Devendra Jhajharia: हादसे ने छीना एक हाथ, हौसले ने दिलाए तीन पैरालंपिक पदक: देवेंद्र झाझरिया की प्रेरक कहानी

Devendra Jhajharia: नई दिल्ली । भारत के खेल इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो केवल अपनी उपलब्धियों के लिए नहीं बल्कि अपने संघर्ष और जज्बे के लिए भी हमेशा याद किए जाते हैं। देवेंद्र झाझरिया ऐसा ही एक नाम है, जिन्होंने जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदल दिया। एक दर्दनाक हादसे में बचपन में अपना बायां हाथ गंवाने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और दुनिया को दिखा दिया कि मजबूत इरादों के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। राजस्थान के चुरू जिले में 10 जून 1981 को जन्मे देवेंद्र झाझरिया का बचपन सामान्य बच्चों की तरह बीत रहा था। लेकिन महज आठ साल की उम्र में एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। एक दिन पेड़ पर चढ़ते समय उनका संपर्क हाई वोल्टेज बिजली के तार से हो गया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद डॉक्टरों को उनकी जान बचाने के लिए उनका बायां हाथ काटना पड़ा। इस घटना ने उनके जीवन की दिशा बदल दी, लेकिन उनके हौसले को नहीं तोड़ सकी। हादसे के बाद देवेंद्र को सामाजिक उपेक्षा और मानसिक संघर्ष का भी सामना करना पड़ा। साथी बच्चों के बीच खुद को अलग महसूस करने वाले देवेंद्र ने धीरे-धीरे खेलों की ओर रुख किया। स्कूल स्तर पर भाला फेंक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते हुए उनकी प्रतिभा सामने आने लगी। वर्ष 1997 में एक पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान कोच रिपुदमन सिंह की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने देवेंद्र को इस खेल को गंभीरता से अपनाने की सलाह दी और यहीं से एक महान खिलाड़ी के सफर की शुरुआत हुई। सिर्फ 23 वर्ष की उम्र में देवेंद्र ने 2004 एथेंस पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई कर लिया। उन्होंने एफ-46 भाला फेंक स्पर्धा में 62.15 मीटर का विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता और भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया। यह उपलब्धि भारतीय पैरा खेलों के इतिहास में एक नया अध्याय साबित हुई। इसके बाद कई वर्षों तक उनकी स्पर्धा पैरालंपिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं रही, लेकिन उन्होंने अभ्यास और मेहनत जारी रखी। 2016 रियो पैरालंपिक में उन्होंने 63.97 मीटर का थ्रो कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा और दूसरा स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके साथ ही वे पैरालंपिक में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। देवेंद्र के जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब पिता की गंभीर बीमारी ने उन्हें खेल छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन उनके पिता ने ही उन्हें हार न मानने और देश के लिए खेलने की प्रेरणा दी। पिता की इसी सीख ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। वर्ष 2020 पैरालंपिक में उन्होंने 64.35 मीटर के थ्रो के साथ रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया। वे पैरालंपिक में तीन पदक जीतने वाले भारत के पहले व्यक्तिगत एथलीट बने। देवेंद्र झाझरिया ने केवल पैरालंपिक ही नहीं, बल्कि एशियन पैरा गेम्स और विश्व चैंपियनशिप में भी भारत का गौरव बढ़ाया। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार, पद्मश्री, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और पद्म भूषण जैसे देश के सर्वोच्च सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। देवेंद्र झाझरिया की कहानी यह साबित करती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो सफलता जरूर मिलती है। उनका जीवन आज लाखों युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
नेमार की फिटनेस पर बड़ा अपडेट, रिकवरी की राह पर ब्राज़ील स्टार

