जानकारी के अनुसार यह हादसा शनिवार शाम उस समय हुआ जब चार मंजिला निर्माणाधीन व्यावसायिक इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत के गिरने से आसपास का इलाका भी प्रभावित हुआ, क्योंकि मलबा पास स्थित एक टीन शेड कैंटीन पर आ गिरा, जहां उस समय लोग मौजूद थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, सिविल डिफेंस और अन्य एजेंसियों ने मिलकर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का कार्य शुरू किया।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का दौरा कर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने और जिम्मेदारी तय करने के आदेश दिए। इसके साथ ही उन्होंने आसपास की जर्जर और खतरनाक इमारतों की तत्काल जांच कराने और आवश्यकता पड़ने पर कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया।
प्रशासनिक स्तर पर जानकारी दी गई है कि घटना के बाद महरौली पुलिस थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है और जिला मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए जा रहे हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं और किन परिस्थितियों में इमारत अचानक गिर गई।
अधिकारियों के अनुसार अब तक मलबे से कुल नौ लोगों को निकाला गया है, जिनमें से कुछ को स्थानीय लोगों की मदद से बाहर निकाला गया, जबकि अन्य को बचाव दलों ने सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। इस हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में चल रहा है, जहां उनकी हालत पर डॉक्टरों की टीम लगातार नजर रख रही है।
घटना के बाद मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली इमारतों पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में सुरक्षा और बचाव टीमें तैनात हैं और मलबा हटाने का काम लगातार जारी है।