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डॉलर की मजबूती के दबाव में रुपया, अमेरिकी ब्याज दर संकेतों से बढ़ी चिंता; विदेशी निवेश के बावजूद कमजोरी बरकरार

नई दिल्ली । भारतीय मुद्रा बाजार में गुरुवार को रुपये पर दबाव देखने को मिला और घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर कारोबार की शुरुआत करती दिखाई दी। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक के सख्त संकेतों और निवेशकों की बदलती धारणा के बीच रुपया एक बार फिर दबाव में आ गया है। मुद्रा बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर उभरते बाजारों की मुद्राओं पर पड़ रहा है। हाल ही में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति बैठक के बाद बाजार की धारणा में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया है। फेड अधिकारियों के बयानों से संकेत मिले हैं कि अमेरिका में ब्याज दरें अपेक्षा से अधिक समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं। महंगाई को नियंत्रित करने की प्राथमिकता के कारण अमेरिकी केंद्रीय बैंक फिलहाल नरम रुख अपनाने के मूड में नहीं दिख रहा है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशक डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं तो अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को वहां बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना दिखाई देती है। इसका परिणाम यह होता है कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से पूंजी का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और स्थानीय मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। भारतीय रुपया भी इसी व्यापक वैश्विक प्रवृत्ति का सामना कर रहा है। हालांकि पिछले कुछ दिनों में रुपये ने मजबूती के संकेत भी दिए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ भू-राजनीतिक तनावों में कमी और पश्चिम एशिया से जुड़ी सकारात्मक खबरों के कारण निवेशकों का जोखिम लेने का रुझान बढ़ा था। इसके चलते रुपये में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया था। लेकिन अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े नए संकेतों ने बाजार की दिशा फिर बदल दी और डॉलर को मजबूती मिलने लगी। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी रुपये की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में शामिल हैं। हाल के महीनों में भारतीय ऋण बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे घरेलू मुद्रा को कुछ हद तक समर्थन मिला है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विदेशी निवेश का प्रवाह लगातार बना रहता है तो रुपये को स्थिरता मिल सकती है और अत्यधिक उतार-चढ़ाव से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी भारतीय मुद्रा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। भारत दुनिया के बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है। यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आती है तो इससे देश का आयात बिल घट सकता है और रुपये पर दबाव कम हो सकता है। वहीं तेल की कीमतों में तेजी आने पर मुद्रा बाजार में चिंता बढ़ सकती है। बाजार सहभागियों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की आगामी टिप्पणियों और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठकों के नतीजों पर बनी हुई है। निवेशक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या होगी और इसका असर वैश्विक पूंजी प्रवाह पर किस प्रकार पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में रुपये की दिशा काफी हद तक वैश्विक आर्थिक माहौल, विदेशी निवेश के रुझान और ऊर्जा बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और निवेश प्रवाह मजबूत बना रहता है तो भारतीय मुद्रा को सहारा मिल सकता है। फिलहाल बाजार सतर्क नजर आ रहा है और निवेशक हर नए संकेत पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

85 वर्षीय किसान की जमीन पर फर्जी अनुबंध का आरोप: कोर्ट के आदेश पर FIR, दस्तावेजों की जांच में जुटी पुलिस

