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सिद्ध चक्र महामंडल विधान में उमड़ा आस्था का सैलाब, श्रद्धालुओं ने किया पूजन

मध्य प्रदेश । धार्मिक अनुष्ठान के दौरान आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए Muni Sambhav Sagar Maharaj ने कहा कि संसार में प्राणी के दुखों का मूल कारण उसका चंचल और भटकता हुआ मन है। जब मन सांसारिक मोह-माया में उलझ जाता है, तब व्यक्ति अनेक प्रकार की परेशानियों और मानसिक अशांति से घिर जाता है। उन्होंने कहा कि जीवन में वास्तविक सुख, शांति और आत्मिक आनंद प्राप्त करने के लिए मन को स्थिर और संयमित बनाना आवश्यक है। मुनि श्री ने कहा कि मन की स्थिरता ही आत्मा को परमात्मा और भगवत्ता से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त करती है। जब व्यक्ति अपने मन पर नियंत्रण स्थापित कर लेता है, तब वह जीवन की कठिन परिस्थितियों में भी संतुलित और शांत रह सकता है। विधान के प्रवक्ता Anshul Jain ने बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवारों में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन परिवार शामिल रहे। उनके द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक पात्रों की भूमिकाओं का भी निर्वहन किया गया। सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र प्रमुख पात्रों के रूप में उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) ने निभाया। शांति धारा का पुण्य लाभ मनोज-प्रीति बांगा ने प्राप्त किया। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा-सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति-शशांक ने अर्घ्य समर्पित कर धार्मिक अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्म लाभ अर्जित किया।

डीजल और महंगाई ने बढ़ाई मुश्किलें, बस मालिकों की सरकार से दो टूक

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में बस किराया बढ़ाने की मांग को लेकर बस संचालकों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। बढ़ती महंगाई, डीजल की कीमतों और रखरखाव खर्च में लगातार इजाफे से परेशान बस मालिकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो प्रदेश में बसों के पहिए थम सकते हैं। आज होगी महत्वपूर्ण बैठकबस संचालकों के प्रतिनिधि आज परिवहन मंत्री Rao Uday Pratap Singh से भोपाल में मुलाकात करेंगे। इस बैठक में किराया वृद्धि को लेकर चर्चा होगी। बस मालिकों का कहना है कि यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो हड़ताल का ऐलान किया जा सकता है। तीन साल से नहीं बढ़ा किरायाबस ऑपरेटरों के अनुसार, प्रदेश में आखिरी बार अप्रैल 2021 में बस किराए में संशोधन किया गया था। तब से डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन लागत में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन किराया लगभग स्थिर बना हुआ है। संचालकों का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में:डीजल की कीमतों में कई बार वृद्धि हुई है।टायर और ऑटो पार्ट्स महंगे हुए हैं।नई यूरो-6 बसों की कीमतें बढ़ी हैं।रखरखाव और बीमा खर्च में भी इजाफा हुआ है।क्या है बस मालिकों की मांग? Madhya Pradesh Bus Owner Association के पदाधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम किराया 2.50 रुपये प्रति किलोमीटर तय किया जाए और अन्य श्रेणियों के किराए में भी उसी अनुपात में बढ़ोतरी की जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा किराए पर बस संचालन आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं रह गया है और लगातार घाटा उठाना पड़ रहा है। हड़ताल की चेतावनीएसोसिएशन के महामंत्री Jaykumar Jain ने कहा है कि यदि सात दिनों के भीतर किराया नहीं बढ़ाया गया तो बस संचालक किसी भी समय हड़ताल पर जा सकते हैं। उनका कहना है कि यह केवल आंदोलन नहीं बल्कि बढ़ते घाटे की वजह से उत्पन्न मजबूरी है। यात्रियों पर पड़ सकता है असरयदि बस मालिक हड़ताल पर जाते हैं तो इसका सीधा असर लाखों यात्रियों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो रोजाना बसों से आवागमन करते हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। फिलहाल सभी की निगाहें आज होने वाली बैठक पर टिकी हैं। इसी बैठक के बाद यह तय होगा कि किराया बढ़ाने पर सहमति बनती है या प्रदेश बस परिवहन व्यवस्था हड़ताल की ओर बढ़ती है।

