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शेयर बाजार में लौटी रौनक, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों के सहारे सेंसेक्स-निफ्टी हरे निशान में बंद

नई दिल्ली । लगातार दो सत्रों तक दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को शानदार वापसी की। कारोबार के अंत में BSE Sensex 394.50 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,918.76 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 119.10 अंक यानी 0.52 प्रतिशत मजबूत होकर 23,424.10 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में तेजी की अगुवाई बैंकिंग सेक्टर ने की। Nifty Bank 2.09 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। इसके अलावा डिफेंस, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, एफएमसीजी और सर्विसेज सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। वहीं आईटी और मीडिया इंडेक्स दबाव में रहे। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 60,715.45 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.69 प्रतिशत उछलकर 18,063.60 के स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में State Bank of India, ICICI Bank, Axis Bank, Bajaj Finance, Maruti Suzuki, Asian Paints और Adani Ports and Special Economic Zone शामिल रहे। दूसरी ओर Infosys, Tech Mahindra, HCL Technologies, NTPC और Power Grid Corporation of India के शेयरों में कमजोरी रही। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी की। साथ ही ईरान-इजरायल तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली और ऊंची बॉन्ड यील्ड अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों, Federal Reserve System की मौद्रिक नीति और वैश्विक लिक्विडिटी संकेतों पर रहेगी। मंगलवार को बाजार की शुरुआत भी सकारात्मक रही थी और शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स तथा निफ्टी में करीब आधा प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी, जो पूरे सत्र के दौरान कायम रही।

अमेलिया केर बनीं नंबर-1 ऑलराउंडर, ICC महिला टी20 रैंकिंग में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली । दुबई में मंगलवार को जारी ताजा आईसीसी महिला टी20 रैंकिंग में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। न्यूजीलैंड की स्टार खिलाड़ी Amelia Kerr एक बार फिर दुनिया की नंबर-1 टी20 ऑलराउंडर बन गई हैं। केर ने टी20 वर्ल्ड कप से ठीक पहले यह उपलब्धि हासिल की है। हालांकि टॉप पोजीशन पर उनकी बढ़त बेहद मामूली है, क्योंकि वेस्टइंडीज की कप्तान Hayley Matthews उनसे सिर्फ कुछ रेटिंग अंकों से पीछे हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच टॉप स्थान की रेस अब और रोमांचक हो गई है। हरमनप्रीत कौर की टॉप-10 में वापसीभारतीय महिला टीम की कप्तान Harmanpreet Kaur ने भी रैंकिंग में सुधार किया है और वह एक बार फिर टॉप-10 बल्लेबाजों में शामिल हो गई हैं। इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज के निर्णायक मुकाबले में नाबाद अर्धशतक लगाने के बाद उन्हें यह फायदा मिला। उनकी वापसी को भारत के लिए टी20 वर्ल्ड कप से पहले एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी रैंकिंग में भी बदलावबल्लेबाजों की सूची में ऑस्ट्रेलिया की जॉर्जिया वोल और बेथ मूनी शीर्ष स्थानों पर बनी हुई हैं। वहीं इंग्लैंड की युवा बल्लेबाज एलिस कैप्सी ने शानदार छलांग लगाई है। गेंदबाजी रैंकिंग में इंग्लैंड की Linsey Smith ने नंबर-1 स्थान बनाए रखा है, जबकि पाकिस्तान की Sadia Iqbal उनसे पीछे हैं। टॉप-10 में लॉरेन बेल और चार्ली डीन को भी फायदा मिला है, जिससे इंग्लैंड का दबदबा बढ़ा है। ऑलराउंडर्स में कड़ा मुकाबलाऑलराउंडर्स की रैंकिंग में अमेलिया केर और हेली मैथ्यूज के बीच टक्कर सबसे दिलचस्प बनी हुई है। स्कॉटलैंड की कप्तान कैथरीन ब्राइस ने भी ट्राई-सीरीज में अच्छे प्रदर्शन के बाद लंबी छलांग लगाई है और टॉप-20 के करीब पहुंच गई हैं।

