भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। यह भुगतान बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और देश की बैंकिंग प्रणाली में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने यह डिविडेंड चेक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा। इस संबंध में जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह लाभांश केंद्र सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। डिविडेंड का यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब बैंकिंग क्षेत्र लगातार डिजिटल बदलाव, क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के चलते मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। एसबीआई की यह उपलब्धि न केवल बैंक की वित्तीय स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक मजबूती में अहम योगदान दे रहे हैं। एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक होने के साथ-साथ सरकार की वित्तीय नीतियों और आर्थिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। बैंक की ओर से दिया गया यह डिविडेंड केंद्र सरकार के बजट प्रबंधन और राजस्व संतुलन में सहायक माना जाता है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के नेतृत्व में एसबीआई ने हाल के वर्षों में कई क्षेत्रों में सुधार और विस्तार किया है। बैंकिंग सेवाओं का डिजिटलीकरण, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कर्ज वितरण को मजबूत करना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सी. एस. शेट्टी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को संतुलित बताते हुए कहा था कि ब्याज दरों में स्थिरता आर्थिक विकास को समर्थन देने में मदद करती है। उन्होंने यह भी कहा था कि निवेशकों को केवल अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, बैंकिंग सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की आर्थिक प्रगति के मुख्य स्तंभ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एसबीआई का यह डिविडेंड भुगतान बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता का संकेत है। यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी खजाने को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहे हैं। वित्तीय वर्ष के इस प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भी बैंक अपनी वृद्धि की गति बनाए रखेगा और देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देता रहेगा।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग से लेकर चुनाव प्रक्रिया तक, INDIA गठबंधन की बैठक में पांच अहम प्रस्तावों पर सहमति

नई दिल्ली । विपक्षी गठबंधन INDIA alliance की 7वीं महत्वपूर्ण बैठक सोमवार को दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें देश की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावों के बाद की रणनीति पर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में शामिल दलों ने कई मुद्दों पर एकजुट रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बताया कि गठबंधन में शामिल 25 राजनीतिक दलों ने पांच प्रमुख प्रस्तावों पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इन प्रस्तावों का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की रक्षा करना, चुनावी प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाना और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देना है। बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णयों में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने पर सहमति शामिल है। गठबंधन का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मामलों पर गंभीर चिंता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के संज्ञान में लाया जाएगा। इसके साथ ही NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग को भी बैठक में समर्थन मिला। गठबंधन नेताओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि इस स्थिति की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और उच्च स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसी कारण शिक्षा मंत्रालय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग को एजेंडे में शामिल किया गया। बैठक में आर्थिक स्थिति पर भी चर्चा हुई और सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखी गई। विपक्षी दलों ने कहा कि महंगाई, रोजगार और निवेश की धीमी रफ्तार देश की आर्थिक चुनौतियों को बढ़ा रही है। इसके साथ ही छोटे और मध्यम उद्योगों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। गठबंधन ने यह भी निर्णय लिया कि अब से हर