MP: भोपाल में MP नगर स्थित सरकारी दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के व्यस्त इलाके एमपी नगर स्थित नापतौल विभाग के दफ्तर (Metrology Department Office) में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ईमेल के जरिए विभाग को बम से उड़ाने की धमकी दी गई. ईमेल में दावा किया गया था कि दफ्तर के भीतर साइनाइड गैस के 16 सिलेंडर रखे गए हैं. दफ्तर के सुपरिटेंडेंट श्यामू सोलंकी ने बताया, “ईमेल चेक करते समय सुबह 10:20 बजे मुझे एक मैसेज मिला, जिसमें लिखा था कि विभाग के दफ्तर के अंदर साइनाइड गैस से भरे 16 सिलेंडर रखे गए हैं और वे दोपहर करीब 1 बजे फट जाएंगे.” इसके बाद अपने सीनियर अधिकारियों से संपर्क किया और पुलिस को इसकी सूचना दी गई. उन्होंने बताया कि बम निरोधक दस्ते के जवान और खोजी कुत्तों के साथ पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर की तलाशी ली. उन्होंने आगे बताया कि एहतियात के तौर पर दफ्तर को खाली करा लिया गया था. सोलंकी ने बताया कि पुलिस को दफ़्तर में कोई सिलेंडर या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली. इससे पहले भी भोपाल में पीपल्स यूनिवर्सिटी और AIIMS को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे, लेकिन वे अलर्ट भी झूठे निकले थे. भोपाल सिटी जोन 2 के पुलिस उपायुक्त (DCP) विवेक सिंह ने बताया कि ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के लिए जांच चल रही है. उन्होंने शक जाहिर किया कि पूरे देश में इस तरह के ईमेल भेजने के पीछे किसी गिरोह का हाथ हो सकता है, जो नकली नामों का इस्तेमाल कर रहा है. दोपहर 1:10 बजे से अपना काम फिर से शुरू कर दिया।
ईरान के हाथ नहीं लगना चाहिए परमाणु हथियार… US नेताओं ने किया दुनिया को आगाह

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (Vice President JD Vance) ने ईरान (Iran) को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) बनाने के खतरों के प्रति आगाह किया। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने राष्ट्रपति के रुख का समर्थन करते हुए कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) हासिल नहीं करने चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई राष्ट्रपति के नेतृत्व में हुई है। वेंस ने डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों से आग्रह किया कि वे अपने सैनिकों की सफलता और सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। ट्रंप का कड़ा रुख: ‘ईरान के नेता हिंसक और दुष्ट हैं’वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा “मैं किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में युद्ध कम चाहता हूं… ईरान के नेता हिंसक और दुष्ट लोग हैं जिन्होंने पिछले तीन हफ्तों में 32,000 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है।” ‘दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तबाह हो जाएगा’ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि कोई यह मानता है कि ईरान को परमाणु हथियार मिलने चाहिए, तो वह गलत है। उन्होंने कहा वे इसका इस्तेमाल एक घंटे या एक दिन के भीतर कर देंगे। वे इसका इस्तेमाल करेंगे और पूरे पश्चिम एशिया को तबाह कर देंगे, न कि सिर्फ इस्राइल को। ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि यदि ईरान को परमाणु हथियार मिल जाता है, तो दुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा तबाह हो जाएगा और इसका इस्तेमाल लगभग तुरंत ही किया जाएगा। ‘हमने उन्हें दो हफ्तों में तबाह कर दिया’राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की सैन्य क्षमता पर अमेरिका की कार्रवाई के प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया हमने उन्हें दो हफ्तों में तबाह कर दिया है। उनके पास कोई नौसेना नहीं है, कोई वायु सेना नहीं है, कोई एंटी-एयरक्राफ्ट हथियार नहीं है और कोई नेतृत्व नहीं है। उनका नेतृत्व खत्म हो गया है। फिर उन्होंने एक नया नेतृत्व स्थापित किया और वह भी खत्म हो