CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की तत्काल रोक से इनकार, विस्तृत सुनवाई तक जारी रहेगा नया नियम, छात्रों और अभिभावकों की चिंताएं बरकरार

नई दिल्ली । कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा लागू की गई नई तीन-भाषा नीति को लेकर जारी विवाद अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस नीति पर तत्काल रोक लगाने की मांग को स्वीकार करने से इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि इतने महत्वपूर्ण शैक्षणिक और नीतिगत विषय पर कोई भी अंतरिम आदेश विस्तृत सुनवाई के बाद ही पारित किया जा सकता है। अदालत के इस रुख से फिलहाल बोर्ड की नई व्यवस्था प्रभावी बनी रहेगी, जबकि नीति का विरोध कर रहे अभिभावकों और शिक्षकों की चिंताएं भी बरकरार हैं। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अदालत से आग्रह किया था कि आगामी शैक्षणिक सत्र में इस नीति के क्रियान्वयन पर अस्थायी रोक लगाई जाए। उनका तर्क था कि नई व्यवस्था के तहत छात्रों को दो भारतीय भाषाओं सहित कुल तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिसके लिए स्कूलों में अभी पर्याप्त तैयारी नहीं है। हालांकि अवकाशकालीन पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और कहा कि इस विषय से जुड़ी अन्य याचिकाएं पहले से लंबित हैं, जिनकी सुनवाई निर्धारित तिथि पर की जाएगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान याचिका को भी पहले से लंबित मामलों के साथ जोड़ा जाएगा ताकि सभी संबंधित पक्षों की दलीलें एक साथ सुनी जा सकें। न्यायालय का मानना है कि शिक्षा नीति से जुड़े ऐसे मामलों में जल्दबाजी में कोई फैसला देना उचित नहीं होगा और सभी तथ्यों तथा परिस्थितियों की गहन समीक्षा आवश्यक है। विवाद की जड़ हाल के महीनों में बोर्ड द्वारा जारी किए गए निर्देशों में हुए बदलाव को माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पहले यह संकेत दिया गया था कि नई भाषा व्यवस्था को आगामी वर्षों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, लेकिन बाद में अचानक समयसीमा बदलकर इसे जल्दी लागू करने का निर्णय लिया गया। इससे छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। याचिका में यह भी कहा गया है कि कई विद्यालय अभी तक नई भाषा व्यवस्था के अनुरूप आवश्यक संसाधन विकसित नहीं कर पाए हैं। कई क्षेत्रों में प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सीमित है, जबकि कुछ भाषाओं की पाठ्यपुस्तकें भी समय पर उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। ऐसे में विद्यार्थियों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। अभिभावकों और शिक्षकों का एक वर्ग यह भी तर्क दे रहा है कि भाषा सीखना व्यक्तिगत रुचि, क्षेत्रीय आवश्यकता और शैक्षणिक सुविधा से जुड़ा विषय है। उनका मानना है कि पहले से निर्धारित पाठ्यक्रम के बीच नई भाषा को अनिवार्य रूप से शामिल करने से छात्रों को समायोजन संबंधी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए चुनौती अधिक हो सकती है जो पहले से दो भाषाओं के साथ अन्य विषयों का संतुलन बना रहे हैं। दूसरी ओर, नई शिक्षा व्यवस्था के समर्थकों का मानना है कि बहुभाषी शिक्षा छात्रों के बौद्धिक विकास, सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में सहायक हो सकती है। उनका तर्क है कि भारतीय भाषाओं के अध्ययन को बढ़ावा देना शिक्षा के व्यापक उद्देश्यों के अनुरूप है और इससे विद्यार्थियों को विविध भाषाई परिवेश को समझने का अवसर मिलेगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि नई तीन-भाषा नीति पर अंतिम निर्णय आने में अभी समय लगेगा। आगामी सुनवाई में अदालत बोर्ड, संबंधित शैक्षणिक संस्थाओं और याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विस्तार से विचार करेगी। तब तक यह मुद्दा देश के शिक्षा क्षेत्र में चर्चा और बहस का प्रमुख विषय बना रहेगा।
बिलकिसगंज जोड़ पर खुली नाली में गिरा बाइक सवार, सुरक्षा इंतजामों की पोल खुली