CBI जांच के बीच कोर्ट पहुंचाए गए पति और सास, रिमांड पर होगा फैसला

भोपाल  । भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को मृतका के पति Samarth Singh और सास Giribala Singh को सीबीआई ने रिमांड अवधि समाप्त होने पर अदालत में पेश किया। दोनों को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां आगे की कार्रवाई पर फैसला होना है। आरोपों से किया इनकासीबीआई पूछताछ के दौरान समर्थ और गिरिबाला सिंह ने अपने ऊपर लगे मारपीट तथा सबूतों से छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया है। दोनों का कहना है कि ट्विशा के साथ उनके संबंध सामान्य थे और उन्होंने किसी प्रकार का उत्पीड़न नहीं किया। जांच एजेंसी उनके बयानों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान कर रही है। घटनाक्रम का रीक्रिएशनसोमवार को सीबीआई टीम ने पूरे घटनाक्रम का रीक्रिएशन कराया। जांच अधिकारी यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि जिस परिस्थिति में ट्विशा की मौत हुई, वह आत्महत्या थी या फिर किसी अन्य वजह से हुई घटना। जब्त किए गए सबूतों की फोरेंसिक जांच भी जारी है। लिगेचर बेल्ट को लेकर बढ़े सवालमामले में सबसे बड़ा सवाल उस लिगेचर बेल्ट को लेकर खड़ा हुआ है, जिसके सहारे ट्विशा फंदे पर लटकी मिली थीं। जांच में सामने आया है कि घटनास्थल से बरामद बेल्ट को नियमानुसार सुरक्षित रखने के बजाय तत्कालीन जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने करीब दो दिन तक अपनी कार में रखा था। बाद में इसे फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। इतना ही नहीं, पोस्टमार्टम के दौरान भी बेल्ट को अस्पताल में जमा नहीं कराया गया था। इस लापरवाही को जांच में गंभीर माना जा रहा है और सीबीआई जल्द ही संबंधित पुलिस अधिकारी से पूछताछ कर सकती है। हत्या की आशंका हुई मजबूतट्विशा के परिजनों ने शुरू से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि यदि मामला आत्महत्या का था, तो फंदे में इस्तेमाल हुई बेल्ट को सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया। बेल्ट के रखरखाव में कथित लापरवाही सामने आने के बाद मामले में संदेह और गहरा गया है। आर्थिक और पेशेवर पहलुओं की भी जांचसीबीआई जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि ट्विशा जिस कंपनी में कार्यरत थीं, वहां से उन्हें पिछले छह से सात महीनों से नियमित वेतन नहीं मिला था। एजेंसी अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आर्थिक दबाव, नौकरी से जुड़ी परेशानियां या व्यक्तिगत विवाद उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रहे थे। फिलहाल अदालत में पेशी के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीबीआई दोनों आरोपियों की रिमांड बढ़ाने की मांग करती है या उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जाता है। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी कई पहलुओं पर साक्ष्य जुटा रही है।

‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की भावुक कहानी: Neel Kamal का अमर विदाई गीत और Rajendra Kumar का यादगार किस्सा