गया। ट्रंप ने कहा कि यह काम पूरी दुनिया के लिए किया गया है। उन्होंने ईरान को पिछले 50 वर्षों या उससे भी लंबे समय में वैचारिक दृष्टिकोण से सबसे खराब देश बताया, जो दुनिया को उड़ाना चाहता था। ‘नेतृत्व के दो स्तर पूरी तरह खत्म’राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान की अधिकांश मिसाइलों और ड्रोनों को निष्क्रिय कर दिया है। उन्होंने कहा हमने नेतृत्व के दो स्तरों को पूरी तरह से खत्म कर दिया है और शायद तीसरा भी। हमारे पास केवल एक चीज है जो एक छोटा चोक पॉइंट है और उन्होंने (ईरान) इसका वर्षों से बहुत अच्छी तरह से इस्तेमाल किया है, लेकिन यह काम नहीं करता। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन देशों को अमेरिका वर्षों से मदद करता आ रहा है, उनकी 90 से 95% ऊर्जा होर्मुज जलडमरूमध्य से प्राप्त होती है, जो एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बिंदु है। ट्रंप बोले- कार्रवाई जल्द खत्म, दुनिया होगी सुरक्षितअमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि हाल की सैन्य कार्रवाई जल्द ही समाप्त हो जाएगी और दुनिया अब अधिक सुरक्षित होगी। ट्रंप ने अपने फैसले को अनिवार्य और जरूरी बताया। उन्होंने कहा अगर आप देखना चाहते हैं कि स्टॉक मार्केट कैसे गिरती है, तो उन्हें (ईरान) परमाणु हथियारों से हमला करने दें। यह केवल एक छोटा मूल्य है जो हमें चुकाना पड़ा। ट्रंप ने आगे बताया कि यह पूरी रणनीति एक उच्चस्तरीय शतरंज का खेल है और वे इसके लिए बहुत ही स्मार्ट खिलाड़ियों से निपट रहे हैं। उनका कहना था कि इस खेल में संतुलन बनाए रखना और खतरे को रोकना ही सबसे बड़ा उद्देश्य है।
कुंभ राशि में 4 ग्रहों की महायुति, इन राशि वालों के लिए शुरू होगा स्वर्णिम समय, मिलेगा बड़ा लाभ

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का राशि परिवर्तन हमेशा जीवन में बड़े बदलाव और अवसर लेकर आता है। मार्च 2026 में कुंभ राशि में बन रही चतुर्ग्रही योग इस समय की सबसे खास घटना है। इस योग के प्रभाव से चार भाग्यशाली राशियों मेष, वृषभ, तुला और कुंभ के लिए करियर और आर्थिक मामलों में महत्वपूर्ण सफलता के दरवाजे खुलने वाले हैं। चतुर्ग्रही योग का समय और प्रभावज्योतिषियों के अनुसार, 16 मार्च 2026 की शाम 6 बजकर 15 मिनट से कुंभ राशि में राहु, मंगल, बुध और चंद्रमा के मिलन से यह शक्तिशाली चतुर्ग्रही योग बना। यह योग 18 मार्च 2026 की देर रात 11 बजकर 35 मिनट तक पूर्ण प्रभावी रहेगा। इसके बाद चंद्रमा के मीन राशि में जाने के बाद यह योग समाप्त हो जाएगा। हालांकि, कुंभ राशि में राहु, मंगल और बुध का त्रिग्रही योग सक्रिय रहेगा। करीब ढाई दिन तक बने इस योग से इन चार राशियों के लिए करियर में उन्नति, धन लाभ और भाग्य के शुभ परिणाम आने की संभावना है। राशियों पर प्रभावमेष राशिमेष राशि वालों के स्वामी मंगल इस योग में शामिल हैं। इस समय उन्हें करियर में नए अवसर मिल सकते हैं। नई नौकरी या पदोन्नति के मौके बढ़ेंगे। पहले की गई मेहनत का फल मिलेगा। घर में सुख-शांति आएगी और निवेश के लिए समय अनुकूल रहेगा। वृषभ राशिवृषभ राशि के जातकों के लिए यह योग बड़ी तरक्की और आर्थिक सुधार का संकेत देता है। काम को मान्यता मिलेगी, बैंक बैलेंस बढ़ेगा और रुके हुए काम तेजी से पूरे होंगे। स्वास्थ्य समस्याएं कम होंगी और किस्मत का साथ मिलेगा। तुला राशितुला राशि के लोगों को शिक्षा, करियर और धन के मामले में शुभ फल मिल सकते हैं। विद्यार्थियों को सफलता मिलेगी, करियर में प्रमोशन की संभावना रहेगी। लव लाइफ में खुशहाली आएगी और सिंगल जातकों को सच्चा प्यार मिलने के योग हैं। कुंभ राशियह योग कुंभ राशि में बन रहा है, इसलिए इस राशि वालों के लिए विशेष लाभकारी है। अचानक धन लाभ हो सकता है। ऑफिस में काम की सराहना होगी। नए स्रोत से आय बढ़ेगी और कर्ज चुकाने में आसानी होगी। परिवार के साथ समय अच्छा बीतेगा और घर में खुशहाली रहेगी। डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य ज्योतिष स्रोतों पर आधारित है और केवल जागरूक करने के उद्देश्य से दी गई है।
