना बनाए जाने को युद्ध की बदलती रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां सैन्य ठिकानों के साथ-साथ आर्थिक और औद्योगिक ढांचे भी संघर्ष का केंद्र बनते जा रहे हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले के बाद जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों और नागरिक क्षेत्रों पर लगातार किए जा रहे हमलों का जवाब है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूक्रेन उन संसाधनों और संरचनाओं को निशाना बना रहा है जो युद्ध संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अनुसार यह रणनीति रूस की सैन्य क्षमता और आपूर्ति तंत्र को कमजोर करने के उद्देश्य से अपनाई जा रही है। दूसरी ओर रूस ने दावा किया है कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने बड़ी संख्या में ड्रोन को मार गिराया और संभावित नुकसान को सीमित करने में सफलता हासिल की। हालांकि राजधानी क्षेत्र तक ड्रोन पहुंचने की घटनाओं ने रूस की सुरक्षा तैयारियों और हवाई रक्षा तंत्र को लेकर नए सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी के आसपास बार-बार हो रहे ड्रोन हमले इस संघर्ष के नए स्वरूप को दर्शाते हैं। युद्ध के मौजूदा चरण में ऊर्जा अवसंरचना विशेष रूप से निशाने पर है। तेल रिफाइनरी, ईंधन भंडारण केंद्र, बिजली संयंत्र और परिवहन नेटवर्क दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक महत्व रखते हैं। इन पर हमले का उद्देश्य केवल तत्काल नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विरोधी पक्ष की आपूर्ति श्रृंखला, सैन्य लॉजिस्टिक्स और आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित करना भी होता है। यही कारण है कि हाल के महीनों में इस प्रकार के हमलों में तेजी देखी गई है। जेलेंस्की ने यह भी संकेत दिया कि यूक्रेनी बलों ने रूस के अन्य क्षेत्रों और कब्जे वाले इलाकों में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया है। इससे स्पष्ट है कि यूक्रेन अब युद्ध को केवल अपनी सीमाओं तक सीमित रखने के बजाय रूस के भीतर मौजूद रणनीतिक परिसंपत्तियों तक पहुंचाने की क्षमता प्रदर्शित कर रहा है। यह घटनाक्रम संघर्ष की तीव्रता को और बढ़ा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच चल रहा यह संघर्ष फिलहाल समाप्ति की ओर जाता नहीं दिख रहा है। इसके विपरीत, ऊर्जा ढांचे और महत्वपूर्ण आर्थिक परिसंपत्तियों पर बढ़ते हमले संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में युद्ध और अधिक जटिल तथा व्यापक रूप ले सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। फिलहाल मॉस्को सहित रूस के कई क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। वहीं यूक्रेन ने संकेत दिया है कि वह अपने खिलाफ हो रहे हमलों का जवाब देने की रणनीति जारी रखेगा। ऐसे में युद्ध का अगला चरण दोनों देशों के लिए और अधिक चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

भारत ने वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी को 3-1 से रौंदा, एफआईएच प्रो लीग में दिखाया दम