जीईएम ने बदली सरकारी खरीद की तस्वीर, 10 साल में 400 करोड़ से 5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा कारोबार: सीईओ मिहिर कुमार

नई दिल्ली । सरकारी खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और समावेशिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू किया गया सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) आज देश की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में से एक बन चुका है। पिछले एक दशक में इस प्लेटफॉर्म ने सरकारी खरीद की पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए कारोबार, प्रतिस्पर्धा और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए हैं। जीईएम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिहिर कुमार के अनुसार, जिस प्लेटफॉर्म का कारोबार शुरुआती वर्ष में केवल 400 से 422 करोड़ रुपये के आसपास था, वह आज बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के स्तर तक पहुंच चुका है। जीईएम की स्थापना वर्ष 2016 में सरकारी खरीद प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से की गई थी। इसके माध्यम से विक्रेताओं का पंजीकरण, उत्पाद सूचीकरण, निविदा प्रक्रिया, ऑर्डर प्रबंधन, आपूर्ति और भुगतान जैसी सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संचालित की जाती हैं। इससे सरकारी विभागों और आपूर्तिकर्ताओं दोनों के लिए प्रक्रियाएं अधिक सरल और तेज हुई हैं। प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक सूक्ष्म और लघु उद्यमों की बढ़ती भागीदारी रही है। सरकारी नीति के अनुसार सार्वजनिक खरीद का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा एमएसई क्षेत्र से किया जाना चाहिए, लेकिन जीईएम पर यह हिस्सा लगभग 45 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। इससे हजारों छोटे कारोबारियों और उद्यमियों को सीधे सरकारी बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिला है। जीईएम के माध्यम से केवल कारोबार का विस्तार ही नहीं हुआ, बल्कि विभिन्न सामाजिक और आर्थिक वर्गों की भागीदारी भी बढ़ी है। महिला उद्यमियों ने इस मंच का व्यापक लाभ उठाया है। शुरुआती वर्षों में जहां महिला स्वामित्व वाले उद्यमों से होने वाला कारोबार सीमित स्तर पर था, वहीं अब यह कई हजार करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। इससे महिला उद्यमिता को नई गति मिली है और सरकारी खरीद प्रक्रिया में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है। स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को भी जीईएम से बड़ा लाभ मिला है। एक दशक पहले जहां बहुत कम स्टार्टअप इस प्लेटफॉर्म से जुड़े थे, वहीं अब हजारों स्टार्टअप्स सरकारी खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके हैं। इनके माध्यम से होने वाला कारोबार भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। इससे नवाचार आधारित कंपनियों को सरकारी संस्थानों तक अपनी सेवाएं और उत्पाद पहुंचाने का अवसर प्राप्त हुआ है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से जुड़े उद्यमों की भागीदारी में भी महत्वपूर्ण वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार की समावेशी विकास नीति के अनुरूप जीईएम ने उन वर्गों को भी बाजार उपलब्ध कराया है जिन्हें पहले सरकारी खरीद प्रणाली में अपेक्षाकृत कम अवसर मिलते थे। इससे आर्थिक सशक्तिकरण और उद्यमिता को बढ़ावा मिला है। स्वास्थ्य क्षेत्र में भी जीईएम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों के लिए बड़ी मात्रा में वैक्सीन, सिरिंज, चिकित्सा उपकरण और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीद इसी मंच के माध्यम से की गई। इसके अलावा रेलवे, शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी क्षेत्रों की आवश्यकताओं की पूर्ति में भी प्लेटफॉर्म की भूमिका लगातार बढ़ती गई है। तकनीकी दृष्टि से भी जीईएम लगातार विकसित हुआ है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित विश्लेषण, डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन नीलामी और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया ने खरीद व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया है। इससे मानव हस्तक्षेप में कमी आई है और खरीद प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीईएम ने केवल सरकारी खरीद को डिजिटल नहीं बनाया, बल्कि कारोबार करने में आसानी को भी नई मजबूती प्रदान की है। ऑनलाइन पंजीकरण, पारदर्शी बोली प्रणाली और डिजिटल अनुबंध प्रबंधन ने छोटे और बड़े सभी व्यवसायों के लिए सरकारी बाजार तक पहुंच को सरल बनाया है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह मंच अब देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक खरीद प्रणाली का एक महत्वपूर्ण आधार बनकर उभर रहा है।

