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भारत-रूस रिश्तों पर पुतिन का बड़ा बयान, कहा- कोई बाहरी ताकत नहीं डाल सकती असर; 100 अरब डॉलर व्यापार का रखा लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर चल रही अहम बातचीत के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और रूस के संबंधों पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने भारत को एक महान राष्ट्र, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और रूस का भरोसेमंद सहयोगी बताते हुए कहा कि दोनों देशों के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं हो सकते। पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की भी खुलकर सराहना की और भारत की आर्थिक प्रगति को उनकी सरकार की नीतियों का परिणाम बताया। सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय संवाद कार्यक्रम के दौरान दुनिया की प्रमुख समाचार एजेंसियों के प्रमुखों से बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी विकास दर दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में गिनी जाती है। उन्होंने कहा कि भारत की यह उपलब्धि उसके नेतृत्व, स्थिर नीतियों और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देने की सोच का परिणाम है। रूसी राष्ट्रपति ने अमेरिका सहित कुछ देशों द्वारा भारत पर रूस के साथ संबंधों को लेकर बनाए जाने वाले दबाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत जैसे बड़े और स्वतंत्र देश पर किसी प्रकार का राजनीतिक या आर्थिक दबाव बनाना आसान नहीं है। उनके अनुसार डेढ़ अरब से अधिक आबादी वाले देश के अपने राष्ट्रीय हित हैं और वह उन्हीं के आधार पर अपने अंतरराष्ट्रीय संबंधों और आर्थिक साझेदारियों का निर्धारण करता है। पुतिन ने संकेत दिया कि किसी भी देश द्वारा भारत की विदेश नीति को प्रभावित करने का प्रयास अंततः उसके अपने हितों के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। भारत-रूस आर्थिक सहयोग का उल्लेख करते हुए पुतिन ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 60 अरब अमेरिकी डॉलर के आसपास है, लेकिन आने वाले वर्षों में इसे 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की पूरी संभावना मौजूद है। उनके अनुसार ऊर्जा, रक्षा, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग के व्यापक अवसर उपलब्ध हैं, जिनका लाभ दोनों देशों को मिलेगा। पुतिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब रूसी तेल की खरीद को लेकर अमेरिका एक बार फिर सख्त रुख अपनाने की तैयारी कर रहा है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि रूस से तेल खरीदने वाले देशों को दी गई कुछ प्रतिबंध छूटों की समीक्षा की जा सकती है। भारत उन प्रमुख देशों में शामिल है जिन्होंने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के दौरान रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा किया है। ऐसे में पुतिन का बयान भारत-रूस ऊर्जा सहयोग के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रूस और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को लेकर पुतिन ने भरोसा जताया कि दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर मिलकर काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने दीर्घकालिक सहयोग की ऐसी रूपरेखा तैयार की है जो पारस्परिक लाभ और साझा विकास पर आधारित है। विशेष महत्व की बात यह है कि पुतिन का यह बयान उनके प्रस्तावित भारत दौरे से पहले आया है। सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में उनके शामिल होने की संभावना है। भारत इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और सम्मेलन को लेकर तैयारियां तेज़ हैं। ऐसे में पुतिन के हालिया बयान को भारत-रूस संबंधों की मजबूती और दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

रेपो रेट पर RBI के फैसले के बाद बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 200 अंक टूटा, बैंकिंग शेयर दबाव में