नई दिल्ली । एफआईएच हॉकी प्रो लीग 2025-26 में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन जर्मनी को 3-1 से शिकस्त दे दी। रॉटरडैम में खेले गए इस मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया तथा जर्मनी को पूरे मैच में दबाव में बनाए रखा। इस जीत ने न केवल भारतीय टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई दी, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि टीम बड़े मुकाबलों में किसी भी दिग्गज को चुनौती देने की क्षमता रखती है। मैच की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा और जर्मन टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। इसका फायदा भारत को सातवें मिनट में मिला, जब मनदीप सिंह ने शानदार मूव बनाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास और बढ़ गया। पहले क्वार्टर के अंतिम क्षणों में शिलानंद लाकड़ा ने बेहतरीन स्ट्राइक लगाकर भारत की बढ़त को दोगुना कर दिया। 13वें मिनट में आए इस गोल ने जर्मनी को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया और स्कोर 2-0 हो गया। दूसरे क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी की कोशिश की और भारतीय हाफ में लगातार हमले किए। हालांकि भारतीय डिफेंस चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा। जर्मनी को मिले पेनल्टी कॉर्नर भी भारतीय रक्षा पंक्ति और गोलकीपर मोहित की सतर्कता के सामने बेअसर साबित हुए। अमित रोहिदास ने भी महत्वपूर्ण मौके पर शानदार ब्लॉक लगाकर टीम को बढ़त बनाए रखने में मदद की। पहले हाफ के अंत तक भारत 2-0 से आगे रहा। तीसरे क्वार्टर में भारत ने अपनी आक्रामक रणनीति जारी रखी। 35वें मिनट में नीलकांत शर्मा ने शानदार व्यक्तिगत कौशल का प्रदर्शन करते हुए कई जर्मन डिफेंडरों को छकाया और शानदार गोल दागकर भारत को 3-0 की मजबूत बढ़त दिला दी। यह गोल मैच का सबसे आकर्षक क्षणों में से एक रहा। हालांकि तीसरे क्वार्टर के अंत में जर्मनी के राफेल हार्टकोफ ने गोल कर अंतर कम करने की कोशिश की, लेकिन तब तक भारत मैच पर पूरी तरह पकड़ बना चुका था। अंतिम क्वार्टर में जर्मनी ने वापसी के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने अनुशासित और संयमित खेल दिखाया। काउंटर-प्रेसिंग और विंग्स से तेज हमलों के जरिए भारत ने जर्मनी को दबाव में रखा। मैच के अंतिम मिनटों में जर्मनी को एक और पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन भारतीय डिफेंस ने उसे भी नाकाम कर दिया और 3-1 की यादगार जीत अपने नाम कर ली। इस मुकाबले का एक और ऐतिहासिक पहलू रहा। अनुभवी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह ने अपना 413वां अंतरराष्ट्रीय मैच खेलते हुए दिलीप टिर्की का 412 मैचों का रिकॉर्ड तोड़ दिया और भारत के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। वहीं मिडफील्ड में शानदार प्रदर्शन करने वाले हार्दिक सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। भारत की यह जीत टीम की बढ़ती ताकत और आगामी बड़े टूर्नामेंटों के लिए उसके मजबूत इरादों का संकेत मानी जा रही है।

‘टीम इंडिया के लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है’: डेब्यू सीरीज में चमके गुरनूर बरार, सफलता का बताया राज

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट को एक और उभरता हुआ तेज गेंदबाज मिल गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बरार ने अपने प्रदर्शन से सभी का ध्यान आकर्षित किया है। दाएं हाथ के इस तेज गेंदबाज ने अपने पहले दोनों वनडे मुकाबलों में तीन-तीन विकेट लेकर यह साबित कर दिया कि वह भविष्य में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण का अहम हिस्सा बन सकते हैं। लखनऊ में खेले गए मुकाबले के बाद गुरनूर बरार ने अपनी सफलता के पीछे घरेलू क्रिकेट और इंडिया ए टीम में मिले अनुभव को सबसे बड़ी वजह बताया। उन्होंने कहा कि इंडिया ए का मंच उनके लिए सीखने और खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए तैयार करने का महत्वपूर्ण माध्यम साबित हुआ है। गुरनूर ने कहा कि जब उन्हें इंडिया ए टीम में चुना गया था, तब वह बेहद उत्साहित थे। उनके अनुसार, इंडिया ए में खेलते समय उन्होंने वही रणनीति अपनाई जो वह रणजी ट्रॉफी में इस्तेमाल करते थे। हार्ड लेंथ पर लगातार तेज गेंदबाजी करना और गेंद को स्विंग कराना उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है। उन्होंने बताया कि इंडिया ए में मिले अनुभव ने उन्हें यह विश्वास दिया कि वह बड़े स्तर पर भी उसी आत्मविश्वास के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं। युवा तेज गेंदबाज ने कहा कि उन्होंने भारतीय टीम के लिए खेलते समय भी अपनी स्वाभाविक गेंदबाजी पर भरोसा रखा। उन्होंने किसी तरह का अतिरिक्त दबाव नहीं लिया और अपनी मजबूत पक्षों पर ध्यान केंद्रित किया। बरार का मानना है कि अभी भी उनके प्रदर्शन में और सुधार की काफी गुंजाइश है और आने वाले मैचों में वह और बेहतर प्रदर्शन करना चाहते हैं। उन्होंने टीम प्रबंधन और गेंदबाजी कोच की भी जमकर तारीफ की। गुरनूर ने कहा कि उन्हें कोचिंग स्टाफ से पूरा समर्थन मिला है। टीम प्रबंधन ने उन्हें कोई नई तकनीक अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया, बल्कि उनकी मौजूदा क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी करने की सलाह दी। यही भरोसा उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। गुरनूर बरार ने कहा कि वह भगवान के आभारी हैं कि उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने और अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह तो केवल शुरुआत है और वह आने वाले वर्षों में टीम इंडिया के लिए बहुत कुछ हासिल करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य केवल टीम में जगह बनाना नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट की सफलताओं में महत्वपूर्ण योगदान देना है। आईपीएल 2026 में गुरनूर बरार गुजरात टाइटंस का हिस्सा रहे। हालांकि उन्हें अधिक मैच खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन टीम के साथ बिताया गया समय उनके लिए बेहद मूल्यवान रहा। उन्होंने बताया कि गुजरात टाइटंस के ड्रेसिंग रूम में अनुभवी खिलाड़ियों और कोचों से बहुत कुछ सीखने को मिला। बरार ने कहा कि टीम में मुख्य कोच आशीष नेहरा के अलावा कगिसो रबाडा, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा और इशांत शर्मा जैसे अनुभवी गेंदबाज मौजूद थे। उनके साथ समय बिताने और बातचीत करने से उन्हें गेंदबाजी के कई तकनीकी और मानसिक पहलुओं को समझने का मौका मिला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शानदार शुरुआत के बाद अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें गुरनूर बरार पर टिकी हैं। यदि वह इसी तरह निरंतर प्रदर्शन करते रहे, तो भारतीय तेज गेंदबाजी को एक मजबूत और भरोसेमंद विकल्प मिल सकता है।

