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अमेरिकी राजनीति में बढ़ी तल्खी, हकीम जेफरीज बोले- ट्रंप की नीतियों ने बढ़ाया आम लोगों पर आर्थिक बोझ

नई दिल्ली । अमेरिका में आगामी राजनीतिक और नीतिगत बहसों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच टकराव और तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक नेतृत्व संभाल रहे हकीम जेफरीज ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक, स्वास्थ्य और विदेश नीति को लेकर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नीतियों के कारण आम अमेरिकी नागरिकों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है और सरकार जनता की मूल चिंताओं का समाधान करने में विफल रही है। वॉशिंगटन में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जेफरीज ने कहा कि अमेरिका में जीवन यापन की लागत लगातार बढ़ रही है और यह मुद्दा लाखों परिवारों के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ है। उन्होंने दावा किया कि चुनावी वादों के बावजूद आवश्यक वस्तुओं, आवास, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जरूरतों से जुड़े खर्चों में अपेक्षित कमी नहीं आई है। इसके विपरीत, कई क्षेत्रों में आर्थिक दबाव और अधिक बढ़ा है। डेमोक्रेटिक नेता ने विशेष रूप से बढ़ती महंगाई और घरेलू खर्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि कामकाजी वर्ग और मध्यम आय वर्ग के परिवार सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उनके अनुसार, रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि ने आम नागरिकों के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाला है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता लोगों के जीवन को अधिक किफायती बनाना होनी चाहिए। जेफरीज ने ट्रंप प्रशासन की व्यापारिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कुछ आर्थिक फैसलों का प्रभाव सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जिससे परिवारों के वार्षिक खर्च में वृद्धि हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नीतियों का लाभ सीमित वर्ग तक पहुंच रहा है जबकि व्यापक स्तर पर जनता को राहत नहीं मिल पा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं के मुद्दे पर भी डेमोक्रेटिक नेता ने रिपब्लिकन नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य बीमा और चिकित्सा सुविधाओं की बढ़ती लागत ने आम नागरिकों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार और लागत नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि अधिक लोगों को सुलभ और किफायती सेवाएं मिल सकें। विदेश नीति के संदर्भ में जेफरीज ने ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित सैन्य तनाव या संघर्ष का आर्थिक प्रभाव आम नागरिकों तक पहुंचता है, विशेषकर ऊर्जा और ईंधन की कीमतों के रूप में। उन्होंने प्रशासन से अधिक संतुलित और जिम्मेदार कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी ने इस दौरान रिपब्लिकन बजट प्रस्ताव का भी विरोध करने के संकेत दिए। पार्टी का तर्क है कि सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग उन क्षेत्रों में किया जाना चाहिए जो सीधे नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाएं। डेमोक्रेट्स का कहना है कि आर्थिक राहत, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और रोजगार से जुड़े कदम वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका में महंगाई, स्वास्थ्य सेवाएं और विदेश नीति जैसे मुद्दे आने वाले समय में राष्ट्रीय बहस के केंद्र में बने रहेंगे। डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दल इन विषयों को लेकर अपनी-अपनी रणनीतियों के साथ जनता के सामने जा रहे हैं। ऐसे में आर्थिक स्थिरता और नागरिकों की जीवन लागत से जुड़े प्रश्न आगामी राजनीतिक विमर्श को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिकी राजनीति में बढ़ती यह बयानबाजी दर्शाती है कि दोनों प्रमुख दल अब उन मुद्दों पर अधिक जोर दे रहे हैं, जिनका सीधा संबंध आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी और आर्थिक सुरक्षा से है।