नई दिल्ली । ब्राजीलियन फुटबॉल कन्फेडरेशन (CBF) ने नेमार की फिटनेस को लेकर ताजा मेडिकल अपडेट जारी किया है। जानकारी के मुताबिक, नेमार के दाहिने पैर में ग्रेड-टू पिंडली की चोट है, जिसके इलाज के लिए उनका MRI स्कैन किया गया। CBF के अनुसार उनकी रिकवरी प्रक्रिया सही दिशा में है और वह एक विशेष मेडिकल प्लान के तहत लगातार इलाज करा रहे हैं। हालांकि, संगठन ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे कब तक मैदान पर वापसी कर पाएंगे। शुरुआती मैचों से बाहर रहने की आशंकास्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नेमार वर्ल्ड कप 2026 के शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं हो सकते। माना जा रहा है कि वह कम से कम दूसरे ग्रुप मैच तक टीम से बाहर रह सकते हैं। ब्राजील अपने अभियान की शुरुआत मोरक्को के खिलाफ करेगा, इसके बाद हैती और स्कॉटलैंड के खिलाफ मुकाबले होंगे। ऐसे में शुरुआती चरण में टीम को अपने सबसे बड़े स्टार की कमी खल सकती है। ब्राजील के लिए सबसे बड़ा सवालनेमार ब्राजील के इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। उन्होंने अब तक 128 इंटरनेशनल मैचों में 79 गोल किए हैं। लंबे समय से चोटों से जूझ रहे नेमार अक्टूबर 2023 के बाद से राष्ट्रीय टीम के लिए नहीं खेले हैं। हाल ही में क्लब फुटबॉल के दौरान लगी चोट ने उनकी वापसी को और भी अनिश्चित बना दिया है। इसी कारण ब्राजील टीम मैनेजमेंट उनकी फिटनेस को लेकर बेहद सतर्क है। वर्ल्ड कप 2026 में ब्राजील की उम्मीदेंब्राजील अगले वर्ल्ड कप में रिकॉर्ड 23वीं बार हिस्सा लेने जा रहा है और वह अब तक एकमात्र टीम है जिसने हर संस्करण में भाग लिया है। ऐसे में टीम से उम्मीदें हमेशा की तरह ऊंची हैं। हालांकि, नेमार की फिटनेस टीम की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। अगर वह पूरी तरह फिट नहीं होते, तो ब्राजील को अपनी आक्रमण रणनीति में बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है। करियर के अंतिम वर्ल्ड कप की संभावना34 वर्षीय नेमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 उनके करियर का आखिरी बड़ा टूर्नामेंट हो सकता है। ऐसे में यह टूर्नामेंट उनके लिए भावनात्मक और ऐतिहासिक दोनों रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। CBF के अपडेट ने ब्राजील को राहत जरूर दी है, लेकिन नेमार की पूर्ण फिटनेस और समय पर वापसी अब भी अनिश्चित बनी हुई है। वर्ल्ड कप से पहले उनकी स्थिति टीम के प्रदर्शन और रणनीति दोनों के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को मिलेगा सहारा, सन फार्मा की मेगा डील में SBI की एंट्री के संकेत

नई दिल्ली । भारतीय कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े विदेशी अधिग्रहण सौदों में शामिल एक महत्वपूर्ण डील में देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक अहम भूमिका निभा सकता है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) अमेरिकी हेल्थकेयर कंपनी के अधिग्रहण के लिए सन फार्मा को करीब 1 अरब डॉलर तक की फंडिंग उपलब्ध कराने पर विचार कर रहा है। यदि बैंक के निदेशक मंडल से इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है, तो यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय अधिग्रहण बाजार दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों में अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर अधिग्रहण और विस्तार योजनाओं पर काम कर रही हैं। फार्मास्यूटिकल क्षेत्र की अग्रणी कंपनी सन फार्मा ने अप्रैल में अमेरिका स्थित हेल्थकेयर कंपनी ऑर्गेनॉन एंड कंपनी के अधिग्रहण की घोषणा की थी। लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का यह सौदा भारतीय कंपनियों द्वारा विदेशों में किए गए सबसे बड़े अधिग्रहणों में गिना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, SBI की ओर से प्रस्तावित 1 अरब डॉलर की फंडिंग फिलहाल बैंक के बोर्ड के समक्ष विचाराधीन है। अंतिम निर्णय बोर्ड की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। यदि प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो SBI उन प्रमुख वित्तीय संस्थानों में शामिल हो जाएगा जो इस बहु-अरब डॉलर सौदे के लिए ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। इस डील की विशेषता केवल इसका आकार