तेल-गैस के बाद इंटरनेट पर भी संकट? ईरान के कदम से वैश्विक कनेक्टिविटी पर खतरा, भारत भी प्रभावित हो सकता है

तेहरान। मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सिर्फ तेल और गैस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क पर भी खतरा मंडराने लगा है। ईरान द्वारा हॉर्मुज में ऊर्जा आपूर्ति बाधित करने के बाद अब समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है, तो दुनिया के कई हिस्सों में इंटरनेट सेवाएं ठप हो सकती हैं, जिसका असर India सहित कई देशों की बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं पर पड़ेगा। दो अहम समुद्री रास्ते खतरे मेंरिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कनेक्टिविटी के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गहॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब मार्ग इस समय जोखिम में हैं। इन दोनों इलाकों के समुद्र तल में फाइबर ऑप्टिक केबलों का विशाल नेटवर्क फैला हुआ है, जो यूरोप, एशिया और अफ्रीका को जोड़ता है। बताया जा रहा है कि हॉर्मुज क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों और संभावित सुरंगों के कारण शिपिंग और बीमा कंपनियां पहले ही सतर्क हो गई हैं। वहीं लाल सागर क्षेत्र में Houthis के हमलों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। इंटरनेट की रीढ़ हैं ये केबलसमुद्र के नीचे बिछी ये फाइबर केबलें हजारों किलोमीटर लंबी होती हैं और दुनिया के अधिकांश डेटा ट्रांसफर का आधार हैं। वीडियो कॉल, ईमेल, ऑनलाइन बैंकिंग से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेवाएं—सब कुछ इन्हीं पर निर्भर करता है। हॉर्मुज के संकरे हिस्सों में समुद्र की गहराई लगभग 200 फीट तक ही है, जिससे इन केबलों को निशाना बनाना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। करीब 20 केबलों पर मंडरा रहा खतरालाल सागर और हॉर्मुज क्षेत्र में करीब 20 प्रमुख केबल मौजूद हैं, जिनमें 17 लाल सागर से होकर गुजरती हैं। हॉर्मुज मार्ग में AAE-1, Falcon, Gulf Bridge International और Tata TGN-Gulf जैसी महत्वपूर्ण लाइनें शामिल हैं। ये केबल सीधे तौर पर भारत के अंतरराष्ट्रीय डेटा ट्रैफिक को सपोर्ट करती हैं। डिजिटल दुनिया पर बड़ा असर संभवAmazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियों के मिडिल ईस्ट में स्थापित डाटा सेंटर भी इन्हीं केबलों से जुड़े हैं। ऐसे में अगर कनेक्टिविटी प्रभावित होती है, तो क्लाउड सेवाएं, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, यह संकट दिखाता है कि आधुनिक दुनिया की डिजिटल लाइफलाइन कितनी नाजुक है—जहां एक क्षेत्रीय संघर्ष भी वैश्विक इंटरनेट और अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है।
ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिक नहीं भेजेंगे: ट्रंप का यू-टर्न, बोले-‘कहीं भी सेना तैनात नहीं कर रहा’

वॉशिंगटन। अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच बड़ा बयान देते हुए साफ कर दिया है कि वह ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिकी जमीनी सैनिक नहीं भेजेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है, जब युद्ध चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और अमेरिका की भूमिका को लेकर अटकलें तेज थीं। व्हाइट हाउस में Sanae Takaichi के साथ बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं… और अगर भेज भी रहा होता, तो आपको नहीं बताता। लेकिन स्पष्ट कर दूं—हम वहां सैनिक नहीं भेज रहे।” गौरतलब है कि युद्ध की शुरुआत के कुछ दिन बाद ट्रंप ने जमीनी सेना भेजने की संभावना से इनकार नहीं किया था, लेकिन अब उनका रुख बदलता नजर आ रहा है। ‘जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे’हालांकि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका पूरी तरह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि हालात के मुताबिक जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। ट्रंप लंबे समय से विदेशी जमीन पर अमेरिकी सैनिक भेजने के आलोचक रहे हैं। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने Afghanistan से सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया शुरू की थी। ईरान को बताया बड़ा खतराट्रंप ने Iran को वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताते हुए कहा कि “जब यह अभियान खत्म होगा, तो दुनिया पहले से ज्यादा सुरक्षित होगी।” उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत का जिक्र करते हुए दावा किया कि हालिया हमलों में दागे गए 114 रॉकेट्स को एयर डिफेंस सिस्टम ने सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया। जंग लंबी खिंचने के संकेत28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में United States और Israel एक ओर हैं, जबकि दूसरी ओर Iran डटा हुआ है। शुरुआती आकलन था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन जल्दी हो सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल हवाई हमलों के जरिए न तो सत्ता परिवर्तन संभव है और न ही ईरान के संवर्धित यूरेनियम कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है, क्योंकि इसे गहरे भूमिगत ठिकानों में सुरक्षित रखा गया है। जमीनी युद्ध से क्यों बच रहा अमेरिका?विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में जमीनी युद्ध बेहद महंगा और जोखिम भरा साबित हो सकता है। वहां की भौगोलिक परिस्थितियां और सैन्य ताकत अमेरिकी सेना के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में ट्रंप का सैनिक न भेजने का फैसला संकेत देता है कि अमेरिका फिलहाल इस युद्ध को सीमित दायरे में रखकर ही आगे बढ़ना चाहता है, ताकि बड़े और लंबे जमीनी संघर्ष से बचा जा सके।
लेबनान में लाइव रिपोर्टिंग के दौरान धमाका, पत्रकार के पीछे गिरी इजरायली मिसाइल; दो घायल

तेल अवीव/बेरूत। दक्षिण लेबनान से सामने आए एक वीडियो ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्टिंग के दौरान एक पत्रकार के ठीक पीछे मिसाइल गिरने का दृश्य कैमरे में कैद हुआ, जिसमें दो पत्रकार घायल हो गए। वीडियो में RT के पत्रकार Steve Sweeney लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे। तभी अचानक वे झुकते हैं और उनके पीछे कुछ ही दूरी पर मिसाइल आकर फट जाती है। इस विस्फोट में स्टीव स्विनी और उनके कैमरामैन Ali Rida घायल हो गए। दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। ‘PRESS’ पहचान के बावजूद हमला?रिपोर्ट के अनुसार, टीम दक्षिण लेबनान के अल-कासमिया ब्रिज के पास कवरेज कर रही थी। कैमरामैन अली रिदा ने दावा किया कि उनकी टीम स्पष्ट रूप से ‘PRESS’ चिन्ह के साथ काम कर रही थी, इसके बावजूद हमला हुआ। Russia से जुड़े अधिकारियों ने भी आशंका जताई है कि यह हमला जानबूझकर किया गया हो सकता है। Margarita Simonyan ने सोशल मीडिया पर बताया कि कथित तौर पर Israel Defense Forces (IDF) के फाइटर जेट ने उस वाहन को निशाना बनाया, जिसमें पत्रकार सवार थे। इजरायल का जवाबवायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए Israel Defense Forces ने कहा कि जिस कासमिया क्रॉसिंग क्षेत्र में पत्रकार मौजूद थे, उसे पहले ही खाली करने की चेतावनी जारी की गई थी। सेना के अनुसार, पर्याप्त समय देने के बाद ही हमला किया गया और इजरायल पत्रकारों को निशाना नहीं बनाता तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कार्रवाई करता है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब Israel और Lebanon के बीच तनाव चरम पर है। इस वीडियो ने युद्ध क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
2 मुस्लिम देशों की ईरान को चेतावनी, क्या सऊदी-पाकिस्तान जंग में उतरेंगे

