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MP में बारिश का दौर जारी: झाबुआ, धार-रतलाम में झमाझम, देवास में बही कार; 45 जिलों में अलर्ट

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री से पहले ही प्री-मानसून गतिविधियां पूरे प्रदेश में असर दिखा रही हैं। झाबुआ, धार, पीथमपुर और रतलाम में शुक्रवार सुबह तेज बारिश हुई, जबकि भोपाल समेत कई शहरों में बीते 24 घंटे के दौरान आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी प्रदेश के करीब 45 जिलों में तेज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चल सकती है आंधीमौसम केंद्र के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर, सागर और दमोह जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, धार, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, देवास, रतलाम, शाजापुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, जबलपुर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला, सतना, पन्ना, छतरपुर और निवाड़ी समेत कई जिलों में बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है। भोपाल में आंधी से अस्त-व्यस्त हुई व्यवस्थाराजधानी भोपाल में गुरुवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली। 60 से 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी के साथ बारिश और ओलावृष्टि भी हुई। तेज हवाओं के कारण करीब 80 पेड़ या उनकी शाखाएं सड़कों पर गिर गईं, जिससे कई इलाकों में ट्रैफिक प्रभावित हुआ। रानी कमलापति स्टेशन परिसर में लोहे का एक फ्रेम भी तेज हवाओं के कारण उड़ गया। कई क्षेत्रों में दृश्यता कम होने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। देवास में बड़ा हादसा टलादेवास जिले के सतवास क्षेत्र में गुरुवार शाम तेज बारिश के दौरान एक कार रपटे पर पानी के तेज बहाव में बह गई। कार में चार लोग सवार थे, जिन्होंने समय रहते वाहन से कूदकर अपनी जान बचा ली। ग्रामीणों ने बाद में ट्रैक्टर और रस्सियों की मदद से कार को बाहर निकाला। इस घटना ने एक बार फिर बरसात के दौरान रपटों और पुल-पुलियों को पार करने के जोखिम को उजागर किया है। झाबुआ, धार और रतलाम में झमाझम बारिशझाबुआ में शुक्रवार सुबह जोरदार बारिश दर्ज की गई। वहीं रतलाम में सुबह करीब साढ़े चार बजे से बादल छाने लगे और कुछ ही देर में झमाझम बारिश शुरू हो गई। धार जिले के सरदारपुर, लाबरिया, बरमंडल और बाग क्षेत्र में भी तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश हुई। हालांकि बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को फसलों को नुकसान होने की आशंका भी सताने लगी है। तापमान में आई बड़ी गिरावटआंधी और बारिश का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दिया। इंदौर में एक ही रात में 6.8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई और न्यूनतम तापमान 19 डिग्री तक पहुंच गया। भोपाल में तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। Pachmarhi प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान रहा, जहां न्यूनतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रतलाम, श्योपुर, धार, दमोह और शिवपुरी सहित कई शहरों में भी तापमान सामान्य से काफी नीचे रहा। 20 जून के बाद आ सकता है मानसूनमौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष मध्य प्रदेश में मानसून सामान्य तिथि से 5 से 7 दिन देरी से पहुंच सकता है। प्रदेश में आमतौर पर 15 जून के आसपास मानसून प्रवेश करता है, लेकिन इस बार इसके 20 से 22 जून के बीच आने की संभावना जताई जा रही है। केरल में मानसून की दस्तक 4 जून को हो चुकी है। सामान्यतः केरल पहुंचने के लगभग 15 दिन बाद मानसून मध्य प्रदेश में प्रवेश करता है। तब तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां इसी तरह सक्रिय रहने की संभावना है।

बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बदलीं सियासी करवटें; ममता बनर्जी के धुर विरोधी हुमायूं कबीर ने दी अपनी जीती हुई सुरक्षित सीट से जिताने की गारंटी