गुड़ी पड़वा 2026: 19 मार्च को मनाया जाएगा हिंदू नववर्ष, जानिए गुड़ी स्थापना और तेल स्नान का महत्व

नई दिल्ली । हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व 19 मार्च को मनाया जाएगा। इसी दिन से हिंदू नववर्ष नवसंवत्सर 2083 की शुरुआत मानी जाती है और चैत्र नवरात्रि का भी आरंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि पर सृष्टि की रचना भगवान Brahma ने की थी इसलिए इसे नए साल की शुरुआत के रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इस पर्व को विशेष उत्साह के साथ मनाया जाता है जहां इसे गुड़ी पड़वा कहा जाता है। वहीं कर्नाटक में इसे युगादी और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना में उगादी के नाम से जाना जाता है। गुड़ी स्थापना की परंपरा गुड़ी पड़वा के दिन घरों में गुड़ी स्थापित करने की परंपरा है। गुड़ी को विजय समृद्धि और नए वर्ष के स्वागत का प्रतीक माना जाता है। इसे घर के मुख्य द्वार छत या किसी ऊंचे स्थान पर लगाया जाता है ताकि वह दूर से दिखाई दे सके। गुड़ी बनाने के लिए बांस के डंडे पर सुंदर कपड़ा बांधा जाता है और उस पर आम तथा नीम की पत्तियां फूल और ऊपर उल्टा चांदी तांबे या पीतल का कलश लगाया जाता है।तेल स्नान का महत्व गुड़ी पड़वा की सुबह जल्दी उठकर सुगंधित तेल से स्नान करने की परंपरा भी प्रचलित है। माना जाता है कि इससे शरीर की अशुद्धियां दूर होती हैं रक्त संचार बेहतर होता है और व्यक्ति सकारात्मक ऊर्जा के साथ नए वर्ष की शुरुआत करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन तेल स्नान करने से Lakshmi की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है। पारंपरिक व्यंजनों से होता है नए साल का स्वागत गुड़ी पड़वा के अवसर पर महाराष्ट्र में श्रीखंड पुरण पोली राइस चकली और भाकरवड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ इन पकवानों का आनंद लेते हुए लोग नए साल का स्वागत करते हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
Bada Mangal 2026: हनुमान भक्तों के लिए खास साल, ज्येष्ठ मास में पड़ेंगे 8 बड़ा मंगल, दोगुना पुण्य कमाने का मौका

नई दिल्ली। भगवान हनुमान के भक्तों के लिए साल 2026 बेहद खास रहने वाला है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले बड़ा मंगल का पर्व इस बार विशेष महत्व लेकर आ रहा है। आमतौर पर जहां चार या पांच बड़ा मंगल होते हैं, वहीं इस साल पूरे आठ बड़ा मंगल पड़ेंगे, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना और पुण्य कमाने के अधिक अवसर मिलेंगे। बड़ा मंगल के दिन हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है। खासकर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में यह पर्व बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, सुंदरकांड का पाठ किया जाता है और जगह-जगह भंडारों का आयोजन भी होता है। मान्यता है कि ज्येष्ठ माह के मंगलवार को बजरंगबली की पूजा करने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं। बड़ा मंगल 2026 की तारीखेंसाल 2026 में ज्येष्ठ मास के दौरान पड़ने वाले बड़ा मंगल इस प्रकार हैं- पहला बड़ा मंगल – 5 मई 2026 दूसरा बड़ा मंगल – 12 मई 2026 तीसरा बड़ा मंगल – 19 मई 2026 चौथा बड़ा मंगल – 26 मई 2026 पांचवां बड़ा मंगल – 2 जून 2026 छठा बड़ा मंगल – 9 जून 2026 सातवां बड़ा मंगल – 16 जून 2026 आठवां बड़ा मंगल – 23 जून 2026 क्यों पड़ रहे हैं 8 बड़ा मंगल इस बार आठ बड़ा मंगल पड़ने की खास वजह अधिकमास है। हिंदू पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 2083 में 12 की बजाय 13 महीने होंगे। हर तीन साल में सौर और चंद्र कैलेंडर के बीच लगभग 33 दिनों के अंतर को संतुलित करने के लिए अधिकमास जोड़ा जाता है। अधिकमास जिस महीने में पड़ता है, वह महीना लगभग दोगुना हो जाता है। साल 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ महीने में ही जुड़ रहा है, जिसकी वजह से यह महीना लंबा हो जाएगा। 60 दिन तक चलेगा ज्येष्ठ मासइस साल ज्येष्ठ मास की शुरुआत 2 मई 2026 से होगी। वहीं अधिकमास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक रहेगा। इस कारण ज्येष्ठ मास लगभग 60 दिन तक, यानी 29 जून 2026 तक चलेगा। लंबे ज्येष्ठ महीने के कारण इस दौरान कुल आठ मंगलवार पड़ेंगे और सभी को बड़ा मंगल के रूप में मनाया जाएगा। इस तरह भक्तों को अन्य वर्षों की तुलना में बजरंगबली की आराधना के अधिक अवसर मिलेंगे और मान्यता के अनुसार दोगुना पुण्य प्राप्त हो सकता है। डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी देना है।
