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EPFO Update: मार्च खत्म हुए दो महीने बीते, पीएफ खाते में कब आएगा 8.25% ब्याज? जानिए ताजा अपडेट

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के करोड़ों खाताधारकों को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए घोषित ब्याज राशि का इंतजार है। मार्च में ब्याज दर तय किए जाने के बावजूद जून की शुरुआत तक खातों में ब्याज जमा नहीं होने से कई कर्मचारियों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पीएफ खाते में ब्याज कब आएगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें चिंता की कोई बात नहीं है, क्योंकि ब्याज दर घोषित होने और उसे खातों में जमा किए जाने के बीच कई प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। ईपीएफओ ने मार्च 2026 की शुरुआत में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कर्मचारी भविष्य निधि पर 8.25 प्रतिशत ब्याज दर बनाए रखने का फैसला किया था। यह निर्णय केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक के बाद लिया गया था। इसके बाद श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जानकारी भी साझा की गई थी। हालांकि ब्याज दर की घोषणा के बाद इसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार की औपचारिक अधिसूचना जारी होना आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ईपीएफओ अपने करोड़ों सदस्यों के खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। देशभर में लगभग सात करोड़ से अधिक पीएफ खाताधारक हैं, जिनकी नजर हर साल अपने खाते में जमा होने वाले ब्याज पर रहती है। वित्त वर्ष समाप्त होने के दो महीने बाद भी ब्याज राशि जमा नहीं होने से कर्मचारियों के बीच चर्चा बढ़ गई है। कई लोग यह जानना चाहते हैं कि जब ब्याज दर मार्च में ही तय हो चुकी है तो राशि अब तक खातों में क्यों नहीं पहुंची। विशेषज्ञों के अनुसार ब्याज क्रेडिट करने से पहले सरकार की मंजूरी, तकनीकी अपडेट और खातों का सत्यापन जैसी कई प्रक्रियाएं पूरी करनी होती हैं, जिनमें कुछ समय लगना सामान्य बात है। वित्तीय मामलों के जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के अनुभव को देखें तो ईपीएफओ आमतौर पर जून या जुलाई के दौरान खातों में ब्याज की राशि जमा करता है। पहले यह प्रक्रिया सितंबर या अक्टूबर तक चलती थी, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इस वर्ष भी सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद जून या जुलाई के दौरान करोड़ों खाताधारकों के खातों में ब्याज की राशि दिखाई देने लगेगी। हालांकि अंतिम समयसीमा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ईपीएफओ सदस्य अपने खाते में ब्याज जमा हुआ है या नहीं, इसकी जानकारी घर बैठे मोबाइल फोन के जरिए भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए उमंग ऐप एक आसान विकल्प माना जाता है। उपयोगकर्ता सबसे पहले अपने मोबाइल फोन में उमंग ऐप डाउनलोड कर सकते हैं और मोबाइल नंबर के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद ईपीएफओ सेवाओं के विकल्प में जाकर ‘व्यू पासबुक’ पर क्लिक करना होगा। ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सदस्य अपने खाते का बैलेंस और ब्याज से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके अलावा ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी पीएफ खाते का विवरण देखा जा सकता है। सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करने के बाद ‘मेंबर पासबुक’ विकल्प पर क्लिक करके अपने खाते में जमा राशि, मासिक योगदान और ब्याज संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यदि ब्याज की राशि खाते में जमा कर दी गई होगी तो वह पासबुक में दिखाई देने लगेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएफ खाताधारकों को फिलहाल घबराने की आवश्यकता नहीं है। ब्याज राशि में किसी प्रकार की कटौती या देरी की कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। सरकार की अधिसूचना जारी होने के बाद ईपीएफओ निर्धारित प्रक्रिया के तहत सभी पात्र खातों में ब्याज जमा करेगा। ऐसे में कर्मचारियों को समय-समय पर अपनी पासबुक जांचते रहना चाहिए और किसी भी अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोतों पर नजर बनाए रखनी चाहिए।

सागर में रेलवे ट्रैक पर मिला महिला का क्षत-विक्षत शव, ट्रेन की चपेट में आने की आशंका

