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मंगलवार व्रत-पूजा विधि: बजरंगबली को ऐसे करें प्रसन्न, दूर होंगे संकट और बरसेगी कृपा

नई दिल्ली । सनातन धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। संकटमोचन हनुमान की आराधना के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो भक्त मंगलवार का व्रत रखकर श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-अर्चना करते हैं, उनके जीवन से दुख, संकट, भय और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं। साथ ही मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। मंगलवार व्रत की शुरुआत प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने से होती है। स्नान के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके भगवान हनुमान की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर पूजा प्रारंभ करें। हनुमानजी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल, गुड़ और चने का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि बजरंगबली को सिंदूर अत्यंत प्रिय है, इसलिए सिंदूर अर्पित करने से विशेष कृपा प्राप्त होती है। पूजा के दौरान हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है। जो लोग पूरा सुंदरकांड नहीं पढ़ सकते, वे कम से कम हनुमान चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ अवश्य करें। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से मनोबल बढ़ता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक आहार ग्रहण करते हैं। कई लोग निर्जला व्रत भी रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं। इस दिन लहसुन, प्याज, मांसाहार और नशीली वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है। व्रत का पारण सूर्यास्त के बाद या पूजा सम्पन्न होने के बाद किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष हो या जो भूमि, भवन, नौकरी, व्यापार अथवा विवाह संबंधी बाधाओं का सामना कर रहे हों। ऐसा माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक व्रत करने से मंगल ग्रह मजबूत होता है और जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलने लगते हैं। मंगलवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। गरीब और जरूरतमंद लोगों को गुड़, मसूर की दाल, लाल वस्त्र या भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। यह पुण्य के साथ-साथ ग्रहों की अनुकूलता बढ़ाने वाला भी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से मंगलवार का व्रत केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, अनुशासन और सेवा की भावना को भी मजबूत करता है। श्रद्धा, भक्ति और सच्चे मन से किए गए व्रत-पूजन से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति, साहस तथा सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है।

हर्निया और साइटिका से बचाव में कारगर है उपविष्ठ कोणासन, महिलाओं के लिए भी बेहद फायदेमंद