श्रीलंका में ट्राई-नेशन ए सीरीज की शुरुआत, इंडिया ए ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी

नई दिल्ली । श्रीलंका के दांबुला अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में मंगलवार से ट्राई-नेशन ए सीरीज की शुरुआत हो गई। इस मुकाबले में पहले मैच में India A और Sri Lanka A आमने-सामने हैं। टॉस जीतकर इंडिया ए ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। कप्तान तिलक वर्मा ने टॉस के बाद कहा कि पिच सूखी है और शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजी करना बेहतर विकल्प रहेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम 270 के आसपास का स्कोर खड़ा कर सकती है। वहीं श्रीलंका ए के कप्तान सहान अराछिगे ने कहा कि उनकी टीम की कोशिश विपक्ष को 250–260 के भीतर रोकने की होगी। वैभव सूर्यवंशी की शुरुआत, लेकिन बड़ी पारी नहीं खेल सकआईपीएल 2026 के चर्चित युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को इस मैच में प्लेइंग इलेवन में जगह मिली। ओपनिंग करने उतरे सूर्यवंशी ने आक्रामक शुरुआत की और 12 गेंदों में 14 रन बनाए, जिसमें 3 चौके शामिल रहे। लेकिन वह लंबी पारी नहीं खेल सके और मोहम्मद शिराज की गेंद पर आउट होकर पवेलियन लौट गए। उनके जल्दी आउट होने से इंडिया ए की शुरुआत थोड़ी लड़खड़ा गई, लेकिन मिडिल ऑर्डर से टीम को संभालने की उम्मीद है। पिच और मौसम का असरदांबुला की पिच को सूखा और हल्की दरारों वाला बताया गया है। शुरुआती ओवरों में बल्लेबाजों को मदद मिलने की संभावना है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ेगा, स्पिन गेंदबाजों की भूमिका अहम हो सकती है। मौसम साफ है और धूप खिली हुई है, जिससे पूरे मैच में बिना रुकावट के खेल होने की उम्मीद है। मजबूत मिडिल ऑर्डर पर नजरइंडिया ए की टीम में ऋतुराज गायकवाड़, तिलक वर्मा, आयुष बडोनी जैसे बल्लेबाज शामिल हैं, जिनसे बड़ी साझेदारियों की उम्मीद है। टीम का लक्ष्य एक मजबूत स्कोर खड़ा कर श्रीलंका ए पर दबाव बनाना रहेगा। श्रीलंका ए की गेंदबाजी यूनिट में स्पिन और पेस दोनों का मिश्रण है, जिससे मिडिल ओवरों में मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है। सीरीज में तीन टीमें शामिलइस ट्राई-नेशन सीरीज में इंडिया ए और श्रीलंका ए के अलावा Afghanistan A भी हिस्सा ले रही है। यह सीरीज युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का बड़ा मौका मानी जा रही है।

समीक्षा बैठक में देर से पहुंचे अधिकारी पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा एक्शन, डीडीपीओ तत्काल निलंबित