LPG किल्लत के बाद अब दूध सप्लाई पर गहराया संकट, डेयरी सेक्टर के पास सिर्फ 10 दिन का पैकिंग स्टॉक

नई दिल्ली। खाड़ी क्षेत्र में जारी युद्ध का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पाबंदी लगाए जाने से वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। मिडिल ईस्ट, जो दुनिया में तेल और गैस का बड़ा उत्पादक और सप्लायर है, इस समय युद्ध की चपेट में है। तेल और गैस रिफाइनरियों पर हमलों के कारण आयात-निर्यात का संतुलन बिगड़ गया है, जिसका असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। हालात को देखते हुए सरकार को सिलेंडर से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव करना पड़ा है। इसी बीच गैस की कमी का असर अब डेयरी सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। गैस संकट से दूध सप्लाई पर खतराऊर्जा संकट के चलते डेयरी उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। डेयरी संचालकों का कहना है कि एलपीजी की कमी से दूध की प्रोसेसिंग, पाश्चुरीकरण और पैकेजिंग का काम प्रभावित हो रहा है। यदि जल्द ही गैस आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में दूध की सप्लाई भी बाधित हो सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, अगर मौजूदा स्थिति बनी रही तो करीब 10 दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। डेयरी सेक्टर में बढ़ी चिंतादूध को सुरक्षित रखने के लिए पाश्चुरीकरण प्रक्रिया जरूरी होती है, जिसमें बड़ी मात्रा में एलपीजी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा दूध की प्लास्टिक पैकेजिंग और कार्टन तैयार करने में भी गैस का उपयोग होता है। गैस की कमी के कारण कई कंपनियां पैकेजिंग सामग्री तैयार नहीं कर पा रही हैं। महाराष्ट्र का डेयरी सेक्टर इस संकट से सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। गोवर्धन डेयरी के संस्थापक देवेंद्र शाह के मुताबिक, उनके पास पैकेजिंग मटेरियल का स्टॉक केवल 10 दिन का बचा है। यदि जल्द ही गैस संकट खत्म नहीं हुआ तो दूध की पैकेजिंग और सप्लाई दोनों प्रभावित हो सकती हैं। क्यों पैदा हुआ संकटभारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीदता है और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आता है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी आयात से ही पूरा करता है। 28 फरवरी को इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का करीब 20 प्रतिशत और भारत के तेल-गैस आयात का लगभग 50 से 55 प्रतिशत हिस्सा वहन करता है। इस मार्ग के बंद होने से भारत में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है और देश को अपने रिजर्व स्टॉक पर निर्भर रहना पड़ रहा है। फिलहाल भारत सरकार गैस से लदे जहाजों को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कराने के लिए ईरान से बातचीत कर रही है। एलपीजी से लदे दो जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भारत पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य जहाजों को भी इस मार्ग से निकालने की कोशिशें जारी हैं।
हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…

