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आईपीओ लॉक-इन खत्म होते ही चार शेयरों में गिरावट, ऐ फाइनेंस 7.4% तक टूटा

नई दिल्ली : हाल ही में शेयर बाजार में सूचीबद्ध हुई चार कंपनियों के शेयर सोमवार को गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। इन कंपनियों के आईपीओ की लॉक-इन अवधि खत्म होने के बाद बड़ी संख्या में शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए, जिसके कारण शेयरों पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। फ्रैक्टल एनालिटिक्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। कंपनी के करीब 0.69 करोड़ शेयर, जो कुल इक्विटी का लगभग 4 प्रतिशत हैं, लॉक-इन से बाहर आकर ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए। इसके चलते कंपनी के शेयर करीब 4.35 प्रतिशत तक गिर गए। दोपहर करीब 1:50 बजे कंपनी के शेयर 3.98 प्रतिशत की गिरावट के साथ 764.35 रुपये पर कारोबार करते नजर आए। यह शेयर अभी भी अपने आईपीओ प्राइस 900 रुपये से लगभग 12 प्रतिशत नीचे चल रहा है। वहीं ऐ फाइनेंस के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के शेयर करीब 7.42 प्रतिशत तक गिर गए, क्योंकि इसकी एक महीने की लॉक-इन अवधि समाप्त हो गई। लॉक-इन खत्म होने के बाद करीब 1.76 करोड़ शेयर, जो कंपनी की लगभग 7 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं, बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए। पिछले पांच कारोबारी दिनों में कंपनी के शेयर 14.64 प्रतिशत गिर चुके हैं, जबकि एक महीने के दौरान निवेशकों को करीब 24.29 प्रतिशत का नकारात्मक रिटर्न मिला है। इसी तरह पार्क मेडी वर्ल्ड के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई। सोमवार को कंपनी के करीब 0.85 करोड़ शेयर, यानी लगभग 2 प्रतिशत इक्विटी लॉक-इन से बाहर आने के बाद इसके शेयर करीब 3.2 प्रतिशत तक गिर गए। वहीं नेफ्रोकेयर हेल्थ सर्विसेज के शेयरों में भी गिरावट देखी गई। कंपनी के करीब 0.28 करोड़ शेयर, जो लगभग 3 प्रतिशत इक्विटी के बराबर हैं, 16 मार्च से ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो गए। इसके बाद कंपनी के शेयर करीब 2.8 प्रतिशत तक नीचे आ गए। इस बीच नुवामा वेल्थ मैनेजमेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार हाल ही में आईपीओ लाने वाली 88 कंपनियों के प्री-लिस्टिंग निवेशकों की लॉक-इन अवधि 11 मार्च से 29 जून 2026 के बीच खत्म होने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि के दौरान करीब 72 अरब डॉलर यानी लगभग 6.6 लाख करोड़ रुपये के शेयर बाजार में ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध हो सकते हैं। इससे आने वाले महीनों में बाजार की धारणा और कई शेयरों की चाल पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

LPG CRISESD: एलपीजी आपूर्ति को लेकर राहत, छापेमारी के बीच सिलेंडर बुकिंग घटी और ऑनलाइन बुकिंग बढ़ी

LPG CRISESD: नई दिल्ली:  देश में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर बनी आशंकाओं के कम होने और सरकार द्वारा जमाखोरी तथा ब्लैक मार्केटिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद गैस सिलेंडर की बुकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। सरकारी सूचना एजेंसी पीआईबी इंडिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि 14 मार्च को एलपीजी सिलेंडर की कुल 77 लाख बुकिंग दर्ज की गई। इससे एक दिन पहले यानी 13 मार्च को यह आंकड़ा 88.8 लाख था। इससे स्पष्ट है कि घबराहट में की जा रही बुकिंग अब कम हो रही है। बयान में यह भी बताया गया कि एलपीजी बुकिंग में ऑनलाइन माध्यम की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। अब कुल बुकिंग का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है, जबकि इससे पहले यह 84 प्रतिशत था। साथ ही किसी भी एलपीजी वितरक के पास गैस खत्म होने की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है। सरकार ने जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए कई राज्यों में छापेमारी अभियान चलाया है। इसके साथ ही 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में स्थिति की निगरानी के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किए गए हैं ताकि गैस आपूर्ति व्यवस्था पर नजर रखी जा सके। सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराकर सिलेंडर की बुकिंग न करें और अधिकतर मामलों में डिजिटल बुकिंग प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। साथ ही एलपीजी वितरकों के पास अनावश्यक रूप से जाने से भी बचने की सलाह दी गई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता दे रही है और एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। खास तौर पर घरों के अलावा अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए गैस आपूर्ति को बनाए रखा जा रहा है। एलपीजी की मांग को पूरा करने के लिए आयात और आपूर्ति व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज शिवालिक और नंदा देवी लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक जहाज सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और दूसरा मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है और उपभोक्ताओं को किसी तरह की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan: 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान, जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की पहल: मुख्यमंत्री मोहन यादव