नहीं है, बल्कि इसमें भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की बदलती भूमिका भी दिखाई देती है। लंबे समय तक भारतीय बैंकों की विदेशी अधिग्रहण सौदों में भागीदारी सीमित रही थी। इसके पीछे नियामकीय प्रतिबंध और जोखिम प्रबंधन से जुड़ी चिंताएं प्रमुख कारण थीं। परिणामस्वरूप भारतीय कंपनियां ऐसे बड़े सौदों के लिए प्रायः विदेशी बैंकों, निवेश फंडों और पूंजी बाजारों पर निर्भर रहती थीं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा हाल ही में नियमों में किए गए बदलावों के बाद परिस्थितियां बदलती दिखाई दे रही हैं। केंद्रीय बैंक ने घरेलू बैंकों को कॉरपोरेट अधिग्रहणों के लिए वित्तपोषण की अनुमति दी है। इसके बाद भारतीय बैंक बड़े अंतरराष्ट्रीय सौदों में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय कंपनियों के वैश्विक विस्तार को अतिरिक्त वित्तीय समर्थन प्रदान कर सकता है। प्रस्तावित फंडिंग व्यवस्था में कई बड़े अंतरराष्ट्रीय बैंक पहले से शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वैश्विक वित्तीय क्षेत्र की प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं, जो इस अधिग्रहण के लिए ऋण संरचना तैयार कर रही हैं। ऐसे में SBI की संभावित भागीदारी न केवल इस डील की वित्तीय मजबूती बढ़ाएगी, बल्कि भारतीय बैंकिंग क्षेत्र की वैश्विक उपस्थिति को भी मजबूत करेगी। हाल के वर्षों में भारतीय कंपनियों ने तकनीक, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में कई बड़े विदेशी अधिग्रहण किए हैं। इन सौदों का उद्देश्य नए बाजारों तक पहुंच, उन्नत तकनीक हासिल करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करना रहा है। अब घरेलू बैंकों की बढ़ती भागीदारी से ऐसी डील्स के लिए वित्त जुटाना और अधिक आसान हो सकता है। इस दिशा में SBI पहले ही अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर काम कर रहा है। बैंक ने जापान के प्रमुख वित्तीय समूह MUFG के साथ सहयोग बढ़ाने की पहल की है, जिसका उद्देश्य विलय और अधिग्रहण से जुड़े अवसरों का आकलन करना है। इससे संकेत मिलता है कि भारतीय बैंक अब केवल पारंपरिक ऋणदाता की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वैश्विक कॉरपोरेट वित्तपोषण के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो भविष्य में भारतीय कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय विस्तार अभियानों में घरेलू बैंकों की भागीदारी और बढ़ सकती है। साथ ही यह भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ते आत्मविश्वास का भी संकेत माना जाएगा।
ब्रिस्बेन हीट और क्वींसलैंड कोचिंग से अलग हुए जोहान बोथा, क्रिकेट जगत में हलचल

नई दिल्ली । दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान जोहान बोथा ने क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट के हेड कोच पद से समय से पहले इस्तीफा दे दिया है। उनका कॉन्ट्रैक्ट अभी एक सीजन और बचा था, लेकिन उन्होंने दोनों जिम्मेदारियां छोड़ने का फैसला किया। क्वींसलैंड क्रिकेट ने उनके इस्तीफे की पुष्टि करते हुए कहा कि बोर्ड ने इसे स्वीकार कर लिया है और अब टीमों के नए कोचिंग सेटअप पर काम शुरू होगा। यह फैसला ऑस्ट्रेलियाई घरेलू क्रिकेट में चल रहे बड़े कोचिंग बदलावों के बीच आया है। दो साल का सफर और मिला-जुला प्रदर्शनबोथा ने 2024-25 सीजन से क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में क्वींसलैंड टीम ने कुछ अच्छे संकेत दिए और शेफील्ड शील्ड फाइनल तक भी पहुंची, लेकिन खिताब नहीं जीत सकी। वनडे कप और शील्ड में टीम का प्रदर्शन ठीक-ठाक रहा और वह लगातार शीर्ष स्थान पर नहीं पहुंच सकी। वहीं बिग बैश लीग में ब्रिस्बेन हीट का प्रदर्शन भी अस्थिर रहा, जिससे टीम लगातार ट्रॉफी से दूर रही। बोर्ड का बयान और भविष्य की दिशाक्वींसलैंड क्रिकेट के CEO ने बयान में कहा कि भले ही टीम ने सभी लक्ष्य हासिल नहीं किए, लेकिन बोथा ने युवा खिलाड़ियों के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने हाई परफॉर्मेंस सिस्टम को मजबूत करने में योगदान दिया। बोर्ड ने उनके काम की सराहना करते हुए भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं। अब कौन लेगा जिम्मेदारी?रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्वींसलैंड क्रिकेट अब नए हेड कोच की तलाश में है और पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन का नाम संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में है। जोहान बोथा का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब क्वींसलैंड और ब्रिस्बेन हीट दोनों टीमें स्थिरता और बेहतर प्रदर्शन की तलाश में हैं। अब देखना होगा कि नया कोचिंग सेटअप टीम को किस दिशा में ले जाता है।
