EPFO ने EPF की ब्याज दर को 8.25% पर रखा बरकार….. करोड़ों सदस्यों को होगा फायदा

नई दिल्ली। ईपीएफओ (EPFO) ने वित्तवर्ष 2026 के लिए 8.25% ब्याज दर बरकरार रखी है और यह कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees Provident Fund Organization- EPFO) के करोड़ों सदस्यों के लिए राहत की खबर है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 2 मार्च 2026 को इसकी जानकारी दी थी। हालांकि ब्याज दर (Interest Rate) की घोषणा हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिकांश खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई नहीं दी है। कब खाते में आएगा EPF का ब्याज?EPFO द्वारा ब्याज दर की घोषणा के बाद उसे केंद्र सरकार की मंजूरी मिलनी होती है। इसके बाद करोड़ों खातों का मिलान और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसी वजह से ब्याज जमा होने में कुछ समय लगता है। आमतौर पर EPF खातों में पिछले वित्त वर्ष का ब्याज जून से सितंबर के बीच जमा किया जाता है। इसलिए सदस्य आने वाले महीनों में अपने खाते में ब्याज की एंट्री देख सकते हैं। देरी हो सकती है, लेकिन पूरा ब्याज मिलेगाEPFO ने स्पष्ट किया है कि भले ही ब्याज जमा होने में कुछ समय लगे, लेकिन सभी पात्र सदस्यों को पूरा ब्याज मिलेगा। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि सभी खातों की पासबुक में ब्याज की एंट्री एक साथ दिखाई नहीं देती। अलग-अलग खातों में यह अपडेट अलग-अलग समय पर नजर आ सकता है। कैसे चेक करें कि ब्याज जमा हुआ या नहीं?EPF सदस्य कई तरीकों से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं।1. UMANG ऐप: UMANG ऐप में लॉगिन कर EPF पासबुक देख सकते हैं।2. EPFO पोर्टल: EPFO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पासबुक चेक की जा सकती है।3. मिस्ड कॉल सेवा: रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से EPFO की मिस्ड कॉल सेवा का उपयोग किया जा सकता है।4. SMS सुविधा: UAN से जुड़े मोबाइल नंबर से SMS भेजकर खाते की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। EPFO 3.0 में मिलेगा UPI से पैसा निकालने का विकल्पEPFO जल्द ही अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 के तहत बड़ी सुविधा शुरू करने जा रहा है। इसके बाद सदस्य अपने पीएफ खाते से सीधे बैंक खाते में राशि ट्रांसफर कर सकेंगे। EPFO 3.0 के तहत UPI के माध्यम से सीधे बैंक खाते में PF राशि ट्रांसफर, UMANG ऐप पर उपलब्ध निकासी राशि की जानकारी और QR कोड के जरिए सुरक्षित ट्रांसफर की सुविधा मिलेगी। बैंक खाते में पैसा आने के बाद ATM या UPI से उपयोग की सुविधा भी मिलेगी। वहीं, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये की गई है। अब नहीं होगी लंबी प्रक्रियानई व्यवस्था लागू होने के बाद पीएफ निकासी के लिए लंबी प्रतीक्षा और कई स्तर की मंजूरी की जरूरत कम हो जाएगी। सदस्य सीधे अपने लिंक्ड बैंक खाते में राशि प्राप्त कर सकेंगे और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग कर सकेंगे। करोड़ों कर्मचारियों को मिलेगा फायदा: EPFO 3.0 को कर्मचारियों के लिए एक बड़ा डिजिटल सुधार माना जा रहा है। इससे पीएफ निकासी प्रक्रिया पहले से अधिक तेज, आसान और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
क्यों ऋषिकेश मुखर्जी की 'बावर्ची' के बाद जया बच्चन और राजेश खन्ना की जोड़ी हमेशा के लिए टूट गई

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा के इतिहास में कलाकारों के आपसी संबंध और सेट पर हुए विवाद कई बार बड़े फैसलों की वजह बन जाते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक और दिलचस्प किस्सा हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और मशहूर अभिनेत्री जया बच्चन (तब जया भादुड़ी) से जुड़ा है। साल 1972 में आई ऋषिकेश मुखर्जी की क्लासिक फिल्म ‘बावर्ची’ में एक साथ काम करने के बाद इस जोड़ी ने हमेशा के लिए एक-दूसरे के साथ काम करने से तौबा कर ली थी। इसके पीछे की मुख्य वजह कोई व्यावसायिक मतभेद नहीं, बल्कि महानायक अमिताभ बच्चन से जुड़ा एक वाक्या था। उस दौर में राजेश खन्ना भारतीय फिल्म उद्योग के शीर्ष शिखर पर थे और उनकी लगातार