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में एक अप्रत्याशित और नाटकीय मोड़ सामने आया है। कभी तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे मुखर आलोचक रहे आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के संस्थापक हुमायूं कबीर ने अब संकट के समय उनके प्रति सहानुभूति दिखाई है। कबीर ने घोषणा की है कि यदि ममता बनर्जी चाहें तो वह अपनी नवनिर्वाचित रेजीनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं, ताकि बनर्जी वहां से उपचुनाव लड़कर राज्य विधानसभा में गरिमामय वापसी कर सकें। यह राजनीतिक प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ममता बनर्जी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे गंभीर दौर से गुजर रही हैं। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है और भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई है। इस हार के बाद टीएमसी के भीतर बड़े पैमाने पर आंतरिक विद्रोह हुआ है, जिससे पार्टी में बिखराव की स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी नंदीग्राम सीट खाली करते हुए भवानीपुर सीट अपने पास रखी है, जहां उन्होंने ममता बनर्जी को पराजित किया था। इस पराजय के बाद बनर्जी फिलहाल विधानसभा से बाहर हैं। हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले की दो विधानसभा सीटों, नौदा और रेजीनगर, दोनों से ऐतिहासिक जीत हासिल की है। चुनाव नियमों के अनुसार, उन्हें निर्धारित समय के भीतर इन दोनों में से किसी एक सीट से इस्तीफा देना होगा। कबीर ने संवाददाताओं से अनौपचारिक बातचीत में स्पष्ट कहा कि यदि ममता बनर्जी उनके पास आती हैं, तो वह रेजीनगर निर्वाचन क्षेत्र को उनके लिए खाली कर देंगे। उन्होंने राजनीतिक विश्लेषण साझा करते हुए दावा किया कि ममता बनर्जी अगर दोबारा नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं, तो उनके जीतने की संभावना न के बराबर है, लेकिन रेजीनगर में उनके नेतृत्व में बनर्जी की जीत पूरी तरह सुनिश्चित की जा सकती है। गौरतलब है कि हुमायूं कबीर को पिछले साल पार्टी नेतृत्व के साथ लंबे समय तक चले वैचारिक मतभेदों के कारण तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया था। इसके बाद उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी का गठन किया और ममता बनर्जी सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। कबीर ने वर्तमान स्थिति पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि आज दीदी जिस दौर से गुजर रही हैं, उसे देखकर उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पीड़ा होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वह आज सार्वजनिक जीवन में जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे कहीं न कहीं ममता बनर्जी का शुरुआती सहयोग रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम को मुर्शिदाबाद और उसके आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम मतदाताओं के बीच कबीर के बढ़ते प्रभाव के रूप में भी देख रहे हैं। कबीर ने अपने प्रभाव को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही आज पूरे राज्य में ममता बनर्जी की बात का प्रभाव कम हो गया हो, परंतु रेजीनगर क्षेत्र में हुमायूं कबीर का निर्णय ही अंतिम और सर्वोपरि माना जाता है। टीएमसी में मची इस ऐतिहासिक बगावत के बीच पूर्व सहयोगियों द्वारा दी जा रही इस प्रकार की राजनीतिक जीवनदान की पेशकश बंगाल की भविष्य की राजनीति को एक नया आयाम दे सकती है।

NEET अभ्यर्थी की मौत पर सियासी और सामाजिक चिंता, परिवार से राहुल गांधी की बातचीत चर्चा में