पश्चिम एशिया तनाव के बावजूद भारत पर भरोसा बरकरार, फिच ने वित्त वर्ष 2027 के लिए 6.4% जीडीपी वृद्धि अनुमान कायम रखा 2.

नई दिल्ली । वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान 6.4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। एजेंसी का मानना है कि बाहरी चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मजबूती और घरेलू मांग देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाती रहेगी। फिच की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और तेल कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव का असर दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है। इसके बावजूद भारत अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में बना हुआ है। एजेंसी का कहना है कि घरेलू खपत, निवेश गतिविधियां और आर्थिक सुधारों का प्रभाव विकास दर को सहारा देता रहेगा। रिपोर्ट में घरेलू मांग को भारतीय अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है। उपभोक्ता खर्च और निवेश गतिविधियों में निरंतर वृद्धि से आर्थिक गति बनी रहने की संभावना व्यक्त की गई है। इसके अलावा आयात में वास्तविक कमी के कारण शुद्ध बाहरी मांग का भी विकास दर में सकारात्मक योगदान रहने का अनुमान जताया गया है। फिच का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव का प्रभाव स्थायी नहीं रहेगा। एजेंसी के अनुसार, यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं तो वित्त वर्ष 2027-28 में भारतीय अर्थव्यवस्था और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ सकती है। इसी आधार पर अगले वित्त वर्ष के लिए 6.7 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया गया है। इसके बाद आर्थिक विकास दर के धीरे-धीरे संतुलित स्तर पर लौटने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में तेल कीमतों को प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया है। फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, ऊर्जा कीमतों में वृद्धि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा सकती है। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बढ़ते निवेश और डिजिटल सेवाओं पर बढ़ता खर्च कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं को सहारा प्रदान कर रहा है। भारत जैसे देशों को भी इससे लाभ मिलने की उम्मीद है। महंगाई के मोर्चे पर एजेंसी ने सतर्क दृष्टिकोण अपनाया है। फिच का अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति आने वाले महीनों में बढ़ सकती है। वर्ष 2026 के अंत तक महंगाई दर 5.3 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इसके पीछे ऊर्जा लागत में वृद्धि और सांख्यिकीय आधार प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है। रिपोर्ट में मौसम संबंधी जोखिमों का भी उल्लेख किया गया है। सामान्य से कम मानसून या अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियां खाद्य उत्पादन और आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसी स्थिति में खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई दर पर अतिरिक्त असर पड़ने की आशंका रहेगी। भारतीय मुद्रा को लेकर एजेंसी का दृष्टिकोण अपेक्षाकृत स्थिर है। फिच का मानना है कि वर्ष के शेष समय में रुपये में बड़े स्तर पर गिरावट की संभावना नहीं है। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों के कारण सीमित उतार-चढ़ाव संभव है, लेकिन व्यापक अस्थिरता की आशंका फिलहाल कम दिखाई देती है। गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6.6 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान व्यक्त किया है। केंद्रीय बैंक ने भी वैश्विक आपूर्ति शृंखला में संभावित व्यवधान, वित्तीय बाजारों की अस्थिरता और मौसम संबंधी चुनौतियों को प्रमुख जोखिम बताया है। इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू बाजार, बढ़ता निवेश, डिजिटलीकरण और बुनियादी ढांचे पर निरंतर खर्च भारत की आर्थिक वृद्धि को आने वाले वर्षों में भी समर्थन देते रहेंगे। वैश्विक चुनौतियों के बीच फिच का ताजा अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और स्थिरता पर अंतरराष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है।
'यह जगह घर की तरह', विराट कोहली ने आरसीबी के लगातार 2 बार चैंपियन बनने पर लिखा भावुक संदेश

नई दिल्ली । रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की लगातार दूसरी आईपीएल खिताबी जीत के बाद स्टार बल्लेबाज Virat Kohli ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किया है। उन्होंने टीम के सफर, संघर्ष और भावनात्मक जुड़ाव को “घर” जैसा बताया। कोहली का भावुक पोस्टकोहली ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सीजन की शुरुआत भरोसे के साथ हुई थी और अंत लगातार दो खिताबों के साथ हुआ। उन्होंने कहा कि इस टीम ने हर भावनात्मक उतार-चढ़ाव को साथ झेला और मुश्किल हालात में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ा। कोहली के मुताबिक, “यह जगह घर की तरह है”-जो उनकी टीम के साथ गहरे जुड़ाव को दिखाता है। लगातार दूसरी बार RCB चैंपियनRoyal Challengers Bengaluru ने आईपीएल 2025 और 2026 में लगातार दो खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। 18 साल के लंबे इंतजार के बाद पहली बार खिताब जीतने के बाद टीम ने अगले ही सीजन में ट्रॉफी डिफेंड कर ली। फाइनल मुकाबले का हालआईपीएल 2026 का फाइनल नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला गया, जहां RCB ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। विपक्षी टीम को 155 रन पर रोकने के बाद RCB ने 161 रन बनाकर 5 विकेट से मैच जीत लिया। इस फाइनल में कोहली ने अहम भूमिका निभाई और 42 गेंदों पर 75 रन की मैच जिताऊ पारी खेली। उनकी इस पारी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच भी चुना गया। पूरे सीजन में कोहली का प्रदर्शनपूरे सीजन में कोहली का फॉर्म शानदार रहा। उन्होंने 16 मैचों में 675 रन बनाए, जिसमें 1 शतक और 5 अर्धशतक शामिल रहे। उनकी लगातार रन बनाने की क्षमता टीम की सफलता की सबसे बड़ी वजहों में से एक रही। कप्तानी और टीम का योगदानकप्तान रजत पाटीदार की रणनीति और गेंदबाजों के संतुलित प्रदर्शन ने भी टीम को मजबूती दी। गेंदबाजी ने फाइनल में खास भूमिका निभाई और विपक्ष को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका।
विकसित भारत 2047 की दिशा में अहम कदम, कोयला एक्सचेंज व्यवस्था से मजबूत होगी ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक पारदर्शिता

नई दिल्ली । देश के ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधारों को गति देते हुए केंद्र सरकार ने कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य कोयला व्यापार को अधिक पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और बाजार आधारित बनाना है। सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल कोयला आपूर्ति प्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नए नियमों के तहत देश में कोयला एक्सचेंज स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। हाल ही में लागू किए गए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के माध्यम से खनिज एक्सचेंज की अवधारणा को कानूनी आधार प्रदान किया गया है। इसके बाद केंद्र सरकार को कोयले और उसके प्रसंस्कृत उत्पादों सहित विभिन्न खनिजों के संगठित और पारदर्शी व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार प्राप्त हुआ है। सरकार ने कोयला एक्सचेंजों के पंजीकरण और विनियमन की जिम्मेदारी कोयला नियंत्रक संगठन को सौंपी है। यह संस्था एक्सचेंज स्थापित करने की इच्छुक पात्र संस्थाओं को