इंदौर में बच्ची की मौत पर नया मोड़, 4 दिन बाद कब्र से निकाला गया शव

नई दिल्ली। इंदौर के बालदा कॉलोनी क्षेत्र में रहने वाले एक परिवार की दो वर्षीय बेटी काशवी की मौत ने सभी को झकझोर दिया है। परिजनों के मुताबिक बच्ची को 27 मई को सामान्य उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उसे एक निजी क्लिनिक में दिखाया गया।अगले ही दिन उसकी तबीयत गंभीर हो गई और बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ड्रिप लगाने के बाद बिगड़ी हालत, परिजनों ने लगाए आरोपपरिवार का आरोप है कि निजी क्लिनिक में बच्ची को लगातार कई ड्रिप चढ़ाई गईं। उनका कहना है कि इलाज के दौरान बच्ची की हालत बिगड़ने लगी, लेकिन उन्हें आश्वस्त किया जाता रहा कि वह जल्द ठीक हो जाएगी। परिजनों के अनुसार घर पहुंचने के बाद बच्ची के हाथ-पैर और होंठ नीले पड़ने लगे, जिसके बाद उसे तत्काल दूसरे अस्पताल ले जाया गया। बाद में उसे गंभीर स्थिति में बाल चिकित्सालय रेफर किया गया, जहां उसे बचाया नहीं जा सका। सच्चाई जानने के लिए 4 दिन बाद निकाला गया शवमौत के बाद परिवार ने इलाज में लापरवाही की आशंका जताते हुए पुलिस से शिकायत की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम की अनुमति से बच्ची का शव चार दिन बाद कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। पुलिस की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी की गई और पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार कराया गया। 5 डॉक्टरों की विशेष टीम ने किया पोस्टमॉर्टमजांच अधिकारियों के अनुसार पोस्टमॉर्टम पांच डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा किया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था और इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं। जांच एजेंसियां इलाज से जुड़े दस्तावेज, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्य भी जुटा रही हैं। परिवार का दर्द: ‘मेरी बेटी नहीं लौटेगी, लेकिन सच सामने आना चाहिए’बेटी की मौत से परिवार गहरे सदमे में है। पिता ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बेटी अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन यदि किसी की लापरवाही से उसकी जान गई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। परिवार की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और सभी तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए। जांच जारी, रिपोर्ट का इंतजारफिलहाल पुलिस और प्रशासन मामले की जांच कर रहे हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, मौत के कारण या किसी की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
दक्षिण सूडान में तैनात 565 भारतीय सैनिक प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक से हुए सम्मानित

खार्तूम। दक्षिण सूडान (South Sudan) में संयुक्त राष्ट्र मिशन (United Nations Mission) के तहत तैनात कम से कम 565 भारतीय शांति सैनिकों (565 Indian Peacekeepers) को उनकी उत्कृष्ट सेवा, नागरिकों की सुरक्षा और शांति स्थापना के प्रयासों के लिए प्रतिष्ठित संयुक्त राष्ट्र पदक (Prestigious United Nations Medal) से सम्मानित किया गया है। सम्मानित होने वाले इन सैनिकों में 53 महिला सैन्यकर्मी भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) निकाय द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारतीय शांति सैनिकों को यह सम्मान गश्त के माध्यम से नागरिकों की रक्षा करने, स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बढ़ाने, पशु चिकित्सा शिविर आयोजित करने, महिलाओं के लिए आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने, लैंगिक