फिल्म 'तीसरी कसम' के सदाबहार गीत 'चलत मुसाफिर' का गहरा दर्शन, मौज-मस्ती के पीछे छिपी है एक कलावंती की बेबसी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ गीतों को उनके मूल संदर्भ से अलग केवल मनोरंजन के दृष्टिकोण से देखा जाता रहा है, जबकि उनके पीछे गहरे सामाजिक सरोकार छिपे होते हैं। ऐसा ही एक कालजयी उदाहरण वर्ष 1966 में प्रदर्शित निर्देशक बासु भट्टाचार्य की फिल्म ‘तीसरी कसम’ का लोकगीत ‘चलत मुसाफिर मोह लिया रे’ है। रेडियो के जमाने से लेकर आधुनिक रीमिक्स और रील्स के दौर तक इस गीत की धुन पर लोग झूमते आ रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस हंसते-गाते ट्रैक के पीछे एक स्त्री की बेबसी और सामाजिक विडंबना का मर्मस्पर्शी ताना-बाना बुना गया है। प्रसिद्ध गीतकार और इस फिल्म के निर्माता शैलेंद्र द्वारा रचित यह गीत फणीश्वरनाथ रेणु की कालजयी कहानी ‘मारे गए गुलफाम’ पर आधारित फिल्म का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बावजूद इस फिल्म के गानों को आज भी संगीत की धरोहर माना जाता है। इस विशेष गीत में प्रयुक्त ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ का सीधा संबंध फिल्म की मुख्य नायिका हीराबाई के जीवन से है, जिसका किरदार अभिनेत्री वहीदा रहमान ने निभाया था। हीराबाई एक नौटंकी कलाकार है, जिसकी कला पर पूरा समाज फिदा है, लेकिन जब उसे अपनाने की बात आती है, तो वही समाज पीछे हट जाता है। फिल्म की कहानी के अनुसार, राज कपूर द्वारा अभिनीत हीरामन नाम का एक सीधा-सादा बैलगाड़ी चालक अनजाने में एक नौटंकी डांसर को अपनी गाड़ी में बिठा लेता है। यात्रा के दौरान दोनों के बीच एक गहरा आत्मीय रिश्ता पनपने लगता है, लेकिन मेले में पहुंचने पर जब हीरामन को हीराबाई के पेशे की असलियत और समाज द्वारा उसे वेश्या जैसी नजरों से देखने का पता चलता है, तो वह टूट जाता है। वह हीराबाई को यह काम छोड़ने की सलाह देता है, परंतु अपनी मजबूरियों के चलते वह ऐसा नहीं कर पाती, जिसके बाद हीरामन जीवन की ‘तीसरी कसम’ खाता है कि वह कभी किसी नौटंकी वाली को अपनी गाड़ी में नहीं बिठाएगा। इसी पृष्ठभूमि में ‘पिंजड़े वाली मुनिया’ शब्द उस नाचने वाली महिला का प्रतीक बनकर उभरता है, जो अपनी कला से हर राहगीर और मुसाफिर का मन तो मोह लेती है, लेकिन खुद एक अदृश्य पिंजरे में कैद रहने को अभिशप्त है। गीत के अंतर्निहित अर्थ में समाज के दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रहार किया गया है। गीत के बोलों में बताया गया है कि वह मुनिया जब हलवाई की दुकान पर जाती है या पनवाड़ी के पास जाती है, तो हर कोई उसके रस और आकर्षण में डूब जाना चाहता है। हर वर्ग का पुरुष उसके मोहपाश में बंधने को तैयार है, लेकिन उसे अपनी गृहस्थी या सम्मानजनक जीवन का हिस्सा बनाने का साहस किसी में नहीं होता। शैलेंद्र ने बेहद चतुराई से एक बेहद चुलबुली लोकधुन का सहारा लेकर उस दौर की कलावंती और नौटंकी महिलाओं की उस नियति को उजागर किया था, जो जिंदगी भर दर्शकों की तालियों के पिंजरे में घुटती रहती थीं। आज के दौर में जब इस गाने की तर्ज पर नए रीमिक्स बनाए जा रहे हैं, तब इस गाने के वास्तविक साहित्यिक और सामाजिक अर्थ को समझना सिनेमा और समाज के अंतर्संबंधों को देखने का एक नया नजरिया प्रदान करता है। यह गीत केवल नाचने-गाने का जरिया नहीं, बल्कि एक मूक विलाप है जिसे उत्सव की तरह गाया जाता रहा है।
राजू पाल हत्याकांड: अतीक अहमद के शूटर आबिद को हाईकोर्ट से जमानत, SC जाएंगी पूजा पाल

