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दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव

मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद संभावित उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सामाजिक समीकरण साध रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर जनता का एक बड़ा वर्ग भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज नजर आ रहा है। उपचुनाव का इंतजार, 14 जुलाई पर टिकी निगाहेंदतिया में इन दिनों चौराहों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित विधानसभा उपचुनाव की है। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की नजर 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं। 2023 की हार का बोझ अब भी नरोत्तम मिश्रा के साथदतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे? 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसई क्षेत्र में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलना उनकी हार की बड़ी वजह बना। भाजपा को उम्मीद थी कि 2018 की तरह अंतिम चरणों में वोटों का बड़ा अंतर उनके पक्ष में जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक हार के पीछे केवल विपक्ष की ताकत नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की निष्क्रियता, कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास और जनता की नाराजगी भी जिम्मेदार रही। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्य होने के बावजूद कुछ स्थानीय समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होने से असंतोष बढ़ा। अब मिश्रा लगातार सामाजिक सम्मेलन, समाज प्रमुखों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं के संपर्क अभियान के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राजेंद्र भारती के कार्यकाल पर जनता की मिली-जुली राय वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में Rajendra Bharti का कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। कई लोगों का आरोप है कि वे आम जनता से दूर रहे और क्षेत्रीय विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक असहयोग और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कई विकास कार्य कराए। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया। कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतानउपचुनाव से पहले कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक एकजुटता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में दावेदारी छोड़ चुके अवधेश नायक भी खुद को मजबूत उम्मीदवार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हाल ही में Rahul Gandhi से हुई मुलाकातों और संभावित दावेदारों की सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गुटबाजी से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा। आजाद समाज पार्टी भी बना रही मजबूत जमीनदतिया के संभावित चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में आजाद समाज पार्टी भी सक्रिय है। दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों उनके प्रभाव को गंभीरता से देख रही हैं। जातीय समीकरण बन सकते हैं चुनाव का निर्णायक फैक्टरराजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक मानी जाती है। अलग-अलग दल इन वर्गों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। भाजपा जहां सामाजिक सम्मेलनों के जरिए विभिन्न समुदायों तक पहुंच रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने में जुटी है। जनता का संदेश साफ: केवल वादे नहीं, काम चाहिएदतिया के राजनीतिक माहौल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के प्रति असंतोष दिखाई देता है। कई नागरिकों का कहना है कि वे अब केवल राजनीतिक दावों से प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवार की पहुंच, जवाबदेही और क्षेत्रीय विकास के आधार पर निर्णय लेंगे। यही कारण है कि संभावित उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को हासिल करने की चुनौती भी होगा।

चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है। कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया। स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है। कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