नई दिल्ली । भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों तक एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधियों में कमी आज कई स्वास्थ्य समस्याओं की बड़ी वजह बन रही है। कमर दर्द, मांसपेशियों में जकड़न, पाचन संबंधी परेशानियां, साइटिका और हर्निया जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग न केवल शरीर को फिट रखने का माध्यम बन रहा है, बल्कि कई बीमारियों से बचाव का प्राकृतिक उपाय भी साबित हो रहा है। इन्हीं प्रभावशाली योगासनों में उपविष्ठ कोणासन का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उपविष्ठ कोणासन एक ऐसा योगासन है, जो शरीर के निचले हिस्से पर विशेष रूप से कार्य करता है। इस आसन में दोनों पैरों को फैलाकर बैठा जाता है और धीरे-धीरे शरीर को आगे की ओर झुकाया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान जांघों, हैमस्ट्रिंग, पेल्विक क्षेत्र, रीढ़ की हड्डी और पेट की मांसपेशियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर में लचीलापन बढ़ता है और मांसपेशियों की जकड़न कम होती है। विशेषज्ञों के अनुसार उपविष्ठ कोणासन का सबसे बड़ा लाभ हैमस्ट्रिंग मांसपेशियों को मिलता है। लंबे समय तक बैठे रहने के कारण ये मांसपेशियां अकड़ जाती हैं, जिससे चलने-फिरने और झुकने में परेशानी हो सकती है। इस आसन के दौरान होने वाला खिंचाव मांसपेशियों को लचीला बनाता है और शरीर की गतिशीलता को बेहतर करता है। यही कारण है कि ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों के लिए यह आसन विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। यह योगासन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को भी बेहतर बनाने का काम करता है। शरीर के इस हिस्से में कई महत्वपूर्ण अंग मौजूद होते हैं, जिनके स्वस्थ रहने के लिए पर्याप्त रक्त प्रवाह जरूरी है। उपविष्ठ कोणासन के अभ्यास से इस क्षेत्र में रक्त का संचार बढ़ता है, जिससे अंगों की कार्यक्षमता बेहतर होती है और कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा कम हो सकता है। हर्निया की रोकथाम में भी इस आसन को उपयोगी माना जाता है। हर्निया की समस्या अक्सर पेट की मांसपेशियों के कमजोर होने से उत्पन्न होती है। उपविष्ठ कोणासन पेट और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है, जिससे शरीर के अंदरूनी अंगों को बेहतर सहारा मिलता है और हर्निया का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि जिन लोगों को पहले से हर्निया है, उन्हें यह आसन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए। साइटिका के मरीजों के लिए भी यह योगासन राहत देने वाला माना जाता है। साइटिका में नसों पर दबाव के कारण कमर से लेकर पैरों तक दर्द महसूस होता है। इस आसन से होने वाला नियंत्रित खिंचाव नसों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे दर्द और असहजता में राहत मिल सकती है। महिलाओं के लिए भी उपविष्ठ कोणासन कई मायनों में फायदेमंद है। यह पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार बढ़ाकर हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास मासिक धर्म चक्र को संतुलित रखने और पीरियड्स के दौरान होने वाले दर्द एवं ऐंठन को कम करने में सहायक माना जाता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी योगासन का लाभ तभी मिलता है जब उसे सही तकनीक और नियमितता के साथ किया जाए। इसलिए शुरुआती लोगों को प्रशिक्षित योग शिक्षक की देखरेख में ही उपविष्ठ कोणासन का अभ्यास करना चाहिए। सही तरीके से किया गया यह योगासन शरीर को लचीला, मजबूत और स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मंगलवार को करें ये खास उपाय, हनुमानजी की कृपा से दूर होंगे संकट और चमकेगा भाग्य

नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। मंगलवार का दिन विशेष रूप से भगवान हनुमान की आराधना के लिए जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से भय, रोग, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि देशभर के हनुमान मंदिरों में मंगलवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मंगलवार का संबंध मंगल ग्रह से भी माना जाता है। मंगल ग्रह साहस, ऊर्जा, पराक्रम, भूमि, संपत्ति और नेतृत्व क्षमता का कारक है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में मंगल कमजोर हो या मंगल दोष हो, तो मंगलवार के दिन किए गए धार्मिक उपाय लाभकारी माने जाते हैं। इस दिन सुबह स्नान के बाद स्वच्छ लाल या केसरिया वस्त्र धारण कर भगवान हनुमान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। मंगलवार को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इनका श्रद्धा और विश्वास के साथ पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हनुमान मंदिर में जाकर सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मंगलवार को जरूरतमंद लोगों को दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन लाल वस्त्र, मसूर की दाल, गुड़, तांबे की वस्तुएं या भोजन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही यह मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों को कम करने में भी सहायक माना जाता है। मंगलवार के दिन कुछ कार्यों से बचने की सलाह भी दी जाती है। कई परंपराओं में इस दिन अनावश्यक विवाद, क्रोध और कटु वचन बोलने से बचने की बात कही गई है। माना जाता है कि ऐसा करने से मंगल ग्रह का सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है। इसके अलावा घर में शांति और सौहार्द का वातावरण बनाए रखना भी शुभ माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जो लोग नौकरी, व्यापार या करियर में लगातार बाधाओं का सामना कर रहे हैं, वे मंगलवार को हनुमानजी के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाकर प्रार्थना करें। यह उपाय आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक मजबूती प्रदान करने वाला माना जाता है। वहीं विद्यार्थी इस दिन अध्ययन शुरू करने से पहले हनुमानजी का स्मरण करें तो एकाग्रता में वृद्धि हो सकती है। कुल मिलाकर मंगलवार केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्मबल, अनुशासन, सेवा और सकारात्मक सोच को अपनाने का भी संदेश देता है। श्रद्धा, संयम और सद्कर्म के साथ बिताया गया मंगलवार जीवन में सुख, शांति और सफलता का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