नई दिल्ली । घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को उतार-चढ़ाव भरा कारोबार देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत सकारात्मक माहौल में हुई और प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त के साथ शुरुआत की, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणा के बाद बाजार का रुख बदल गया। रेपो रेट को यथावत रखने के फैसले और आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कमी के संकेतों ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिसके चलते बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कारोबार के शुरुआती चरण में निवेशकों का रुझान सकारात्मक था और सेंसेक्स के अधिकांश शेयर बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। सूचना प्रौद्योगिकी, वित्तीय सेवाओं और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के कुछ प्रमुख शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। हालांकि, जैसे ही RBI की नीति से जुड़े प्रमुख संकेत सामने आए, बाजार ने अपनी शुरुआती बढ़त खो दी और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों की प्रतिक्रिया केवल रेपो रेट को स्थिर रखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि केंद्रीय बैंक द्वारा आर्थिक वृद्धि के अनुमान को कम करने और महंगाई के अनुमान को बढ़ाने का असर भी बाजार पर दिखाई दिया। इससे निवेशकों के बीच आगामी आर्थिक गतिविधियों और कॉर्पोरेट आय को लेकर सतर्कता बढ़ी, जिसका सीधा असर शेयरों की खरीदारी पर पड़ा। बीएसई सेंसेक्स कारोबार के दौरान 200 अंकों से अधिक फिसल गया और बाद में भी गिरावट के साथ कारोबार करता रहा। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी दबाव में दिखाई दिया। बैंकिंग क्षेत्र के शेयरों में सबसे अधिक असर देखने को मिला, क्योंकि शुरुआती तेजी के बाद इनमें मुनाफावसूली बढ़ गई। निवेशकों को उम्मीद थी कि केंद्रीय बैंक की ओर से नीतिगत दरों में किसी प्रकार की राहत मिल सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होने से बैंकिंग शेयरों की रफ्तार थम गई। दूसरी ओर, तकनीकी और आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। टेक महिंद्रा, इन्फोसिस और टीसीएस जैसे शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रही। इसके अलावा कुछ निजी वित्तीय और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों ने भी शुरुआती सत्र में मजबूती दिखाई। हालांकि व्यापक बाजार में दबाव बढ़ने के कारण इन शेयरों की तेजी भी सीमित रही। गिरावट वाले शेयरों में धातु, ऊर्जा और कुछ बैंकिंग कंपनियों के शेयर प्रमुख रहे। टाटा स्टील, पावरग्रिड, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एनटीपीसी जैसे प्रमुख शेयरों में कमजोरी दर्ज की गई। इन शेयरों में बिकवाली का असर सूचकांकों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। इस बीच विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अपेक्षाकृत स्थिर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपये में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया और यह लगभग पिछले कारोबारी सत्र के स्तर के आसपास कारोबार करता रहा। इससे संकेत मिला कि मुद्रा बाजार ने केंद्रीय बैंक की घोषणा पर सीमित प्रतिक्रिया दी। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर महंगाई, आर्थिक वृद्धि और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बनी रहेगी। यदि आर्थिक आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहते हैं तो बाजार में फिर से खरीदारी लौट सकती है। फिलहाल RBI के ताजा संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिसके कारण बाजार में अल्पकालिक दबाव देखने को मिल रहा है।

शोरूम में लगी आग, पड़ोसियों ने सीढ़ियां जोड़कर बचाई कई लोगों की जान

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Indore में शुक्रवार सुबह एक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) शोरूम में लगी भीषण आग ने बड़ा हादसा होते-होते टाल दिया। लसूड़िया क्षेत्र के खालसा चौक के पास स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने शोरूम में आग लगने से ऊपरी मंजिलों में रहने वाले करीब 20 लोग फंस गए। स्थानीय लोगों, पुलिस और फायर ब्रिगेड की तत्परता से सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि इस हादसे में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन शोरूम में खड़े सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन जलकर खाक हो गए। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। सुबह-सुबह मची अफरा-तफरीघटना शुक्रवार सुबह करीब 7 बजे की है। ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम से अचानक धुआं और लपटें उठने लगीं। कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप ले लिया और धुआं पूरी इमारत में फैलने लगा। ऊपरी मंजिलों पर बने फ्लैट्स में रहने वाले परिवार उस समय सो रहे थे। धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर लोगों की नींद खुली। जब उन्होंने नीचे देखा तो शोरूम आग की लपटों से घिरा हुआ था। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि इमारत की सीढ़ियां शोरूम के ठीक बगल में थीं और आग तथा धुएं की वजह से वहां से नीचे उतरना असंभव हो गया था। ऐसे में लोग अपने-अपने फ्लैट और बालकनियों में फंस गए। पड़ोसियों ने दिखाई सूझबूझ, छतों के बीच बनाया रास्ताइमारत से उठती चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे। पड़ोस की बहुमंजिला इमारत में रहने वालों ने राहत कार्य शुरू कर दिया। लोगों ने पहले फंसे हुए परिवारों को छत पर पहुंचने के लिए कहा। इसके बाद दोनों इमारतों की छतों के बीच सीढ़ियां लगाकर अस्थायी रास्ता तैयार किया गया। खिड़कियों और लोहे के एंगल से रस्सियां बांधकर दूसरी इमारत तक पहुंचाई गईं। कुछ लोग सीढ़ियों के सहारे दूसरी बिल्डिंग की छत तक पहुंचे, जबकि कई लोगों को रस्सियों के सहारे सुरक्षित नीचे उतारा गया। इस दौरान पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंच गई और बचाव अभियान में शामिल हो गई। एक घंटे में पाया आग पर काबूफायर ब्रिगेड अधिकारी शोभाराम मालवीय ने बताया कि सूचना मिलते ही दमकल दल मौके पर पहुंच गया था। आग पर काबू पाने के लिए दो पानी के टैंकर लगाए गए। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया। राहत की बात यह रही कि आग फ्लैट्स तक नहीं पहुंच सकी, जिससे लोगों का घरेलू सामान सुरक्षित बच गया। हालांकि शोरूम में रखे सभी इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन आग की चपेट में आकर नष्ट हो गए। पत्थर मारकर जगाए गए लोगइमारत में रहने वाले भानु सिंह और निशा सिंह ने बताया कि वे गहरी नींद में थे। अचानक बाहर शोर-शराबा सुनाई दिया। जब लोगों ने खिड़कियों पर पत्थर फेंककर उन्हें जगाया, तब उन्हें आग की जानकारी मिली। भानु सिंह के अनुसार, बिल्डिंग में कुल नौ फ्लैट हैं, जिनमें कुछ परिवार ही रह रहे थे। अधिकांश लोग किसी तरह बाहर निकल आए, लेकिन उनके परिवार सहित कुछ लोगों को विशेष रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए निकाला गया। वहीं बेंगलुरु निवासी चेतन, जो इंदौर में किराए के फ्लैट में रहते हैं, ने बताया कि वे भी लोगों के शोर सुनकर जागे और तब उन्हें स्थिति की गंभीरता का पता चला। चौकीदार की सतर्कता बनी मददगारपड़ोस की इमारत के चौकीदार प्रवीण ने बताया कि एक परिवार, जो हाल ही में दुबई से आया था, सुबह बारिश का नजारा देखने के लिए जागा हुआ था। सबसे पहले उसी परिवार ने धुआं देखा और अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। समय रहते चेतावनी मिलने से लोगों को छत तक पहुंचने और बचाव अभियान शुरू करने का मौका मिल गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। EV सुरक्षा पर फिर उठे सवालयह घटना ऐसे समय हुई है जब इंदौर पहले भी इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी आग की घटनाओं का सामना कर चुका है। कुछ समय पहले चार्जिंग के दौरान एक इलेक्ट्रिक कार में लगी आग ने कई लोगों की जान ले ली थी। ताजा घटना के बाद एक बार फिर इलेक्ट्रिक वाहन शोरूम और बैटरी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं।