हिंसा के खिलाफ लड़ने और मानवीय सहायता की पहुंच को सुगम बनाने के लिए दिया गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने भारतीय दल को बधाई दी। मिशन ने कहा, “भारतीय ब्लू हेल्मेट्स ने अपने संचालन के सभी क्षेत्रों में लगातार व्यावसायिकता और कर्तव्यपरायणता के उच्चतम मानकों को बनाए रखा है। देश को उनकी सेवा पर गर्व है।” आपको बता दें कि ब्लू हेल्मेट्स उन सैन्य कर्मियों, पुलिस अधिकारियों और नागरिक विशेषज्ञों को कहा जाता है जो संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की कमान के तहत दुनिया के अशांत क्षेत्रों में काम करते हैं। शांति स्थापना में भारत का योगदानभारत का संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में एक गौरवशाली और लंबा इतिहास रहा है। नेपाल के बाद भारत संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में वर्दीधारी सैन्य और पुलिसकर्मियों का योगदान देने वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत के वर्तमान में 4,200 से अधिक सैन्य और पुलिस कर्मी संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न मिशनों में तैनात हैं, जिनमें 155 महिला कर्मी शामिल हैं। भारतीय सैनिक इस समय दक्षिण सूडान के अलावा एबेई, मध्य अफ़्रीकी गणराज्य, साइप्रस, कांगो, लेबनान, मध्य पूर्व, सोमालिया और पश्चिमी सहारा के मिशनों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वैश्विक शांति की वेदी पर भारत ने सबसे बड़ा बलिदान भी दिया है। कर्तव्य की वेदी पर देश के लगभग 180 भारतीय शांति सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है, जो किसी भी सैनिक योगदान देने वाले देश की तुलना में सबसे अधिक संख्या है।
नौतपा में बदला मौसम का मिजाज, MP में गर्मी की जगह बारिश और ओलावृष्टि

नई दिल्ली। आमतौर पर नौतपा के दौरान मध्यप्रदेश भीषण गर्मी और लू की चपेट में रहता है, लेकिन इस बार मौसम ने बिल्कुल अलग तस्वीर पेश की। पूरे नौ दिनों तक प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, तेज आंधी और कई स्थानों पर ओलावृष्टि दर्ज की गई। लगातार बदले मौसम के कारण प्रदेश में हीटवेव का प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है और अधिकांश शहरों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। 36 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्टमौसम विभाग ने बुधवार को इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, देवास, राजगढ़, झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खंडवा, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सिवनी और बालाघाट समेत 36 जिलों में तेज आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की है। नीमच, मंदसौर और आगर-मालवा में 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ्तार से हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। तापमान में 10 डिग्री तक गिरावटलगातार बारिश और बादलों के कारण दिन और रात दोनों के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। कई शहरों में तापमान सामान्य से 8 से 10 डिग्री तक नीचे पहुंच गया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले चार दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बने रहने की संभावना है। आंधी-बारिश से जनजीवन प्रभावितइंदौर में मंगलवार को हुई तेज बारिश और आंधी के दौरान कई इलाकों में नुकसान की घटनाएं सामने आईं। विजय नगर क्षेत्र में एक इमारत का टीन शेड उड़कर सड़क पर जा रही कार पर गिर गया, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। देवास और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में कई पेड़ उखड़ गए तथा मकानों के टीन शेड उड़ने से लोगों को चोटें आईं। वहीं मुरैना जिले के कैलारस क्षेत्र में देर रात जोरदार बारिश दर्ज की गई। किसानों और जल स्रोतों के लिए राहतविशेषज्ञों का मानना है कि समय से पहले हुई बारिश ने जल स्रोतों को कुछ राहत दी है और भूजल स्तर सुधारने में मदद मिल सकती है। हालांकि तेज हवाओं और ओलावृष्टि से कुछ क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी हुई है। क्या रखें सावधानी?