हिट फिल्मों के कारण उनका एकछत्र राज था। दूसरी ओर, अमिताभ बच्चन उस समय फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे थे। ‘आनंद’ जैसी सफल फिल्म में साथ काम करने के बावजूद राजेश खन्ना तत्कालीन परिस्थितियों में अमिताभ बच्चन को केवल एक संघर्षरत अभिनेता के रूप में ही देखते थे और उनके प्रति उनका रवैया बहुत सकारात्मक नहीं रहता था। ‘बावर्ची’ की शूटिंग के दिनों में जया बच्चन और अमिताभ बच्चन एक-दूसरे को डेट कर रहे थे। अमिताभ बच्चन अक्सर जया बच्चन से मिलने के लिए फिल्म के सेट पर आया करते थे। दोनों को इस तरह साथ देखना उस समय के सुपरस्टार राजेश खन्ना को रास नहीं आता था। वह अक्सर सेट पर जया बच्चन को टोकते थे और उनसे पूछते थे कि वह इस संघर्षरत अभिनेता के साथ अपना समय क्यों बर्बाद कर रही हैं। राजेश खन्ना के जीवन पर आधारित संस्मरणों और वरिष्ठ पत्रकार अली पीटर जॉन के हवाले से सामने आए विवरणों के अनुसार, राजेश खन्ना अक्सर जया से कहते थे कि उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ घूमना-फिरना बंद कर देना चाहिए। उनके शब्द इतने कड़े थे कि उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इस आदमी के साथ रहने से उनका करियर भी आगे नहीं बढ़ पाएगा। राजेश खन्ना का यह रवैया जया बच्चन को लगातार परेशान कर रहा था। विवाद तब और बढ़ गया जब एक दिन अमिताभ बच्चन हमेशा की तरह जया बच्चन से मिलने सेट पर पहुंचे। उस दौरान राजेश खन्ना ने वहां मौजूद अमिताभ बच्चन को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और उनके प्रति बेहद उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। अपने होने वाले जीवनसाथी का ऐसा अपमान देखकर जया बच्चन का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने उसी वक्त बेहद आक्रामक अंदाज में राजेश खन्ना को जवाब देते हुए कहा था कि एक दिन वक्त बदलेगा और तब देखा जाएगा कि कौन किस मुकाम पर खड़ा है। इस घटना से आहत और नाराज जया बच्चन ने तत्काल यह कड़ा फैसला लिया कि वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेंगी। उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद साफ कर दिया था कि वह भविष्य में कभी भी राजेश खन्ना के साथ स्क्रीन साझा नहीं करेंगी। उन्होंने कड़े शब्दों में टिप्पणी की थी कि वह ऐसे व्यक्ति के साथ काम करना पसंद नहीं करेंगी जो खुद को बहुत ऊपर समझता हो। प्रशासनिक और व्यावसायिक दृष्टि से ‘बावर्ची’ साल 1972 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक साबित हुई थी। ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने राजेश खन्ना को उनकी पारंपरिक रोमांटिक और गंभीर छवि से निकालकर एक बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग वाले अभिनेता के रूप में स्थापित किया था। आज भी इस फिल्म की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है, लेकिन इस बड़ी सफलता के बावजूद जया बच्चन ने अपने फैसले को कायम रखा और कूटनीतिक रूप से इस सुपरस्टार के साथ दोबारा कभी कोई फिल्म साइन नहीं की।
MP: मैहर में बेकाबू बोलेरो खाई में गिरी, सात वर्षीय मासूम समेत 2 की मौत, 8 घायल

मैहर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मैहर जिले (Maihar district) के कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पहाड़ी के पास नेशनल हाईवे-30 (National Highway-30) पर गुरुवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार बोलेरो वाहन (High speed Bolero) अनियंत्रित होकर सड़क किनारे गहरी खाई में जा गिरा। हादसे में सात वर्षीय मासूम बच्ची समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हो गए। घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई जा रही है। रेलवे स्टेशन से लौटते समय हुआ हादसाजानकारी के अनुसार, अमरपाटन निवासी एक परिवार अपने परिजन को रेलवे स्टेशन छोड़ने के बाद बोलेरो वाहन से वापस घर लौट रहा था। देर रात ग्राम पहाड़ी के समीप अचानक चालक वाहन से नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद बोलेरो सड़क से नीचे उतरकर कई पलटे खाते हुए खाई में जा गिरी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना इतनी भयावह थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार कई लोग अंदर फंस गए। हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस, डायल-100 और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद घायलों को वाहन से बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचाया गया। मासूम बच्ची और बुजुर्ग ने तोड़ा दमहादसे में जुली पटेल (7 वर्ष), पिता उमेश पटेल, निवासी अमरपाटन तथा भूपेन्द्र पटेल (70 वर्ष), पिता मुन्ना पटेल, निवासी अमरपाटन की मौत हो गई। दोनों के शवों को पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं वाहन में सवार अन्य आठ लोग घायल हुए हैं। इनमें तीन घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रेफर किया गया है। र्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस जांच कर रही है।
इंडिगो की 6 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ने के कारण जुलाई से अस्थाई रूप से होगी बंद

नई दिल्ली। विमान कंपनी इंडिगो (Airline company Indigo) ने जुलाई महीने से छह डेस्टिनेशंस (Six Destinations) के लिए अपनी उड़ानों को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है. विमानन कंपनी ने ये कदम कमजोर मांग और लगातार बढ़ रही ऑपरेटिंग कॉस्ट (Increasing Operating Costs) को देखते हुए उठाया है। इंडिगो का ये फैसला गर्मियों की छुट्टियों मौजूदा सीजन में आया है. इंडिगो के मुताबिक, मलेशिया के लांगकावी, थाईलैंड के क्राबी और वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी के लिए उड़ानें 1 जुलाई से सस्पेंड यानी बंद कर दी जाएंगी। इसके अलावा, हांगकांग और चीन के शंघाई, कंबोडिया के सिएम रीप के लिए उड़ानों को 3 जुलाई से रोक दिया जाएगा। इन सभी छह रूटों पर उड़ानों का सस्पेंशन 30 सितंबर तक लागू रहेगा. ये सभी रूट भारतीय यात्रियों के बीच काफी पॉपुलर हैं. ये रूट दक्षिण-पूर्व एशिया और चीन के प्रमुख पर्यटन और व्यावसायिक शहरों के लिए सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराते हैं। अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी बुकिंगइंडिगो ने बताया है कि इन सभी छह रूटों के लिए टिकटों की बुकिंग 1 अक्टूबर से दोबारा शुरू कर दी जाएगी. हालांकि, अगर मार्किट में मांग में सुधार होता है, तो इन सेवाओं को तय समय से पहले भी बहाल किया जा सकता है. एयरलाइंस ने इस कदम को इंटरनेशनल नेटवर्क में एक सीमित और छोटा सा बदलाव बताया है। कंपनी के मुताबिक, साल की ये तिमाही आमतौर पर यात्रा के लिहाज से कमजोर होती है. इसके साथ ही मौजूदा समय में लागत का माहौल भी काफी चुनौतियों से भरा है. अस्थायी कटौती के बावजूद एयरलाइंस ने कहा है कि वो हर हफ्ते 1,800 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें जारी रखेगी. कंपनी अपने विदेशी नेटवर्क के बड़े हिस्से को पहले की तरह ही बरकरार रख रही है। इंडिगो ने कहा कि वो अंतरराष्ट्रीय परिचालन पर कोई भी अगला फैसला लेने से पहले मार्किट की कंडीशन, बढ़ती परिचालन लागत और एयरस्पेस के प्रतिबंधों पर नजर रखेगी। इस फैसले से प्रभावित होने वाले यात्रियों को पहले से सूचित किया जाएगा. यात्रियों को रिफंड या दूसरे उपलब्ध विकल्प भी दिए जाएंगे. ईरान युद्ध के चलते मैनचेस्टर उड़ान पर भी लगा ब्रेकदो दिन पहले ही इंडिगो ने 31 अगस्त से मैनचेस्टर के लिए अपनी उड़ानें बंद करने की बात कही थी. एयरलाइंस ने इसके पीछे ईरान युद्ध के चलते इंटरनेशनल एयरस्पेस में लंबे समय से जारी प्रतिबंधों और बढ़ती परिचालन लागत का हवाला दिया था. कंपनी का कहना है कि इन वजहों से ये रूट कमर्शियल रूप से काफी नुकसानदेह साबित हो रहा था. इंडिगो के मुताबिक, कुछ एयर कॉरिडोर्स के लगातार बंद रहने की वजह से उड़ानों के समय और खर्चों में भारी बढ़ोतरी हुई है. इससे लंबी दूरी की हवाई सेवाओं को जारी रखना मुश्किल हो गया है. इंडिगो फिलहाल दिल्ली और मुंबई से ब्रिटेन के मैनचेस्टर के लिए उड़ानों का संचालन करती है. इस रूट की शुरुआत पिछले साल जुलाई में एयरलाइंस की लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय विस्तार योजना के तहत की गई थी।
प्रोड्यूसर का दावा- जान से मारने और सिर काटने की धमकी मिली