मेष राशिफल 9 जून 2026: कार्यक्षेत्र में मिलेगी प्रशंसा, व्यापार में लाभ के योग

नई दिल्ली । मेष राशि के जातकों के लिए 9 जून 2026 का दिन सकारात्मक परिणाम लेकर आने वाला है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत, रचनात्मक सोच और कार्यकुशलता का प्रभाव साफ दिखाई देगा। लंबे समय से जिस काम में आप प्रयास कर रहे थे, उसमें सफलता मिलने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारी और सहकर्मी आपके प्रदर्शन की सराहना करेंगे, जिससे आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। नौकरीपेशा लोगों के लिए दिन विशेष रूप से अनुकूल रहेगा। किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक पूरा करने पर प्रशंसा और सम्मान मिल सकता है। नई जिम्मेदारियां भी मिल सकती हैं, जो भविष्य में तरक्की के रास्ते खोलेंगी। हालांकि कार्य की अधिकता के कारण मानसिक दबाव महसूस हो सकता है, इसलिए धैर्य और संयम बनाए रखना जरूरी होगा। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए भी दिन लाभदायक रहने वाला है। अचानक किसी नए सौदे, ग्राहक या निवेश से आर्थिक लाभ मिलने के संकेत हैं। कारोबार में विस्तार की योजनाएं आगे बढ़ सकती हैं। यदि किसी नए प्रोजेक्ट पर विचार कर रहे हैं तो परिस्थितियां आपके पक्ष में रह सकती हैं। आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर रहेगी। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना भी आवश्यक होगा। निवेश संबंधी फैसले सोच-समझकर लें। पारिवारिक जीवन सामान्य रहेगा। परिवार के सदस्यों का सहयोग मिलेगा, लेकिन छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने से रिश्तों में तनाव आ सकता है। इसलिए अपनी वाणी और व्यवहार पर विशेष ध्यान दें। स्वास्थ्य की दृष्टि से दिन सामान्य रहेगा, लेकिन मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन परेशानी का कारण बन सकते हैं। योग, ध्यान और सकारात्मक सोच आपको संतुलित बनाए रखने में मदद करेंगे। कुल मिलाकर, मेष राशि वालों के लिए 9 जून का दिन सफलता, सम्मान और आर्थिक लाभ के अवसर लेकर आएगा। यदि आप अपने गुस्से और भावनाओं पर नियंत्रण रखेंगे तो दिन और भी बेहतर साबित हो सकता है।

9 जून का राशिफल: किस्मत देगी साथ या बढ़ेंगी चुनौतियां? जानिए मेष से मीन तक सभी राशियों का भविष्यफल