ईरानी स्कूल त्रासदी पर ट्रंप का बयान, 168 छात्राओं की मौत वाले मिसाइल हमले को बताया ‘अनजाने में हुई गलती’

नई दिल्ली । ईरान के मीनाब शहर में एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए विनाशकारी मिसाइल हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी बहस के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नया बयान सामने आया है। इस हमले में 168 छात्राओं और कई शिक्षकों की मौत हुई थी, जिसके बाद पूरी दुनिया में गहरी चिंता और संवेदना व्यक्त की गई थी। अब इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्रंप ने कहा है कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह हमला जानबूझकर नहीं किया गया था और मामले की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि युद्ध और सैन्य अभियानों के दौरान कई बार ऐसी घटनाएं हो जाती हैं जिन्हें जानबूझकर अंजाम नहीं दिया जाता। उनके अनुसार इस मामले में भी वास्तविक परिस्थितियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निष्कर्ष आने से पहले किसी भी पक्ष पर निश्चित आरोप लगाना उचित नहीं होगा। प्रेस वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने इस हमले के लिए जवाबदेही और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठाए, तो ट्रंप ने अपेक्षाकृत तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर जांच एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं और सभी तथ्यों को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि रक्षा विभाग के पास इस मामले से जुड़ी अधिक विस्तृत जानकारी उपलब्ध है और जांच प्रक्रिया वहीं से संचालित की जा रही है। गौरतलब है कि फरवरी महीने में मीनाब स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से भारी तबाही मच गई थी। इस हमले में बड़ी संख्या में छात्राओं की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश की आयु छह से तेरह वर्ष के बीच बताई गई थी। इस घटना ने न केवल ईरान बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया था। बच्चों को निशाना बनाने या उनकी मौत का कारण बनने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। हमले के बाद विभिन्न देशों और मानवाधिकार संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यदि किसी सैन्य कार्रवाई के कारण निर्दोष नागरिकों की जान गई है, तो उसके लिए जिम्मेदार परिस्थितियों और निर्णय प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। इसी कारण यह मामला लगातार वैश्विक चर्चा का विषय बना हुआ है। घटना से जुड़े प्रारंभिक आकलनों और विभिन्न रिपोर्टों ने इस हमले की प्रकृति को लेकर कई सवाल खड़े किए थे। कुछ रिपोर्टों में सैन्य गतिविधियों और मिसाइल संचालन से जुड़े संभावित पहलुओं का उल्लेख किया गया, जिसके बाद जांच का दायरा और व्यापक कर दिया गया। अब सभी पक्ष अंतिम निष्कर्षों का इंतजार कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि त्रासदी किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल सैन्य या राजनीतिक मुद्दा नहीं होतीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर होती हैं। निर्दोष बच्चों की मौत ने वैश्विक स्तर पर युद्ध और संघर्षों के मानवीय प्रभावों को फिर से केंद्र में ला दिया है। ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच और जवाबदेही सुनिश्चित करना अंतरराष्ट्रीय विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक माना जाता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद इस मामले की दिशा और इससे जुड़ी राजनीतिक तथा कूटनीतिक चर्चाओं को नया आयाम मिल सकता है।

