ज्येष्ठ कालाष्टमी पर भूलकर भी न करें ये गलतियां: काल भैरव की नाराजगी से बढ़ सकती हैं जीवन में परेशानियां, जानें शुभ-अशुभ नियम

नई दिल्ली । सनातन धर्म में आध्यात्मिक साधना और ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए कालाष्टमी का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आने वाली मासिक कालाष्टमी 8 जून, दिन सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि का प्रारंभ 8 जून को तड़के सुबह 3 बजकर 24 मिनट पर होगा, जिसका समापन अगले दिन 9 जून को सुबह 3 बजकर 23 मिनट पर होगा। इस विशेष दिन पर भगवान शिव के रौद्र रूप और अंशावतार भगवान काल भैरव की प्राकट्य पूजा और व्रत का विधान है, जो जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलने की क्षमता रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काल भैरव की आराधना करने से जीवन में व्याप्त किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र का प्रभाव और मानसिक भय पूरी तरह समाप्त हो जाता है। इसके अतिरिक्त, जिन जातकों की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या अथवा राहु और केतु के अशुभ प्रभाव चल रहे हों, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। हालांकि, ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में इस दिन कुछ विशेष कार्यों को वर्जित घोषित किया गया है, जिन्हें करने से साधक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। कालाष्टमी के दिन सबसे महत्वपूर्ण नियम पशु सेवा से जुड़ा है। सनातन परंपरा में श्वान (कुत्ते) को भगवान काल भैरव का वाहन और प्रतीक माना गया है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी कुत्ते को मारना, डांटना या उसे जूते-चप्पल दिखाना महापाप की श्रेणी में आता है। ऐसा करने से काल भैरव तत्काल रुष्ट हो जाते हैं। इसके साथ ही, इस दिन कुत्ते को कभी भी जूठा भोजन या अपवित्र अन्न नहीं देना चाहिए। इसके विपरीत, इस शुभ तिथि पर काले कुत्ते को ताजी एवं मुलायम रोटी, गुड़ या मीठे बिस्कुट खिलाना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। जो श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं, उनके लिए खान-पान के कड़े नियम निर्धारित हैं। कालाष्टमी के व्रत में सामान्य नमक या समुद्री नमक का सेवन पूरी तरह वर्जित माना गया है, क्योंकि इससे व्रत खंडित होने का दोष लगता है जिसके परिणाम जीवन में कष्टकारी हो सकते हैं। व्रत न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस दिन पूरी तरह सात्विकता का पालन करना चाहिए। इस तिथि पर मदिरापान और मांसाहार जैसे तामसिक भोजन से पूर्ण दूरी बना लेनी चाहिए, क्योंकि अनजाने में किया गया ऐसा कृत्य भी गंभीर दोष का कारण बनता है। शास्त्रों में भगवान काल भैरव को ‘दंडपाणि’ भी कहा गया है, जिसका अर्थ है अन्याय और अधर्म के मार्ग पर चलने वालों को कड़ा दंड देने वाला। यही कारण है कि कालाष्टमी के दिन किसी भी प्रकार के अनैतिक कार्य, झूठ बोलने, किसी का दिल दुखाने या छल-कपट करने से बचना चाहिए। इस दिन किए गए गलत कार्यों का परिणाम बेहद कष्टप्रद हो सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कम से कम सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक इन कड़े नियमों और मर्यादाओं का अक्षुण्ण पालन करना अनिवार्य बताया गया है। नकारात्मकता को दूर करने और पुण्य फल की प्राप्ति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय भी बताए गए हैं। कालाष्टमी के पावन अवसर पर किसी भी काल भैरव मंदिर में जाकर उनके सम्मुख सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। इसके अलावा, मंदिर में उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करने से पितृदोष और ग्रह बाधाओं से शांति मिलती है। इस दिन छोटे बालकों को उनकी प्रिय वस्तुएं या मिष्ठान भेंट करना भी पारिवारिक समृद्धि और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम उपाय माना गया है।
चुनाव चिह्न विवाद के बीच TMC का सख्त संदेश, ममता बनर्जी पर सांसद का बड़ा बयान

