महाकाल मंदिर को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार, AI आधारित सुरक्षा सिस्टम की हुई सराहना

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर अब केवल आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं रहा, बल्कि यह देश के सबसे आधुनिक और हाईटेक धार्मिक स्थलों में भी शामिल हो गया है। केंद्र सरकार ने मंदिर की अत्याधुनिक एआई आधारित सुरक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के लिए चयनित किया है। इस सम्मान के पीछे मंदिर परिसर में लागू की गई ‘त्रिनेत्र’ नामक स्मार्ट निगरानी व्यवस्था प्रमुख कारण बनी है। मंदिर परिसर और महाकाल रुद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एरिया (MRIDA) में 500 से अधिक एआई-सक्षम कैमरे लगाए गए हैं, जो 24 घंटे लगातार निगरानी करते हैं। यह प्रणाली भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा नियंत्रण और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित कार्रवाई के लिए विकसित की गई है। फेसियल रिकॉग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) और रियल टाइम वीडियो एनालिटिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों ने इसे देश की सबसे उन्नत सुरक्षा प्रणालियों में शामिल कर दिया है। लाखों श्रद्धालुओं की दैनिक आवाजाही के बीच यह तकनीक हर गतिविधि पर नजर रखती है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होते ही सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करता है, जिससे प्रशासन को त्वरित कार्रवाई का अवसर मिलता है। इस कारण इसे “महाकाल की तीसरी आंख” भी कहा जाने लगा है। राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार के लिए चयन से पहले केंद्र सरकार की एक विशेषज्ञ टीम ने उज्जैन पहुंचकर पूरे सिस्टम का गहन निरीक्षण किया था। इसके बाद उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने 13 सदस्यीय जूरी के सामने इस परियोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। तकनीकी मूल्यांकन और प्रस्तुति के आधार पर ‘त्रिनेत्र’ परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ डिजिटल और स्मार्ट गवर्नेंस परियोजनाओं में शामिल किया गया। यह पुरस्कार 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन में प्रदान किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ उज्जैन ने डिजिटल प्रशासन और स्मार्ट धार्मिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य लगातार ई-गवर्नेंस, नवाचार और तकनीक आधारित जनसेवा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। आज महाकाल मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के अग्रणी मॉडल के रूप में उभर रहा है। एआई आधारित यह प्रणाली आने वाले समय में अन्य धार्मिक और सार्वजनिक स्थलों के लिए भी एक प्रेरणादायक उदाहरण साबित हो सकती है।
अहमदाबाद से रवाना होगा शव, फ्लाइट का इंतजार करते समय हुआ था हमला

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain से जुड़े एक दर्दनाक अंतरराष्ट्रीय हादसे में ईरान में हुए हमले के दौरान मारे गए भारतीय नागरिक मंजूर अहमद का पार्थिव शरीर शुक्रवार को भारत पहुंच गया। शव पहले अहमदाबाद एयरपोर्ट लाया गया, जहां से अब उसे सड़क मार्ग से उज्जैन लाया जा रहा है। दोपहर तक शव के उज्जैन पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह घटना उस समय हुई जब मंजूर अहमद कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान ड्रोन और मिसाइल हमले में उनकी मौत हो गई। एयरपोर्ट पर अचानक हुआ हमलाजानकारी के अनुसार यह हमला कुवैत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 पर हुआ, जहां भारी धमाकों और मिसाइल हमले के चलते अफरा-तफरी मच गई। इस हमले में कई यात्री घायल भी हुए। मंजूर अहमद उसी समय फ्लाइट पकड़ने के लिए एयरपोर्ट पर मौजूद थे और हमले की चपेट में आ गए। उन्हें मौके पर ही मृत घोषित कर दिया गया। शादी में आने वाले थे भारतमृतक के परिजनों के अनुसार मंजूर अहमद 8 जून को रतलाम में होने वाली अपने भांजे की शादी में शामिल होने के लिए भारत लौट रहे थे। वे लंबे समय से विदेश में काम कर रहे थे और परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे थे। उनके बेटे मोहम्मद अनस ने बताया कि पिता की आखिरी बातचीत मंगलवार शाम हुई थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि वे कुवैत से मुंबई पहुंचेंगे और वहां से ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश आएंगे। 