अस्पताल व्यवस्था पर सवाल, सतना में मरीज को लेने आइसोलेशन वार्ड तक बाइक पहुंची, वीडियो हुआ वायरल

मध्य प्रदेश के सतना जिले में स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में शनिवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। एक मरीज को वार्ड से नीचे ले जाने के लिए जब समय पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका, तो परिजन मजबूरी में बाइक लेकर अस्पताल के भीतर फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच गया। यह पूरा घटनाक्रम किसी फिल्मी दृश्य जैसा प्रतीत हुआ, जिसमें व्यवस्था की कमी और आम नागरिक की परेशानी दोनों एक साथ सामने आ गए। मध्य प्रदेश के सतना शहर में घटी इस घटना में सीताराम सोनी नामक युवक अपने परिजन अंजनी सोनी को, जो कि आइसोलेशन वार्ड में भर्ती थे, इलाज के बाद रेफर किए जाने पर रीवा ले जाने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने मरीज को बेहतर उपचार के लिए अन्य अस्पताल भेजने का निर्णय लिया था, लेकिन जब मरीज को वार्ड से नीचे लाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो स्ट्रेचर की अनुपलब्धता एक बड़ी बाधा बन गई। काफी देर तक इंतजार करने और प्रयास करने के बावजूद जब कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं मिली तो परिजन ने असामान्य कदम उठाते हुए बाइक से ही वार्ड तक पहुंचने का प्रयास किया। अस्पताल परिसर में बाइक का आइसोलेशन वार्ड तक पहुंच जाना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आपात स्थिति में बुनियादी संसाधनों की कमी किस तरह लोगों को मजबूरी में असामान्य कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है। मौके पर मौजूद लोग इस दृश्य को देखकर स्तब्ध रह गए और कुछ ही समय में यह घटना चर्चा का विषय बन गई। प्रारंभिक तौर पर इसे अस्पताल की बड़ी चूक माना गया, हालांकि बाद में जांच में सामने आया कि युवक का उद्देश्य किसी तरह की अव्यवस्था या हंगामा करना नहीं था, बल्कि वह केवल अपने परिजन को सुरक्षित तरीके से नीचे लाने का प्रयास कर रहा था। घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप किया और मरीज के लिए स्ट्रेचर की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसके बाद मरीज को सुरक्षित तरीके से एम्बुलेंस के माध्यम से रीवा के लिए रेफर किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज को आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा चुकी थी और आगे के इलाज के लिए उसे स्थानांतरित किया गया है। बताया जा रहा है कि मरीज अंजनी सोनी को घोड़े की लात लगने से गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्र भेजने की सलाह दी थी। लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान सामने आई व्यवस्थागत कमी ने अस्पताल की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर आपात स्थिति में मरीजों को स्थानांतरित करने की व्यवस्था को लेकर। इस घटना ने एक बार फिर यह मुद्दा सामने ला दिया है कि सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और उनका त्वरित उपयोग कितना महत्वपूर्ण है। स्ट्रेचर, एम्बुलेंस और त्वरित सहायता प्रणाली जैसी सुविधाएं यदि समय पर उपलब्ध न हों, तो मरीज और उनके परिजन को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन ने मामले की समीक्षा की बात कही है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
इंदौर के ठेकेदार शकील शाह की गिरफ्तारी, आदिवासी युवती से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले में एक आदिवासी मजदूर युवती से कथित छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने इंदौर निवासी ठेकेदार शकील शाह को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई कोतवाली थाना क्षेत्र में की गई, जहां आरोपी लंबे समय से पीड़िता को परेशान कर रहा था। मामला तब सामने आया जब शनिवार को आरोपी बस स्टैंड क्षेत्र में देखा गया और युवती के पिता ने तुरंत पुलिस को सूचना देकर उसे पकड़वाने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में ले लिया और थाने ले जाकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जानकारी के अनुसार, पीड़िता अपने परिवार के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा आरसेटी के पास चल रहे निर्माण कार्य में मजदूरी कर रही थी। इसी दौरान ठेकेदारी कार्य से जुड़े इंदौर निवासी शकील शाह पर युवती से छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगे। परिजनों ने शुरुआती स्तर पर ही विरोध जताया था और आरोपी को काम स्थल से दूर रहने की चेतावनी दी थी, लेकिन इसके बावजूद आरोपी ने कथित रूप से अपनी हरकतें जारी रखीं और बाद में एक बार फिर आलीराजपुर पहुंचकर युवती से संपर्क करने और उसे प्रभावित करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के अनुसार, आरोपी की गतिविधियों को लेकर पहले से ही असंतोष का माहौल था। शनिवार को जब उसकी मौजूदगी बस स्टैंड क्षेत्र में देखी गई तो युवती