प्रयागराज। बहुचर्चित राजू पाल हत्याकांड में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। मामले में दोषी ठहराए गए अतीक अहमद के शूटर आबिद को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत प्रदान की है। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर प्रदेश का चर्चित हत्याकांड सुर्खियों में आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने आबिद की आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी। अदालत ने मामले के विभिन्न तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद जमानत मंजूर की, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं, जिनका पालन करना अभियुक्त के लिए अनिवार्य होगा। 2005 में हुई थी दिनदहाड़े हत्यागौरतलब है कि 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज के धूमनगंज क्षेत्र में तत्कालीन बसपा विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक और आपराधिक वारदातों में शामिल रही थी। हमले में राजू पाल के अलावा देवी लाल पाल और संदीप यादव की भी जान गई थी, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस मामले में राजू पाल की पत्नी और वर्तमान विधायक पूजा पाल की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आए थे कई बड़े नामजांच के दौरान कई आरोपियों के नाम सामने आए थे, जिनमें माफिया अतीक अहमद और उसके करीबी सहयोगी भी शामिल थे। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद मामले में कई आरोपियों को दोषी ठहराया गया था। हाईकोर्ट के फैसले से असहमत पूजा पालआबिद को जमानत दिए जाने के फैसले पर राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा है कि वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर आगे क्या रुख अपनाया जाता है और जमानत आदेश पर क्या निर्णय आता है।
सरहद पार के संगीत का डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर जलवा, यूट्यूब और स्पॉटिफाई पर करोड़ों व्यूज बटोर रहे इंडिपेंडेंट सिंगल्स

नई दिल्ली। सोशल मीडिया के इस दौर में संगीत की कोई सीमा नहीं रह गई है और यही वजह है कि इंस्टाग्राम रील्स पर रोजाना जिन गानों पर करोड़ों लोग शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, उनमें से अधिकांश गानों का कनेक्शन सरहद पार से है। भारतीय यूजर्स अक्सर जिन भावुक या रोमांटिक धुनों को देश का समझकर अपनी रील्स में इस्तेमाल करते हैं, वे असल में पाकिस्तान के उभरते हुए इंडी-पॉप कलाकारों की रचनाएं हैं। आज के समय में इंटरनेट और म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने दोनों देशों के संगीत प्रेमियों को एक अनूठे धागे में पिरो दिया है। डिजिटल दुनिया में इस वक्त शेहरयार रेहान और जोहा वसीम का गाना ‘मजबूर’ यानी ‘आपका ही कहना बनता’ जबरदस्त तरीके से ट्रेंड कर रहा है। यूट्यूब पर 65 मिलियन से अधिक व्यूज बटोर चुका यह एक स्वतंत्र सिंगल ट्रैक है, जो दिल टूटने और बेबसी के अहसास को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। इस गाने के बोल और इसकी धीमी धुन ने भारतीय रील्स क्रिएटर्स को अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके चलते लोग इसे भारतीय संगीत उद्योग का हिस्सा मान बैठते हैं। इसी तरह अन्नुरल खालिद और मानू का दर्द भरा गाना ‘झोल’ यूट्यूब पर 571 मिलियन से भी ज्यादा व्यूज हासिल कर चुका है। पाकिस्तान की मशहूर आर-एंड-बी सिंगर अन्नुरल और रैपर मानू का यह नॉन-फिल्मी गाना युवाओं के बीच इस कदर लोकप्रिय है कि इसकी पंक्तियां हर दूसरी रील में सुनाई दे जाती हैं। इसके साथ ही अली सूमरो और अफ्यूजिक का गाना ‘पल पल जीना मुहाल’ भी इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस गाने को लेकर भारतीय श्रोताओं में अक्सर यह भ्रम रहता है कि इसे गायक तलविंदर ने गाया है, जबकि इसके मूल निर्माता पाकिस्तान के नए जमाने के कलाकार हैं। अब्दुल हन्नान और रोवालियो का गाना ‘इरादे’ भी इस सूची में एक कल्ट हिट बनकर उभरा है, जिसने 125 मिलियन से अधिक व्यूज हासिल किए हैं। सिंपल अकॉस्टिक संगीत और मखमली आवाज के कॉम्बिनेशन वाले इस गाने का इस्तेमाल लोग अपने प्यार का इजहार करने के लिए धड़ल्ले से कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, एक अनोखे क्रॉस-बॉर्डर कोलैबोरेशन के तहत हसन रहीम, उमेर और भारत के तलविंदर का हिप-हॉप ट्रैक ‘विशेस’ भी 134 मिलियन से