मैरून बॉडीफिट गाउन में Krystle D’Souza का ग्लैमरस लुक बना चर्चा का विषय, फैंस बोले-“स्टाइल क्वीन”

नई दिल्ली । टीवी और फिल्म इंडस्ट्री की लोकप्रिय अभिनेत्री Krystle D’Souza एक बार फिर अपने स्टाइलिश अंदाज को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उनका मैरून बॉडीफिट पार्टी गाउन लुक सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनका ग्लैमर और कॉन्फिडेंस साफ झलकता है। फैशन और एलिगेंस का शानदार मेलमैरून रंग के इस बॉडीफिट गाउन में Krystle का लुक बेहद रॉयल और मॉडर्न नजर आ रहा है। डीप नेकलाइन, शिमरी डिटेलिंग और स्ट्रक्चर्ड फिटिंग ने उनके पूरे लुक को रेड कार्पेट वाइब दिया है। मिनिमल ज्वेलरी और स्लीक हेयरस्टाइल के साथ उनका अंदाज और भी आकर्षक बन गया है। टीवी से बॉलीवुड तक का सफरKrystle D’Souza ने “Ek Hazaaron Mein Meri Behna Hai”, “Brahmarakshas” और “Belan Wali Bahu” जैसे टीवी शोज से घर-घर में पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने फिल्म और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जिसमें “Chehre”, “Visfot” और वेब सीरीज “Fittrat” शामिल हैं। ‘Shararat’ गाने से भी चर्चा मेंइन दिनों Krystle अपने डांस नंबर “Shararat” को लेकर भी सुर्खियों में हैं, जो फिल्म “Dhurandhar” का हिस्सा बताया जा रहा है। इस गाने में उनके डांस मूव्स और स्क्रीन प्रेजेंस को दर्शकों ने खूब सराहा है। सोशल मीडिया पर छाया ग्लैमरस लुकउनका यह मैरून पार्टी गाउन लुक सोशल मीडिया पर लगातार शेयर किया जा रहा है। फैंस उनकी तस्वीरों पर “स्टाइल आइकन”, “ग्लैम डॉल” जैसे कमेंट कर रहे हैं। उनका यह नया अवतार फैशन प्रेमियों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। Krystle D’Souza ने एक बार फिर साबित किया है कि वह सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं, बल्कि एक फैशन आइकन भी हैं। उनका यह ग्लैमरस लुक आने वाले समय में भी फैशन और एंटरटेनमेंट जगत में चर्चा में बना रह सकता है।
नदी किनारे घूमने का अलग ही मजा, दुनिया की इन जगहों पर जरूर जाएं

नई दिल्ली । धरती पर जीवन और सभ्यताओं का विकास अक्सर नदियों के किनारे ही हुआ है। River केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की आधारशिला भी मानी जाती है। दुनिया भर में कई ऐसे शहर और स्थान हैं जो नदियों के किनारे बसकर आज पर्यटन का बड़ा केंद्र बन चुके हैं। नदी किनारे बसे शहरों में जीवन की रफ्तार अलग ही होती है। यहां सुबह की हवा में ताजगी होती है और शाम का नज़ारा बेहद सुकून देने वाला होता है। प्रकृति, संस्कृति और आधुनिकता का मिश्रण इन जगहों को खास बनाता है। यूरोप की डेन्यूब नदी के किनारे बसे शहर अपनी ऐतिहासिक इमारतों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध हैं। वहीं एशिया में गंगा, ब्रह्मपुत्र और यांग्त्ज़ी जैसी नदियों के किनारे बसे शहर धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। इन जगहों पर यात्रा करना केवल घूमना नहीं बल्कि एक अनुभव होता है, जहां पानी की बहती धारा के साथ जीवन की गति का एहसास होता है। कई पर्यटक यहां नाव की सवारी, रिवर क्रूज और घाटों पर समय बिताना पसंद करते हैं। नदी किनारे बसे शहरों की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि वे हर मौसम में अलग रूप में दिखाई देते हैं। कभी शांत और सुकून भरे, तो कभी बारिश में रोमांच से भरे। यही वजह है कि ये स्थान पर्यटकों के बीच हमेशा लोकप्रिय रहते हैं। कुल मिलाकर, नदियों के किनारे बसे ये 7 आकर्षक स्थान जीवन, प्रकृति और यात्रा प्रेमियों के लिए एक अनोखा अनुभव प्रदान करते हैं, जो हर किसी की ट्रैवल लिस्ट में जरूर होने चाहिए।
चुकंदर से त्वचा की देखभाल: प्राकृतिक निखार पाने के आसान घरेलू उपाय, बिना केमिकल के चमकेगी स्किन