मध्यप्रदेश । सागर जिले में मंगलवार को उस समय सनसनी फैल गई जब सागर-बीना रेलवे ट्रैक पर 25 नंबर फाटक के पास एक महिला का शव दो टुकड़ों में पड़ा मिला। घटना की जानकारी सबसे पहले गैंगमैन को हुई, जिसके बाद तुरंत जीआरपी को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही जीआरपी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच के दौरान पाया गया कि महिला का शव ट्रेन की चपेट में आने से गंभीर रूप से क्षत-विक्षत हो गया था और उसका सिर धड़ से अलग हो गया था। शव को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि मौत ट्रेन हादसे में हुई है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है। घटनास्थल पर किसी भी प्रकार का पहचान दस्तावेज या मोबाइल फोन नहीं मिला, जिससे मृतका की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। जीआरपी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्टों से मिलान कर महिला की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। जीआरपी थाना प्रभारी एचएल चौधरी के अनुसार, प्राथमिक जांच में मामला ट्रेन से दुर्घटनावश मौत का प्रतीत हो रहा है, लेकिन वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस ने कहा है कि सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच जारी है।

शूटिंग के दौरान गई जान: केरल की खदान में डूबे दिल्ली के मॉडल दिव्यांशु जोशी, दोस्तों के सामने हुआ हादसा

नई दिल्ली। दिल्ली के युवा मॉडल दिव्यांशु जोशी की केरल में एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। जानकारी के अनुसार वह एक विज्ञापन शूट के सिलसिले में केरल गए हुए थे, जहां एक बंद पड़ी खदान में फोटो और वीडियो शूटिंग के दौरान पानी में डूबने से उनकी जान चली गई। इस घटना के बाद मॉडलिंग और फैशन जगत में शोक की लहर फैल गई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की और मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के समय दिव्यांशु के साथ उनकी शूटिंग टीम और एक करीबी दोस्त भी मौजूद थे। प्राप्त जानकारी के अनुसार दिव्यांशु जोशी एक कपड़ों के ब्रांड के कमर्शियल शूट के लिए कोच्चि पहुंचे थे। शूटिंग का एक हिस्सा एर्नाकुलम जिले के शांत पेट्टमाला क्षेत्र में स्थित एक पुरानी और बंद पड़ी खदान के आसपास होना था। बताया जा रहा है कि शूटिंग पूरी करने के बाद टीम वहां लोकेशन का निरीक्षण कर रही थी। इसी दौरान दिव्यांशु पानी से भरी खदान के भीतर उतरे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले वह सुरक्षित बाहर आ गए थे, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा पानी में उतर गए। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में चले गए। हादसे के वक्त उनका एक दोस्त वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहा था। जब दिव्यांशु पानी में डूबने लगे तो उसने तुरंत आसपास मौजूद लोगों को मदद के लिए आवाज लगाई। स्थानीय लोगों ने बिना देर किए प्रशासन और बचाव दल को सूचना दी। घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन एवं बचाव विभाग की टीम मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। काफी प्रयासों के बाद बचावकर्मियों ने लगभग 30 फीट की गहराई से दिव्यांशु को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल पेरुम्बावूर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिस खदान में यह हादसा हुआ, वह करीब दो दशक से अधिक समय से बंद पड़ी हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक यह इलाका पहले भी कई हादसों के कारण संवेदनशील और खतरनाक माना जाता रहा है। खदान के कुछ हिस्सों में पानी की गहराई लगभग 100 फीट तक बताई जाती है। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्षों पहले यहां दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा गेट लगाया गया था, लेकिन इसके बावजूद लोग समय-समय पर वहां पहुंच जाते हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि शूटिंग के लिए संबंधित स्थान पर किसी प्रकार की औपचारिक अनुमति लिए जाने की जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। जांच के दौरान सामने आया है कि दिव्यांशु और उनकी टीम विज्ञापन शूट से जुड़े कार्य के सिलसिले में उस स्थान पर पहुंचे थे। प्राथमिकी में दर्ज विवरण के अनुसार टीम ने पहले लोकेशन का निरीक्षण किया और इसके बाद कुछ दृश्य रिकॉर्ड करने की तैयारी की जा रही थी। बताया गया कि टीम के सदस्यों ने यह भी सुनिश्चित किया था कि दिव्यांशु को तैरना आता है। हालांकि पानी की वास्तविक गहराई और वहां मौजूद जोखिम का सही आकलन नहीं हो सका, जिसके कारण यह दुखद घटना घट गई। पुलिस ने मृतक के साथ मौजूद लोगों के बयान दर्ज कर लिए हैं और घटनास्थल से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि हादसा केवल दुर्घटना था या सुरक्षा मानकों की अनदेखी भी इसमें शामिल रही। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस दुखद हादसे ने एक बार फिर खतरनाक और असुरक्षित स्थानों पर होने वाली शूटिंग को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक सावधानियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