   Jal Ganga Sanvardhan Abhiyan: भोपाल। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि जल है तो कल है का कोई विकल्प नहीं है और पानी की हर बूंद बचाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है और जल आत्मनिर्भरता से ही प्रदेश को समृद्ध बनाया जा सकता है। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार 19 मार्च से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह 100 दिवसीय अभियान भारतीय नववर्ष प्रतिपदा गुढ़ी पड़वा के अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन में Shipra River के तट से राज्य स्तरीय रूप में शुरू होगा। यह अभियान 30 जून तक चलेगा जिसमें पूरे प्रदेश में जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े व्यापक कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण को सामाजिक आंदोलन बनाना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिए गांव-गांव में लोगों को वर्षा जल संरक्षण भूजल पुनर्भरण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायतों स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न सरकारी विभागों की साझेदारी से यह अभियान जल संवर्धन की नई मिसाल बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में तालाब कुएं और बावड़ियों की परंपरा सदियों पुरानी है। सरकार इस परंपरा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के साथ फिर से मजबूत करने का प्रयास कर रही है। अभियान के तहत नई जल संरचनाओं का निर्माण करने के साथ-साथ पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे श्रमदान कर गांवों में तालाबों और कुओं की सफाई करें घरों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था बनाएं और जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे तो मध्यप्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू किए गए जल गंगा संवर्धन अभियान के पहले चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया था। इनमें तालाब कुएं बावड़ियां नहरें और सूखी नदियों के पुनर्जीवन जैसे कार्य शामिल थे जिससे कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार हुआ और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी मिला। वहीं वर्ष 2025 में अभियान के दूसरे चरण में भी बड़े पैमाने पर कार्य हुए। इस दौरान 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण पूरा किया जा चुका है जबकि 64 हजार 395 जल संरचनाओं पर काम अभी जारी है। इनमें खेत तालाब चेक डैम स्टॉप डैम और अन्य जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उज्जैन में 27 साल की काली नंद गिरी बनी देश की सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर: श्मशान और कार में करतीं तंत्र साधना, सोशल मीडिया पर लाखों फॉलोअर्स

नई दिल्ली। उज्जैन में अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक के दौरान चार नए महामंडलेश्वरों का पट्टाभिषेक हुआ। इनमें सबसे चर्चा में रही 27 साल की काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता, जिन्हें देश की सबसे कम उम्र की महामंडलेश्वर बनने का गौरव प्राप्त हुआ। वे किन्नर अखाड़े की पहली अघोरी महामंडलेश्वर मानी जा रही हैं। काली नंद गिरी का जीवन बेहद अद्भुत और साधना से जुड़ा है। उन्होंने बचपन में ही माता-पिता को छोड़कर संन्यास का रास्ता अपनाया। 6 साल की उम्र में तंत्र साधना सीखना शुरू किया और 12 साल की उम्र में काशी चली गईं। बाद में असम के कामाख्या धाम में अपने गुरु से तंत्र साधना का प्रशिक्षण प्राप्त किया। अंतरराष्ट्रीय किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के आशीर्वाद से उन्होंने अखाड़े से जुड़कर आध्यात्मिक साधना जारी रखी। महामंडलेश्वर बनने के बाद भी उनका जीवन बेहद अनोखा है। पिछले 18 सालों से वे देश-विदेश में भ्रमण करती आई हैं, उनका स्थायी आश्रम नहीं है और उनका निवास मुख्य रूप से श्मशान और अपनी कार में होता है। कार में मां काली का बड़ा चित्र, त्रिशूल और लगभग 70 सिद्ध नरमुंड रखे जाने का दावा किया जाता है। काली नंद गिरी 18 भाषाओं की जानकार हैं, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, उड़िया, पंजाबी, असमिया और मराठी शामिल हैं। देश-विदेश की यात्राओं के दौरान उन्होंने ये भाषाएँ सीखी। महामंडलेश्वर बनने के बाद उनका सोशल मीडिया पर भी खासी लोकप्रियता है। उनके दो अकाउंट हैं, जिनमें कुल 60 लाख फॉलोअर्स हैं। वे नियमित रूप से तंत्र साधना से जुड़े वीडियो और अन्य आध्यात्मिक सामग्री साझा करती हैं, जिनके लाखों व्यूज मिलते हैं। इस अनोखे जीवन और साधना के कारण काली नंद गिरी दिगंबर अघोरी माता ने न सिर्फ धार्मिक जगत में, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लाखों लोगों का ध्यान खींचा है। उनका कहना है कि महामंडलेश्वर बनने के बाद अब वे उज्जैन में अपना स्थायी आश्रम बनाएंगी, ताकि साधना और सेवा कार्य को और विस्तार दे सकें।