नितिन नवीन की मौजूदगी से बढ़ी अटकलें, क्या राज्यसभा जाएंगे रजनीश अग्रवाल?

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश से राज्यसभा की दो सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जिस नाम ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल पैदा की है, वह है रजनीश अग्रवाल। संगठन में वर्षों तक पर्दे के पीछे काम करने वाले रजनीश अग्रवाल को पार्टी ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अब भी संगठन के समर्पित कार्यकर्ताओं को शीर्ष स्तर तक पहुंचाने का दावा करती है। पार्टी में उन्हें मजाकिया लेकिन सम्मानजनक अंदाज में ‘बूथ का भूत’ कहा जाता है। इसकी वजह है बूथ प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता और चुनावी मशीनरी को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका। राज्यसभा की इस दावेदारी के साथ उन्होंने कई बड़े और चर्चित नेताओं को पीछे छोड़ दिया है। बूथ मैनेजमेंट के मास्टरमाइंडसाल 2021 से मध्य प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे रजनीश अग्रवाल ने प्रदेश के करीब 65 हजार बूथों के डिजिटाइजेशन का काम कराया। उनके नेतृत्व में बूथों को A, B, C और D श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया, जिससे चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाया जा सका। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान 30 मतदाताओं पर एक अर्द्धपन्ना प्रभारी नियुक्त करने जैसी रणनीतियां भी उनकी टीम ने तैयार कीं। भाजपा के बढ़ते वोट शेयर और बूथ स्तर पर संगठन की मजबूती में उनकी भूमिका को पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया। सवर्ण प्रतिनिधित्व के फॉर्मूले ने खोला रास्तामध्य प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के आठ सांसद हैं, लेकिन इनमें सामान्य वर्ग का कोई प्रतिनिधि नहीं था। पार्टी नेतृत्व ने इस बार सामाजिक संतुलन साधने के लिए सवर्ण वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया। इसी रणनीति के तहत कई दिग्गज नेताओं के नामों पर चर्चा हुई। इनमें नरोत्तम मिश्रा, कैलाश विजयवर्गीय, अरविंद भदौरिया, अखंड प्रताप सिंह और मुन्नालाल गोयल जैसे नाम शामिल थे। हालांकि पार्टी ने यह तर्क स्वीकार किया कि हाल के वर्षों में चुनाव लड़ चुके नेताओं के बजाय ऐसे कार्यकर्ता को अवसर दिया जाए, जिसने संगठन में लंबे समय तक काम किया हो और जिसे अब तक कोई बड़ा राजनीतिक पद न मिला हो। यही कारण रहा कि अंततः रजनीश अग्रवाल के नाम पर सहमति बन गई। ABVP से शुरू हुआ सफरसागर जिले के मंडीबामोरा कस्बे से आने वाले रजनीश अग्रवाल का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। पत्रकारिता के छात्र रहे अग्रवाल लंबे समय तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में सक्रिय रहे और बाद में भाजपा संगठन में आए। पैरों से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने संगठनात्मक काम में ऐसी पहचान बनाई कि वे पार्टी की चुनावी रणनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। भाजपा नेताओं के अनुसार, वे प्रचार से अधिक संगठन पर ध्यान देने वाले कार्यकर्ता माने जाते हैं। वीडी शर्मा और शिवराज का मिला समर्थनरजनीश अग्रवाल को प्रदेश भाजपा में बूथ प्रबंधन की जिम्मेदारी उस समय मिली थी जब वीडी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष थे। वे शर्मा की टीम में प्रदेश मंत्री भी बने। सूत्रों के अनुसार, जैसे ही राज्यसभा के लिए सवर्ण उम्मीदवार के चयन की प्रक्रिया शुरू हुई, वीडी शर्मा ने रजनीश अग्रवाल का नाम प्रमुखता से आगे बढ़ाया। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने भी उन्हें उपयुक्त उम्मीदवार मानते हुए समर्थन दिया। ‘मैं टिकट मांगने भी नहीं गया’राज्यसभा उम्मीदवार घोषित होने के बाद रजनीश अग्रवाल ने कहा कि यह केवल भाजपा में संभव है कि एक सामान्य कार्यकर्ता को राज्यसभा जैसे उच्च सदन तक पहुंचने का अवसर मिले। उन्होंने बताया कि वे संकोचवश मुख्यमंत्री मोहन यादव से टिकट की मांग करने तक नहीं गए। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया, जिसके लिए वे आभारी हैं। शादी में शामिल होने पहुंचे थे नितिन नबीनरजनीश अग्रवाल और नितिन नबीन का संबंध भारतीय जनता युवा मोर्चा के दिनों से है। अग्रवाल ने बताया कि जब वे युवा मोर्चा में प्रदेश महामंत्री थे, तब नितिन नबीन प्रदेश प्रभारी थे। उन्होंने याद करते हुए बताया कि 15 दिसंबर 2011 को अपनी शादी का निमंत्रण देते समय उन्होंने मजाक में कहा था कि घोड़ी पर उन्हें नितिन नबीन ही चढ़ाएंगे। नितिन नबीन ने वादा निभाया और शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। तरुण चुग को भी मिला मौकाभाजपा ने दूसरी सीट पर तरुण चुग को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब की राजनीति और संगठनात्मक संतुलन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है। वहीं कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा है, जिन्हें राहुल गांधी का करीबी माना जाता है।