के परिजनों ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर पहुंचकर आरोपी को हिरासत में लिया और उसे कोतवाली थाना लाया गया, जहां उससे प्रारंभिक पूछताछ की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़, रास्ता रोकने और एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत आवश्यक सभी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी। इस घटना के बाद क्षेत्र में सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। कई संगठनों के प्रतिनिधि कोतवाली थाने पहुंचे और उन्होंने मांग की कि बाहरी ठेकेदारों और कार्य पर्यवेक्षकों की पृष्ठभूमि की जांच और सत्यापन को अनिवार्य बनाया जाए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में है और आगे की जांच के आधार पर अतिरिक्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि पीड़िता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध सुनिश्चित किए जाएंगे।
बीएसएफ कॉलोनी में दर्दनाक हादसा, कार की टक्कर से बच्चा गंभीर रूप से घायल, आरोपी मौके से फरार

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां बीएसएफ कॉलोनी क्षेत्र में सड़क पर चल रहे एक मासूम बच्चे को कार ने जोरदार टक्कर मार दी। यह हादसा इतना भयावह था कि बच्चा टक्कर लगते ही कई फीट ऊपर उछलकर नीचे गिर गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। पूरी घटना पास लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसे देखने के बाद स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया है। जानकारी के अनुसार यह घटना शनिवार शाम करीब चार बजे की है, जब दो बच्चे अपने घर के बाहर सड़क के किनारे टहल रहे थे। इसी दौरान एक कार तेज रफ्तार और असंतुलित तरीके से सड़क पर आई और अचानक एक बच्चे को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बच्चा हवा में उछलकर दूर जा गिरा। हादसे के बाद कार पास के एक घर से टकरा गई, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के बाद कार में सवार युवक तुरंत मौके से फरार हो गए और घायल बच्चे की कोई मदद नहीं की। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत बच्चे को उठाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है और उसका इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और लोग सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। फुटेज के आधार पर कार और उसमें सवार युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी तेज रफ्तार वाहनों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन इस तरह की गंभीर घटना पहली बार हुई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। लोगों ने मांग की है कि कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों में स्पीड कंट्रोल और ट्रैफिक निगरानी को और सख्त किया जाए, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। डॉक्टरों के अनुसार घायल बच्चे की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और उसे आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे आरोपी वाहन चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर शहरों में सड़क सुरक्षा और लापरवाह ड्राइविंग के खतरों को उजागर करती है, जहां एक छोटी सी चूक भी किसी मासूम की जान पर भारी पड़ सकती है। पुलिस प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
तनीषा मुखर्जी ने फराह खान को कराया अपने आलीशान घर का टूर, काजोल की मदद से खरीदे गए आशियाने का किया खुलासा

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेत्री तनीषा मुखर्जी हाल ही में फिल्ममेकर फराह खान के व्लॉग में नजर आईं, जहां उन्होंने अपने मुंबई स्थित आलीशान और बेहद खास घर का टूर कराया। इस दौरान तनीषा ने न सिर्फ अपने घर की खूबसूरती और डिजाइन के बारे में बात की, बल्कि उससे जुड़ी निजी और पारिवारिक यादों को भी साझा किया, जिसने इस बातचीत को और भी दिलचस्प बना दिया। तनीषा मुखर्जी का यह घर अपने क्लासिक और पुराने दौर की झलक के लिए जाना जाता है। घर के अंदर लकड़ी का पारंपरिक फर्नीचर, पुरानी शैली की सजावट और विशाल सीढ़ियां इसे एक अलग पहचान देती हैं। घर का हर कोना किसी न किसी कहानी को अपने अंदर समेटे हुए दिखाई देता है, जहां आधुनिकता और विरासत का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है। फराह खान ने भी घर के माहौल की सराहना करते हुए कहा कि मुंबई जैसे शहर में इस तरह की शांति और पुरानी शैली का वातावरण बहुत कम देखने को मिलता है। बातचीत के दौरान तनीषा मुखर्जी ने अपने घर की खरीद और उससे जुड़ी आर्थिक परिस्थितियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि इस घर को लेने में उनकी बहन काजोल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और आर्थिक रूप से उनकी मदद की थी। तनीषा ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि घर से जुड़े कई बड़े फैसलों में काजोल का योगदान काफी अहम रहा है। उनकी यह