मध्यप्रदेश । सीहोर जिले के बिलकिसगंज जोड़ पर गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक बाइक सवार सड़क किनारे निर्माणाधीन खुली नाली में जा गिरा। दुर्घटना में बाइक सवार को गंभीर चोटें नहीं आईं, लेकिन इस घटना ने निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सड़क किनारे नाली निर्माण का कार्य लंबे समय से चल रहा है। बावजूद इसके, मौके पर न तो किसी प्रकार की बैरिकेडिंग की गई थी और न ही लोगों को सतर्क करने के लिए चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। इसी कारण बाइक सवार अचानक संतुलन खो बैठा और सीधे खुली नाली में जा गिरा। हादसे के बाद बाइक नाली में पड़े मलबे और लोहे के सरियों के बीच बुरी तरह फंस गई, जिसे निकालने के लिए आसपास मौजूद लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। घटना की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिनमें बाइक की स्थिति साफ दिखाई दे रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इस मार्ग पर पहले भी कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग और ठेकेदारों ने अब तक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है। रिहायशी क्षेत्र और मुख्य सड़क के पास चल रहे इस निर्माण कार्य में सुरक्षा उपायों की कमी को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि नाली के आसपास बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत लगाए गए होते तो इस तरह की दुर्घटना टाली जा सकती थी। लोगों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय करने की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन अक्सर हादसों के बाद कार्रवाई का आश्वासन देता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आता। यही कारण है कि क्षेत्र में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है। उनका मानना है कि केवल जांच या चेतावनी से काम नहीं चलेगा, बल्कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल हादसे के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि खुली नालियों और निर्माण स्थलों पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी की जान खतरे में न पड़े। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि विकास कार्यों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन भी उतना ही जरूरी है।
सीहोर में ग्रामीणों ने पकड़े रेत से भरे ट्रैक्टर, चालक के पास न रॉयल्टी मिली न लाइसेंस

सीहोर । सीहोर जिले के रफीगंज-लोदड़ी गांव में गुरुवार को उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब ग्रामीणों ने रेत से भरे कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को गांव के भीतर से गुजरते हुए रोक लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से अवैध रेत परिवहन में लगे वाहन गांव के रास्तों का उपयोग कर रहे हैं और तेज रफ्तार के कारण लोगों की जान जोखिम में पड़ रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए इस पूरे मामले को कानून व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है। ग्रामीणों के अनुसार, रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना किसी रोक-टोक के गांव की सड़कों पर दौड़ते हैं। कई बार वाहन चालक ग्रामीणों की चेतावनियों को नजरअंदाज कर चुके हैं। गांव के चौकीदार द्वारा भी उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक और वाहन मालिकों ने किसी की बात नहीं मानी। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार के कारण बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है। हाल ही में गांव में हुए एक हादसे ने लोगों की चिंता को और बढ़ा दिया है। कुछ दिन पहले एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक दुकान में घुस गई थी। घटना के समय दुकान में मौजूद एक बच्ची को ग्रामीणों ने समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया और उन्होंने अवैध रेत परिवहन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों द्वारा रोके गए एक ट्रैक्टर चालक ने कैमरे के सामने स्वीकार किया कि उसके पास रेत परिवहन की कोई वैध रॉयल्टी नहीं है। इतना ही नहीं, वह ड्राइविंग लाइसेंस भी प्रस्तुत नहीं कर सका। चालक ने बताया कि वाहन मालिक के निर्देश पर वह गांव के रास्ते से रेत लेकर जा रहा था क्योंकि यह मार्ग छोटा और सीधा पड़ता है। इस खुलासे के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। घटना के बाद माइनिंग विभाग, परिवहन विभाग और स्थानीय प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वाहन बिना नंबर प्लेट, बिना