हरियाली के संदेश के साथ फिटनेस का अभियान, शहर में होंगे कई विशेष आयोजन

मध्य प्रदेश । राजधानी भोपाल में विश्व पर्यावरण दिवस और वर्ल्ड बाइसिकल डे के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 5 जून से 7 जून तक शहर में साइक्लोथॉन, वृक्षारोपण, परिचर्चा और साइकिल रैली जैसे आयोजन लोगों को हरित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। पर्यावरण और फिटनेस का बनेगा संगमभोपाल में इस बार विश्व पर्यावरण दिवस केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी की गई है। विभिन्न सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और खेल संस्थानों की ओर से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फिटनेस को भी बढ़ावा देना है। आयोजकों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच नागरिकों को प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बनाने की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला तैयार की गई है। एनजीटी बार एसोसिएशन की साइक्लोथॉन बनेगी आकर्षण का केंद्रविश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर National Green Tribunal Bar Association की ओर से साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह रैली सुबह 6 बजे एनजीटी भवन से शुरू होकर Shahpura Lake पार्क तक पहुंचेगी। इस आयोजन में न्यायपालिका से जुड़े सदस्य, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, विद्यार्थी और आम नागरिक भाग लेंगे। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को पौधों का वितरण किया जाएगा तथा अल्पाहार की व्यवस्था भी रहेगी। आयोजकों का कहना है कि साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मानव संग्रहालय में होगा वृक्षारोपण और पर्यावरण संवादश्यामला हिल्स स्थित Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya में भी विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।यह आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) और मानव संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में होगा। कार्यक्रम में पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण विषयक परिचर्चा भी आयोजित की जाएगी। मुख्य अतिथि के रूप में Malti Rai शामिल होंगी। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया जाएगा। परिचर्चा में ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली, जल संरक्षण, सोशल मीडिया की भूमिका और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। सामाजिक संस्थाएं भी निभा रही जिम्मेदारीपर्यावरण संरक्षण की मुहिम में सामाजिक संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अर्श फाउंडेशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने दैनिक जीवन में कम से कम एक पर्यावरण-अनुकूल आदत अपनाएं और उसे दूसरों तक पहुंचाएं। संस्था ने कपड़े के थैले का उपयोग, प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर स्टील या पुन: उपयोग योग्य बोतलों का इस्तेमाल, साइकिल से आवागमन, पौधारोपण, पेड़ों की देखभाल और बिजली-पानी की बचत जैसे उपायों को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। वर्ल्ड बाइसिकल डे पर निकलेगी भव्य साइकिल रैली7 जून को वर्ल्ड बाइसिकल डे के अवसर पर Sports Authority of India के सीआरसी भोपाल द्वारा ‘Sunday on Cycle’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साइकिल रैली सुबह 6 बजे TT Nagar Stadium से शुरू होकर बोर्ड ऑफिस चौराहे तक जाएगी और फिर वापस स्टेडियम पहुंचेगी। रैली शुरू होने से पहले प्रतिभागियों के लिए जुम्बा सेशन आयोजित किया जाएगा। साथ ही प्रतिभागियों को निःशुल्क टी-शर्ट और रिफ्रेशमेंट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और नागरिकों के बीच साइक्लिंग संस्कृति को बढ़ावा देना, फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। शहर में बन रहा सकारात्मक माहौललगातार तीन दिनों तक चलने वाले इन आयोजनों से भोपाल में पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों को व्यवहारिक बदलाव के लिए भी प्रेरित करते हैं। साइकिलिंग, पौधारोपण और पर्यावरण संवाद जैसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

अध्यक्ष ने घर में लगवा लिया ऑफिस का AC! स्वच्छता सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर सरकारी संपत्ति के उपयोग और प्रशासनिक फैसलों तक कई घटनाएं चर्चा में हैं। कहीं रैंकिंग सुधारने के लिए नाली पर अस्थायी जालियां लगाकर फोटो खिंचवाए गए, तो कहीं नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचने का आरोप लगा। वहीं एक मंत्री के बंगले में निकले सांप और स्वास्थ्य विभाग के एक विवादित अधिकारी को मिले वित्तीय अधिकार भी सुर्खियों में हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए ‘जुगाड़’, फोटो खिंचते ही हट गईं जालियांमध्य प्रदेश को अक्सर ‘अजब-गजब’ प्रदेश कहा जाता है और टीकमगढ़ की एक घटना ने इस कहावत को फिर चर्चा में ला दिया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करने की कोशिश में नगर पालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। बताया जा रहा है कि एक मोहल्ले की खुली नाली को अस्थायी रूप से लोहे की जालियों से ढंक दिया गया। मौके पर सफाईकर्मी से झाड़ू लगवाई गई और फोटो-वीडियो शूट किए गए। लेकिन जैसे ही रिकॉर्डिंग पूरी हुई, जालियां वापस हटा ली गईं। मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय कांग्रेस पार्षद ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो वायरल होने के बाद नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक सफाई सुधारने के बजाय केवल सर्वेक्षण के लिए दिखावटी इंतजाम किए गए। इंदौर में पानी पड़ते ही उतर गया सौंदर्यीकरण का रंगदेश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले Indore में भी स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों के बीच गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया है। सड़कों के डिवाइडरों पर कराए गए रंग-रोगन का निरीक्षण करने पहुंचे भाजपा पार्षद Rajendra Rathore ने पाया कि रंग पर पानी डालते ही वह उखड़ने लगा। हल्की रगड़ से भी पुताई खराब होती दिखाई दी। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों और ठेकेदारों को मौके पर बुलाया गया। पार्षद ने कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है। नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचा, फिर मचा बवालभिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। भिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री के बंगले में निकला सात फीट लंबा सांपछतरपुर में राज्य मंत्री Dilip Ahirwar के सरकारी बंगले में करीब सात फीट लंबा सांप निकलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर सर्पमित्र मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू किया। हालांकि घटना से ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी की हुई, जो सर्पमित्र ने सांप को पकड़ने के बाद मजाकिया अंदाज में की। उन्होंने कहा कि यह “मंत्री जी के खाते-पीते घर का सांप” है। यह टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद लोग मुस्कुरा पड़े और बाद में यह बात शहरभर में चर्चा का विषय बन गई। रिश्वत प्रकरण के बाद भी मिले वित्तीय अधिकारभोपाल से सटे एक जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक अधिकारी को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी पर पहले रिश्वत लेने के आरोप लगे थे और मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंचा था। हालांकि बाद में उन्हें अदालत से कुछ राहत मिली, जिसके बाद विभागीय स्तर पर उन्हें फिर से वित्तीय अधिकार सौंप दिए गए। इस फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात की जाती है, ऐसे में इस तरह के फैसलों को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।