बात सुनकर फराह खान भी मुस्कुरा उठीं और माहौल बेहद सहज और पारिवारिक बन गया। तनीषा ने यह भी साझा किया कि यह घर केवल एक संपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी मां तनुजा और पूरे परिवार की कई पुरानी यादों से जुड़ा हुआ एक भावनात्मक स्थान है। घर में रखे कई सामान पुराने घर से लाए गए हैं, जिन्हें आज भी उसी तरह संभालकर रखा गया है। यह घर परिवार की विरासत और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है, जहां हर वस्तु किसी न किसी याद को जीवित रखती है। व्लॉग के दौरान तनीषा और काजोल के रिश्ते की भी एक झलक सामने आई, जिससे यह साफ दिखाई दिया कि दोनों के बीच मजबूत पारिवारिक बंधन मौजूद है। तनीषा ने जिस सहजता से अपनी बहन के योगदान का उल्लेख किया, उससे उनके रिश्ते की गहराई और आपसी विश्वास का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है, जहां दर्शक उनकी पारिवारिक बॉन्डिंग और घर की खूबसूरती की सराहना कर रहे हैं।
कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव के बीच सिद्धारमैया को बड़ी जिम्मेदारी देने के संकेत, केसी वेणुगोपाल का बयान बना चर्चा का केंद्र

नई दिल्ली । कर्नाटक में सत्ता और संगठन के स्तर पर हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे सिद्धारमैया ने अब औपचारिक रूप से कमान डीके शिवकुमार को सौंप दी है, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर उनकी आगे की भूमिका को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का बयान सुर्खियों में आ गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सिद्धारमैया को पार्टी ‘आराम नहीं करने देगी’ और उन्हें राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें अनुभवी नेताओं को संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में लगातार सक्रिय रखने की योजना दिखाई देती है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में जब डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से नेता चुना गया, उसी समय पार्टी के भीतर यह संदेश भी देने की कोशिश हुई कि यह बदलाव किसी एक नेता के पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि संगठनात्मक पुनर्संरचना का हिस्सा है। केसी वेणुगोपाल ने इस मौके पर सिद्धारमैया की राजनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके अनुभव का उपयोग आगे भी किया जाएगा। उनके अनुसार, सिद्धारमैया की राजनीतिक समझ और ओबीसी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के दौरान कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और दिल्ली में एक बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी दिया था। यह प्रस्ताव इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं को अग्रिम पंक्ति में बनाए रखना चाहती है। हालांकि 78 वर्षीय सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और उन्होंने कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने की इच्छा जताई। विधायक दल की बैठक में खुद सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखकर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सहज बनाने में अहम भूमिका निभाई। वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से शिवकुमार को नेता चुन लिया। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर एकता का संदेश देने की कोशिश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। बाद में सिद्धारमैया ने शिवकुमार को शुभकामनाएं देते हुए भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष की बात कही। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भले ही औपचारिक रूप से पूरा हो गया हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर सिद्धारमैया की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है और पार्टी उन्हें विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने संभाला नौसेना प्रमुख का पद, आत्मनिर्भर और आधुनिक नौसेना पर जोर

नई दिल्ली । भारतीय नौसेना के नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने 31 मई को नौसेना प्रमुख का पदभार ग्रहण कर लिया। साउथ ब्लॉक परिसर में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया, जिसके साथ ही वे भारतीय नौसेना के 27वें नौसेना प्रमुख बन गए। इस अवसर पर निवर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर जाकर देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और औपचारिक रूप से सेवा से सेवानिवृत्त हुए। एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन का नौसैनिक करियर लंबा और विविध अनुभवों से भरपूर रहा है। उन्हें वर्ष 1987 में भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुआ था और वे संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली के विशेषज्ञ माने जाते हैं। अपने सेवा काल में उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, संयुक्त सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज और कई अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक संस्थानों से प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिससे उनकी रणनीतिक और तकनीकी समझ को और मजबूती मिली है। नौसेना प्रमुख का कार्यभार संभालने के बाद अपने पहले संबोधन में एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि वे इस जिम्मेदारी को विनम्रता, गर्व और कर्तव्य की भावना के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य लगातार बदल रहा है और अधिक जटिल होता जा रहा है, ऐसे में भारतीय नौसेना की परिचालन तत्परता को सर्वोच्च स्तर पर बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए नौसेना को हर समय तैयार रहना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नौसेना पहले से ही आधुनिकीकरण और क्षमता विस्तार की दिशा में आगे बढ़ रही है और इस प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा। चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करने, नई तकनीकों को तेजी से अपनाने और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के विकास को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उनके अनुसार आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में नौसेना की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और आने वाले समय में स्वदेशीकरण को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी। एडमिरल स्वामीनाथन ने संयुक्त सैन्य संचालन को मजबूत करने पर भी जोर दिया और कहा कि तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय आज की रणनीतिक जरूरत है। उन्होंने नौसेना कर्मियों की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय नौसेना के अधिकारी, नाविक और महिला कर्मी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ पेशेवरों में शामिल हैं और उनके कल्याण, प्रशिक्षण तथा कार्य वातावरण में सुधार उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी रहेगी। अपने संबोधन में उन्होंने निवर्तमान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी के योगदान को भी याद किया और कहा कि उनके नेतृत्व में नौसेना ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं और एक मजबूत दिशा प्राप्त की। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी विरासत नौसेना को आगे भी प्रेरित करती रहेगी। नए नौसेना प्रमुख ने अपने करियर में कई महत्वपूर्ण युद्धपोतों और विमानवाहक पोत की कमान संभाली है, जिससे उन्हें समुद्री संचालन का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। उनके नेतृत्व में भारतीय नौसेना से यह अपेक्षा की जा रही है कि वह न केवल तकनीकी रूप से अधिक उन्नत बनेगी, बल्कि रणनीतिक रूप से भी वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और मजबूत करेगी।
तंबाकू सेवन में वैश्विक गिरावट के बावजूद किशोरों में वेपिंग बना गंभीर स्वास्थ्य संकट, WHO की रिपोर्ट में चेतावनी

नई दिल्ली । दुनिया भर में तंबाकू सेवन को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और वैश्विक स्तर पर इसके उपयोग में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही एक नई और गंभीर चुनौती उभरकर सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। यह चुनौती किशोरों में तेजी से बढ़ती वेपिंग यानी ई-सिगरेट के उपयोग की है, जिसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक नया खतरा माना जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले दो दशकों में तंबाकू उपयोग में उल्लेखनीय कमी आई है और कई देशों में सख्त नीतियों के कारण इसके सेवन पर नियंत्रण पाया गया है। वर्ष 2000 में जहां दुनिया भर में लगभग 1.379 अरब लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का उपयोग करते थे, वहीं 2024 तक यह संख्या घटकर लगभग 1.202 अरब रह गई है। यह गिरावट सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है। हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच किशोरों में वेपिंग का बढ़ता चलन एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1.5 करोड़ किशोर, जिनकी उम्र 13 से 15 वर्ष के बीच है, ई-सिगरेट या वेपिंग का उपयोग कर रहे हैं। कई देशों में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया है कि किशोरों में वेपिंग की दर वयस्कों की तुलना में कई गुना अधिक है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ई-सिगरेट और फ्लेवरयुक्त निकोटीन उत्पादों की आसान उपलब्धता ने युवाओं को तेजी से इसकी ओर आकर्षित किया है। इन उत्पादों को अक्सर सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रचारित किया जाता है, लेकिन इनमें मौजूद निकोटीन अत्यधिक नशे की लत पैदा करने वाला पदार्थ है, जो किशोरों के विकसित हो रहे मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तंबाकू उद्योग लगातार अपने उत्पादों और विपणन रणनीतियों में