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के मऊगंज की NEET अभ्यर्थी आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कथित पेपर लीक से निराश होकर जान देने वाली छात्रा के परिवार से कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने फोन पर बात की और संवेदना व्यक्त की। बातचीत के दौरान आकांक्षा की मां भावुक हो गईं और कहा कि उनकी बेटी ही परिवार का सबसे बड़ा सहारा थी। “आप तो देश की रक्षा कर रहे हैं, मेरा बच्चा वापस नहीं आएगा”शुक्रवार को हुई इस बातचीत का वीडियो Vikrant Bhuria ने सोशल मीडिया पर साझा किया। फोन पर राहुल गांधी ने आकांक्षा की मां से कहा कि उन्होंने छात्रा की चिट्ठी पढ़ी है और उसे पढ़कर उन्हें बहुत दुख हुआ। उन्होंने परिवार से पूछा कि यदि उनके लायक कोई मदद हो तो वे जरूर बताएं। इस पर आकांक्षा की मां ने भावुक स्वर में कहा, “आप तो खुद देश की रक्षा कर रहे हैं। मेरा तो जो गया, वह लौटकर नहीं आएगा।” “उसकी कोई गलती नहीं थी, उसने सिर्फ पढ़ाई की थी”बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि आकांक्षा की कोई गलती नहीं थी। उसने केवल मेहनत से पढ़ाई की थी और डॉक्टर बनने का सपना देखा था। उन्होंने छात्रा के परिवार द्वारा पढ़ाई के लिए लिए गए कर्ज का भी जिक्र किया। आकांक्षा की मां ने कहा कि उनकी बेटी ने वर्षों मेहनत की थी और उसे भरोसा था कि अच्छे अंक आने पर वह डॉक्टर बन जाएगी। उनका कहना था कि यदि पेपर लीक जैसी स्थिति नहीं होती तो शायद यह दुखद घटना नहीं होती। उन्होंने कहा, “हमारा तो कोई दूसरा सहारा भी नहीं है। वही हमारे परिवार की उम्मीद थी। उसके भरोसे ही हम जीवन जी रहे थे।” सुसाइड नोट में झलका था टूटे सपनों का दर्दराहुल गांधी ने बातचीत में आकांक्षा के सुसाइड नोट का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रा को यह महसूस होने लगा था कि परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए जो कर्ज लिया, वह सब व्यर्थ हो गया। उन्होंने कहा कि यह सोचकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह कितने मानसिक दबाव और दुख से गुजर रही होगी। आकांक्षा की मां ने बताया कि उनकी बेटी को विश्वास था कि पहले प्रयास में उसका चयन हो सकता था, लेकिन कथित पेपर लीक विवाद के बाद उसका आत्मविश्वास पूरी तरह टूट गया था। पिता की बीमारी ने बढ़ाई थी परिवार की चिंताबातचीत के दौरान राहुल गांधी ने आकांक्षा के पिता के स्वास्थ्य के बारे में भी पूछा। परिवार ने बताया कि उन्हें पहले दो बार गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो चुकी हैं और वे आंशिक रूप से लकवाग्रस्त हैं। उनका एक हाथ ठीक से काम नहीं करता और वे दैनिक कार्यों के लिए भी दूसरों पर निर्भर हैं। परिवार के अनुसार आकांक्षा घर की सबसे बड़ी संतान थी और भविष्य में परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने की उम्मीद उसी से थी। आर्थिक सहायता का भी मिला आश्वासनबातचीत के अंत में राहुल गांधी ने कहा कि यदि आगे किसी प्रकार की सहायता की जरूरत हो तो परिवार कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI के माध्यम से संपर्क कर सकता है। इस दौरान परिवार के एक सदस्य ने बताया कि आर्थिक सहायता के रूप में कुछ राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी है और अतिरिक्त मदद भी मिलने वाली है। आकांक्षा चतुर्वेदी का मामला NEET परीक्षा प्रणाली, छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और पेपर लीक जैसे विवादों को लेकर फिर से बहस का विषय बन गया है। छात्रा के सुसाइड नोट और परिवार की स्थिति ने इस घटना को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

वैश्विक पटल पर भारत का बड़ा रणनीतिक कदम: एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री नीलकंठ मिश्रा संभालेंगे विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक का कार्यभार

नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय और प्रशासनिक पटल पर भारत की स्थिति को और मजबूत करते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लिया है। वर्तमान में एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार समिति (EAC-PM) के प्रमुख सदस्य नीलकंठ मिश्रा को विश्व बैंक में भारत का नया एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर (कार्यकारी निदेशक) नियुक्त किया गया है। 4 जून को केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने इस हाई-प्रोफाइल नियुक्ति को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। प्रशासनिक आदेश के अनुसार, विश्व बैंक के वाशिंगटन स्थित मुख्यालय में नीलकंठ मिश्रा का कार्यकाल अगले तीन वर्षों के लिए होगा। वे इस महत्वपूर्ण वैश्विक पद पर पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी परमेश्वरन अय्यर का स्थान ग्रहण करेंगे, जिनका निर्धारित कार्यकाल जल्द ही समाप्त होने जा रहा है। सरकार द्वारा जारी कूटनीतिक दिशानिर्देशों के तहत, जब तक नीलकंठ मिश्रा वाशिंगटन पहुंचकर विधिवत रूप से अपना नया कार्यभार नहीं संभाल लेते, तब तक परमेश्वरन अय्यर बोर्ड में इस पद पर बने रहेंगे ताकि कूटनीतिक निरंतरता बनी रहे। विश्व बैंक के संगठनात्मक ढांचे में एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर का यह पद रणनीतिक और आर्थिक रूप से अत्यधिक प्रभावशाली माना जाता है। इस पद पर आसीन होकर नीलकंठ मिश्रा विश्व बैंक के उस मुख्य शासी बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे, जो दुनिया भर के विकासशील देशों को दिए जाने वाले वित्तीय ऋण, ब्याज दरों के निर्धारण, नीतिगत सुधारों और वैश्विक कल्याणकारी योजनाओं में पूंजी निवेश जैसे अत्यंत संवेदनशील और बड़े फैसले लेता है। नीलकंठ मिश्रा की गिनती भारत के सबसे कुशल और प्रखर बाजार रणनीतिकारों तथा अर्थशास्त्रियों में की जाती है। वे वर्तमान में एक्सिस कैपिटल में ग्लोबल रिसर्च के प्रमुख और पूर्णकालिक निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। एक्सिस ग्रुप के साथ जुड़ने से पहले, उन्होंने लगभग दो दशकों तक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय दिग्गज ‘क्रेडिट सुइस’ के साथ काम किया था, जहां उन्होंने एशिया-पैसिफिक (APAC) क्षेत्र के लिए सह-रणनीतिकार के रूप में अपनी विशिष्ट वित्तीय पहचान बनाई थी। शैक्षणिक और व्यावसायिक पृष्ठभूमि के दृष्टिकोण से भी नीलकंठ मिश्रा का सफर काफी प्रेरणादायक रहा है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा झारखंड के बोकारो स्टील सिटी स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। स्नातक होने के बाद, उन्होंने वर्ष 1997 से 2000 तक हिंदुस्तान लीवर लिमिटेड में सिस्टम मैनेजर के रूप में अपने कॉरपोरेट करियर की शुरुआत की थी और धीरे-धीरे वित्तीय विश्लेषण के क्षेत्र में शीर्ष मुकाम हासिल किया।