ज्यादा व्यूज के साथ रील्स पर तहलका मचा रहा है। इसके अलावा, पाकिस्तानी टेलीविजन सीरियल्स के टाइटल ट्रैक्स और वहां के पॉप स्टार्स का जादू भी भारतीय दर्शकों के सिर चढ़कर बोल रहा है। असीम अजहर का गाया हुआ ‘कैसी दिल लगी है तू’ का स्लो इंटरनेट वर्जन, जिसे विजार्डो ने रीमिक्स किया है, इन दिनों काफी सुना जा रहा है। साथ ही असीम अजहर का ही भावुक सिंगल ट्रैक ‘जो तू ना मिला’, जिसे भारतीय म्यूजिक लेबल के तहत रिलीज किया गया था, वह भी एकतरफा प्यार के दर्द को दर्शाने के कारण रील्स का एक पसंदीदा ट्रैक बना हुआ है। यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि मौजूदा दौर में फिल्मों से इतर इंडिपेंडेंट सिंगल्स का चलन काफी बढ़ गया है।
बंगाल में TMC के भीतर बढ़ी हलचल! सांसदों की दिल्ली बैठक से तेज हुई अटकलें, ममता के सामने नई चुनौती?

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों की दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से इसे सामान्य शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन घटनाक्रम को लेकर कई तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं। इस बैठक में राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे चुके सुखेंदु शेखर रॉय की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में पार्टी के भीतर उभर रहे असंतोष के संकेत अब खुलकर सामने आने लगे हैं। दिल्ली में जुटे कई सांसददिल्ली में हुई इस मुलाकात में TMC के सांसद जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, अरूप चक्रवर्ती और कालीपदा सोरेन समेत कई नेता शामिल बताए गए। वहीं शाम को सांसद शताब्दी रॉय के आवास पर भी एक बैठक हुई, जिसमें विभिन्न राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की खबरें सामने आईं। इसी बीच TMC सांसद काकोली घोष ने दावा किया कि प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है और इसी उद्देश्य से संवाद किया जा रहा है। इस्तीफे के बाद सुखेंदु शेखर रॉय के आरोपराज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने संगठन में भ्रष्टाचार, महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता और आंतरिक लोकतंत्र की कमी जैसे मुद्दों का जिक्र किया था। उनके बयान को पार्टी के अंदरूनी असंतोष का संकेत माना गया। कई महीनों से चल रही है नाराजगी की चर्चाराजनीतिक सूत्रों के अनुसार, TMC के भीतर पिछले कुछ समय से असंतोष की चर्चा लगातार होती रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से ऐसे दावों को खारिज किया जाता रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। हाल के दिनों में पार्टी की बैठकों में कई नेताओं की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही है। इससे संगठन के भीतर चल रही गतिविधियों को लेकर राजनीतिक अटकलें और तेज हो गई हैं। ऋतब्रत बंद्योपाध्याय की भूमिका पर नजरविपक्ष के नेता ऋतब्रत बंद्योपाध्याय का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में प्रमुखता से सामने आ रहा है। उन्होंने दावा किया है कि TMC के कई नेता उनके संपर्क में हैं और पार्टी के भीतर चल रही हलचलों को लेकर लगातार संवाद जारी है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन विपक्ष इसे राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में पेश कर रहा है। फिरहाद हाकिम की मुलाकात ने बढ़ाई चर्चामुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी माने जाने वाले फिरहाद हाकिम की विपक्षी नेताओं से हुई मुलाकात ने भी राजनीतिक हलकों में चर्चा को और तेज कर दिया है। इसे लेकर अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले जा रहे हैं। कुछ इसे संवाद की कोशिश मान रहे हैं तो कुछ इसे पार्टी के भीतर की स्थिति को समझने की कवायद बता रहे हैं। ममता बनर्जी की चुप्पी भी बनी चर्चा का विषयदिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मीडिया से अपेक्षाकृत दूरी बनाए रखी। आमतौर पर राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र सरकार के मुद्दों पर मुखर रहने वाली ममता की इस बार की चुप्पी को भी राजनीतिक विश्लेषक अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। आगे क्या?फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत जरूर दिया है कि TMC के भीतर कुछ महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी नेतृत्व इन चुनौतियों से कैसे निपटता है और क्या संगठन में किसी बड़े बदलाव की स्थिति बनती है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब TMC के अगले कदम और संभावित रणनीति पर टिकी हुई है, क्योंकि बंगाल की राजनीति में होने वाला हर बदलाव राज्य के भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी, SIPRI रिपोर्ट से मिली अहम जानकारी

नई दिल्ली। भारत के परमाणु हथियारों के भंडार में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत के परमाणु वारहेड्स की संख्या 180 से बढ़कर लगभग 190 हो गई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि देश अपनी रणनीतिक और सुरक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। SIPRI ईयरबुक 2026 में बताया गया है कि दुनिया की नौ परमाणु शक्तियों में आधुनिकरण और विस्तार की प्रक्रिया जारी है। रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि शीत युद्ध के बाद परमाणु हथियारों में कमी की गति धीमी पड़ गई है, और कई देशों द्वारा नए हथियारों की तैनाती से वैश्विक भंडार फिर बढ़ सकता है। भारत की परमाणु क्षमता में बढ़ोतरीरिपोर्ट के अनुसार भारत में लगभग 10 नए वारहेड्स की वृद्धि दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी लंबी दूरी की मिसाइल प्रणालियों, समुद्री आधारित क्षमता और MIRV (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicle) जैसी तकनीकों के विकास के साथ जुड़ी हुई है। भारत की परमाणु रणनीति अब मुख्य रूप से चीन पर केंद्रित मानी जा रही है, क्योंकि चीन तेजी से अपने परमाणु भंडार का विस्तार कर रहा है। SIPRI के अनुसार चीन के पास लगभग 620 वारहेड्स हैं। वहीं क्षेत्रीय स्तर पर पाकिस्तान के पास करीब 170 वारहेड्स बताए जाते हैं। ‘नो फर्स्ट यूज’ नीति पर कायम भारतभारत अपनी परमाणु नीति के तहत ‘नो फर्स्ट यूज’ (पहले उपयोग न करने) और न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध की रणनीति पर कायम है। हालांकि बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए देश अपनी दूसरी प्रहार क्षमता, गतिशीलता और जीवित रहने की क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। आधुनिक तकनीकों पर फोकसभारत की परमाणु आधुनिकीकरण प्रक्रिया में MIRV तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस तकनीक के जरिए एक मिसाइल से कई लक्ष्यों पर अलग-अलग वारहेड दागे जा सकते हैं। इसके अलावा कैनिस्टराइज्ड मिसाइल सिस्टम लॉन्च प्रक्रिया को तेज और अधिक सुरक्षित बनाते हैं। अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें, विशेषकर अग्नि-V और अग्नि-P, लंबी दूरी और अधिक सटीक हमले की क्षमता प्रदान करती हैं। समुद्री ताकत से मजबूत हो रही त्रिमूर्तिभारत की परमाणु त्रिमूर्ति भूमि, वायु और समुद्र आधारित क्षमता को मजबूत करने में समुद्री शक्ति अहम भूमिका निभा रही है। INS अरिहंत जैसी परमाणु पनडुब्बियां K-15, K-4 और भविष्य में K-5 मिसाइलों से लैस हैं, जो देश की ‘सेकंड स्ट्राइक’ क्षमता को सुनिश्चित करती हैं। SIPRI के अनुसार भारत शांतिकाल में भी कुछ परमाणु हथियारों को पनडुब्बियों पर तैनात करने की क्षमता विकसित कर रहा है। वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती चिंतारिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर परमाणु पारदर्शिता घट रही है और अप्रसार संधि (NPT) से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। हाल के वर्षों में क्षेत्रीय तनाव और संघर्षों ने परमाणु निरोध की जटिलताओं को और स्पष्ट किया है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत की बढ़ती परमाणु क्षमता बदलते भू-राजनीतिक माहौल, चीन की बढ़ती ताकत और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का सीधा जवाब है।