नई दिल्ली । वैदिक ज्योतिष के अनुसार 9 जून 2026, मंगलवार का दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति के कारण सभी 12 राशियों पर अलग-अलग प्रभाव डालेगा। मंगलवार भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है और इस दिन उनकी पूजा करने से भय, रोग और संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि यह दिन आपके लिए क्या संदेश लेकर आया है। मेष राशि के जातकों के लिए प्रेम जीवन सुखद और संतुलित रहेगा। कार्यक्षेत्र में आने वाली चुनौतियों को आप अपनी मेहनत और लगन से सफलतापूर्वक संभाल पाएंगे। हालांकि आर्थिक मामलों और स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी सावधानी बरतने की आवश्यकता रहेगी। निजी समस्याओं को कार्यस्थल पर हावी न होने दें। वृषभ राशि वालों के लिए दिन मिश्रित परिणाम देने वाला रहेगा। आर्थिक मामलों में छोटी-मोटी परेशानियां सामने आ सकती हैं, लेकिन दोस्तों और शुभचिंतकों का सहयोग मिलेगा। नई चीजें सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर प्राप्त होगा। किसी भी बड़े निर्णय से पहले सोच-समझकर योजना बनाएं। मिथुन राशि के लोगों को अपने रिश्तों में खुलकर संवाद बनाए रखना चाहिए। सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास आपको नई उपलब्धियों की ओर ले जाएगा। पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। कर्क राशि वालों के लिए पारिवारिक और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। कार्यस्थल पर प्रदर्शन बेहतर रहेगा और प्रेम संबंधों में भी मधुरता बनी रहेगी। स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति संतोषजनक रहने के संकेत हैं। सिंह राशि के जातकों को टीम वर्क पर विशेष ध्यान देना होगा। कार्यक्षेत्र में नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में राहत मिलने से मन प्रसन्न रहेगा। कन्या राशि के लिए दिन व्यस्त लेकिन लाभदायक रहेगा। प्रेम जीवन में खुशियां बनी रहेंगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी छोटी परेशानियां आपको सतर्क रहने का संकेत दे रही हैं। अनुशासन और नियमितता सफलता दिलाएंगे। तुला राशि वालों को निजी और पेशेवर जीवन में ईमानदारी बनाए रखनी होगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और आर्थिक पक्ष मजबूत रहेगा। प्रेम संबंधों में अधिक समय देने से रिश्ते मजबूत होंगे। वृश्चिक राशि के लोगों का दिन रोमांस और भावनात्मक अनुभवों से भरपूर रह सकता है। हालांकि आर्थिक मामलों और स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। रिश्तों में संवाद की कमी न होने दें। धनु राशि के लिए दिन सकारात्मक रहेगा। प्रेम संबंधों में समझदारी और धैर्य दिखाने की जरूरत होगी। कार्यक्षेत्र में कठिन लक्ष्यों को भी आप सफलतापूर्वक पूरा कर पाएंगे। आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों ही पक्ष मजबूत रहेंगे। मकर राशि वालों को करियर में सफलता मिलने के संकेत हैं। पारिवारिक संबंधों को समय देना जरूरी होगा। निवेश संबंधी फैसलों में सावधानी बरतें और सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता दें। कुंभ राशि के जातकों को रिश्तों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। कार्यक्षेत्र में चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन धैर्य और समझदारी से आप उन्हें पार कर लेंगे। आर्थिक और स्वास्थ्य की स्थिति सामान्य रहेगी। मीन राशि वालों के लिए प्रेम जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। नए कार्य चुनौतीपूर्ण महसूस होंगे, लेकिन आपकी मेहनत उन्हें सफलता तक पहुंचाएगी। आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाए तो 9 जून का दिन अधिकांश राशियों के लिए अवसरों और नई संभावनाओं से भरा रहेगा। वहीं कुछ राशियों को स्वास्थ्य, आर्थिक निर्णयों और रिश्तों के मामलों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।

थकान को कहें अलविदा! घर पर बनाएं नेचुरल एनर्जी बूस्टर ड्रिंक, दिनभर रहेंगे एक्टिव और फ्रेश