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी खेमे को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मुख्य विपक्षी दल की मान्यता दिए जाने के बाद TMC नेतृत्व और बागी गुट के बीच टकराव और तेज हो गया है। इसी बीच TMC सांसद Mahua Moitra ने बागी विधायकों पर जमकर हमला बोला है। एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन नेताओं ने वर्षों तक Mamata Banerjee की लोकप्रियता और पार्टी के संगठनात्मक बल का लाभ उठाया, वही आज पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बागी नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सत्ता में रहने की आदत पड़ चुकी है, इसलिए वे विपक्ष में संघर्ष करने के बजाय आसान रास्ता चुन रहे हैं। महुआ ने दो टूक कहा कि यदि किसी नेता को पार्टी छोड़नी है तो वह खुलकर जाए, लेकिन खुद को तृणमूल कांग्रेस बताने का अधिकार नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बागी नेता चाहें तो अपनी अलग पार्टी बना लें, लेकिन TMC के नाम और पहचान का इस्तेमाल न करें। भाजपा पर गंभीर आरोमहुआ मोइत्रा ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी की भूमिका होने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि भाजपा योजनाबद्ध तरीके से TMC को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल के नेता Suvendu Adhikari का नाम लेते हुए कहा कि वे कभी तृणमूल का हिस्सा रहे हैं और पार्टी के नेताओं की राजनीतिक कमजोरियों से भली-भांति परिचित हैं। इसी जानकारी का इस्तेमाल कर भाजपा नेताओं पर दबाव बनाया जा रहा है। महुआ ने दावा किया कि कुछ नेताओं को केंद्रीय एजेंसियों और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर पक्ष बदलने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विधायकों और नेताओं को गिरफ्तारी की धमकियां दी गईं, जिसके चलते वे बागी खेमे के साथ चले गए। “असली TMC ममता के साथ”बागी गुट के बढ़ते प्रभाव और चुनाव चिह्न पर संभावित विवाद के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने स्पष्ट कहा कि असली तृणमूल कांग्रेस आज भी ममता बनर्जी और उनके साथ खड़े नेताओं के पास ही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मूल संगठन, विचारधारा और जनाधार ममता बनर्जी के नेतृत्व में कायम है। महुआ ने यह भी कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति आती है कि पार्टी को अपना मौजूदा चुनाव चिह्न छोड़ना पड़े, तब भी उन्हें कोई चिंता नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि जब ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर नई राजनीतिक राह चुनी थी, तब उन्होंने अपनी पहचान और चुनावी प्रतीक खुद तैयार किया था। नया सिंबल बनाकर भी जीत सकती हैं ममतामहुआ मोइत्रा ने विश्वास जताया कि ममता बनर्जी का राजनीतिक कद किसी चुनाव चिह्न का मोहताज नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस नेता ने नया दल बनाकर और नया प्रतीक लेकर पश्चिम बंगाल में तीन बार सरकार बनाई, वह भविष्य में भी नया चुनावी चिह्न बनाकर जनता का समर्थन हासिल कर सकती हैं। उनके अनुसार, चुनाव चिह्न या पार्टी का नाम बदल सकता है, लेकिन जनता के बीच ममता बनर्जी की पहचान और राजनीतिक प्रभाव को कोई नहीं छीन सकता।
'गुड बॉय' के किरदारों से ऊब चुके हैं ऋतिक रोशन: सोशल मीडिया पर बयां किया अपना दर्द, ग्रे शेड भूमिकाओं में काम करने की जताई इच्छा

नई दिल्ली । हिंदी सिनेमा जगत में पिछले 26 वर्षों से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे अभिनेता ऋतिक रोशन अपनी स्थापित और लोकप्रिय ‘गुड बॉय’ वाली छवि से अब कुछ अलग करने का मन बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनकी एक होलिया पोस्ट ने फिल्म गलियारों और प्रशंसकों के बीच कूटनीतिक हलचल पैदा कर दी है। अभिनेता ने सार्वजनिक रूप से इस बात पर निराशा व्यक्त की है कि फिल्म निर्देशक उन्हें लगातार एक आदर्श और सीधे-सादे इंसान के किरदारों में ही देखना चाहते हैं, जबकि वे अब जटिल और नकारात्मक रंगत वाले चरित्रों को पर्दे पर उतारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह पूरा घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब ऋतिक रोशन ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में एफिल टावर के सामने से अपनी एक बेहद आकर्षक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर साझा की। इस तस्वीर के साथ लिखे गए उनके विस्तृत कैप्शन ने सबका ध्यान आकर्षित किया। अभिनेता ने लिखा कि हाल ही में उनसे जब यह पूछा गया कि वे वर्तमान में किस तरह की भूमिका की तलाश कर रहे हैं, तो उनका अपना ही उत्तर उनके लिए भी अप्रत्याशित था। उन्होंने दर्शकों से फिल्म ‘लक बाय चांस’ के स्वार्थी और घमंडी स्टार ‘जफर’ के किरदार को याद करने को कहा। ऋतिक रोशन के अनुसार, वे ‘जफर’ जैसे यथार्थवादी और ग्रे शेड वाले किरदारों को पर्दे पर दोबारा जीने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि आज उन्हें ऐसा कोई चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव मिलता है, तो वे बिना समय गंवाए उसे तुरंत स्वीकार कर लेंगे। हालांकि, उन्होंने फिल्म उद्योग की वर्तमान प्रशासनिक और रचनात्मक सीमाओं पर तंज कसते हुए कहा कि निर्देशकों की मानसिकता उन्हें केवल एक ‘अच्छे नायक’ के रूप में ही भुनाने की है, जो उनके रचनात्मक विकास के दृष्टिकोण से एक दुखद स्थिति है। अभिनेता की इस स्पष्टवादी पोस्ट पर बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक सिद्धार्थ आनंद ने बेहद संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली टिप्पणी करते हुए लिखा, ‘चलो फिर’। इस प्रतिक्रिया के सामने आते ही सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षकों के बीच कयासों का दौर शुरू हो गया है। कूटनीतिक स्तर पर इसे दोनों के बीच आगामी समय में एक बड़े एक्शन या थ्रिलर प्रोजेक्ट के सहयोग के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें संभवतः ऋतिक रोशन एक मुख्य विलेन या डार्क प्रोटागोनिस्ट के रूप में नजर आ सकते हैं। इससे पहले ऋतिक रोशन की फिल्म ‘वॉर 2’ बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक व्यावसायिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी, जिसके बाद वे अपनी अभिनय शैली में बड़े बदलाव के संकेत दे रहे हैं। यदि ऋतिक रोशन के आगामी व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स की बात करें, तो वे इस समय अपनी सबसे बड़ी सुपरहीरो फ्रेंचाइजी फिल्म ‘कृष 4’ के निर्माण और लेखन कार्य में व्यस्त हैं। इस बार वे अभिनय के साथ-साथ खुद ही इस महत्वाकांक्षी फिल्म के निर्देशन की कमान भी संभाल रहे हैं, जो उनके करियर का एक बड़ा प्रशासनिक मोड़ है। इसके अतिरिक्त उनके पास ‘स्टोर्म’ नामक एक और बड़ी फिल्म है, जिसे लेकर सिनेमा प्रेमियों के बीच जबरदस्त उत्सुकता बनी हुई है। साल 2000 में आई अपनी पहली ही ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ से रातों-रात सुपरस्टार बनने वाले ऋतिक रोशन ने ‘कोई मिल गया’, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’ और ‘वॉर’ जैसी कई मील का पत्थर साबित होने वाली फिल्में दी हैं। यद्यपि उन्होंने ‘धूम 2’ में एक शातिर चोर का किरदार निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय पहले भी दिया है, लेकिन साल 2026 तक के अपने 26 साल लंबे फिल्मी सफर के इस मोड़ पर वे अब पूरी तरह से लीक से हटकर काम करने की योजना बना रहे हैं।
शूटिंग के दौरान राजेश खन्ना की हालत हुई खराब, लगातार काम करने से हुए परेशान

नई दिल्ली। बॉलीवुड में कई कलाकार अपने किरदार को जीवंत बनाने के लिए कठिन मेहनत करते हैं, लेकिन राजेश खन्ना की पहली फिल्म ‘आखिरी खत’ के दौरान जो हुआ, वह आज भी फिल्मी गलियारों में चर्चा का विषय है। साल 1966 में रिलीज हुई इस फिल्म से राजेश खन्ना ने बड़े पर्दे पर कदम रखा था। फिल्म का निर्देशन चेतन आनंद ने किया था, जो अपने यथार्थवादी और संवेदनशील सिनेमा के लिए जाने जाते थे। किरदार में असली थकान दिखाने के लिए नहीं सोने दिया फिल्म में राजेश खन्ना का किरदार मानसिक तनाव और भावनात्मक संघर्ष से गुजरता है। निर्देशक चाहते थे कि उनके चेहरे पर थकान बनावटी न लगे, बल्कि वास्तविक दिखाई दे। बताया जाता है कि चेतन आनंद आधी रात को फोन कर-करके राजेश खन्ना को जगा देते थे, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती थी। यह सिलसिला कई दिनों तक चला और करीब तीन दिन बाद जब अभिनेता सेट पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर वास्तविक थकान और बेचैनी साफ नजर आ रही थी। निर्देशक की यह तकनीक फिल्म के उस दृश्य के लिए कारगर साबित हुई, जहां किरदार को बेहद परेशान और टूटे हुए मनोभाव में दिखाना था। ऑस्कर तक पहुंची थी ‘आखिरी खत’ ‘आखिरी खत’ केवल राजेश खन्ना की पहली फिल्म ही नहीं थी, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हुई। यह फिल्म भारत की ओर से अकादमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) में सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी के लिए भेजी गई थी। अग्रेजी में ‘द लास्ट लेटर’ नाम से पहचानी जाने वाली इस फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हासिल की थी। एक बच्चे की कहानी ने जीता दिल फिल्म में राजेश खन्ना के साथ मास्टर बंटी बहल भी नजर आए थे। कहानी गोविंद नाम के युवक और उसकी पत्नी लज्जो के इर्द-गिर्द घूमती है। परिस्थितियों के कारण दोनों अलग हो जाते हैं और एक छोटा बच्चा मुंबई की भीड़ में खो जाता है इसके बाद पिता अपने बेटे की तलाश में भटकता है और कहानी भावनात्मक मोड़ लेती है। फिल्म की सबसे बड़ी चुनौती एक छोटे बच्चे के साथ वास्तविक लोकेशंस पर शूटिंग करना था। 15 महीने के बच्चे के साथ हुई थी मुश्किल शूटिंगनिर्देशक चेतन आनंद के बेटे Ketan Anand ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता ने 15 महीने के बच्चे के साथ फिल्म की शूटिंग की थी। बच्चे को मुंबई की सड़कों पर स्वाभाविक रूप से चलते हुए कैमरे में कैद करना उस दौर में बेहद कठिन काम था। यही वजह है कि ‘आखिरी खत’ को भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है और यह राजेश खन्ना के शानदार फिल्मी सफर की शुरुआत भी बनी।
शाहीन अफरीदी की कप्तानी में पाकिस्तान ने ऑस्ट्रेलिया को चटाई धूल, गद्दाफी स्टेडियम में रोमांचक मुकाबले के साथ जीती ऐतिहासिक वनडे सीरीज

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के पटल पर पाकिस्तान ने एक बार फिर घरेलू मैदान पर अपना दबदबा साबित किया है। लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम निर्णायक मुकाबले में पाकिस्तान ने मेहमान ऑस्ट्रेलियाई टीम को 4 विकेट से पराजित कर दिया। इस शानदार जीत के साथ ही शाहीन शाह अफरीदी की कप्तानी वाली मेजबान टीम ने तीन मैचों की वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम कर लिया है। पाकिस्तान की इस ऐतिहासिक जीत के सूत्रधार खुद कप्तान शाहीन अफरीदी और अनुभवी बल्लेबाज बाबर आजम रहे। निर्णायक मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक और लड़खड़ाती हुई रही। पाकिस्तानी गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभाल रहे शाहीन अफरीदी ने मैच के पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर सलामी बल्लेबाज मैथ्यू शॉट को पवेलियन का रास्ता दिखाकर कंगारू टीम को पहला बड़ा झटका दिया। इसके बाद जोश इंग्लिस ने एक छोर संभालकर पारी को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से किसी भी बल्लेबाज का ठोस सहयोग नहीं मिल सका। मध्यक्रम के प्रमुख बल्लेबाज मार्नस लाबुशेन और विकेटकीपर बल्लेबाज एलेक्स कैरी ने क्रीज पर टिकने के लिए 30 से अधिक गेंदों का सामना जरूर किया, मगर दोनों में से कोई भी खिलाड़ी 20 रन के निजी आंकड़े को पार करने में पूरी तरह असफल रहा। लगातार गिरते विकेटों के बीच कप्तान जोश इंग्लिस पर रन गति बढ़ाने का भारी दबाव था। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में धैर्य दिखाते हुए 8 चौकों और 1 छक्के की मदद से 65 रनों की शानदार अर्धशतकीय पारी खेली, जो अंततः ऑस्ट्रेलियाई पारी का एकमात्र बड़ा स्कोर साबित हुई। मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट 27वें ओवर की पहली गेंद पर आया जब शाहीन अफरीदी ने अर्धशतक जमा चुके जोश इंग्लिस को आउट कर पवेलियन भेजा। इस विकेट के गिरते ही ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। एक समय 3 विकेट पर 119 रन बनाकर सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ रही ऑस्ट्रेलियाई टीम महज 157 रनों पर ऑलआउट हो गई। ऑस्ट्रेलियाई टीम ने अपने आखिरी 7 विकेट महज 38 रनों के भीतर गंवा दिए और पूरी टीम 42 ओवरों में ही सिमट गई। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत संतुलित रही। सलामी बल्लेबाज माज सदाकत ने 26 रनों का योगदान दिया, जबकि साहिबजादा फरहान केवल 6 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। लाहौर की धीमी पिच पर 158 रनों का यह छोटा लक्ष्य भी ट्रिकी नजर आ रहा था, लेकिन पूर्व कप्तान बाबर आजम ने बेहतरीन खेल कौशल और संयम का परिचय दिया। बाबर आजम ने 84 गेंदों का सामना करते हुए सूझबूझ से भरी 40 रनों की पारी खेली, जिससे टीम लक्ष्य के बेहद करीब पहुंच सकी। मैच में एक समय रोमांच तब बढ़ गया जब 112 के कुल योग पर बाबर आजम आउट हो गए और पाकिस्तानी खेमे में भी मध्यक्रम के ढहने की आशंका पैदा हो गई। हालांकि, अनुभवी ऑलराउंडर शादाब खान ने परिस्थितियों को संभाला और 42 गेंदों पर धैर्यपूर्ण 29 रन बनाकर 42वें ओवर में पाकिस्तान को जीत की दहलीज के पार पहुंचा दिया। सांख्यिकीय और रणनीतिक रूप से यह पाकिस्तान की ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार तीसरी द्विपक्षीय वनडे सीरीज जीत है, जिसने पाकिस्तानी टीम के मनोबल को एक नई ऊंचाई दी है।
MP: नेपानगर में लगे MLA मंजू दादू के लापता पोस्टर, गरमाई राजनीति

बुरहानपुर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बुरहानपुर जिले (Burhanpur district) की नेपानगर विधानसभा (Nepanagar Assembly) में विधायक मंजू राजेंद्र दादू (MLA Manju Rajendra Dadu) के ‘लापता’ होने के पोस्टर लगाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। कांग्रेस (Congress) इसे जनता की नाराजगी बता रही है, जबकि भाजपा (BJP) ने इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति करार दिया है। पोस्टर हटाए जा चुके हैं। नेपानगर विधानसभा क्षेत्र के निंबोला गांव में स्थानीय विधायक मंजू राजेंद्र दादू के ‘लापता’ होने के पोस्टर लगाए गए. अज्ञात लोगों द्वारा लगाए गए इन पोस्टरों ने क्षेत्र में हलचल मचा दी और देखते ही देखते यह मामला सियासी विवाद में बदल गया. पोस्टर सामने आते ही विधायक समर्थकों ने उन्हें हटाया, लेकिन तब तक कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका था. इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को नया मुद्दा दे दिया है। नेपानगर विधायक मंजू दादू के पोस्टर निंबोला गांव के पास मगरूल रोड पर लगाए गए थे. इन पोस्टरों में विधायक की तस्वीर के साथ उन्हें ‘लापता’ बताया गया, जिससे क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई। समर्थकों ने हटाए पोस्टरजैसे ही पोस्टरों की जानकारी मिली, विधायक समर्थक मौके पर पहुंचे और उन्हें तुरंत हटा दिया. हालांकि, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह मामला तेजी से फैल गया, जिससे विवाद और गहरा गया. कांग्रेस ने साधा निशानाकांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव अजय रघुवंशी ने इस पूरे मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि विधायक बनने के बाद जनप्रतिनिधि क्षेत्र से गायब हैं, और जनता में इसी बात को लेकर नाराजगी है. रघुवंशी ने आरोप लगाया कि बीजेपी नेता जनता की समस्याओं से दूर हो चुके हैं. बीजेपी ने किया पलटवारवहीं, बीजेपी के जिला अध्यक्ष मनोज माने ने इन आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि विधायक मंजू दादू और बुरहानपुर की विधायक अर्चना चिटनिस दोनों ही क्षेत्र में सक्रिय हैं और लगातार जनता के बीच काम कर रही हैं. उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि मुद्दों की कमी के कारण वह इस तरह की घटनाओं को राजनीतिक रंग दे रही है. राजनीतिक माहौल गर्मायाइस पूरे घटनाक्रम के बाद बुरहानपुर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. स्थानीय स्तर पर दोनों दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और यह मुद्दा आने वाले समय में और तूल पकड़ सकता है. यह मामला अब केवल पोस्टर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय राजनीति का केंद्र बिंदु बन गया है.