नई दिल्ली: हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। आयुर्वेद में भी हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने का सही तरीका बताया गया है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा पोषण मिल सके। हालांकि आजकल सैंडविच, सलाद और नूडल्स में कच्ची सब्जियों का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई हरी सब्जियां कच्ची खाने से पाचन में समस्या हो सकती है और वात दोष बढ़ा सकती हैं। कैसे खाएं हरी सब्जियां: पालक, शिमला मिर्च और गोभी जैसी हरी सब्जियों को कच्चा खाने से बचें। इनमें परजीवी टेपवर्म होने का खतरा रहता है। सब्जियों को पहले उबालें, फिर अतिरिक्त पानी निचोड़कर घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं। बुजुर्ग और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन कम मात्रा में दें। आयुर्वेद में बुजुर्गों और बच्चों के पाचन को ध्यान में रखते हुए कुछ सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इनमें तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू शामिल हैं। ये हरी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक होती हैं और पचाने में हल्की होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करें, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे के रूप में दिया जा सकता है। सही मात्रा और सही तरीके से हरी सब्जियों का सेवन करने से पाचन बेहतर रहता है, प्रतिरक्षा मजबूत होती है और हृदय स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।
एमपी में 18 मार्च से बदलेगा मौसम, आधे प्रदेश में आंधी-बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में 18 मार्च से मौसम का मिजाज बदलने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय होने जा रहा है। इसके प्रभाव से अगले तीन दिनों तक राज्य के करीब आधे जिलों में आंधी, बारिश और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है। इसका असर भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई बड़े शहरों में भी देखने को मिलेगा। हालांकि, इससे पहले सोमवार को पूरे प्रदेश में गर्मी का असर बना रहा और मंगलवार को भी तेज गर्मी पड़ने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस मध्य प्रदेश के मौसम को भी प्रभावित करेगा। इसके कारण 18, 19 और 20 मार्च के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई है।मौसम विभाग के मुताबिक 17 मार्च की रात से उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय होने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस मध्य प्रदेश के मौसम को भी प्रभावित करेगा। इसके कारण 18, 19 और 20 मार्च के दौरान प्रदेश के कई इलाकों में बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मार्च के इस सीजन में पहली बार इतना मजबूत सिस्टम एक्टिव हो रहा है। इसके असर से 3 से 4 दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं आंधी और बारिश, कहीं गरज-चमक तो कहीं बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। अभी तीन सिस्टम एक्टिव, फिर भी गर्मी का असरमौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवातीय परिसंचरण) और एक ट्रफ लाइन सक्रिय है, लेकिन इनका खास असर देखने को नहीं मिला। यही वजह है कि सोमवार को प्रदेश के अधिकांश इलाकों में गर्मी बनी रही। खरगोन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, रायसेन, सिवनी, मंडला, टीकमगढ़, सागर और खजुराहो में पारा 37 डिग्री या उससे अधिक रहा। प्रदेश के पांच बड़े शहरों में जबलपुर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 35.2 डिग्री, इंदौर में 35 डिग्री, ग्वालियर में 34.1 डिग्री और उज्जैन में 35 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। अप्रैल-मई में बढ़ेगी गर्मी, चल सकती है लूमौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि इस साल अप्रैल और मई में गर्मी अपने चरम पर रह सकती है। इन महीनों में ग्वालियर, चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा सकता है। इसके अलावा भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी तेज गर्मी की चपेट में रहेंगे। मौसम विभाग के मुताबिक इस बार अप्रैल और मई के दौरान हीट वेव यानी लू चलने की भी संभावना है, जो करीब 15 से 20 दिनों तक रह सकती है।