दो महीने में नियमित रूप से बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि राजनीतिक रणनीति और साझा मुद्दों पर लगातार समन्वय बना रहे। अगली बैठक हैदराबाद में निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। बैठक में यह भी कहा गया कि संसद के भीतर विपक्षी दलों के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सरकार से जुड़े मुद्दों पर एक संयुक्त और प्रभावी आवाज उठाई जा सके। नेताओं ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है। इस बैठक में कई प्रमुख क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दल शामिल हुए, जबकि कुछ दलों ने वर्चुअल रूप से भाग लिया। हालांकि कुछ राजनीतिक दलों की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही, लेकिन कुल मिलाकर बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। गठबंधन ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाना है। बैठक के अंत में यह संदेश भी दिया गया कि आने वाले समय में विपक्षी एकता और समन्वय को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच तैयार किया जा सके।
सूर्य की सतह पर सक्रिय ‘4461 रीजन’ से निकला शक्तिशाली विस्फोट, धरती के चुंबकीय क्षेत्र पर खतरा, अंतरिक्ष एजेंसियों ने बढ़ाई निगरानी

नई दिल्ली । सूर्य की सतह पर हाल ही में हुए शक्तिशाली सौर विस्फोट के बाद धरती की ओर तेजी से एक मैग्नेटिक महातूफान बढ़ने की स्थिति बन गई है। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस सौर गतिविधि को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि इसका प्रभाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र पर पड़ सकता है। इस घटना के कारण अंतरिक्ष मौसम में अस्थिरता देखी जा रही है और कई क्षेत्रों में इसका असर महसूस होने की संभावना जताई गई है। वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य के सक्रिय क्षेत्र 4461 में 6 जून 2026 की सुबह एक तेज सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया, जिसे M1.8 श्रेणी में रखा गया है। इस विस्फोट के साथ एक भारी और अत्यधिक चुंबकीय फिलामेंट भी अंतरिक्ष में निकला, जो लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की तेज रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। यह स्थिति वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण इसलिए भी मानी जा रही है क्योंकि इस तरह के फिलामेंट सीधे तौर पर पृथ्वी के अंतरिक्ष वातावरण को प्रभावित कर सकते हैं। नासा और स्पेस वेदर प्रेडिक्शन सेंटर ने इसे G3 श्रेणी का भू-चुंबकीय तूफान यानी जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म घोषित किया है। विशेषज्ञों के मुताबिक जब सौर कण पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड से टकराते हैं, तो इससे अंतरिक्ष मौसम में बदलाव आता है, जिसका असर संचार प्रणालियों, उपग्रहों और बिजली नेटवर्क पर भी पड़ सकता है। हालांकि इसे एक प्राकृतिक खगोलीय घटना माना जाता है, लेकिन इसकी तीव्रता अधिक होने पर तकनीकी सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि सूर्य के जिस क्षेत्र से यह विस्फोट हुआ है, वहां चुंबकीय रेखाएं असामान्य रूप से मुड़ी हुई थीं, जिससे अत्यधिक ऊर्जा एकत्रित हो गई। जब यह ऊर्जा अचानक रिलीज हुई, तो तेज एक्स-रे विकिरण भी उत्पन्न हुआ, जिसने कुछ समय के लिए रेडियो संचार में व्यवधान पैदा किया। यह प्रक्रिया सौर गतिविधियों के सामान्य चक्र का हिस्सा होती है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता अधिक देखी गई है। अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों के अनुसार फिलामेंट सूर्य के कोरोना क्षेत्र में मौजूद ठंडी और घनी प्लाज्मा संरचना होती है। जब इसे थामे रखने वाला चुंबकीय संतुलन बिगड़ता है, तो यह अंतरिक्ष में तेजी से फैल जाता है। यही प्रक्रिया इस बार के सौर विस्फोट में देखी गई है, जिसे वैज्ञानिक बेहद महत्वपूर्ण घटना मान रहे हैं। इस सौर गतिविधि का एक सकारात्मक प्रभाव भी हो सकता है, जिसमें पृथ्वी के ध्रुवीय और कुछ उच्च अक्षांश क्षेत्रों में ऑरोरा यानी उत्तरी रोशनी का शानदार दृश्य दिखाई दे सकता है। यह दृश्य हरे, बैंगनी और लाल रंग की चमकदार रोशनी के रूप में आसमान में नजर आता है। आमतौर पर यह नजारा उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्रों में दिखता है, लेकिन G3 या उससे अधिक तीव्रता के तूफानों में यह निचले अक्षांश क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। यदि मौसम और आकाशीय स्थितियां अनुकूल रहीं, तो उत्तरी भारत के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों जैसे हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड के हिस्सों में भी इस दुर्लभ खगोलीय दृश्य के दिखने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह अंतरिक्ष मौसम की स्थिति और तूफान की तीव्रता पर निर्भर करेगा। अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इस सौर तूफान की निगरानी कर रही हैं और उपग्रहों के माध्यम से इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन अगले कुछ दिनों में इसके प्रभाव स्पष्ट रूप से सामने आ सकते हैं।