दतिया की राजनीति में हलचल, BJP-कांग्रेस दोनों के लिए मुश्किल बन सकता है उपचुनाव

मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद संभावित उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर पूर्व गृहमंत्री Narottam Mishra अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए सामाजिक समीकरण साध रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर जनता का एक बड़ा वर्ग भाजपा और कांग्रेस दोनों से नाराज नजर आ रहा है। उपचुनाव का इंतजार, 14 जुलाई पर टिकी निगाहेंदतिया में इन दिनों चौराहों, बाजारों और राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा संभावित विधानसभा उपचुनाव की है। हालांकि अभी चुनाव कार्यक्रम घोषित नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि चुनाव आयोग की नजर 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है। इसी संभावना को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के नेता लगातार जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं। 2023 की हार का बोझ अब भी नरोत्तम मिश्रा के साथदतिया की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नरोत्तम मिश्रा अपनी पिछली हार की भरपाई कर पाएंगे? 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बसई क्षेत्र में अपेक्षित समर्थन नहीं मिलना उनकी हार की बड़ी वजह बना। भाजपा को उम्मीद थी कि 2018 की तरह अंतिम चरणों में वोटों का बड़ा अंतर उनके पक्ष में जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक हार के पीछे केवल विपक्ष की ताकत नहीं, बल्कि संगठन के भीतर की निष्क्रियता, कार्यकर्ताओं का अति आत्मविश्वास और जनता की नाराजगी भी जिम्मेदार रही। कई लोगों का कहना है कि विकास कार्य होने के बावजूद कुछ स्थानीय समस्याओं का समाधान समय पर नहीं होने से असंतोष बढ़ा। अब मिश्रा लगातार सामाजिक सम्मेलन, समाज प्रमुखों से मुलाकात और कार्यकर्ताओं के संपर्क अभियान के जरिए अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राजेंद्र भारती के कार्यकाल पर जनता की मिली-जुली राय वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में Rajendra Bharti का कार्यकाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि वे जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। कई लोगों का आरोप है कि वे आम जनता से दूर रहे और क्षेत्रीय विकास को अपेक्षित गति नहीं मिल सकी। हालांकि कांग्रेस नेताओं का दावा है कि प्रशासनिक असहयोग और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कई विकास कार्य कराए। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष में रहते हुए भी उन्होंने जनता की समस्याओं को मजबूती से उठाया। कांग्रेस में टिकट को लेकर बढ़ी खींचतानउपचुनाव से पहले कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती आंतरिक एकजुटता बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। वहीं, पिछले चुनाव में दावेदारी छोड़ चुके अवधेश नायक भी खुद को मजबूत उम्मीदवार मान रहे हैं। इसके अलावा पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हाल ही में Rahul Gandhi से हुई मुलाकातों और संभावित दावेदारों की सक्रियता ने कांग्रेस के भीतर प्रतिस्पर्धा को और तेज कर दिया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से गुटबाजी से इनकार कर रहा है और दावा कर रहा है कि उम्मीदवार का चयन सर्वे और जीत की संभावना के आधार पर होगा। आजाद समाज पार्टी भी बना रही मजबूत जमीनदतिया के संभावित चुनावी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में आजाद समाज पार्टी भी सक्रिय है। दामोदर यादव लगातार किसान सम्मेलनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यादव मतदाताओं का बड़ा हिस्सा उनके साथ जाता है तो इसका सीधा असर कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों उनके प्रभाव को गंभीरता से देख रही हैं। जातीय समीकरण बन सकते हैं चुनाव का निर्णायक फैक्टरराजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल विकास या स्थानीय मुद्दों पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि जातीय और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यादव, कुशवाहा और ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या यहां निर्णायक मानी जाती है। अलग-अलग दल इन वर्गों को साधने के लिए विशेष रणनीति बना रहे हैं। भाजपा जहां सामाजिक सम्मेलनों के जरिए विभिन्न समुदायों तक पहुंच रही है, वहीं कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने में जुटी है। जनता का संदेश साफ: केवल वादे नहीं, काम चाहिएदतिया के राजनीतिक माहौल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि स्थानीय स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के प्रति असंतोष दिखाई देता है। कई नागरिकों का कहना है कि वे अब केवल राजनीतिक दावों से प्रभावित नहीं होंगे, बल्कि उम्मीदवार की पहुंच, जवाबदेही और क्षेत्रीय विकास के आधार पर निर्णय लेंगे। यही कारण है कि संभावित उपचुनाव में मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं, बल्कि जनता के विश्वास को हासिल करने की चुनौती भी होगा।