नई दिल्ली। सलमान खान के चर्चित काला हिरण शिकार मामले पर आधारित फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ रिलीज से पहले ही बड़े विवाद में घिर गई है। फिल्म के निर्माता अमित जानी ने दावा किया है कि उन्हें सोशल मीडिया पर लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनका कहना है कि कुछ लोग उन्हें मुंबई आने पर सिर धड़ से अलग करने तक की धमकी दे रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने फिल्म और उससे जुड़े विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। दरअसल, हाल ही में सलमान खान की कानूनी टीम ने फिल्म के निर्माताओं को नोटिस भेजकर फिल्म के निर्माण और प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी। नोटिस में फिल्म से जुड़े पक्षों से लिखित माफी मांगने को भी कहा गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद अमित जानी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह कथित तौर पर नोटिस को फाड़ते नजर आए। वीडियो में उन्होंने कहा कि लोग उनसे पूछ रहे हैं कि वह नोटिस का क्या जवाब देंगे, लेकिन जब उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं तो वे किसे जवाब दें। उनका कहना है कि हजारों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां और धमकियां दी जा रही हैं। अमित जानी ने आरोप लगाया कि कुछ तथाकथित प्रशंसक और असामाजिक तत्व उनके परिवार को भी निशाना बनाने की बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डराने-धमकाने की कोशिशों के बावजूद वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और अपने प्रोजेक्ट पर काम जारी रखेंगे। गौरतलब है कि ‘काला हिरण: द बैटल ऑफ लीगेसी’ का कथानक 1998 के बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले से प्रेरित बताया जा रहा है, जिसमें सलमान खान का नाम सामने आया था। इसी वजह से फिल्म की घोषणा के बाद से ही यह परियोजना विवादों के केंद्र में बनी हुई है। फिलहाल मामले को लेकर कानूनी और सार्वजनिक बहस दोनों जारी हैं। एक ओर फिल्म के निर्माता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सलमान खान की कानूनी टीम अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कदम उठा रही है। आने वाले दिनों में यह विवाद किस दिशा में जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
लेबनान सैन्य अभियान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेंजामिन नेतन्याहू को लगाई थी कड़ी फटकार, इजरायली पीएम ने बताया आपसी पारिवारिक विवाद

नई दिल्ली । वैश्विक कूटनीति के पटल पर अमेरिका और इजरायल के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुआ हालिया विवाद अब पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक फोन कॉल के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ी फटकार लगाए जाने की खबरों के बाद अब इस पर यरूशलम की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस तनाव को पूरी तरह से सामान्य बताते हुए कूटनीतिक संबंधों में किसी भी तरह की दरार आने की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम पर एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट को दिए साक्षात्कार में बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपने मतभेदों की तुलना एक पारंपरिक परिवार से की है। उन्होंने कहा कि एक परिवार के भीतर वैचारिक और रणनीतिक स्तर पर इस तरह के उतार-चढ़ाव होना बेहद स्वाभाविक है। इजरायली प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि कूटनीति में इस प्रकार के तनावों के बावजूद वाशिंगटन और यरूशलम के द्विपक्षीय संबंध हमेशा की तरह दृढ़ और अपरिवर्तित बने हुए हैं। शीर्ष नेताओं के बीच उपजे इस कड़े कूटनीतिक विवाद के पीछे मुख्य कारण इजरायल द्वारा लेबनान में शुरू किया गया नया सैन्य अभियान बताया जा रहा है। इजरायली रक्षा बलों द्वारा हाल ही में घोषित युद्धविराम की शर्तों को दरकिनार करते हुए बेरुत पर व्यापक हवाई हमले शुरू कर दिए गए थे। इजरायल के इस सैन्य कदम से नाराज होकर ईरान ने अमेरिका के साथ चल रही द्विपक्षीय वार्ता को बीच में ही स्थगित करने का फैसला कर लिया, जिससे कूटनीतिक समझौता पूरा होने से पहले ही खटाई में पड़ गया। ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल होने का सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति की नाराजगी के रूप में सामने आया, जिसका सामना बेंजामिन नेतन्याहू को करना पड़ा। अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फोन कॉल पर इजरायली प्रधानमंत्री के प्रति बेहद आक्रामक रुख अपनाया था। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बातचीत कूटनीतिक शिष्टाचार के स्तर पर अत्यंत तनावपूर्ण और अप्रत्याशित रही। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस फोन वार्ता के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के सैन्य फैसलों को पूरी तरह अतार्किक बताया और कहा कि इस तरह के कदमों के कारण वैश्विक स्तर पर इजरायल की छवि को भारी नुकसान पहुंच रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि उनके प्रशासनिक सहयोग के बिना इजरायली नेतृत्व के लिए आंतरिक और बाहरी सुरक्षा चुनौतियां संभालना बेहद कठिन हो जाता। हालांकि बाद में अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस तीखे रुख पर थोड़ी नरमी दिखाते हुए कहा कि वह गुस्से में नहीं थे, बल्कि मध्य पूर्व की बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर चिंतित थे। इस कड़े प्रहार के बाद भी इजरायली कूटनीति ने अमेरिकी प्रशासन के प्रति अपने नरम और सहयोगात्मक रवैये को बनाए रखने का प्रयास किया है। बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि दोनों देशों के नेतृत्व के बीच सुबह रणनीतिक असहमति हो सकती है, लेकिन दोपहर तक आपसी बातचीत से समाधान खोज लिया जाता है। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को इजरायल का सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ मित्र बताते हुए दावा किया कि दोनों नेता निरंतर कूटनीतिक संपर्क में हैं।
“फिल्मों के बड़े बजट सिर्फ PR का हिस्सा हैं” – मनोज बाजपेयी का बड़ा बयान, रामायण और वाराणसी पर फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा में इन दिनों दो बड़ी फिल्मों-Ranbir Kapoor की ‘रामायण’ और Priyanka Chopra की फिल्म ‘वाराणसी’-को लेकर जबरदस्त चर्चा है। दोनों फिल्मों के कथित बजट को लेकर सोशल मीडिया से लेकर इंडस्ट्री तक लगातार बहस चल रही है। इसी बीच मनोज बाजपेयी ने इन चर्चाओं को लेकर अपनी बेबाक राय रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि फिल्मों के बड़े बजट की बातें अक्सर “पीआर का जरिया” बन जाती हैं और पिछले कई वर्षों से यह ट्रेंड लगातार बढ़ा है। उनका कहना है कि दर्शकों को इस बात से ज्यादा फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि किसी फिल्म का बजट कितना है, बल्कि यह देखना चाहिए कि फिल्म उन्हें पसंद आई या नहीं। “दर्शकों को सिर्फ फिल्म से मतलब होना चाहिए”मनोज बाजपेयी ने कहा कि आजकल दर्शक एयरपोर्ट या सार्वजनिक जगहों पर उनसे फिल्मों के बॉक्स ऑफिस नंबर तक पूछते हैं। इस पर उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि वे कई बार लोगों को डांट भी देते हैं। उनके अनुसार, “अगर बॉक्स ऑफिस का पैसा दर्शकों के बैंक अकाउंट में नहीं जा रहा, तो उन्हें इसकी चिंता क्यों करनी चाहिए?” उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से प्रोड्यूसर्स और मेकर्स का मामला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दर्शकों का फिल्म से सिर्फ इतना संबंध होना चाहिए कि उन्हें फिल्म पसंद आई या नहीं। 4000 करोड़ और 1400 करोड़ के बजट पर चर्चाइन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा ‘रामायण’ के बजट की हो रही है, जिसे लगभग 4000 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। यह फिल्म दो भागों में बनाई जा रही है और इसे भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है। वहीं ‘वाराणसी’ का बजट करीब 1400 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जिससे यह भी बड़े पैमाने की फिल्मों की सूची में शामिल हो गई है। इन आंकड़ों ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है-क्या इतने बड़े बजट वास्तव में जरूरी हैं या यह सिर्फ प्रचार का हिस्सा हैं? फिल्मों के बिजनेस पर भी उठे सवालमनोज बाजपेयी ने यह भी कहा कि 500-600 