विजय सरकार की योजनाओं पर सवालों के बाद कार्रवाई, चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर को हिरासत में लिया

नई दिल्ली । तमिलनाडु में राजनीतिक और डिजिटल अभिव्यक्ति से जुड़ा मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जहां सरकार की नीतियों और योजनाओं पर सवाल उठाने के आरोप में एक यूट्यूबर को हिरासत में लिया गया है। चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस ने यूट्यूबर मारिदास को उनके मदुरई स्थित आवास से हिरासत में लिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर मुख्यमंत्री विजय और राज्य सरकार की योजनाओं के खिलाफ लगातार मानहानिकारक टिप्पणियां कीं। सूत्रों के अनुसार, यूट्यूबर मारिदास लंबे समय से सोशल मीडिया पर सक्रिय थे और सरकार की नई योजनाओं तथा घोषणाओं को लेकर लगातार आलोचनात्मक पोस्ट कर रहे थे। वे अक्सर आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर यह सवाल उठाते थे कि क्या सरकार द्वारा घोषित योजनाएं वास्तविक रूप से लागू हो पाएंगी या नहीं। उनकी टिप्पणियों को लेकर समर्थन और विरोध दोनों ही तरह की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर देखने को मिल रही थीं। मामले में तब गंभीर मोड़ आया जब उनके खिलाफ चेन्नई साइबर क्राइम पुलिस के पास एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि यूट्यूबर द्वारा प्रसारित की गई जानकारी झूठी और भ्रामक है, जिसका उद्देश्य सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाना है। शिकायत के बाद साइबर क्राइम विंग ने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू की और तथ्यों का मूल्यांकन किया। जांच के आधार पर सोमवार को एक विशेष पुलिस टीम मदुरई पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से यूट्यूबर को उनके घर से हिरासत में ले लिया गया। उन्हें आगे की पूछताछ के लिए चेन्नई ले जाया जा रहा है, जहां उनसे आरोपों को लेकर विस्तृत सवाल-जवाब किए जाएंगे। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई साइबर क्राइम विंग द्वारा दर्ज एक मामले के तहत की गई है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यह तय किया जा रहा है कि किन धाराओं के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर फैलने वाली जानकारी की सत्यता की जांच जरूरी है, खासकर तब जब वह किसी सार्वजनिक व्यक्ति या सरकार की प्रतिष्ठा से जुड़ी हो। वहीं, यूट्यूबर मारिदास पहले भी अपने राजनीतिक बयानों और आलोचनात्मक टिप्पणियों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। उनके बड़े फॉलोअर्स बेस के कारण उनके पोस्ट अक्सर चर्चा में आते रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना की सीमाओं को लेकर बहस तेज हो गई है। फिलहाल पुलिस हिरासत और जांच प्रक्रिया जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और स्पष्टता आने की संभावना है।
ईरान-इजरायल संघर्ष पर डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, दोनों देशों से तुरंत गोलीबारी रोकने की अपील, तनाव और बढ़ा

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। दोनों देशों के बीच मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई के बाद हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए दोनों देशों से तत्काल गोलीबारी रोकने की अपील की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान और इजरायल को तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकनी चाहिए और तनाव को और बढ़ने से रोकना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र में जारी संघर्ष वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है, इसलिए तत्काल युद्धविराम आवश्यक है। ईरान और इजरायल के बीच हालिया संघर्ष की शुरुआत तब हुई जब क्षेत्रीय तनाव के बीच दोनों देशों ने एक-दूसरे पर मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलों के दौरान कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। हमलों के बाद कई क्षेत्रों में हवाई क्षेत्र भी अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने भी हमलों की पुष्टि की और इसे जवाबी कार्रवाई बताया। वहीं इजरायल की ओर से भी सैन्य प्रतिक्रिया जारी रही, जिसमें कई क्षेत्रों में तेज हमले किए गए। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। इजरायल ने अपनी कार्रवाई को आत्मरक्षा का हिस्सा बताते हुए कहा कि उसने लक्षित सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। वहीं ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर हमला करार दिया है और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य पूर्व क्षेत्र में व्यापक अस्थिरता की स्थिति पैदा कर दी है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि संघर्ष के विस्तार की आशंका से वैश्विक बाजार और कूटनीतिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की अपील की है। ट्रंप की ओर से आया बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्र में हिंसा लगातार बढ़ रही है और किसी भी प्रकार की मध्यस्थता की कोशिशें अब तक सीमित सफलता ही हासिल कर पाई हैं। उनकी अपील को अमेरिका की संभावित भविष्य की विदेश नीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ेगा। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में क्या दोनों पक्ष बातचीत की दिशा में आगे बढ़ते हैं या तनाव और बढ़ता है।
चीन ने एलन मस्क की Neuralink को दी सीधी चुनौती, ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस चिप को मिली कमर्शियल मंजूरी

नई दिल्ली । वैश्विक टेक्नोलॉजी की दुनिया में ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में चीन ने बड़ा कदम उठाते हुए अपनी विकसित ब्रेन चिप तकनीक को कमर्शियल मंजूरी दे दी है। इस फैसले को सीधे तौर पर Elon Musk की कंपनी Neuralink को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से मानव मस्तिष्क और कंप्यूटर को जोड़ने वाली तकनीक पर काम कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार चीन ने जिस ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस सिस्टम को मंजूरी दी है, वह शुरुआती चरण में चिकित्सा और न्यूरोलॉजिकल रोगों के इलाज में उपयोग किया जाएगा। इस तकनीक का उद्देश्य मानव मस्तिष्क से सीधे डिजिटल उपकरणों को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करना है। इसे न्यूरोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे भविष्य में लकवाग्रस्त मरीजों, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और अन्य गंभीर स्थितियों के इलाज में नई संभावनाएं खुल सकती हैं। चीन का यह कदम ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर BCI तकनीक को लेकर होड़ तेज हो गई है। एक ओर Neuralink लगातार अपने ब्रेन चिप इम्प्लांट्स के क्लिनिकल ट्रायल्स को आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर चीन की सरकारी और निजी टेक कंपनियां भी इस क्षेत्र में तेजी से निवेश कर रही हैं। कमर्शियल मंजूरी मिलने के बाद अब चीन की यह तकनीक नियंत्रित बाजार में उपयोग के लिए उपलब्ध हो सकेगी, जिससे इसके व्यावसायिक विस्तार की संभावनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीकी प्रतिस्पर्धा आने वाले वर्षों में डिजिटल और मेडिकल दोनों क्षेत्रों को गहराई से प्रभावित करेगी। BCI सिस्टम के जरिए मानव सोच और मशीनों के बीच सीधा संपर्क स्थापित किया जा सकता है, जो भविष्य की तकनीक का आधार बन सकता है। हालांकि इसके साथ ही डेटा सुरक्षा, मानव मस्तिष्क की गोपनीयता और नैतिक उपयोग जैसे गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। चीन ने इस तकनीक को पहले चरण में मेडिकल उपयोग तक सीमित रखा है, लेकिन संकेत यह भी हैं कि आने वाले समय में इसका विस्तार शिक्षा, रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों तक किया जा सकता है। इससे न केवल तकनीकी क्षमता बढ़ेगी बल्कि वैश्विक बाजार में चीन की स्थिति भी मजबूत होगी। दूसरी ओर Neuralink पहले ही मानव परीक्षणों के चरण में पहुंच चुकी है और कंपनी का लक्ष्य मस्तिष्क से कंप्यूटर को नियंत्रित करने की पूर्ण क्षमता विकसित करना है। ऐसे में चीन की इस नई मंजूरी से दोनों तकनीकी दिग्गजों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल दो कंपनियों या देशों की तकनीकी दौड़ नहीं है, बल्कि यह मानव सभ्यता के भविष्य से जुड़ा एक बड़ा बदलाव है। जैसे-जैसे यह तकनीक आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे समाज, कानून और नैतिकता के नए ढांचे की आवश्यकता भी बढ़ेगी। कुल मिलाकर, चीन की ब्रेन चिप को मिली कमर्शियल मंजूरी ने वैश्विक टेक्नोलॉजी बाजार में एक नई बहस और प्रतिस्पर्धा को जन्म दे दिया है, जहां भविष्य की दिशा काफी हद तक इस तकनीक की सफलता और स्वीकार्यता पर निर्भर करेगी।
केरल से शुरू हुआ ट्रेंड, तमिलनाडु-महाराष्ट्र तक फैला AI मंत्रालय का मॉडल, क्या बदल जाएगा भारत में?