देवास में देर रात किराना दुकान में लगी भीषण आग: ऊपर सो रहे थे मालिक, लाखों का सामान जलकर खाक

मध्यप्रदेश । देवास जिले के हाटपीपल्या क्षेत्र के ग्राम गाराखेड़ी में बुधवार देर रात एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन एक व्यापारी को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। गांव में स्थित एक किराना दुकान में अचानक आग लग गई, जिससे दुकान में रखा लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, हालांकि आग ने दुकान के भीतर रखे अधिकांश सामान को अपनी चपेट में ले लिया। जानकारी के अनुसार, गाराखेड़ी निवासी धर्मेंद्र सिंह सैंधव की किराना दुकान में देर रात अज्ञात कारणों से आग लग गई। घटना के समय धर्मेंद्र सिंह दुकान के ऊपर बने हिस्से में सो रहे थे। रात करीब 2:30 बजे उन्हें अचानक जलने की तेज बदबू और धुएं का एहसास हुआ। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, लेकिन जब उन्होंने नीचे आकर देखा तो दुकान के भीतर आग तेजी से फैल चुकी थी। आग की लपटें और धुएं का गुबार देखकर धर्मेंद्र सिंह घबरा गए। उन्होंने तत्काल डायल-112 को सूचना दी और आसपास के लोगों को भी मदद के लिए बुलाया। कुछ ही देर में पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। इसके साथ ही गांव के कई लोग भी आग बुझाने के प्रयास में जुट गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम सक्रिय हुई। सैनिक जालम सिंह और पायलट विजय पटेल मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया। वहीं फायर ब्रिगेड के कर्मचारी सुरेंद्र सिंह और राहुल सिंह ने आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास किए। आग की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने भी पूरा सहयोग किया। पड़ोसी रघुवीर सिंह सोलंकी, भगत सिंह, सावन सिंह, संजय सिंह और आर्यन शर्मा सहित कई ग्रामीण आग बुझाने में जुट गए। सभी ने मिलकर आग को आसपास के मकानों और अन्य हिस्सों में फैलने से रोकने की कोशिश की। काफी देर की मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पा लिया गया। हालांकि जब तक आग बुझाई गई, तब तक दुकान में रखा अधिकांश सामान जल चुका था। किराना सामग्री, दैनिक उपयोग के उत्पाद और अन्य जरूरी सामान पूरी तरह नष्ट हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार व्यापारी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। नुकसान का सटीक आकलन प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा किया जाएगा। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि शॉर्ट सर्किट, विद्युत खराबी या अन्य संभावित कारणों की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते आग का पता नहीं चलता तो यह हादसा और भी गंभीर रूप ले सकता था। समय पर मिली सूचना, फायर ब्रिगेड की तत्परता और ग्रामीणों के सहयोग से एक बड़ा नुकसान होने से जरूर बच गया, लेकिन व्यापारी की वर्षों की मेहनत कुछ ही घंटों में राख में बदल गई।

अवैध रेत कारोबार की सूचना देने के शक में किसान पर हमला: ट्रैक्टर में मारी टक्कर, लाठी-डंडों से पीटा, तीन पर केस