नई दिल्ली । आज के समय में जब लोग प्राकृतिक और बिना केमिकल वाले सौंदर्य उपायों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, तब घरेलू नुस्खों का महत्व और भी बढ़ गया है। इसी कड़ी में Beetroot यानी चुकंदर को त्वचा की देखभाल के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प माना जा रहा है। चुकंदर में मौजूद आयरन, विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को अंदर से पोषण देने का काम करते हैं। यह न केवल खून को साफ करने में मदद करता है, बल्कि चेहरे पर प्राकृतिक चमक भी लाता है। यही कारण है कि इसे स्किन केयर रूटीन में शामिल करने की सलाह दी जाती है। चुकंदर का जूस पीने से शरीर डिटॉक्स होता है, जिसका सीधा असर त्वचा पर दिखाई देता है। त्वचा अधिक साफ, मुलायम और चमकदार नजर आती है। वहीं इसे फेस पैक के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। एक सरल घरेलू उपाय के अनुसार, चुकंदर के रस में थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा की डलनेस कम होती है। यह मिश्रण चेहरे को हाइड्रेट करता है और दाग-धब्बों को हल्का करने में मदद करता है। इसके अलावा चुकंदर को दही या बेसन के साथ मिलाकर फेस पैक बनाया जा सकता है। यह पैक त्वचा को एक्सफोलिएट करता है और डेड स्किन सेल्स को हटाने में मदद करता है। नियमित उपयोग से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है। विशेषज्ञों के अनुसार, चुकंदर में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स त्वचा को समय से पहले बूढ़ा होने से भी बचाते हैं। यह फ्री रेडिकल्स से लड़कर स्किन को हेल्दी बनाए रखने में मदद करता है। हालांकि, किसी भी प्राकृतिक उपाय को अपनाने से पहले त्वचा की संवेदनशीलता को ध्यान में रखना जरूरी है। बहुत अधिक मात्रा में उपयोग करने से कुछ लोगों को हल्की एलर्जी भी हो सकती है, इसलिए पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। कुल मिलाकर, चुकंदर एक सरल, सस्ता और प्रभावी घरेलू उपाय है, जो त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारने में मदद करता है। नियमित उपयोग से चेहरे पर ताजगी और स्वस्थ चमक बनी रहती है।
तमिलनाडु को EV हब बनाने की तैयारी, ह्युंडै लगाएगी 26,000 करोड़ रुपये का बड़ा दांव

नई दिल्ली । भारत में इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को नई गति देने की दिशा में ह्युंडै मोटर इंडिया ने बड़ा निवेश और विस्तार कार्यक्रम घोषित किया है। कंपनी ने तमिलनाडु को देश के प्रमुख इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की अपनी रणनीति को आगे बढ़ाते हुए स्थानीय उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और कौशल विकास पर व्यापक योजना का खाका पेश किया है। इस पहल को भारत के तेजी से बढ़ते ईवी बाजार और घरेलू विनिर्माण को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2023 से 2032 के बीच तमिलनाडु में 26,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जाएगा। यह निवेश ह्युंडै द्वारा घोषित कुल 45,000 करोड़ रुपये की दीर्घकालिक निवेश योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस राशि का उपयोग उत्पादन क्षमता बढ़ाने, ईवी इकोसिस्टम विकसित करने और स्थानीय आपूर्ति तंत्र को मजबूत बनाने में किया जाएगा। ह्युंडै का लक्ष्य अगले पांच से छह वर्षों में स्थानीयकरण का स्तर 82 प्रतिशत से बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक पहुंचाना है। कंपनी का मानना है कि अधिक स्थानीय उत्पादन से लागत में कमी आएगी, वैश्विक आपूर्ति बाधाओं का प्रभाव घटेगा और आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम होगी। इससे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। कंपनी तमिलनाडु स्थित आपूर्तिकर्ताओं से खरीदारी का मूल्य भी बढ़ाने जा रही है। अनुमान है कि स्थानीय खरीद में लगभग 4,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त वृद्धि होगी। इस विस्तार का सीधा लाभ राज्य के लघु और मध्यम उद्योगों को मिलेगा, जो ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके साथ ही अगले पांच से छह वर्षों में करीब 2,000 नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है। ह्युंडै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक और मुख्य परिचालन अधिकारी तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी इस वर्ष चेन्नई संयंत्र से दो नए मॉडल लॉन्च करेगी। इनमें आम ग्राहकों के लिए तैयार किया गया पहला इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल होगा। कंपनी का मानना है कि यह कदम भारत में ईवी अपनाने की गति बढ़ाने और व्यापक उपभोक्ता वर्ग तक इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच सुनिश्चित करने में मददगार साबित होगा। ह्युंडै पहले ही तमिलनाडु में ईवी बैटरी सब-असेंबली सुविधा स्थापित कर चुकी है। इसके अलावा पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य संपूर्ण ईवी उत्पादन श्रृंखला को भारत में विकसित करना है, जिससे देश वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण मानचित्र पर अपनी स्थिति और मजबूत कर सके। कंपनी ने राज्य सरकार के साथ मिलकर कौशल विकास कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी है। इस पहल के तहत युवाओं को आधुनिक ऑटोमोबाइल तकनीकों और भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रस्तावित कार्यक्रम 2027 तक शुरू होने की संभावना है और इसका उद्देश्य युवाओं की वैश्विक रोजगार क्षमता को बढ़ाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि ह्युंडै का यह निवेश न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे भारतीय ईवी उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। स्थानीय उत्पादन, तकनीकी विकास और रोजगार सृजन के जरिए यह पहल भारत को इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने में सहायक बन सकती है।
AI पर बढ़ा वैश्विक खतरे का अलार्म, विशेषज्ञों की चेतावनी- कहीं इंसानों के हाथ से न निकल जाए भविष्य की सबसे ताकतवर तकनीक

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में नई बहस शुरू हो गई है। तकनीक के क्षेत्र में तेजी से हो रही प्रगति के बीच कई विशेषज्ञ अब इस संभावना पर गंभीर चिंता जता रहे हैं कि भविष्य में AI प्रणालियां इतनी उन्नत हो सकती हैं कि उन पर मानव नियंत्रण बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो जाए। इसी संदर्भ में वैश्विक स्तर पर AI के विकास और उपयोग को लेकर नए नियमों तथा सुरक्षा तंत्र की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में AI केवल इंसानों द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर कार्य करता है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसकी क्षमताएं कहीं अधिक व्यापक हो सकती हैं। चिंता का मुख्य कारण यह है कि भविष्य की उन्नत AI प्रणालियां स्वयं को बेहतर बनाने और अधिक सक्षम संस्करण विकसित करने की क्षमता हासिल कर सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो तकनीकी विकास की गति इंसानी निगरानी और नियंत्रण से आगे निकल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार AI का सबसे बड़ा जोखिम उसकी सीखने और अनुकूलन करने की क्षमता में छिपा है। आज यह तकनीक चिकित्सा, शिक्षा, उद्योग, अनुसंधान, वित्तीय सेवाओं और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हालांकि यही शक्ति भविष्य में नई चुनौतियां भी पैदा कर सकती है। यदि अत्यधिक उन्नत AI प्रणालियां स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने लगें तो उनके प्रभावों का अनुमान लगाना कठिन हो सकता है। इसी वजह से कई तकनीकी संस्थान और शोधकर्ता AI विकास के लिए वैश्विक सुरक्षा ढांचे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जिस प्रकार परमाणु तकनीक और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नियम बनाए गए हैं, उसी प्रकार AI के लिए भी साझा मानक और निगरानी व्यवस्था आवश्यक है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि तकनीक का विकास मानव हितों और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप बना रहे। AI के समर्थकों का तर्क है कि यह तकनीक मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, उत्पादक और सुरक्षित बना सकती है। स्वास्थ्य सेवाओं में रोगों की पहचान से