रियाद। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान के खिलाफ 12 मुस्लिम देशों ने एकजुट होकर कड़ा रुख अपनाया है। साउदी अरब की राजधानी में हुई अहम बैठक में पाकिस्तान समेत कई देशों के विदेश मंत्रियों ने ईरान से तुरंत हमले रोकने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की मांग की। बैठक में । अज़रबैजान, बहरीन, मिस्र, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सीरिया, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल रहे। सभी ने नागरिक ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की। ईरान को सख्त संदेश बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में तेल संयंत्रों, हवाई अड्डों, रिहायशी इलाकों और राजनयिक मिशनों पर हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया। देशों ने United Nations चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का भी जिक्र किया और United Nations Security Council के प्रस्तावों के पालन की मांग की। साथ ही ईरान से हॉर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे रणनीतिक समुद्री मार्गों में हस्तक्षेप न करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की अपील की गई। सऊदी विदेश मंत्री की कड़ी चेतावनीसऊदी विदेश मंत्री Faisal bin Farhan Al Saud ने साफ कहा कि ईरान पर भरोसा “पूरी तरह खत्म” हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेहरान दबाव और आक्रामक रणनीति के जरिए क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जरूरत पड़ी तो सऊदी अरब “उचित कदम” उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई की संभावना की ओर इशारा माना जा रहा है। क्या पाकिस्तान भी जंग में खिंच सकता है?विश्लेषकों का मानना है कि यदि Saudi Arabia सीधे संघर्ष में उतरता है, तो उसका रक्षा सहयोग समझौता Pakistan के साथ सक्रिय हो सकता है। ऐसे में इस्लामाबाद भी इस टकराव का हिस्सा बन सकता है, जिससे संघर्ष और व्यापक हो सकता है। खाड़ी देशों पर हमलों से बढ़ा तनावरिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी छह देशों को निशाना बनाया है। Abu Dhabi और Dubai में हुए हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई, जबकि Kuwait, Oman और Bahrain में भी नुकसान की खबरें हैं। Qatar के अल-उदीद एयरबेस और Saudi Arabia के तेल ठिकानों पर भी हमले किए गए, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थिति बेहद संवेदनशीलमौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अगर सऊदी अरब और उसके सहयोगी सीधे मैदान में उतरते हैं, तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है—जिसके वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक असर भी गंभीर हो सकते हैं।
Eid 2026: भारत में ईद-उल-फितर 21 मार्च को, पूरे 30 रोजे रखे गए

नई दिल्ली। भारत में ईद उल फितर 2026 की तारीख तय हो गई है। इस बार रमजान के पूरे 30 रोजे रखे गए हैं। 20 मार्च को 30वां रोजा रखा गया और अगले दिन यानी 21 मार्च शनिवार को देशभर में ईद मनाई जाएगी। यह घोषणा धार्मिक कमेटी और जामा मस्जिद दिल्ली के नायब इमाम सैयद उसामा शाबान बुखारी ने की। भारत में ईद की तारीख चांद दिखने पर निर्भर करती है। इस बार 19 मार्च को शव्वाल का चांद नजर नहीं आया जिससे रमजान का आखिरी रोजा बढ़ गया। इसके बाद 20 मार्च को चांद देखने के बाद ईद 21 मार्च को मनाने का फैसला लिया गया। वहीं सऊदी अरब में 20 मार्च को ही ईद उल फितर मनाई जा रही है।ईद उल फितर का महत्व ईद उल फितर इस्लाम धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। इसका मतलब है रोजा खोलने का त्योहार । यह रमजान के पूरे महीने रोजे रखने के बाद मनाया जाता है और अल्लाह का धन्यवाद अदा करने का अवसर होता है। यह पर्व खुशियों और भाईचारे का प्रतीक है। इतिहास में ईद उल फितर की शुरुआत 624 ईस्वी में पैगंबर हजरत मुहम्मद ने मदीना में की थी। हिजरत के बाद मुसलमानों ने पहला रमजान पूरा किया और तब ईद उल फितर और ईद उल अजहा दो पर्व तय किए गए। इस बार के ईद समारोह के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ की व्यवस्था की जा रही है। लोग अपने घरों में भी सजावट और ईद की मिठाइयों की तैयारी में जुटे हैं।