भोपाल को बड़ी राहत! कोलार पाइपलाइन सुधार के बाद 75 क्षेत्रों में जलापूर्ति शुरू

नई दिल्ली। नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि बांसखेड़ी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त कोलार लाइन की मरम्मत गुरुवार रात पूरी कर ली गई थी। इसके बाद रात में ही पंप चालू कर दिए गए और शुक्रवार सुबह 6 बजे से जलापूर्ति शुरू कर दी गई। निगम के अधीक्षण यंत्री उदित गर्ग के अनुसार चार इमली, शिवाजी नगर, तुलसी नगर, अरेरा कॉलोनी, ई-1, ई-5, ई-6, पीजीबीटी, नारियलखेड़ा, टीला जमालपुरा, जवाहर चौक और इब्राहिमपुरा सहित कई इलाकों में पानी पहुंचाया जा चुका है। शेष क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से सप्लाई की जा रही है। टंकियां नहीं भरीं, सीधे घरों तक पहुंचाया पानीनगर निगम ने इस बार लोगों को तत्काल राहत देने के लिए सामान्य प्रक्रिया में बदलाव किया। आमतौर पर फिल्टर प्लांट से पहले जलाशयों और टंकियों को भरा जाता है, लेकिन इस बार सीधे फिल्टर प्लांट से सप्लाई शुरू कर दी गई। भोपाल में कोलार, नर्मदा, केरवा और बड़ा तालाब परियोजनाओं की कुल 173 पानी की टंकियां हैं। इनमें से कोलार परियोजना से जुड़ी 68 टंकियां सप्लाई पूरी होने के बाद भरी जाएंगी ताकि शनिवार से नियमित जलप्रदाय व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित की जा सके। तीन दिन तक परेशान रही 40 फीसदी आबादीकोलार परियोजना की 1650 मिमी व्यास वाली ग्रेविटी पाइपलाइन में लीकेज होने के कारण पिछले तीन दिनों से शहर की लगभग 40 प्रतिशत आबादी प्रभावित थी। 75 से अधिक इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रहने से लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। नगर निगम ने टैंकरों के जरिए जलापूर्ति की कोशिश की, लेकिन बढ़ती मांग के सामने यह व्यवस्था पर्याप्त साबित नहीं हुई। कई रहवासियों ने आरोप लगाया कि निजी टैंकर संचालकों ने 300 रुपए के टैंकर के लिए 1000 से 1200 रुपए तक वसूले। रातभर मौके पर रहीं कमिश्नरपाइपलाइन की मरम्मत के दौरान नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन स्वयं रातभर मौके पर मौजूद रहीं। उन्होंने कार्य की लगातार निगरानी की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि रात में ही पंप चालू कर सुबह तक जलापूर्ति बहाल की जाए। प्रशासन की इसी सक्रियता के चलते शुक्रवार सुबह से पानी की सप्लाई दोबारा शुरू हो सकी। नर्मदा लाइन में भी लीकेज से नई चुनौतीइधर कोलार लाइन की समस्या दूर होने के बीच शहर के कुछ हिस्सों में नर्मदा पाइपलाइन में भी लीकेज सामने आया है। अयोध्या बायपास पर सड़क निर्माण कार्य के दौरान कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई। इसके कारण आसाराम तिराहे से रत्नागिरि तिराहे तक के क्षेत्रों में शुक्रवार को जलापूर्ति प्रभावित रहने की संभावना है। हालांकि कोलार लाइन की मरम्मत पूरी होने से शहर के अधिकांश प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचनी शुरू हो गई है और शनिवार से जलापूर्ति पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।

