बेरोजगारी से ‘किन्नर गैंग’ तक: ट्रेनों में वसूली का नया नेटवर्क, यूपी–बिहार के युवक निकले मास्टरमाइंड

मध्य प्रदेश । जबलपुर रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों से वसूली के नाम पर चल रहे एक संगठित नेटवर्क का रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि कई किन्नर के वेश में दिखने वाले लोग असल में युवक हैं, जो बेरोजगारी और आसान कमाई के लालच में यह तरीका अपना रहे थे। RPF की हालिया कार्रवाई में पकड़े गए तीन संदिग्धों के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि वे महिलाएं या वास्तविक किन्नर नहीं, बल्कि युवक हैं जो पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से वेश बदलकर ट्रेनों में यात्रियों से पैसे वसूलते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहा नेटवर्क है, जिसमें यूपी और बिहार के कई युवक शामिल हैं। ये लोग जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर और इटारसी जैसे बड़े रेलवे जंक्शन वाले क्षेत्रों में सक्रिय हैं और किराए के मकानों में रहकर अपना संचालन करते हैं। पकड़े गए आरोपियों में कानपुर के रहने वाले आशीष (बदला हुआ नाम आशी), महेश (माही) और पिंचू (तरन्नुम) शामिल हैं। ये लोग घर से सामान्य कपड़ों में निकलते हैं, लेकिन स्टेशन के पास पहुंचते ही साड़ी और सूट पहनकर किन्नर का रूप धारण कर लेते हैं। भारी मेकअप, सिंदूर और व्यवहारिक शैली अपनाकर ये यात्रियों को भ्रमित करते हैं और वसूली करते हैं। RPF जांच में सामने आया कि ये लोग यात्रियों से प्रति व्यक्ति ₹10 से ₹100 तक वसूलते हैं। रोजाना इनकी कमाई ₹1,500 से ₹2,000 तक पहुंच जाती है। कई मामलों में तो ये QR कोड के जरिए डिजिटल भुगतान भी स्वीकार करते हैं। पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि इनमें से कुछ युवकों ने पहले नौकरी की तलाश की, लेकिन रोजगार न मिलने पर उन्होंने सोशल मीडिया से प्रेरित होकर यह रास्ता चुना। आसान कमाई और कम कानूनी जोखिम को देखते हुए यह नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। RPF अधिकारियों के अनुसार, पिछले छह महीनों में करीब 120 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें से 60 प्रतिशत युवक निकले हैं। यह गिरोह यात्रियों की असहज स्थिति और डर का फायदा उठाकर लगातार अवैध वसूली कर रहा था। इस मामले के सामने आने के बाद असली किन्नर समुदाय ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि नकली वसूली करने वाले युवक पूरे समुदाय की छवि खराब कर रहे हैं और प्रशासन को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। रेलवे सुरक्षा बल अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि इसके पीछे मौजूद बड़े गिरोह और आर्थिक कनेक्शन का पता लगाया जा सके।
साइबर कैफे से चल रहा था टिकटों का खेल, कालाबाजारी का भंडाफोड़

मध्य प्रदेश । जबलपुर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर कैफे की आड़ में चल रहे अवैध रेल ई-टिकट कारोबार का पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई में एक साइबर कैफे संचालक को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से कुल 74 अवैध ई-टिकट बरामद किए गए हैं। जब्त किए गए टिकटों की कुल कीमत करीब ₹1,24,549 आंकी गई है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुमित झा (35) के रूप में हुई है, जो न्यू शोभापुर कॉलोनी का निवासी बताया गया है। आरपीएफ ने उसके पास से कंप्यूटर सिस्टम, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण भी जब्त किए हैं, जिनका उपयोग अवैध टिकट बुकिंग में किया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, आरपीएफ पोस्ट जबलपुर को सूचना मिली थी कि रांझी क्षेत्र में स्थित एक साइबर कैफे और ऑनलाइन शॉप के जरिए अवैध रूप से ई-टिकट बेचे जा रहे हैं। सूचना की पुष्टि के बाद एसआई योगेंद्र सिंह के नेतृत्व में टीम ने छापेमारी की और आरोपी को मौके से पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि आरोपी “सन साइबर कैफे” के नाम से दुकान संचालित कर रहा था और एमपीऑनलाइन के साथ-साथ छह अलग-अलग आईआरसीटीसी यूजर आईडी का उपयोग कर व्यावसायिक स्तर पर टिकट बुकिंग कर रहा था। वह यात्रियों से प्रति टिकट ₹50 से ₹100 तक अतिरिक्त शुल्क वसूल रहा था, जिससे अवैध कमाई की जा रही थी। आरपीएफ की जांच में 74 ई-टिकट बरामद हुए, जिनमें 6 लाइव टिकट शामिल हैं जिनकी कीमत ₹11,152 है, जबकि 68 पुराने टिकटों की कीमत ₹1,13,397 पाई गई। इस तरह कुल जब्ती की कीमत ₹1,24,549 आंकी गई। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल वॉलेट और बैंक खातों के माध्यम से भुगतान लेता था। अब आरपीएफ संबंधित बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। पूरी कार्रवाई के बाद आरोपी को आरपीएफ पोस्ट जबलपुर लाया गया और उसके खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बाद में वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर उसे बंध पत्र पर रिहा कर दिया गया।
मणिपुर में शांति प्रयासों को झटका, लोइबोल खुल्लेन गांव में गोलीबारी और आगजनी; तीन मृत, सात घर तबाह

नई दिल्ली । मणिपुर में शांति बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की गंभीर घटना सामने आई है। कांगपोकपी जिले के सैतू-गामफाजोल उपखंड स्थित लोइबोल खुल्लेन गांव पर शुक्रवार तड़के सशस्त्र हमलावरों ने हमला कर दिया, जिसमें एक महिला सहित तीन लोगों की मौत हो गई। इस दौरान आगजनी की घटनाओं में कम से कम सात घर पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए। घटना ने एक बार फिर राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के अनुसार हमला सुबह लगभग चार बजे हुआ, जब गांव के अधिकांश लोग अपने घरों में मौजूद थे। अचानक हुई गोलीबारी से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हमलावरों और स्थानीय समूहों के बीच कई मिनट तक गोलीबारी होती रही। स्थिति बिगड़ते देख ग्रामीण अपने परिवारों के साथ जान बचाने के लिए आसपास के जंगलों और सुरक्षित स्थानों की ओर भाग गए। घटना में जिन तीन लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान लेटखोंगाम हाओकिप, टिनमैरी हाओकिप और जांगमिनलाल हाओकिप के रूप में हुई है। मृतकों में एक महिला भी शामिल है। स्थानीय प्रशासन ने शवों को कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की नई हिंसक घटना को रोका जा सके। हमले के दौरान कई घरों में आग लगा दी गई, जिससे सात मकान पूरी तरह जलकर राख हो गए। प्रभावित परिवारों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और राहत एवं पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय लोगों ने घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग उठाई है। मणिपुर की उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे बेहद दुखद और अस्वीकार्य घटना बताया। उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या और घरों को जलाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। सरकार इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रही है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उपमुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह या उकसावे में न आने की अपील की। उनके अनुसार राज्य में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इस बीच कुकी समुदाय के शीर्ष संगठन कुकी इंपी मणिपुर ने भी घटना की तीखी आलोचना की है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि निहत्थे नागरिकों को निशाना बनाना मानवता और मूलभूत मानवाधिकारों के खिलाफ है। संगठन ने दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की मांग की है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना ऐसे समय में हुई है जब राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने के प्रयास जारी हैं। ऐसे में इस प्रकार की हिंसक घटनाएं शांति प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं। सुरक्षा एजेंसियां हमले के पीछे शामिल लोगों की पहचान और उनके मकसद का पता लगाने में जुटी हुई हैं। फिलहाल पूरे इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। राज्य सरकार ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