नई दिल्ली । हरियाणा सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही और अनुशासन पर जोर देने की नीति के बीच नारनौल में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली। जिले के विकास कार्यों और विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक के दौरान स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) प्रमोद कुमार के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई के निर्देश दिए। मंत्री के इस निर्णय के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। नारनौल स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में जिले के विकास कार्यों, पंचायत योजनाओं और विभिन्न विभागों की प्रगति का आकलन किया जा रहा था। बैठक में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसी दौरान कुछ विभागों के कार्यों को लेकर शिकायतें और अनियमितताओं से जुड़ी बातें भी सामने आईं, जिन पर मंत्री ने नाराजगी व्यक्त की। जानकारी के अनुसार, समीक्षा बैठक के लिए सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे। बैठक को प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि इसमें विकास परियोजनाओं की प्रगति और जनहित से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जानी थी। इसके बावजूद जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार समय पर बैठक में उपस्थित नहीं हो सके। इस स्थिति को मंत्री ने गंभीरता से लिया और इसे प्रशासनिक अनुशासन के उल्लंघन के रूप में देखा। बैठक के दौरान मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि सरकारी योजनाओं और जनहित के कार्यों के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्यप्रणाली अपनाने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। इसी क्रम में डीडीपीओ के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल किसी एक अधिकारी के खिलाफ कदम उठाना नहीं होता, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र को जवाबदेही और अनुशासन का संदेश देना भी होता है। सरकारें अक्सर विकास योजनाओं की प्रभावी निगरानी और समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर विशेष ध्यान देती हैं। बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ उपायुक्त और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान सड़क, पंचायत, स्वास्थ्य और अन्य विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और जनता से जुड़े मामलों में तत्परता दिखाने के निर्देश दिए गए। स्वास्थ्य मंत्री की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और कार्यसंस्कृति में सुधार के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में कई राज्य सरकारें अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और विकास परियोजनाओं की निगरानी को लेकर अधिक सक्रिय हुई हैं। ऐसे में नारनौल में हुई यह कार्रवाई भी उसी दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समय की पाबंदी, कार्य निष्पादन और विभागीय जिम्मेदारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का प्रभाव भविष्य में अधिकारियों की कार्यशैली और सरकारी बैठकों में अनुशासन के पालन पर भी दिखाई दे सकता है।

TMC CONTROVERSY: टीएमसी संकट के बीच शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी चर्चा में, बंगाल की सियासत में बढ़े नए कयास..

TMC CONTROVERSY: नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर उभर रहे मतभेदों और सांसदों के रुख को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच पार्टी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा का विषय बन गई है। जहां विभिन्न नेताओं की ओर से लगातार बयान सामने आ रहे हैं, वहीं अनुभवी नेता और अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा ने अब तक किसी भी पक्ष में सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है। उनकी यही खामोशी राजनीतिक विश्लेषकों और पर्यवेक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित असंतोष और सांसदों के अलग-अलग रुख की चर्चाओं के बीच कई नेताओं ने खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। इसके विपरीत शत्रुघ्न सिन्हा ने न तो किसी संभावित बागी समूह के समर्थन में कोई बयान दिया है और न ही सार्वजनिक रूप से पार्टी नेतृत्व के पक्ष में कोई विशेष प्रतिक्रिया व्यक्त की है। इस कारण राजनीतिक हलकों में उनके अगले कदम को लेकर विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का लंबा राजनीतिक अनुभव उन्हें जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से रोक सकता है। राष्ट्रीय राजनीति में कई दशक सक्रिय रहने और विभिन्न राजनीतिक परिस्थितियों का अनुभव रखने वाले सिन्हा अक्सर महत्वपूर्ण मुद्दों पर सोच-समझकर प्रतिक्रिया देने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में मौजूदा घटनाक्रम पर उनकी चुप्पी को कुछ लोग रणनीतिक प्रतीक्षा की स्थिति के रूप में देख रहे हैं। शत्रुघ्न सिन्हा ने वर्ष 2022 में तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद उन्हें आसनसोल लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने जीत दर्ज की। बाद में आम चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में उनकी सक्रिय भूमिका को स्थापित करने में पार्टी नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। यही कारण है कि उनके रुख को लेकर राजनीतिक हलकों में विशेष रुचि बनी हुई है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान वरिष्ठ नेता अक्सर तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय परिस्थितियों का आकलन करना पसंद करते हैं। शत्रुघ्न सिन्हा का नाम उन नेताओं में शामिल रहा है जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न दलों के नेताओं के साथ लंबे समय तक काम किया है। उनके राजनीतिक संबंध और अनुभव उन्हें परिस्थितियों को गहराई से समझने का अवसर देते हैं। राजनीतिक चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि बंगाल की मौजूदा परिस्थितियों पर राष्ट्रीय दलों की भी नजर बनी हुई है। ऐसे माहौल में किसी भी वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक रुख महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा सकता है। हालांकि अभी तक शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, इसलिए उनके बारे में लगाए जा रहे अधिकांश अनुमान केवल राजनीतिक चर्चाओं तक ही सीमित हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी के कुछ सांसद नेतृत्व के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं, जबकि कुछ अन्य नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। इसी श्रेणी में शत्रुघ्न सिन्हा का नाम भी लिया जा रहा है। फिलहाल उनकी चुप्पी को लेकर कई तरह के राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति तभी स्पष्ट होगी जब वह स्वयं इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देंगे। बंगाल की राजनीति में आने वाले दिनों में घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। ऐसे समय में शत्रुघ्न सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेता का रुख न केवल पार्टी के भीतर बल्कि व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। फिलहाल उनकी खामोशी ही सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है।