नई दिल्ली । आज की व्यस्त जीवनशैली में थकान, कमजोरी और ऊर्जा की कमी एक आम समस्या बन गई है। लंबे समय तक काम करना, पर्याप्त नींद न लेना, अनियमित भोजन और तनाव शरीर की ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। ऐसे में अधिकांश लोग बाजार में मिलने वाले एनर्जी ड्रिंक्स का सहारा लेते हैं, लेकिन इनमें मौजूद अधिक चीनी और कृत्रिम तत्व स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक और घर पर तैयार किए गए एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर के लिए अधिक सुरक्षित और लाभकारी होते हैं। प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ आवश्यक पोषक तत्व भी उपलब्ध कराते हैं। नींबू, शहद और पानी से तैयार किया गया पेय सबसे लोकप्रिय प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक्स में से एक माना जाता है। एक गिलास गुनगुने या सामान्य पानी में आधा नींबू और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से शरीर को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद विटामिन-सी और प्राकृतिक शर्करा शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करती है। नारियल पानी भी एक बेहतरीन प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर माना जाता है। इसमें पोटैशियम, मैग्नीशियम और इलेक्ट्रोलाइट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर में पानी की कमी को दूर कर ऊर्जा बनाए रखते हैं। गर्मियों के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है। इसके अलावा केला और दूध से तैयार स्मूदी भी ऊर्जा का अच्छा स्रोत है। केले में प्राकृतिक कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और पोटैशियम मौजूद होता है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा प्रदान करता है। व्यायाम करने वाले लोगों और खिलाड़ियों के लिए यह एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। सूखे मेवे और खजूर से तैयार ड्रिंक भी शरीर को ताकत देने का काम करता है। रातभर भिगोए हुए बादाम, खजूर और दूध को मिलाकर तैयार किया गया पेय पोषण से भरपूर होता है। यह न केवल ऊर्जा बढ़ाता है, बल्कि मानसिक एकाग्रता और शारीरिक क्षमता को भी बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल एनर्जी ड्रिंक पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित व्यायाम और अच्छी नींद भी आवश्यक है। यदि शरीर लगातार थकान महसूस कर रहा हो, तो इसके पीछे किसी स्वास्थ्य समस्या की संभावना भी हो सकती है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह लेना उचित रहेगा। कुल मिलाकर, प्राकृतिक एनर्जी बूस्टर ड्रिंक शरीर को स्वस्थ तरीके से ऊर्जा प्रदान करने का बेहतर विकल्प हैं। इनका नियमित और संतुलित सेवन न केवल दिनभर ताजगी बनाए रखता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य को भी लाभ पहुंचाता है। बाजार के कृत्रिम पेयों की बजाय घर पर तैयार प्राकृतिक पेय अपनाकर आप अपनी सेहत और ऊर्जा दोनों को बेहतर बना सकते हैं।

“जंगल में पड़ी दवाइयाँ: आखिर कब तक गरीबों की जिंदगी और जनता का पैसा यूँ बर्बाद होता रहेगा?”