रेलवे में रिश्वत लेते सेक्शन इंजीनियर गिरफ्तार, CBI ने सागर में की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश । जबलपुर में सीबीआई की टीम ने गुरुवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए सागर रेलखंड में पदस्थ एक रेलवे अधिकारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान सेक्शन इंजीनियर नारायण सिंह बुंदेला के रूप में हुई है। कार्रवाई के बाद टीम आरोपी को जबलपुर लेकर पहुंची और उसे सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 5 दिन की रिमांड की मांग की गई है। मामला रेलवे के सागर रेलखंड से जुड़ा है, जहां गिट्टी सप्लाई करने वाले एक ठेकेदार ने काम पूरा होने के बाद अपनी सिक्योरिटी राशि वापस मांगी थी। आरोप है कि इसी राशि को जारी करने के बदले सेक्शन इंजीनियर ने ठेकेदार से ₹1 लाख की रिश्वत की मांग की थी। जब ठेकेदार ने रिश्वत देने से इनकार किया तो अधिकारी ने उसकी सिक्योरिटी राशि रोक दी। इसके बाद ठेकेदार ने पूरे मामले की शिकायत जबलपुर स्थित सीबीआई एसपी कार्यालय में दर्ज कराई। शिकायत की प्रारंभिक जांच और सत्यापन के बाद सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। जानकारी के अनुसार, आरोपी ने रिश्वत की रकम लेने के लिए ठेकेदार को सागर के एक होटल में बुलाया था। तय योजना के तहत सीबीआई टीम सादी वर्दी में पहले से ही होटल के आसपास तैनात थी। जैसे ही ठेकेदार ने आरोपी को ₹1 लाख की राशि सौंपी, टीम ने तुरंत उसे मौके पर ही पकड़ लिया। सीबीआई की इस कार्रवाई से रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारी से आगे की पूछताछ जारी है, जिसमें अन्य संभावित मामलों और नेटवर्क की जांच भी की जा रही है। इस मामले को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत से लेकर भस्म अर्पण तक पूरी हुई महापूजा

मध्य प्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था, परंपरा और वैदिक विधियों का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार और स्वस्तिवाचन की ध्वनि गूंज उठी। सभा मंडप में सबसे पहले वीरभद्रजी के कान में स्वस्तिवाचन किया गया और उसके बाद घंटी बजाकर भगवान से आज्ञा ली गई। इसके बाद सभा मंडप के चांदी के पट खोले गए और गर्भगृह में पुजारियों ने विधिवत पूजा आरंभ की। गर्भगृह में भगवान महाकाल का श्रृंगार उतारकर सबसे पहले पंचामृत पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान का अभिषेक किया गया, जिसके बाद कर्पूर आरती संपन्न हुई। इसके साथ ही नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन भी किया गया। इसके बाद जलाभिषेक कर भगवान महाकाल का पुनः शुद्धिकरण किया गया। फिर उन्हें रजत चंद्र-त्रिशूल मुकुट, रुद्राक्ष की माला, शेषनाग का रजत मुकुट, सुगंधित पुष्पमालाएं और आभूषणों से दिव्य श्रृंगार किया गया। भांग, चंदन, सूखे मेवे और भस्म अर्पित कर भगवान को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया गया। पूजा के अगले चरण में फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। इस संपूर्ण भस्म आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से परंपरागत रूप से भगवान को भस्म अर्पित की गई। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार स्वरूप से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं, जिसे अत्यंत दिव्य और दुर्लभ माना जाता है।
शपथ के दो दिन बाद ही कांग्रेस सरकार में खींचतान, विभाग आवंटन को लेकर वरिष्ठ मंत्रियों की नाराजगी खुलकर सामने आई

नई दिल्ली । कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में गठित नई कांग्रेस सरकार को गठन के शुरुआती दिनों में ही आंतरिक असंतोष का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रिमंडल में विभागों के आवंटन को लेकर उठे विवाद अब और गहराते दिखाई दे रहे हैं। वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी की नाराजगी के बाद अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री केएच मुनियप्पा ने भी अपने विभाग में बदलाव की मांग उठाकर सरकार और पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। सरकार के गठन के बाद विभागों के वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष की चर्चाएं लगातार तेज हो रही हैं। केएच मुनियप्पा ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने अपने मौजूदा मंत्रालय को बदलने का