लेकर जलवायु परिवर्तन के अध्ययन तक, AI अनेक जटिल समस्याओं के समाधान में योगदान दे रही है। वहीं आलोचकों का कहना है कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए गए तो यही तकनीक गलत हाथों में जाकर साइबर हमलों, सूचना हेरफेर और स्वचालित निर्णय प्रणालियों से जुड़े जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि AI को पूरी तरह रोकना न तो व्यावहारिक है और न ही आवश्यक। आवश्यकता इस बात की है कि इसके विकास की गति के साथ सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों को भी समान महत्व दिया जाए। सरकारों, तकनीकी कंपनियों और शोध संस्थानों को मिलकर ऐसे नियम विकसित करने होंगे जो नवाचार को प्रोत्साहित करें, लेकिन संभावित खतरों को भी नियंत्रित रखें। वर्तमान बहस इस बात का संकेत है कि AI केवल एक तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक महत्व का वैश्विक मुद्दा बन चुका है। आने वाले वर्षों में यह तय करेगा कि मानव समाज तकनीकी प्रगति का लाभ किस प्रकार उठाता है और उससे जुड़े जोखिमों का सामना कैसे करता है।
CMR Green Technologies IPO पर निवेशकों की टूट पड़ी भीड़, 90 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन ने बढ़ाया उत्साह

नई दिल्ली । प्राथमिक बाजार में इन दिनों CMR Green Technologies का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम निवेशकों के बीच प्रमुख आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। 631 करोड़ रुपये के इस आईपीओ को अंतिम दिन तक जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है और विभिन्न निवेशक वर्गों की ओर से रिकॉर्ड स्तर पर आवेदन प्राप्त हुए हैं। मजबूत ग्रे मार्केट प्रीमियम, रीसाइक्लिंग उद्योग में कंपनी की अग्रणी स्थिति और बेहतर वित्तीय प्रदर्शन ने इस इश्यू को बाजार में चर्चा का विषय बना दिया है। कंपनी ने अपने शेयरों के लिए 182 रुपये से 192 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट में 78 शेयर रखे गए हैं। यह इश्यू पूरी तरह ऑफर फॉर सेल आधारित है, जिसके तहत मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए आईपीओ से प्राप्त राशि सीधे कंपनी के व्यवसाय विस्तार में नहीं जाएगी, बल्कि विक्रेता शेयरधारकों को प्राप्त होगी। सब्सक्रिप्शन के आंकड़ों ने निवेशकों के उत्साह को और बढ़ा दिया है। अंतिम दिन तक यह इश्यू 90 गुना से अधिक सब्सक्राइब हो चुका था। सबसे अधिक रुचि गैर-संस्थागत निवेशकों की ओर से देखने को मिली, जिन्होंने अपने लिए आरक्षित हिस्से की तुलना में कई गुना अधिक आवेदन किए। खुदरा निवेशकों और संस्थागत निवेशकों ने भी बड़ी संख्या में भागीदारी दर्ज कराई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में कंपनी को लेकर सकारात्मक धारणा बनी हुई है। ग्रे मार्केट में भी इस आईपीओ को मजबूत संकेत मिल रहे हैं। बाजार सूत्रों के अनुसार कंपनी के शेयरों का प्रीमियम इश्यू मूल्य के मुकाबले उल्लेखनीय स्तर पर बना हुआ है। इससे संभावित लिस्टिंग को लेकर निवेशकों की उम्मीदें बढ़ी हैं। हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रे मार्केट प्रीमियम केवल एक संकेतक होता है और वास्तविक लिस्टिंग प्रदर्शन बाजार की परिस्थितियों तथा निवेशकों की मांग पर निर्भर करता है। CMR Green Technologies देश की प्रमुख नॉन-फेरस मेटल रीसाइक्लिंग कंपनियों में शामिल है। कंपनी रिसाइकल्ड एल्युमिनियम अलॉय, एल्युमिनियम बिलेट्स, जिंक अलॉय इंगॉट्स और अन्य मूल्यवर्धित धातु उत्पादों का निर्माण करती है। देशभर में फैली इसकी विनिर्माण इकाइयां इसे उद्योग में मजबूत उपस्थिति प्रदान करती हैं। विशेष रूप से ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए उपयोग होने वाले एल्युमिनियम उत्पादों के क्षेत्र में कंपनी की उल्लेखनीय हिस्सेदारी बताई जाती है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी पर बढ़ता जोर रीसाइक्लिंग उद्योग के लिए अवसर पैदा कर रहा है। रिसाइकल्ड एल्युमिनियम का उत्पादन पारंपरिक एल्युमिनियम निर्माण की तुलना में कम ऊर्जा की खपत करता है और पर्यावरणीय प्रभाव भी अपेक्षाकृत कम होता है। यही कारण है कि सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियां निवेशकों के बीच अधिक लोकप्रिय हो रही हैं। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। हालिया वित्त वर्ष में कंपनी ने राजस्व वृद्धि दर्ज की और पिछले वर्ष के नुकसान से उबरते हुए लाभ में वापसी की। यह सुधार परिचालन दक्षता और बाजार में बढ़ती मांग का संकेत माना जा रहा है। इसके अलावा आईपीओ से पहले एंकर निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने भी बाजार में सकारात्मक संदेश दिया। हालांकि विश्लेषकों ने कुछ जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया है। ऑफर फॉर सेल संरचना, सीमित मार्जिन और कुछ बड़े ग्राहकों पर निर्भरता ऐसे कारक हैं जिन पर निवेशकों को विचार करना चाहिए। इसके बावजूद बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि रीसाइक्लिंग क्षेत्र में कंपनी की स्थिति और संभावित विकास अवसर इसे निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनाते हैं।
पति और ससुर के कानूनी नोटिस पर सेलिना जेटली का जवाब, ‘अपने बच्चों और अधिकारों के लिए आवाज उठाती रहूंगी’

नई दिल्ली । अभिनेत्री Celina Jaitly एक बार फिर अपनी निजी जिंदगी को लेकर चर्चा में हैं। पति Peter Hag के साथ चल रहे वैवाहिक विवाद और बच्चों की कस्टडी से जुड़े मामले के बीच उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। अभिनेत्री ने स्पष्ट कहा है कि वह किसी भी प्रकार की कानूनी धमकी या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपने बच्चों तथा न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। हाल के दिनों में पति और ससुर की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों के बाद सेलिना जेटली ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने कहा कि वर्षों तक उनके परिवार से जुड़ी खबरें, इंटरव्यू और सार्वजनिक प्रस्तुतियां चर्चा का विषय बनी रहीं, लेकिन जब उन्होंने अपने निजी संघर्षों और एक मां के रूप में अपनी चिंताओं को सामने रखा तो उन्हें कानूनी नोटिसों का सामना करना पड़ा। अभिनेत्री का कहना है कि उन्होंने अपने कानूनी प्रतिनिधियों के माध्यम से इन नोटिसों का जवाब भी दे दिया है। सेलिना जेटली ने अपने बयान में बच्चों की कस्टडी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि वह हमेशा संयुक्त अभिरक्षा और आपसी सहमति से समाधान के पक्ष में रही हैं। उनके अनुसार उन्होंने कई बार शांतिपूर्ण तरीके से मामले को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन परिस्थितियां अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहीं। उन्होंने दावा किया कि अदालत के आदेशों के बावजूद बच्चों से संपर्क स्थापित करने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अभिनेत्री ने यह भी कहा कि एक मां के रूप में बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर उनकी जिम्मेदारी सर्वोपरि है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि बच्चों को उनकी जानकारी या सहमति के बिना विभिन्न न्यायिक क्षेत्रों से बाहर ले जाने की कोशिश की जा सकती है। इसी वजह से उन्होंने अपनी चिंताओं को सार्वजनिक रूप से सामने रखने को आवश्यक बताया। दूसरी ओर, पति और उनके परिवार की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिसों में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए कुछ आरोप उनकी प्रतिष्ठा को प्रभावित कर रहे हैं और इसका असर बच्चों पर भी पड़ सकता है। हालांकि सेलिना का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य उन्हें डराना, दबाव बनाना और सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने से रोकना है। फिल्मी दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय रहीं सेलिना जेटली सामाजिक मुद्दों और पारिवारिक विषयों पर भी अपनी राय रखती रही हैं। मौजूदा विवाद के बीच उनका यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर अंतिम निर्णय अदालत की प्रक्रिया के तहत ही होगा, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के दावों और प्रतिक्रियाओं ने इस पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अभिनेत्री ने अपने संदेश में दोहराया कि वह अपने बच्चों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कानूनी और संवैधानिक रास्ता अपनाएंगी। उनके अनुसार यह केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं बल्कि एक मां के अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा है, जिसके लिए वह अंत तक अपनी आवाज उठाती रहेंगी।
दिनभर उतार-चढ़ाव के बाद फिसला शेयर बाजार, प्रमुख सूचकांक कमजोरी के साथ बंद, कई दिग्गज शेयर टूटे

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबारी सत्र के बाद कमजोरी के साथ कारोबार समाप्त किया। शुरुआती घंटों में सकारात्मक रुख के बावजूद दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव बढ़ता गया, जिसके चलते प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए। बाजार पर सबसे अधिक दबाव मेटल और आईटी सेक्टर के शेयरों से आया, जबकि कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला। कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंकों की गिरावट के साथ 74,243.34 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 पर आ गया। बाजार की शुरुआत हालांकि उत्साहजनक रही थी और दोनों प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार शुरू किया था, लेकिन बाद में निवेशकों की मुनाफावसूली और चुनिंदा सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी। दिनभर के कारोबार में मेटल और आईटी कंपनियों के शेयर सबसे ज्यादा दबाव में रहे। वैश्विक संकेतों और सेक्टर आधारित बिकवाली के कारण इन क्षेत्रों में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। निफ्टी मेटल और निफ्टी आईटी सूचकांकों में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। इसके अलावा कमोडिटी, ऑयल एंड गैस, सार्वजनिक उपक्रमों और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े शेयरों में भी दबाव बना रहा। इसके विपरीत कुछ सेक्टरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। मीडिया, रियल्टी, हेल्थकेयर, पीएसयू बैंक, फार्मा, प्राइवेट बैंक, एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में मजबूती देखने को मिली। इन क्षेत्रों में खरीदारी ने बाजार को अधिक गिरावट से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। निवेशकों का रुझान इस बात का संकेत देता है कि वे फिलहाल अपेक्षाकृत सुरक्षित और स्थिर प्रदर्शन वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में एचयूएल, एक्सिस बैंक, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, सन फार्मा, एलएंडटी और आईटीसी जैसे शेयरों ने मजबूती दिखाई। दूसरी ओर ट्रेंट, टीसीएस, टाटा स्टील, एनटीपीसी, एचसीएल टेक, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और अल्ट्राटेक सीमेंट जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल निवेशक किसी मजबूत दिशा का इंतजार कर रहे हैं। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार निफ्टी के लिए 23,200 के आसपास महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है तो बाजार में और कमजोरी देखने को मिल सकती है। वहीं ऊपर की ओर 23,550 का स्तर महत्वपूर्ण बाधा माना जा रहा है। इस स्तर को पार करने पर बाजार में नई तेजी की संभावना बन सकती है। विश्लेषकों के अनुसार घरेलू और वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों से जुड़े निर्णयों तथा विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की आगे की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए आर्थिक संकेत पर करीबी नजर रखे हुए हैं। शुक्रवार का कारोबार यह संकेत देता है कि निवेशकों का विश्वास पूरी तरह कमजोर नहीं हुआ है, लेकिन वे जोखिम लेने से पहले स्पष्ट संकेतों का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में प्रमुख समर्थन और प्रतिरोध स्तरों पर बाजार की चाल निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है।