तेज आंधी के दौरान पेड़ों और कमजोर ढांचों से दूर रहें।बिजली चमकने पर खुले मैदानों में न जाएं।वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखें। मध्यप्रदेश में इस बार नौतपा का मौसम पूरी तरह बदला हुआ नजर आया। जहां आमतौर पर लू और झुलसाने वाली गर्मी होती है, वहीं इस बार बारिश, ओले और तेज हवाओं ने मौसम को सुहाना बना दिया। फिलहाल अगले कुछ दिनों तक प्रदेशवासियों को गर्मी से राहत मिलने की संभावना बनी हुई है।
Chardham Yatra: केदारनाथ में उमड़ रही भारी भीड़…वीडियो देख CM धामी ने किया बड़ा ऐलान

देहरादून। पिछले दिनों केदारनाथ दर्शन (Kedarnath Darshan) को लेकर लोगों की भारी-भरकम भीड़ और रोते-बिलखते श्रद्धालुओं (Devotees.) की आपबीती वाले वायरल वीडियो सामने आए थे। इसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami.) ने बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री धामी ने कहा है कि चारधाम यात्रा (Chardham Yatra) के दौरान धामों की धारण क्षमता के अनुरूप दर्शन को लेकर व्यवस्था बनाई जाएगी। उन्होंने चारधाम यात्रा को लेकर अधिकारियों को कई निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अफसरों से कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए धामों में दर्शन के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करें। किसी भी धाम या पड़ाव के लिए तय क्षमता से अधिक लोगों के आने की स्थिति में नीचे के होल्डिंग एरिया-प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर वाहनों व श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित की जाए। भीड़ प्रबंधन के लिए चरणबद्ध व्यवस्था अपनाते हुए यात्रियों को भेजा जाए ताकि धामों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो। भीड़ नियंत्रण पर क्या प्लानसीएम ने कहा कि भीड़ नियंत्रण के तहत श्रद्धालुओं को रोकने पर उन्हें इस के कारण, संभावित प्रतीक्षा समय और आगे की व्यवस्था की सूचना नियमित उपलब्ध कराई जाए। यात्रियों को किसी भी परिस्थिति में जानकारी के अभाव का सामना नहीं करना पड़े। इसके लिए सार्वजनिक सूचना प्रणाली, एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एफएम रेडियो से सूचनाएं पहुंचाई जाएं। मौसम में बदलाव, सड़क बंद होने, यातायात जाम या दर्शन में देरी जैसी स्थितियों के बारे में यात्रियों को समय रहते बताया जाए ताकि उनमें भ्रम और असंतोष पैदा न हो। सीएम ने निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर श्रद्धालुओं को रोका या ठहराया जा रहा है, वहां पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय समेत सभी जरूरी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। रात 10 से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों पर रोकचारधाम यात्रा मार्गों पर रात 10 बजे से सुबह चार बजे तक यात्री वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को अफसरों को यह व्यवस्था सख्ती से लागू करने को कहा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि, ट्रक और अन्य जरूरी सेवाओं से जुड़े भारी वाहनों को केवल रात के समय संचालन की अनुमति दी जाएगी। उनके अनुसार, चारधाम