"जमीन पर काम करने वालों को सीख न दें", महुआ पर काकोली घोष का तीखा हमला

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में चल रही अंदरूनी कलह अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगी है। पार्टी की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने वरिष्ठ सांसद महुआ मोइत्रा पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें राजनीति से ज्यादा प्रचार में रुचि रखने वाली नेता बताया है। उनके बयान ने टीएमसी के भीतर बढ़ते मतभेदों और नेतृत्व को लेकर उठ रहे सवालों को और तेज कर दिया है। एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान काकोली घोष ने कहा कि जब ममता बनर्जी ने राजनीति में अपनी पहचान बनानी शुरू की थी, तब आज खुद को उनका करीबी बताने वाले कई चेहरे राजनीतिक परिदृश्य में मौजूद भी नहीं थे। उन्होंने बिना नाम लिए महुआ मोइत्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेश में बैठकर ट्वीट करने वाले लोग वास्तविक राजनीति नहीं करते, बल्कि केवल मीडिया का ध्यान आकर्षित करने और अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए बयानबाजी करते हैं। काकोली घोष की यह प्रतिक्रिया उस समय सामने आई है जब हाल ही में महुआ मोइत्रा ने पार्टी के बागी सांसदों को “लालची”, “मतलबी” और “गद्दार” करार दिया था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग और तेज हो गई है। घोष ने कहा कि कुछ नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं, जिनसे मीडिया में उनकी चर्चा बनी रहे, लेकिन इससे पार्टी संगठन को नुकसान पहुंचता है। इस बीच बागी खेमे ने दावा किया है कि उसके साथ करीब 20 सांसदों का समर्थन मौजूद है। काकोली घोष ने स्वयं को भी इस गुट का हिस्सा बताया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि बागी सांसदों ने हाल के दिनों में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ भी बैठकें की हैं, जिससे टीएमसी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं। उधर, पार्टी के राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय के इस्तीफे ने भी टीएमसी में असंतोष की खबरों को बल दिया है। बताया जा रहा है कि रॉय कई सांसदों के साथ केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर पहुंचे थे, जहां महत्वपूर्ण राजनीतिक चर्चा हुई। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस के कई लोकसभा सांसदों की मौजूदगी की खबरें सामने आई हैं। दिल्ली में चल रहे इस राजनीतिक घटनाक्रम के समानांतर पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के भीतर उथल-पुथल जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, विधानसभा चुनाव के बाद कई विधायक पार्टी नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। बागी गुट का दावा है कि बड़ी संख्या में विधायकों ने पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रुख अपनाया है और संगठनात्मक बदलाव की मांग कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि टीएमसी के भीतर यह असंतोष और बढ़ता है, तो इसका असर आगामी राजनीतिक रणनीतियों और विपक्षी गठबंधन की एकजुटता पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ममता बनर्जी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन पार्टी के भीतर उठ रहे विरोध के स्वर उनके लिए नई चुनौती बनते दिखाई दे रहे हैं।

दिल दहला देने वाले मर्डर केस में बड़ा फैसला, आरोपी भाई-बहन को मौत की सजा

नई दिल्ली । हैदराबाद से सामने आए एक दिल दहला देने वाले मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाते हुए एक भाई और बहन को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को अपने ही पिता की हत्या का दोषी पाया गया। इस मामले ने न केवल पूरे इलाके को झकझोर दिया था, बल्कि पारिवारिक रिश्तों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। अदालत ने मामले में मृतक की बहू को भी दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतक 70 वर्षीय रेलवे के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से वर्ष 2000 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी और पेंशन प्राप्त कर रहे थे। जांच में सामने आया कि उनके बेटे, बेटी और बहू की नजर उनकी पेंशन और संपत्ति पर थी। इसी लालच में तीनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची। मामले के अनुसार, आरोपियों ने वृद्ध व्यक्ति के भोजन में जहर मिलाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद उन्होंने अपराध को छिपाने की कोशिश की। बताया गया कि शव को ठिकाने लगाने में असफल रहने पर उसके कई टुकड़े किए गए और उन्हें घर के भीतर अलग-अलग बाल्टियों में भरकर रखा गया। इस भयावह घटना का खुलासा तब हुआ जब घर से लगातार दुर्गंध आने लगी। 18 अगस्त 2019 को आसपास के लोगों को घर से आ रही बदबू पर संदेह हुआ। स्थानीय लोगों ने स्थिति की जानकारी लेने की कोशिश की और बाद में पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो घर के भीतर मानव अवशेष मिलने से सनसनी फैल गई। जांच के दौरान पुलिस ने पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया और तीनों आरोपियों को 21 अगस्त 2019 को गिरफ्तार कर लिया गया। मल्काजगिरि स्थित प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय में चले मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई महत्वपूर्ण साक्ष्य और गवाह पेश किए। अदालत ने पाया कि आरोपियों ने पूर्व नियोजित तरीके से अपराध को अंजाम दिया था। मामले की गंभीरता, हत्या की क्रूरता और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मृतक के बेटे और बेटी को फांसी की सजा सुनाई, जबकि बहू को उम्रकैद की सजा दी गई। यह मामला इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि इसमें लालच के लिए अपने ही पिता की निर्मम हत्या की गई थी। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस प्रकार के जघन्य अपराध समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करते हैं तथा ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है। इस फैसले को न्याय व्यवस्था की सख्ती और अपराध के प्रति शून्य सहिष्णुता के रूप में देखा जा रहा है। वहीं यह घटना परिवार और रिश्तों में विश्वास को झकझोर देने वाली घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टेस्ट से पहले विवादों में घिरा इंग्लैंड क्रिकेट, नाइटक्लब कांड में कप्तान बेन स्टोक्स और गस एटकिंसन के खिलाफ जांच शुरू