वित्त विभाग सख्त! पांच विभागों के 38 हजार कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं खंगाली जाएंगी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने पांच प्रमुख विभागों में कार्यरत करीब 38 हजार कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के निराकरण और नियमों के विपरीत दिए गए वित्तीय लाभों की समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं। रिटायरमेंट से पहले खंगाला जाएगा पूरा सर्विस रिकॉर्डराज्य सरकार अब उन कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराएगी, जो कार्यभारित, आकस्मिकता निधि से वेतन प्राप्त करने वाले या अन्य श्रेणियों में कार्यरत हैं। जांच के दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वर्तमान स्थिति तक पूरे सेवाकाल के रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और अन्य वित्तीय लाभों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी को नियमों के विरुद्ध लाभ दिए जाने या वेतन निर्धारण में त्रुटि मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पांच विभागों पर रहेगा विशेष फोकसवित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह विशेष अभियान मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा। इनमें लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग शामिल हैं। इन विभागों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके वेतन निर्धारण और सेवा संबंधी प्रकरण वर्षों से लंबित बताए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों के समाधान से कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देशवित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण करें। आदेश में कहा गया है कि अनेक कर्मचारी लंबे समय से अपने वित्तीय मामलों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में वेतनमान और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद भी बने हुए हैं, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। सेवा पुस्तिकाओं की होगी विशेष जांचवित्त विभाग ने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) तथा विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण करें और उनमें दर्ज त्रुटियों को तत्काल सुधारें। यदि किसी मामले में पूर्व अनुमोदन या अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता हो तो उसे भी समय रहते पूरा करने को कहा गया है। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवा अभिलेख अद्यतन और नियमों के अनुरूप हों। छह महीने में पूरा करना होगा अभियानसरकार ने इस विशेष अभियान के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि के भीतर सेवा अभिलेखों, वेतन निर्धारण और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजनी होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से एक ओर कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर वेतन निर्धारण में हुई संभावित अनियमितताओं का भी पता चल सकेगा। सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा के बाद जहां पात्र कर्मचारियों को उनका वैध लाभ मिलेगा, वहीं नियमों के विरुद्ध हुए भुगतान या स्वीकृतियों की स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव होगी।

25 दिन बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी, पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा जांच का इंतजार