दिमाग तेज और नींद बेहतर, ब्राह्मी दूध के फायदे और सेवन का सही तरीका

नई दिल्ली आयुर्वेद में ब्राह्मी को मस्तिष्क के लिए संजीवनी माना गया है। यह एक ऐसी स्वास्थ्यवर्धक औषधि है, जो मानसिक स्वास्थ्य, नींद और याददाश्त को बेहतर बनाने में बेहद प्रभावशाली है। अगर दूध इसके साथ लिया जाए तो इसके फायदे और भी बढ़ जाते हैं। ब्राह्मी दूध कैसे बनायेएक दूध के थैले को अच्छी तरह से गर्म करें और इसमें आधे हिस्से में ब्राह्मी केक शामिल हों। स्वाद और अतिरिक्त लाभ के लिए इसमें कालीमिर्च दाल भी बनाई जा सकती है। यह रात में सोने से लगभग एक घंटा पहले घटित होता है। नींद में सुधार और तनाव से राहतब्राह्मी दूध का नियमित सेवन दिमाग को शांत करता है और तनाव को कम करता है। इससे (इन्सानानंद न आने की समस्या) राहत मिलती है और गहराई में, सार्वभौम भरी नींद आती है। याददाश्त और फोकस बढ़ाने में मददब्राह्मी मस्तिष्क की साबिरा का प्रदर्शन सबसे अच्छा है। यह याददाश्त तेज करने, ध्यान केंद्रित करने और एकाग्रता बढ़ाने में सहायक है–विशेषकर छात्रों और मानसिक काम करने वालों के लिए। तंत्रिका तंत्र और थकान पर असरयह तंत्रिका तंत्र को आराम देता है, जिससे चिंता कम होती है और शरीर की थकान दूर होती है। लगातार कमजोरी या मानसिक थकावट में भी यह उपयोगी है। त्वचा और शरीर पर भी पड़ता है असरब्राह्मी रक्त को शुद्ध करने में मदद करता है, जिससे त्वचा में निखार आता है और शरीर अंदर से स्वस्थ रहता है। सावधानी भी जरूरीहालाँकि ब्राह्मी दूध फायदेमंद है, लेकिन गर्भवती महिलाओं या किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को इसका सेवन पहले डॉक्टर की सलाह से जरूर करना चाहिए। साथ ही, अधिक मात्रा में सेवन से परहेज।
फाइबर का पावरहाउस कटहल, गर्मियों में सेहत और दिल दोनों का रखे ख्याल

नई दिल्ली गर्मियों के मौसम में आसानी से मिलने वाला कटहल सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि सेहत का भी खजाना है। इसे ‘सब्जियों का सुपरफूड’ कहा जाता है, क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में वनस्पति, विटामिन और मसाले पाए जाते हैं। सही तरीके से बनाया जाए तो यह शरीर को पोषण देने के साथ कई आश्रय से मुक्ति में भी मदद करता है। कार्बोहाइड्रेट का सबसे अच्छा स्रोत, पाचन तंत्रकटहल में मौजूद उच्च कार्बोहाइड्रेट पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। यह शौचालय की सफाई में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत दिलाता है। नियमित सेवन से पेट साफ रहता है और स्वास्थ्य बेहतर रहता है। दिल के लिएउपयोगी कटहल में असिस्ट की अच्छी मात्रा होती है, जो ब्लड यूनिट को नियंत्रित करने में मदद करती है। इससे जुड़े दिल से जुड़े खतरे कम होते हैं और लेवल स्तर भी स्थिर रहते हैं। आवेदकों के लिए भी उपयोगीकम गैलेक्टेमिक वैज्ञानिकों के कारण कटहल ब्लड शुगर को तेजी से नहीं मिला। इसलिए सीमित मात्रा में इसका सेवन जहर के रूप में भी हानिकारक माना जाता है। त्वचा और बालों को सुंदर बनाया जाता हैइसमें मौजूद विटामिन ए और सी त्वचा को निखारने और बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं। यह शरीर को पोषण से लेकर चमक बढ़ाने में सहायक होता है। सेवन में सावधानी बरतेंहालाँकि कटहल मछली है, लेकिन यह भारी और पतली होती है। जिन लोगों को गैस, पेट या पाचन संबंधी समस्या होती है, उन्हें इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। यह आसानी से पचता है।
International Energy Agency की बड़ी सलाह, ऊर्जा संकट से निपटने के लिए वर्क फ्रॉम होम से आधुनिक कुकिंग तक सुझाव

नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के बीच इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने दुनिया को संभावित ऊर्जा संकट से निपटने के लिए कई बड़े सुझाव दिए हैं। एजेंसी के अनुसार, मौजूदा हालात वैश्विक तेल बाजार के इतिहास के सबसे बड़े सप्लाई संकटों में से एक बन सकते हैं, जिसका असर आने वाले समय में अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी साफ दिखाई देगा। IEA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर फतिह बिरोल ने कहा कि अगर इस संकट का जल्द समाधान नहीं हुआ, तो ऊर्जा की सप्लाई में भारी उछाल और सप्लाई में कमी जैसे हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में ज़िलों, कंपनियों और आम लोगों को मिलकर ईंधन की खपत कम करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वर्क फ्रॉम होम और ट्रांसपोर्ट में कटौती पर जोरIEA ने सुझाव दिया है कि जहां संभव हो, लोगों को वर्क फ्रॉम होम अपनाना चाहिए। इससे रोजाना ऑफिस आने-जाने में खर्च होने वाले ईंधन की बचत होगी। साथ ही अनावश्यक हवाई लेवल को कम करने की भी सलाह दी गई है, क्योंकि इससे जेट ईंधन की मांग में कमी आएगी और ऊर्जा संकट का दबाव घटेगा। आधुनिक कुकिंग और एलपीजी पर निर्भरता कम करने की सलाहरिपोर्ट में कहा गया है कि एलपीजी की बढ़ती मांग को देखते हुए लोगों को इलेक्ट्रिक कुकिंग जैसे विकल्प अपनाने चाहिए। इससे गैस की खपत कम होगी और जरूरी सेवाओं के लिए एलपीजी की उपलब्धता बनी रहेगी। उद्योगों को भी एलपीजी के विकल्प जैसे नेफ्था का उपयोग करने की सलाह दी गई है। ट्रांसपोर्ट सेक्टर में बदलाव जरूरीआईईए ने सड़क परिवहन में ईंधन बचाने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। इसमें निजी गाड़ियों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाना, कार शेयरिंग को बढ़ावा देना और हाईवे पर गाड़ियों की स्पीड कम करना शामिल है। साथ ही माल गाड़ियों में दक्षता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। ग्रामीणों को निभानी होगी बड़ी भूमिकारिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीणों को लक्षित सहायता योजनाएं लागू करनी चाहिए, ताकि जागरूकता लोगों को ही मदद मिले और संसाधनों का सही उपयोग हो सके। साथ ही जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को ऊर्जा बचाने के लिए प्रेरित करना भी जरूरी है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर असर से बढ़ती चिंताआईईए के अनुसार, वैश्विक तेल संसाधनों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरता है, लेकिन मौजूदा तनाव के चलते इस अहम मार्ग पर बिगड़ी हुई प्रभावित हुई है। आमतौर पर यहां से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल तेल गुजरता है, लेकिन परिस्थितियां बिगड़ने से संसाधनों में बड़ी बाधाएं देखी जा रही है।
रिपोर्ट का दावा, अपस्ट्रीम ऑयल और सर्विस कंपनियों को मिल सकता है बड़ा बूस्ट

नई दिल्ली .खाड़ी देश में एनर्जी इंफ्रा कंपनी पर उठे दावे के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल और गैस की कमी में तेजी से अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियों को फायदा हो सकता है, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों और अंतिम कंपनियों की मुश्किलें बढ़ने का खतरा है। फायदे में कौन, नुकसान में कौन?एपमस्ट्री निर्माता वे होते हैं जो कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं, इसलिए कीमत बढ़ने पर उनकी आय सीधे तौर पर बहुत कम हो जाती है। वहीं, डाउनस्ट्रीम बिल्डर-जो रिफाइनिंग और वितरण का काम करता है-उच्च लागत के कारण दबाव में है। ऊर्जा क्षेत्र में तेजी का असरसिस्टेमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि ऊर्जा क्षेत्र में वृद्धि और विक्रय में, विशेष रूप से भारत जैसे महत्वपूर्ण देशों में, उग्रवाद का प्रभाव वैश्विक स्तर पर है। रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में उत्पादित और सैटलाइट को पूरी तरह से बहाल होने में लंबा समय लग सकता है, जिससे लंबे समय तक बाजार में मिश्रण बना रह सकता है। तेल मिश्रण और आय में बड़ी गिरावटरिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च के आरंभ में भारत के कच्चे तेल का आंकड़ा 1.9 मिलियन प्रति सप्ताह था, जबकि फरवरी में यह करीब 25 मिलियन प्रति सप्ताह था। वैश्विक स्तर पर भी वैश्विक स्तर पर गिरावट आई है – मार्च के दूसरे