जनवरी के मुकाबले फरवरी में थोक महंगाई बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और खाद्य कीमतों का असर

नई दिल्ली: भारत में थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई पर आधारित महंगाई दर फरवरी महीने में बढ़कर 2.13 प्रतिशत हो गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य और गैर-खाद्य उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह वृद्धि दर्ज की गई है। इससे पहले जनवरी में थोक महंगाई दर 1.81 प्रतिशत थी जबकि पिछले साल फरवरी में यह 2.45 प्रतिशत दर्ज की गई थी। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के बयान के अनुसार फरवरी 2026 में महंगाई दर सकारात्मक रहने की मुख्य वजह मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, बेसिक मेटल, खाद्य उत्पाद, गैर-खाद्य उत्पाद और टेक्सटाइल की कीमतों में वृद्धि रही। आंकड़ों के अनुसार फरवरी में खाद्य उत्पादों की थोक महंगाई दर 2.19 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 1.55 प्रतिशत थी। हालांकि सब्जियों की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली है। सब्जियों में थोक महंगाई दर जनवरी के 6.78 प्रतिशत से घटकर फरवरी में 4.73 प्रतिशत पर आ गई। इसके बावजूद दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली जैसी वस्तुओं की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में वृद्धि दर्ज की गई है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई का दबाव बढ़ा है। फरवरी में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की थोक महंगाई दर जनवरी के 2.86 प्रतिशत से बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई। वहीं गैर-खाद्य पदार्थों की श्रेणी में महंगाई दर जनवरी के 7.58 प्रतिशत से बढ़कर फरवरी में 8.80 प्रतिशत हो गई। हालांकि ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में महंगाई दर अभी भी नकारात्मक बनी हुई है। फरवरी में फ्यूल और पावर बास्केट की थोक महंगाई दर -3.78 प्रतिशत रही, जबकि जनवरी में यह -4.01 प्रतिशत थी। इससे पहले सरकार ने खुदरा महंगाई दर के भी आंकड़े जारी किए थे। फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.21 प्रतिशत दर्ज की गई, जो जनवरी के 2.74 प्रतिशत से 0.47 प्रतिशत अधिक है।ग्रामीण इलाकों में फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही जबकि जनवरी में यह 2.73 प्रतिशत थी। वहीं शहरी क्षेत्रों में खुदरा महंगाई दर फरवरी में 3.02 प्रतिशत रही, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी। खाद्य महंगाई की बात करें तो फरवरी में यह 3.47 प्रतिशत रही। ग्रामीण इलाकों में खाद्य महंगाई दर 3.46 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य और मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण आने वाले महीनों में महंगाई पर नजर बनाए रखना जरूरी होगा।

नवरात्रि 2026: बिना गैस के बनाए ये 5 हेल्दी फलाहारी डिश, एनर्जी बनी रहेगी पूरे व्रत में

नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि 2026 की तैयारियां अब से शुरू हो गई हैं। नवरात्रि के नौ दिन व्रत रखने वाले लोगों के लिए हेल्दी और हल्का भोजन जरूरी होता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहे। एलपीजी गैस की महंगाई और संकट को देखते हुए बिना गैस के बनने वाली फलाहारी डिशेज इस बार खास मददगार साबित होंगी। बिना गैस के 5 फालाहारी डिश: फ्रूट योगर्ट बाउल सामग्री: दही, केला, सेब, पपीता या अनार, शहद, ड्राई फ्रूट्स (बादाम, काजू) विधि: दही में कटे फल, शहद और ड्राई फ्रूट्स डालकर मिक्स करें। प्रोटीन, फाइबर और एनर्जी से भरपूर। मखाना ड्राई फ्रूट मिक्ससामग्री: भुना मखाना, बादाम, काजू, किशमिश, सेंधा नमक विधि: सभी चीजों को एक डिब्बे में मिलाकर रखें। भूख लगे तो खाएं, लंबे समय तक ऊर्जा देती है। केला-पीनट एनर्जी बाउल सामग्री: 1–2 केले, मूंगफली या पीनट बटर, शहद, चिया सीड्स विधि: केले काटकर पीनट बटर, शहद और चिया सीड्स डालें। तुरंत एनर्जी देने वाला फलाहार। कच्चा फलाहारी सलाद सामग्री: खीरा, टमाटर, उबला आलू, मूंगफली, सेंधा नमक, नींबू विधि: सबको काटकर बाउल में मिलाएं, ऊपर से नींबू और नमक डालें। हल्का और ताजगी भरा। मिल्क ड्राई फ्रूट शेक सामग्री: ठंडा दूध, खजूर या किशमिश, बादाम, केला विधि: मिक्सर में सबको ब्लेंड करें। दिनभर की थकान दूर करने में मदद करता है। ये रेसिपी जल्दी बनती हैं, हेल्दी हैं और पूरे व्रत में शरीर में ऊर्जा बनाए रखती हैं।

भोपाल में कृषि वर्ष पर मंत्रियों-विधायकों का महामंथन:खेती को 'फायदे का धंधा' बनाने पर जोर

भोपाल । भोपाल में सोमवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में कृषि वर्ष 2026 को लेकर बड़ा वैचारिक मंथन आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में भाजपा के मध्य प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह, डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला, मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, एदल सिंह कंसाना, करन सिंह वर्मा, विश्वास सारंग सहित कई मंत्री और विधायक मंच पर उपस्थित थे। खेती को लाभ का धंधा बनाने पर चर्चाकार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारकर किसानों की आय बढ़ाना। दिनभर चलने वाले इस मंथन में विभागों के अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के सामने विभागवार प्रेजेंटेशन दे रहे हैं। कृषि विभाग: उन्नत बीज, खाद और नई तकनीकों पर आधारित योजनाएं।उद्यानिकी एवं मत्स्य पालन: नकदी फसलों और मछली पालन से आय दोगुनी करने के रोडमैप। सहकारिता एवं पशुपालन: डेयरी और सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा। कार्यक्रम की रूपरेखासवालों का निराकरण: विधायक अपने क्षेत्रों की समस्याएं और सुझाव अधिकारियों के सामने रखेंगे। मंत्रीगणों का संबोधन: विभागों की प्राथमिकताएं साझा। मुख्यमंत्री का मुख्य संबोधन: किसानों के हित में सरकार के विजन और आगामी रणनीतियों पर प्रकाश। किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के इस कार्यक्रम का उद्देश्य हर जिले के जनप्रतिनिधि को किसानों से जोड़ना और कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाना है।

खरमास 2026: आज से शुरू, एक माह तक रहेंगे इन बातों का ध्यान

नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य देव किसी राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो इसे संक्रांति कहा जाता है। विशेष रूप से जब सूर्य देव धनु या मीन राशि में प्रवेश करते हैं, तब खरमास या मलमास लगता है। हिंदू धर्म में इस समय को सामान्यतः शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता, लेकिन पूजा पाठ, दान और जप तप के लिए इसे विशेष लाभकारी माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष खरमास 15 मार्च 2026 से शुरू हो चुका है और सूर्य के 13 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करने पर यह समाप्त होगा। इस दिन को मेष संक्रांति कहा जाएगा। इसके बाद फिर से मांगलिक कार्य शुरू किए जा सकते हैं और 20 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त उपलब्ध होंगे। त्रिग्रही योग का प्रभाव मीन राशि में पहले से विराजमान शुक्र और शनि के साथ सूर्य के प्रवेश से त्रिग्रही योग बनता है। इसका सकारात्मक प्रभाव मिथुन, तुला, वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों पर आर्थिक लाभ, मान सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि के रूप में देखा जा सकता है।मांगलिक कार्य वर्जित खरमास के दौरान ग्रहों की शुभ दृष्टि का प्रभाव कम होने के कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, उपनयन और अन्य मांगलिक कार्य टालने की परंपरा है। साथ ही नए व्यापार की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है। खरमास में क्या ना करें भगवान, गुरु, माता पिता, गाय और स्त्री की निंदा न करें। जरूरतमंद को खाली हाथ लौटाना अशुभ माना गया है। नए वाहन या घर खरीदने से परहेज करें। विवाद और झगड़ों से दूर रहें। खरमास में क्या करें दान पुण्य, पूजा और धार्मिक कार्य करें।  रामायण, गीता और सत्यनारायण कथा का पाठ लाभकारी है।सूर्य देव, भगवान शिव और विष्णु की पूजा से घर परिवार में सुख शांति और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।