बदलाव कर रहा है ताकि नई पीढ़ी को आकर्षित किया जा सके। फ्लेवरयुक्त ई-सिगरेट, निकोटीन पाउच और अन्य नए उत्पादों के माध्यम से युवाओं को लक्ष्य बनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर चुनौती के रूप में देख रहे हैं। लिंग और क्षेत्रीय स्तर पर भी तंबाकू उपयोग में विविध रुझान देखे जा रहे हैं। पुरुषों में तंबाकू सेवन अभी भी अधिक है, जबकि महिलाओं में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में सुधार देखने को मिला है, जबकि अफ्रीका और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में तंबाकू उपयोग बढ़ने की आशंका जताई गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्पष्ट किया है कि तंबाकू से हर वर्ष लाखों लोगों की मौत होती है और यह हृदय रोग, कैंसर तथा श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियों का प्रमुख कारण बना हुआ है। ऐसे में भले ही पारंपरिक तंबाकू उपयोग में गिरावट एक सकारात्मक संकेत हो, लेकिन वेपिंग का बढ़ता चलन इस प्रगति को चुनौती दे रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते किशोरों में वेपिंग की आदत को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में यह एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकता है। इसी कारण कई देशों में इसके नियमन और जागरूकता अभियानों को और तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
सैदुलाजब बिल्डिंग हादसे में एक की मौत, दिल्ली सीएम ने मौके पर पहुंचकर लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया

नई दिल्ली । दक्षिण दिल्ली के सैदुलाजब इलाके में हुए दर्दनाक निर्माणाधीन इमारत हादसे के बाद राजधानी में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हैं और उनका इलाज अस्पताल में जारी है। घटना के बाद प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई शुरू करते हुए जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। जानकारी के अनुसार यह हादसा शनिवार शाम उस समय हुआ जब चार मंजिला निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के गिरने से आसपास का इलाका भी प्रभावित हुआ, क्योंकि मलबा पास स्थित एक टीन शेड कैंटीन पर आ गिरा, जहां उस समय लोग मौजूद थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का कार्य शुरू किया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आसपास की जर्जर और खतरनाक इमारतों की तत्काल जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया। प्रशासनिक स्तर पर जानकारी दी गई है कि घटना के बाद महरौली पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए जा रहे हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और किन परिस्थितियों में इमारत अचानक गिर गई। अधिकारियों के अनुसार अब तक मलबे से कुल नौ लोगों को निकाला गया है, जिनमें से कुछ को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया, जबकि अन्य को बचाव दलों ने सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रख रही है। घटना के बाद मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा और बचाव टीमें तैनात हैं और मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।
कृषि क्षेत्र में बदलाव की दिशा में बड़ा कदम, 22 राज्यों ने प्राकृतिक खेती को नीतिगत समर्थन दिया

नई दिल्ली । देश में कृषि विकास के अगले चरण को नई दिशा देने के उद्देश्य से प्राकृतिक खेती को लेकर व्यापक सहमति बनती दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार के अनुसार 22 राज्यों के कृषि मंत्रियों ने न केवल इस पद्धति को नीतिगत स्तर पर समर्थन दिया है, बल्कि किसानों का विश्वास बढ़ाने के लिए इसे अपने-अपने खेतों में अपनाकर व्यावहारिक उदाहरण भी प्रस्तुत किए हैं। यह जानकारी राष्ट्रीय राजधानी स्थित पूसा परिसर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन के दौरान सामने आई, जहां देशभर के कृषि मंत्री एक मंच पर एकत्र हुए और कृषि क्षेत्र के भविष्य को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सम्मेलन में कृषि सुधार, खरीफ फसलों की तैयारी, दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि कृषि भूमि की रक्षा केवल उत्पादन बढ़ाने का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि नीति का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि इसे टिकाऊ और संतुलित बनाना होना चाहिए। केंद्र सरकार ने इस दौरान स्पष्ट किया कि रासायनिक उर्वरकों का पूरी तरह से निषेध सरकार का लक्ष्य नहीं है, बल्कि उनका वैज्ञानिक और संतुलित उपयोग सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके लिए देशभर में जागरूकता अभियान चलाने और संस्थागत स्तर पर मजबूत निगरानी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अधिकारियों ने सुझाव दिया कि इस दिशा में एक समन्वित तंत्र विकसित किया जाए, जिससे किसानों तक सही जानकारी और तकनीकी सहायता समय पर पहुंच सके। सम्मेलन में यह भी