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पटल पर शानदार प्रदर्शन कर रही इंग्लैंड की टेस्ट टीम दूसरे मुकाबले से ठीक पहले एक गंभीर अनुशासनात्मक विवाद की चपेट में आ गई है। न्यूजीलैंड के खिलाफ खेली जा रही तीन मैचों की टेस्ट श्रृंखला के बीच इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स और स्टार तेज गेंदबाज गस एटकिंसन पर टीम के कड़े प्रोटोकॉल्स और मर्यादाओं को तोड़ने के गंभीर आरोप लगे हैं। इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड यानी ईसीबी ने आधिकारिक तौर पर इस बात की पुष्टि कर दी है कि सोमवार तड़के लंदन के एक नाइटक्लब में हुई एक कथित घटना के दौरान ये दोनों खिलाड़ी वहां मौजूद थे, जिसके बाद क्रिकेट बोर्ड ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय आंतरिक जांच बिठा दी है। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब इंग्लिश टीम ने लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर खेले गए पहले टेस्ट मैच में न्यूजीलैंड को 115 रनों के बड़े अंतर से मात देकर श्रृंखला में बढ़त बनाई थी। शानदार जीत के ठीक बाद सोमवार की सुबह एक नाइटक्लब में घटी इस अनपेक्षित घटना ने क्रिकेट प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। ईसीबी द्वारा जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बोर्ड इस समय न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के समापन के बाद खिलाड़ियों द्वारा किए गए टीम प्रोटोकॉल के उल्लंघन की गहनता से पड़ताल कर रहा है। क्रिकेट बोर्ड ने इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतंत्र जांच के लिए क्रिकेट रेगुलेटर्स को भी पूरी तरह सूचित कर दिया है। ईसीबी के अधिकारियों का कहना है कि वे इस घटना से जुड़े सभी आवश्यक तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटा रहे हैं और पूरी जानकारी सामने आने के बाद ही अनुशासनात्मक समिति कोई सख्त कदम उठाएगी। बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि दूसरे टेस्ट मैच के लिए इंग्लैंड की अंतिम टीम का एलान इस मामले के तथ्यों की समीक्षा करने के बाद ही सही समय पर किया जाएगा, जिससे दोनों खिलाड़ियों के खेलने पर संशय गहरा गया है। यह अप्रत्याशित विवाद इंग्लैंड की टीम के लिए एक बड़ा और अनचाहा झटका साबित हो सकता है, विशेषकर इसलिए क्योंकि बेन स्टोक्स न केवल टीम के कप्तान हैं बल्कि उनके नेतृत्व में टीम बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है। वहीं दूसरी ओर, ऑलराउंडर और तेज गेंदबाज गस एटकिंसन ने लॉर्ड्स टेस्ट मैच में कुल 7 विकेट चटकाकर विपक्षी टीम की कमर तोड़ दी थी और इंग्लैंड की जीत के मुख्य सूत्रधार बने थे। ऐसे में टीम के दो सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ियों के खिलाफ जांच बैठना आगामी मैच की रणनीतियों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल ईसीबी ने नाइटक्लब के भीतर हुई वास्तविक घटना के विवरण को सार्वजनिक नहीं किया है और जांच पूरी होने तक गोपनीयता बनाए रखने की बात कही है। दोनों देशों के बीच श्रृंखला का दूसरा टेस्ट मैच 17 जून से लंदन के द ओवल मैदान पर खेला जाना निर्धारित है। खेल प्रेमियों और विश्लेषकों की नजरें अब ईसीबी के अगले कदम और टीम चयन पर टिकी हुई हैं, क्योंकि कप्तान पर होने वाली किसी भी संभावित कार्रवाई का सीधा असर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका और टीम के मनोबल पर पड़ना तय है।

श्रीलंका के खिलाफ टी20 श्रृंखला के लिए वेस्टइंडीज टीम घोषित, विश्व कप में खराब प्रदर्शन के बाद टीम में हुए 3 बड़े बदलाव