पेड्डी' में स्क्रीन स्पेस को लेकर बोलीं जाह्नवी कपूर, कहा- मेरे रोल को नहीं मिला पूरा सम्मान

नई दिल्ली। राम चरण और जाह्नवी कपूर स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्साह तो था, लेकिन रिलीज के बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अच्चियम्मा’ के चित्रण को लेकर सवाल उठा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि फिल्म में पुरुष नायक को जहां मजबूत सामाजिक और राजनीतिक पृष्ठभूमि दी गई है, वहीं महिला किरदार को पर्याप्त महत्व नहीं मिला। कुछ दर्शकों ने आरोप लगाया कि अभिनेत्री के किरदार को केवल ग्लैमर तक सीमित कर दिया गया है। वायरल पोस्ट ने छेड़ी नई बहसएक वायरल इंस्टाग्राम पोस्ट में दावा किया गया कि फिल्म में मुख्य महिला किरदार के साथ न्याय नहीं किया गया। पोस्ट में कहा गया कि कहानी के महत्वपूर्ण हिस्सों में पुरुष किरदार को विकास और उद्देश्य दिया गया, जबकि महिला किरदार को सीमित और सतही तरीके से प्रस्तुत किया गया। पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि फिल्म के अंतिम संस्करण में अभिनेत्री के किरदार की गहराई और प्रभाव को कम कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सोशल मीडिया पर इस विषय पर बहस तेज हो गई है। जाह्नवी कपूर के एक ‘लाइक’ ने बढ़ाई अटकलेंविवाद उस समय और गहरा गया जब लोगों ने नोटिस किया कि जाह्नवी कपूर ने इस आलोचनात्मक पोस्ट को लाइक किया है। अभिनेत्री ने इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, लेकिन पोस्ट को लाइक करने को कई लोग उनकी अप्रत्यक्ष सहमति के रूप में देख रहे हैं। हालांकि किसी पोस्ट को लाइक करना हमेशा उसके हर दावे का समर्थन माना जाए, यह जरूरी नहीं है। फिर भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। निर्देशक पर भी उठे सवालपोस्ट में फिल्म के निर्देशक Buchi Babu Sana पर भी सवाल उठाए गए हैं। आलोचकों का आरोप है कि महिला किरदार के विकास और प्रस्तुति को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। हालांकि फिल्म की टीम या निर्देशक की ओर से इस विवाद पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। बड़ी स्टारकास्ट, बड़ी उम्मीदें‘पेड्डी’ का निर्देशन बुच्ची बाबू सना ने किया है। फिल्म में राम चरण और जाह्नवी कपूर के अलावा Shiva Rajkumar और Divyenndu Sharma भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आए हैं। फिल्म की रिलीज के बाद जहां एक तरफ इसके तकनीकी पक्ष और प्रदर्शन की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ महिला किरदारों के चित्रण को लेकर उठे सवाल भी सुर्खियां बटोर रहे हैं।
10 राज्यों की 24 राज्यसभा सीटों के लिए 18 जून को मतदान…

नई दिल्ली। भारत (India) के 10 राज्यों की 24 सीटों पर राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha elections) होने जा रहे हैं। 18 जून को मतदान (Voting June 18) होगा और संभावनाएं हैं कि एक ही दिन में नतीजे भी घोषित कर दिए जाएं। खास बात है कि यह चुनाव केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन NDA के लिए बेहद अहम होने जा रहा है। आंकड़े बता रहे हैं कि उच्च सदन में एनडीए दो तिहाई के आंकड़े से महज 15 सांसद दूर है। अब सवाल है कि गठबंधन का सबसा बड़ा सदस्य भारतीय जनता पार्टी कितनी सीटें जीत सकती है। समझें राज्यसभा का गणित245 सदस्यों वाले राज्यसभा में एनडीए के पास कुल 148 सांसद हैं। इनमें से सबसे बड़ी पार्टी भाजपा के पास 113 सांसद हैं। अब इस गठबंधन को दो तिहाई का जादुई आंकड़ा छूने के लिए 15 और सांसदों की जरूरत है। खास बात है कि कोई भी संविधान संशोधन बिल पार कराने के लिए सरकार को दो तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। हालांकि, कहा जा रहा है कि इस चुनाव में एनडीए का इस आंकड़े तक पहुंचना तय नहीं है, लेकिन भाजपा कई राज्यों में बढ़त बना सकती है। कहां कितनी सीटें हो रही हैं खालीआंध्र प्रदेश और गुजरात में 4-4 सीटों पर चुनाव होने हैं। जबकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में प्रत्येक में 3 सीटों पर चुनाव हैं। इसके अलावा मणिपुर, मेघालाय में 1-1, झारखंड में 2, अरुणाचल प्रदेश में 1, कर्नाटक में 4 और मिजोरम की 1 सीट पर चुनाव होगा। साथ ही 2 राज्यसभा सीट पर उपचुनाव के लिए