90% से कम ई-अटेंडेंस तो नहीं होगा तबादला: नई नीति के तहत वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश

मध्यप्रदेश । नई तबादला नीति के तहत शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि केवल उन्हीं शिक्षकों को ट्रांसफर का लाभ मिलेगा, जिनकी ऑनलाइन ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत या उससे अधिक होगी। विभाग ने इस बार पात्रता तय करने के लिए अप्रैल 2026 तक के ई-अटेंडेंस आंकड़ों को आधार बनाया है। मई और जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश होने के कारण इन महीनों की उपस्थिति को शामिल नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य उपस्थिति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। नई व्यवस्था के तहत यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों की संविलियन सेवा अवधि तीन वर्ष पूर्ण नहीं हुई है, उन्हें भी स्थानांतरण प्रक्रिया से बाहर रखा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल पात्र और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले शिक्षक ही ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकें। शिवपुरी जिला शिक्षा अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि 90 प्रतिशत से कम ई-अटेंडेंस वाले शिक्षकों की सूची तैयार कर पोर्टल पर अपडेट की जा रही है। विभाग द्वारा सभी आंकड़ों का मिलान किया जा रहा है ताकि किसी प्रकार की त्रुटि न रहे। अधिकारियों का कहना है कि नई नीति का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन और उपस्थिति को मजबूत करना है। इससे स्कूलों में शिक्षण कार्य की निरंतरता बनी रहेगी और अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।

अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त आज से जारी, लाखों महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचेंगे 3 हजार रुपये

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद चुनावी वादों को पूरा करने की दिशा में तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना की पहली किस्त बुधवार से जारी की जा रही है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि योजना के तहत पात्र महिलाओं के आधार से जुड़े बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 3,000 रुपये की राशि भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सरकार का दावा है कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उनके जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। सरकारी अधिकारियों के अनुसार अन्नपूर्णा योजना का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है, जिन्हें घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की आवश्यकता होती है। सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं की वित्तीय भागीदारी बढ़ेगी और वे अपने परिवार के आर्थिक निर्णयों में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकेंगी। योजना के तहत राशि सीधे बैंक खातों में भेजे जाने से पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता या बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। संबंधित विभागों को लाभार्थियों के दस्तावेजों की जांच, सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि लाभार्थियों के खातों में राशि समय पर और बिना किसी बाधा के पहुंच सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी, जिससे योजना का लाभ सीधे पात्र महिलाओं तक पहुंचेगा। अन्नपूर्णा योजना के लिए पात्रता के स्पष्ट मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इस योजना का लाभ 25 से 60 वर्ष आयु वर्ग की उन महिलाओं को मिलेगा जो आयकर दाता नहीं हैं। इसके अलावा स्थायी सरकारी नौकरी करने वाली महिलाएं, केंद्र या राज्य सरकार से नियमित वेतन प्राप्त करने वाली महिलाएं तथा पेंशनधारक महिलाएं इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होंगी। सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं तक सहायता पहुंचाना है, ताकि सीमित आय वाले परिवारों को कुछ राहत मिल सके। योजना के क्रियान्वयन को आसान बनाने के लिए पहले से संचालित लक्ष्मी भंडार योजना के लाभार्थियों को स्वतः अन्नपूर्णा योजना में शामिल करने का निर्णय लिया गया है। इससे लाखों महिलाओं को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वे सीधे नई योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगी। वहीं जिन महिलाओं का नाम पहले की किसी योजना में शामिल नहीं है, उनके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। आवेदन जमा होने के बाद अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों की जांच और पात्रता सत्यापन किया जाएगा, जिसके बाद लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को सीधे आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजनाएं परिवारों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसी योजनाओं से महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता बढ़ती है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी प्रोत्साहन मिलता है। नियमित नकद सहायता से घरेलू खर्चों को संतुलित करने में मदद मिलती है और महिलाओं के आत्मविश्वास में भी वृद्धि होती है। उल्लेखनीय है कि देश में पहले से अन्नपूर्णा नाम की एक योजना वरिष्ठ नागरिकों को खाद्यान्न सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित होती रही है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भी इसी नाम से अलग-अलग कल्याणकारी योजनाएं लागू हैं। पश्चिम बंगाल की अन्नपूर्णा योजना का स्वरूप अलग है और इसका मुख्य लक्ष्य महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से लाखों महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा का नया आधार मिलेगा और उनके परिवारों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसमें और सुधार भी किए जा सकते हैं।