विदेशी निवेशकों को बड़ी टैक्स राहत, सरकारी बॉन्ड बाजार में निवेश बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार का बड़ा आर्थिक दांव

नई दिल्ली । विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने और भारतीय ऋण बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार की घोषणा की है। सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त होने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट देने का फैसला किया है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और इसका उद्देश्य भारतीय बॉन्ड बाजार में वैश्विक निवेशकों की भागीदारी को बढ़ाना है। सरकार द्वारा जारी आयकर संशोधन अध्यादेश के तहत अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी बॉन्ड और अन्य सरकारी प्रतिभूतियों से अर्जित आय पर कर नहीं देना होगा। इससे पहले इन निवेशकों को ब्याज आय के साथ-साथ सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर भी कर देना पड़ता था। नई व्यवस्था के बाद यह कर बोझ समाप्त हो जाएगा, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड अधिक आकर्षक बन सकते हैं। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वैश्विक पूंजी विभिन्न उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बेहतर रिटर्न और स्थिरता की तलाश कर रही है। भारत पहले से ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में कर संबंधी राहत विदेशी निवेशकों के निर्णय को प्रभावित कर सकती है और उन्हें भारतीय ऋण बाजार में अधिक निवेश के लिए प्रेरित कर सकती है। सरकारी प्रतिभूतियां केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा धन जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले बॉन्ड और ऋण साधन होते हैं। इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माना जाता है क्योंकि इनके पीछे सरकार की गारंटी होती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कर छूट सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध दोनों प्रकार की सरकारी प्रतिभूतियों पर लागू होगी, जिससे निवेशकों को व्यापक लाभ मिलेगा। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कुल बाजार का अपेक्षाकृत छोटा हिस्सा है। सरकार का मानना है कि नई कर व्यवस्था के बाद विदेशी भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। इससे बाजार में तरलता बढ़ेगी और सरकारी उधारी की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने से भारतीय वित्तीय बाजारों को अतिरिक्त मजबूती मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि वैश्विक निवेशकों के लिए निवेश संबंधी निर्णयों में कर नीति महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाएं विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कर प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। भारत का यह कदम उसी दिशा में एक रणनीतिक पहल माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक निवेश परिदृश्य में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति को मजबूत करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से न केवल विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ेगा बल्कि भारतीय बॉन्ड बाजार की गहराई और विश्वसनीयता भी मजबूत होगी। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से भारतीय वित्तीय प्रणाली को दीर्घकालिक स्थिरता और व्यापक निवेश आधार प्राप्त हो सकता है। आर्थिक जानकार इसे केवल कर राहत नहीं बल्कि भारत के वित्तीय बाजारों को वैश्विक स्तर पर अधिक आकर्षक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक सुधार के रूप में देख रहे हैं।
SOCIAL MEDIA SECURITY: WhatsApp, Facebook और Instagram पर लॉगिन का बदलेगा तरीका, OTP के बिना होगा मोबाइल वेरिफिकेशन