30 साल से विदेश में कर रहे थे काममंजूर अहमद पिछले करीब 30 वर्षों से विदेश में रहकर टेलरिंग का काम कर रहे थे। वे अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। परिवार में उनकी पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा है, जो अभी पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी पूरी तरह उनके कंधों पर थी। वे समय-समय पर घर आते रहते थे, लेकिन अधिकतर समय विदेश में ही काम करते थे। अहमदाबाद से उज्जैन लाया जा रहा शवमृतक का पार्थिव शरीर शुक्रवार को अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचा, जहां से औपचारिकताओं के बाद उसे सड़क मार्ग से उज्जैन भेजा गया। स्थानीय प्रशासन और परिजन अंतिम संस्कार की तैयारियों में जुटे हुए हैं। परिवार और रिश्तेदारों के घर पर शोक का माहौल है। जैसे ही मौत की खबर आई, आसपास के लोग और परिचित बड़ी संख्या में घर पहुंचने लगे। भारत ने हमले की निंदा कीइस घटना पर भारत सरकार ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच आम नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाइस हमले को लेकर ईरान और अन्य देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने इसे अपनी सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।
भाजपा से अलग हुए के. अन्नामलाई, गठबंधन राजनीति से नाराजगी बनी वजह; नई राजनीतिक पारी की अटकलें तेज

नई दिल्ली । कर्नाटक में नई सरकार के गठन के कुछ ही समय बाद कांग्रेस के भीतर असंतोष और राजनीतिक खींचतान की खबरों ने राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नवगठित सरकार को उस समय बड़ा झटका लगा जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता और आठ बार विधायक रह चुके रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। विभागों के आवंटन को लेकर उपजे विवाद ने सरकार के शुरुआती दिनों में ही राजनीतिक चुनौतियों को सामने ला दिया है। मंत्रिमंडल गठन के बाद विभागों के बंटवारे की घोषणा होते ही पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा शुरू हो गई थी। बताया गया कि रामलिंगा रेड्डी अपने पसंदीदा और लंबे समय से जुड़े माने जाने वाले बेंगलुरु विकास विभाग की जिम्मेदारी चाहते थे। हालांकि अंतिम सूची में यह विभाग किसी अन्य मंत्री को सौंप दिया गया, जबकि रेड्डी को प्रमुख और मध्यम सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इसी फैसले से नाराज होकर उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि बेंगलुरु विकास विभाग राज्य की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे राजधानी से जुड़े कई विकास कार्यों और योजनाओं का सीधा संबंध रहता है। ऐसे में इस विभाग को लेकर पैदा हुआ विवाद केवल एक मंत्रालय का मुद्दा नहीं बल्कि राजनीतिक प्रभाव और क्षेत्रीय नेतृत्व से भी जुड़ा माना जा रहा है। रामलिंगा रेड्डी ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी नेतृत्व उनके अनुभव और वरिष्ठता को ध्यान में रखेगा। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस के भीतर चर्चा तेज हो गई है कि सरकार गठन के शुरुआती चरण में ही इस तरह का असंतोष भविष्य में और चुनौतियां पैदा कर सकता है। रेड्डी को राज्य की राजनीति में प्रभावशाली नेता माना जाता है और बेंगलुरु क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ रही है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा के रूप में देखी जा रही है। सरकार के गठन के बाद उनकी प्राथमिकता प्रशासनिक स्थिरता और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना है। ऐसे समय में वरिष्ठ नेता का असंतोष विपक्ष को भी सरकार पर सवाल उठाने का अवसर दे सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस विवाद का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो इसका असर सरकार की छवि पर पड़ सकता है। कांग्रेस नेतृत्व भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा नाराज नेताओं से बातचीत कर स्थिति को सामान्य बनाने की कोशिशें किए जाने की संभावना जताई जा रही है। संगठन की कोशिश होगी कि सरकार के शुरुआती दिनों में किसी भी प्रकार का बड़ा राजनीतिक संदेश बाहर न जाए और आंतरिक मतभेदों को संवाद के माध्यम से सुलझाया जाए। कर्नाटक की राजनीति में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के आवंटन को लेकर असंतोष कोई नई बात नहीं है, लेकिन नई सरकार के गठन के तुरंत बाद सामने आया यह विवाद विशेष महत्व रखता है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस चुनौती से किस प्रकार निपटते हैं और क्या रामलिंगा रेड्डी को मनाकर सरकार के भीतर संतुलन बहाल किया जा सकेगा।