नई दिल्ली । हिंदी फिल्म संगीत के इतिहास में कुछ गीत ऐसे हैं जो सिर्फ धुन या बोल तक सीमित नहीं रहते, बल्कि समय के साथ भावनाओं की विरासत बन जाते हैं। वर्ष 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘नील कमल’ का विदाई गीत ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ भी उन्हीं चुनिंदा गीतों में शामिल किया जाता है, जिसने भारतीय समाज में पिता-बेटी के रिश्ते की संवेदनशीलता को एक अलग पहचान दी। इस गीत को संगीतकार रवि के संगीत, गीतकार साहिर लुधियानवी के शब्दों और मोहम्मद रफी की भावपूर्ण आवाज ने कालजयी बना दिया। कहा जाता है कि इस गीत की लोकप्रियता केवल फिल्म रिलीज़ के बाद नहीं बढ़ी, बल्कि उससे पहले ही इसकी भावनात्मक शक्ति लोगों तक पहुंचने लगी थी। एक चर्चित किस्से के अनुसार, गीतकार राजेंद्र कृष्ण की बेटी की शादी के अवसर पर फिल्म इंडस्ट्री की कई हस्तियां मौजूद थीं। इसी समारोह में संगीतकार रवि से अनुरोध किया गया कि वे कोई विशेष प्रस्तुति दें। रवि ने इस गीत को विदाई के समय प्रस्तुत करने का निर्णय लिया, ताकि उसकी भावनात्मक गहराई पूरी तरह महसूस की जा सके। जैसे ही विदाई की रस्म शुरू हुई, माहौल बेहद भावुक हो गया। परिवार के सदस्य पहले से ही भावनाओं में डूबे हुए थे और उसी क्षण ‘बाबुल की दुआएं लेती जा’ की धुन ने पूरे वातावरण को और भारी कर दिया। गीत के बोल जैसे-जैसे आगे बढ़े, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। कहा जाता है कि यह केवल एक संगीत प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को गहराई से छू लिया। इस घटना से जुड़ा सबसे चर्चित पहलू अभिनेता राजेंद्र कुमार का बताया जाता है। कहा जाता है कि गीत समाप्त होने के बाद वे इतने भावुक हो गए कि सीधे संगीतकार रवि के पास पहुंचे और पूछ बैठे कि यह गीत किस फिल्म का हिस्सा है, क्योंकि उस समय तक ‘नील कमल’ रिलीज नहीं हुई थी। यह घटना इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि कभी-कभी कला अपनी आधिकारिक प्रस्तुति से पहले ही लोगों के दिलों तक पहुंच जाती है और अमर हो जाती है। गीत से जुड़ी एक और भावनात्मक कथा मोहम्मद रफी से संबंधित बताई जाती है। कहा जाता है कि रिकॉर्डिंग के दौरान वे अपने निजी जीवन के अनुभवों से भावुक हो गए थे, जिससे उनकी आवाज में एक विशेष कंपन और दर्द झलक आया। संगीतकार रवि ने उस प्राकृतिक भाव को गीत में बनाए रखने का निर्णय लिया, क्योंकि उन्हें लगा कि यही वास्तविकता गीत को और अधिक प्रभावशाली बनाती है। यही कारण है कि यह गीत आज भी विदाई समारोहों में विशेष स्थान रखता है। समय के साथ यह गीत केवल एक फिल्मी प्रस्तुति नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारिवारिक भावनाओं का प्रतीक बन गया। विवाह समारोहों में विदाई के क्षणों में इसकी मौजूदगी आज भी उतनी ही प्रभावशाली महसूस की जाती है जितनी दशकों पहले थी। यह गीत आने वाली पीढ़ियों के लिए भी हिंदी सिनेमा की उस विरासत का हिस्सा बना रहेगा, जिसमें संगीत केवल मनोरंजन नहीं बल्कि भावनाओं की गहराई को व्यक्त करने का माध्यम बनता है। इसकी लोकप्रियता यह साबित करती है कि सच्ची कला समय की सीमाओं से परे जाकर हमेशा जीवित रहती है। आज भी जब यह गीत गूंजता है, तो हर श्रोता के मन में विदाई का वही पुराना भाव और अपनापन लौट आता है, जो इसे अमर बनाता है।

IPL 2026 के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज कौन? टॉप-5 लिस्ट चौंकाएगी