अनुरोध पार्टी नेतृत्व के समक्ष रखा है। उनका कहना है कि उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उन्हें ऐसे विभाग दिए जाने चाहिए जहां वे अधिक प्रभावी ढंग से जनसेवा कर सकें। मुनियप्पा ने संकेत दिया है कि वह इस विषय पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से भी चर्चा करेंगे। उनका मानना है कि वरिष्ठ नेताओं को उनकी अनुभव क्षमता और राजनीतिक योगदान के अनुरूप जिम्मेदारियां मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले कई वर्षों से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग से जुड़े रहे हैं और अब नई जिम्मेदारी संभालकर जनता के लिए अधिक व्यापक स्तर पर काम करना चाहते हैं। वरिष्ठ मंत्री ने समाज कल्याण, कृषि और सिंचाई जैसे विभागों में रुचि जताई है। उनका कहना है कि इन क्षेत्रों में कार्य करने का उन्हें पर्याप्त अनुभव है और इन विभागों के माध्यम से वह ग्रामीण क्षेत्रों तथा सामाजिक विकास से जुड़े मुद्दों पर अधिक प्रभावी योगदान दे सकते हैं। उनके इस बयान ने सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर चल रही चर्चाओं को और हवा दे दी है। इससे पहले रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग दिए जाने का आश्वासन मिला था, लेकिन अंतिम समय में उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस फैसले के बाद उन्होंने अपनी असहमति खुलकर व्यक्त की थी, जिससे सरकार के भीतर असंतोष पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आया। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हालांकि स्थिति को सामान्य बताते हुए कहा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से निकाला जाएगा। उन्होंने रामलिंगा रेड्डी को अपना करीबी सहयोगी और सम्मानित वरिष्ठ नेता बताते हुए भरोसा जताया कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा। मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर संवाद जारी है और किसी भी प्रकार के मतभेद को सुलझाने की कोशिश की जाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार के शुरुआती चरण में इस तरह की नाराजगी प्रशासनिक स्थिरता और राजनीतिक संदेश दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व के सामने चुनौती यह है कि वह वरिष्ठ नेताओं की अपेक्षाओं और सरकार की कार्यक्षमता के बीच संतुलन बनाए रखे। यदि असंतोष को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो यह आगे चलकर संगठनात्मक एकता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में नाराज नेताओं से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। विभागों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व और राजनीतिक प्रबंधन क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है।
उज्जैन के शिवोहम तिवारी का नेशनल टीम में चयन, स्टेट स्विमिंग में 6 पदकों के साथ मचाया धमाल

मध्य प्रदेश । रीवा में आयोजित 54वीं स्टेट ओपन स्विमिंग चैंपियनशिप में उज्जैन के युवा तैराकों ने बेहतरीन प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन किया। 30 मई से 2 जून तक चली इस प्रतियोगिता में उज्जैन के कुल 6 तैराकों ने 19 पदक जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की, जिसमें 2 स्वर्ण, 5 रजत और 12 कांस्य पदक शामिल हैं। इसके साथ ही उज्जैन की अन्य युवा प्रतिभाओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया। जुनीना हुसैन ने 400 मीटर इंडिविजुअल मेडले, 800 मीटर और 1500 मीटर फ्री स्टाइल जैसी कठिन स्पर्धाओं में 5 पदक जीतकर अपनी क्षमता साबित की। आध्या राय ने बैकस्ट्रोक स्पर्धा में पदक हासिल किया, जबकि समर्थ गेहलोत ने कांस्य पदक जीतकर टीम की सफलता में योगदान दिया। कुल मिलाकर उज्जैन के तैराकों ने प्रतियोगिता में शानदार तालमेल और मेहनत का परिचय देते हुए 19 पदकों के साथ जिले का मान बढ़ाया। शिवोहम तिवारी के राष्ट्रीय स्तर पर चयन को स्थानीय खेल जगत के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। परिवार के अनुसार, शिवोहम पूरे वर्ष नियमित अभ्यास और अनुशासन के साथ तैयारी करते हैं। उनके पिता ओमप्रकाश तिवारी ने बताया कि लगातार प्रशिक्षण और समर्पण ने ही यह सफलता दिलाई है। शिवोहम ने अपनी सफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कई रेसों के कारण थकान जरूर थी, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखते हुए हर स्पर्धा में सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की। वर्तमान में वे 11वीं कक्षा के छात्र हैं और पढ़ाई के साथ खेल को संतुलित कर आगे राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। यह उपलब्धि उज्जैन के खेल जगत के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है और इससे युवा खिलाड़ियों में नया उत्साह देखने को मिल रहा है।