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में अवैध रेत कारोबार को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। पिपरोदा अटलपुर गांव में एक किसान पर कथित रूप से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की सूचना देने के शक में हमला कर दिया गया। आरोप है कि तीन लोगों ने पहले किसान के ट्रैक्टर में टक्कर मारी और बाद में लाठी-डंडों तथा लात-घूंसों से उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। पीड़ित अर्जुन सिंह गुर्जर ने बदरवास थाना पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मंगलवार शाम करीब 6 बजे वह गांव में लाल साहब गुर्जर के घर के सामने खड़ा था। इसी दौरान गांव के रहने वाले सादान गुर्जर, रामकृष्ण गुर्जर और राजू गुर्जर ट्रैक्टर लेकर वहां पहुंचे। आरोप है कि तीनों ने आते ही उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। अर्जुन सिंह के अनुसार जब उसने गाली देने का विरोध किया तो विवाद बढ़ गया। आरोपियों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। शिकायत में बताया गया है कि सादान गुर्जर ने लाठी से उसके सिर पर वार किया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसके सिर से खून बहने लगा। इसके बाद राजू गुर्जर ने उसके दाहिने हाथ पर और रामकृष्ण गुर्जर ने बाएं हाथ की उंगली के पास लाठी से हमला किया। पीड़ित का आरोप है कि तीनों हमलावरों ने मिलकर उसे जमीन पर गिरा दिया और लात-घूंसों से मारपीट की। इतना ही नहीं, आरोपियों ने अपने ट्रैक्टर से उसके ट्रैक्टर में टक्कर मारकर नुकसान भी पहुंचाया। अचानक हुई इस घटना से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। मारपीट और हंगामे की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर किसी तरह पीड़ित को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया। ग्रामीणों को आता देख तीनों आरोपी वहां से भाग निकले। घटना के बाद घायल किसान को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हमले के पीछे पुरानी रंजिश और अवैध रेत कारोबार का विवाद है। अर्जुन सिंह का कहना है कि सादान, रामकृष्ण और राजू गुर्जर क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन से जुड़े हुए हैं। उन्हें शक था कि उनके अवैध कारोबार की जानकारी रेंज विभाग और पुलिस तक अर्जुन सिंह के परिवार द्वारा पहुंचाई जाती है। इसी संदेह और रंजिश के चलते आरोपियों ने हमला किया। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मारपीट के बाद आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए मौके से फरार हो गए। घटना के बाद पीड़ित ने बदरवास थाना पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तीनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर अवैध रेत कारोबार से जुड़े विवादों और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग भी चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

डॉलर की मजबूती के दबाव में रुपया, अमेरिकी ब्याज दर संकेतों से बढ़ी चिंता; विदेशी निवेश के बावजूद कमजोरी बरकरार

नई दिल्ली । भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपये पर दबाव देखने को मिला और घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर कारोबार की शुरुआत करती दिखाई दी। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त संकेतों और निवेशकों की बदलती धारणा के बीच रुपया एक बार फिर दबाव में आ गया है। मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक के बाद बाजार की धारणा में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। फेड अधिकारियों के बयानों से संकेत मिले हैं कि अमेरिका में ब्याज दरें अपेक्षा से अधिक समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। महंगाई को नियंत्रित करने की प्राथमिकता के कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशक डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को वहां बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है। इसका परिणाम यह होता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और स्थानीय मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। भारतीय रुपया भी इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का सामना कर रहा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में रुपये ने मजबूती के संकेत भी दिए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ भू-राजनीतिक तनावों में कमी और पश्चिम एशिया से जुड़ी सकारात्मक खबरों के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा था। इसके चलते रुपये में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया था। लेकिन अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े नए संकेतों ने बाजार की दिशा फिर बदल दी और डॉलर को मजबूती मिलने लगी। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। हाल के महीनों में भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे घरेलू मुद्रा को कुछ हद तक समर्थन मिला है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का प्रवाह लगातार बना रहता है तो रुपये को स्थिरता मिल सकती है और अत्यधिक उतार-चढ़ाव से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय मुद्रा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आती है तो इससे देश का आयात बिल घट सकता है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। वहीं तेल की कीमतों में तेजी आने पर मुद्रा बाजार में चिंता बढ़ सकती है। बाजार सहभागियों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी टिप्पणियों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठकों के नतीजों पर बनी हुई है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या होगी और इसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह पर किस प्रकार पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक माहौल, विदेशी निवेश के रुझान और ऊर्जा बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और निवेश प्रवाह मजबूत बना रहता है तो भारतीय मुद्रा को सहारा मिल सकता है। फिलहाल बाजार सतर्क नजर आ रहा है और निवेशक हर नए संकेत पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