टीसीएस कांड में जबरन मजहब परिवर्तन की गहरी साजिश: व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए महिला कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली आरोपी निदा खान के बढ़े संकट

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) परिसर से सामने आए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के बहुचर्चित मामले में विशेष जांच दल (SIT) की चार्जशीट से कई सनसनीखेज और गंभीर खुलासे हुए हैं। मामले की 23 वर्षीय मुख्य शिकायतकर्ता ने जांच अधिकारियों के समक्ष दिए अपने विस्तृत बयान में उस संगठित प्रशासनिक और मानसिक दबाव का पर्दाफाश किया है, जो उस पर धर्म परिवर्तन कराने के उद्देश्य से लगातार बनाया जा रहा था। चार्जशीट के अनुसार, इस पूरी साजिश का ताना-बाना बेहद पेशेवर और रणनीतिक तरीके से बुना गया था। देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई इस प्राथमिकी और उसके बाद दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, मुख्य आरोपी दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर न केवल पीड़िता का शारीरिक और यौन शोषण किया, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था को भी चोट पहुंचाने की पूरी कोशिश की। दानिश ने पीड़िता को पूरी तरह से उसकी हिंदू मान्यताओं से दूर करने के लिए कूटनीतिक रूप से प्रभावित करना शुरू किया था। उसने पीड़िता को मंदिर जाने और भगवान के भजन सुनने से स्पष्ट रूप से मना कर दिया था। जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को ढाढस बंधाने के बहाने कहा था कि उसे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि अल्लाह उनके साथ है। उसने पीड़िता को मानसिक तनाव कम करने का झांसा देकर सनातन पद्धतियों को छोड़ने और इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार इबादत करने तथा ‘तस्बीह’ पढ़ने के लिए मजबूर किया। इस प्रशासनिक और आर्थिक नियंत्रण के तहत आरोपी के पास पीड़िता के बैंक खातों और गोपनीय यूपीआई पिन की भी पूरी जानकारी उपलब्ध थी। एसआईटी की जांच के अनुसार, दानिश ने इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए अपने दो अन्य सहयोगियों- तौसीफ अत्तार और निदा खान को विशेष जिम्मेदारी सौंप रखी थी। तौसीफ अत्तार ने पीड़िता का पूरी तरह से ब्रेनवॉश करने के लिए उसे इंटरनेट और यूट्यूब पर विवादित प्रचारक जाकिर नाइक, पाकिस्तानी मौलवी तारिक जमील और पाकिस्तानी इस्लामिक विद्वान डॉ. इसरार अहमद के कट्टरपंथी भाषणों और वीडियो को बार-बार देखने का निर्देश दिया था। पीड़िता को लगातार जन्नत, जहन्नुम और अन्य धार्मिक अवधारणाओं के बारे में बताकर यह विश्वास दिलाया गया कि यदि वह अपना मूल धर्म छोड़ देती है, तो उसका सारा मानसिक तनाव और परेशानियां हमेशा के लिए समाप्त हो जाएंगी। इसके अलावा, मामले की अन्य प्रमुख आरोपी निदा खान पर एक संगठित व्हाट्सएप ग्रुप संचालित करने का आरोप है। इस ग्रुप के माध्यम से कंपनी की अन्य महिला कर्मचारियों को भी लक्षित किया जाता था और उन पर नमाज पढ़ने, विशिष्ट पहनावा अपनाने और जीवनशैली बदलने का अनैतिक दबाव बनाया जाता था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी ने अब तक 106 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें टीसीएस के कर्मचारी और कंपनी की आंतरिक ‘पॉश’ (POSH) कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। मामले में कुल नौ कर्मचारियों ने शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद आरोपियों- दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, निदा खान सहित कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में एआईएमआईएम के एक स्थानीय नगरसेवक मतीन पटेल का नाम भी शामिल है, जिन पर फरार रहने के दौरान आरोपियों को पनाह देने का आरोप है। इस पूरे गंभीर विवाद और कानूनी कार्रवाई पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के प्रबंधन ने भी अपना कड़ा रुख स्पष्ट कर दिया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के. कृतिवासन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि संस्थान में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या अनैतिक दबाव के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू है। प्रबंधन ने इस मामले के सभी दागी आरोपियों को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निलंबित कर दिया है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को जांच में पूरा प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रहा है।