कैलाश खेर ने महाकाल की भस्म आरती में लिया आशीर्वाद, बोले- “बाबा की कृपा से जन्मों के पाप धुल जाते हैं”

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर श्रद्धा और भक्ति के अद्भुत संगम का गवाह बना, जब प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर शुक्रवार तड़के भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचे। वे विशेष रूप से भस्म आरती में शामिल हुए और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए। कैलाश खेर सुबह करीब 3 बजे मंदिर पहुंचे और नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती का दिव्य दृश्य देखा। आरती के दौरान वे पूरी तरह भक्ति में लीन नजर आए। लगभग दो घंटे तक उन्होंने आरती का अनुभव लिया और इसके बाद नंदी जी का पूजन-अभिषेक किया। उन्होंने नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी व्यक्त की, जैसा कि परंपरा के अनुसार श्रद्धालु करते हैं। इसके बाद उन्होंने चांदी द्वार के माध्यम से पुजारी के जरिए भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और आशीर्वाद प्राप्त किया। दर्शन के पश्चात मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से उनका सम्मान किया गया। इस आध्यात्मिक अनुभव के बाद कैलाश खेर ने कहा कि महाकाल के दरबार में पहुंचना स्वयं में एक दिव्य अनुभूति है। उनके अनुसार, जो भी श्रद्धालु यहां आता है, वह आध्यात्मिक रूप से शुद्ध होता है और जन्मों के पापों से मुक्ति का अनुभव करता है। उन्होंने भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और दुर्लभ दर्शन बताया और कहा कि यह केवल भगवान महाकाल की विशेष कृपा से ही संभव हो पाता है। उन्होंने मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की और कहा कि लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद दर्शन और सुरक्षा व्यवस्था बेहद सुव्यवस्थित तरीके से संचालित की जा रही है। महाकाल मंदिर में हुई यह उपस्थिति एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के श्रद्धालुओं और कलाकारों के लिए भी आध्यात्मिक आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ा तनाव, घुसपैठ रोकने की कार्रवाई के बीच आमने-सामने आए दोनों देश

नई दिल्ली । भारत और बांग्लादेश के बीच साझा अंतरराष्ट्रीय सीमा एक बार फिर सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ गई है। हाल के दिनों में सीमा क्षेत्रों में बढ़ी सतर्कता और अवैध आवाजाही को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बीच दोनों देशों के सुरक्षा तंत्र सक्रिय नजर आ रहे हैं। सीमा पर बढ़ी निगरानी के साथ-साथ कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।सीमा सुरक्षा बल द्वारा पूर्वी क्षेत्र में लगातार निगरानी और गश्त बढ़ाए जाने के बाद कई संदिग्ध गतिविधियों पर रोक लगाई गई है। अधिकारियों के अनुसार सीमा पार से अवैध प्रवेश, तस्करी और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है और तकनीकी संसाधनों का उपयोग भी बढ़ाया गया है।इसी बीच सीमा से जुड़े कुछ घटनाक्रमों को लेकर भारत और बांग्लादेश के सुरक्षा बलों के बीच फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में दोनों पक्षों ने अपने-अपने दृष्टिकोण रखे और सीमा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। बांग्लादेश की ओर से कुछ आपत्तियां और चिंताएं व्यक्त की गईं, जबकि भारतीय पक्ष ने सीमा सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया।सीमाई क्षेत्रों में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे पूर्वी सेक्टर में सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी प्रकार की अवैध घुसपैठ या सीमा उल्लंघन को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित गश्त के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।नदी मार्गों, जंगलों और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी अभियान चलाए जा रहे हैं। ड्रोन कैमरों, नाइट विजन उपकरणों और अन्य आधुनिक निगरानी प्रणालियों की मदद से चौबीसों घंटे गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि तकनीकी निगरानी से सीमा पार होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को समय रहते पहचानने और रोकने में मदद मिल रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि भारत-बांग्लादेश सीमा दुनिया की सबसे व्यस्त और संवेदनशील सीमाओं में से एक है, जहां सुरक्षा, मानवीय और आर्थिक पहलू एक साथ जुड़े रहते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की स्थिति को संभालने के लिए दोनों देशों के बीच संवाद और समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों का समाधान आमतौर पर द्विपक्षीय बातचीत और स्थापित तंत्र के माध्यम से किया जाता रहा है।वर्तमान घटनाक्रम के बीच सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सभी अंतरराष्ट्रीय नियमों और द्विपक्षीय व्यवस्थाओं का पालन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच संपर्क और संवाद की प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है, ताकि सीमा से जुड़े किसी भी मुद्दे का समाधान शांतिपूर्ण और संस्थागत माध्यमों से किया जा सके।
महाकाल मंदिर को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, AI आधारित सुरक्षा सिस्टम की हुई सराहना

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर अब केवल आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि यह देश के सबसे आधुनिक और हाईटेक धार्मिक स्थलों में भी शामिल हो गया है। केंद्र सरकार ने मंदिर की अत्याधुनिक एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया है। इस सम्मान के पीछे मंदिर परिसर में लागू की गई ‘त्रिनेत्र’ नामक स्मार्ट निगरानी व्यवस्था प्रमुख कारण बनी है। मंदिर परिसर और महाकाल रुद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एरिया (MRIDA) में 500 से अधिक एआई-सक्षम कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे लगातार निगरानी करते हैं। यह प्रणाली भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए विकसित की गई है। फेसियल रिकॉग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और रियल टाइम वीडियो एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों ने इसे देश की सबसे उन्नत सुरक्षा प्रणालियों में शामिल कर दिया है। लाखों श्रद्धालुओं की दैनिक आवाजाही के बीच यह तकनीक हर गतिविधि पर नजर रखती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे प्रशासन को त्वरित कार्रवाई का अवसर मिलता है। इस कारण इसे “महाकाल की तीसरी आंख” भी कहा जाने लगा है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार के लिए चयन से पहले केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ टीम ने उज्जैन पहुंचकर पूरे सिस्टम का गहन निरीक्षण किया था। इसके बाद उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने 13 सदस्यीय जूरी के सामने इस परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। तकनीकी मूल्यांकन और प्रस्तुति के आधार पर ‘त्रिनेत्र’ परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ डिजिटल और स्मार्ट गवर्नेंस परियोजनाओं में शामिल किया गया। यह पुरस्कार 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ उज्जैन ने डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट धार्मिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य लगातार ई-गवर्नेंस, नवाचार और तकनीक आधारित जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। आज महाकाल मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। एआई आधारित यह प्रणाली आने वाले समय में अन्य धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित हो सकती है।