मध्यप्रदेश । शिवपुरी में एक बुजुर्ग किसान की जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ग्वालियर बायपास रोड निवासी 85 वर्षीय किसान रामजीलाल वर्मा की जमीन का कथित रूप से फर्जी अनुबंध कराने के आरोप में कोतवाली थाना पुलिस ने न्यायालय के निर्देश पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय के आदेश के बाद की गई है। पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में शिवपुरी के किड्स गार्डन स्कूल के पास रहने वाले शिवकुमार गौतम को आरोपी बनाया गया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) और 336(3) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले ने शहर में जमीन संबंधी विवादों और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। शिकायतकर्ता रामजीलाल वर्मा के अनुसार, उनके नाम राजस्व अभिलेखों में सर्वे नंबर 609/2 की भूमि दर्ज है और वे इसके वैध स्वामी हैं। आरोप है कि फरवरी 2024 में शिवकुमार गौतम ने इस भूमि को अपनी बताते हुए हेमंत कुमार गुप्ता के साथ अनुबंध कर लिया। शिकायत में दावा किया गया है कि यह अनुबंध पूरी तरह फर्जी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था। रामजीलाल वर्मा का कहना है कि इस कथित अनुबंध का उद्देश्य उनकी संपत्ति पर अवैध दावा स्थापित करना और आर्थिक लाभ प्राप्त करना था। जब उन्हें इस पूरे मामले की जानकारी मिली तो उन्होंने संबंधित अधिकारियों से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। बताया गया है कि रामजीलाल वर्मा ने पहले फिजिकल थाना, कोतवाली थाना और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय की उम्मीद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और परिवाद प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन किया। इसके बाद भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत कोतवाली थाना पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। न्यायालय के आदेश के बाद पुलिस ने विधिवत मामला दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। कोतवाली थाना पुलिस अब कथित अनुबंध से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है। जांच के दौरान यह भी देखा जाएगा कि अनुबंध किन परिस्थितियों में तैयार किया गया, उसमें प्रयुक्त दस्तावेजों की वैधता क्या है और कहीं किसी प्रकार की जालसाजी या कूटरचना तो नहीं की गई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच प्रारंभिक चरण में है और पुलिस दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि भूमि संबंधी मामलों में दस्तावेजों की पारदर्शिता और सत्यापन कितना महत्वपूर्ण है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और इस पूरे प्रकरण में किसकी क्या भूमिका रही।

शिवपुरी में अवैध रेत माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई: सिंध नदी घाट से 13 वाहन जब्त, मचा हड़कंप

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। बदरवास थाना क्षेत्र स्थित सिंध नदी के रिजौदी घाट पर बुधवार रात माइनिंग विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रेत खनन और परिवहन में लगे 13 वाहनों को जब्त कर लिया। इस कार्रवाई में 10 ट्रैक्टर और 3 हाइड्रा वाहन शामिल हैं। प्रशासन की इस सख्ती से क्षेत्र में सक्रिय रेत माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार, माइनिंग विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि सिंध नदी के विभिन्न घाटों से बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। इन शिकायतों के आधार पर माइनिंग विभाग ने बदरवास थाना पुलिस के सहयोग से संयुक्त कार्रवाई की योजना बनाई। बुधवार देर रात जब टीम रिजौदी घाट पहुंची तो वहां अवैध रूप से रेत निकालने और ढोने का काम चल रहा था। अचानक हुई छापेमारी को देखकर वाहन चालक और खनन से जुड़े लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद माइनिंग विभाग और पुलिस ने मौके पर मौजूद 13 वाहनों को जब्त कर लिया। सभी जब्त वाहनों को सुरक्षा की दृष्टि से बदरवास थाना परिसर में पुलिस की निगरानी में खड़ा कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि रिजौदी घाट पर की गई यह कार्रवाई हाल के समय में जिले की सबसे बड़ी खनन विरोधी कार्रवाइयों में से एक है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे अवैध खनन करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा और भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर अंकुश लगेगा। माइनिंग इंस्पेक्टर ऋषभ दीक्षित ने बताया कि यह कार्रवाई कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश पर की गई है। उन्होंने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ जिलेभर में लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां भी शिकायतें मिल रही हैं, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है। रिजौदी घाट से कुल 13 वाहन जब्त किए गए हैं और उनके खिलाफ नियमानुसार प्रकरण तैयार किए जा रहे हैं। माइनिंग विभाग की कार्रवाई केवल रिजौदी घाट तक सीमित नहीं रही। विभाग ने गोपालपुर थाना क्षेत्र में भी अवैध उत्खनन के दौरान एक जेसीबी मशीन को पकड़ा है। अधिकारियों के अनुसार, जिले के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध खनन पर नजर रखने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जब्त किए गए वाहनों और मशीनों से जुड़े सभी मामलों की रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद संबंधित वाहन मालिकों और खनन गतिविधियों में शामिल लोगों पर नियमानुसार जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि शिवपुरी जिले में सिंध नदी के कई घाट लंबे समय से अवैध रेत कारोबार का केंद्र बने हुए हैं। प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है, लेकिन इसके बावजूद अवैध खनन की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में ताजा कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

कच्चे तेल में नरमी के बावजूद तुरंत नहीं घटेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सरकार ने बताया 12,000 करोड़ रुपये के बोझ और वैश्विक हालात का पूरा गणित