रॉयल्टी और बिना लाइसेंस के खुलेआम सड़कों पर चल रहे हैं तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। कई ट्रैक्टरों पर नंबर प्लेट तक नहीं लगी थी, जिससे उनकी पहचान करना भी मुश्किल था। ग्रामीणों ने मामले की सूचना पुलिस को डायल-100 के माध्यम से दी है और मांग की है कि गांव के अंदर से रेत परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यदि रेत का वैध कारोबार किया जा रहा है तो वाहनों को मुख्य मार्गों का उपयोग करना चाहिए और सभी आवश्यक दस्तावेज साथ रखने चाहिए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई के डर से रेत कारोबारी अब मुख्य सड़कों के बजाय ग्रामीण मार्गों का उपयोग कर रहे हैं। इससे न केवल गांव की सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है। अब सभी की नजर प्रशासन पर टिकी है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और अवैध रेत परिवहन पर कितना प्रभावी अंकुश लगा पाता है।
इंडो-पैसिफिक कमांड के नाम बदलने पर छिड़ी वैश्विक बहस, हिना रब्बानी खार की टिप्पणी पर कंवल सिब्बल का तीखा पलटवार, रणनीतिक संकेतों को लेकर बढ़ी चर्चा

नई दिल्ली । अमेरिका द्वारा अपने प्रमुख सैन्य ढांचे ‘यूएस इंडो-पैसिफिक कमांड’ का नाम बदलकर फिर से ‘यूएस पैसिफिक कमांड’ किए जाने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है। इस निर्णय को केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि व्यापक भू-राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसी मुद्दे पर पाकिस्तान की पूर्व विदेश मंत्री हिना रब्बानी खार और भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल के बीच सार्वजनिक रूप से विचारों का टकराव सामने आया है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिना रब्बानी खार ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि किसी भी देश की प्रतिष्ठा या रणनीतिक महत्व इस बात से तय नहीं होना चाहिए कि अमेरिका अपने किसी सैन्य कमांड को क्या नाम देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी राष्ट्र की आत्मछवि केवल बाहरी शक्तियों के फैसलों से प्रभावित होती है, तो यह चिंता का विषय है। उनके अनुसार देशों को अपनी पहचान, प्रभाव और वैश्विक भूमिका अपने निर्णयों और नीतियों के आधार पर तय करनी चाहिए। हिना रब्बानी खार की इस टिप्पणी ने क्षेत्रीय रणनीति पर नई चर्चा को जन्म दिया। उनका मानना था कि किसी सैन्य ढांचे के नाम में बदलाव को अत्यधिक महत्व देना उचित नहीं है और देशों को अपनी दीर्घकालिक राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक शक्ति संतुलन को केवल प्रतीकात्मक निर्णयों के आधार पर नहीं समझा जा सकता। हालांकि भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस दृष्टिकोण से असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इंडो-पैसिफिक शब्द केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक अवधारणा का प्रतिनिधित्व करता है। उनके अनुसार इस अवधारणा का उद्देश्य हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक साझा सुरक्षा क्षेत्र के रूप में देखना है, जहां क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और शक्ति संतुलन के मुद्दे परस्पर जुड़े हुए हैं। सिब्बल ने कहा कि इंडो-पैसिफिक ढांचे के पीछे कई वर्षों की रणनीतिक सोच और सुरक्षा संबंधी चिंताएं रही हैं। विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलते शक्ति समीकरण, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर विकसित देशों ने इस अवधारणा को महत्वपूर्ण माना था। यही कारण है कि इसे केवल शब्दों का परिवर्तन मानना वास्तविक रणनीतिक संदर्भों की अनदेखी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने पहले कार्यकाल में कमांड का नाम बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड किया था ताकि यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि हिंद महासागर क्षेत्र भी उसकी सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताओं का हिस्सा है। ऐसे में अब नाम को पुनः पैसिफिक कमांड किए जाने के फैसले को क्षेत्रीय देशों द्वारा गंभीरता से देखा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव का असर केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। एशिया, हिंद महासागर क्षेत्र और प्रशांत क्षेत्र से जुड़े कई देशों की रणनीतिक गणनाओं पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से उन देशों के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था, समुद्री सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में प्रतीकात्मक दिखने वाले निर्णय भी व्यापक रणनीतिक संदेश दे सकते हैं। यही कारण है कि इंडो-पैसिफिक बनाम पैसिफिक की यह बहस अब केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की कूटनीतिक दिशा पर केंद्रित चर्चा का विषय बन चुकी है।