अनुमति प्रदान करेगी तथा उनके संचालन की निगरानी भी करेगी। अधिकृत संस्थाओं को व्यापार संचालन से जुड़े नियम और उपनियम तैयार करने तथा कोयला कारोबार को सुचारु बनाने का अधिकार होगा। इन पंजीकरणों की वैधता 25 वर्षों तक रहेगी, जिससे दीर्घकालिक निवेश और स्थिरता को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार यह व्यवस्था देश में कोयला विपणन के मौजूदा ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है। अभी तक कोयला व्यापार मुख्य रूप से सीमित और पारंपरिक बिक्री मॉडल पर आधारित रहा है, जहां उत्पादक और खरीदारों के बीच अवसर अपेक्षाकृत सीमित रहते हैं। नई एक्सचेंज प्रणाली के लागू होने के बाद व्यापार का स्वरूप अधिक खुला और प्रतिस्पर्धी होगा, जिससे अनेक विक्रेता और अनेक खरीदार एक साझा मंच पर कारोबार कर सकेंगे। इस मॉडल का सबसे बड़ा लाभ पारदर्शी मूल्य निर्धारण के रूप में सामने आएगा। बाजार आधारित कीमतों से खरीदारों और उत्पादकों दोनों को वास्तविक मांग और आपूर्ति के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। इससे कोयला क्षेत्र में दक्षता बढ़ेगी और संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग संभव हो सकेगा। साथ ही, व्यापारिक प्रक्रियाओं में स्पष्टता आने से विवादों और असमानताओं में भी कमी आने की संभावना है। नई व्यवस्था से वाणिज्यिक और कैप्टिव खनन कंपनियों को भी व्यापक बाजार उपलब्ध होगा। वे अपने उत्पादों को अधिक संख्या में संभावित खरीदारों तक पहुंचा सकेंगे। सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों के लिए भी यह मंच कारोबार बढ़ाने और बाजार हिस्सेदारी मजबूत करने का अवसर प्रदान करेगा। प्रतिस्पर्धा बढ़ने से सेवा गुणवत्ता और आपूर्ति तंत्र में सुधार की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। सरकार का मानना है कि कोयला एक्सचेंज नियम, 2026 व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने, निवेश आकर्षित करने और ऊर्जा क्षेत्र में आधुनिक ढांचा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। अधिक प्रतिस्पर्धी और व्यवस्थित कोयला बाजार से उद्योगों को स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ऊर्जा क्षेत्र की दीर्घकालिक आवश्यकताओं को पूरा करने, आर्थिक विकास को गति देने और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था के निर्माण में भी इस सुधार की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है।
वैश्विक सीफूड बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की तैयारी, अगले पांच वर्षों में निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का रोडमैप

नई दिल्ली । भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र ने पिछले एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है और अब देश इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गया है। केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में समुद्री उत्पादों के निर्यात को 30 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में निर्यात क्षमता बढ़ाने, वैश्विक बाजारों तक पहुंच मजबूत करने और मूल्य संवर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय समुद्री उत्पाद निर्यात कार्यशाला के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात पिछले दस वर्षों में लगभग 70 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में वैश्विक सीफूड व्यापार में भारत की हिस्सेदारी करीब चार प्रतिशत है, जिसे आने वाले वर्षों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है। इसके लिए सरकार, उद्योग, निर्यातक और किसानों के बीच बेहतर समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल पारंपरिक निर्यात पर निर्भर रहने के बजाय रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक जैसे वैल्यू एडेड उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देना समय की मांग है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ऐसे उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है और भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर साबित हो