यात्रा अब दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है, जहां प्रतिकूल मौसम की सबसे बड़ी चुनौती होगी। लिहाजा, संवेदनशील स्थलों पर जेसीबी, पोकलैंड व सैटेलाइट फोन के साथ एम्बुलेंस और राहत-बचाव के जरूरी उपकरणों की व्यवस्था कराई जाए। सभी अफसरों को फील्ड में रहकर सारे इंतजाम का निरीक्षण और श्रद्धालुओं को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। दिन में मालवाहक वाहनों पर रोकचारधाम यात्रा रूट पर दिन में मध्यम व भारी मालवाहक वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी गई है। तीर्थयात्रियों को जाम से निजात के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चारधाम यात्रा के नोडल अफसर संदीप सैनी ने यह आदेश किए। हेली एम्बुलेंस के लिए नोडल अफसर बनेंगेमुख्यमंत्री ने गंभीर मरीजों को त्वरित उपचार दिलाने के लिए हेली एम्बुलेंस के लिए राज्य स्तर पर नोडल अफसर नियुक्त करने के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर डीएम समन्वय बनाकर मरीजों को मदद मुहैया करवा सकेंगे। उन्होंने केदारनाथ पैदल मार्ग पर पर्याप्त संख्या में शेड और बारिश-धूप से बचाव की बेहतर व्यवस्था के साथ स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा। इस बैठक में मंत्री सतपाल महाराज, भरत सिंह चौधरी, विधायक अनिल नौटियाल, आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष विनय रोहिला, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन आदि मौजूद रहे। होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में अनिवार्य होगी रेट लिस्टमुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्ग पर संचालित होटल-रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से प्रदर्शित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित सैंपलिंग को कहा। गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को नियमित समीक्षा, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही इस यात्रा से जुड़े जिलों के जिला अधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को यात्रा प्रबंधन की निरंतर निगरानी और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया।
रणवीर सिंह ने घटाई फीस, लेकिन मुनाफे में हिस्सेदारी से करेंगे बड़ी कमाई

नई दिल्ली। रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर फिल्म सीरीज ‘धुरंधर’ ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। फिल्म की को-प्रोड्यूसर ज्योति देशपांडे ने खुलासा किया कि रणवीर ने इस प्रोजेक्ट के लिए पारंपरिक तरीके से बड़ी फीस नहीं ली थी। इसके बजाय उन्होंने एक छोटी निश्चित फीस के साथ “बैकएंड डील” यानी फिल्म के मुनाफे में हिस्सेदारी का विकल्प चुना। यही रणनीति बाद में उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुई। निर्देशक आदित्य धर ने भी लिया रिस्कफिल्म के निर्देशक आदित्य धर ने भी इसी मॉडल को अपनाया। उन्होंने भी कम फिक्स्ड फीस लेकर फिल्म के लाभ में हिस्सेदारी स्वीकार की।निर्माताओं के अनुसार इस व्यवस्था का उद्देश्य यह था कि फिल्म से जुड़े प्रमुख लोगों की सफलता में सीधी भागीदारी हो और सभी का फोकस बेहतर परिणाम देने पर रहे। जब बजट बढ़ा, लेकिन दांव सफल रहाज्योति देशपांडे के मुताबिक फिल्म का वास्तविक खर्च शुरुआती अनुमान से काफी अधिक हो गया था। शुरुआत में जो बजट तय किया गया था, वह बाद में लगभग दोगुना हो गया। हालांकि फिल्म की शानदार कमाई ने इस जोखिम को सफलता में बदल दिया और निवेशकों से लेकर कलाकारों तक सभी को इसका लाभ मिला। एक फिल्म से बनी दो फिल्मों की फ्रेंचाइजीनिर्माताओं का कहना है कि शुरुआत में ‘धुरंधर’ को एक ही फिल्म