हैरी केन के डबल धमाके से इंग्लैंड की विजयी शुरुआत, क्रोएशिया को 4-2 से हराया

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 में इंग्लैंड ने अपने अभियान की शानदार शुरुआत करते हुए क्रोएशिया को 4-2 से हराकर तीन महत्वपूर्ण अंक हासिल कर लिए। डलास स्टेडियम में खेले गए ग्रुप एल के इस रोमांचक मुकाबले में दर्शकों को आक्रामक फुटबॉल, शानदार गोल और जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला। इंग्लैंड की जीत के सबसे बड़े नायक कप्तान हैरी केन रहे, जिन्होंने दो महत्वपूर्ण गोल दागकर टीम को जीत की राह दिखाई। मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने तेज गति से खेलना शुरू किया। क्रोएशिया ने शुरुआती मिनटों में इंग्लैंड के डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश की, लेकिन इंग्लैंड ने जल्द ही मुकाबले की कमान अपने हाथ में ले ली। 12वें मिनट में इंग्लैंड को पेनल्टी मिली, जिसने मैच का रुख बदल दिया। हैरी केन का पहला प्रयास गोलकीपर डोमिनिक लिवाकोविक ने रोक लिया, लेकिन नियम उल्लंघन के कारण पेनल्टी दोबारा कराई गई। दूसरे मौके पर केन ने कोई गलती नहीं की और इंग्लैंड को 1-0 की बढ़त दिला दी। हालांकि क्रोएशिया ने हार नहीं मानी। मार्टिन बटुरिना ने शानदार गोल कर स्कोर 1-1 से बराबर कर दिया और मुकाबले को फिर रोमांचक बना दिया। लेकिन इंग्लैंड ने तुरंत जवाब दिया। एक कॉर्नर किक पर हैरी केन ने बेहतरीन हेडर लगाकर अपना दूसरा गोल दागा और टीम को 2-1 से आगे कर दिया। पहले हाफ के अंतिम क्षणों में क्रोएशिया ने फिर वापसी की। स्टॉपेज टाइम में इवान पेरिसिक ने शानदार मूव बनाया और मूसा को पास दिया, जिन्होंने गोल कर स्कोर 2-2 कर दिया। पहले हाफ का अंत बराबरी पर हुआ और दोनों टीमों के बीच मुकाबला पूरी तरह खुला नजर आ रहा था। दूसरे हाफ की शुरुआत इंग्लैंड के लिए शानदार रही। खेल शुरू होने के केवल दो मिनट बाद जूड बेलिंगहैम ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत प्रयास से गोल दागा। उन्होंने दाईं ओर से बॉक्स में प्रवेश किया और सटीक शॉट के जरिए इंग्लैंड को 3-2 की बढ़त दिला दी। इस गोल ने इंग्लैंड का आत्मविश्वास और बढ़ा दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने लगातार हमले जारी रखे। बेलिंगहैम, डेक्लान राइस और निको ओ’रेली ने कई अवसर बनाए, लेकिन क्रोएशिया के गोलकीपर डोमिनिक लिवाकोविक ने कई शानदार बचाव कर अपनी टीम को मुकाबले में बनाए रखा। दूसरी तरफ क्रोएशिया ने भी बराबरी के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन इंग्लैंड के गोलकीपर जॉर्डन पिकफोर्ड ने महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार प्रदर्शन किया। मैच के अंतिम चरण में सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान में उतरे मार्कस रैशफोर्ड ने इंग्लैंड की जीत पर मुहर लगा दी। उन्होंने शानदार मूव बनाते हुए चौथा गोल किया और क्रोएशिया की वापसी की सभी उम्मीदों को समाप्त कर दिया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने ग्रुप एल में मजबूत शुरुआत की है। कप्तान हैरी केन ने दो गोलों के साथ अपना शानदार फॉर्म जारी रखा और एक और रिकॉर्ड अपने नाम किया। वहीं जूड बेलिंगहैम ने भी साबित कर दिया कि वह इंग्लैंड के भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान के भी सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में शामिल हैं। इंग्लैंड की यह जीत टीम को टूर्नामेंट के आगामी मुकाबलों के लिए और अधिक आत्मविश्वास प्रदान करेगी।
एनरी डर्कसन की विस्फोटक फिफ्टी से साउथ अफ्रीका की रोमांचक जीत, पाकिस्तान को 2 विकेट से हराया