SOCIAL MEDIA SECURITY: नई दिल्ली । डिजिटल प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को अधिक सरल और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वोडाफोन आइडिया (Vi) और मेटा ने नई साझेदारी की घोषणा की है। इस सहयोग के तहत WhatsApp, Facebook और Instagram जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म पर साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन सुविधा शुरू की जाएगी। नई व्यवस्था के लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के दौरान वन-टाइम पासवर्ड (OTP) दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होगी।कंपनियों के अनुसार यह नेटवर्क आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली उपयोगकर्ताओं की पहचान को मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से स्वतः सत्यापित करेगी। इससे रजिस्ट्रेशन, मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन, लॉगिन, री-लॉगिन, अकाउंट रिकवरी और सुरक्षा जांच जैसी प्रक्रियाएं पहले की तुलना में अधिक तेज और सहज हो जाएंगी। पूरी प्रक्रिया बैकग्राउंड में पूरी होगी, जिससे उपयोगकर्ताओं को अतिरिक्त कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। MP PRE-MONSOON: MP में प्री-मानसून का असर, 40 से ज्यादा जिलों में आंधी-बारिश; जानें आपके जिले का हाल! नई तकनीक विशेष रूप से उन परिस्थितियों में उपयोगी मानी जा रही है जहां ओटीपी प्राप्त होने में देरी होती है या साइबर अपराधी फर्जी संदेशों और लिंक के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को धोखा देने की कोशिश करते हैं। साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन प्रणाली में प्रमाणीकरण सीधे नेटवर्क स्तर पर होता है, जिससे फिशिंग, ओटीपी चोरी और डिजिटल पहचान से जुड़े कई जोखिम कम हो सकते हैं। कंपनियों ने बताया कि जब कोई Vi ग्राहक अपने मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से WhatsApp, Facebook या Instagram का उपयोग करेगा, तब सत्यापन अनुरोध स्वतः नेटवर्क द्वारा मान्य किया जाएगा। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होगा और विभिन्न सेवाओं तक पहुंचने में लगने वाला समय भी घटेगा। तकनीक का उद्देश्य सुरक्षा और सुविधा के बीच बेहतर संतुलन स्थापित करना है। भारत मेटा के प्लेटफॉर्म के लिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है। करोड़ों भारतीय रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का उपयोग करते हैं। ऐसे में नई प्रमाणीकरण व्यवस्था का प्रभाव बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। अप्रैल 2026 तक वोडाफोन आइडिया के लगभग 19.85 करोड़ ग्राहक थे, जिन्हें इस नई सुविधा का लाभ मिलने की संभावना है। CBSE रिजल्ट पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला, 38 लाख से अधिक संदिग्ध रिक्वेस्ट ब्लॉक; सिस्टम रहा सुरक्षित वोडाफोन आइडिया के मुख्य कार्य अधिकारी अभिजीत किशोर ने कहा कि मेटा के साथ यह साझेदारी उपयोगकर्ताओं को अधिक सुरक्षित डिजिटल अनुभव प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार साइलेंट मोबाइल वेरिफिकेशन तकनीक न केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि धोखाधड़ी के जोखिम को भी कम करेगी। साथ ही उपयोगकर्ताओं को बिना किसी बाधा के तेज और सुविधाजनक प्रमाणीकरण प्रक्रिया उपलब्ध कराएगी। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में डिजिटल सेवाओं में पारंपरिक ओटीपी आधारित सत्यापन की जगह नेटवर्क आधारित और स्वचालित प्रमाणीकरण प्रणालियां अधिक लोकप्रिय हो सकती हैं। इससे उपयोगकर्ता अनुभव बेहतर होने के साथ-साथ साइबर सुरक्षा मानकों में भी सुधार आएगा। हालांकि यह सुविधा फिलहाल Vi नेटवर्क के उपयोगकर्ताओं के लिए शुरू की जा रही है, लेकिन इसके सफल होने पर अन्य दूरसंचार कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसी प्रकार की तकनीकों को अपनाने पर विचार कर सकते हैं। इससे भारत में डिजिटल सेवाओं के उपयोग का अनुभव और अधिक सुरक्षित, तेज तथा आधुनिक बनने की उम्मीद है।