झाबुआ के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिला, एक दिन पहले शादी में जाने निकली थीं

मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले के मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर खरडू छोटी गांव के माल फालिया इलाके में सोमवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां एक बिना मुंडेर के कुएं में बुजुर्ग महिला का शव मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना का पता तब चला जब कुछ बच्चे कुएं के पास नीम के पेड़ पर खेल रहे थे। खेल के दौरान बच्चों की नजर अचानक कुएं के अंदर पड़ी, जहां उन्हें एक शव पानी में तैरता हुआ दिखाई दिया। घबराए बच्चों ने तुरंत गांव की ओर दौड़ लगाई और लोगों को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और पूरे गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने तत्काल मामले की सूचना गांव के तड़वी (ग्राम प्रमुख) को दी, जिन्होंने पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही झाबुआ कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से शव को कुएं से बाहर निकाला। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की गई। पुलिस ने मृतका की पहचान झकेला गांव निवासी 70 वर्षीय तितली बाई (पति दूला बामनिया) के रूप में की है। प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आया है कि बुजुर्ग महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ थीं, जिससे मामले को लेकर कई पहलुओं पर जांच की जा रही है। जानकारी के अनुसार, तितली बाई रविवार शाम करीब 5 बजे एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए खरडू बड़ी गांव जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में अनसिग नामक व्यक्ति के खेत में बने बिना मुंडेर के कुएं के पास उनका संतुलन बिगड़ गया, जिससे उनके गिरने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। घटना स्थल पर मौजूद ग्रामीणों का कहना है कि कुआं बिना मुंडेर का था, जिससे हादसे की संभावना और बढ़ जाती है। वहीं, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है कि यह दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी हो सकता है। झाबुआ कोतवाली थाना प्रभारी आरसी भास्करे ने बताया कि शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का स्पष्ट पता चल सकेगा। इस घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं ग्रामीण प्रशासन से ऐसे खुले कुओं पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और सभी संभावित कारणों की गहनता से पड़ताल की जा रही है।