नई दिल्ली। वेस्टइंडीज क्रिकेट बोर्ड ने श्रीलंका के खिलाफ घरेलू मैदानों पर खेली जाने वाली आगामी तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए अपनी 15 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम का एलान कर दिया है। हाल ही में संपन्न हुए टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप चरण से बाहर होने के बाद कैरेबियाई टीम की यह पहली टी20 श्रृंखला है, जिसके चलते चयनकर्ताओं ने भविष्य की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए टीम में कई चौंकाने वाले और बड़े फेरबदल किए हैं। इस महत्वपूर्ण श्रृंखला में टीम की कमान एक बार फिर स्टार बल्लेबाज शाई होप के हाथों में सौंपी गई है। मेजबान वेस्टइंडीज के लिए यह टी20 सीरीज साख बचाने और खोई हुई लय वापस पाने का एक बड़ा अवसर है। इससे पहले दोनों देशों के बीच खेली गई तीन मैचों की वनडे सीरीज बारिश से बुरी तरह प्रभावित रही थी, जहां केवल एक ही मैच का परिणाम आ सका था। उस एकमात्र मुकाबले को जीतकर श्रीलंका ने वनडे सीरीज अपने नाम कर ली थी, जबकि बाकी के दो मैच भारी बारिश के कारण रद्द करने पड़े थे। वनडे सीरीज की इस निराशा को पीछे छोड़कर कैरेबियाई टीम अब सबसे छोटे प्रारूप में पलटवार करने की रणनीति तैयार कर रही है। चयनकर्ताओं ने टीम को मजबूत और संतुलित बनाने के लिए अनुभवी बल्लेबाज जॉनसन चार्ल्स, क्वेंटिन सैम्पसन और तेज गेंदबाज जेडेन सील्स को टीम से ड्रॉप कर दिया है। इनके स्थान पर युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी एकीम ऑगस्टे, जेवेल एंड्र्यू और ऑलराउंडर शमर स्प्रिंगर को टीम में जगह दी गई है। हालांकि, टीम के मुख्य तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ अभी भी टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। टीम के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने इन बदलावों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि विश्व कप की निराशा के बाद अब वे टीम को एक नया आकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। कोच डैरेन सैमी ने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि भारत में हुए विश्व कप के बाद यह हमारी पहली टी20 सीरीज है और यह हमारे लिए बेहद अहम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि टीम उसी जज्बे, जुझारूपन और एकजुटता के साथ मैदान पर उतरेगी जिसके लिए वेस्टइंडीज क्रिकेट को विश्व भर में जाना जाता है। सैमी के अनुसार, टीम का मुख्य लक्ष्य बुनियादी चीजों को दुरुस्त करना, एक सामूहिक इकाई के रूप में आगे बढ़ना और श्रीलंका के खिलाफ उत्कृष्ट प्रदर्शन करके घरेलू फैंस को गौरवान्वित होने का मौका देना है। इस टी20 श्रृंखला का पूरा कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है, जिसके तहत तीनों मुकाबले जमैका के ऐतिहासिक सबीना पार्क स्टेडियम में खेले जाएंगे। श्रृंखला का पहला मैच 11 जून को, दूसरा मैच 13 जून को और तीसरा व अंतिम मैच 14 जून को आयोजित होगा। वेस्टइंडीज के लिए सबसे राहत की बात यह है कि इस समय वैश्विक स्तर पर कोई बड़ी टी20 लीग नहीं खेली जा रही है, जिसके चलते उनके सभी प्रमुख और सीनियर खिलाड़ी चयन के लिए उपलब्ध रहे, जिससे बोर्ड को एक मजबूत टीम चुनने में मदद मिली है।

'बुढ़वा मंगल' पर महाबली के चमत्कारी दोहों का महत्व, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़