राजधानी में सुरक्षा अलर्ट, धमकी भरे ईमेल के बाद मेयर दफ्तर, धार्मिक स्थलों और रेलवे नेटवर्क की निगरानी बढ़ी

नई दिल्ली । कर्नाटक में मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली नई कांग्रेस सरकार के भीतर विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और मंत्री केएच मुनियप्पा द्वारा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार संभालने से इनकार किए जाने के बाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। इससे पहले वरिष्ठ नेता रामलिंगा रेड्डी भी विभाग आवंटन को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। लगातार दूसरे वरिष्ठ मंत्री के विरोध ने सरकार और कांग्रेस नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। बेंगलुरु ग्रामीण जिले के देवनहल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान केएच मुनियप्पा ने स्पष्ट किया कि वह मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें सौंपे गए विभाग का प्रभार ग्रहण नहीं करेंगे। उनका कहना है कि विभागों का आवंटन करते समय वरिष्ठ नेताओं के अनुभव, राजनीतिक योगदान और संगठन में उनकी भूमिका का पर्याप्त सम्मान नहीं किया गया। उन्होंने संकेत दिया कि जब तक पार्टी नेतृत्व इस मामले की समीक्षा कर कोई संतोषजनक निर्णय नहीं लेता, तब तक वह मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभालेंगे। पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा ने कहा कि लंबे राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव वाले नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपते समय वरिष्ठता को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी नेतृत्व की जिम्मेदारी केवल सरकार चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के भीतर संतुलन और विश्वास बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। उनके अनुसार ऐसे फैसले होने चाहिए जो संगठनात्मक एकता को मजबूत करें और कार्यकर्ताओं में सकारात्मक संदेश पहुंचाएं। मुनियप्पा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से सीधे हस्तक्षेप की मांग भी की है। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष को एक अभिभावक की भूमिका निभाते हुए सभी वरिष्ठ नेताओं की भावनाओं को समझना चाहिए और ऐसा समाधान निकालना चाहिए जिससे किसी भी स्तर पर असंतोष की स्थिति न बने। उन्होंने बताया कि अपनी नाराजगी से वह राहुल गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, केसी वेणुगोपाल, सिद्धारमैया और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित शीर्ष नेतृत्व को अवगत करा चुके हैं। हालांकि मुनियप्पा ने किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन उनके बयान ने कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही असहजता को उजागर कर दिया है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से असंतुष्ट हैं कि कई प्रभावशाली विभाग अपेक्षाकृत युवा नेताओं या राजनीतिक रूप से प्रभावशाली परिवारों से जुड़े नेताओं को दिए गए हैं, जबकि लंबे समय से संगठन में योगदान देने वाले कुछ वरिष्ठ नेताओं को उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप जिम्मेदारियां नहीं मिलीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल विभागों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार और संगठन के भीतर शक्ति संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। नई सरकार के गठन के बाद यदि वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी लगातार बढ़ती है तो इसका असर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजनीतिक संदेश दोनों पर पड़ सकता है। ऐसे समय में कांग्रेस नेतृत्व के लिए सभी पक्षों को साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुनियप्पा की नाराजगी को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि वह कर्नाटक कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में शामिल हैं। सात बार सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके मुनियप्पा का राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। रामलिंगा रेड्डी के बाद उनका विरोध यह संकेत देता है कि विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष व्यापक रूप ले सकता है। अब कांग्रेस हाईकमान और मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार के भीतर एकजुटता बनाए रखने और नाराज नेताओं को संतुष्ट करने की होगी।