85 वर्षीय किसान की जमीन पर फर्जी अनुबंध का आरोप: कोर्ट के आदेश पर FIR, दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस

मध्यप्रदेश । शिवपुरी में एक बुजुर्ग किसान की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्वालियर बायपास रोड निवासी 85 वर्षीय किसान रामजीलाल वर्मा की जमीन का कथित रूप से फर्जी अनुबंध कराने के आरोप में कोतवाली थाना पुलिस ने न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश के बाद की गई है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में शिवपुरी के किड्स गार्डन स्कूल के पास रहने वाले शिवकुमार गौतम को आरोपी बनाया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 336(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले ने शहर में जमीन संबंधी विवादों और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। शिकायतकर्ता रामजीलाल वर्मा के अनुसार, उनके नाम राजस्व अभिलेखों में सर्वे नंबर 609/2 की भूमि दर्ज है और वे इसके वैध स्वामी हैं। आरोप है कि फरवरी 2024 में शिवकुमार गौतम ने इस भूमि को अपनी बताते हुए हेमंत कुमार गुप्ता के साथ अनुबंध कर लिया। शिकायत में दावा किया गया है कि यह अनुबंध पूरी तरह फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था। रामजीलाल वर्मा का कहना है कि इस कथित अनुबंध का उद्देश्य उनकी संपत्ति पर अवैध दावा स्थापित करना और आर्थिक लाभ प्राप्त करना था। जब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। बताया गया है कि रामजीलाल वर्मा ने पहले फिजिकल थाना, कोतवाली थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय की उम्मीद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत कोतवाली थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने विधिवत मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोतवाली थाना पुलिस अब कथित अनुबंध से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि अनुबंध किन परिस्थितियों में तैयार किया गया, उसमें प्रयुक्त दस्तावेजों की वैधता क्या है और कहीं किसी प्रकार की जालसाजी या कूटरचना तो नहीं की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है और पुलिस दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि भूमि संबंधी मामलों में दस्तावेजों की पारदर्शिता और सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इस पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही।

शिवपुरी में अवैध रेत माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई: सिंध नदी घाट से 13 वाहन जब्त, मचा हड़कंप

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। बदरवास थाना क्षेत्र स्थित सिंध नदी के रिजौदी घाट पर बुधवार रात माइनिंग विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत खनन और परिवहन में लगे 13 वाहनों को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई में 10 ट्रैक्टर और 3 हाइड्रा वाहन शामिल हैं। प्रशासन की इस सख्ती से क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, माइनिंग विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सिंध नदी के विभिन्न घाटों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। इन शिकायतों के आधार पर माइनिंग विभाग ने बदरवास थाना पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। बुधवार देर रात जब टीम रिजौदी घाट पहुंची तो वहां अवैध रूप से रेत निकालने और ढोने का काम चल रहा था। अचानक हुई छापेमारी को देखकर वाहन चालक और खनन से जुड़े लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद माइनिंग विभाग और पुलिस ने मौके पर मौजूद 13 वाहनों को जब्त कर लिया। सभी जब्त वाहनों को सुरक्षा की दृष्टि से बदरवास थाना परिसर में पुलिस की निगरानी में खड़ा कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिजौदी घाट पर की गई यह कार्रवाई हाल के समय में जिले की सबसे बड़ी खनन विरोधी कार्रवाइयों में से एक है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे अवैध खनन करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। माइनिंग इंस्पेक्टर ऋषभ दीक्षित ने बताया कि यह कार्रवाई कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ जिलेभर में लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। रिजौदी घाट से कुल 13 वाहन जब्त किए गए हैं और उनके खिलाफ नियमानुसार प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। माइनिंग विभाग की कार्रवाई केवल रिजौदी घाट तक सीमित नहीं रही। विभाग ने गोपालपुर थाना क्षेत्र में भी अवैध उत्खनन के दौरान एक जेसीबी मशीन को पकड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनन पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जब्त किए गए वाहनों और मशीनों से जुड़े सभी मामलों की रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों और खनन गतिविधियों में शामिल लोगों पर नियमानुसार जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि शिवपुरी जिले में सिंध नदी के कई घाट लंबे समय से अवैध रेत कारोबार का केंद्र बने हुए हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में ताजा कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।