नई दिल्ली । आईपीएल 2026 का रोमांचक सीजन समाप्त हो चुका है और एक बार फिर Royal Challengers Bengaluru ने खिताब अपने नाम कर लिया। सीजन खत्म होने के बाद बल्लेबाजों के प्रदर्शन को लेकर कई दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। बल्लेबाजी औसत के मामले में सबसे बड़ा सरप्राइज यह रहा कि Virat Kohli टॉप-5 में पांचवें स्थान पर रहे, जबकि सूची में शीर्ष स्थान पर Ravindra Jadeja का कब्जा रहा। IPL 2026 में सर्वाधिक बल्लेबाजी औसत वाले टॉप-5 बल्लेबाज1. Ravindra Jadeja (राजस्थान रॉयल्समैच: 14पारियां: 11रन: 266औसत: 66.50जडेजा ने सीमित अवसरों में शानदार बल्लेबाजी करते हुए सीजन का सर्वश्रेष्ठ औसत दर्ज किया। 2. Quinton de Kock (मुंबई इंडियंस)मैच: 3रन: 132औसत: 66.00डिकॉक ने केवल तीन मैच खेले, लेकिन प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए दूसरे स्थान पर रहे। 3. Rinku Singh (कोलकाता नाइट राइडर्स)मैच: 14पारियां: 11रन: 295औसत: 59.00रिंकू सिंह ने फिनिशर की भूमिका निभाते हुए लगातार उपयोगी पारियां खेलीं। 4. Anshul Kamboj (चेन्नई सुपर किंग्स)मैच: 14पारियां: 4रन: 58औसत: 58.00मुख्य रूप से गेंदबाजी ऑलराउंडर होने के बावजूद अंशुल कंबोज ने बल्लेबाजी में भी प्रभाव छोड़ा। 5. Virat Kohli (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु)मैच: 16पारियां: 16रन: 675औसत: 56.25कोहली इस सूची में पांचवें स्थान पर रहे, लेकिन रन बनाने के मामले में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और ऑरेंज कैप की दौड़ में भी शीर्ष बल्लेबाजों में शामिल रहे। दिलचस्प बात यह है कि औसत के आधार पर कोहली पांचवें स्थान पर हैं, लेकिन उन्होंने टॉप-5 में शामिल अधिकांश खिलाड़ियों की तुलना में कहीं अधिक रन बनाए। इससे साफ है कि पूरे सीजन में निरंतरता के मामले में उनका प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा।

‘किसी को बैन करने का अधिकार नहीं’, प्रोड्यूसर ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

नई दिल्ली । अभिनेता Ranveer Singh और फिल्म Don 3 को लेकर चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। वरिष्ठ फिल्म निर्माता T.P. Aggarwal ने Federation of Western India Cine Employees द्वारा रणवीर सिंह के खिलाफ घोषित गैर-सहयोग (नॉन-कोऑपरेशन) के फैसले को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। क्या है मामला?रिपोर्ट्स के अनुसार, रणवीर सिंह के डॉन 3 से अलग होने के बाद FWICE ने उनके खिलाफ नॉन-कोऑपरेशन की घोषणा की थी। संगठन का कहना था कि मामला सुलझने तक उससे जुड़े सदस्य अभिनेता के साथ काम नहीं करेंगे। टीपी अग्रवाल ने क्या कहा?पूर्व Film Federation of India अध्यक्ष टीपी अग्रवाल ने मुंबई की दिंडोशी सिविल कोर्ट में FWICE और Indian Motion Picture Producers Association के खिलाफ याचिका दायर की है। उनका तर्क है कि किसी भी फिल्म संगठन या ट्रेड बॉडी को किसी कलाकार को काम करने से रोकने का कानूनी अधिकार नहीं है। उनके अनुसार, ऐसे फैसले कलाकारों की आजीविका, काम करने की स्वतंत्रता और रचनात्मक अभिव्यक्ति पर सीधा असर डालते हैं। विवाद की जड़साल 2023 में रणवीर सिंह को डॉन 3 में नए डॉन के रूप में कास्ट किया गया था। फिल्म के निर्देशक Farhan Akhtar ने इसका टीजर भी जारी किया था, जिसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला था। बाद में खबरें आईं कि रचनात्मक मतभेदों के चलते रणवीर इस प्रोजेक्ट से दूर हो गए। अब आगे क्या?मामला अब अदालत में पहुंच चुका है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कोर्ट फिल्म संगठनों की शक्तियों और कलाकारों के काम करने के अधिकार को लेकर क्या रुख अपनाती है। इस फैसले का असर भविष्य में फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और संगठनों के बीच होने वाले विवादों पर भी पड़ सकता है। यह मामला केवल रणवीर सिंह तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि फिल्म उद्योग में ट्रेड बॉडी की भूमिका और उनके अधिकारों पर भी एक बड़ी बहस छेड़ सकता है।