रायसेन में आमने-सामने भिड़ीं दो बसें, बच्चे समेत 3 की मौत; कई घायल भोपाल रेफर

रायसेन । रायसेन जिले के खरबई थाना चौकी क्षेत्र में स्थित सेहतगंज टोल प्लाजा के समीप सुबह करीब 11 बजे यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भोपाल-सागर रूट पर चलने वाली दो निजी बसें तेज रफ्तार में थीं और मोड़ पर नियंत्रण खो बैठीं। देखते ही देखते दोनों बसों की जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बसों के अगले हिस्से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे में कुछ यात्री बस की सीटों और खिड़कियों के बीच फंस गए। घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और आसपास मौजूद लोग तुरंत राहत कार्य में जुट गए। तीन लोगों की मौत, पहचान में भी आई मुश्किलहादसे में तीन यात्रियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो की पहचान नीतीश व्यास (28) निवासी सुल्तानगंज और माखन लोधी (29) निवासी बेगमगंज के रूप में हुई है। एक अन्य मृतक की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर इतनी जोरदार थी कि कुछ यात्रियों के सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं। शवों की हालत भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे पहचान करने में कठिनाई हो रही है। 15 से अधिक घायल, कई भोपाल रेफरहादसे में घायल हुए यात्रियों को तत्काल स्थानीय अस्पतालों में पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल कई लोगों को बेहतर उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया है। घायलों के हाथ, पैर और सिर में गंभीर चोटें आई हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दुर्घटना के कारण मार्ग की एक लेन पर यातायात भी कुछ समय के लिए प्रभावित रहा। ओवरस्पीड और मोड़ को बताया जा रहा कारणस्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों बसें तेज रफ्तार में थीं। मोड़ पर पहुंचने के बाद चालक बसों पर नियंत्रण नहीं रख सके और सीधी भिड़ंत हो गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि टक्कर के बाद एक बस सड़क से नीचे उतर गई, जबकि दूसरी बस पुलिया से टकराकर रुकी। शक्ति ट्रेवल्स की बस को अधिक नुकसान पहुंचा है। प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे मौके परघटना की सूचना मिलते ही रायसेन कलेक्टर Arun Kumar Vishwakarma और पुलिस अधीक्षक Ashutosh Gupta मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत कार्यों की निगरानी की और घायलों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित की। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है।

'गोल्ड किंग' से विवादों के केंद्र तक, राजेश मेहता पर लगे 15 लाख करोड़ के आरोप क्या हैं?