शिप्रा एक्सप्रेस में मिली 1.5 करोड़ की हेरोइन, उज्जैन स्टेशन पर आरोपी दबोचा गया

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Ujjain रेलवे स्टेशन पर सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स (CBN) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए शिप्रा एक्सप्रेस से 1.067 किलोग्राम हेरोइन बरामद की है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मादक पदार्थ की कीमत करीब सवा करोड़ रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के दौरान राजस्थान के प्रतापगढ़ निवासी एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर यह खेप पश्चिम बंगाल ले जा रहा था। इस कार्रवाई का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें नारकोटिक्स और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के अधिकारी ट्रेन के जनरल कोच में तलाशी अभियान चलाते और संदिग्ध आरोपी को पकड़ते दिखाई दे रहे हैं। प्रारंभिक जांच में यह मामला अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क से जुड़ा माना जा रहा है, जिसके तार कई राज्यों तक फैले हो सकते हैं। खुफिया सूचना के बाद स्टेशन पर बिछाया गया जालजानकारी के अनुसार, Central Bureau of Narcotics को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि शिप्रा एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22911) के माध्यम से बड़ी मात्रा में हेरोइन की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही एजेंसी ने रेलवे सुरक्षा बल के साथ संयुक्त रणनीति तैयार की। गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात करीब एक बजे ट्रेन के उज्जैन स्टेशन पहुंचने से पहले ही अधिकारियों ने प्लेटफॉर्म पर निगरानी बढ़ा दी। ट्रेन रुकते ही जनरल कोच में सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान अधिकारियों की नजर एक संदिग्ध युवक पर पड़ी, जिसकी गतिविधियां सामान्य यात्रियों से अलग दिखाई दे रही थीं। बैग की तलाशी में खुला बड़ा राजसंदेह के आधार पर युवक को रोककर उसके हैंडबैग की जांच की गई। तलाशी के दौरान बैग में छिपाकर रखे गए दो पैकेट बरामद हुए। जब पैकेटों की जांच की गई तो उनमें कुल 1.067 किलोग्राम हेरोइन मिली। अधिकारियों ने मौके पर ही मादक पदार्थ को जब्त कर लिया और आरोपी को हिरासत में ले लिया। बरामद हेरोइन की मात्रा और उसकी कीमत को देखते हुए इसे हाल के समय की महत्वपूर्ण नारकोटिक्स कार्रवाई माना जा रहा है। राजस्थान से हावड़ा तक फैला था सप्लाई रूटजांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान रमेश चंद्र के रूप में हुई है, जो राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले का रहने वाला है।प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि हेरोइन की खेप राजस्थान के प्रतापगढ़ क्षेत्र से पश्चिम बंगाल के हावड़ा भेजी जा रही थी। इस पूरे नेटवर्क में उज्जैन एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि खेप किसे सौंपी जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। वीडियो में दिखी पूरी कार्रवाईकार्रवाई का जो वीडियो सामने आया है, उसमें अधिकारी ट्रेन रुकते ही जनरल कोच में प्रवेश कर यात्रियों और सामान की जांच करते नजर आ रहे हैं। कुछ देर बाद संदिग्ध युवक को प्लेटफॉर्म पर लाकर उसके बैग की तलाशी ली जाती है। बैग से हेरोइन बरामद होने के बाद अधिकारियों द्वारा उसे हिरासत में लेते हुए भी देखा जा सकता है। यह वीडियो एजेंसियों की सतर्कता और योजनाबद्ध कार्रवाई को भी दर्शाता है, जिसके चलते बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ को गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया गया। नेटवर्क के अन्य सदस्यों की तलाशसीबीएन ने आरोपी के खिलाफ NDPS Act के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब जांच का फोकस पूरे ड्रग तस्करी नेटवर्क की पहचान करने और इसके अन्य सदस्यों तक पहुंचने पर है। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में पूछताछ से अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी गिरोह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एजेंसी सप्लाई चेन, फंडिंग नेटवर्क और तस्करी के रूट की भी गहन जांच कर रही है।