के रूप में बनाया जा रहा था। लेकिन पहले शेड्यूल की शूटिंग पूरी होने के बाद कहानी और फुटेज का दायरा इतना बढ़ गया कि इसे दो भागों में रिलीज करने का फैसला लिया गया। यही निर्णय बाद में फ्रेंचाइजी की सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ। शानदार स्टारकास्ट ने बढ़ाई फिल्म की ताकतफिल्म में रणवीर सिंह के अलावा अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल, गौरव गेरा, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकार नजर आए। रिकॉर्ड बुक में दर्ज हुई ‘धुरंधर 2रिपोर्ट्स के अनुसार ‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ ने मिलकर दुनिया भर में लगभग 3000 करोड़ रुपये का कारोबार किया। वहीं ‘धुरंधर 2’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों में दूसरे स्थान पर पहुंच गई। इस सूची में शीर्ष स्थान पर दंगल बनी हुई है। ‘धुरंधर’ की सफलता यह दिखाती है कि फिल्म इंडस्ट्री में केवल बड़ी फीस ही कमाई का रास्ता नहीं होती। सही रणनीति, जोखिम उठाने की क्षमता और मुनाफे में हिस्सेदारी का मॉडल कलाकारों और निर्माताओं दोनों के लिए बेहद लाभदायक साबित हो सकता है।
चीनी अरबपति झांग यिमिंग बने एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति, मुकेश अंबानी को छोड़ा पीछे

नई दिल्ली। बाइटडांस कंपनी (ByteDance Company) की कीमत बढ़ने और उसके एआई चैटबॉट (AI Chatbot) की सफलता से झांग यिमिंग (Zhang Yiming) मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) को पीछे छोड़कर एशिया के दूसरे सबसे अमीर बन गए हैं। ब्लूमबर्ग के मुताबिक, झांग के पास अब 92.8 अरब डॉलर हैं। वह चीन के सबसे अमीर व्यक्ति हैं। 2019 में उनके पास सिर्फ 13 अरब डॉलर थे। यानी उनकी दौलत सात गुना से भी ज्यादा बढ़ गई है। बता दें 117 अरब डॉलर के नेटवर्थ के साथ गौतम अडानी (Gautam Adani) दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में तो 17वें स्थान पर हैं, लेकिन उनके सिर पर एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति का ताज बरकरार है। पहले मुकेश अंबानी के सिर पर कई वर्षों तक एशिया के सबसे रईस का ताज था। कुछ महीने पहले ही इनसे यह ताज अडानी ने छीन लिया और अंबानी एशिया के दूसरे नंबर के रईस बन गए। अब यह पोजीशन भी उनकी चली गई। दुनिया के अमीरों में घटा अंबानी का रुतबायही नहीं, दुनिया के अरबपतियों की लिस्ट में अंबानी अब 4 पायदान नीचे 25वें स्थान पर चले गए हैं। इसकी वजह एक ही दिन में झांग की दौलत में 24.1 अरब डॉलर की छलांग, जेफ यास की दौलत में 7.56 अरब डॉलर, डेविड सुन की दौलत में 2.75 अरब डॉलर और झान तू की दौलत में 2.75 अरब डॉलर की उछाल है। ये चारों अब अंबानी से ऊपर पहुंच गए हैं। झांग को 24 अरब डॉलर का फायदाब्लूमबर्ग ने ब्लैकरॉक, फिडेलिटी, टी. रो प्राइस, एचएसजी और जनरल अटलांटिक जैसे निवेशकों के मूल्यांकन देखे। इसके बाद झांग की दौलत में 24 अरब डॉलर से अधिक का उछाल आया। टिकटॉक और दोउबाओ ने दिया मौकाझांक के ऊपर अचानक हुई डॉलर की बारिश यूं ही नहीं हुई। इसमें टिकटॉक ऐप की लोकप्रियता और एआई चैटबॉट ‘दोउबाओ’ का बड़ा योगदान है। दोउबाओ हर महीने 30 करोड़ लोग इस्तेमाल करते हैं। यह चीन का सबसे पसंदीदा चैटबॉट है। बाइटडांस ने इसी साल अपने अमेरिका के कुछ कामकाज वहां के निवेशकों को बेच भी दिए थे। चीन की सबसे बड़ी निजी कंपनीबाइटडांस चीन की सबसे चर्चित निजी कंपनी है। दोउबाओ इतना सफल हुआ कि कंपनी अब उसके लिए पैसे लेने की तैयारी कर रही है। चीन में लोग ऑनलाइन सेवाओं के लिए पैसे देने को तैयार नहीं होते, इसलिए यह बड़ी बात है। कंपनी को भविष्य में शेयर बाजार में उतरने की भी उम्मीद है। अमेरिका में टिकटॉक