चांदी बाजार में बड़ी नरमी, MCX से लेकर सर्राफा बाजार तक कीमतों में तेज गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

नई दिल्ली । देश के सर्राफा और कमोडिटी बाजार में शुक्रवार को चांदी की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। घरेलू बाजारों से लेकर मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) तक चांदी के दाम दबाव में दिखाई दिए, जिससे निवेशकों और खरीदारों के बीच बाजार की दिशा को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हाल के दिनों में लगातार ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रही चांदी में आई यह गिरावट बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 5 जून 2026 के कारोबारी सत्र में देश के कई प्रमुख बाजारों में चांदी की कीमतों में नरमी देखने को मिली। दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार सहित विभिन्न राज्यों के सर्राफा बाजारों में चांदी के भाव पिछले सत्रों की तुलना में नीचे आए। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल स्थानीय मांग और आपूर्ति का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों का भी बड़ा प्रभाव है। कमोडिटी बाजार में भी चांदी के वायदा कारोबार पर दबाव साफ दिखाई दिया। MCX पर शुरुआती कारोबार के दौरान चांदी के भाव में उल्लेखनीय कमजोरी दर्ज की गई। रिपोर्टों के अनुसार कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स में कीमतों में प्रति किलोग्राम कई हजार रुपये तक की गिरावट देखने को मिली। हालांकि विभिन्न एक्सपायरी और कॉन्ट्रैक्ट अवधि के अनुसार दरों में अंतर बना रहा, फिर भी पूरे बाजार में कमजोरी का रुख स्पष्ट दिखाई दिया। स्थानीय स्पॉट मार्केट में भी चांदी की कीमतें नरम रहीं। व्यापारियों के अनुसार हाल के उच्च स्तरों के बाद निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है। इसके कारण खरीदारों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन निवेशकों के लिए बाजार की दिशा को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की मजबूती ने कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है। जब डॉलर मजबूत होता है तो सोना और चांदी जैसी धातुएं अपेक्षाकृत महंगी हो जाती हैं, जिससे वैश्विक मांग प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता भी निवेशकों को सुरक्षित रणनीति अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। भू-राजनीतिक परिस्थितियां भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक आर्थिक गतिविधियों से जुड़ी चिंताओं ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया है। हालांकि ऐसे समय में आमतौर पर सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में निवेशकों का व्यवहार अपेक्षाकृत सतर्क बना हुआ है। कमोडिटी विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक आंकड़े, अमेरिकी डॉलर की चाल और केंद्रीय बैंकों की नीतियां बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और बाजार के संकेतों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए। चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है जो निवेश या आभूषण खरीदारी की योजना बना रहे हैं। वहीं निवेशकों के लिए यह समय बाजार की गतिविधियों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।