महाकाल दर्शन व्यवस्था पर सवाल, अवैध वसूली के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश । उज्जैन स्थित Shri Mahakaleshwar Temple में भस्म आरती की अनुमति दिलाने के नाम पर श्रद्धालुओं से अवैध वसूली का मामला सामने आया है। मंदिर प्रशासन के औचक निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि कुछ लोगों ने श्रद्धालुओं से प्रति व्यक्ति 2500 रुपए लेकर आरती में प्रवेश की व्यवस्था कराने का दावा किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने तत्काल पुलिस को शिकायत सौंपी, जिसके आधार पर तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। घटना के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन ने भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए प्रवेश व्यवस्था में भी बदलाव करने का निर्णय लिया है। औचक निरीक्षण में सामने आई गड़बड़ीशुक्रवार तड़के मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक भस्म आरती की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न प्रवेश द्वारों से आने वाले श्रद्धालुओं से बातचीत की और उनकी अनुमति प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली। नीलकंठ द्वार, मानसरोवर मार्ग और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर अनुमति जांच के दौरान कुछ श्रद्धालुओं ने चौंकाने वाली जानकारी दी। तीन श्रद्धालुओं ने बताया कि उनसे भस्म आरती में शामिल होने की अनुमति दिलाने के नाम पर 2500-2500 रुपए लिए गए थे। श्रद्धालुओं की शिकायत से खुला मामलाप्रशासक द्वारा पूछताछ किए जाने पर श्रद्धालुओं ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अलावा अतिरिक्त राशि का भुगतान किया था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने संबंधित दस्तावेजों और अनुमति प्रक्रिया की जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि भस्म आरती की प्रोटोकॉल अनुमति किसी कथित ‘हिन्दू संगठन’ के नाम से कराई गई थी। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि श्रद्धालुओं से वसूली गई राशि किस व्यक्ति या समूह तक पहुंची। तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIRमंदिर प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए Mahakal Police Station में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं से पैसे लेने में कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या यह कोई संगठित नेटवर्क था या कुछ व्यक्तियों द्वारा की जा रही अवैध गतिविधि। प्रवेश व्यवस्था में होगा बड़ा बदलावघटना के बाद मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब भस्म आरती में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं के लिए नीलकंठ द्वार को मुख्य और एकमात्र प्रवेश द्वार बनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का मानना है कि एकल प्रवेश व्यवस्था से अनुमति प्रक्रिया की निगरानी आसान होगी और किसी भी प्रकार की दलाली या अवैध वसूली पर अंकुश लगाया जा सकेगा। भस्म आरती को लेकर रहती है भारी मांगमहाकाल मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्रतिदिन तड़के होने वाली इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आवेदन करते हैं। सीमित संख्या में अनुमति मिलने के कारण कई बार दलालों और बिचौलियों के सक्रिय होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ताजा मामले ने एक बार फिर आरती अनुमति प्रक्रिया की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे केवल अधिकृत माध्यमों से ही अनुमति प्राप्त करें।
आधा इंच बारिश के बाद सुहाना हुआ मौसम, कई इलाकों में रिमझिम और बूंदाबांदी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में प्री-मानसून गतिविधियों ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। गुरुवार देर रात से शुरू हुई बारिश और ठंडी हवाओं ने भीषण गर्मी से राहत दिलाई। शुक्रवार तड़के शहर के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि सुबह से कई इलाकों में रिमझिम और बूंदाबांदी का दौर जारी रहा। मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में 15.6 मिमी यानी लगभग आधा इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है। सबसे बड़ा बदलाव रात के तापमान में देखने को मिला, जो एक ही दिन में करीब 6 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। इससे शहरवासियों को उमस और गर्मी से काफी राहत मिली है। चार दिन बाद बदला मौसम का मिजाजपिछले चार दिनों से इंदौर का अधिकतम तापमान लगातार 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ था। बुधवार को दिन का तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था, जबकि गुरुवार को यह 38.4 डिग्री सेल्सियस रहा। हालांकि देर रात मौसम ने अचानक करवट ली। बादल छाने लगे और कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई। इसके असर से न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बुधवार रात जहां तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस था, वहीं गुरुवार रात यह घटकर 19 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि प्री-मानसून की सक्रियता के चलते फिलहाल वातावरण में ठंडक बनी रहेगी और अगले कुछ दिनों तक बादलों की आवाजाही जारी रह सकती है। आज भी बारिश और बूंदाबांदी के आसारमौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में मिश्रित मौसम बना रहेगा। कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश, कहीं रिमझिम फुहारें और कहीं केवल बूंदाबांदी देखने को मिल सकती है। बादलों और ठंडी हवाओं के कारण दिन के तापमान में भी कमी महसूस की जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियां प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में सक्रिय रह सकती हैं। मध्य प्रदेश में 20 से 22 जून के बीच मानसून की संभावनाइस बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून ने Kerala में दस्तक दे दी है, जिससे मध्य प्रदेश में मानसून आगमन की उम्मीदें बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य तिथि की तुलना में लगभग 5 से 7 दिन की देरी से प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। सामान्यतः मानसून 15 जून के आसपास मध्य प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि केरल में प्रवेश के लगभग 15 दिन बाद मानसून मध्य प्रदेश में सक्रिय होता है। चूंकि इस वर्ष मानसून 4 जून को केरल पहुंचा है, इसलिए 20 जून के बाद इसके प्रदेश में प्रवेश की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी पर नजरमौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की वास्तविक गति अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले मौसमी सिस्टम पर निर्भर करेगी। यदि अनुकूल परिस्थितियां बनी रहती हैं तो मानसून तेजी से आगे बढ़ सकता है, जबकि किसी बड़े मौसमीय व्यवधान की स्थिति में इसकी तिथि में बदलाव भी संभव है। फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक, तेज हवाओं और हल्की बारिश का सिलसिला जारी है, जिसे मानसून पूर्व गतिविधियों का हिस्सा माना जा रहा है। पिछले वर्षों में जून रहा अपेक्षाकृत ठंडामौसम के आंकड़ों के अनुसार इंदौर में पिछले छह वर्षों के दौरान जून माह में अत्यधिक गर्मी नहीं पड़ी। वर्ष 2020 से 2025 के बीच जून में अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। पिछले वर्ष 2025 में भी जून के दौरान अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, लेकिन समय-समय पर हुई बारिश ने गर्मी का असर कम रखा था। इस बार भी प्री-मानसून गतिविधियों के चलते मौसम में राहत बनी हुई है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ा सस्पेंस, बागी टीएमसी गुट में मतभेद खुलकर आए सामने, ममता के नेतृत्व पर फिर बनी सहमति

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस से जुड़े घटनाक्रम लगातार नए मोड़ ले रहे हैं। कुछ दिन पहले पार्टी के भीतर बड़े राजनीतिक विभाजन की खबरों के बीच जिस बागी गुट ने खुद को संगठन की नई ताकत के रूप में पेश किया था, उसी समूह के भीतर अब मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं। कई विधायकों द्वारा सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के नेतृत्व के समर्थन ने इस पूरे घटनाक्रम को नई दिशा दे दी है।राज्य की सत्तारूढ़ राजनीति में यह बदलाव उस समय सामने आया है जब हाल ही में पार्टी से अलग हुए विधायकों के एक समूह ने अपना स्वतंत्र गुट बनाकर नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाई थी। इस गुट ने दावा किया था कि बड़ी संख्या में विधायक उनके साथ हैं और वे संगठन के भविष्य को नई दिशा देना चाहते हैं। इसके बाद विधानसभा स्तर पर भी उनकी सक्रियता देखने को मिली थी और विपक्षी नेतृत्व को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया था।हालांकि अब बागी गुट के भीतर से ही अलग-अलग आवाजें सामने आने लगी हैं। हावड़ा क्षेत्र के विधायक गुलशन मलिक ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ममता बनर्जी केवल मार्गदर्शक की भूमिका में रहें और नेतृत्व किसी अन्य व्यक्ति को सौंप दिया जाए, यह विचार उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी ही उनके लिए सर्वोच्च नेता हैं और पार्टी का नेतृत्व भी उनके हाथों में ही रहना चाहिए।