पहले पहाड़ खत्म कराए, अब पानी बचाने की मुहिम:खंडवा की देशगांव घाटी पर 8 हजार कंटूर ट्रेंच खुदेंगे

खंडवा । खंडवा-इंदौर नेशनल हाईवे पर स्थित देशगांव घाटी अब जल संरक्षण की मुहिम का केंद्र बन गई है। छैगांवमाखन जनपद पंचायत ने सैकड़ों एकड़ जमीन पर करीब 8 हजार कंटूर ट्रेंच खोदने की योजना बनाई है। सोमवार को कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने पंडित से विधिवत भूमिपूजन कराया और खुद श्रमदान कर गेंती चलाकर कंटूर ट्रेंच कार्य का शुभारंभ किया। खंडवा जिले में ‘गांव का पानी गांव में’ अभियान के तहत ग्राम देशगांव में प्रशासन, ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में कंटूर ट्रेंच खुदाई का काम शुरू किया गया। इस दौरान कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने ग्रामीणों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को जल संग्रहण की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा, जनपद अध्यक्ष महेंद्र सावनेर, जिला पंचायत सदस्य श्रीराम चौधरी, नानकराम बरवाहे और अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे। हाईवे पर कारोबारियों ने खत्म कर दी घाटीदेशगांव घाटी को पहले ही 150 फीट तक खोदकर नेशनल हाईवे का फोरलेन बनाया जा चुका है। एनएचएआई ने पहाड़ी को समतल किया, वहीं कुछ शहर के कारोबारी ने पहाड़ी जमीन खरीदकर उसे पूरी तरह खत्म कर दिया और पेट्रोल पंप खोल दिए। इस प्रक्रिया में खनिज विभाग और शासन को एक रूपए की रॉयल्टी भी नहीं दी गई। अब इसी घाटी में जल संरक्षण के लिए कंटूर ट्रेंच खुदाई की जा रही है ताकि भूजल स्तर में सुधार हो और गांवों के पानी की समस्या दूर की जा सके।

MP के युवक गुरकीरत सिंह की कनाडा में हत्या, परिवार ने इंसाफ और आर्थिक मदद की लगाई गुहार

उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन निवासी गुरकीरत सिंह मनोचा का 14 मार्च 2026 को कनाडा के फोर्ट सेंट जॉन ब्रिटिश कोलंबिया में दुखद निधन हो गया। बताया जा रहा है कि उनकी हत्या हुई है। गुरकीरत लगभग सवा वर्ष पूर्व उच्च शिक्षा के लिए कनाडा गए थे जहां वे नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट पोस्ट डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम कर रहे थे। परिवार के अनुसार 14 मार्च को कॉलेज में कुछ युवकों के बीच विवाद के दौरान गुरकीरत पर हमला किया गया जिससे उनकी मौत हो गई। कनाडा में उनके मित्र ने देर रात इस घटना की जानकारी उनके भाई प्रबकीरत सिंह मनोचा को फोन पर दी। गुरकीरत का परिवार उज्जैन में C 86 पार्श्वनाथ सिटी देवास रोड में रहता है। घटना की सूचना मिलते ही परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों ने मुख्यमंत्रीमोहन यादव  को भी जानकारी दी। कनाडा पुलिस द्वारा मामले की जांच जारी है। शव की वापसी में लगभग 40 50 लाख रुपये का खर्च अनुमानित है जिसके लिए परिवार ने आर्थिक मदद की भी गुहार लगाई है। परिजन चाहते हैं कि शव जल्द मिले या उन्हें वहां पहुंचने का कोई माध्यम उपलब्ध कराया जाए। परिवार के अनुसार हत्या का कारण कॉलेज में चुनावी गुटबाजी थी। मृतक सरल सौम्य और शांत स्वभाव का था। उनके भाई प्रबकीरत ने कहा कि गुरकीरत ने जीवन में कभी विवाद या अपशब्द का प्रयोग नहीं किया। उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया भी लगातार परिजनों से संपर्क में हैं और शव की वापसी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रयासरत हैं। परिवार ने प्रदेश और केंद्र सरकार से अपील की है कि जल्द से जल्द शव की वापसी कराई जाए और दोषियों को कड़ी सजा मिले।