नई दिल्ली । महिला टी20 विश्व कप 2026 के 11वें मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने रोमांचक संघर्ष के बाद पाकिस्तान को 2 विकेट से हराकर महत्वपूर्ण जीत अपने नाम कर ली। एजबेस्टन मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 126 रन बनाए थे, जिसके जवाब में साउथ अफ्रीका ने 16.5 ओवर में 8 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया। मैच के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन अंततः एनरी डर्कसन की शानदार अर्धशतकीय पारी ने प्रोटियाज टीम को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। 127 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी साउथ अफ्रीका की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। कप्तान लौरा वोल्वार्ट केवल 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं, जबकि अनुभवी बल्लेबाज सुने लुस भी सिर्फ 5 रन ही जोड़ सकीं। शुरुआती विकेट गिरने से टीम दबाव में आ गई थी, लेकिन एनरी डर्कसन ने मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तान के गेंदबाजों पर पलटवार किया। डर्कसन ने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए और महज 35 गेंदों में 52 रनों की शानदार पारी खेली। उनकी इस पारी में 7 चौके और 2 शानदार छक्के शामिल रहे। उन्होंने न केवल रनगति को बनाए रखा, बल्कि विपक्षी गेंदबाजों पर दबाव भी बनाया। दूसरी ओर नादिन डे क्लर्क ने भी अहम भूमिका निभाई और 28 गेंदों में 37 रन बनाकर टीम की जीत की नींव मजबूत की। हालांकि डर्कसन के आउट होने के बाद मुकाबला फिर रोमांचक हो गया। साउथ अफ्रीका ने लगातार अंतराल पर विकेट गंवाए और पाकिस्तान की टीम ने मैच में जोरदार वापसी की। एक समय ऐसा लग रहा था कि मुकाबला पाकिस्तान की ओर झुक सकता है, लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने संयम बनाए रखा और टीम को जीत दिलाने में सफलता हासिल की। पाकिस्तान की ओर से कप्तान फातिमा सना ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। गेंदबाजी में उन्होंने 16 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके, जबकि सादिया इकबाल ने भी दो बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इसके बावजूद उनकी मेहनत टीम को जीत नहीं दिला सकी। इससे पहले पाकिस्तान की बल्लेबाजी बेहद कमजोर शुरुआत के कारण बड़े स्कोर तक नहीं पहुंच सकी। मुनीबा अली पहली ही गेंद पर आउट हो गईं, जबकि गुल फिरोजा, नतालिया परवेज, आयशा जफर और रमीन शमीम भी बड़ी पारी नहीं खेल सकीं। शीर्ष क्रम की नाकामी के बाद कप्तान फातिमा सना ने शानदार जिम्मेदारी निभाई और 38 गेंदों में नाबाद 55 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 6 चौके और 2 छक्के लगाए। तूबा हसन ने भी 23 रनों का उपयोगी योगदान दिया, जिसकी बदौलत पाकिस्तान 126 रन तक पहुंच पाया। साउथ अफ्रीका की गेंदबाजी में मारिजाने कैप सबसे सफल रहीं। उन्होंने 4 ओवर में 23 रन देकर 3 विकेट लिए। शबनीम इस्माइल और अयबोंगा खाका ने भी एक-एक विकेट हासिल कर टीम की जीत में अहम योगदान दिया। इस जीत के साथ साउथ अफ्रीका ने टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, जबकि पाकिस्तान को अगले मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन कर वापसी करनी होगी। मैच की सबसे बड़ी नायिका एनरी डर्कसन रहीं, जिनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने साउथ अफ्रीका को मुश्किल हालात से निकालकर जीत दिलाई।
पूर्व प्रधानमंत्री के बेटे को WhatsApp जालसाजों ने बनाया निशाना, 7.8 करोड़ की साइबर ठगी से मचा हड़कंप

नई दिल्ली । राजधानी दिल्ली में सामने आए एक बड़े साइबर फ्रॉड ने एक बार फिर डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन पहचान की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पूर्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल के पुत्र और पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश कुमार गुजराल साइबर ठगी का शिकार हो गए। जालसाजों ने बेहद सुनियोजित तरीके से उनकी पहचान का इस्तेमाल करते हुए करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इस मामले में करीब 7.8 करोड़ रुपये की रकम ठगों के खातों में ट्रांसफर कर दी गई, जिसके बाद पुलिस और साइबर एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने नरेश गुजराल की तस्वीर का उपयोग कर व्हाट्सऐप पर एक फर्जी प्रोफाइल तैयार