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कच्चे तेल के सस्ता होने से उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिलना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि घरेलू ईंधन कीमतों का निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें वैश्विक बाजार की स्थिति के साथ-साथ आयात, परिवहन, कर व्यवस्था और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से दिए गए बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार तक पहुंचने में समय लगता है। कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल तुरंत रिफाइनरियों तक नहीं पहुंचता, बल्कि इसके आयात, परिवहन और प्रसंस्करण की पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं। ऐसे में वैश्विक बाजार में आई तात्कालिक नरमी का सीधा प्रभाव घरेलू खुदरा कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता। सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे आयात लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अतिरिक्त वित्तीय दबाव अपने ऊपर लिया। सरकारी आकलन के अनुसार, बढ़ी हुई लागत का असर सीमित रखने के प्रयास में केंद्र को लगभग 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। सरकार का मानना है कि इस आर्थिक दबाव की भरपाई और बाजार संतुलन बनाए रखने के लिए मूल्य निर्धारण में सावधानी बरतना आवश्यक है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में थोड़ी गिरावट आते ही खुदरा ईंधन दरों में तत्काल कटौती करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव से निर्धारित नहीं होतीं। इसमें रिफाइनिंग लागत, फ्रेट चार्ज, बीमा, मुद्रा विनिमय दर, केंद्रीय और राज्य कर तथा विपणन खर्च भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनमें से किसी एक क्षेत्र में लागत बढ़ती है तो उसका असर अंतिम कीमतों पर पड़ सकता है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी नरम रुख के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति के संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया है, जिससे तेल कीमतों पर दबाव घटा है। हालांकि ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे कारक आने वाले समय में तेल कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर किसी भी त्वरित निर्णय की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है।

शिवपुरी ब्लास्ट में दूसरी मौत: 11 साल के मासूम ने तोड़ा दम, 4 साल की बच्ची की पहले ही जा चुकी थी जान

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र स्थित गुड़र गांव में हुए दर्दनाक ब्लास्ट ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। बुधवार सुबह हुए इस भीषण हादसे में गुरुवार को दूसरी मौत हो गई। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय कल्ला आदिवासी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले हादसे में 4 वर्षीय जानवी प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो मासूमों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे गुड़र गांव में स्थित प्राणसिंह प्रजापति के घर में अचानक जोरदार धमाका हुआ। उस समय घर में खाना बनाने का काम चल रहा था। धमाका इतना भीषण था कि मकान की छत और दीवारें पलभर में ढह गईं। विस्फोट के साथ आग की तेज लपटें उठीं और आसपास का क्षेत्र दहल उठा। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हादसे के समय घर में मौजूद 4 वर्षीय जानवी प्रजापति मलबे के नीचे दब गई थी। ग्रामीणों और बचाव दल ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। वहीं पड़ोस में रहने वाला 11 वर्षीय कल्ला आदिवासी भी उस समय घर के भीतर मौजूद था और विस्फोट में गंभीर रूप से झुलस गया था। कल्ला को गंभीर हालत में पहले शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति नाजुक देखते हुए उसे तत्काल ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर कर दिया था। पिछले दो दिनों से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन गुरुवार को उसने भी जिंदगी की जंग हार दी। उसके निधन की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। हादसे में रौशनी प्रजापति, प्राण सिंह प्रजापति और शिवा प्रजापति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तीनों का उपचार ग्वालियर में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन और पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि घर में रखे पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर में विस्फोट के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि अभी तक ब्लास्ट के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों की टीम विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट की असली वजह सामने आ सकेगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया और स्थानीय विधायक प्रीतम लोधी ने मौके का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। वहीं प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। दो मासूमों की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। गांव के लोग अब भी उस भयावह धमाके को याद कर सहम जा रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने कुछ ही पलों में दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया।

उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल

मध्यप्रदेश । उज्जैन में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और यातायात पुलिस पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। स्कूल खुलने के साथ ही शहर में छात्र परिवहन वाहनों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बुधवार और गुरुवार को यातायात पुलिस द्वारा विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया, जिसके तहत करीब 70 स्कूल बसों और अन्य छात्र परिवहन वाहनों का निरीक्षण किया गया। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि नए सत्र के पहले ही सप्ताह में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है। मोहन नगर चौराहे पर आयोजित इस विशेष जांच अभियान में ट्रैफिक डीएसपी विक्रम कनपुरिया, डीएसपी दिलीप परिहार और यातायात थाना प्रभारी सूबेदार इंद्रपाल सिंह सहित पुलिस अधिकारियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने एक-एक वाहन की बारीकी से जांच कर सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया। जांच के दौरान स्कूल बसों की फिटनेस को विशेष रूप से परखा गया। साथ ही यह भी देखा गया कि वाहन के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरों जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और परिचालकों की उपलब्धता की भी जानकारी ली। यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया है। स्कूल वाहन संचालकों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन वाहनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यह भी समझाया कि बच्चों के परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण बेहद आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए। यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। समय-समय पर स्कूल बसों और छात्र परिवहन वाहनों की जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह अभियान स्कूल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल वाहन संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।

रणथंभौर एक्सप्रेस में धुआं उठते ही मची भगदड़: यात्री पटरियों पर कूदे, 10 मिनट बाद दूसरी ट्रेन पहुंची, मुरैना हादसे जैसी स्थिति बनी

मध्यप्रदेश । रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र स्थित लूणी-रीछा स्टेशन के पास गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंदौर से जोधपुर जा रही रणथंभौर एक्सप्रेस के जनरल कोच के पहियों से अचानक धुआं निकलने लगा। सुबह करीब पौने 10 बजे हुई इस घटना ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान सहित ट्रेन से उतरकर पटरियों पर कूद पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि जनरल कोच के पहियों से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ यात्रियों ने इसे आग लगने की घटना समझ लिया, जिसके बाद कोचों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते यात्री ट्रेन से बाहर निकलने लगे और कई लोग सीधे रेलवे ट्रैक पर उतर गए। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लूणी-रीछा स्टेशन पर रणथंभौर एक्सप्रेस का निर्धारित ठहराव नहीं है। अचानक सिग्नल रेड होने के कारण लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। इसी दौरान एक पहिए के हार्ड एक्सल पर ब्रेक शू जाम होकर चिपक गया, जिससे अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ और धुआं निकलने लगा। हालांकि यह तकनीकी खराबी थी और आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी अग्निशमन यंत्र लेकर मौके पर पहुंचे और तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से धुआं उठने की समस्या पर काबू पाया गया। करीब 20 मिनट तक ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही, जिसके बाद तकनीकी जांच पूरी कर उसे सुरक्षित आगे के लिए रवाना कर दिया गया। इस घटना के दौरान सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यात्रियों की अफरा-तफरी के बीच करीब 10 मिनट बाद कोटा-उज्जैन मेमू ट्रेन भी उसी स्टेशन पर पहुंच गई। सौभाग्य से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन हालात कुछ समय के लिए बेहद खतरनाक बन गए थे। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में बिना पुष्टि के पटरियों पर न उतरें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। यह घटना हाल ही में मुरैना में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे की याद भी ताजा कर गई। 14 जून को खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद आग लगने की अफवाह फैल गई थी। घबराकर कई यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए थे, जहां दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे ने रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। गौरतलब है कि इसी लूणी-रीछा क्षेत्र में पिछले महीने राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। ऐसे में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस बार रेलवे कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यात्रियों में भय और असुरक्षा की भावना जरूर देखने को मिली।

महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है। तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया। विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है। मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं। सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है। उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं। गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।