बजरंगबली को प्रिय हैं ये भोग, बड़ा मंगल पर मिलेगा विशेष आशीर्वाद

नई दिल्ली । ज्येष्ठ मास के पांचवें बड़े मंगल का पर्व आज 2 जून 2026 को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़े मंगल के दिन भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं, आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम होते हैं। इस दिन बजरंगबली को उनके प्रिय भोग अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सच्चे मन से हनुमान जी की आराधना करने वाले भक्तों पर उनकी विशेष कृपा बरसती है। बड़े मंगल के अवसर पर कुछ विशेष भोग चढ़ाने से मनोकामनाओं की पूर्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। 1. बूंदी का भोगहनुमान जी को बूंदी अत्यंत प्रिय मानी जाती है। बड़े मंगल के दिन पूजा के बाद बूंदी का भोग लगाने से घर-परिवार में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह भोग भक्तों के जीवन में खुशहाली लाने वाला माना जाता है। 2. बेसन के लड्डूबेसन के लड्डू बजरंगबली के सबसे प्रिय प्रसादों में शामिल हैं। धार्मिक मान्यता है कि हनुमान जी को बेसन के लड्डू अर्पित करने और प्रसाद स्वरूप बांटने से बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते हैं। इससे परिवार में समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है। 3. भुने चने और गुड़हनुमान जी को गेंदे या कमल का फूल अर्पित करने के बाद भुने हुए चने और गुड़ का भोग चढ़ाना शुभ माना जाता है। कहा जाता है कि यह उपाय मंगल, शनि और अन्य ग्रहों के दोषों को शांत करने में सहायक होता है। साथ ही घर में चल रहे विवाद और कलह भी कम होते हैं। 4. मीठा पानधार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि कोई विशेष मनोकामना पूरी करनी हो तो हनुमान जी को गुलकंद युक्त मीठे पान का भोग अर्पित करना चाहिए। इससे रुके हुए कार्य पूरे होने लगते हैं और व्यक्ति का आत्मविश्वास मजबूत होता है। 5. इमरती या जलेबीबड़े मंगल के दिन इमरती या जलेबी का भोग चढ़ाने का भी विशेष महत्व है। मान्यता है कि इससे न केवल हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि अन्य देवी-देवताओं का भी आशीर्वाद मिलता है। यह भोग सफलता, आत्मबल और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। सप्ताह के दिनों के अनुसार हनुमान जी के प्रिय भोगसोमवार : हलवामंगलवार : गुड़ के लड्डूबुधवार : पंचमेवागुरुवार : बूंदी या बूंदी के लड्डूशुक्रवार : केसर भातशनिवार : इमरतीरविवार : डंठल वाला पान बड़े मंगल के दिन हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ और राम नाम का जाप विशेष फलदायी माना गया है। श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने से भय, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं तथा जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।