पिपरसमा मंडी के बाहर सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से जाम, प्याज की भारी आवक से 3 घंटे ठप रहा रास्ता

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले की पिपरसमा अनाज मंडी के बाहर बुधवार को प्याज की भारी आवक के चलते सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें लग गईं। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि मुख्य मार्ग पर करीब तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस कारण किसान, राहगीर और अन्य वाहन चालक घंटों तक फंसे रहे। जानकारी के अनुसार, मंडी में प्याज की आवक सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। बड़ी संख्या में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन पर्याप्त व्यवस्थाओं की कमी के कारण ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को सड़क पर ही खड़ा करना पड़ा। इससे मंडी के बाहर मुख्य मार्ग पर यातायात पूरी तरह रुक गया और स्थिति धीरे-धीरे गंभीर जाम में बदल गई। जाम के कारण मंडी में होने वाली प्याज की नीलामी (डाक) भी प्रभावित हुई। कई किसानों ने मंडी प्रशासन की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई और कहा कि हर साल आवक बढ़ने पर इसी तरह की स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया जाता। करीब तीन घंटे तक चले इस जाम में सैकड़ों वाहन फंसे रहे और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। गर्मी और भीड़भाड़ के बीच लोग लंबे समय तक सड़क पर ही फंसे रहे। मंडी सचिव बालेश शुक्ला ने बताया कि प्याज की आवक असामान्य रूप से अधिक होने के कारण यह स्थिति बनी। कुछ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के सड़क पर खड़े होने से जाम बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मंडी का दूसरा गेट खोलकर वाहनों को अंदर प्रवेश दिलाया गया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात सामान्य हो सका। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए अतिरिक्त व्यवस्था पर विचार किया जाएगा।

जन्मदिन पार्टी में खाने के ऑर्डर को लेकर मारपीट: शिवपुरी के होटल में दो गुट भिड़े, मैनेजर घायल

मध्यप्रदेश । शिवपुरी शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित होटल ग्रीन व्यू में उस समय अफरा-तफरी मच गई जब जन्मदिन की पार्टी के दौरान खाने के ऑर्डर को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना में दोनों गुटों के कई लोग घायल हुए, जबकि बीच-बचाव करने आए होटल मैनेजर को भी चोटें आईं। जानकारी के अनुसार, शक्तिपुरम खुड़ा निवासी फैजल खान अपने साथियों के साथ ट्रैक्टर एजेंसी संचालक सतीश धाकड़ का जन्मदिन मनाने होटल पहुंचे थे। इसी दौरान होटल संचालक अनुज अग्रवाल के बेटे कार्तिक अग्रवाल भी अपने दोस्तों के साथ अलग जन्मदिन पार्टी मना रहे थे। दोनों समूहों की मौजूदगी के बीच खाने के ऑर्डर को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो जल्द ही तीखी बहस और फिर हिंसक झड़प में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच लात-घूंसे चले और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। झगड़े के दौरान होटल स्टाफ ने स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन होटल मैनेजर जाहिद खान भी इस मारपीट की चपेट में आ गए और उन्हें चोट लगी। घटना के दौरान होटल परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इसी बीच चर्चा यह भी रही कि एक बैग में करीब 2 लाख 20 हजार रुपए नकद रखे थे, हालांकि बाद में यह राशि सुरक्षित रूप से उसके मालिक सतीश धाकड़ को लौटा दी गई। सूचना मिलने पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बात रखी। पुलिस की मौजूदगी में हुई बातचीत के बाद दोनों गुटों ने आपसी सहमति से विवाद समाप्त कर लिया और किसी भी पक्ष ने लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई। होटल संचालक ने भी नुकसान को लेकर कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी। फिलहाल पुलिस ने मामले को राजीनामे के आधार पर निपटा दिया है, लेकिन घटना ने होटल में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