भी वोट डाले जाएंगे। कर्नाटककर्नाटक में एनडीए के खाते में 1 सीट आना तय है। जबकि, कांग्रेस 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। कहा जा रहा है कि चौथी सीट इस बात पर निर्भर करेगा कि विधायक किस ओर अपना वोट डाल रहे हैं। आंध्र प्रदेश175 विधायकों वाले आंध्र प्रदेश में टीडीपी के पास 135 और जन सेना पार्टी के पास 21 विधायक हैं। जबकि, भाजपा के पास 8 और YSRCP के 11 विधायक हैं। इस लिहाज से 164 सीटों वाली एनडीए यहां चारों राज्यसभा सीट जीत सकती है। गुजरातगुजरात की 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के पास 161 विधायकों का भारी बहुमत है। इस मजबूत आंकड़े के दम पर पार्टी को 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में सभी चारों सीटों पर अपनी आसान और पक्की जीत का पूरा भरोसा है। राजस्थानराजस्थान विधानसभा में सदस्यों की संख्या 200 है। यहां भाजपा के पास 115 और कांग्रेस के 69 विधायक हैं। इस लिहाज से माना जा रहा है कि भाजपा 2 और कांग्रेस 1 सीट जीत सकती है। मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश के नतीजे चौंकाने वाले साबित हो सकते हैं। 163 विधायकों वाली भाजपा यहां 2 सीटें अपने नाम कर सकती है। वहीं, एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है। झारखंडINDIA गठबंधन के शासन वाले राज्य में दोनों ही सीटें सत्तारूढ़ गठबंधन को मिल सकती हैं। हालांकि, कहा जा रहा है कि रणनीति के तहत एनडीए एक सीट हासिल कर सकता है। यहां कुल 81 विधायक हैं, जिनमें 56 INDIA गठबंधन और 24 एनडीए के हैं।
मुकेश अंबानी की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट…5 माह में गंवा दिए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक

नई दिल्ली। यह साल अबतक मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के लिए अच्छा नहीं रहा। न केवल उनके सिर से भारत और एशिया (India and Asia) के सबसे अमीर का ताज छिना बल्कि नेटवर्थ के मोर्चे पर भी बहुत बड़ा झटका लगा, जिसकी वजह रिलायंस इंडस्टीज के शेयरों (Reliance Industries shares) में भारि गिरावट है। अंबानी अब दुनिया के अमीरों की लिस्ट में 26वें स्थान पर आ गए हैं। ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति 85.8 अरब डॉलर आंकी गई है। इस साल उनकी संपत्ति में 21.9 अरब डॉलर (करीब ₹2,09,583 करोड़) की गिरावट दर्ज की गई है। यह उनकी कुल संपत्ति में लगभग 20.4 प्रतिशत की कमी के बराबर है। ब्लूमबर्ग के अनुसार 5 जून 2026 को मुकेश अंबानी की संपत्ति में एक ही दिन 4 जून को 617 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद वह एशिया और भारत के सबसे प्रभावशाली उद्योगपतियों में शामिल हैं। एशिया के अरबपतियों में उनकी पोजीशन नंबर तीन और भारत में नंबर दो की है। एशिया में पहले स्थान पर चीन के झांक यिमिन हैं और भारत में हमवतन गौतम अडानी। रिलायंस इंडस्ट्रीज है सबसे बड़ी संपत्ति का स्रोतमुकेश अंबानी की संपत्ति का बड़ा हिस्सा रिलायंस इंडस्ट्रीज में उनकी हिस्सेदारी से आता है। रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े ऑयल रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करती है।मार्च 2025 तक कंपनी का सालाना रेवेन्यू 114 अरब डॉलर रहा। कंपनी पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, डिजिटल सेवाओं, टेलीकॉम एंड एनर्जी सेक्टर में सक्रिय है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक अंबानी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर समूह के जरिए करीब 42 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे ब्लूमबर्ग अपनी गणना में उनकी संपत्ति का प्रमुख आधार मानता है। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी बड़ी हिस्सेदारीरिलायंस से अलग हुई जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में भी मुकेश अंबानी की लगभग 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह हिस्सेदारी सीधे और प्रमोटर समूह के माध्यम से उनके नियंत्रण में है। एंटीलिया की कीमत 400 मिलियन डॉलर से ज्यादामुंबई स्थित अंबानी परिवार का आलीशान घर “एंटीलिया” भी उनकी संपत्ति का अहम हिस्सा है। 