विपक्षी एकता दिखाने की फिर से तैयारी…. दिल्ली में महाबैठक करेगा INDIA' गठबंधन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार (Central Government) को घेरने और विपक्षी एकता (Opposition unity) दिखाने के लिए ‘INDI’ गठबंधन दिल्ली में महाबैठक (General Meeting) करने जा रहा है। जानकारी के मुताबिक 8 जून को यह बैठक हो सकती है। इसमें केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए संयुक्त रणनीति पर चर्चा होनी है। बैठक में करीब 15 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि भाग ले सकते हैं। ममता बनर्जी भी हो सकती हैं शामिलजानकारी के मुताबिक हाल के चुनाव में बंगाल में टीएमसी और तमिलनाडु में डीएमके की हार की समीक्षा और आगे की रणनीति पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई गई है। सूत्रों ने बताया कि बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आदि के भाग लेने की उम्मीद है। बता दें कि पश्चिम बंगाल की हार के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी भी बड़े संकट का सामना कर रही है। सूत्रों का कहना है कि टीएमसी के अंदर विरोध काफी तेज हो गया है और टीएमसी के कई बड़े नेता बीजेपी का दामन थाम सकते हैं। उधर पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हमला हो गया जिसको लेकर ममता बनर्जी केंद्र पर आक्रामक हैं। वहीं खबरें यहां तक आ रही हैं कि पार्टी में ममता बनर्जी के कद पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। राहुल गांधी बोले- रीति और नीति को प्रसारित करेंराहुल गांधी ने एक दिन पहले ही पार्टी संगठन को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं को पार्टी की रीति और नीति को जन-जन तक पहुंचाना है। गांधी सोमवार को कांग्रेस की ओर से अजमेर के पुष्कर स्थित तिलोरा में आयोजित 10 दिवसीय सृजन संगठन चिंतन शिविर के समापन पर कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने शिविर में जिला अध्यक्षों को संगठन के प्रति निष्ठा और एकजुटता का संदेश दिया। उन्होंने जिला अध्यक्षों को स्पष्ट कहा कि संगठन से सर्वोपरि कुछ भी नहीं है। पार्टी की रीति-नीति आम जनता के बीच प्रसारित कर कांग्रेस को और मजबूत किया जाए। शिविर को सफल बताते हुए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि संगठन सृजन अभियान के साथ चिंतन शिविर से कांग्रेस के कार्यकर्ता में एक नया जोश पैदा होगा और नयी जिम्मेदारी के साथ कांग्रेस कार्यकर्ता जब पार्टी की रीति के साथ जब सड़कों पर उतरकर जनता के बीच जाएगा तो जनता का मत और समर्थन कांग्रेस को प्राप्त होगा। यही इस शिविर का मूल उद्देश्य भी है।

शनि प्रदोष व्रत 2026: शिव कृपा से शांत होंगे शनि दोष, साढ़ेसाती-ढैय्या से राहत पाने के लिए करें ये उपाय

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। जब प्रदोष व्रत शनिवार के दिन पड़ता है, तो उसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और शनि देव दोनों की आराधना करने से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा के कष्टों में राहत मिलती है। शनि प्रदोष व्रत 2026 कब है?त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जून 2026, रात 10:22 बजेत्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जून 2026, रात 12:43 बजेशनि प्रदोष व्रत: शनिवार, 27 जून 2026प्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 4:49 बजे से रात 9:03 बजे तकप्रदोष काल में करें ये विशेष पूजा भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए प्रदोष काल मेंशिवलिंग पर जल या गंगाजल अर्पित करें।बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और पुष्प चढ़ाएं।घी का दीपक और धूप जलाएं।“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।शिव परिवार की पूजा करें।शनि दोष से राहत के लिए करें ये उपाययदि कुंडली में शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही है तो: पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।शनि देव को नीले या सफेद पुष्प अर्पित करें।“ॐ शं शनैश्चराय नमः” अथवा “ॐ शं शनिश्चराय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।काला तिल, काला चना, काले वस्त्र या भोजन का दान करें।जरूरतमंदों की सहायता करें। इस दिन क्या न करें?मांसाहार और शराब का सेवन न करें।किसी का अपमान या अनादर न करें।झूठ, क्रोध और कटु वचन से बचें।पिता, गुरु और बड़े भाई का अनादर न करें।पीपल वृक्ष के आसपास गंदगी न फैलाएं।साढ़ेसाती और ढैय्या के लिए प्रभावी मंत्र ॐ शं शनैश्चराय नममान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप शनि की प्रतिकूलता को कम करने में सहायक माना जाता है। शनिवार के दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक इसका जाप विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यतशास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को शनि देव का गुरु माना जाता है। इसलिए शनि प्रदोष व्रत पर शिव पूजा करने से शनि से जुड़े कष्टों में कमी आने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली पर निर्भर करते हैं, इसलिए विशेष उपायों के लिए किसी योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना उचित माना जाता है।

हर समारोह में वंदे मातरम् के सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं : शशि थरूर