नई दिल्ली। सनातन परंपरा में ज्येष्ठ मास के मंगलवार का अत्यधिक पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहा जाता है। आज छठे बड़े मंगल के पावन अवसर पर तड़के से ही देश के तमाम छोटे-बड़े हनुमान मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। मान्यता है कि इस विशेष तिथि पर पवनपुत्र हनुमान जी की आराधना करने से भक्तों को जीवन की हर कसौटी पर विजय प्राप्त होती है। यदि कोई श्रद्धालु समय के अभाव में संपूर्ण हनुमान चालीसा का पाठ नहीं कर पाता है, तो उसके कुछ अत्यंत चमत्कारी दोहों और चौपाइयों के मानसिक जाप से भी अद्वितीय लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, विद्यार्थियों और रोजगार की तलाश में जुटे युवाओं के लिए हनुमान चालीसा का प्रारंभिक दोहा ‘बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार। बल-बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।।’ एक अचूक महामंत्र की तरह कार्य करता है। इस दोहे का सीधा अर्थ है कि साधक स्वयं को बुद्धिहीन मानकर पवनपुत्र का स्मरण कर रहा है, ताकि उसे बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद मिल सके। बड़े मंगल के दिन स्नान के उपरांत तुलसी की माला से इस दोहे का कम से कम 108 बार जाप करने से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है और किसी भी प्रतियोगिता या इंटरव्यू में सफलता के मार्ग खुलते हैं। इसके अतिरिक्त, जो लोग अज्ञात भय, मानसिक अवसाद या बुरे सपनों से परेशान रहते हैं, उनके लिए ‘भूत पिशाच निकट नहीं आवै, महावीर जब नाम सुनावे’ की चौपाई को संजीवनी माना गया है। इस चौपाई के नियमित पाठ से किसी भी प्रकार की नकारात्मक शक्ति या ऊपरी बाधा साधक के समीप नहीं फटकती है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न अंचलों के प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों में आज के दिन भक्तों को इस चौपाई के सामूहिक कीर्तन के जरिए भयमुक्त होने का संकल्प लेते देखा जा रहा है, जिससे आंतरिक शांति और गहरी नींद की प्राप्ति होती है। शारीरिक व्याधियों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पीड़ितों के लिए ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा’ का पाठ परम कल्याणकारी सिद्ध होता है। इस पंक्ति के निरंतर जाप से असाध्य रोगों के कष्टों में कमी आती है और चिकित्सा के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा मिलने से रोगी तेजी से स्वस्थ होने लगता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में पनपने वाले मानसिक तनाव और डिप्रेशन को दूर करने में भी यह चौपाई अत्यंत प्रभावी साबित हुई है, जिसके चलते आज भंडारे और पूजा पंडालों में इसका विशेष गायन किया जा रहा है। सामाजिक और व्यावसायिक जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए ‘महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी’ का पाठ करने की सलाह दी जाती है। यह चौपाई मानव मस्तिष्क से दुर्बुद्धि और द्वेष की भावनाओं का समूल नाश कर सद्बुद्धि का संचार करती है। व्यापारिक प्रतिष्ठानों और कार्यस्थलों पर किसी भी प्रकार के अनैतिक विचारों से बचने तथा ईमानदारी से तरक्की पाने के लिए इस दोहे को आत्मसात करना अनिवार्य माना गया है। कुल मिलाकर, यह छठा बड़ा मंगल भक्तों के लिए दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति का एक बड़ा माध्यम बनकर आया है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में टीम इंडिया ने रचा स्वर्णिम इतिहास, अफगानिस्तान को हराकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाला बना पहला देश