की। इसके बाद ठगों ने उनके स्टाफ के एक सदस्य से संपर्क किया और खुद को नरेश गुजराल बताकर बातचीत शुरू की। संदेशों के माध्यम से यह विश्वास दिलाया गया कि वह किसी महत्वपूर्ण बैठक में व्यस्त हैं और तत्काल एक वित्तीय लेनदेन कराना आवश्यक है। इसी बहाने स्टाफ को एक निर्धारित बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए बड़ी राशि ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए। ठगों की योजना इतनी सुनियोजित थी कि शुरुआती स्तर पर किसी को संदेह नहीं हुआ। व्हाट्सऐप प्रोफाइल पर नरेश गुजराल की तस्वीर लगी होने और संवाद की शैली विश्वसनीय लगने के कारण संबंधित कर्मचारी निर्देशों का पालन करता रहा। हालांकि बाद में लेनदेन की प्रकृति और रकम को लेकर संदेह पैदा हुआ, जिसके बाद मामले ने नया मोड़ लिया। घटना का खुलासा तब हुआ जब संबंधित कर्मचारी ने पूरे मामले की जानकारी नरेश गुजराल की बेटी दीक्षा गुजराल को दी। उन्हें लेनदेन में कुछ असामान्य लगा और उन्होंने तत्काल अपने पिता से संपर्क कर भुगतान संबंधी निर्देशों की पुष्टि की। बातचीत के दौरान स्पष्ट हो गया कि नरेश गुजराल ने ऐसा कोई संदेश या आदेश जारी नहीं किया था। इसके बाद परिवार को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही साइबर विशेषज्ञों और जांच एजेंसियों ने मनी ट्रेल की जांच शुरू कर दी। बैंक खातों और लेनदेन के रिकॉर्ड को खंगालते हुए अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप ठगी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा समय रहते फ्रीज कराया जा सका। शुरुआती कार्रवाई में लगभग चार करोड़ रुपये को सुरक्षित कर लिया गया, जिससे संभावित नुकसान को काफी हद तक सीमित करने में मदद मिली। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि ठगों ने व्यक्तिगत जानकारी और संपर्क विवरण कैसे प्राप्त किए। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस धोखाधड़ी के पीछे कोई संगठित साइबर गिरोह सक्रिय है या नहीं। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और संचार माध्यमों का विश्लेषण कर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं। यह घटना इस बात का बड़ा उदाहरण है कि आज के समय में केवल फोटो और नाम का इस्तेमाल कर किसी की पहचान का दुरुपयोग किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वित्तीय निर्देश को केवल मैसेज के आधार पर स्वीकार करने के बजाय स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है। विशेष रूप से बड़ी रकम के लेनदेन से पहले फोन कॉल या प्रत्यक्ष पुष्टि जैसी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक हो गया है। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच यह प्रकरण आम लोगों और संस्थानों दोनों के लिए चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सतर्कता, पहचान की पुष्टि और त्वरित शिकायत ही ऐसे अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका मानी जा रही है।
ब्लंडेल और फिलिप्स ने संभाली न्यूजीलैंड की पारी, दूसरे टेस्ट के पहले दिन 291/7 का मजबूत स्कोर

नई दिल्ली । न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच केनिंग्टन ओवल में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन का खेल रोमांच और उतार-चढ़ाव से भरपूर रहा। शुरुआती झटकों के बावजूद न्यूजीलैंड ने शानदार वापसी करते हुए दिन का खेल समाप्त होने तक 7 विकेट के नुकसान पर 291 रन बना लिए। टॉम ब्लंडेल और ग्लेन फिलिप्स की जिम्मेदार पारियों ने टीम को संकट से निकालकर सम्मानजनक स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया और शुरुआत में उसका यह निर्णय सही साबित होता नजर आया। न्यूजीलैंड के सलामी बल्लेबाज डेवोन कॉनवे मात्र 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। इसके बाद कप्तान टॉम लाथम ने कुछ अच्छे शॉट जरूर लगाए, लेकिन वह बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं हो सके और 27 रन बनाकर आउट हो गए। हेनरी निकोल्स ने भी शुरुआत तो की, लेकिन 24 रन के निजी स्कोर पर उनकी पारी समाप्त हो गई। युवा बल्लेबाज रचिन रविंद्र से टीम को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वह भी 33 रन बनाकर आउट हो गए। 