इंदौर में बीजेपी नेता की बिल्डिंग पर फिर पथराव, दो गुटों में टकराव से तनाव

मध्य प्रदेश। इंदौर के उषा नगर इलाके में रविवार का दिन उस समय तनावपूर्ण बन गया जब बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे की बिल्डिंग पर दो अलग-अलग बार पथराव की घटनाएं सामने आईं। सुबह जहां कुछ अज्ञात युवकों ने बिल्डिंग पर हमला कर ऑफिस के शीशे तोड़ दिए, वहीं शाम को भी एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें उनके घर पर फिर से पत्थर फेंके जाते दिखाई दिए। लगातार हुई इन घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। पूरा विवाद एक सामान्य सी बात से शुरू हुआ था, जो बाद में राजनीतिक और सामाजिक तनाव में बदल गया। जानकारी के अनुसार, शनिवार रात डॉग घुमाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप है कि बिल्डिंग के बाहर गंदगी को लेकर डॉग मालिक और बीजेपी नेता वीरेंद्र शेडगे के बीच कहासुनी हो गई, जो बाद में मारपीट तक पहुंच गई। इस विवाद में एक पक्ष ने आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसके बाद मामला और ज्यादा बिगड़ गया। बताया जा रहा है कि दूसरा पक्ष भी बीजेपी से जुड़ा हुआ है और स्थानीय गुटीय राजनीति से इसका संबंध माना जा रहा है। यही कारण है कि इस पूरे मामले को अब पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। मामला विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-4 का बताया जा रहा है, जहां बीजेपी नेता मालिनी गौड़ के पीए वीरेंद्र शेडगे रहते हैं। घटना के बाद क्षेत्र में लगातार तनाव की स्थिति बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के समर्थक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। इसी बीच पुलिस ने चेतन पाटिल के दोस्त की शिकायत पर वीरेंद्र शेडगे, गिरीश शेडगे, शानू उर्फ सौरभ दिघे, मनीष ईमालिया, प्रशांत सोनी, प्रणय चितोडा, अमित कोकाटे सहित अन्य लोगों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। हालांकि, विवाद के बाद स्थिति और जटिल हो गई जब एक और वीडियो सामने आया जिसमें फिर से पथराव की घटना दिखाई दी। इसके बाद पार्टी ने वीरेंद्र शेडगे को निष्कासित कर दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, दूसरा पक्ष भी स्थानीय बीजेपी नेताओं से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद न रहकर राजनीतिक गुटबाजी का रूप ले चुका है। फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस ने कहा है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और सभी वीडियो, बयान और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
शेयर बाजार आज: 8 जून को उतार-चढ़ाव के बीच रह सकती है बाजार की चाल, निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए 8 जून 2026 का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। घरेलू और वैश्विक दोनों मोर्चों से मिल रहे संकेत निवेशकों को सतर्क रहने का संदेश दे रहे हैं। पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में बंद हुए थे, जबकि बाजार की दिशा को लेकर निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोमवार को कारोबार की शुरुआत कमजोर रह सकती है। GIFT Nifty में गिरावट के संकेत मिले हैं, जिससे शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और विदेशी निवेशकों की सतर्कता भी घरेलू बाजार की चाल को प्रभावित कर सकती है। पिछले सप्ताह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के बाद बाजार में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। केंद्रीय बैंक ने ब्याज दरों को स्थिर रखा, लेकिन महंगाई और आर्थिक विकास को लेकर दिए गए संकेतों ने निवेशकों को सोचने पर मजबूर किया। इसके चलते कई सेक्टरों में मुनाफावसूली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है, जबकि 23,700 से 23,900 के बीच मजबूत प्रतिरोध क्षेत्र देखा जा रहा है। यदि बाजार इन स्तरों के ऊपर टिकता है तो रिकवरी की संभावना बन सकती है, जबकि नीचे फिसलने पर दबाव और बढ़ सकता है। सेक्टरवार नजर डालें तो बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिल सकती है। RBI के फैसले के बाद बैंकिंग सेक्टर को समर्थन मिला है। वहीं आईटी शेयरों पर वैश्विक संकेतों का असर बना रह सकता है। निवेशकों की नजर वित्तीय, बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों पर अधिक रहने की संभावना है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी। हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की है। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में फिलहाल चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में अवसर मौजूद हैं, लेकिन अस्थिरता के दौर में जोखिम प्रबंधन और संतुलित निवेश रणनीति अपनाना अधिक महत्वपूर्ण होगा। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक आंकड़े, विदेशी निवेश प्रवाह और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। कुल मिलाकर 8 जून का कारोबारी दिन सावधानी और अवसर दोनों लेकर आ सकता है। निवेशकों को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझानों पर नजर रखते हुए सोच-समझकर निवेश निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।
सोमवार व्रत विधि और पूजा: भगवान शिव को प्रसन्न करने की सरल एवं प्रभावी विधि

नई दिल्ली। सोमवार का दिन भगवान शिव और चंद्रमा से जुड़ा माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखने और शिव पूजा करने से मन शांत होता है, वैवाहिक जीवन में सुख आता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से अविवाहित कन्याओं और शिव भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। सोमवार व्रत विधि (Step by Step)1. सुबह जल्दी उठें और स्नान करेंव्रत वाले दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो सफेद कपड़े पहनना शुभ माना जाता है। 2. व्रत का संकल्प लेंघर या मंदिर में भगवान शिव के सामने बैठकर व्रत का संकल्प लें कि आप पूरे दिन उपवास रखेंगे और शिव पूजा करेंगे। 3. शिवलिंग का अभिषेक करेंशिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें। इसके बाद साफ जल से पुनः स्नान कराएं। 4. बेलपत्र अर्पित करेंतीन पत्तियों वाला बेलपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इसे शुद्ध करके उल्टा करके अर्पित करें। 5. धतूरा, आक के फूल और शमी पत्र चढ़ाएंये सभी वस्तुएं शिवजी को प्रिय मानी जाती हैं और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती हैं। 6. चंदन और भस्म लगाएंशिवलिंग पर चंदन का तिलक करें और यदि उपलब्ध हो तो भस्म अर्पित करें। 7. मंत्र जाप करें“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। यह सबसे सरल और प्रभावी शिव मंत्र माना जाता है। 8. आरती करेंदीपक जलाकर शिवजी की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें। सोमवार व्रत में क्या खाएंफलाहार करें (फल, दूध, दही, साबूदाना)अनाज और भारी भोजन से बचें (व्रत नियम अनुसार)नमक का सेवन व्रत के प्रकार पर निर्भर करता है (निर्जला/सामान्य व्रत)सोमवार व्रत खोलने की विधिशाम को शिव पूजा के बाद फल या हल्का भोजन करके व्रत खोला जाता है। पहले भगवान शिव को भोग लगाना जरूरी माना जाता है। सोमवार व्रत सरल होते हुए भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। श्रद्धा और नियम से की गई शिव पूजा जीवन में शांति, स्थिरता और सफलता प्रदान करती है।
MP में कोचिंग सिस्टम पर बड़ा बदलाव, छात्रों और अभिभावकों को मिलेगा राहत का फायदा

मध्य प्रदेश भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ती मनमानी और अनियंत्रित व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए ‘कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम’ लाने की तैयारी कर रही है। इस नए कानून के लागू होने के बाद कोचिंग सेक्टर पूरी तरह एक नियामक ढांचे के दायरे में आ जाएगा। सरकार द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हर कोचिंग संस्थान का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण कोई भी संस्थान संचालित नहीं किया जा सकेगा। साथ ही, पहले से चल रहे सभी कोचिंग सेंटरों को भी तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण कराना जरूरी होगा। नए नियमों के तहत फीस और रिफंड व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। यदि कोई छात्र बीच में कोचिंग छोड़ता है, तो संस्थान को शेष अवधि की फीस ‘प्रो-राटा’ आधार पर 10 दिनों के भीतर वापस करनी होगी। इससे छात्रों और अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा कोचिंग संस्थानों पर भ्रामक विज्ञापनों पर पूरी तरह रोक लगाने की तैयारी है। “100% चयन” या “गारंटीड रैंक” जैसे दावे अब अपराध की श्रेणी में आएंगे। किसी भी सफल छात्र की तस्वीर या नाम का उपयोग उसकी लिखित अनुमति के बिना नहीं किया जा सकेगा। कानून में शिक्षकों की योग्यता को भी स्पष्ट किया गया है। केवल स्नातक (ग्रेजुएट) शिक्षक ही पढ़ा सकेंगे और किसी नैतिक अपराध में दोषी व्यक्ति को नियुक्त नहीं किया जाएगा। साथ ही 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन प्रतिबंधित रहेगा और न्यूनतम योग्यता 10वीं पास निर्धारित की गई है। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कोचिंग संस्थानों को काउंसलिंग और मनोवैज्ञानिक सहायता उपलब्ध करानी होगी। साथ ही उन्हें वैकल्पिक करियर विकल्पों की जानकारी भी देनी होगी। कक्षाओं के समय को लेकर भी नियम तय किए गए हैं, जिसके अनुसार एक दिन में अधिकतम 5 घंटे की कोचिंग की सलाह दी गई है। सरकार ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी संस्थान अपनी वेबसाइट पर फीस, कोर्स विवरण, शिक्षक योग्यता और रिफंड नीति जैसी जानकारी सार्वजनिक करें। इस कानून की जरूरत को हाल के वर्षों में बढ़ते दबाव और छात्रों की आत्महत्या के मामलों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में मध्यप्रदेश में 900 से अधिक छात्रों ने आत्महत्या की है, जिससे कोचिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। फिलहाल यह ड्राफ्ट अगले विधानसभा सत्र में पेश किया जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने की संभावना है। अगर यह कानून पारित होता है, तो कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
शेयर बाजार में मोटे मुनाफे का लालच देकर 17.84 लाख की ठगी, मोबाइल बंद कर फरार आरोपी

मध्य प्रदेश। इंदौर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक प्रॉपर्टी ब्रोकर से शेयर मार्केट और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश के नाम पर कुल 17.84 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पीड़ित नितेश दवे ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर शेयर मार्केट निवेश से जुड़े कुछ विज्ञापन देखे थे, जिनमें कम समय में ज्यादा मुनाफे का दावा किया गया था। इसी विज्ञापन के जरिए उनकी बातचीत व्हाट्सएप पर एक महिला से शुरू हुई, जिसने खुद को आराध्या शर्मा बताया और एक बड़ी निवेश कंपनी से जुड़ा बताया। आरोपी महिला ने उन्हें टेलीग्राम ग्रुप से जोड़ा, जहां “सीनियर अधिकारी” के रूप में हरीनी पटेल नाम की एक अन्य महिला से परिचय कराया गया। इसके बाद पीड़ित को एक ऑनलाइन एग्रीमेंट भी भेजा गया, जिसमें निवेश पर 15 प्रतिशत कमीशन का झांसा दिया गया। शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए आरोपी ने 10 हजार रुपये का निवेश करवाया, जिसके बदले में पीड़ित को करीब 13 हजार रुपये वापस भेजे गए। इससे उनका विश्वास बढ़ गया और वे लगातार निवेश करते चले गए। इसके बाद “7 दिन के हाई रिटर्न प्लान” का लालच देकर अलग-अलग बैंक खातों में कई ट्रांजेक्शन कराए गए। कुल मिलाकर 28 ट्रांजेक्शन के जरिए 17 लाख 84 हजार रुपये अलग-अलग खातों में जमा करवा लिए गए। जब पीड़ित ने अपना पैसा और मुनाफा वापस मांगना शुरू किया, तो आरोपी महिला ने संपर्क बंद कर दिया। कुछ ही समय में उसका मोबाइल नंबर बंद हो गया और उसे टेलीग्राम ग्रुप से भी हटा दिया गया। इसके बाद पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। घटना की शिकायत साइबर हेल्पलाइन पर दर्ज कराने के बाद मामला एरोड्रम थाने तक पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात मोबाइल धारकों और संबंधित बैंक खाताधारकों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस अब बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और डिजिटल लेन-देन की जांच कर रही है ताकि आरोपियों तक पहुंचा जा सके। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला हो सकता है।
दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा मासूम, शरीर इतना कमजोर कि चलना भी मुश्किल

मध्य प्रदेश। इंदौर से सामने आया एक वीडियो इन दिनों लोगों को भावुक कर रहा है, जिसमें एक 11 वर्षीय बीमार बच्चे को उसके माता-पिता भीषण गर्मी में स्ट्रेचर पर धकेलते हुए अस्पताल ले जाते दिखाई दिए। यह दृश्य जितना दर्दनाक दिखा, उसकी असली वजह उतनी ही गंभीर और दुर्लभ बीमारी से जुड़ी है। यह बच्चा, आदर्श मलक, पिछले कई महीनों से गंभीर न्यूरोलॉजिकल और आनुवंशिक समस्याओं से जूझ रहा है। उसकी स्थिति ऐसी है कि वह चलने-फिरने में असमर्थ है और पूरी तरह देखभाल पर निर्भर है। परिजनों के अनुसार, उसका इलाज इंदौर के एमवाय अस्पताल में चल रहा है। परिवार ने बताया कि बच्चे को एक दुर्लभ बीमारी हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया (Hypohidrotic Ectodermal Dysplasia) है। इस बीमारी में शरीर