लक्जरी कार से 30 पेटी अवैध शराब जब्त, तस्कर कार छोड़कर फरार

मध्यप्रदेश । झाबुआ जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। झकनावदा पुलिस ने बिजोरी-रूपाखेड़ा मार्ग पर घेराबंदी कर एक लक्जरी कार से भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की है। हालांकि कार्रवाई के दौरान वाहन चालक पुलिस को देखकर मौके से फरार होने में सफल रहा। यह पूरी कार्रवाई जिला पुलिस कप्तान देवेंद्र पाटीदार के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक संदिग्ध लक्जरी कार में अवैध शराब की बड़ी खेप ले जाई जा रही है। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में निगरानी बढ़ा दी और संदिग्ध वाहन की तलाश शुरू कर दी। कुछ समय बाद पुलिस टीम ने बिजोरी-रूपाखेड़ा मार्ग पर एक संदिग्ध कार को रोका। जैसे ही चालक ने पुलिस को देखा, उसने वाहन रोक दिया और अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पूरे क्षेत्र की घेराबंदी की, लेकिन आरोपी पकड़ में नहीं आ सका। इसके बाद पुलिस ने वाहन की तलाशी ली, जिसमें 30 पेटी लाल देसी मसाला शराब बरामद हुई। जब्त शराब की कुल मात्रा लगभग 270 लीटर बताई जा रही है, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये आंकी गई है। इस बरामदगी के बाद पुलिस ने वाहन और शराब दोनों को कब्जे में ले लिया। इस कार्रवाई को अंजाम देने में पेटलावद एसडीओपी अनुरक्ति सबनानी, रायपुरिया थाना प्रभारी गीता जाटव और झकनावदा चौकी प्रभारी सुरेंद्रसिंह सिसोदिया की अहम भूमिका रही। पुलिस टीम में शामिल आरक्षक राजू मुवेल, सैनिक लक्ष्मण मेड़ा और आरक्षक शंकर भाभर ने भी सक्रियता से कार्रवाई में सहयोग किया। पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है और फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि शराब की यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने के लिए जांच में जुटी है और फरार आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

राज्यसभा की 26 सीटों पर मुकाबले से पहले तेज हुई रणनीतिक जंग, भाजपा के दांव से कांग्रेस सतर्क

नई दिल्ली । राज्यसभा की रिक्त हो रही 26 सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले देश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन राज्यसभा में अपनी स्थिति और मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है, जबकि विपक्षी दल अपने मौजूदा संख्या बल को सुरक्षित रखने और संभावित राजनीतिक चुनौतियों से निपटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही कई राज्यों में राजनीतिक समीकरणों और संभावित क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस बार सबसे अधिक चर्चा मध्य प्रदेश और झारखंड की हो रही है, जहां भाजपा के कुछ फैसलों ने विपक्षी दलों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों राज्यों में उम्मीदवारों के चयन और चुनावी गणित ने मुकाबले को अपेक्षा से अधिक दिलचस्प बना दिया है। भाजपा की कोशिश केवल अपनी सीटें सुरक्षित करने तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि वह विपक्षी दलों पर मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने का प्रयास भी कर रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा द्वारा तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारना राजनीतिक हलकों में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत है और वह दो सीटों पर सहज जीत की स्थिति में मानी जा रही है। हालांकि तीसरे उम्मीदवार की एंट्री ने विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस, को सतर्क कर दिया है। कांग्रेस का मानना है कि यह कदम चुनावी मुकाबले को जटिल बनाने और विपक्षी खेमे में असहजता पैदा करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए विशेष कदम उठा सकती है। संभावित क्रॉस-वोटिंग या अनुपस्थिति की आशंकाओं के बीच पार्टी नेतृत्व लगातार अपने विधायकों के संपर्क में बताया जा रहा है। इसी कारण राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश की राजनीति में गतिविधियां सामान्य से अधिक तेज हो गई हैं। विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार किसी उम्मीदवार को जीत के लिए निर्धारित संख्या में मतों की आवश्यकता होगी। ऐसे में अतिरिक्त उम्मीदवार की मौजूदगी चुनाव को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर रणनीतिक मुकाबले में बदल सकती है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दल लगातार एक-दूसरे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी कर रहे हैं। झारखंड में भी राजनीतिक तस्वीर कम दिलचस्प नहीं है। यहां दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय स्वरूप ले चुका है। झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस ने अपने-अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को समर्थन देकर चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। इस फैसले ने राज्य में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। झारखंड में अब नजर इस बात पर रहेगी कि उपलब्ध संख्या बल और सहयोगी दलों के समर्थन के आधार पर कौन-सा उम्मीदवार बढ़त हासिल कर पाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आता है तो परिणामों पर उसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर राजस्थान में स्थिति अपेक्षाकृत शांत दिखाई दे रही है। यहां रिक्त सीटों के मुकाबले उतने ही उम्मीदवार मैदान में होने के कारण निर्विरोध निर्वाचन की संभावना मजबूत मानी जा रही है। वहीं गुजरात में भी भाजपा के उम्मीदवारों की राह अपेक्षाकृत आसान दिखाई दे रही है और वहां बड़े मुकाबले की संभावना कम नजर आ रही है। राज्यसभा चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनमत से नहीं लड़े जाते, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद व्यापक होता है। संसद के उच्च सदन में संख्या बल किसी भी सरकार की विधायी क्षमता को प्रभावित करता है। यही कारण है कि चुनाव से पहले प्रत्येक सीट को लेकर राजनीतिक दल पूरी ताकत और रणनीति के साथ मैदान में उतरते हैं। इस बार भी मध्य प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में विकसित हो रहे समीकरण चुनावी प्रक्रिया को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना रहे हैं।