अशोक कुमार झाझारखंड के लातेहार जिले के मनिका क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर ने न केवल राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही, सरकारी संसाधनों के उपयोग और गरीबों के अधिकारों को लेकर भी एक बड़ी बहस छेड़ दी है। मनिका थाना और दोमुहान नदी के बीच जंगल में बड़ी मात्रा में सरकारी दवाइयों का फेंका जाना केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की भयावह सच्चाई है जिसमें एक तरफ गरीब मरीज अस्पतालों में दवा के लिए भटकते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं मरीजों के लिए खरीदी गई दवाइयाँ जंगलों और सड़कों पर कचरे की तरह फेंक दी जाती हैं। यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर देने के लिए पर्याप्त है। सरकारी दवाइयाँ कोई साधारण वस्तु नहीं होतीं। इनके पीछे करोड़ों रुपये का सार्वजनिक धन खर्च होता है। यह धन किसी मंत्री, अधिकारी या विभाग की निजी संपत्ति नहीं बल्कि देश और राज्य के करोड़ों करदाताओं की मेहनत की कमाई से आता है। जब सरकार दवाइयाँ खरीदती है तो उसका उद्देश्य यह होता है कि आर्थिक रूप से कमजोर, गरीब और जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके लेकिन यदि वही दवाइयाँ अस्पतालों तक पहुंचने के बजाय जंगलों में फेंकी जा रही हों, तो यह केवल वित्तीय अनियमितता नहीं बल्कि जनता के विश्वास के साथ किया गया खुला विश्वासघात है। आज झारखंड के अधिकांश सरकारी अस्पतालों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को अक्सर यह सुनने को मिलता है कि अस्पताल में दवा उपलब्ध नहीं है। कई बार डॉक्टर मरीजों को बाहर की दुकानों से दवा खरीदने की सलाह देते हैं। गरीब परिवारों को इलाज के लिए कर्ज लेना पड़ता है, जमीन बेचनी पड़ती है या फिर इलाज अधूरा छोड़ना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण हजारों लोग समय पर उपचार नहीं मिलने से गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे माहौल में यदि लाखों रुपये मूल्य की सरकारी दवाइयाँ जंगल में पड़ी मिलती हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मरीजों तक दवा पहुंचाने की जिम्मेदारी किसकी थी और वह जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई गई? इस घटना का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह कोई सामान्य गलती नहीं हो सकती। सरकारी दवाइयों की खरीद, भंडारण, परिवहन और वितरण की एक पूरी प्रक्रिया होती है। हर स्तर पर रिकॉर्ड रखा जाता है। किस अस्पताल को कितनी दवा भेजी गई, किस गोदाम में कितना स्टॉक रखा गया, कौन अधिकारी इसकी निगरानी कर रहा था—इन सबका स्पष्ट विवरण मौजूद होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाइयाँ जंगल तक पहुंचीं कैसे? क्या ये दवाइयाँ एक्सपायर हो चुकी थीं? यदि हाँ, तो उन्हें वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत नष्ट क्यों नहीं किया गया? यदि दवाइयाँ उपयोग योग्य थीं, तो उन्हें मरीजों तक क्यों नहीं पहुंचाया गया? इन सवालों का जवाब केवल प्रशासनिक जांच से नहीं बल्कि पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई से ही मिल सकता है। यह घटना झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की उन कमियों को भी उजागर करती है, जिनकी चर्चा वर्षों से होती रही है। राज्य बनने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए। नए अस्पताल बने, योजनाएँ शुरू हुईं, दवा खरीद के लिए बजट बढ़ाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर आज भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की कमी है। कई अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। आधुनिक उपकरणों का अभाव है। दवाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो पाती। ऐसे में जंगल में फेंकी गई दवाइयाँ केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक बन जाती हैं। इस मामले का दूसरा पहलू राजनीतिक और लोकतांत्रिक जवाबदेही से जुड़ा है। लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व केवल सरकार की आलोचना करना नहीं बल्कि जनता के मुद्दों को उठाना भी होता है। जब कोई जनप्रतिनिधि या पत्रकार ऐसे मामलों को सामने लाता है, तो सरकार का पहला कर्तव्य होना चाहिए कि वह तथ्यों की जांच करे और दोषियों पर कार्रवाई करे। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति तब पैदा होती है जब सवालों का जवाब देने के बजाय सवाल पूछने वालों को ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की जाती है। लोकतंत्र में प्रश्न पूछना अपराध नहीं है। जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसके टैक्स के पैसे का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है।राजनीति स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि आखिर मरीजों के लिए खरीदी गई दवाइयाँ जंगल में कैसे पहुंच गईं। यदि यह लापरवाही थी तो जिम्मेदार कौन है? यदि इसमें भ्रष्टाचार की भूमिका है तो उसके पीछे कौन लोग हैं? क्या केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करके मामले को समाप्त कर दिया जाएगा या फिर पूरे नेटवर्क की जांच होगी? जनता इन प्रश्नों का स्पष्ट उत्तर चाहती है। यह भी समझना आवश्यक है कि स्वास्थ्य सेवा केवल एक सरकारी योजना नहीं बल्कि मानव जीवन से जुड़ा विषय है। किसी गरीब मरीज के लिए अस्पताल में मिलने वाली मुफ्त दवा जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकती है। जब दवाइयाँ नष्ट होती हैं या फेंकी जाती हैं, तब केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं होती बल्कि उन मरीजों की उम्मीदें भी खत्म हो जाती हैं जो उपचार के लिए सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसलिए इस घटना को केवल प्रशासनिक त्रुटि मानकर नहीं छोड़ा जा सकता।झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ बड़ी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है, स्वास्थ्य सेवाओं का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहाँ के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों लोग सरकारी अस्पतालों और सरकारी दवाओं पर निर्भर हैं। उनके लिए स्वास्थ्य व्यवस्था केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन रेखा है। यदि उसी व्यवस्था में इस प्रकार की अनियमितताएँ सामने आती हैं तो इसका सीधा असर समाज के सबसे कमजोर वर्ग पर पड़ता है। आज आवश्यकता केवल जांच समिति गठित करने की नहीं है। आवश्यकता है कि पूरे राज्य में दवा खरीद, भंडारण और वितरण प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि हर दवा का हिसाब