मध्य प्रदेश । भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही 18 वर्षीय ख्याति जैन की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। घटना के 25 दिन बाद सामने आए एक वीडियो ने जांच की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिवार ने वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। नए वीडियो ने बढ़ाई जांच की गंभीरताख्याति जैन की मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। इसी बीच सामने आए दो सीसीटीवी वीडियो में तनिष चंद्रवंशी नाम का युवक ख्याति के घर में प्रवेश करता और कुछ देर बाद बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। एक वीडियो में युवक हेलमेट पहनकर घर के अंदर जाता नजर आता है, जबकि दूसरे वीडियो में वह बिना हेलमेट घर में प्रवेश करता दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद परिवार का कहना है कि इन फुटेज की गहन जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। परिवार का आरोप है कि घटना के इतने दिनों बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त पड़ताल नहीं की गई है। मां ने उठाए गंभीर सवालमृतका की मां वर्षा जैन का कहना है कि मामले में संदेही युवक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि ख्याति के सोशल मीडिया अकाउंट, विशेष रूप से इंस्टाग्राम के उपयोग और एक्सेस को लेकर कई ऐसे तथ्य हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है। वर्षा जैन का आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज में युवक के घर से निकलने के कुछ मिनट बाद ही ख्याति के मोबाइल फोन से आत्महत्या से जुड़ा एक संदेश भेजा गया था। ऐसे में मोबाइल गतिविधियों, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी के साथ उनके संबंध बेहद अच्छे थे। मदर्स डे पर ख्याति ने उन्हें उपहार देकर सम्मानित महसूस कराया था। पढ़ाई को लेकर भी वह बेहद गंभीर थी और अपने भविष्य को लेकर लगातार योजनाएं बना रही थी। कमरे की दीवारों पर लिखे थे सपनेपरिवार के अनुसार ख्याति अपने लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं को लेकर बेहद स्पष्ट थी। उसके कमरे में लिखे गए प्रेरणादायक नोट्स और व्यक्तिगत संदेश यह संकेत देते हैं कि वह अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी। मां का कहना है कि ख्याति अपने लगभग हर लक्ष्य के साथ “मां के लिए करना है” जैसी बातें लिखती थी। सोशल मीडिया पर भी वह अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने वाले संदेश साझा करती रहती थी। परिवार का दावा है कि ख्याति और तनिष की दोस्ती को लेकर उन्हें आपत्ति थी और इसी वजह से उनकी गैरमौजूदगी में युवक घर पहुंचा था। यही कारण है कि वे उसकी भूमिका की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा रिपोर्ट का इंतजारमामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। थाना प्रभारी अनुराग लाल के अनुसार ख्याति के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है। साइबर सेल से रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि बिसरा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ख्याति की मौत बाएं हाथ की कलाई में लगी चोट से हुए अत्यधिक रक्तस्राव और सदमे के कारण हुई थी। हालांकि डॉक्टरों ने किसी विषैले पदार्थ की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। इसी कारण रक्त और आंतरिक अंगों के नमूनों को सुरक्षित रखकर रासायनिक एवं विष विज्ञान परीक्षण के लिए भेजा गया है। अंतिम चिकित्सकीय राय रिपोर्ट आने के बाद ही दी जाएगी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या सहित अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है, जबकि परिवार लगातार निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को पत्र, कहा- क्रॉस वोटिंग का खतरा, फिर भी हो रही बड़ी भूल