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में सबसे बड़े कथित अकाउंटिंग विवादों में से एक माने जा रहे मामले में बाजार नियामक सेबी ने Rajesh Mehta और उनकी कंपनी Rajesh Exports Limited के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई की है। आरोप है कि वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय और कारोबार के आंकड़ों को भारी स्तर पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। फर्श से अर्श तक का सफरराजेश मेहता को लंबे समय तक भारतीय स्वर्ण उद्योग की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता रहा है। बेंगलुरु के एक जैन कारोबारी परिवार से आने वाले मेहता ने अपने भाई के साथ मिलकर पारिवारिक ज्वेलरी कारोबार को एक वैश्विक कंपनी में बदल दिया। 1995 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई राजेश एक्सपोर्ट्स ने तेजी से विस्तार किया और देश की प्रमुख सोना निर्यातक कंपनियों में शामिल हो गई। वर्ष 2015 में स्विट्जरलैंड की मशहूर रिफाइनरी Valcambi के अधिग्रहण के बाद कंपनी का वैश्विक प्रभाव और बढ़ गया। इसी उपलब्धि के बाद राजेश मेहता को ‘गोल्ड किंग’ के नाम से भी पहचान मिली। सेबी के आरोप क्या हैं?सेबी के अनुसार, कंपनी ने पिछले पांच वर्षों के दौरान करीब 15.15 लाख करोड़ रुपये के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया हो सकता है। जांच में यह भी कहा गया कि विदेशी सहायक कंपनियों द्वारा दिखाए गए राजस्व का बड़ा हिस्सा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका। नियामक का दावा है कि कंपनी की रिपोर्ट की गई विदेशी आय का लगभग 99 प्रतिशत से अधिक हिस्सा संदिग्ध पाया गया। इसी आधार पर सेबी ने जांच पूरी होने तक राजेश मेहता को कंपनी के शेयरों में खरीद-बिक्री या अन्य प्रकार के लेनदेन से रोक दिया है। साथ ही कंपनी के खातों का फोरेंसिक ऑडिट कराने का आदेश भी दिया गया है। फर्जी एंट्री और निजी ट्रेडिंग का आरोपजांच के दौरान Affluence Shares and Stocks Private Limited नामक एक ब्रोकिंग फर्म का नाम भी सामने आया। सेबी का आरोप है कि कंपनी ने हजारों करोड़ रुपये के खरीद-बिक्री लेनदेन का रिकॉर्ड दिखाया, जबकि संबंधित जीएसटी रिकॉर्ड में ऐसे लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला। इसके अलावा यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ वित्तीय एंट्रीज का उपयोग कंपनी के कारोबार को बड़ा दिखाने और निजी डेरिवेटिव ट्रेडिंग से जुड़े नुकसान को छिपाने के लिए किया गया। जांच में कंपनी के फंड के कथित दुरुपयोग और संबंधित खातों में धन हस्तांतरण की बात भी कही गई है। कंपनी ने आरोपों को बताया गलतफहमीसेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। राजेश एक्सपोर्ट्स का कहना है कि उसके द्वारा घोषित राजस्व आंकड़े सही हैं और नियामक को कंपनी की रिपोर्टिंग प्रणाली को लेकर गलतफहमी हुई है। कंपनी का दावा है कि उसकी सहायक इकाई वालकाम्बी के वित्तीय आंकड़ों की व्याख्या में अंतर के कारण यह विवाद पैदा हुआ है। कंपनी ने भरोसा दिलाया है कि वह जांच एजेंसियों को सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगी और पूरा सहयोग करेगी। निवेशकों की बढ़ी चिंतामामले के सार्वजनिक होने के बाद कंपनी के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस घटनाक्रम ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ऑडिट प्रक्रिया और बड़े संस्थागत निवेशकों की निगरानी क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला भारतीय कॉर्पोरेट जगत में पारदर्शिता और वित्तीय जवाबदेही पर बड़ी बहस का कारण बन गया है।

यू-टर्न के बाद फंसी रणनीति? अभिजीत दीपके के अगले कदम पर सस्पेंस

नई दिल्ली। अमेरिका से 6 जून को दिल्ली पहुंचने वाले Abhijeet Deepke ने पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया के जरिए अपने समर्थकों को राजधानी में जुटने का आह्वान किया था। शुरुआत में उन्होंने लोगों से कहा था कि वे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उनका स्वागत करने पहुंचें। उनका दावा था कि दिल्ली पहुंचते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है, इसलिए समर्थकों की मौजूदगी जरूरी होगी। हालांकि, प्रदर्शन से ठीक दो दिन पहले दीपके ने अपने रुख में बड़ा बदलाव करते हुए समर्थकों से एयरपोर्ट न आने की अपील कर दी। उन्होंने तर्क दिया कि बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से आम यात्रियों और नागरिकों को परेशानी हो सकती है। लेकिन इस फैसले ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरपोर्ट से हटे, लेकिन आगे का रास्ता अस्पष्टदीपके ने अब कहा है कि वे एयरपोर्ट से सीधे पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने जाएंगे और समर्थक वहीं एकत्रित हों। यहीं से प्रदर्शन की अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। लेकिन आलोचकों और पर्यवेक्षकों का सवाल है कि यदि वास्तव में हजारों या लाखों लोग पहुंचते हैं, जैसा कि CJP दावा कर रही है, तो नई दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील इलाके में व्यवस्था कैसे बनाए रखी जाएगी? पार्लियामेंट स्ट्रीट और आसपास के क्षेत्रों में कई सरकारी कार्यालय, महत्वपूर्ण संस्थान और व्यस्त मार्ग मौजूद हैं। ऐसे में बड़ी भीड़ के जुटने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि अनुमति मिलने तक समर्थक कहां रहेंगे और भीड़ को नियंत्रित करने की क्या व्यवस्था होगी। अनुमति को लेकर सबसे बड़ा सवालपूरा विवाद प्रदर्शन की अनुमति को लेकर भी केंद्रित है। अब तक CJP की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पूर्व निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुलिस या प्रशासन से पहले ही अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। पार्टी के प्रवक्ताओं का कहना है कि दीपके स्वयं दिल्ली पहुंचकर आवेदन देंगे, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कुछ घंटों के भीतर किसी बड़े धरना-प्रदर्शन की अनुमति मिल पाना संभव होगा। अगर अनुमति नहीं मिली तो क्या होगा?सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन या जंतर-मंतर पर सभा की अनुमति देने से इनकार कर दिया, तो पार्टी की अगली रणनीति क्या होगी? इस मुद्दे पर न तो दीपके ने और न ही पार्टी के अन्य नेताओं ने कोई स्पष्ट जवाब दिया है। समर्थकों को भी यह नहीं बताया गया है कि ऐसी स्थिति में उन्हें क्या करना होगा। यही वजह है कि प्रदर्शन से पहले ही पूरे कार्यक्रम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। फिलहाल, 6 जून के कार्यक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि अभिजीत दीपके का ‘दिल्ली प्लान’ जमीन पर कितना सफल होता है और प्रशासन तथा प्रदर्शनकारियों के बीच स्थिति किस दिशा में आगे बढ़ती है।