इजरायल-ईरान से तुरंत हमले रोकने की अपील, ट्रंप बोले– “अब गोलीबारी बंद होनी चाहिए, बातचीत की मेज पर लौटें”

नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और ईरान से तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। उन्होंने दोनों देशों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब “गोलीबारी बंद” कर देनी चाहिए और स्थिति को और आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और इजरायल के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में ईरान की ओर से इजरायल पर मिसाइल दागे जाने की खबर सामने आई, जिसके जवाब में इजरायल ने भी तेहरान के कई ठिकानों को निशाना बनाया। इन जवाबी कार्रवाइयों ने क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बेहद संक्षिप्त लेकिन सख्त संदेश जारी करते हुए दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों को अपने-अपने हमले रोक देने चाहिए क्योंकि आगे टकराव बढ़ाने से केवल स्थिति और गंभीर होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अब समय संघर्ष नहीं बल्कि कूटनीति का है। इससे पहले भी ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में ईरान से अपील करते हुए कहा था कि मिसाइल हमलों को रोककर उसे वार्ता की मेज पर लौटना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते के बेहद करीब थे, लेकिन हालिया घटनाओं ने उस प्रक्रिया को प्रभावित किया है। ट्रंप के अनुसार, अगर हालात शांत रहते तो आने वाले दिनों में समझौता संभव था। एक अन्य बयान में ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इजरायल के प्रधानमंत्री से सीधे बात करेंगे और उनसे जवाबी कार्रवाई को रोकने का आग्रह करेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला कर दिया है और अब आगे की कार्रवाई से बचना चाहिए। उनका कहना था कि क्षेत्र को और अधिक अस्थिर होने से बचाने के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं। इस बीच क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। मिसाइल हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और जवाबी कार्रवाइयों के कारण स्थिति तेजी से अस्थिर होती जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो यह संघर्ष व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। इजरायली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से दिए गए बयान में कहा गया है कि यह स्थिति पहले के हमलों और गतिविधियों का परिणाम है, जिससे तनाव और अधिक गहरा गया है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस टकराव को रोका जा सकेगा या हालात और बिगड़ेंगे।

अर्मेनिया चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत पर पीएम मोदी ने दी बधाई, कहा- जनादेश नेतृत्व में जनता के भरोसे का संकेत