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा Meenakshi Natarajan को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से दो बार प्रत्याशी रह चुके Naresh Gyanchandani ने इस फैसले पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते हुए पार्टी नेतृत्व को बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं Rahul Gandhi और Priyanka Gandhi Vadra को संबोधित करते हुए कहा कि राज्यसभा उम्मीदवार के चयन में पार्टी से गंभीर चूक हुई है और इससे क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। सोशल मीडिया पर जताई नाराजगीनरेश ज्ञानचंदानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा उम्मीदवार का चयन बेहद सावधानी से किया जाए। उनका दावा है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग की चुनौती बनी हुई है और ऐसे समय में उम्मीदवार चयन को लेकर व्यापक सहमति जरूरी थी। ज्ञानचंदानी ने लिखा कि यदि किसी ऐसे नेता को उम्मीदवार बनाया जाता, जिसकी संगठन और विधायकों पर मजबूत पकड़ हो, तो पार्टी की सीट अधिक सुरक्षित रहती। दिग्विजय सिंह के पक्ष में खुली पैरवीअपने बयान में ज्ञानचंदानी ने स्पष्ट रूप से Digvijaya Singh का नाम लेते हुए कहा कि अगर उन्हें दोबारा राज्यसभा उम्मीदवार बनाया जाता तो कांग्रेस की सीट पूरी तरह सुरक्षित रहती। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह का प्रदेश के विधायकों और संगठन पर प्रभाव है, जिससे किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग की आशंका कम हो सकती थी। ज्ञानचंदानी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें लंबे समय से दिग्विजय सिंह समर्थक नेता के रूप में देखा जाता है। ऐसे में उनका खुला विरोध कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में नए संकेत दे रहा है। कांग्रेस के भीतर बढ़ी हलचलमीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच असहमति की चर्चाएं पहले से चल रही थीं, लेकिन अब पहली बार किसी वरिष्ठ नेता ने सार्वजनिक मंच पर फैसले का विरोध किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव में संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस की स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में पार्टी के भीतर असंतोष के सार्वजनिक होने से नेतृत्व की चिंता बढ़ सकती है। बीजेपी ने साधा निशानाकांग्रेस में उभरे इस विवाद पर बीजेपी ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी Ashish Agrawal ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान पर तंज कसते हुए कहा कि अंतर्कलह और गुटबाजी कांग्रेस की पुरानी पहचान रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब पार्टी के अपने नेता ही शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं और क्रॉस वोटिंग की आशंका जता रहे हैं, तो यह कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति का संकेत है। भाजपा ने इसे संगठनात्मक कमजोरी बताते हुए कांग्रेस पर राजनीतिक हमला भी बोला। राज्यसभा चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमानमध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने उम्मीदवार के पक्ष में एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर से उठ रहे विरोध के स्वर नेतृत्व के लिए नई चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस असंतोष को किस तरह संभालती है और क्या पार्टी अपने विधायकों को एकजुट रखने में सफल हो पाती है।