नई दिल्ली । भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर सरकारी स्तर पर एक नया मॉडल उभरता दिखाई दे रहा है, जहां कुछ राज्य इसे केवल तकनीकी क्षेत्र नहीं बल्कि आर्थिक विकास और प्रशासनिक भविष्य की रणनीति का प्रमुख हिस्सा मानते हुए अलग जिम्मेदारी या मंत्री स्तर पर ढांचा तैयार कर रहे हैं। इस बदलाव ने नीति निर्माण के स्तर पर तकनीक की भूमिका को और अधिक केंद्रीय बना दिया है। इस पहल की शुरुआत केरल से मानी जा रही है, जहां कैबिनेट स्तर पर AI से जुड़ी जिम्मेदारियों को अलग पहचान दी गई। राज्य सरकार ने वरिष्ठ नेता को उद्योग, आईटी और AI समेत कई तकनीकी विभागों का प्रभार सौंपा है। इस निर्णय को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि AI अब केवल तकनीकी नवाचार का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक और प्रशासनिक विकास की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। केरल के बाद तमिलनाडु ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाया है और AI, आईटी तथा डिजिटल सेवाओं के लिए अलग जिम्मेदारी तय की गई है। राज्य में AI आधारित प्रशासन, कौशल विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में AI के उपयोग को विस्तार देने की भी योजना है, जिससे सेवाओं की दक्षता और गुणवत्ता बढ़ाई जा सके। तमिलनाडु सरकार ने पहले ही अपने विजन डॉक्यूमेंट में AI आधारित विश्वविद्यालय और तकनीकी शहर विकसित करने की बात कही थी, जिसे अब धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि राज्य AI को दीर्घकालिक विकास मॉडल के रूप में देख रहा है और इसके लिए संस्थागत ढांचा तैयार किया जा रहा है। वहीं कर्नाटक ने इस मॉडल से अलग दृष्टिकोण अपनाया है। राज्य का मानना है कि AI के लिए अलग मंत्रालय बनाने की बजाय तकनीक-आधारित एकीकृत ढांचा अधिक व्यावहारिक है। वहां पहले से ही AI-ML सेल और जिम्मेदार AI समिति जैसे संस्थागत ढांचे सक्रिय हैं, जो तकनीकी विकास और उसके नैतिक उपयोग पर निगरानी रखते हैं। कर्नाटक का जोर इस बात पर है कि तकनीक लगातार बदलती रहती है, इसलिए प्रशासनिक ढांचे को भी लचीला होना चाहिए। महाराष्ट्र ने भी AI को लेकर व्यापक नीति और विभागीय विस्तार की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। राज्य में इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और AI विभाग को एक साथ जोड़कर नई संरचना तैयार की जा रही है। इसके तहत AI इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार सृजन और कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राज्य में AI नवाचार शहर और उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना भी शामिल है, जिससे स्टार्टअप और शोध को बढ़ावा मिल सके। विशेषज्ञों के बीच इस बात पर मतभेद है कि क्या AI के लिए अलग मंत्री या मंत्रालय वास्तव में आवश्यक है या यह केवल प्रतीकात्मक कदम है। कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल संरचना बनाने से बदलाव नहीं आता, इसके लिए बजट, शोध और स्पष्ट नीतियों की जरूरत होती है। वहीं कुछ का मानना है कि तकनीक की जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञ नेतृत्व जरूरी है ताकि सही दिशा में नीति निर्माण हो सके। राष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार AI को लेकर कई योजनाओं पर काम कर रही है और इसे डिजिटल भविष्य का अहम हिस्सा मान रही है। साथ ही वैश्विक स्तर पर भी कई देश पहले से ही AI प्रशासन के लिए विशेष पद और संस्थाएं बना चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि आने वाले समय में AI शासन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने जा रहा है।
नया साइबर स्कैम: BSNL यूजर्स को KYC सस्पेंड का डर दिखाकर ठगने की कोशिश, PIB ने नोटिस को बताया पूरी तरह फर्जी

नई दिल्ली । देशभर में BSNL उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर एक नया साइबर फ्रॉड सामने आया है, जिसमें KYC अपडेट के नाम पर फर्जी नोटिस भेजकर लोगों को डराने की कोशिश की जा रही है। इस नोटिस में दावा किया जा रहा है कि यूजर की सिम KYC सस्पेंड कर दी गई है और अगले 24 घंटे में सिम ब्लॉक हो सकती है। इसमें BSNL और टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के लोगो का भी इस्तेमाल किया गया है, ताकि इसे असली दिखाया जा सके। सरकारी एजेंसियों की फैक्ट चेक यूनिट ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट किया है कि यह नोटिस पूरी तरह फर्जी है और BSNL की ओर से ऐसा कोई संदेश जारी नहीं किया जाता है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान संदेश, ईमेल