की पसीना ग्रंथियां ठीक से विकसित नहीं हो पातीं, जिसके कारण मरीज को बहुत कम या बिल्कुल पसीना नहीं आता। यही वजह है कि गर्मी उसके लिए बेहद खतरनाक हो जाती है। इसके अलावा इस बीमारी का असर शरीर के अन्य हिस्सों पर भी पड़ता है, जैसे दांतों का विकास, बालों की वृद्धि और त्वचा की संरचना। आदर्श की उम्र 11 साल होने के बावजूद उसका शारीरिक विकास सामान्य बच्चों की तुलना में काफी पीछे है और उसके दूध के दांत भी अभी तक पूरी तरह नहीं गिरे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स में उसके मामले में डिमायलिनेटिंग डिजीज और गिलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS) जैसी गंभीर न्यूरोलॉजिकल स्थितियों की आशंका भी जताई गई है। इन बीमारियों में नसों की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे शरीर में कमजोरी और लकवे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। परिजनों ने बताया कि शनिवार को डॉक्टरों ने बच्चे को स्पाइन संबंधी इलाज के लिए सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल भेजने को कहा था। लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने और स्टाफ की देरी के कारण उन्हें मजबूरी में बच्चे को स्ट्रेचर पर ही ले जाना पड़ा। करीब एक किलोमीटर दूर स्थित अस्पताल तक वे उसे धूप में धकेलते हुए ले गए। इस दौरान उसकी मां लगातार गीले कपड़े से बच्चे के शरीर को ठंडा करने की कोशिश करती रहीं, क्योंकि आदर्श को सामान्य लोगों की तुलना में अधिक गर्मी महसूस होती है और उसे पसीना नहीं आता। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, बच्चे का इलाज जारी है और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। वहीं, घटना के वायरल वीडियो के बाद अस्पताल प्रबंधन ने यह भी जांच शुरू कर दी है कि मरीज को ट्रांसफर में देरी क्यों हुई और क्या किसी स्तर पर लापरवाही हुई। फिलहाल आदर्श की स्थिति जटिल बनी हुई है, लेकिन डॉक्टरों की टीम उसके इलाज में लगातार जुटी हुई है। यह मामला न केवल चिकित्सा व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि एक परिवार के संघर्ष और मासूम की जिदंगी की लड़ाई को भी सामने लाता है।
MP स्वास्थ्य विभाग में सख्ती, विधवा और परित्यक्ता कर्मचारियों के लिए अनिवार्य दस्तावेज

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की नई तबादला नीति एक बार फिर चर्चा और विवाद के केंद्र में आ गई है। इस नीति में विधवा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों से उनकी स्थिति का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की अनिवार्यता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत, ऐसे महिला कर्मचारियों को तबादले के लिए आवेदन करते समय न केवल शपथ पत्र देना होगा, बल्कि एसडीएम या कोर्ट द्वारा जारी आधिकारिक प्रमाण पत्र भी अपलोड करना अनिवार्य होगा। विभाग का कहना है कि यह व्यवस्था पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लागू की गई है। इसी तरह यदि कोई कर्मचारी 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे की एकमात्र देखभाल कर रहा है, तो उसे भी शपथ पत्र या संबंधित अधिकारी द्वारा जारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। यह प्रावधान महिला और पुरुष दोनों कर्मचारियों पर लागू होगा। हालांकि इस नीति को लेकर प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि राज्य के अन्य विभागों जैसे स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति में ऐसी कोई कठोर शर्त नहीं रखी गई है। वहां केवल विकल्प चयन के आधार पर आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी तबादला आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ई-एचआरएमएस पोर्टल के जरिए ही स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन की प्रक्रिया 8 जून से 12 जून तक चलेगी, जबकि 13 जून तक उनकी जांच पूरी कर ली जाएगी। विभाग ने जिलों में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के स्तर पर हेल्प डेस्क भी स्थापित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि कर्मचारियों को आवेदन में किसी तरह की परेशानी न हो। आवेदक अधिकतम पांच स्थानों का चयन कर सकते हैं। नीति के अनुसार, गंभीर बीमारी जैसे कैंसर, किडनी फेल्योर, हृदय रोग या मानसिक रोग की स्थिति में भी संबंधित मेडिकल बोर्ड या अधिकृत अधिकारी का प्रमाण पत्र देना अनिवार्य होगा। वहीं प्रोबेशन अवधि में कार्यरत या तीन साल से कम सेवा वाले कर्मचारी स्वैच्छिक स्थानांतरण के पात्र नहीं होंगे। विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई कर्मचारी ऑनलाइन प्रक्रिया के अलावा किसी अन्य माध्यम से तबादले के लिए प्रयास करता पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस नई नीति के लागू होने के बाद जहां प्रशासन इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम बता रहा है, वहीं कर्मचारी संगठनों में इसे लेकर असंतोष और बहस तेज हो गई है।