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Congress MP Shashi Tharoor) ने वंदे मातरम् (VANDAM MATARAM) के गायन को लेकर चल रही बहस के बीच बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रीय गीत के सभी पांच पदों का गायन करवाना उचित नहीं लगता। संवाददाताओं से बात करते हुए थरूर ने कहा कि वंदे मातरम का सभी सम्मान करते हैं, लेकिन हर समारोह में इसके सभी अंतरे बजाने को अनिवार्य करना तर्कसंगत नहीं है। कांग्रेस सांसद ने कहा, “वंदे मातरम राष्ट्रगीत है और जब इसे गाया जाता है तो हम सम्मानपूर्वक खड़े हो जाते हैं। इसका पहला अंतरा या शुरुआती दो अंतरे, ज्यादातर लोगों को मुंह जुबानी याद होते हैं।” थरूर ने बताया कि परंपरागत रूप से यह गीत किसी कार्यक्रम की शुरुआत में एक बार गाया जाता है, जबकि राष्ट्रगान अलग से, अक्सर अंत में बजाया जाता है। उन्होंने कहा, “अब वे चाहते हैं कि हर कार्यक्रम की शुरुआत में और अंत में पांचों अंतरे गाए जाएं। मुझे लगता है कि यह एक अनावश्यक थोपा हुआ नियम है।” थारूर ने इस बात पर जोर दिया कि उन्हें राष्ट्रगीत से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा, “हम सभी वंदे मातरम का सम्मान करते हैं। मैं खुशी-खुशी इसे आपके लिए गा सकता हूं।” राज्य सरकार और राज्यपाल के रुख में अंतर का संकेतकांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थरूर ने कहा कि केरल सरकार का रुख यह रहा है कि वंदे मातरम् का पूरा संस्करण गाना वैकल्पिक है। वहीं, उन्होंने संकेत दिया कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर की राय इससे अलग दिखाई देती है। थरूर के मुताबिक, इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय की आवश्यकता पड़ सकती है क्योंकि संसद द्वारा ऐसा कोई कानून पारित नहीं किया गया है जो हर कार्यक्रम में पूरे गीत के गायन को अनिवार्य बनाता हो। उन्होंने इसे मुख्य रूप से परंपरा और प्रचलन से जुड़ा विषय बताया। ‘राष्ट्रीय गीत से कोई आपत्ति नहीं’थरूर ने स्पष्ट किया कि उन्हें वंदे मातरम् से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी भारतीय इस राष्ट्रीय गीत का सम्मान करते हैं और वह स्वयं भी इसे खुशी से गा सकते हैं। उन्होंने एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि नई दिल्ली में आयोजित उस कार्यक्रम में, जिसमें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन मौजूद थे, वंदे मातरम् का पूरा संस्करण कार्यक्रम की शुरुआत और अंत दोनों समय बजाया गया था। ‘दर्शकों के लिए यह व्यावहारिक चुनौती बन जाती है’थरूर का कहना था कि अपेक्षाकृत लंबा और कम परिचित गीत जब एक ही कार्यक्रम में दो बार सुनाया जाता है तो दर्शकों के लिए लंबे समय तक खड़े रहना एक मुद्दा बन सकता है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आयोजनों में परंपरागत रूप से वंदे मातरम् का वही हिस्सा गाया जाता रहा है जिसकी अवधि लगभग राष्ट्रीय गान के बराबर होती है। यह स्वरूप लंबे समय से व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता रहा है और लोगों द्वारा सम्मानित भी है। विवाद का सौहार्दपूर्ण समाधान निकलने की उम्मीदइस पूरे विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए थरूर ने उम्मीद जताई कि इसका समाधान आपसी समझ और सौहार्द के साथ निकलेगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदाधिकारियों की मौजूदगी वाले विशेष औपचारिक कार्यक्रमों में एक बार पूरा गीत गाए जाने को समझा जा सकता है। हालांकि, किसी छोटे कार्यक्रम में पूरे वंदे मातरम् का दो बार गायन करवाने के पीछे उन्हें कोई स्पष्ट तर्क नजर नहीं आता। उनके अनुसार यह व्यवस्था न तो विशेष रूप से व्यावहारिक है और न ही बहुत प्रभावी।