पंचतत्व और हमारी उंगलियां: जानें शरीर में इन्हें सक्रिय करने के आसान तरीके

नई दिल्ली: हमारा शरीर पंचभूतों से बना है -पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश। आयुर्वेद और प्राचीन ज्ञान के अनुसार ये पंचतत्व हमारे शरीर और स्वास्थ्य के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं पंचतत्वों में विलीन हो जाता है, लेकिन जीवन में इनके संतुलन और सक्रियता को बनाए रखना भी जरूरी है। हाथ की पांचों उंगलियां हमारे शरीर के पंचतत्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं। अंगूठा पृथ्वी तत्व, तर्जनी वायु, मध्यमा आकाश, अनामिका अग्नि और कनिष्ठा जल का प्रतीक है। पृथ्वी तत्व अंगूठा:प्रकृति से जुड़ने से पृथ्वी तत्व सक्रिय होता है। हरियाली के बीच समय बिताएं, नंगे पैर घास पर चलें, मिट्टी को हाथ लगाएं और बागवानी करें। वायु तत्व तर्जनी:सांस और प्राणायाम से वायु तत्व संतुलित होता है। रोजाना खुली हवा में अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम करें। आहार में हल्की कड़वी चीजें शामिल करें। आकाश तत्व मध्यमा:आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए ध्यान और मौन की प्रक्रिया अपनाएं। ध्यान मुद्रा में बैठकर ओम का उच्चारण करें। यह मानसिक चेतना बढ़ाता है और मन को शांति प्रदान करता है। अग्नि तत्व अनामिका:अग्नि तत्व पाचन से जुड़ा है। इसे सक्रिय करने के लिए सूर्य नमस्कार, नौकासन और कपालभाति जैसी योग मुद्राएं करें। साथ ही हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें। सही पाचन से कई रोग अपने आप ठीक हो सकते हैं। जल तत्व कनिष्ठा:जल तत्व हमारे शरीर का 50-65 फीसदी हिस्सा बनाता है। इसे सक्रिय करने के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लें, जल मुद्रा का अभ्यास करें और स्विमिंग करें।इस प्रकार पंचतत्वों को सक्रिय और संतुलित रखने से न केवल स्वास्थ्य बेहतर रहता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी बढ़ती है।
पेड़ पर खिलने वाला यह लाल फूल सेहत का खजाना: डायबिटीज से इम्यूनिटी तक देता है कई फायदे

नई दिल्ली । अनार फल तो लगभग हर कोई खाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसके लाल फूल भी सेहत के लिए बेहद लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अनार के फूलों का उपयोग सदियों से कई बीमारियों के उपचार में किया जाता रहा है।पोषक तत्वों से भरपूर अनार का फूल देखने में जितना सुंदर होता है, इसके अंदर मौजूद तत्व उतने ही प्रभावशाली होते हैं। इसमें टैनिन, गैलिक एसिड और ट्राइटरपेनॉइड्स जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।डायबिटीज नियंत्रण में सहायक अनार के फूल मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए लाभकारी माने जाते हैं। कई शोधों के अनुसार इसमें ऐसे गुण होते हैं जो ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करने में मदद कर सकते हैं और शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बेहतर बनाते हैं। आयुर्वेद में अक्सर इसके सूखे फूलों से बने चूर्ण के सेवन की सलाह दी जाती है। घाव और सूजन में फायदेमंद अगर शरीर में चोट या सूजन हो तो अनार का फूल प्राकृतिक मरहम की तरह काम कर सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण त्वचा की कोशिकाओं को जल्दी ठीक करने और सूजन कम करने में मदद करते हैं। पुराने समय में इसके सूखे फूलों का लेप घावों पर लगाया जाता था ताकि संक्रमण न फैले। इम्युनिटी बढ़ाने में मददगार अनार के फूलों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को हानिकारक फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और कई गंभीर बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। उपयोग से पहले रखें सावधानी हालांकि अनार का फूल प्राकृतिक औषधि माना जाता है, लेकिन इसका सेवन करने से पहले किसी विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है। हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए सही मात्रा और सही तरीका जानना जरूरी होता है।