27 मंजिला इस इमारत का मूल्य 400 मिलियन डॉलर से अधिक माना जाता है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस भवन के निर्माण पर 1 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए गए थे। इसमें हेलिपैड, थिएटर, स्पा, फिटनेस सेंटर, बॉलरूम और सैकड़ों कर्मचारियों के रहने की व्यवस्था है। कारोबार संभालने के लिए छोड़ दी थी स्टैनफोर्ड की पढ़ाईमुकेश अंबानी 1979 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए गए थे, लेकिन एक साल बाद उनके पिता धीरूभाई अंबानी ने उन्हें भारत बुला लिया। इसके बाद उन्होंने रिलायंस के विस्तार और नई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली। धीरूभाई अंबानी के 2002 में निधन के बाद मुकेश और अनिल अंबानी के बीच कारोबारी विवाद हुआ। वर्ष 2005 में परिवार की मध्यस्थता से दोनों भाइयों के बीच कारोबार का बंटवारा हुआ। मुंबई इंडियंस टीम के भी मालिक हैं मुकेश अंबानीमुकेश अंबानी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की सबसे सफल फ्रेंचाइजी में से एक मुंबई इंडियंस के मालिक भी हैं। इसके अलावा उन्होंने टेलीकॉम, डिजिटल सेवाओं और रिटेल कारोबार में भी बड़े निवेश किए हैं। क्यों घटी संपत्ति?विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता और निवेशकों की बदलती धारणा के कारण अंबानी की संपत्ति में इस साल बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। हालांकि, 85.8 अरब डॉलर की संपत्ति के साथ मुकेश अंबानी अभी भी दुनिया के सबसे प्रभावशाली अरबपतियों में शामिल हैं और भारतीय उद्योग जगत में उनकी स्थिति मजबूत बनी हुई है।
शिल्पा शिंदे के बयान से मचा बवाल, बोलीं- मैं अपनी बीमारी का ढिंढोरा नहीं पीटती

नई दिल्ली। टीवी जगत में इन दिनों शिल्पा शिंदे और हिना खान के बीच बयानबाजी चर्चा का विषय बनी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिल्पा शिंदे ने हाल ही में स्वीकार किया कि उन्होंने वर्षों पहले लोकप्रिय धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ के निर्माता पर लगाया गया यौन उत्पीड़न का आरोप झूठा था। इस खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा और कई कलाकारों ने भी उनके बयान पर नाराजगी जताई। इसी क्रम में हिना खान ने भी शिल्पा के बयान को शर्मनाक बताते हुए सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। हिना का कहना था कि इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान उस व्यक्ति को हुआ, जिस पर आरोप लगाए गए थे। उनके इस बयान के बाद अब शिल्पा शिंदे ने भी तीखा जवाब दिया है। एक बातचीत के दौरान शिल्पा ने कहा कि लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर सुर्खियां बटोरना बंद नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ लोग अपनी बीमारी, निजी परेशानियों और परिवार के सदस्यों की मृत्यु जैसे संवेदनशील मुद्दों को भी सार्वजनिक चर्चा का विषय बनाकर सहानुभूति और पब्लिसिटी हासिल करने की कोशिश करते हैं। हालांकि शिल्पा ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को हिना खान की ओर इशारा माना जा रहा है। हाल के वर्षों में हिना खान ने अपनी स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों और निजी जीवन के कठिन दौर को लेकर खुलकर बात की है, जिसके चलते शिल्पा की टिप्पणी को सीधे उन्हीं से जोड़कर देखा जा रहा है। शिल्पा शिंदे ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अब जाकर पुराने मामले की सच्चाई इसलिए बताई क्योंकि वह इस बात का बोझ और नहीं उठाना चाहती थीं। उनके मुताबिक, उस समय वह कॉन्ट्रैक्ट और भुगतान से जुड़े विवादों में फंसी हुई थीं और उन्हें लगा था कि उस परिस्थिति से निकलने का यही रास्ता है। उन्होंने कहा कि यदि उस मामले में गलत कानूनी कार्रवाई होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी। दूसरी ओर, हिना खान पहले ही शिल्पा के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दे चुकी हैं और इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना बताया था। ऐसे में दोनों अभिनेत्रियों के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का केंद्र बन गई है। फिलहाल, इस विवाद ने टीवी इंडस्ट्री में एक नई बहस छेड़ दी है कि सार्वजनिक मंचों पर दिए गए पुराने आरोपों और बाद में उनके खंडन का असर संबंधित लोगों की प्रतिष्ठा और करियर पर कितना गहरा पड़ सकता है।