नई दिल्ली । अर्मेनिया में हुए संसदीय चुनाव में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी की जीत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान को चुनाव में मिली सफलता पर बधाई दी है और इसे जनता के भरोसे और मजबूत जनादेश का संकेत बताया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपने संदेश में कहा कि चुनाव परिणाम अर्मेनिया के लोगों के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान के नेतृत्व और दृष्टिकोण में विश्वास को दर्शाते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग के ऐतिहासिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा आने वाले समय में द्विपक्षीय साझेदारी को नई दिशा मिलेगी। अर्मेनिया में 7 जून को हुए संसदीय चुनावों में सिविक कॉन्ट्रैक्ट पार्टी को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखी। शुरुआती और आधिकारिक रुझानों के अनुसार पार्टी को लगभग 49.81 प्रतिशत वोट मिले, जिससे वह सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरकर सामने आई। इस चुनावी परिणाम ने देश की राजनीतिक दिशा को लेकर भी स्पष्ट संकेत दिए हैं। चुनाव में अन्य दलों में स्ट्रॉन्ग अर्मेनिया अलायंस को लगभग 23.29 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए, जबकि पूर्व राष्ट्रपति रॉबर्ट कोचरियन के नेतृत्व वाले गठबंधन को लगभग 9.94 प्रतिशत वोट मिले। इसके अलावा अन्य छोटी पार्टियों को भी सीमित समर्थन मिला, हालांकि वे निर्णायक भूमिका में नहीं रहीं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनाव परिणाम ने अर्मेनिया की विदेश नीति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी असर डाला है। रूस और पश्चिमी देशों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा के बीच यह परिणाम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अर्मेनिया लंबे समय से दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश करता रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव से पहले के दिनों में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी चर्चा में रहीं, जिसमें ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार और राजनीतिक संबंधों को लेकर विभिन्न देशों के बीच तनाव और सहयोग दोनों ही देखने को मिले। इन परिस्थितियों ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया था। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान ने अपनी पार्टी की जीत को ऐतिहासिक बताया और इसे जनता के विश्वास की पुष्टि करार दिया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आगे भी विकास और स्थिरता की दिशा में काम करती रहेगी। भारत और अर्मेनिया के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं, जिसमें व्यापार, शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के विभिन्न क्षेत्र शामिल हैं। पीएम मोदी के संदेश को इसी कड़ी में दोनों देशों के संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय अर्मेनिया के इस राजनीतिक बदलाव और उसके क्षेत्रीय प्रभावों पर नजर बनाए हुए है। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई राजनीतिक स्थिति क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक संतुलन को किस तरह प्रभावित करती है।

भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय प्रदर्शन का दिया बड़ा संकेत, केंद्र सरकार को मिला 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड चेक

नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को 8,813 करोड़ रुपये का डिविडेंड सौंपा है। यह भुगतान बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और देश की बैंकिंग प्रणाली में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। एसबीआई के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी ने यह डिविडेंड चेक केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपा। इस संबंध में जानकारी वित्त मंत्री कार्यालय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा की गई, जिसमें बताया गया कि यह लाभांश केंद्र सरकार के लिए गैर-कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। डिविडेंड का यह भुगतान ऐसे समय में हुआ है जब बैंकिंग क्षेत्र लगातार डिजिटल बदलाव, क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के चलते मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। एसबीआई की यह उपलब्धि न केवल बैंक की वित्तीय स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश की आर्थिक मजबूती में अहम योगदान दे रहे हैं। एसबीआई देश का सबसे बड़ा बैंक होने के साथ-साथ सरकार की वित्तीय नीतियों और आर्थिक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी प्रमुख भूमिका निभाता है। बैंक की ओर से दिया गया यह डिविडेंड केंद्र सरकार के बजट प्रबंधन और राजस्व संतुलन में सहायक माना जाता है। बैंक के चेयरमैन सी. एस. शेट्टी के नेतृत्व में एसबीआई ने हाल के वर्षों में कई क्षेत्रों में सुधार और विस्तार किया है। बैंकिंग सेवाओं का डिजिटलीकरण, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में कर्ज वितरण को मजबूत करना इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सी. एस. शेट्टी ने कहा था कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक नींव मजबूत बनी हुई है। उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति को संतुलित बताते हुए कहा था कि ब्याज दरों में स्थिरता आर्थिक विकास को समर्थन देने में मदद करती है। उन्होंने यह भी कहा था कि निवेशकों को केवल अल्पकालिक बाजार उतार-चढ़ाव पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि भारत की दीर्घकालिक विकास कहानी पर भरोसा रखना चाहिए। उनके अनुसार, बैंकिंग सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और बुनियादी ढांचे का विस्तार भारत की आर्थिक प्रगति के मुख्य स्तंभ हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि एसबीआई का यह डिविडेंड भुगतान बैंकिंग क्षेत्र की स्थिरता और लाभप्रदता का संकेत है। यह भी दर्शाता है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सरकारी खजाने को मजबूत करने में लगातार योगदान दे रहे हैं। वित्तीय वर्ष के इस प्रदर्शन को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भी बैंक अपनी वृद्धि की गति बनाए रखेगा और देश की आर्थिक गतिविधियों को समर्थन देता रहेगा।