सकता है। इसके साथ ही हाल के वर्षों में विभिन्न देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से खुले नए बाजारों का लाभ उठाने की रणनीति पर भी बल दिया गया। मत्स्य पालन क्षेत्र के आंकड़े भी इस विकास यात्रा को मजबूत आधार प्रदान करते हैं। देश में मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के लगभग 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में करीब 198 लाख टन तक पहुंच चुका है। उत्पादन में यह वृद्धि न केवल घरेलू मांग को पूरा करने में सहायक रही है बल्कि निर्यात क्षमता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात लगभग 8.46 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। समुद्री निर्यात में फ्रोजन झींगा अब भी सबसे प्रमुख उत्पाद बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग लगातार बनी हुई है, जिससे भारत को विदेशी मुद्रा अर्जित करने में मदद मिल रही है। सरकार इस क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता नियंत्रण और टिकाऊ उत्पादन प्रणालियों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निवेश और सहायता उपलब्ध करा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात वृद्धि के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कोल्ड चेन नेटवर्क, आधुनिक लॉजिस्टिक्स, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, रोग प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों का पालन जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक सुधार आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से कार्यशाला में उद्योग प्रतिनिधियों, वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स और किसानों ने विभिन्न चुनौतियों और संभावित समाधानों पर विस्तार से चर्चा की। समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने में परिवहन और एयर कार्गो अवसंरचना की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उच्च मूल्य वाले उत्पादों को तेजी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और आधुनिक कार्गो सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि बेहतर बुनियादी ढांचा, तकनीकी नवाचार और टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियां भारत को वैश्विक सीफूड व्यापार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती हैं। आने वाले वर्षों में यदि उत्पादन, प्रसंस्करण, गुणवत्ता नियंत्रण और बाजार विस्तार की योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो भारत न केवल अपने निर्यात लक्ष्य को हासिल कर सकता है बल्कि वैश्विक समुद्री उत्पाद व्यापार में एक प्रमुख शक्ति के रूप में भी उभर सकता है।
सिराज बाहर, प्रसिद्ध कृष्णा को मौका: आयरलैंड और इंग्लैंड टी20 सीरीज के लिए टीम में बड़ा बदलाव

आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज से पहले भारतीय टीम में अहम बदलाव किया गया है। तेज गेंदबाज Mohammed Siraj को आराम देते हुए टीम से बाहर कर दिया गया है, जबकि उनकी जगह दाएं हाथ के तेज गेंदबाज Prasidh Krishna को स्क्वॉड में शामिल किया गया है। वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत सिराज को आरामबीसीसीआई मेडिकल टीम और मैनेजमेंट के बीच चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है कि सिराज को लंबे अंतरराष्ट्रीय सीजन को देखते हुए वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत आराम दिया जाए। उनका लक्ष्य आगामी बड़े टूर्नामेंट्स और टेस्ट सीरीज के लिए पूरी तरह फिट और फ्रेश रखना है। सिराज पिछले कुछ समय से लगातार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं, ऐसे में उनकी फिटनेस और प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए यह रणनीतिक कदम उठाया गया है। प्रसिद्ध कृष्णा को मिला मौकासिराज की जगह टीम में शामिल हुए प्रसिद्ध कृष्णा को हाल के समय में उनके प्रदर्शन का फायदा मिला है। आईपीएल में शानदार गेंदबाजी और घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन ने उन्हें चयनकर्ताओं की नजर में बनाए रखा। उनके पास नई गेंद के साथ-साथ मिडिल ओवरों में