बंगाल में BJP ऑफिस पर बुलडोजर कार्रवाई, सामने आई जमीन विवाद की कहानी

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान उत्तर दिनाजपुर जिले के हेमताबाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के स्थानीय कार्यालय से जुड़ा एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी जमीन की मापी के दौरान पता चला कि पार्टी कार्यालय का एक हिस्सा निर्धारित सरकारी भूमि के दायरे में आ रहा है। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने खुद आगे बढ़कर उस हिस्से को हटाने का फैसला किया। मामले की शुरुआत तब हुई जब हेमताबाद के ब्लॉक विकास अधिकारी (BDO) Biswajit Dutta ने सरकारी जमीनों पर बने अवैध निर्माणों को हटाने का निर्देश जारी किया। प्रशासन की ओर से इलाके में मापी कराई गई, जिसमें शालबागान के पास राज्य राजमार्ग किनारे स्थित भाजपा ब्लॉक कार्यालय का बरामदा सरकारी जमीन पर पाया गया। प्रशासन के आने से पहले खुद शुरू कर दी कार्रवाईजांच रिपोर्ट सामने आते ही स्थानीय भाजपा नेताओं ने प्रशासन की ओर से बुलडोजर चलाए जाने का इंतजार नहीं किया। भाजपा के प्रखंड अध्यक्ष Biplab Sarkar की मौजूदगी में कार्यकर्ता हथौड़े और अन्य उपकरण लेकर कार्यालय पहुंचे और अवैध हिस्से को स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ ही समय में कार्यालय के उस हिस्से को पूरी तरह हटा दिया गया, जो सरकारी भूमि की सीमा के भीतर पाया गया था। यह कदम स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया, क्योंकि आमतौर पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान विरोध, धरना या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिलते हैं। सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा मामलाप्रशासन के अनुसार, कालियागंज से दक्षिण दिनाजपुर को जोड़ने वाले राज्य राजमार्ग के दोनों ओर 15 फीट के दायरे में आने वाले सभी अवैध निर्माणों को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है।भाजपा नेता बिप्लव सरकार ने कहा कि जब पार्टी कार्यालय का बरामदा भी चिन्हित क्षेत्र में पाया गया तो कानून का सम्मान करते हुए उसे हटाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने यह भी मांग की कि अभियान से प्रभावित छोटे व्यापारियों और दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जानी चाहिए। दुकानदारों ने भी दिखाई पहलभाजपा कार्यालय पर हुई कार्रवाई का असर आसपास के व्यापारियों पर भी देखने को मिला। रायगंज-बालुरघाट राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित कई दुकानदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार किए बिना अपने अतिक्रमण वाले हिस्सों को स्वयं हटाना शुरू कर दिया। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि अभियान शुरू होने से पहले लगातार मुनादी, लाउडस्पीकर घोषणाओं और नोटिसों के माध्यम से लोगों को सरकारी भूमि खाली करने के लिए आगाह किया गया था। BDO बिस्वजीत दत्ता ने स्पष्ट किया कि अब आधिकारिक बेदखली अभियान शुरू हो चुका है और भविष्य में सरकारी जमीन पर किसी भी तरह का अवैध निर्माण मिलने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।