विजिलेंस की छापेमारी में खुला गड़बड़ी का मामला, 46 हजार रुपए अतिरिक्त मिले

मध्यप्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन पर पश्चिम मध्य रेलवे के विजिलेंस विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोंडवाना एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात तीन टीटीई को संदिग्ध वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पकड़ लिया है। जांच के दौरान तीनों टीटीई के पास निर्धारित सीमा से करीब 46 हजार रुपए अधिक नकदी पाई गई, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से तीनों को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी है। मामला सोमवार का है, जब दिल्ली से जबलपुर पहुंची गोंडवाना एक्सप्रेस ट्रेन में विजिलेंस टीम ने अचानक जांच अभियान चलाया। ट्रेन के एसी और स्लीपर कोच में ड्यूटी पर तैनात टीटीई मनोज कुशवाहा, कुंदन कुमार और अनिकेश कुमार की गतिविधियों पर पहले से नजर रखी जा रही थी। यह कार्रवाई यात्रियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद की गई। जानकारी के अनुसार, यात्रियों ने रेलवे अधिकारियों को शिकायत दी थी कि टीटीई उनसे जुर्माना और अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं, लेकिन बदले में कोई रसीद नहीं दी जा रही। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विजिलेंस टीम ने जबलपुर स्टेशन पर पहले से ही निगरानी बढ़ा दी थी और ट्रेन के पहुंचते ही जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान टीम ने तीनों टीटीई के पास मौजूद नकदी का मिलान किया, जिसमें भारी गड़बड़ी सामने आई। कुंदन कुमार के पास 32 हजार रुपए अतिरिक्त पाए गए, जबकि अनिकेश कुमार के पास 14 हजार रुपए और मनोज कुशवाहा के पास 300 रुपए अतिरिक्त नकदी मिली। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 46 हजार रुपए की अतिरिक्त राशि पाई गई। सूत्रों के अनुसार जांच में यह भी सामने आया कि एक टीटीई ने अपनी अतिरिक्त नकदी दूसरे टीटीई को सौंप दी थी, जिससे प्रारंभिक जांच में रकम का असंतुलन दिखाई दिया। हालांकि रेलवे विजिलेंस टीम इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है कि यह राशि किस उद्देश्य से एक-दूसरे को दी गई थी और इसका स्रोत क्या था। मामले के सामने आने के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों टीटीई को तत्काल निलंबित कर दिया है। सीनियर डीसीएम डॉ. मधुर वर्मा ने बताया कि यात्रियों की शिकायतों और जांच में सामने आई अनियमितताओं को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि रेलवे में किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा मामला न केवल अनुशासनहीनता से जुड़ा है, बल्कि यात्रियों के विश्वास से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए इस तरह की शिकायतों पर तुरंत और सख्त कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। विजिलेंस टीम यह पता लगाने में जुटी है कि अतिरिक्त राशि किस आधार पर वसूली गई थी, क्या इसमें अन्य कर्मचारी भी शामिल हैं और क्या यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा है।