107 रन के स्कोर तक न्यूजीलैंड अपने चार प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा चुका था और टीम दबाव में दिखाई दे रही थी। ऐसे समय में अनुभवी बल्लेबाज टॉम ब्लंडेल ने मोर्चा संभाला और डेरिल मिचेल के साथ मिलकर पारी को स्थिरता प्रदान की। ब्लंडेल और मिचेल ने पांचवें विकेट के लिए 81 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की, जिससे न्यूजीलैंड की पारी फिर से पटरी पर लौट आई। मिचेल 44 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन ब्लंडेल ने अपना संघर्ष जारी रखा। उन्होंने संयम और आक्रामकता का बेहतरीन मिश्रण दिखाते हुए 84 गेंदों में 51 रन बनाए। उनकी पारी में छह आकर्षक चौके शामिल रहे। ब्लंडेल के आउट होने के बाद ग्लेन फिलिप्स ने जिम्मेदारी संभाली और शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया। फिलिप्स ने तेज गति से रन बनाते हुए इंग्लैंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। दिन का खेल समाप्त होने तक वह 74 गेंदों में 49 रन बनाकर नाबाद लौटे। अपनी पारी में उन्होंने नौ चौके लगाए और दूसरे दिन अर्धशतक पूरा करने के करीब पहुंच गए। उनके साथ काइल जेमिसन 6 रन बनाकर क्रीज पर मौजूद हैं। इंग्लैंड की गेंदबाजी की बात करें तो युवा गेंदबाज सन्नी बेकर और जैकब बेथेल ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया। दोनों ने दो-दो विकेट हासिल किए। जोफ्रा आर्चर, मैथ्यू फिशर और जोश टंग को एक-एक सफलता मिली। हालांकि दिन के अंतिम सत्र में इंग्लिश गेंदबाज न्यूजीलैंड के निचले क्रम को पूरी तरह दबाव में नहीं ला सके। इस मैच में इंग्लैंड की टीम कई बदलावों के साथ मैदान पर उतरी है। नियमित कप्तान बेन स्टोक्स और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन चयन के लिए उपलब्ध नहीं थे, जिसके चलते जो रूट टीम की कप्तानी कर रहे हैं। वहीं चोटिल ओली रोबिन्सन की जगह जोफ्रा आर्चर को अंतिम एकादश में शामिल किया गया है।
हैरी केन ने रचा इतिहास, वर्ल्ड कप में गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर बने इंग्लैंड के संयुक्त शीर्ष स्कोरर

नई दिल्ली । फीफा वर्ल्ड कप 2026 के अपने पहले ही मुकाबले में इंग्लैंड के कप्तान हैरी केन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह दुनिया के सबसे भरोसेमंद स्ट्राइकरों में क्यों गिने जाते हैं। क्रोएशिया के खिलाफ खेले गए मुकाबले में केन ने दो शानदार गोल दागकर न केवल अपनी टीम को 4-2 की महत्वपूर्ण जीत दिलाई, बल्कि इंग्लैंड फुटबॉल इतिहास में एक और सुनहरा अध्याय भी जोड़ दिया। इन दो गोलों के साथ केन ने विश्व कप इतिहास में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा गोल करने के गैरी लिनेकर के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। मैच से पहले हैरी केन को इस उपलब्धि तक पहुंचने के लिए दो गोलों की जरूरत थी और उन्होंने यह काम पहले हाफ में ही पूरा कर दिया। केन ने 12वें मिनट में पेनल्टी के जरिए अपना पहला गोल दागा और टीम को शुरुआती बढ़त दिलाई। इस गोल के साथ उन्होंने एक और खास रिकॉर्ड अपने नाम किया। वह फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में शूटआउट को छोड़कर पांच पेनल्टी गोल करने वाले पहले खिलाड़ी बन गए। इसके बाद हाफ टाइम से ठीक पहले उन्होंने अपना दूसरा गोल दागकर इंग्लैंड की स्थिति मजबूत कर दी और गैरी लिनेकर के 10 विश्व कप गोलों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। हैरी केन का विश्व कप सफर 2018 में शुरू हुआ था और तब से वह लगातार बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ते आए हैं। रूस में खेले गए 2018 विश्व कप में उन्होंने छह गोल दागकर गोल्डन बूट अपने नाम किया था। उस टूर्नामेंट में इंग्लैंड सेमीफाइनल तक पहुंचा था और केन टीम के सबसे बड़े नायक बनकर उभरे थे। इसके बाद कतर में आयोजित 2022 विश्व कप में भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और दो महत्वपूर्ण गोल किए। अब 2026 विश्व कप में उन्होंने अपने गोलों की संख्या 10 तक पहुंचाकर इतिहास रच दिया है। इंग्लैंड के लिए केन का योगदान केवल विश्व कप तक सीमित नहीं है। वह राष्ट्रीय टीम के सर्वकालिक शीर्ष गोल स्कोरर भी हैं और पिछले कई वर्षों से टीम की सफलता के प्रमुख स्तंभ रहे हैं। उनकी कप्तानी में इंग्लैंड ने यूरो 2020 और यूरो 2024 के फाइनल तक का सफर तय किया। हालांकि टीम खिताब जीतने में सफल नहीं हो सकी, लेकिन केन के