पति और सास की प्रताड़ना से टूटी जिंदगी: आत्महत्या के बाद दर्ज हुई FIR, जांच में सामने आए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश । इंदौर में विवाहिता आत्महत्या के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच के बाद ससुराल पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विजयनगर और तिलक नगर थाना क्षेत्रों से जुड़े इन मामलों में पुलिस ने मर्ग जांच, साक्षियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर घरेलू प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला मामला विजयनगर थाना क्षेत्र का है, जहां भमौरी स्थित न्यू अंजनी नगर में रहने वाली सीमा जैन ने 19 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, वहीं मृतका के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि सीमा को कथित रूप से दहेज की मांग और घरेलू प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जांच में मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने पति अमन जैन और सास सपना जैन निवासी खरगोन के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। मृतका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि सीमा की शादी पिछले वर्ष मई माह में खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र में हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के समय ससुराल पक्ष ने दूल्हे की बीमारी की जानकारी छिपाई थी। विवाह के बाद जब इस बात की जानकारी सीमा को मिली तो दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिजनों के अनुसार लगातार तनाव और प्रताड़ना के कारण सीमा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। बताया गया कि सीमा पिछले चार महीनों से इंदौर में अपनी मां और भाई के साथ रह रही थी। पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ चुका था कि दोनों के बीच तलाक का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन था। इसी दौरान उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। वहीं दूसरा मामला तिलक नगर थाना क्षेत्र का है, जहां संविद नगर निवासी 26 वर्षीय आरती पटेल ने 25 मई को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने घटना के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मृतका के पिता द्वारका पटेल, भाई दीपक पटेल और रिश्तेदार खेमचंद पटेल के बयान दर्ज किए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि आरती का पति गोपाल पटेल, जो सागर जिले के ग्राम सरदई का निवासी है, शादी के बाद से ही उसके साथ विवाद करता था और कई बार मारपीट भी करता था। परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते आरती गहरे तनाव में रहने लगी थी। मर्ग जांच में सामने आए तथ्यों, साक्षियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गोपाल पटेल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। दोनों मामलों में पुलिस आगे की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इन घटनाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों के गंभीर सामाजिक पहलुओं को फिर उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इजरायली तकनीक से नरसिंहपुर में चमत्कार: बंजर जमीन पर खड़ा किया 70 एकड़ का 'मैंगो किंगडम', अब लंदन-दुबई में धूम

मध्य प्रदेश। राज्य के नरसिंहपुर जिले के छेना गाँव से आधुनिक कृषि और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी अभूतपूर्व कहानी सामने आई है, जिसने देश के कृषि विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। जहां की पथरीली और कम उपजाऊ जमीन पर पारंपरिक खेती करना भी घाटे का सौदा माना जाता था, वहीं आज इजरायली तकनीक के चमत्कार से 70 एकड़ का एक विशाल और आधुनिक आमों का साम्राज्य खड़ा हो चुका है। स्थानीय प्रगतिशील किसान के इस साहसिक और तकनीकी प्रयास की बदौलत अब नरसिंहपुर के रसीले आमों का स्वाद सात समंदर पार दुबई और लंदन जैसे वैश्विक बाजारों तक पहुँच गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता के पीछे इजरायल की प्रसिद्ध ‘अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन’ (UHDP) यानी सघन बागवानी कूटनीति और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का कुशल उपयोग है। पारंपरिक तरीके से जहां एक एकड़ में आम के बेहद सीमित पौधे लगाए जाते हैं, वहीं इस आधुनिक इजरायली तकनीक के माध्यम से प्रति एकड़ पौधों की संख्या कई गुना बढ़ा दी गई। इसके साथ ही, बूंद-बूंद सिंचाई और नियंत्रित खाद प्रबंधन के जरिए पौधों को सीधे जड़ों तक पोषक तत्व दिए गए, जिससे पथरीली और कम पानी वाली जमीन पर भी पौधों का तेजी से और स्वस्थ विकास संभव हो सका। नरसिंहपुर के इस विशाल मैंगो ऑर्चर्ड (आम के बाग) में आम की कई उन्नत और व्यावसायिक प्रजातियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत अधिक है। फसल की गुणवत्ता, रंग और स्वाद को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए पूरी तरह से जैविक और वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन किया जाता है। यही कारण है कि इस बाग के आमों को सीधे विदेशों में निर्यात करने के लिए अंतरराष्ट्रीय डीलर्स और बड़ी कंपनियों से अनुबंध मिले हैं, जिससे स्थानीय क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आय के नए मार्ग खुल गए हैं। इस चमत्कारिक कृषि मॉडल ने न केवल नरसिंहपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा दिखाई है। जिला प्रशासन और बागवानी विभाग के अधिकारी भी इस सफलता को एक बड़े उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। इस बागवानी मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में भी बंपर पैदावार सुनिश्चित करता है। लंदन और दुबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में यहां के आमों की खेप पहुंचने से भारतीय कृषि उत्पादों की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हुई है। इस कृषि क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक, कड़ा परिश्रम और आधुनिक दृष्टिकोण को मिला दिया जाए, तो किसी भी बंजर या कम उम्मीद वाली जमीन को सोने की खान में बदला जा सकता है। आज इस 70 एकड़ के आम साम्राज्य को देखने और समझने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि वैज्ञानिक नरसिंहपुर के छेना गाँव पहुँच रहे हैं। यह प्रोजेक्ट अब क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया बन चुका है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।