तेज आंधी बनी मुसीबत, पेड़ गिरने और पोल झुकने से भोपाल में बिजली गुल

मध्य प्रदेश । भोपाल में गुरुवार शाम आई तेज आंधी ने बिजली व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। 70 से 80 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली हवाओं के कारण बिजली के पोल झुक गए, तारों पर पेड़ गिर गए और शहर के सैकड़ों इलाकों में घंटों तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। हालात ऐसे बने कि बिजली कंपनी की टीमें पूरी रात मैदान में डटी रहीं और शुक्रवार सुबह 4:30 बजे तक मरम्मत कार्य जारी रहा। 350 से ज्यादा फीडर प्रभावित, रातभर चला ऑपरेशनमध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधीक्षण यंत्री Pradeep Chauhan ने बताया कि आंधी के कारण 11 केवी के 350 से अधिक फीडर प्रभावित हुए। बिजली लाइनों पर पेड़ गिरने और कई स्थानों पर तकनीकी फॉल्ट आने से शहर के बड़े हिस्से में सप्लाई ठप हो गई। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल मरम्मत दलों को मैदान में उतारा गया। क्षतिग्रस्त और फॉल्टी हिस्सों को हटाकर वैकल्पिक तरीके से लाइनें जोड़ी गईं ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके। रात 8:30 बजे तक 165 फीडर और 9:30 बजे तक 66 फीडरों की आपूर्ति बहाल कर दी गई थी, जबकि शेष प्रभावित क्षेत्रों में बिजली शुक्रवार तड़के 4:30 बजे तक बहाल हो सकी। तारों पर गिरे पेड़, झुक गए बिजली पोलआंधी का असर इतना तेज था कि कई इलाकों में बिजली के खंभे झुक गए और बड़े-बड़े पेड़ उखड़कर तारों पर गिर पड़े। तुलसी टॉवर क्षेत्र में एक पेड़ पोल पर गिरने से बिजली लाइन सड़क पर आ गई। बिजली कंपनी ने अस्थायी व्यवस्था करते हुए लकड़ी के सहारे लाइन को जोड़कर सप्लाई बहाल की। शहर के कई हिस्सों में पेड़ों की शाखाएं और बिजली तार एक-दूसरे में उलझ गए, जिससे मरम्मत कार्य और चुनौतीपूर्ण हो गया। पहली ही तेज आंधी में क्यों चरमराया सिस्टम?घटना के बाद यह सवाल भी उठने लगा कि जब बिजली कंपनी पूरे वर्ष लाइनों के रखरखाव और पेड़ों की छंटाई का दावा करती है, तो पहली बड़ी आंधी में ही सिस्टम कैसे प्रभावित हो गया? इस पर अधीक्षण यंत्री प्रदीप चौहान का कहना है कि नियमित मेंटेनेंस किया जाता है और लाइनों के आसपास की टहनियां भी हटाई जाती हैं। लेकिन इस बार तूफान की तीव्रता असामान्य थी। कई स्थानों पर पूरे पेड़ जड़ से उखड़ गए और पोल तक झुक गए, जिससे व्यापक नुकसान हुआ। 200 से ज्यादा पेड़ गिरे, ट्रैफिक भी प्रभाविततेज आंधी के कारण केवल बिजली व्यवस्था ही नहीं, बल्कि शहर का यातायात भी प्रभावित हुआ। कई प्रमुख सड़कों पर पेड़ गिरने से जाम की स्थिति बन गई। लिंक रोड नंबर-1, 2 और 3, तुलसी नगर, कमला पार्क, अटल पथ, जवाहर चौक और पुराने शहर के कई हिस्सों में पेड़ और शाखाएं सड़क पर आ गिरीं। Sanskriti Jain ने बताया कि नगर निगम की टीमें रात से ही राहत कार्य में जुट गई थीं और अधिकांश प्रमुख मार्गों से पेड़ हटा दिए गए हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर सफाई और कटाई का काम अभी भी जारी है। आज भी जारी रहेगा मरम्मत कार्यबिजली कंपनी के अनुसार 33 केवी, 11 केवी और एलटी नेटवर्क के कई हिस्सों में नुकसान हुआ है। कुछ इलाकों में अभी भी मरम्मत कार्य चल रहा है, जहां दोपहर तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए 10 से अधिक विशेष टीमें लगातार काम कर रही हैं।

MP में बारिश का दौर जारी: झाबुआ, धार-रतलाम में झमाझम, देवास में बही कार; 45 जिलों में अलर्ट