गुलशन मलिक के इस बयान को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि बागी गुट के भीतर नेतृत्व को लेकर पूर्ण सहमति नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई अन्य विधायक भी इसी सोच से सहमत हैं और इस विषय पर आपसी चर्चा हो चुकी है। उनके अनुसार पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भावनाएं भी ममता बनर्जी के नेतृत्व के साथ जुड़ी हुई हैं।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम बागी गुट की रणनीति को प्रभावित कर सकता है। यदि बड़ी संख्या में विधायक नेतृत्व परिवर्तन के बजाय ममता बनर्जी के नेतृत्व को जारी रखने के पक्ष में रहते हैं तो बागी खेमे की राजनीतिक ताकत और संगठनात्मक दावे कमजोर पड़ सकते हैं। इससे भविष्य में गुट की एकजुटता बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।गौरतलब है कि हाल के दिनों में बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग समूह बनाए जाने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। बागी खेमे ने विधानसभा स्तर पर अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की थी और राजनीतिक मान्यता हासिल करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं भी पूरी की थीं। इस कदम को राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा था।अब जबकि उसी समूह के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद सामने आने लगे हैं, राजनीतिक समीकरण फिर बदलते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी गुट अपनी एकजुटता बनाए रख पाता है या फिर आंतरिक मतभेद उसके प्रभाव को सीमित कर देते हैं। फिलहाल इतना तय है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी यह घटनाक्रम राज्य के राजनीतिक भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है और सभी दलों की नजरें आगे होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।
पुतिन के बाद ट्रंप का भी मोदी पर विश्वास, बोले- अच्छे दोस्त हैं पीएम, जल्द होगी भारत-अमेरिका ट्रेड डील

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ताओं को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर सराहना करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता जल्द ही अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है और समझौते को लेकर उम्मीदें मजबूत हुई हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा मित्र बताया और कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत तथा कूटनीतिक संबंध बेहद अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर प्रगति हो रही है और दोनों देश जल्द ही इस दिशा में महत्वपूर्ण परिणाम हासिल कर सकते हैं। ट्रंप ने यह भी कहा कि अतीत में भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए ऊंचे शुल्क को लेकर अमेरिका की चिंताएं रही हैं, लेकिन वर्तमान दौर में दोनों देश व्यापारिक संबंधों को नए स्तर पर ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से इस सप्ताह एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचा था। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दिनों तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, निवेश और विभिन्न व्यापारिक बाधाओं से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। वार्ता के समापन के बाद दोनों पक्षों की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। इससे पहले केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि व्यापार समझौते को लेकर लगभग 99 प्रतिशत बातचीत पूरी हो चुकी है। इसी क्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी संकेत दिया कि अब केवल कुछ सीमित मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के अधिकारी शेष बाधाओं को दूर करने के लिए लगातार संपर्क में हैं और अगले कुछ सप्ताह के भीतर समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा दे सकता है। इससे वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में वृद्धि होने के साथ-साथ निवेश और तकनीकी सहयोग को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक साझेदारी दोनों देशों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उल्लेखनीय है कि ट्रंप का यह बयान रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin की टिप्पणी के तुरंत बाद सामने आया है। पुतिन ने भी प्रधानमंत्री Narendra Modi और भारत की प्रशंसा करते हुए कहा था कि भारत एक महान लोकतांत्रिक राष्ट्र है, जो अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा था कि भारत जैसे बड़े और प्रभावशाली देश पर बाहरी दबाव बनाना आसान नहीं है तथा अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भारत की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। लगातार आ रहे इन बयानों को वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक अहमियत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। भारत जहां एक ओर प्रमुख वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, वहीं दूसरी ओर अपने आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने के लिए सक्रिय रूप से नई साझेदारियां विकसित कर रहा है। ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का संभावित निष्कर्ष दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकता है।
पहले दोस्तों से मारपीट, फिर युवक पर हमला; चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में गुरुवार देर रात एक कैफे पर हुए खूनी हमले में 22 वर्षीय युवक की मौत हो गई। द्वारकापुरी थाना क्षेत्र के विदुर नगर स्थित 60 फीट रोड पर चार युवकों ने पहले मृतक के दोस्तों के साथ मारपीट की और उन्हें वहां से भगा दिया। इसके बाद युवक पर चाकू और डंडों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को हिरासत में लेकर हत्या का मामला दर्ज किया है। शुरुआती जांच में प्रेम प्रसंग को हत्या की मुख्य वजह माना जा रहा है। देर रात कैफे पर हुआ हमलामृतक की पहचान क्रिश श्रीवास्तव के रूप में हुई है, जो विदुर नगर का निवासी था। गुरुवार रात करीब 12 बजे वह अपने दोस्तों चेतन और आदर्श के साथ एक कैफे पर बैठा हुआ था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इसी दौरान आरोपी बाइक से वहां पहुंचे और आते ही विवाद शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद मारपीट में बदल गया। आरोपियों ने हथियार निकाल लिए, जिससे घबराकर क्रिश के दोनों दोस्त वहां से भाग गए। दोस्तों के जाने के बाद बदमाशों ने क्रिश को घेर लिया और उस पर चाकू तथा डंडों से हमला कर दिया। हमले में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में तोड़ा दमघटना की सूचना मिलते ही द्वारकापुरी पुलिस मौके पर पहुंची। परिजन और स्थानीय लोग क्रिश को तुरंत अस्पताल लेकर गए, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। हत्याकांड की सूचना मिलते ही दिशेष अग्रवाल, शिवेंदु जोशी और मनीष मिश्रा मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। चार आरोपी हिरासत मेंपुलिस ने मामले में अंकित पाल, अनिकेत पाल, गौरव काला और शिवा उर्फ शिवम पाल को आरोपी बनाया है। चारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आने पर आरोपियों की संख्या बढ़ भी सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आरोपी गौरव पर पहले से चार और अंकित पर दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रेम प्रसंग बना हत्या की वजह?जांच में सामने आया है कि मृतक और आरोपियों के बीच पहले से विवाद चल रहा था। पुलिस को आशंका है कि प्रेम प्रसंग से जुड़ा विवाद इस हत्याकांड की मुख्य वजह हो सकता है। सूत्रों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पहले भी कई बार कहासुनी और तनाव की स्थिति बन चुकी थी। पुलिस अब पुराने विवादों और मोबाइल कॉल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है, ताकि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आ सके। परिवार का इकलौता बेटा था क्रिशक्रिश अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। वह पहले चोइथराम मंडी में बिलिंग का काम करता था, लेकिन पिछले करीब तीन महीनों से बेरोजगार था। परिवार में उसकी मां रोशनी, बड़ी बहन और पिता महेंद्र हैं। पिता मंडी में सब्जी बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। बेटे की असमय मौत से पूरा परिवार सदमे में है। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस जुटी साक्ष्य जुटाने मेंपुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों और मृतक के दोस्तों से भी पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के बाद घटना से जुड़े अन्य पहलुओं का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल हत्या, मारपीट और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।