या कॉल पर भरोसा न करें और न ही उसमें दिए गए नंबर या लिंक पर संपर्क करें। यह फर्जी नोटिस इस तरह तैयार किया गया है कि इसमें उपभोक्ता को तुरंत कार्रवाई करने के लिए मजबूर किया जाए। इसमें लिखा होता है कि KYC न होने पर सिम सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। साइबर ठग इसी डर का फायदा उठाकर लोगों को कॉल करने या लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति दिए गए संपर्क माध्यम से जुड़ता है, उससे बैंक डिटेल्स, OTP और अन्य संवेदनशील जानकारी मांग ली जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के स्कैम में सबसे बड़ा हथियार डर और जल्दबाजी होता है। ठग समय सीमा का दबाव बनाकर यूजर को सोचने का मौका नहीं देते। कई मामलों में लोग बिना जांच किए जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे उनके बैंक खातों से रकम चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है। PIB फैक्ट चेक ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि BSNL या किसी भी सरकारी दूरसंचार संस्था द्वारा इस तरह के KYC सस्पेंशन नोटिस नहीं भेजे जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में उपयोगकर्ताओं को अपनी निजी जानकारी, बैंक डिटेल या OTP किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेजी आई है और इसमें टेलीकॉम कंपनियों के नाम का दुरुपयोग आम हो गया है। ऐसे में उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही जानकारी की पुष्टि करने की सलाह दी जा रही है। सरकारी एजेंसियों ने यह भी कहा है कि यदि किसी उपभोक्ता को ऐसा कोई संदेश मिलता है तो उसे तुरंत रिपोर्ट करना चाहिए और संदेश में दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक नहीं करना चाहिए। साथ ही मोबाइल और एप्लिकेशन को समय-समय पर अपडेट रखना भी साइबर सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया है। डिजिटल भुगतान और मोबाइल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच इस तरह के फर्जीवाड़े लोगों के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव उपाय माना जा रहा है।
भारतीय नौसेना को मिलेगा बड़ा ताकतवर बेड़ा, ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस 8 नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट प्रोजेक्ट को 40,000 करोड़ की मंजूरी का इंतजार

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना की समुद्री युद्ध क्षमता को नई दिशा देने वाला नेक्स्ट जेनरेशन कॉर्वेट (NGC) प्रोजेक्ट अंतिम मंजूरी के चरण में पहुंच गया है। करीब 40,000 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी मिलना बाकी है। मंजूरी के बाद नौसेना को आठ आधुनिक युद्धपोतों का बेड़ा मिलेगा, जो हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक और सैन्य उपस्थिति को और मजबूत करेंगे। इस परियोजना के तहत दो प्रमुख सरकारी शिपबिल्डिंग कंपनियों को निर्माण कार्य सौंपे जाने की संभावना है। इनमें Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) को पांच कॉर्वेट और Goa Shipyard Limited (GSL) को तीन युद्धपोत बनाने का दायित्व मिल सकता है। यह कदम देश में स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता को भी मजबूती देगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को आगे बढ़ाएगा। लगभग 3,500 टन विस्थापन वाले ये कॉर्वेट आधुनिक युद्ध तकनीक से लैस होंगे। इन्हें “डिस्ट्रिब्यूटेड लेथैलिटी” अवधारणा के आधार पर डिजाइन किया जा रहा है, जिससे छोटे आकार के बावजूद ये युद्धपोत लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होंगे। इनकी अधिकतम गति लगभग 32 नॉट्स होगी और ये बिना किसी बाहरी सहायता के लगभग 30 दिनों तक समुद्र में तैनात रह सकेंगे। इन युद्धपोतों की सबसे बड़ी ताकत ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें होंगी। प्रत्येक कॉर्वेट पर आठ एक्सटेंडेड-रेंज ब्रह्मोस मिसाइलें लगाई जाएंगी, जो दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी तक सटीक वार करने में सक्षम हैं। इसके साथ ही वर्टिकल लॉन्च सिस्टम आधारित शॉर्ट-रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी सुरक्षा कवच प्रदान करेंगी। निकट दूरी के खतरों को निष्क्रिय करने के लिए AK-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी शामिल होगा। पनडुब्बी रोधी क्षमताओं को मजबूत बनाने के लिए इन जहाजों में हल-माउंटेड सोनार, टोव्ड ऐरे सोनार और टॉरपीडो लॉन्चर लगाए जाएंगे। इससे समुद्र के भीतर छिपे दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और उन पर हमला करना