नेतृत्व और प्रदर्शन की हर स्तर पर सराहना हुई। क्रोएशिया के खिलाफ मुकाबले में इंग्लैंड ने आक्रामक फुटबॉल का शानदार प्रदर्शन किया। केन के दो गोलों के अलावा जूड बेलिंगहैम और मार्कस रैशफोर्ड ने भी एक-एक गोल दागा। इंग्लैंड की यह जीत न केवल टूर्नामेंट में आत्मविश्वास बढ़ाने वाली रही, बल्कि इसने यह भी संकेत दिया कि टीम खिताब की मजबूत दावेदारों में शामिल है। अब सभी की निगाहें हैरी केन पर टिकी हैं, क्योंकि अगले गोल के साथ वह गैरी लिनेकर को पीछे छोड़कर फीफा वर्ल्ड कप इतिहास में इंग्लैंड के सबसे सफल गोल स्कोरर बन जाएंगे। जिस फॉर्म में केन नजर आ रहे हैं, उसे देखते हुए यह रिकॉर्ड टूटना सिर्फ समय की बात लग रही है।
बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विवाद पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, ऋतब्रत बनर्जी को मिली राहत; ममता खेमे को झटका

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर चल रहे विवाद के बीच कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने विधानसभा अध्यक्ष द्वारा बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दिए जाने के निर्णय पर अंतरिम रोक लगाने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इस आदेश के साथ ही यह साफ हो गया है कि फिलहाल ऋतब्रत बनर्जी ही पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। यह मामला उस समय अदालत पहुंचा था जब विधानसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति से जुड़ी प्रक्रिया में मूल राजनीतिक दल की अनुशंसा और संगठनात्मक स्थिति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। इसी आधार पर अदालत से मांग की गई थी कि अंतिम निर्णय आने तक इस नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाई जाए। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क अदालत के समक्ष रखे। न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने उपलब्ध तथ्यों और कानूनी पक्षों पर विचार करने के बाद अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में नियुक्ति पर रोक लगाने का कोई पर्याप्त आधार नहीं बनता। इसके परिणामस्वरूप विधानसभा अध्यक्ष का पूर्व निर्णय प्रभावी बना रहेगा। अदालत के आदेश से ऋतब्रत बनर्जी को बड़ी राहत मिली है। अब वे अंतिम न्यायिक निर्णय आने तक विपक्ष के नेता के रूप में सदन के भीतर अपनी भूमिका जारी रख सकेंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला विधानसभा की शक्ति संरचना और विपक्ष की रणनीति दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। साथ ही यह राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों में नए समीकरण भी पैदा कर सकता है। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई को आगे बढ़ाते हुए दोनों पक्षों को विस्तृत हलफनामे और लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि अगली सुनवाई से पहले सभी संबंधित पक्ष अपने तर्क, दस्तावेज और कानूनी आधार रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करें। इसके बाद मामले के विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की जाएगी और अंतिम निर्णय की दिशा तय होगी। इस फैसले के बाद विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र और उनके प्रशासनिक निर्णय को भी फिलहाल कानूनी संरक्षण मिला है। अदालत के रुख से यह संकेत मिला है कि संवैधानिक पदों से जुड़े मामलों में न्यायालय बिना विस्तृत सुनवाई के हस्तक्षेप करने से बचना चाहता है। यही कारण है कि अदालत ने अंतिम निर्णय से पहले यथास्थिति बनाए रखने को प्राथमिकता दी है। राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति और विपक्षी खेमे के बीच पहले से जारी टकराव के बीच यह मामला केवल एक पद की नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियां, दलगत अधिकार, संसदीय परंपराएं और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे कई संवैधानिक प्रश्न भी शामिल हो गए हैं। फिलहाल सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां दोनों पक्ष अपने विस्तृत कानूनी तर्क अदालत के सामने रखेंगे। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में कार्य करते रहेंगे और विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय पूरी तरह लागू माना जाएगा।