विकेट निकालने की क्षमता है, जिससे भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण को मजबूती मिलेगी। टी20 सीरीज का कार्यक्रमभारत को इस दौरे पर आयरलैंड में 2 और इंग्लैंड में 5 टी20 मैच खेलने हैं। यह सीरीज युवा और सीनियर खिलाड़ियों के संयोजन के साथ टीम संयोजन को परखने का अहम मौका मानी जा रही है। अपडेटेड भारतीय टी20 टीमनई टीम में कप्तानी श्रेयस अय्यर को सौंपी गई है, जबकि कई युवा और अनुभवी खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। टीम में अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, शिवम दुबे, तिलक वर्मा (उपकप्तान), अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, वरुण चक्रवर्ती, रवि बिश्नोई, अर्शदीप सिंह जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। तेज गेंदबाजी यूनिट में अब अर्शदीप सिंह के साथ प्रसिद्ध कृष्णा और अन्य युवा गेंदबाजों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है।
प्रकाश पादुकोण: भारतीय बैडमिंटन के पहले वैश्विक नायक, कॉमनवेल्थ में दिलाया ऐतिहासिक स्वर्ण

मध्यप्रदेश । भारत में बैडमिंटन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले सबसे बड़े नामों में Prakash Padukone का स्थान शीर्ष पर माना जाता है। उन्होंने न सिर्फ देश में इस खेल को लोकप्रिय बनाया, बल्कि भारत को पहली बार वैश्विक मंच पर स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया। कॉमनवेल्थ में ऐतिहासिक स्वर्ण1978 के कॉमनवेल्थ गेम्स (एडमोंटन, कनाडा) में प्रकाश पादुकोण ने पुरुष एकल वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास बनाया। यह भारत के लिए बैडमिंटन में पहला कॉमनवेल्थ गोल्ड था, जिसने देश को इस खेल में एक नई पहचान दी। उनकी इस उपलब्धि ने आने वाली पीढ़ियों के खिलाड़ियों के लिए रास्ता खोला और भारत को विश्व बैडमिंटन में गंभीर दावेदार के रूप में स्थापित किया। दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बनने तक का सफरपादुकोण का खेल करियर लगातार उपलब्धियों से भरा रहा। 1980 में वह दुनिया के नंबर-1 बैडमिंटन खिलाड़ी बने, जो उस दौर में किसी भी भारतीय खिलाड़ी के लिए बेहद बड़ी उपलब्धि थी। उन्होंने 1980 के दशक में डेनिश ओपन, स्वीडिश ओपन और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतकर अपनी श्रेष्ठता साबित की। 1980 में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतकर वे इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाले पहले भारतीय बने। शुरुआती जीवन और करियरप्रकाश पादुकोण का जन्म 10 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उनके पिता रमेश पादुकोण ने उन्हें बैडमिंटन की ओर प्रेरित किया। उन्होंने 1962 में अपना पहला जूनियर टूर्नामेंट खेला और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर लगातार सफलता हासिल की। 1972 में उन्होंने जूनियर और सीनियर दोनों राष्ट्रीय खिताब जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियांउनके करियर में कई बड़े पदक शामिल रहे-1974 एशियन गेम्स: कांस्य1981 वर्ल्ड कप: स्वर्ण1983 वर्ल्ड चैंपियनशिप: कांस्य1986 एशियन गेम्स: कांस्यइन उपलब्धियों ने उन्हें दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल कर दिया। कोच और योगदानकर्ता के रूप में भूमिका1991 में संन्यास के बाद उन्होंने बैडमिंटन प्रशासन और कोचिंग में भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय टीम को कोचिंग दी और युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में योगदान दिया। Olympic Gold Quest की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जो भारतीय ओलंपिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। सम्मान और विरासतभारत सरकार ने उन्हें 1972 में अर्जुन पुरस्कार और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित किया। आज भी उनकी बनाई हुई Prakash Padukone Badminton Academy कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है। बॉलीवुड अभिनेत्री Deepika Padukone उनकी पुत्री हैं, जिन्होंने मनोरंजन जगत में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।