हरियाली के संदेश के साथ फिटनेस का अभियान, शहर में होंगे कई विशेष आयोजन

मध्य प्रदेश । राजधानी भोपाल में विश्व पर्यावरण दिवस और वर्ल्ड बाइसिकल डे के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 5 जून से 7 जून तक शहर में साइक्लोथॉन, वृक्षारोपण, परिचर्चा और साइकिल रैली जैसे आयोजन लोगों को हरित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देंगे। पर्यावरण और फिटनेस का बनेगा संगमभोपाल में इस बार विश्व पर्यावरण दिवस केवल औपचारिक आयोजनों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की तैयारी की गई है। विभिन्न सरकारी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों और खेल संस्थानों की ओर से ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ फिटनेस को भी बढ़ावा देना है। आयोजकों का मानना है कि बदलती जीवनशैली और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच नागरिकों को प्रकृति और स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक बनाने की आवश्यकता है। इसी सोच के तहत विभिन्न गतिविधियों की श्रृंखला तैयार की गई है। एनजीटी बार एसोसिएशन की साइक्लोथॉन बनेगी आकर्षण का केंद्रविश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर National Green Tribunal Bar Association की ओर से साइक्लोथॉन 2026 का आयोजन किया जाएगा। यह रैली सुबह 6 बजे एनजीटी भवन से शुरू होकर Shahpura Lake पार्क तक पहुंचेगी। इस आयोजन में न्यायपालिका से जुड़े सदस्य, अधिवक्ता, प्रशासनिक अधिकारी, विद्यार्थी और आम नागरिक भाग लेंगे। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों को पौधों का वितरण किया जाएगा तथा अल्पाहार की व्यवस्था भी रहेगी। आयोजकों का कहना है कि साइकिल का उपयोग न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह प्रदूषण कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। मानव संग्रहालय में होगा वृक्षारोपण और पर्यावरण संवादश्यामला हिल्स स्थित Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya में भी विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।यह आयोजन पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), केंद्रीय संचार ब्यूरो (सीबीसी) और मानव संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में होगा। कार्यक्रम में पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण विषयक परिचर्चा भी आयोजित की जाएगी। मुख्य अतिथि के रूप में Malti Rai शामिल होंगी। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण किया जाएगा। परिचर्चा में ऊर्जा संरक्षण, पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली, जल संरक्षण, सोशल मीडिया की भूमिका और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर विशेषज्ञ विचार साझा करेंगे। सामाजिक संस्थाएं भी निभा रही जिम्मेदारीपर्यावरण संरक्षण की मुहिम में सामाजिक संगठन भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। अर्श फाउंडेशन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने दैनिक जीवन में कम से कम एक पर्यावरण-अनुकूल आदत अपनाएं और उसे दूसरों तक पहुंचाएं। संस्था ने कपड़े के थैले का उपयोग, प्लास्टिक की बोतलों के स्थान पर स्टील या पुन: उपयोग योग्य बोतलों का इस्तेमाल, साइकिल से आवागमन, पौधारोपण, पेड़ों की देखभाल और बिजली-पानी की बचत जैसे उपायों को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का दायित्व है। वर्ल्ड बाइसिकल डे पर निकलेगी भव्य साइकिल रैली7 जून को वर्ल्ड बाइसिकल डे के अवसर पर Sports Authority of India के सीआरसी भोपाल द्वारा ‘Sunday on Cycle’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। साइकिल रैली सुबह 6 बजे TT Nagar Stadium से शुरू होकर बोर्ड ऑफिस चौराहे तक जाएगी और फिर वापस स्टेडियम पहुंचेगी। रैली शुरू होने से पहले प्रतिभागियों के लिए जुम्बा सेशन आयोजित किया जाएगा। साथ ही प्रतिभागियों को निःशुल्क टी-शर्ट और रिफ्रेशमेंट भी उपलब्ध कराए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और नागरिकों के बीच साइक्लिंग संस्कृति को बढ़ावा देना, फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना है। शहर में बन रहा सकारात्मक माहौललगातार तीन दिनों तक चलने वाले इन आयोजनों से भोपाल में पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहते, बल्कि लोगों को व्यवहारिक बदलाव के लिए भी प्रेरित करते हैं। साइकिलिंग, पौधारोपण और पर्यावरण संवाद जैसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।