पेट्रोल-डीजल के दामों में बड़ी गिरावट के संकेत! जुलाई के बाद कच्चे तेल में आ सकती है तेज नरमी

नई दिल्ली। पिछले करीब 100 दिनों से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बाधा के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 से 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इससे तेल बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसी बीच ग्लोबल रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने कच्चे तेल की कीमतों को लेकर नया अनुमान जारी किया है, जिसमें आने वाले महीनों में कीमतों में बदलाव के संकेत दिए गए हैं। फिच का अनुमान क्या कहता है?फिच के मुताबिक वर्ष 2026 में ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत लगभग 87 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। एजेंसी का अनुमान है कि मई से जुलाई के बीच कच्चा तेल 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में बना रह सकता है। हालांकि जुलाई के बाद कीमतों में गिरावट की संभावना जताई गई है। अनुमान के अनुसार अगस्त से कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकता है, जबकि सितंबर के बाद यह स्तर 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है। होर्मुज स्ट्रेट खुलने पर क्या होगा असर?फिच के अनुसार यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में स्थिति सामान्य होती है और समुद्री मार्ग दोबारा खुलता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसे में अगस्त और सितंबर से वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ने और कीमतों में नरमी आने की संभावना है। आपूर्ति और मांग का संतुलन बनेगा अहम कारणरेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा कीमतों में तेजी उत्पादन में कमी के कारण नहीं, बल्कि सप्लाई बाधित होने की वजह से आई है। तेल भंडार और उत्पादन क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है, जिससे ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है।रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मौजूदा कीमतों में तेजी उत्पादन में कमी के कारण नहीं, बल्कि सप्लाई बाधित होने की वजह से आई है। तेल भंडार और उत्पादन क्षमता को स्थायी नुकसान नहीं हुआ है। साथ ही यह भी अनुमान लगाया गया है कि ओपेक और ओपेक प्लस देशों द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद बाजार में तेल की उपलब्धता और बढ़ सकती है, जिससे ओवरसप्लाई की स्थिति बन सकती है। होर्मुज बना सबसे बड़ा कारकस्ट्रेट ऑफ होर्मुज वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन होता है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब पांचवां हिस्सा है। मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग पर बाधा बनी हुई है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति सामान्य होती है तो आने वाले महीनों में वैश्विक तेल बाजार में स्थिरता लौट सकती है और 2026 के अंत तक कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है।
एक फिल्म, 9 किरदार और चौंकाने वाली भविष्यवाणी! बॉलीवुड स्टार की कहानी है बेहद दिलचस्प