नई दिल्ली। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित कर दिया है, जिसके आसपास फिलहाल दुनिया की कोई भी बड़ी क्रिकेट टीम नजर नहीं आती है। न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्टेडियम में खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में भारत ने अफगानिस्तान को पारी और 300 रनों के बेहद शर्मनाक अंतर से शिकस्त दे दी। इस विशाल जीत के साथ ही भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में एक नया विश्व रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है, जहां क्रिकेट की महाशक्तियां मानी जाने वाली ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड जैसी टीमें भारत के आसपास भी नहीं ठहरती हैं। यह मुकाबला जीतने के साथ ही अफगानिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम का बिना हारे लगातार 15 मैच खेलने का अनोखा सिलसिला पूरा हो चुका है। भारतीय टीम ने साल 2010 से लेकर 2026 तक के सफर में अफगानिस्तान के खिलाफ सभी प्रारूपों को मिलाकर कुल 15 मुकाबले खेले हैं, जिनमें से 12 मैचों में टीम इंडिया ने एकतरफा जीत हासिल की है। इस सफर के दौरान भारतीय टीम को एक भी मैच में हार का सामना नहीं करना पड़ा है, जिसने भारत को विश्व क्रिकेट इतिहास की सबसे लंबी अजेय स्ट्रीक का मालिक बना दिया है। इस वैश्विक सूची पर नजर डालें तो भारत के बाद दूसरे नंबर पर न्यूजीलैंड की टीम मौजूद है, जिसने आयरलैंड के खिलाफ लगातार 13 मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। वहीं युगांडा ने नाइजीरिया के खिलाफ लगातार 13 मैच जीते थे। भारत और अफगानिस्तान के बीच खेले गए इन 15 मुकाबलों के इतिहास में केवल एक मैच साल 2023 के टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान बारिश की भेंट चढ़ा था, जबकि दो बेहद रोमांचक मुकाबले टाई पर समाप्त हुए थे। इनमें से पहला टाई मुकाबला साल 2018 के एशिया कप के दौरान दुबई में खेला गया वनडे मैच था, जिसमें महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में विपक्षी टीम ने भारत को कड़ी टक्कर दी थी। इसके बाद साल 2024 में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में दोनों देशों के बीच खेला गया द्विपक्षीय टी20 मुकाबला क्रिकेट इतिहास के सबसे रोमांचक मैचों में शुमार हो गया था, जहां एक ही मैच में दो बार सुपर ओवर का ड्रामा देखने को मिला था। उस ऐतिहासिक मैच में कप्तान रोहित शर्मा के शानदार 121 रनों और रिंकू सिंह की आतिशी पारी के दम पर भारत ने विशाल स्कोर खड़ा किया था, जिसे अफगानिस्तान ने बराबर कर दिया था। अंततः रवि बिश्नोई की घातक गेंदबाजी के दम पर भारत ने वह दोहरा सुपर ओवर मुकाबला अपने नाम किया था। क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप यानी टेस्ट मैच में अफगानिस्तान को बेहद बुरी तरह रौंदकर भारत ने साफ कर दिया है कि खेल के हर फॉर्मेट में उसकी बादशाहत क्यों कायम है। मुल्लांपुर स्टेडियम की पिच पर भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों के संयुक्त प्रदर्शन ने विपक्षी टीम को मैच के किसी भी सत्र में संभलने का मौका नहीं दिया। भारतीय क्रिकेट के इस स्वर्णिम दौर में यह नया विश्व रिकॉर्ड खिलाड़ियों की निरंतरता और टीम के मजबूत बेंच स्ट्रेंथ को दर्शाता है, जिसने देश के खेल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।

बुध के नक्षत्र परिवर्तन से इन राशियों पर बरसेगा धन और सफलता का आशीर्वाद

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, संचार और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में बुध का नक्षत्र परिवर्तन विशेष महत्व रखता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026 को बुध देव राहु के आर्द्रा नक्षत्र से निकलकर देवगुरु बृहस्पति के स्वामित्व वाले पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। इस गोचर का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ेगा, लेकिन कुछ राशियों के लिए यह अवधि विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। कब होगा बुध का नक्षत्र परिवर्तन?पंचांग के अनुसार, 11 जून 2026, गुरुवार को सुबह 11 बजकर 30 मिनट पर बुध पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। खास बात यह है कि बुध इस नक्षत्र में लंबे समय तक रहेंगे और 8 अगस्त 2026 तक यहीं विराजमान रहेंगे। इस दौरान बुध की वक्री और मार्गी चाल का प्रभाव भी देखने को मिलेगा। पुनर्वसु नक्षत्र आकाश मंडल का सातवां नक्षत्र माना जाता है, जिसके स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु के नक्षत्र में बुध का प्रवेश ज्ञान, विवेक, शिक्षा और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम देने वाला माना जाता है। इन राशियों के लिए खुलेंगे सफलता के द्वारवृषभ राशिबुध का यह गोचर वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनेंगे और धन आगमन के अवसर बढ़ेंगे। परिवार के साथ धार्मिक या मनोरंजक यात्रा का योग बन सकता है। पैतृक संपत्ति से लाभ मिलने की भी संभावना है। मिथुन राशिमिथुन राशि के जातकों को करियर में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा और पदोन्नति या वेतन वृद्धि के योग बन सकते हैं। व्यापार में लाभ की संभावना रहेगी तथा लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिल सकता है। व्यक्तिगत जीवन में भी सुधार देखने को मिलेगा। वाणी में मधुरता बढ़ेगी, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा मजबूत होगी। संतान पक्ष से कोई सुखद समाचार मिलने की संभावना है। सिंह राशिसिंह राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का संकेत दे रहा है। आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और निवेश से लाभ मिलने के योग बन रहे हैं। पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आएगी तथा पुराने मतभेद दूर हो सकते हैं। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और कार्यस्थल पर लंबे समय से चल रहे विवादों या तनाव से राहत मिलने की संभावना है। कन्या राशिकन्या राशि के जातकों के लिए बुध का यह गोचर नई शुरुआत और उपलब्धियों का संकेत लेकर आ रहा है। नया व्यापार शुरू करने या किसी नई योजना पर काम करने के लिए समय अनुकूल रहेगा। वाहन या संपत्ति खरीदने के अवसर भी बन सकते हैं। रचनात्मक क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। बैंकिंग, शिक्षा, लेखन और बौद्धिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों को विशेष सफलता मिल सकती है। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी और परिवार का सहयोग प्राप्त होगा। ज्ञान और समृद्धि का विशेष योगज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, बृहस्पति के नक्षत्र में बुध का प्रवेश बुद्धि, शिक्षा, संवाद कौशल और आर्थिक मामलों में सकारात्मक प्रभाव ला सकता है। 11 जून से 8 अगस्त तक की यह अवधि कई लोगों के लिए नए अवसरों, आर्थिक मजबूती और व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