करोड़ या हजारों करोड़ रुपये के आंकड़ों पर दर्शकों को ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उनके अनुसार, फिल्म के बिजनेस का असर केवल प्रोड्यूसर्स और निवेशकों पर पड़ता है, आम दर्शकों पर नहीं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आजकल फिल्मों के बजट और कमाई के आंकड़े कई बार चर्चा बढ़ाने और फिल्म को सुर्खियों में बनाए रखने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं। दिवाली और 2027 में रिलीज की तैयारी‘रामायण’ का पहला भाग इस साल दिवाली पर रिलीज होने की संभावना है, जिसे डायरेक्टर Nitesh Tiwari निर्देशित कर रहे हैं। वहीं ‘वाराणसी’ फिल्म 2027 में रिलीज होने की उम्मीद है, जिसका निर्देशन S. S. Rajamouli कर रहे हैं। दोनों फिल्मों को लेकर पहले से ही दर्शकों में भारी उत्साह है और अब बजट विवाद ने इन प्रोजेक्ट्स को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है। मनोज बाजपेयी का बयान एक बार फिर इस बहस को हवा दे गया है कि क्या भारतीय सिनेमा में बढ़ते बजट वाकई गुणवत्ता का संकेत हैं या सिर्फ मार्केटिंग रणनीति। फिलहाल, दर्शक इन बड़ी फिल्मों की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं।
Debashish Samantaray: BJD से BJP तक का सफर, कौन हैं देबाशीष सामंतराय जिन्हें मिला राज्यसभा टिकट

Debashish Samantaray: नई दिल्ली। ओडिशा की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी उलटफेर सामने आया है। बीजू जनता दल (BJD) से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद देबाशीष सामंतराय को पार्टी ने राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। खास बात यह है कि उन्होंने BJP की सदस्यता महज 10 दिन पहले ही ली थी और अब उन्हें सीधे उच्च सदन की जिम्मेदारी मिलने जा रही है। सामंतराय पहले भी तीन बार विधायक रह चुके हैं और फरवरी 2024 में उन्हें BJD की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। उनका कार्यकाल वर्ष 2030 तक तय था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही 25 मई को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। Congress Leader Alleges BJP Leader: भिंड में कांग्रेस नेत्री ने भाजपा नेता पर लगाए धोखाधड़ी के आरोप, बोली बोलकर 5 लाख ऐंठे इस्तीफे के पीछे क्या रही वजह? देबाशीष सामंतराय ने BJD छोड़ने की वजह पार्टी के भीतर बढ़ती उपेक्षा को बताया है। उनका कहना है कि उन्हें लंबे समय से पार्टी नेतृत्व से दूर रखा जा रहा था और वे अपने राजनीतिक गुरु तथा BJD प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात नहीं कर पा रहे थे। उन्होंने पार्टी के भीतर नौकरशाह से नेता बने वी. के. पांडियन की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि संगठन में उनके प्रभाव के कारण कई पुराने नेताओं को किनारे किया जा रहा है। BJD छोड़ने के तुरंत बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व तथा “विकसित भारत” के विजन से प्रेरित होकर नई राजनीतिक यात्रा शुरू करने की बात कही। Gwalior electricity camp: ग्वालियर में बिजली उपभोक्ताओं को राहत, 22 स्थानों पर लगेंगे शिविर BJP की रणनीति या सियासी संदेश? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि BJP का यह कदम केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश भी है। इससे पहले भी पार्टी ने BJD के कई नेताओं को अपने साथ जोड़कर उन्हें अहम जिम्मेदारियां दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सामंतराय को उम्मीदवार बनाना इस बात का संकेत है कि BJP ओडिशा में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है, खासकर राज्यसभा जैसी महत्वपूर्ण सीटों पर। उपचुनाव में जीत लगभग तय? चुनाव आयोग ने ओडिशा राज्यसभा उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। 147 सदस्यों वाली विधानसभा में BJP के पास स्पष्ट बहुमत है, ऐसे में देबाशीष सामंतराय की जीत लगभग तय मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य विपक्षी दल BJD और कांग्रेस इस उपचुनाव में उम्मीदवार उतारने से भी बच सकती हैं, जिससे मुकाबला और आसान हो जाएगा। Ashoknagar congress protest: SDOP ने कोंग्रेसी को धक्के मरकर हटाया, खाद संकट पर प्रदर्शन करने बैठे थे कार्यकर्ता ओडिशा की राजनीति में नया मोड़ इस घटनाक्रम ने ओडिशा की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक तरफ इसे BJP की मजबूत रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद करार दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह फैसला राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।