का मामला सुलझाटिकटॉक के अमेरिकी व्यापार को ओरेकल, सिल्वर लेक और अबू धाबी के एमजीएक्स को दे दिया गया। इससे कई सालों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हुई। आलोचक टिकटॉक को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे थे। एआई पर बड़ा दांवअब बाइटडांस एआई पर जोर लगा रहा है। ब्लूमबर्ग की खबर के अनुसार, कंपनी इस साल 70 अरब डॉलर तक खर्च करने की बात कर रही है। इससे चीन के एआई बाजार में कंपनी सबसे आगे रहेगी और अमेरिकी कंपनियों को टक्कर देगी। यह पैसा 2025 में कंपनी द्वारा कमाए गए करीब 50 अरब डॉलर के मुनाफे से आएगा।
डॉन 3 पर नया बवाल, रणवीर सिंह ने FWICE के खिलाफ उठाया कानूनी कदम

नई दिल्ली। रणवीर सिंह और FWICE के बीच चल रहा विवाद अब कानूनी स्तर तक पहुंच गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार रणवीर सिंह ने संगठन को लीगल नोटिस भेजा है। बताया जा रहा है कि नोटिस भेजे जाने के बाद FWICE को अदालत या कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखना पड़ सकता है। हालांकि नोटिस में की गई मांगों का आधिकारिक विवरण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है। FWICE ने जारी किया था गैर-सहयोग निर्देशपिछले सप्ताह FWICE ने अपने सदस्यों से रणवीर सिंह के साथ काम नहीं करने का आग्रह किया था। संगठन का यह कदम ‘डॉन 3’ परियोजना से जुड़े विवाद के बाद सामने आया। FWICE का कहना था कि फिल्म से अचानक अलग होने के कारण निर्माताओं को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है, जिसके चलते संगठन ने यह रुख अपनाया। फरहान अख्तर और एक्सेल एंटरटेनमेंट की शिकायतरिपोर्ट्स के अनुसार फरहान अख्तर और Excel Entertainment ने FWICE को शिकायत भेजी थी। शिकायत में कहा गया था कि फिल्म के प्री-प्रोडक्शन पर लगभग 45 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। ऐसे में मुख्य अभिनेता के परियोजना से हटने से निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हुई और आर्थिक नुकसान हुआ। क्या है पूरा मामला?कुछ वर्ष पहले Don 3 की घोषणा हुई थी, जिसमें रणवीर सिंह को नए ‘डॉन’ के रूप में पेश किया गया था। यह भूमिका पहले शाहरुख खान निभा चुके हैं। बाद में खबरें आईं कि रणवीर अब इस फिल्म का हिस्सा नहीं हैं। इसके बाद निर्माताओं और अभिनेता के बीच मतभेदों की चर्चा शुरू हुई, जो अब कानूनी नोटिस तक पहुंच गई है। आगे क्या हो सकता है?फिल्म इंडस्ट्री की नजरें अब इस मामले पर टिकी हैं। यदि दोनों पक्ष बातचीत से समाधान नहीं निकालते, तो विवाद लंबी कानूनी प्रक्रिया का रूप ले सकता है। वहीं, उद्योग जगत यह भी देख रहा है कि इसका असर रणवीर सिंह की आगामी फिल्मों और ‘डॉन 3’ की प्रगति पर कितना पड़ता है। रणवीर के आगामी प्रोजेक्ट्सविवादों के बीच रणवीर सिंह अपने अन्य प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहे हैं। खबरों के मुताबिक वह निर्देशक आदित्य धर की एक नई फिल्म से जुड़े हैं। इसके अलावा निर्देशक जय मेहता की एक ज़ॉम्बी-आधारित फिल्म में भी उनके काम करने की चर्चा है।
ट्विशा शर्मा मामले में गिरिबाला सिंह ने खुद की पैरवी, कोर्टरूम में हुई जमकर हंगामा