मानसून आया नहीं, फिर भी कोटे से 65% ज्यादा बारिश; MP में मौसम का बदला मिजाज

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून ने अभी आधिकारिक तौर पर दस्तक नहीं दी है, लेकिन मौसम ने अपने तेवर पहले ही दिखाने शुरू कर दिए हैं। जून महीने की शुरुआत से ही राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश और तेज आंधी का दौर जारी है। हालात यह हैं कि अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिससे मौसम विभाग भी हैरान है। राज्य के कई जिलों में रविवार को भी तेज बारिश देखने को मिली। खंडवा, जबलपुर और सीहोर जैसे जिलों में झमाझम बारिश ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन साथ ही जनजीवन को भी प्रभावित किया। कई जगहों पर तेज हवाओं के कारण यातायात बाधित हुआ और हाईवे पर जाम जैसी स्थिति बन गई। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय प्रदेश में प्री-मानसूनी गतिविधियां सक्रिय हैं। मानसून की आधिकारिक एंट्री अभी नहीं हुई है, लेकिन वातावरण में नमी और बदलते दबाव के कारण लगातार बारिश हो रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मानसून 15 से 18 जून के बीच मध्यप्रदेश में प्रवेश कर सकता है। भोपाल, आगर-मालवा, शाजापुर और नीमच जैसे जिलों में इस महीने अब तक 2 से ढाई इंच तक बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो सामान्य औसत से काफी अधिक है। वहीं सतना, सीधी, रायसेन, रतलाम, श्योपुर, हरदा और बुरहानपुर जैसे जिलों में भी एक इंच से अधिक बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग ने सोमवार के लिए ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, सागर, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा, बैतूल, खंडवा, खरगोन और बड़वानी सहित कई जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना जताई गई है। लगातार बदलते मौसम ने किसानों और आम लोगों की चिंता भी बढ़ा दी है। जहां एक तरफ बारिश से तापमान में गिरावट आई है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसलों और शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है। कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी बाधित होने की खबरें सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्री-मानसूनी गतिविधियां मानसून के मजबूत संकेत हो सकती हैं, लेकिन इसके साथ ही सावधानी बरतना भी जरूरी है। तेज आंधी और बारिश के दौरान खुले स्थानों से बचने और सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी गई है। फिलहाल प्रदेश में मौसम का यह बदला हुआ मिजाज अगले कुछ दिनों तक जारी रहने की संभावना है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन सावधानी भी जरूरी होगी।
ट्विशा केस: जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, सबूत हैंडलिंग और दस्तावेज़ लीक की जांच तेज

मध्य प्रदेश ट्विशा शर्मा डेथ केस में पुलिस जांच की प्रक्रिया पर कई गंभीर सवाल उठे हैं। हाईकोर्ट में पेश दस्तावेजों के अनुसार सबूतों के हैंडलिंग, केस डायरी की पहुंच और मेडिकल रिकॉर्ड को लेकर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। अब सीबीआई पूरे मामले की हर कड़ी को दोबारा जांच रही है। जांच प्रक्रिया में सामने आई खामियांमामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार जांच के शुरुआती चरण में कई प्रक्रियागत चूक हुईं। 13 मई 2026 को सब-इंस्पेक्टर द्वारा फंदे की रस्सी जब्त की गई थी, लेकिन रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि उसकी पहचान और सीलिंग किसने की। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महत्वपूर्ण सबूत को सीधे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजने के बजाय उसे पुलिस वाहन में रखा गया, जिससे उसकी सुरक्षा और प्रमाणिकता पर सवाल उठे हैं। सबूत की हैंडलिंग पर विवाददस्तावेजों में दावा किया गया है कि रस्सी और अन्य अहम साक्ष्यों को तुरंत एम्स या फॉरेंसिक लैब भेजने की बजाय देर से प्रोसेस किया गया। इस देरी को जांच की गंभीर चूक माना जा रहा है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि जब्ती से जुड़े दस्तावेजों में फंदे की पहचान करने वाले अधिकारी का स्पष्ट रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। केस डायरी और दस्तावेज लीक का आरोपहाईकोर्ट में पेश जवाब में यह भी आरोप लगाया गया है कि केस डायरी से जुड़े दस्तावेज समय से पहले संबंधित पक्षों तक पहुंच गए। इससे जांच की गोपनीयता पर गंभीर सवाल उठे हैं। हालांकि पुलिस या जांच एजेंसियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। सीबीआई की नई जांच दिशासीबीआई अब इस मामले में कई स्तरों पर जांच कर रही है:सबूतों की जब्ती और उनकी सुरक्षा प्रक्रियामेडिकल दस्तावेजों की सत्यताकेस डायरी की गोपनीयताजांच के दौरान की गई प्रशासनिक प्रक्रियाएंसीबीआई ने उस मनोचिकित्सक से भी पूछताछ की है, जिनका नाम इलाज संबंधी दस्तावेजों में सामने आया था। मेडिकल रिकॉर्ड पर भी सवालजांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पीड़िता का वास्तव में इलाज हुआ था या मेडिकल दस्तावेजों का उपयोग कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया गया। डॉक्टर से इलाज, काउंसलिंग और मानसिक स्थिति से जुड़े बिंदुओं पर पूछताछ की गई है, जबकि डॉक्टर ने मरीज की निजी जानकारी साझा करने से इनकार किया है। अग्रिम जमानत और कोर्ट में दलीलेंदस्तावेजों के आधार पर आरोप है कि कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हाईकोर्ट में पहले ही प्रस्तुत की गई, जिसके चलते संबंधित पक्षों को कानूनी लाभ मिला। हाईकोर्ट ने पहले ही इस मामले में अग्रिम जमानत से जुड़ा फैसला सुनाया था, जिसके बाद जांच पर और सवाल उठे। ट्विशा केस अब सिर्फ एक आपराधिक जांच नहीं, बल्कि पुलिस प्रक्रिया, सबूत प्रबंधन और न्यायिक पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बनता जा रहा है। सीबीआई की जांच से यह तय होगा कि चूक लापरवाही थी या किसी बड़े स्तर पर गड़बड़ी।
MP Weather Update: 8 जून को गर्मी और उमस का डबल अटैक, कहीं बादल तो कहीं तेज धूप; मानसून की आहट का इंतजार

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। जून का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में भीषण गर्मी और उमस लोगों को परेशान कर रही है। 8 जून को भी मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहने की संभावना है। राजधानी भोपाल समेत कई शहरों में दिनभर तेज धूप और उमस का असर देखने को मिल सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही राहत का अहसास करा सकती है। मौसम के ताजा संकेत बताते हैं कि भोपाल में सुबह के समय बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी या गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसके बाद दिन चढ़ने के साथ धूप तेज होगी और तापमान तेजी से बढ़ेगा। दोपहर के समय पारा 39 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच सकता है। हवा में नमी अधिक रहने से गर्मी का एहसास वास्तविक तापमान से ज्यादा हो सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में फिलहाल प्री-मानसून गतिविधियां पूरी तरह सक्रिय नहीं हो पाई हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के कई हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसके प्रवेश में कुछ देरी देखने को मिल सकती है। यही कारण है कि लोगों को अभी कुछ और दिनों तक गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है। राजधानी भोपाल के अलावा इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, रीवा और जबलपुर संभाग के कई जिलों में भी मौसम लगभग इसी तरह बना रह सकता है। दोपहर के समय तेज धूप लोगों की परेशानी बढ़ा सकती है, जबकि शाम के समय बादलों की हल्की आवाजाही और तेज हवाएं कुछ राहत दे सकती हैं। मौसम विभाग के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसम किसानों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। खरीफ फसलों की तैयारी कर रहे किसान मानसून की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। यदि मानसून की रफ्तार सामान्य रहती है तो अगले एक-दो सप्ताह में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर 8 जून का दिन मध्य प्रदेश में गर्मी, उमस और मानसून की प्रतीक्षा के बीच गुजरने वाला है। लोगों को राहत की उम्मीद बादलों और संभावित हल्की बारिश से जरूर रहेगी, लेकिन व्यापक बारिश के लिए अभी कुछ और इंतजार करना पड़ सकता है।