पटना में खान सर कोचिंग सेंटर पर हमला: फायरिंग और तोड़फोड़ के बाद 3 आरोपी गिरफ्तार, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

नई दिल्ली। बिहार की राजधानी पटना में स्थित चर्चित शिक्षक खान सर के कोचिंग संस्थान पर हुए हमले और कथित फायरिंग की घटना ने पूरे राज्य में चर्चा का विषय बना दिया है। इस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक कोचिंग संस्थान का संचालक भी शामिल बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच कई स्तरों पर की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन का दावा है कि मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जानकारी के अनुसार, यह घटना मंगलवार रात पटना के मुसल्लहपुर हाट इलाके में हुई, जहां खान सर का कोचिंग संस्थान स्थित है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, देर शाम कुछ लोग समूह बनाकर कोचिंग परिसर के बाहर पहुंचे और वहां हंगामा शुरू कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने संस्थान के बाहर और अंदर तोड़फोड़ की, पोस्टर और प्रचार सामग्री को नुकसान पहुंचाया तथा कार्यालय परिसर में भी अव्यवस्था फैलाने की कोशिश की। घटना के दौरान ईंट-पत्थर चलने की भी सूचना सामने आई है। इस हमले में संस्थान में तैनात एक सुरक्षा गार्ड घायल हो गया, जिसे तत्काल उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित करने का प्रयास किया। क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई। पुलिस ने आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है और कोचिंग संस्थान के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की अवांछित गतिविधि को रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। घटना के बाद इलाके में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा और बड़ी संख्या में छात्र तथा स्थानीय लोग वहां एकत्रित हो गए। इस मामले में खान सर ने कुछ प्रतिस्पर्धी कोचिंग संस्थानों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कम फीस और बेहतर शैक्षणिक परिणामों के कारण उनका संस्थान छात्रों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है, जिससे कुछ लोग असहज महसूस कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें पहले भी कई बार धमकियां मिल चुकी थीं और हाल के दिनों में संस्थान को नुकसान पहुंचाने की चेतावनी भी दी गई थी। हालांकि पुलिस ने अभी तक इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है। अधिकारियों का कहना है कि सभी दावों और आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। पुलिस की प्रारंभिक जांच में पोस्टर और प्रचार सामग्री को लेकर विवाद की बात सामने आई है। अधिकारियों ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली है और उसकी गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि घटना पूर्व नियोजित थी या किसी विवाद के बाद अचानक हुई। कथित फायरिंग की बात को लेकर भी जांच जारी है और पुलिस वैज्ञानिक साक्ष्यों तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर तथ्य जुटा रही है। फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी। घटना के बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच चिंता का माहौल देखने को मिला। कई छात्रों ने शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं और प्रशासन से सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं संस्थान प्रबंधन ने स्थिति सामान्य होने तक कुछ दिनों के लिए कक्षाएं स्थगित रखने का निर्णय लिया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और दोषियों को जल्द से जल्द न्याय के दायरे में लाया जाएगा। पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पटना का यह मामला शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों दोनों में चर्चा का विषय बना हुआ है। Google Search Image Keywords: खान सर कोचिंग पटना, मुसल्लहपुर हाट घटना, खान सर संस्थान हमला, पटना कोचिंग सेंटर विवाद, कोचिंग सेंटर सुरक्षा