आसान होगा। साथ ही हेलीकॉप्टर संचालन की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे निगरानी और मिशन क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इन कॉर्वेट्स में आधुनिक सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी होंगे, जिनमें AESA रडार, इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट सिस्टम और उन्नत ट्रैकिंग तकनीक शामिल है। ये सिस्टम युद्ध के दौरान दुश्मन के रडार और मिसाइल हमलों का मुकाबला करने में अहम भूमिका निभाएंगे। यदि योजना समय पर आगे बढ़ती है, तो 2026 में CCS की मंजूरी के बाद निर्माण अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। 2027 में निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है और पहला युद्धपोत 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है। पूरी परियोजना 2036 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी होने का अनुमान है। इस परियोजना के पूरा होने पर भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में देश की रणनीतिक स्थिति और निगरानी क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।
अदालतों में AI के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी, 20 जून तक आम जनता से सुझाव आमंत्रित

नई दिल्ली । न्यायिक प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों में AI के औपचारिक उपयोग को लेकर “रेगुलेशन्स फॉर यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026” का ड्राफ्ट जारी किया है और इस पर सभी हितधारकों तथा आम जनता से 20 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में तकनीक के उपयोग को संतुलित और नियंत्रित ढंग से लागू करना है, ताकि आधुनिक तकनीक का लाभ भी मिले और न्यायिक स्वतंत्रता, निष्पक्षता तथा मानवीय निर्णय की प्रधानता भी बनी रहे। प्रस्तावित ढांचे में यह स्पष्ट किया गया है कि AI सिस्टम केवल सहायक उपकरण के रूप में काम करेंगे और किसी भी स्थिति में न्यायाधीशों का स्थान नहीं लेंगे। ड्राफ्ट में सबसे महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि किसी भी मामले में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास रहेगा। AI को किसी भी तरह से सजा सुनाने, कानूनी निष्कर्ष निकालने या मानवीय विवेक की जगह निर्णय देने की अनुमति नहीं होगी। इसका उपयोग केवल सहायता, विश्लेषण और प्रक्रियागत दक्षता बढ़ाने तक सीमित रहेगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा कर रहे हैं, में जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस राजा विजयराघवन वी., जस्टिस अनूप चितकारा और जस्टिस सूरज गोविंदराज शामिल हैं। इस समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह ड्राफ्ट तैयार किया है और अब इसे अंतिम रूप देने से पहले व्यापक जनसुझाव की प्रक्रिया शुरू की गई है। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायिक प्रणाली में उपयोग होने वाले सभी AI सिस्टम को इस प्रकार डिजाइन और लागू किया जाएगा कि वे निष्पक्षता को बढ़ावा दें और किसी भी प्रकार के भेदभाव को रोकें। इसमें नस्ल, धर्म, जाति, लिंग, भाषा, आर्थिक स्थिति या किसी भी संवैधानिक रूप से प्रतिबंधित आधार पर भेदभाव को रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। साथ ही, महिलाओं, बच्चों, दिव्यांग व्यक्तियों, अल्पसंख्यक समुदायों और सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है। यह सुनिश्चित करने की बात कही गई है कि AI आधारित किसी भी प्रणाली से इन समूहों के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। प्रस्तावित ढांचे में डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को भी प्रमुख स्तंभों के रूप में शामिल किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि न्यायिक AI सिस्टम को उच्चतम सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा ताकि संवेदनशील न्यायिक डेटा सुरक्षित रह सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारतीय न्याय प्रणाली में तकनीक के उपयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकती है। हालांकि इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक का उपयोग मानव न्यायिक विवेक को प्रभावित न करे और न्याय की मूल भावना सुरक्षित रहे। आने वाले दिनों में प्राप्त सुझावों के आधार पर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा और फिर इसे न्यायालयों में AI के नियंत्रित उपयोग के लिए लागू किया जा सकता है। यह कदम न्यायिक प्रणाली में तकनीकी सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है।