भोपाल। ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) मौत मामले में मंगलवार को सुनवाई के दौरान बड़ा घटनाक्रम हुआ जब पूर्व जज गिरिबाला सिंह (Giribala Singh) ने अपने केस की पैरवी खुद की. इस दौरान उनकी ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव (Anurag Srivastava) के साथ जोरदार बहस हुई जब दोनों ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। दरअसल, मंगलवार को पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह (Samarth Singh) को भोपाल की अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है. इसी मामले की सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में हाई-वोल्टेज ड्रामा और तीखी बहस देखने को मिली. 63 साल की पूर्व जज गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अपना पक्ष खुद रखा. अदालत में मौजूद लोगों के अनुसार वह काफी आक्रोशित नजर आ रही थीं और बार-बार ऊंची आवाज में अपनी बात रख रही थीं। कोर्ट में हाथापाई और धक्कामुक्कीइस दौरान गिरिबाला सिंह ने आरोप लगाया कि ट्विशा के परिवार के वकील अनुराग श्रीवास्तव ने उनके बेटे समर्थ सिंह के साथ जबलपुर डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में हाथापाई और धक्कामुक्की की. इसी दौरान कोर्टरूम में मौजूद वकील अनुराग श्रीवास्तव ने इस आरोप का तीखा जवाब देते हुए कहा ‘अगर ऐसा कोई घटनाक्रम हुआ है तो अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कर ली जाए. पूरे परिसर में कैमरे लगे हैं और वहां मीडिया भी बड़ी संख्या में मौजूद था, उनके फुटेज भी चेक किए जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी. इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. गिरीबाला के वकील भी इस दौरान अनुराग श्रीवास्तव से बहस करते दिखे। ‘हम जहां भी जाते हैं मीडिया हमारे पीछे पहुंच जाती है’गिरिबाला सिंह ने मामले में हो रही ‘मीडिया ट्रायल’ पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने अदालत से कहा ‘हम जहां भी जाते हैं मीडिया हमारे पीछे-पीछे पहुंच जाती है. यह बंद होना चाहिए. हमारी जान को खतरा है. गिरिबाला सिंह ने क्राइम सीन रीक्रिएशन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि जांच एजेंसियों ने उन्हें उनके घर तक सीधे ले जाने के बजाय कई मकान पहले ही वाहन से क्यों उतार दिया और मीडिया के कैमरों के सामने पूरा सीन रिक्रिएशन कराया गया जो अप्रत्याशित था। गिरिबाला सिंह ने ट्विशा के छत पर जाते और बाद में उसे लेकर नीचे उतारते समर्थ के सीसीटीवी फुटेज से भी खुद को अलग करते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह फुटेज किसने लीक की थी। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोपइसके बाद अनुराग श्रीवास्तव ने एक और सवाल उठाते हुए पूछा कि 30 हजार रुपये के इनामी और फरार चल रहे समर्थ सिंह को जबलपुर में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के चेंबर में शरण कैसे मिली? इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. वहीं समर्थ सिंह की ओर से पेश वकील इनोश जॉर्ज कार्लो ने दलील दी कि यदि किसी व्यक्ति को अपनी सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस हो तो उसे सुरक्षित स्थान पर शरण लेने का अधिकार है. इस पूरी सुनवाई के दौरान माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
‘जब रफी साहब की आवाज ने बदल दी राजेश खन्ना की जिद्द’: एक गाने ने रच दिया था इतिहास

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार राजेश खन्ना अपने करियर के चरम पर थे। उस समय उनके कई हिट गाने किशोर कुमार की आवाज में रिकॉर्ड हो रहे थे। राजेश खन्ना को यह विश्वास था कि किशोर कुमार उनकी सफलता की “लकी आवाज” हैं। लेकिन फिल्म ‘दो रास्ते’ के एक गाने को लेकर स्थिति बदल गई, जब संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल ने अलग राय रखी। मखमली आवाज की तलाश और रफी की एंट्रीम्यूजिक डायरेक्टर्स का मानना था कि इस खास गाने के लिए एक ऐसी आवाज चाहिए जो नरम, भावपूर्ण और रूहानी हो। इसी कारण उन्होंने मोहम्मद रफी को चुना। राजेश खन्ना इसके खिलाफ थे और उन्होंने किशोर कुमार की आवाज की जिद्द रखी, लेकिन