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं जिन्होंने अपनी प्रतिभा से अभिनय की परिभाषा बदल दी। उनमें से एक नाम है Sanjeev Kumar। संजीव कुमार सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि वे अभिनय की ऐसी पाठशाला थे, जिनके किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जीवित हैं। चाहे फिल्म ‘शोले’ में ठाकुर बलदेव सिंह का किरदार हो या फिर गंभीर और भावनात्मक भूमिकाएं, उन्होंने हर बार अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया। बॉलीवुड में डबल और ट्रिपल रोल निभाने वाले कलाकारों की लंबी सूची रही है। कई सितारों ने एक ही फिल्म में दो या तीन किरदार निभाकर दर्शकों का मनोरंजन किया है। लेकिन संजीव कुमार ने वह कर दिखाया जो उनके दौर में किसी अन्य अभिनेता ने नहीं किया था। वर्ष 1974 में रिलीज हुई Naya Din Nai Raat में उन्होंने पूरे नौ अलग-अलग किरदार निभाए और अभिनय की नई मिसाल कायम कर दी। इस फिल्म में उनके साथ Jaya Bhaduri मुख्य भूमिका में थीं। फिल्म की कहानी एक युवती सुषमा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी से बचने के लिए घर छोड़ देती है। इसके बाद उसकी जिंदगी में अलग-अलग तरह के लोगों का सामना होता है। इन सभी किरदारों को संजीव कुमार ने निभाया था। खास बात यह थी कि उनके नौ किरदार जीवन के नौ रसों का प्रतीक माने गए थे। फिल्म में संजीव कुमार कभी डॉक्टर के रूप में नजर आए, तो कभी डाकू, साधु, पंडित और अन्य विविध व्यक्तित्वों के रूप में दिखाई दिए। हर किरदार का हावभाव, बोलने का अंदाज, शारीरिक भाषा और व्यक्तित्व अलग था। यही वजह थी कि दर्शकों को ऐसा महसूस ही नहीं हुआ कि पर्दे पर एक ही अभिनेता कई भूमिकाएं निभा रहा है। उनके अभिनय की यही ताकत उन्हें अपने समय के सबसे सम्मानित कलाकारों में शामिल करती है। फिल्म का निर्देशन ए. भीमसिंह ने किया था। यह दक्षिण भारतीय अभिनेता Sivaji Ganesan की तमिल फिल्म Navarathri का हिंदी रीमेक थी। हालांकि हिंदी संस्करण में संजीव कुमार ने अपनी अदाकारी से किरदारों को नई पहचान दी और फिल्म को यादगार बना दिया। संजीव कुमार का जीवन भी उतना ही चर्चित रहा जितना उनका करियर। उनके बारे में अक्सर यह कहा जाता है कि उन्होंने अपनी कम उम्र में मृत्यु की आशंका जताई थी। हालांकि इस तरह की बातें वर्षों से चर्चा का विषय रही हैं, लेकिन उनकी असली पहचान उनकी अद्भुत अभिनय क्षमता और सिनेमा को दिए गए अमूल्य योगदान से है। आज भी जब हिंदी सिनेमा के महानतम अभिनेताओं की बात होती है, तो संजीव कुमार का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। एक ही फिल्म में नौ किरदार निभाने का उनका रिकॉर्ड भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।
राम चरण की तारीफ में बोले जगपति बाबू, कहा- वह किसी सुपरमैन से कम नहीं

नई दिल्ली । साउथ सिनेमा के सुपरस्टार Ram Charan की फिल्म Peddi इन दिनों बॉक्स ऑफिस के साथ-साथ विवादों के कारण भी चर्चा में बनी हुई है। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक ओर इसके कुछ दृश्यों और प्रस्तुति को लेकर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी ओर फिल्म की टीम इसे बड़ी सफलता बता रही है। इसी बीच फिल्म में अप्पलसूरी का अहम किरदार निभाने वाले Jagapathi Babu ने ऐसा बयान दिया है, जिसने फिल्म को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। हैदराबाद में आयोजित फिल्म के सक्सेस इवेंट के दौरान जगपति बाबू ने कहा कि *पेद्दी* की सफलता केवल कमाई के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी फिल्म है जिसे रिलीज के बाद भी अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उनके मुताबिक, फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई और आलोचनाओं का सामना करते हुए आगे बढ़ी। जगपति बाबू ने कहा कि किसी भी फिल्म का भविष्य अंततः दर्शकों के हाथ में होता है। एक आम दर्शक जो टिकट खरीदकर सिनेमाघर पहुंचता है, वही तय करता है कि फिल्म सफल होगी या नहीं। उन्होंने माना कि इस तरह की कहानी पर फिल्म बनाना और उसमें राम चरण जैसे बड़े सितारे को शामिल करना आसान नहीं था। लेकिन पूरी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया और फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाया। अपने संबोधन में अभिनेता ने राम चरण की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि फिल्म में राम चरण सिर्फ एक अभिनेता की तरह नहीं दिखे, बल्कि उन्होंने अपने किरदार को जिस तरह निभाया, उससे वह किसी सुपरहीरो जैसे नजर आए। जगपति बाबू के अनुसार, राम चरण ने फिल्म की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाई और हर चुनौती का सामना किया। सबसे ज्यादा चर्चा उनके उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने फिल्म के आलोचकों और नकारात्मक रिव्यू देने वालों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने फिल्म के खिलाफ खराब समीक्षाएं लिखीं, उन्होंने भी अनजाने में फिल्म की मदद की। उनके अनुसार, नकारात्मक चर्चाओं ने भी दर्शकों की जिज्ञासा बढ़ाई और लोगों को सिनेमाघरों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। फिल्म की कमाई की बात करें तो शुरुआती दिनों में *पेद्दी* ने दुनिया भर में शानदार कारोबार किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने पहले चार दिनों में 250 करोड़ रुपये से अधिक का वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन हासिल किया। हालांकि तेलुगू बाजार में फिल्म को बेहतर प्रतिक्रिया मिली है, जबकि हिंदी बेल्ट में इसका प्रदर्शन अपेक्षाकृत धीमा बताया जा रहा है। फिलहाल फिल्म को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। बॉक्स ऑफिस पर इसके आगे के प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि *पेद्दी* अपने लाइफटाइम कलेक्शन में कितना बड़ा मुकाम हासिल कर पाती है और क्या यह वर्ष की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हो सकेगी।
तिलक वर्मा की कप्तानी और वैभव का विस्फोटक अंदाज, मुकाबला होगा रोमांचक

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट में इन दिनों जिस युवा खिलाड़ी की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह नाम है वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में आईपीएल 2026 में अपने विस्फोटक प्रदर्शन से क्रिकेट जगत को चौंकाने वाले वैभव अब एक नई परीक्षा के लिए तैयार हैं। श्रीलंका में आयोजित त्रिकोणीय सीरीज में इंडिया-ए की ओर से खेलते हुए उन्हें यह साबित करना होगा कि वे सिर्फ टी20 क्रिकेट के स्टार नहीं, बल्कि लंबे प्रारूप में भी टीम के भरोसेमंद बल्लेबाज बन सकते हैं। दांबुला के रणगिरि दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में इंडिया-ए का पहला मुकाबला श्रीलंका-ए से होना है। इस मैच पर क्रिकेट प्रेमियों की खास नजर होगी क्योंकि पहली बार वैभव सूर्यवंशी 50 ओवर के प्रारूप में इतनी बड़ी जिम्मेदारी के साथ मैदान पर उतरेंगे। आईपीएल में उनके बल्ले ने जिस तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई थीं, उसी प्रदर्शन की उम्मीद अब इंडिया-ए के समर्थक भी कर रहे हैं। वैभव के लिए यह सीरीज सिर्फ रन बनाने का मंच नहीं, बल्कि अपने क्रिकेटिंग व्यक्तित्व को साबित करने का अवसर भी है। टी20 क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी करना और सीमित गेंदों में तेजी से रन जुटाना अलग बात है, लेकिन वनडे प्रारूप में धैर्य, तकनीक और परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। श्रीलंका की पिचें आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों की मददगार मानी जाती हैं, जहां बल्लेबाजों को हर रन के लिए संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में वैभव की तकनीकी क्षमता और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा होगी। चयनकर्ताओं की नजर भी इस युवा बल्लेबाज पर टिकी हुई है। आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के साथ एशियाई खेलों के लिए भारतीय टी20 टीम में जगह बना चुके वैभव यदि इस सीरीज में भी सफल रहते हैं, तो उनके लिए भारतीय क्रिकेट के दरवाजे और तेजी से खुल सकते हैं। शानदार प्रदर्शन उन्हें भविष्य के तीनों प्रारूपों के खिलाड़ी के रूप में स्थापित कर सकता है। हालांकि टीम की जिम्मेदारी सिर्फ वैभव पर नहीं होगी। कप्तान तिलक वर्मा के सामने भी अपनी नेतृत्व क्षमता और बल्लेबाजी कौशल साबित करने की चुनौती होगी। अनुभवी ऋतुराज गायकवाड़, प्रभसिमरन सिंह, आयुष बदोनी और अनुकूल रॉय जैसे खिलाड़ी टीम को मजबूती प्रदान करेंगे। वहीं गेंदबाजी विभाग में अंशुल कम्बोज, यश ठाकुर और अरशद खान विपक्षी बल्लेबाजों के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह त्रिकोणीय सीरीज भारतीय क्रिकेट के कई उभरते सितारों के लिए बड़ा मंच साबित हो सकती है। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा वैभव सूर्यवंशी को लेकर है। यदि उनका बल्ला श्रीलंका की धरती पर भी आईपीएल जैसा कहर बरपाता है, तो भारतीय क्रिकेट को एक और बड़ा सितारा मिल सकता है। अब सभी की निगाहें दांबुला के मैदान पर टिकी हैं, जहां युवा प्रतिभा अपने करियर का नया अध्याय लिखने उतरने वाली है।
जब रिकॉर्डिंग स्टूडियो में लेट गए थे किशोर कुमार, और बन गया सदाबहार सुपरहिट गाना

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कई ऐसे किस्से दर्ज हैं, जो कलाकारों की प्रतिभा और उनके जुनून को नई पहचान देते हैं। ऐसा ही एक दिलचस्प किस्सा महान गायक किशोर कुमार और फिल्म ‘शराबी’ के मशहूर गीत ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ से जुड़ा हुआ है। यह गीत आज भी संगीत प्रेमियों की पसंदीदा सूची में शामिल है, लेकिन इसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। साल 1984 में निर्देशक प्रकाश मेहरा अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘शराबी’ का निर्माण कर रहे थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में थे और उनके किरदार की भावनाओं को दर्शाने के लिए गीतकार अंजान ने एक बेहतरीन गीत लिखा था। संगीतकार बप्पी लहरी ने इस गीत को मधुर धुन से सजाया। अब जरूरत थी ऐसी आवाज की, जो इस गीत की आत्मा को जीवंत कर सके, और इसके लिए चुना गया नाम था किशोर कुमार। जब किशोर कुमार के सामने यह गीत रिकॉर्डिंग के लिए रखा गया, तो उन्होंने शुरुआत में इसे गाने से इनकार कर दिया। रिकॉर्डिंग स्टूडियो में मौजूद लोग हैरान रह गए। कुछ देर बाद उन्होंने गीत की स्थिति और उसके भाव को गहराई से समझा। उन्हें बताया गया कि पर्दे पर अमिताभ बच्चन एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभा रहे हैं, जो शराब के नशे में है और अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहा है। यहीं से किशोर कुमार की रचनात्मकता सामने आई। उन्होंने कहा कि यदि इस गीत में एक शराबी का वास्तविक एहसास पैदा करना है, तो वह इसे सामान्य तरीके से खड़े होकर नहीं गाएंगे। उनकी शर्त थी कि रिकॉर्डिंग के दौरान उन्हें लेटने दिया जाए ताकि वे उस मानसिक और शारीरिक स्थिति को महसूस कर सकें, जिसमें फिल्म का पात्र दिखाई देगा। स्टूडियो में मौजूद सभी लोग उनकी यह बात सुनकर चौंक गए। हालांकि, किशोर कुमार अपनी बात पर अड़े रहे। आखिरकार उनकी इच्छा पूरी करने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में एक बड़ी टेबल मंगवाई गई। किशोर कुमार उस पर लेट गए, माइक को उसी हिसाब से सेट किया गया और फिर रिकॉर्डिंग शुरू हुई। इसके बाद जो हुआ, वह इतिहास बन गया। आशा भोसले के साथ किशोर कुमार ने ‘इंतहा हो गई इंतजार की’ को अपनी आवाज दी और गीत में ऐसा जादू भर दिया कि वह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले भी किशोर कुमार के इस अनोखे अंदाज को देखकर हैरान रह गई थीं। यह गीत न केवल फिल्म ‘शराबी’ की पहचान बना, बल्कि हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय युगल गीतों में भी शामिल हो गया। दशकों बाद भी जब यह गाना बजता है, तो श्रोता उसी उत्साह और भावनाओं के साथ इसे सुनते हैं। किशोर कुमार की यही विशेषता थी कि वह केवल गीत नहीं गाते थे, बल्कि उसे जीते थे। शायद यही कारण है कि उनकी आवाज और उनके गाए गीत आज भी करोड़ों दिलों में जीवित हैं।