'जय भीम' के उद्घोष के साथ अमेरिका से भारत के लिए हुए रवाना, दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी

नई दिल्ली । सोशल मीडिया पर कौतूहल का विषय बनी कॉकरोच जनता पार्टी अब वास्तविक धरातल पर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन की तैयारी में है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से भारत के लिए रवाना हो चुके हैं और शनिवार सुबह देश की राजधानी दिल्ली में कदम रखेंगे। उनका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर एक विशाल जनसभा और विरोध प्रदर्शन आयोजित करना है, जिसके केंद्र में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। अभिजीत दीपके ने भारत यात्रा पर निकलने से पहले सोशल मीडिया पर एक भावुक और वैचारिक संदेश साझा किया। उन्होंने अपने पोस्ट में ‘जय भीम’ के नारे का उल्लेख करते हुए लिखा कि वह भारत के लिए प्रस्थान कर चुके हैं और अब अपना भाग्य पूरी तरह से देश के संविधान के हाथों में सौंपते हैं। इस डिजिटल घोषणा के बाद उनके समर्थकों में भारी उत्साह देखा जा रहा है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी फ्लाइट और लैंडिंग के समय को पूरी तरह गुप्त रखा गया है। इस पूरे विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी प्रशासनिक अड़चन यह है कि संगठन ने दिल्ली पुलिस से इस प्रदर्शन के लिए अब तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली है। रणनीतिक रूप से अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के बाद वह सीधे जंतर-मंतर जाने के बजाय पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस थाने का रुख करेंगे। वहां पहुंचकर वह प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की लिखित अनुमति मांगेंगे। अभिजीत दीपके और उनके संगठन का दावा है कि इस प्रदर्शन में देश भर से भारी संख्या में युवा और छात्र शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने किसी सटीक आंकड़े की पुष्टि तो नहीं की, लेकिन यह जरूर कहा कि प्रदर्शन में हजारों लोग शामिल होंगे। उन्होंने अपनी बात को मजबूती देने के लिए संगठन की वेबसाइट का हवाला देते हुए कहा कि उनकी इस वर्चुअल पार्टी से 11 लाख से अधिक पंजीकृत सदस्य जुड़ चुके हैं, जिन्होंने दिल्ली पहुंचने की प्रतिबद्धता जताई है। इस अचानक उपजे विरोध प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा देश की वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में उपजी विसंगतियां हैं। कॉकरोच जनता पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि वे नीट परीक्षा में हुए कथित पेपर लीक मामले और सीबीएसई के परीक्षा परिणामों में सामने आईं गड़बड़ियों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। संगठन की मांग है कि इन गंभीर प्रशासनिक विफलताओं की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि इस आंदोलन की पृष्ठभूमि पूरी तरह से डिजिटल और तात्कालिक है। देश के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की एक कथित टिप्पणी के बाद, जिसमें उन्होंने कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में एक तुलनात्मक टिप्पणी की थी, इंटरनेट पर विरोध स्वरूप ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नामक एक व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया हैंडल बनाया गया था। महज चार दिनों के भीतर इस डिजिटल हैंडल के फॉलोअर्स की संख्या देश की स्थापित बड़ी राजनीतिक पार्टियों से भी आगे निकल गई, जिसने अब एक वास्तविक आंदोलन का रूप ले लिया है।
श्रेयस अय्यर बनेंगे नए टी20 कप्तान, आईपीएल स्टार 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को सीनियर टीम में जगह मिलने के संकेत

नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम में आगामी दौरों को लेकर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। बीसीसीआई शनिवार को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ होने वाली टी20 सीरीज के लिए राष्ट्रीय टीम की घोषणा करने जा रही है। ईएसपीएनक्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, चयनकर्ता न केवल नए खिलाड़ियों को आजमाने के मूड में हैं, बल्कि टी20 टीम के नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर चुके हैं। मौजूदा टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव की कप्तानी पर इस समय खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। हाल ही में मार्च में उनकी कप्तानी में भारत ने 2026 टी20 वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया था, लेकिन इसके बावजूद चयनकर्ता उन्हें इस जिम्मेदारी से मुक्त करने का मन बना रहे हैं। उनकी जगह मध्यक्रम के अनुभवी बल्लेबाज श्रेयस अय्यर को भारतीय टी20 टीम का नया कप्तान नियुक्त किया जा सकता है। नेतृत्व परिवर्तन का यह सिलसिला केवल कप्तानी तक ही सीमित नहीं रहने वाला है। टीम के उप-कप्तान अक्षर पटेल को भी इस जिम्मेदारी से हटाया जा सकता है, और उनकी जगह युवा बल्लेबाज तिलक वर्मा को नया उप-कप्तान बनाया जा सकता है। चयनकर्ताओं का यह कड़ा रुख भविष्य की योजनाओं, विशेषकर 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले ओलंपिक और उसी वर्ष होने वाले अगले टी20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखकर लिया जा रहा है। सूर्यकुमार यादव के लिए यह बदलाव दोहरा झटका साबित हो सकता है क्योंकि उन्हें न सिर्फ कप्तानी से हाथ धोना पड़ सकता है, बल्कि खराब फॉर्म के चलते पूरी टीम से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। टी20 वर्ल्ड कप की नौ पारियों में उनका स्ट्राइक रेट तो ठीक था, लेकिन वे केवल 242 रन बना सके। इसके बाद आईपीएल 2026 के सीजन में उनका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जहां उन्होंने 13 पारियों में सिर्फ 20.76 के औसत से 270 रन बनाए। दूसरी ओर, नए कप्तान के रूप में उभर रहे 31 वर्षीय श्रेयस अय्यर ने दिसंबर 2023 के बाद से कोई टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला है। उस समय सूर्यकुमार यादव और तिलक वर्मा की मध्यक्रम में मौजूदगी के कारण अय्यर को टीम संयोजन में जगह नहीं मिल पा रही थी। इसी साल जनवरी में न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज के दौरान उन्हें चोटिल खिलाड़ी के विकल्प के रूप में शामिल जरूर किया गया था, लेकिन मैच खेलने का मौका नहीं मिला क्योंकि प्रबंधन तब वर्ल्ड कप की कोर टीम को आजमाना चाहता था। भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा कप्तानों को बदलने का यह लगातार दूसरा बड़ा फैसला है। इससे पहले साल 2025 में भी ऐसा ही देखने को मिला था, जब रोहित शर्मा ने मार्च में भारत को चैंपियंस ट्रॉफी का खिताब जिताया था, लेकिन अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले चयनकर्ताओं ने उन्हें वनडे टीम की कप्तानी से हटा दिया था, हालांकि रोहित टीम में बने रहे थे। इस आगामी चयन में सबसे बड़ा आकर्षण 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी हो सकते हैं। आईपीएल 2026 के एक धमाकेदार सीजन में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने वाले सूर्यवंशी को पहली बार सीनियर टीम में शामिल किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो वह 1980 के दशक के उत्तरार्ध में सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के बाद भारत की सीनियर पुरुष टीम में चुने जाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बन जाएंगे। राष्ट्रीय टीम के दौरों से ठीक पहले, सूर्यवंशी 9 से 21 जून तक श्रीलंका में होने वाली इंडिया ए की ट्राई-सीरीज का हिस्सा होंगे, जिसमें अफगानिस्तान की टीम भी शामिल है। इसके ठीक बाद सीनियर भारतीय टीम को 26 और 28 जून को बेलफास्ट में आयरलैंड के खिलाफ दो टी20 मैच खेलने हैं। इसके बाद भारतीय टीम 1 से 11 जुलाई तक इंग्लैंड के लंबे दौरे पर रहेगी, जहां पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की सीरीज खेली जानी है।