संगीतकारों ने स्पष्ट कहा कि इस गाने के साथ सिर्फ रफी साहब ही न्याय कर सकते हैं। स्टूडियो में हुआ वो जादू जिसने सब बदल दियाजब मोहम्मद रफी ने स्टूडियो में “रेशमी जुल्फें” गाया, तो पूरा माहौल बदल गया। उनकी आवाज में ऐसा जादू था कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। रिकॉर्डिंग सुनने के बाद खुद राजेश खन्ना भी इस गाने के फैन बन गए। कहा जाता है कि इसी पल उन्होंने स्वीकार किया कि यह गाना सिर्फ रफी साहब की आवाज में ही सही लग सकता है। फिल्म, कास्ट और दिलचस्प किस्सेफिल्म के लिए पहले संजय खान को अप्रोच किया गया था, लेकिन बाद में यह रोल संजय खान से हटकर राजेश खन्ना को मिला। फिल्म में मुमताज पहली बार बतौर लीड ए-ग्रेड अभिनेत्री नजर आईं और उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। रफी की विरासत और दीवानगीमोहम्मद रफी की आवाज का जादू ऐसा था कि संगीतकारों से लेकर दर्शकों तक हर कोई उनके गीतों का दीवाना था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके अंतिम संस्कार में भारी बारिश के बावजूद हजारों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। यह किस्सा सिर्फ एक गाने का नहीं, बल्कि उस दौर की संगीत परंपरा और कलाकारों की समझ का प्रतीक है, जहां सही आवाज और सही भाव ही किसी गीत को अमर बना देते थे। “रेशमी जुल्फें” ने न सिर्फ राजेश खन्ना की सोच बदली, बल्कि मोहम्मद रफी की गायकी को एक और ऐतिहासिक ऊंचाई दी
‘फिल्म इंडस्ट्री से दूरी जरूरी थी’ – भारत भाग्य विधाता से पहले कंगना रनौत का बड़ा बयान, जानिए वजह

नई दिल्ली। अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर चल रहे प्रमोशन के दौरान कंगना रनौत ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में लंबे समय तक रहने के बाद अक्सर कलाकार एक “बबल” में जीने लगते हैं, जहां वास्तविक जीवन से दूरी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपनी नई फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ के किरदार में खुद को ढालना शुरू किया, तो उन्हें एहसास हुआ कि इस भूमिका को सही तरीके से निभाने के लिए वास्तविक जीवन के अनुभव जरूरी हैं। नर्स के किरदार ने बदला नजरियाकंगना इस फिल्म में एक नर्स का किरदार निभा रही हैं, जो 2008 के मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि यह किरदार केवल अभिनय नहीं, बल्कि “एक तरह की तपस्या” जैसा अनुभव था। उनके मुताबिक, मिडल क्लास बैकग्राउंड से आने के बावजूद लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में रहने के कारण असल जिंदगी से दूरी बढ़ जाती है। राजनीति और आम लोगों से जुड़ाव का असरकंगना रनौत ने यह भी कहा कि पिछले कुछ वर्षों में राजनीति से जुड़े रहने के कारण उन्हें आम लोगों से सीधे बातचीत का मौका मिला, जिससे उनके अभिनय में और गहराई आई। उनके अनुसार, एक कलाकार के लिए सिर्फ ग्लैमर नहीं बल्कि समाज की वास्तविकता को समझना भी जरूरी है। फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ पर चर्चा तेजफिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म में कंगना का किरदार मुंबई हमलों के दौरान मेडिकल स्टाफ की भूमिका पर केंद्रित है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद दर्शकों में उत्सुकता बढ़ गई है और सोशल मीडिया पर इसे लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कंगना रनौत का कहना है कि वास्तविक जीवन से दूरी कभी-कभी कलाकारों के लिए जरूरी हो सकती है, ताकि वे अपने किरदारों को ज्यादा प्रामाणिक तरीके से निभा सकें। ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए वह एक बार फिर गंभीर और संवेदनशील भूमिका में नजर आने वाली हैं।