एमपी में 15 से 18 जून के बीच मानसून आने की संभावना, आज 18 जिलों में बारिश-आंधी का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की एंट्री अगले सप्ताह 15 से 18 जून के बीच होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून प्रदेश में इंदौर संभाग के बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, बैतूल या जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट जिलों के रास्ते प्रवेश कर सकता है। फिलहाल प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय बनी हुई हैं। मानसून के आगमन से पहले प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर जारी रहेगा। मंगलवार को बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, उमरिया और शहडोल सहित 18 जिलों में तेज हवाओं और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। 10 और 11 जून को लू का भी असरमौसम केंद्र भोपाल के अनुसार 9 से 11 जून तक प्रदेश में आंधी, बारिश और गर्मी तीनों का असर देखने को मिलेगा। वहीं 10 और 11 जून को भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में हीटवेव यानी लू चलने की चेतावनी जारी की गई है। कई जिलों में 42 डिग्री के पार पहुंचा पाराप्रदेश में बारिश की गतिविधियों के बावजूद गर्मी का असर बरकरार है। सोमवार को कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। मंडला सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री रिकॉर्ड हुआ। छिंदवाड़ा में 42.1, खजुराहो में 42, दमोह में 41.8, मलाजखंड में 41.7 और राजगढ़ में 41.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में 41.6 डिग्री, जबलपुर में 40 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री, भोपाल में 38.7 डिग्री और इंदौर में 38.6 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। प्रदेश में एक साथ दिख रहा तीन मौसमों का असरमौसम विभाग का कहना है कि मध्य प्रदेश इस समय मौसम के संक्रमण काल से गुजर रहा है। प्रदेश में एक ओर भीषण गर्मी है, वहीं दूसरी ओर प्री-मानसून की बारिश और बढ़ती नमी का प्रभाव भी दिखाई दे रहा है। रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट और सिवनी जिलों में अगले तीन से चार दिनों के दौरान गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। महाकौशल क्षेत्र में मध्यम बारिश के दौर देखने को मिल सकते हैं, जबकि बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की आशंका भी बनी हुई है। भोपाल और आसपास के इलाकों में राहत के आसार भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा समेत प्रदेश के मध्य भागों में दोपहर बाद बादल छाने, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। इससे पिछले कुछ दिनों से पड़ रही तेज गर्मी से राहत मिल सकती है। वहीं सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और पन्ना में भी वर्षा गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं। मालवा-निमाड़ में बढ़ेगी नमी और उमस इंदौर, उज्जैन, धार, खरगोन, बड़वानी, खंडवा और बुरहानपुर जिलों में अरब सागर से आने वाली नमी का असर देखने को मिलेगा। यहां बादलों की आवाजाही बढ़ेगी और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश की तुलना में वर्षा का दायरा सीमित रहने की संभावना है। तापमान में 2 से 5 डिग्री तक गिरावट संभवमौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक कमी दर्ज की जा सकती है। जिन क्षेत्रों में बारिश होगी वहां मौसम सुहावना रहेगा, जबकि केवल बादल छाए रहने वाले इलाकों में उमस बढ़ सकती है। मानसून के स्वागत की तैयारीमौजूदा मौसमीय परिस्थितियों और मानसून की प्रगति को देखते हुए प्रदेश में मानसून प्रवेश की अनुकूल स्थिति बन रही है। यदि अगले कुछ दिनों तक यही हालात बने रहे तो दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को खरीफ फसलों की तैयारी करने की सलाह दी है, लेकिन बुवाई से पहले व्यापक और स्थायी बारिश का इंतजार करना बेहतर रहेगा। मौसम में बदलाव की वजहमौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम के साथ उत्तर-पूर्वी हिस्से में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन बनी हुई है। इसके कारण प्रदेश के मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं 11 जून को पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय होने वाले पश्चिमी विक्षोभ का असर भी मध्य प्रदेश के मौसम पर पड़ सकता है।