अध्यक्ष ने घर में लगवा लिया ऑफिस का AC! स्वच्छता सर्वे में चौंकाने वाले खुलासे

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में इन दिनों स्वच्छता सर्वेक्षण से लेकर सरकारी संपत्ति के उपयोग और प्रशासनिक फैसलों तक कई घटनाएं चर्चा में हैं। कहीं रैंकिंग सुधारने के लिए नाली पर अस्थायी जालियां लगाकर फोटो खिंचवाए गए, तो कहीं नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचने का आरोप लगा। वहीं एक मंत्री के बंगले में निकले सांप और स्वास्थ्य विभाग के एक विवादित अधिकारी को मिले वित्तीय अधिकार भी सुर्खियों में हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए ‘जुगाड़’, फोटो खिंचते ही हट गईं जालियांमध्य प्रदेश को अक्सर ‘अजब-गजब’ प्रदेश कहा जाता है और टीकमगढ़ की एक घटना ने इस कहावत को फिर चर्चा में ला दिया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंक हासिल करने की कोशिश में नगर पालिका की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई। बताया जा रहा है कि एक मोहल्ले की खुली नाली को अस्थायी रूप से लोहे की जालियों से ढंक दिया गया। मौके पर सफाईकर्मी से झाड़ू लगवाई गई और फोटो-वीडियो शूट किए गए। लेकिन जैसे ही रिकॉर्डिंग पूरी हुई, जालियां वापस हटा ली गईं। मामला तब सामने आया जब एक स्थानीय कांग्रेस पार्षद ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो वायरल होने के बाद नगर पालिका की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वास्तविक सफाई सुधारने के बजाय केवल सर्वेक्षण के लिए दिखावटी इंतजाम किए गए। इंदौर में पानी पड़ते ही उतर गया सौंदर्यीकरण का रंगदेश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले Indore में भी स्वच्छता सर्वेक्षण की तैयारियों के बीच गुणवत्ता को लेकर विवाद सामने आया है। सड़कों के डिवाइडरों पर कराए गए रंग-रोगन का निरीक्षण करने पहुंचे भाजपा पार्षद Rajendra Rathore ने पाया कि रंग पर पानी डालते ही वह उखड़ने लगा। हल्की रगड़ से भी पुताई खराब होती दिखाई दी। मामला सामने आने के बाद अधिकारियों और ठेकेदारों को मौके पर बुलाया गया। पार्षद ने कार्य की गुणवत्ता पर नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों ने भी आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण के नाम पर औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जबकि गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है। नगर पालिका का एसी अध्यक्ष के घर पहुंचा, फिर मचा बवालभिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। भिंड जिले के गोहद में नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष Manju Jagdish Mahaur विवादों में घिर गई हैं। आरोप है कि नगर पालिका कार्यालय का एयर कंडीशनर उनके निजी आवास पर लगवा दिया गया। मामला तब सार्वजनिक हुआ जब तत्कालीन सीएमओ Mahesh Jatav ने एसी वापस करने के लिए नोटिस जारी किया। नोटिस में एसी नहीं लौटाने पर वैधानिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इसके बाद विवाद और बढ़ गया। बताया जाता है कि अध्यक्ष ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई, जबकि बाद में नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को पद से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने सरकारी संसाधनों के उपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मंत्री के बंगले में निकला सात फीट लंबा सांपछतरपुर में राज्य मंत्री Dilip Ahirwar के सरकारी बंगले में करीब सात फीट लंबा सांप निकलने से कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने पर सर्पमित्र मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू किया। हालांकि घटना से ज्यादा चर्चा उस टिप्पणी की हुई, जो सर्पमित्र ने सांप को पकड़ने के बाद मजाकिया अंदाज में की। उन्होंने कहा कि यह “मंत्री जी के खाते-पीते घर का सांप” है। यह टिप्पणी सुनकर वहां मौजूद लोग मुस्कुरा पड़े और बाद में यह बात शहरभर में चर्चा का विषय बन गई। रिश्वत प्रकरण के बाद भी मिले वित्तीय अधिकारभोपाल से सटे एक जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक अधिकारी को लेकर भी चर्चाएं गर्म हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी पर पहले रिश्वत लेने के आरोप लगे थे और मामला कानूनी प्रक्रिया में पहुंचा था। हालांकि बाद में उन्हें अदालत से कुछ राहत मिली, जिसके बाद विभागीय स्तर पर उन्हें फिर से वित्तीय अधिकार सौंप दिए गए। इस फैसले को लेकर प्रशासनिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं। सरकारी स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति की बात की जाती है, ऐसे में इस तरह के फैसलों को लेकर विभिन्न वर्गों में चर्चा तेज हो गई है।

वित्त विभाग सख्त! पांच विभागों के 38 हजार कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं खंगाली जाएंगी

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने पांच प्रमुख विभागों में कार्यरत करीब 38 हजार कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के निराकरण और नियमों के विपरीत दिए गए वित्तीय लाभों की समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं। रिटायरमेंट से पहले खंगाला जाएगा पूरा सर्विस रिकॉर्डराज्य सरकार अब उन कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराएगी, जो कार्यभारित, आकस्मिकता निधि से वेतन प्राप्त करने वाले या अन्य श्रेणियों में कार्यरत हैं। जांच के दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वर्तमान स्थिति तक पूरे सेवाकाल के रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और अन्य वित्तीय लाभों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी को नियमों के विरुद्ध लाभ दिए जाने या वेतन निर्धारण में त्रुटि मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पांच विभागों पर रहेगा विशेष फोकसवित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह विशेष अभियान मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा। इनमें लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग शामिल हैं। इन विभागों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके वेतन निर्धारण और सेवा संबंधी प्रकरण वर्षों से लंबित बताए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों के समाधान से कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देशवित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण करें। आदेश में कहा गया है कि अनेक कर्मचारी लंबे समय से अपने वित्तीय मामलों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में वेतनमान और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद भी बने हुए हैं, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान किया जा सके। सेवा पुस्तिकाओं की होगी विशेष जांचवित्त विभाग ने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) तथा विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण करें और उनमें दर्ज त्रुटियों को तत्काल सुधारें। यदि किसी मामले में पूर्व अनुमोदन या अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता हो तो उसे भी समय रहते पूरा करने को कहा गया है। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवा अभिलेख अद्यतन और नियमों के अनुरूप हों। छह महीने में पूरा करना होगा अभियानसरकार ने इस विशेष अभियान के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि के भीतर सेवा अभिलेखों, वेतन निर्धारण और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजनी होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है। कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ेगा असरविशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से एक ओर कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर वेतन निर्धारण में हुई संभावित अनियमितताओं का भी पता चल सकेगा। सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा के बाद जहां पात्र कर्मचारियों को उनका वैध लाभ मिलेगा, वहीं नियमों के विरुद्ध हुए भुगतान या स्वीकृतियों की स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव होगी।