सप्ताह में यह आंकड़ा 184 मिलियन प्रति सप्ताह रहा, जो फरवरी में लगभग 268 मिलियन प्रतिशत था। सऊदी अरब, इराक़ और संयुक्त अरब अमीरात से कब्रिस्तान सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है। इसके विपरीत, युनाइटेड स्टेट्स से तेल कंबाइंड में प्लांटेशन देखने को मिला है, जो ग्लोबल सप्लाई बैलेंस बनाने की कोशिश का संकेत है। एलएनजी की फैक्ट्री, व्यवसायियों पर दबाव रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे देशों में एल इजाज़त की कमी है। इसकी कंपनी एलएलसी की प्रॉपर्टी तेजी से बढ़कर 10 डॉलर प्रति माह बीटीयू से करीब 20 डॉलर प्रति बीटीयू तक पहुंच गई है। भारत जैसा राष्ट्र पर प्रभावशालीअंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा संरक्षण के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। कच्चे तेल और गैस का सीधा असर पेट्रोल-डीजल, बिजली और अन्य उद्योगों की लागत पर पड़ता है, जिससे संतुलन बढ़ सकता है। स्थिर उद्यमों में जहां अपस्ट्रीम कंपनी के लिए यह अवसर बन सकता है, वहीं डाउनस्ट्रीम सेक्टर और सामान्य उद्यमों के लिए नौकरियां बढ़ने वाली हैं।
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत का कदम, अमेरिका से LPG आयात शुरू

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत सरकार ने गैस स्टार्टअप को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने साफ किया है कि अब भारत मध्य पूर्व के साथ-साथ संयुक्त राज्य अमेरिका से भी तेल (एलपीजी) का आयात किया जा रहा है, ताकि रसायन शास्त्र चेन सुचारु बने रहे और बौद्ध धर्म को किसी तरह की परेशानी न हो। सरकार का भरोसा: देश में गैस की कोई कमी नहींपेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि स्थायी दरें तो जरूर हैं, लेकिन देश में किसी भी गैस वितरक पर गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि हॉस्टल की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है और चिंता की कोई जरूरत नहीं है। ऑफ़लाइन फ़्रेम और प्लेटफ़ॉर्म मजबूत सिस्टमसरकार के मुताबिक, माइक्रोसॉफ्ट का ऑफलाइन स्टॉक 94% तक पहुंच चुका है, जबकि करीब 83% स्टूडियो ऑथेंटिकेशन कोड के जरिए जा रहा है। यह वितरण प्रणाली अधिक बंधन और तेज बनी हुई है। विचारधारा में दस्तावेज़ी काम, डेमोक्रेट सामान्यसुझाव शर्मा ने बताया कि लोगों में तनाव कम हो रहा है और सामान्य स्तर का समर्थन किया जा रहा है। रविवार को करीब 57 लाख रिफिल शॉकर का स्टॉक बंद हो गया, जो सामान्य मांग के मुताबिक है। पीएनजी और सीएनजी की किताब 100% जारीसरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू पीएनजी और सीएनजी की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है। लोगों की ओर से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वहां की जगह बारूद का इस्तेमाल किया जाए। पिछले तीन दिनों में 5,600 से अधिक उपभोक्ता विक्रय में बदलाव हुए हैं। तेल का ढांचा तैयार किया गयासरकार ने ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए संसाधनों में विविधता लाई है। अब भारत का करीब 70% कच्चा तेल मध्य पूर्व से बाहर हो रहा है, जिसमें रूस और नाइजीरिया जैसे देश शामिल हैं। ब्लैक मार्केटिंग पर हजारों इंट्रेस्टसरकार ने राज्य को जामखोरी और कालाबाजारी पर रोक के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। संस्थागत में लगभग 6,000 आक्रमणकारी मारे गए, जिनमें बड़ी संख्या में गैस में ज़ब्तियाँ शामिल थीं। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा एक्शन देखने को मिला। पोर्टेबल और इंजीनियर सुरक्षितबंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं। वर्तमान में 22 भारतीय जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास मौजूद हैं और दरवाजों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि स्थिर वैश्विक तनाव के बावजूद देशों में गैस और ऊर्जा के उत्सर्जन पर पूरी तरह से नियंत्रण है और किसी भी संकट से मुक्ति के लिए ठोस तैयारी की गई है।