100 करोड़ के क्लब में शामिल होने वाले देश के टॉप-7 फिल्म निर्देशकों की सूची आई सामने, जादुई आंकड़े से बदली फिल्म इंडस्ट्री की दशा

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के बदलते स्वरूप और बढ़ती पहुंच के बीच बॉक्स ऑफिस पर कमाई के नए रिकॉर्ड स्थापित हो रहे हैं। बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा तक, आज के दौर में फिल्मों की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना 100 करोड़ रुपये के क्लब में शामिल होना बन चुका है। इस जादुई और प्रतिष्ठित आंकड़े को सबसे ज्यादा बार छूने का महा-रिकॉर्ड एक्शन फिल्मों के बेताज बादशाह कहे जाने वाले निर्देशक रोहित शेट्टी के नाम दर्ज हो चुका है। रोहित शेट्टी ने अपनी बैक-टू-बैक सुपरहिट कमर्शियल फिल्मों के दम पर एसएस राजामौली और राजकुमार हिरानी जैसे धुरंधर निर्देशकों को भी संख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया है। फिल्म निर्देशन की दुनिया में रोहित शेट्टी की शैली को सबसे सुरक्षित और बॉक्स ऑफिस फ्रेंडली माना जाता है। अपनी खास एक्शन और कॉमेडी फिल्मों के लिए मशहूर रोहित शेट्टी के करियर में अब तक 10 से ज्यादा ऐसी फिल्में आ चुकी हैं, जिन्होंने घरेलू बाजार में 100 करोड़ रुपये से अधिक की शानदार कमाई की है। उनके इस अनूठे रिकॉर्ड के आसपास फिलहाल इंडस्ट्री का कोई दूसरा निर्देशक नजर नहीं आता है, जो यह दर्शाता है कि दर्शकों की नब्ज पर उनकी पकड़ कितनी मजबूत है। इस सूची में दूसरे पायदान पर गंभीर विषयों को बेहद हल्के-फुल्के और मनोरंजक अंदाज में पेश करने वाले निर्देशक राजकुमार हिरानी का नाम आता है। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘3 इडियट्स’, ‘पीके’ और ‘संजू’ जैसी कालजयी फिल्में देने वाले राजकुमार हिरानी ने अब तक 5 फिल्में ऐसी दी हैं, जिन्होंने 100 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार किया है। हिरानी की फिल्मों की खासियत यह है कि वे न केवल कमाई के रिकॉर्ड तोड़ती हैं, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी देती हैं। कमाई के इस हाई-प्रोफाइल मुकाबले में तीसरे नंबर पर एक्शन और स्पाई थ्रिलर फिल्मों के विशेषज्ञ सिद्धार्थ आनंद का कब्जा है। ‘वॉर’, ‘पठान’ और ‘किंग’ जैसी मेगा-बजट और भव्य स्तर की एक्शन फिल्में बनाने वाले सिद्धार्थ आनंद के खाते में भी 4 से 5 ऐसी फिल्में शामिल हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा का कलेक्शन दर्ज कराया है। उनके बाद चौथे नंबर पर निर्देशक आदित्य धर का नाम आता है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में देशप्रेम और युद्ध पर आधारित दमदार फिल्में बनाकर इतिहास रचा है और उनके खाते में भी 5 से अधिक 100 करोड़ क्लब की फिल्में दर्ज हैं। इस सूची में साउथ सिनेमा के दिग्गज निर्देशक सुकुमार भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हैं, जिनकी ‘आर्या’ और वैश्विक स्तर पर तहलका मचाने वाली ‘पुष्पा’ जैसी फिल्मों ने 100 करोड़ रुपये का कलेक्शन आसानी से पार किया है। वहीं हिंदी सिनेमा के हॉरर-कॉमेडी जॉनर को नया जीवन देने वाले निर्देशक अमर कौशिक भी ‘भेड़िया’ और ‘स्त्री 2’ जैसी सुपरहिट फिल्मों के साथ इस एलीट क्लब का हिस्सा बने हुए हैं। सूची के अंतिम छोर पर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम चमकाने वाले निर्देशक एसएस राजामौली का नाम है, जिन्होंने ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी कल्ट फिल्मों के जरिए न केवल 100 करोड़ बल्कि हजारों करोड़ की कमाई का नया इतिहास रचा है।