25 दिन बाद भी नहीं सुलझी गुत्थी, पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा जांच का इंतजार

मध्य प्रदेश । भोपाल के अशोका गार्डन क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही 18 वर्षीय ख्याति जैन की संदिग्ध मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। घटना के 25 दिन बाद सामने आए एक वीडियो ने जांच की दिशा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के परिवार ने वीडियो को महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। नए वीडियो ने बढ़ाई जांच की गंभीरताख्याति जैन की मौत की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। इसी बीच सामने आए दो सीसीटीवी वीडियो में तनिष चंद्रवंशी नाम का युवक ख्याति के घर में प्रवेश करता और कुछ देर बाद बाहर निकलता दिखाई दे रहा है। एक वीडियो में युवक हेलमेट पहनकर घर के अंदर जाता नजर आता है, जबकि दूसरे वीडियो में वह बिना हेलमेट घर में प्रवेश करता दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद परिवार का कहना है कि इन फुटेज की गहन जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। परिवार का आरोप है कि घटना के इतने दिनों बाद भी जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंची है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं की पर्याप्त पड़ताल नहीं की गई है। मां ने उठाए गंभीर सवालमृतका की मां वर्षा जैन का कहना है कि मामले में संदेही युवक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होना बेहद जरूरी है। उनका दावा है कि ख्याति के सोशल मीडिया अकाउंट, विशेष रूप से इंस्टाग्राम के उपयोग और एक्सेस को लेकर कई ऐसे तथ्य हैं, जिनकी जांच अभी बाकी है। वर्षा जैन का आरोप है कि सीसीटीवी फुटेज में युवक के घर से निकलने के कुछ मिनट बाद ही ख्याति के मोबाइल फोन से आत्महत्या से जुड़ा एक संदेश भेजा गया था। ऐसे में मोबाइल गतिविधियों, चैट रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की विस्तृत जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी के साथ उनके संबंध बेहद अच्छे थे। मदर्स डे पर ख्याति ने उन्हें उपहार देकर सम्मानित महसूस कराया था। पढ़ाई को लेकर भी वह बेहद गंभीर थी और अपने भविष्य को लेकर लगातार योजनाएं बना रही थी। कमरे की दीवारों पर लिखे थे सपनेपरिवार के अनुसार ख्याति अपने लक्ष्य और महत्वाकांक्षाओं को लेकर बेहद स्पष्ट थी। उसके कमरे में लिखे गए प्रेरणादायक नोट्स और व्यक्तिगत संदेश यह संकेत देते हैं कि वह अपने भविष्य को लेकर उत्साहित थी। मां का कहना है कि ख्याति अपने लगभग हर लक्ष्य के साथ “मां के लिए करना है” जैसी बातें लिखती थी। सोशल मीडिया पर भी वह अपनी मां के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने वाले संदेश साझा करती रहती थी। परिवार का दावा है कि ख्याति और तनिष की दोस्ती को लेकर उन्हें आपत्ति थी और इसी वजह से उनकी गैरमौजूदगी में युवक घर पहुंचा था। यही कारण है कि वे उसकी भूमिका की गहन जांच की मांग कर रहे हैं। पुलिस को साइबर रिपोर्ट और बिसरा रिपोर्ट का इंतजारमामले की जांच कर रही पुलिस का कहना है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। थाना प्रभारी अनुराग लाल के अनुसार ख्याति के मोबाइल फोन का तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है। साइबर सेल से रिपोर्ट मांगी गई है, जबकि बिसरा जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों, कॉल डिटेल्स और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट मिलने के बाद ही घटनाक्रम की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ख्याति की मौत बाएं हाथ की कलाई में लगी चोट से हुए अत्यधिक रक्तस्राव और सदमे के कारण हुई थी। हालांकि डॉक्टरों ने किसी विषैले पदार्थ की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है। इसी कारण रक्त और आंतरिक अंगों के नमूनों को सुरक्षित रखकर रासायनिक एवं विष विज्ञान परीक्षण के लिए भेजा गया है। अंतिम चिकित्सकीय राय रिपोर्ट आने के बाद ही दी जाएगी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या सहित अन्य सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है, जबकि परिवार लगातार निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।