शिवपुरी में साइबर सेल की बड़ी सफलता, 30 लाख के 120 गुम और चोरी मोबाइल बरामद

मध्यप्रदेश । शिवपुरी पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए गुम और चोरी हुए 120 मोबाइल फोन बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 30 लाख रुपए आंकी गई है। बुधवार को पुलिस कंट्रोल रूम में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले और साइबर सेल प्रभारी धर्मेंद्र सिंह जाट ने इन मोबाइलों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा। पुलिस के अनुसार, साइबर सेल टीम को प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगातार तकनीकी जांच और ट्रैकिंग की जा रही थी। आधुनिक तकनीक और डिजिटल सर्विलांस की मदद से इन मोबाइलों को मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे विभिन्न राज्यों से ट्रेस किया गया। मोबाइल वापस मिलने के बाद लोगों ने पुलिस की इस पहल की सराहना की और राहत की भावना व्यक्त की। अधिकारियों ने बताया कि बरामद किए गए मोबाइलों में एक लाख रुपए कीमत का एप्पल आईफोन भी शामिल है, जिसे शिकायत मिलने के मात्र 24 घंटे के भीतर ट्रेस कर लिया गया और उसके मालिक को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर सेल लगातार गुम और चोरी हुए मोबाइलों की रिकवरी के लिए काम कर रही है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी टीम ने करीब 700 मोबाइल फोन बरामद कर उनके मालिकों को वापस लौटाए थे। इस पूरी कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी उपनिरीक्षक धर्मेंद्र सिंह जाट सहित टीम के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि तकनीकी निगरानी और डेटा एनालिसिस के जरिए आगे भी ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल: बागी विधायकों ने विधानसभा में ठोका दावा, खुद को बताया असली तृणमूल कांग्रेस, बहुमत समर्थन का किया दावा

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बुधवार को उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक विधानसभा पहुंचे और पार्टी के भीतर अपने समर्थन को लेकर बड़ा दावा किया। बागी नेताओं ने कहा कि उनके साथ बड़ी संख्या में विधायक खड़े हैं और वे ही पार्टी की मूल विचारधारा तथा संगठनात्मक भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस दावे के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। विधानसभा परिसर में पहुंचे बागी विधायकों ने संकेत दिया कि वे अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के साथ-साथ संवैधानिक और संगठनात्मक स्तर पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहते हैं। बागी खेमे के नेताओं ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपने की तैयारी करते हुए दावा किया कि उन्हें पर्याप्त संख्या में विधायकों का समर्थन प्राप्त है। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ था, लेकिन नेतृत्व स्तर पर उसकी अनदेखी की गई। बागी विधायकों के अनुसार संगठन में निर्णय लेने की प्रक्रिया सीमित दायरे में सिमटती जा रही थी, जिससे कई वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ी। उनका दावा है कि वे केवल अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था और कार्यकर्ताओं की आवाज को मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रहे हैं। इस दौरान बागी नेताओं ने विधानसभा में विपक्ष के नेता पद को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उनका कहना है कि यदि संख्या बल और विधायकों के समर्थन को आधार बनाया जाए तो उनका दावा मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में उनकी उपस्थिति केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि अपने राजनीतिक अधिकारों और समर्थन के प्रमाण को सामने रखने की कोशिश है। बागी खेमे का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद बहुसंख्यक असंतोष अब राजनीतिक रूप से संगठित स्वरूप ले चुका है और इसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। पार्टी लंबे समय से पश्चिम बंगाल की राजनीति में प्रमुख शक्ति रही है, लेकिन हाल के महीनों में संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आती रही हैं। बागी विधायकों का आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा और संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों की भावनाओं को भी लगातार नजरअंदाज किया गया, जिससे असंतोष बढ़ता गया। इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में विधानसभा से जुड़ा एक हस्ताक्षर विवाद भी अहम माना जा रहा है। कुछ विधायकों ने आरोप लगाया था कि उनके नाम और हस्ताक्षर का उपयोग उनकी जानकारी के बिना किया गया। इस आरोप के बाद पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया तथा कई नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद संगठन में बदलाव और जवाबदेही की मांग भी उठने लगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यही विवाद बाद में व्यापक असहमति का कारण बना और अब वह खुलकर राजनीतिक संघर्ष के रूप में दिखाई दे रहा है। हालांकि बागी खेमे द्वारा किए जा रहे दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन उनके बयानों ने राजनीतिक अटकलों को तेज कर दिया है। दूसरी ओर पार्टी नेतृत्व स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने के प्रयास कर रहा है। आने वाले दिनों में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका, विधायकों के वास्तविक समर्थन की स्थिति और पार्टी नेतृत्व की रणनीति काफी महत्वपूर्ण रहने वाली है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह घटनाक्रम चर्चा का केंद्र बना हुआ है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह विवाद केवल दबाव की राजनीति साबित होता है या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत देता है।