रेखांकित किया गया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्यों की सक्रिय भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। कई राज्यों ने अपने स्तर पर प्रयोगात्मक रूप से प्राकृतिक खेती को अपनाकर इसके सकारात्मक परिणामों को सामने रखा है, जिससे अन्य राज्यों में भी इस दिशा में रुचि बढ़ी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक खेती को बड़े पैमाने पर अपनाया जाता है तो इससे न केवल उत्पादन लागत कम हो सकती है, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरणीय संतुलन भी बेहतर हो सकता है। राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन को एक ऐसे मंच के रूप में देखा गया, जहां केंद्र और राज्यों के बीच कृषि नीतियों को लेकर साझा दृष्टिकोण विकसित हुआ। यहां यह भी तय किया गया कि खरीफ फसलों की योजना अब केवल मौसमी तैयारियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे दीर्घकालिक कृषि रणनीति से जोड़ा जाएगा। इसमें दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता, कृषि लागत में कमी, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और मिट्टी के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाएगी। कृषि क्षेत्र में इस तरह के समन्वित प्रयासों को विशेषज्ञ एक सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं, जो भविष्य में देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को एक साथ साधने में मदद कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि कृषि को केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है।
कर्नाटक सीएम पद परिवर्तन के बाद सिद्धारमैया की भूमिका पर बड़ा संकेत, कांग्रेस ने सक्रिय राजनीति में बनाए रखने का दिया संदेश

नई दिल्ली । कर्नाटक में सत्ता और संगठन के स्तर पर हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से मुख्यमंत्री पद संभाल रहे सिद्धारमैया ने अब औपचारिक रूप से कमान डीके शिवकुमार को सौंप दी है, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर उनकी आगे की भूमिका को लेकर चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल का बयान सुर्खियों में आ गया है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सिद्धारमैया को पार्टी ‘आराम नहीं करने देगी’ और उन्हें राज्य के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। यह बयान कांग्रेस की उस रणनीति की ओर संकेत करता है, जिसमें अनुभवी नेताओं को संगठन और चुनावी राजनीति दोनों में लगातार सक्रिय रखने की योजना दिखाई देती है। कांग्रेस विधायक दल की बैठक में जब डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से नेता चुना गया, उसी समय पार्टी के भीतर यह संदेश भी देने की कोशिश हुई कि यह बदलाव किसी एक नेता के पीछे हटने का संकेत नहीं है, बल्कि संगठनात्मक पुनर्संरचना का हिस्सा है। केसी वेणुगोपाल ने इस मौके पर सिद्धारमैया की राजनीतिक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके अनुभव का उपयोग आगे भी किया जाएगा। उनके अनुसार, सिद्धारमैया की राजनीतिक समझ और ओबीसी समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर भी उपयोगी साबित हो सकती है। सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा के दौरान कांग्रेस आलाकमान ने सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजने और दिल्ली में एक बड़ी जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव भी दिया था। यह प्रस्ताव इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा था कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं को अग्रिम पंक्ति में बनाए रखना चाहती है। हालांकि 78 वर्षीय सिद्धारमैया ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और उन्होंने कर्नाटक की राजनीति में ही सक्रिय रहने की इच्छा जताई। विधायक दल की बैठक में खुद सिद्धारमैया ने डीके शिवकुमार के नाम का प्रस्ताव रखकर नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया को सहज बनाने में अहम भूमिका निभाई। वरिष्ठ नेता जी परमेश्वर ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसके बाद विधायकों ने सर्वसम्मति से शिवकुमार को नेता चुन लिया। इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर एकता का संदेश देने की कोशिश भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी। बाद में सिद्धारमैया ने शिवकुमार को शुभकामनाएं देते हुए भावुक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने संविधान और देश के धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष की बात कही। इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन भले ही औपचारिक रूप से पूरा हो गया हो, लेकिन कांग्रेस के भीतर सिद्धारमैया की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण बनी हुई है और पार्टी उन्हें विभिन्न स्तरों पर सक्रिय रखने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।