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री से पहले ही प्री-मानसून गतिविधियां पूरे प्रदेश में असर दिखा रही हैं। झाबुआ, धार, पीथमपुर और रतलाम में शुक्रवार सुबह तेज बारिश हुई, जबकि भोपाल समेत कई शहरों में बीते 24 घंटे के दौरान आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश के करीब 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है आंधीमौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, सतना, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। भोपाल में आंधी से अस्त-व्यस्त हुई व्यवस्थाराजधानी भोपाल में गुरुवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवाओं के कारण करीब 80 पेड़ या उनकी शाखाएं सड़कों पर गिर गईं, जिससे कई इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित हुआ। रानी कमलापति स्टेशन परिसर में लोहे का एक फ्रेम भी तेज हवाओं के कारण उड़ गया। कई क्षेत्रों में दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। देवास में बड़ा हादसा टलादेवास जिले के सतवास क्षेत्र में गुरुवार शाम तेज बारिश के दौरान एक कार रपटे पर पानी के तेज बहाव में बह गई। कार में चार लोग सवार थे, जिन्होंने समय रहते वाहन से कूदकर अपनी जान बचा ली। ग्रामीणों ने बाद में ट्रैक्टर और रस्सियों की मदद से कार को बाहर निकाला। इस घटना ने एक बार फिर बरसात के दौरान रपटों और पुल-पुलियों को पार करने के जोखिम को उजागर किया है। झाबुआ, धार और रतलाम में झमाझम बारिशझाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश दर्ज की गई। वहीं रतलाम में सुबह करीब साढ़े चार बजे से बादल छाने लगे और कुछ ही देर में झमाझम बारिश शुरू हो गई। धार जिले के सरदारपुर, लाबरिया, बरमंडल और बाग क्षेत्र में भी तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हुई। हालांकि बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को फसलों को नुकसान होने की आशंका भी सताने लगी है। तापमान में आई बड़ी गिरावटआंधी और बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री तक पहुंच गया। भोपाल में तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। Pachmarhi प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रतलाम, श्योपुर, धार, दमोह और शिवपुरी सहित कई शहरों में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। 20 जून के बाद आ सकता है मानसूनमौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि से 5 से 7 दिन देरी से पहुंच सकता है। प्रदेश में आमतौर पर 15 जून के आसपास मानसून प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच आने की संभावना जताई जा रही है। केरल में मानसून की दस्तक 4 जून को हो चुकी है। सामान्यतः केरल पहुंचने के लगभग 15 दिन बाद मानसून मध्य प्रदेश में प्रवेश करता है। तब तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां इसी तरह सक्रिय रहने की संभावना है।

बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बदलीं सियासी करवटें; ममता बनर्जी के धुर विरोधी हुमायूं कबीर ने दी अपनी जीती हुई सुरक्षित सीट से जिताने की गारंटी

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ सामने आया है। कभी तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक रहे आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अब संकट के समय उनके प्रति सहानुभूति दिखाई है। कबीर ने घोषणा की है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह अपनी नवनिर्वाचित रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, ताकि बनर्जी वहां से उपचुनाव लड़कर राज्य विधानसभा में गरिमामय वापसी कर सकें। यह राजनीतिक प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे गंभीर दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है और भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है। इस हार के बाद टीएमसी के भीतर बड़े पैमाने पर आंतरिक विद्रोह हुआ है, जिससे पार्टी में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी नंदीग्राम सीट खाली करते हुए भवानीपुर सीट अपने पास रखी है, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस पराजय के बाद बनर्जी फिलहाल विधानसभा से बाहर हैं। हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की दो विधानसभा सीटों, नौदा और रेजीनगर, दोनों से ऐतिहासिक जीत हासिल की है। चुनाव नियमों के अनुसार, उन्हें निर्धारित समय के भीतर इन दोनों में से किसी एक सीट से इस्तीफा देना होगा। कबीर ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में स्पष्ट कहा कि यदि ममता बनर्जी उनके पास आती हैं, तो वह रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र को उनके लिए खाली कर देंगे। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषण साझा करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी अगर दोबारा नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो उनके जीतने की संभावना न के बराबर है, लेकिन रेजीनगर में उनके नेतृत्व में बनर्जी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित की जा सकती है। गौरतलब है कि हुमायूं कबीर को पिछले साल पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय तक चले वैचारिक मतभेदों के कारण तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। कबीर ने वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज दीदी जिस दौर से गुजर रही हैं, उसे देखकर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पीड़ा होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह आज सार्वजनिक जीवन में जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं ममता बनर्जी का शुरुआती सहयोग रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को मुर्शिदाबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच कबीर के बढ़ते प्रभाव के रूप में भी देख रहे हैं। कबीर ने अपने प्रभाव को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही आज पूरे राज्य में ममता बनर्जी की बात का प्रभाव कम हो गया हो, परंतु रेजीनगर क्षेत्र में हुमायूं कबीर का निर्णय ही अंतिम और सर्वोपरि माना जाता है। टीएमसी में मची इस ऐतिहासिक बगावत के बीच पूर्व सहयोगियों द्वारा दी जा रही इस प्रकार की राजनीतिक जीवनदान की पेशकश बंगाल की भविष्य की राजनीति को एक नया आयाम दे सकती है।