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पानी, नमी और फटने से सुरक्षित होंगे नए बैंक नोट, प्लास्टिक करेंसी को लेकर भारत में नई पहल तेज

नई दिल्ली । भारत की मौद्रिक प्रणाली में एक बड़े बदलाव की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है, जहां भारतीय रिजर्व बैंक देश में प्लास्टिक आधारित बैंक नोटों को शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यह कदम करीब 14 साल पुराने प्रस्ताव को फिर से सक्रिय करने के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर हाल के उच्च स्तरीय बैठकों में गंभीर विचार-विमर्श हुआ है। मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस संभावित बदलाव को लेकर लोगों और वित्तीय विशेषज्ञों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। यदि यह योजना लागू होती है तो भारतीय करेंसी के स्वरूप और उपयोग प्रणाली में एक ऐतिहासिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, आरबीआई की हालिया बैठकों में प्लास्टिक नोटों को लेकर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की संभावना पर चर्चा की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा कागजी नोटों की छपाई और रखरखाव पर होने वाले भारी खर्च को कम करना बताया जा रहा है। वर्तमान में हर साल बड़ी संख्या में नोट खराब होकर चलन से बाहर हो जाते हैं, जिन्हें फिर से छापने में हजारों करोड़ रुपये का खर्च आता है। इस आर्थिक बोझ को कम करने के लिए पॉलीमर आधारित नोटों को एक व्यावहारिक विकल्प माना जा रहा है, जो लंबे समय तक टिकाऊ हो सकते हैं। प्लास्टिक नोटों की सबसे बड़ी खासियत उनकी मजबूती और टिकाऊपन मानी जा रही है। ये नोट पानी, नमी और सामान्य गंदगी से प्रभावित नहीं होते, जिससे इनकी उम्र कागज के नोटों की तुलना में काफी अधिक हो सकती है। इसके अलावा ये नोट फटने से भी अधिक सुरक्षित होते हैं और इन्हें लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सकता है। तकनीकी दृष्टि से इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जाने की संभावना है, जिससे जालसाजी पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। भारत में इससे पहले वर्ष 2012 में कुछ चुनिंदा शहरों में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का सीमित परीक्षण किया गया था, लेकिन उस समय तकनीकी और परिचालन चुनौतियों के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका था। अब बदलती तकनीक और वैश्विक अनुभवों के आधार पर इस दिशा में फिर से संभावनाएं मजबूत होती दिख रही हैं। दुनिया के कई देश पहले ही प्लास्टिक मुद्रा अपना चुके हैं और इसे अधिक सुरक्षित एवं टिकाऊ विकल्प मानते हैं। यदि यह योजना लागू होती है तो यह भारतीय वित्तीय व्यवस्था में एक आधुनिक और तकनीक-आधारित बदलाव का संकेत होगा, जिससे न केवल लागत में कमी आएगी बल्कि मुद्रा प्रबंधन की गुणवत्ता भी बेहतर हो सकती है। आने वाले समय में इस पर आरबीआई की आधिकारिक घोषणा और आगे की रूपरेखा पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

शादी समारोह में हत्या केस: ग्वालियर में आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

ग्वालियर । ग्वालियर जिले के सिंधिया नगर स्थित “गड्ढे वाला मोहल्ला” में वर्ष 2024 में हुए चर्चित सोनू आदिवासी हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अठारहवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पारस कुमार जैन की अदालत ने मामले में पिता-पुत्र समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही प्रत्येक आरोपी पर पांच-पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। यह मामला 25-26 अप्रैल 2024 की दरमियानी रात का है, जब सोनू आदिवासी अपने रिश्तेदार की बेटी की शादी समारोह में शामिल होने के लिए सिंधिया नगर पहुंचा था। शादी का माहौल चल रहा था, लेकिन इसी दौरान पुरानी रंजिश ने एक दर्दनाक वारदात का रूप ले लिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोनू शादी समारोह के दौरान टेंट के पीछे स्थित किराना दुकान के पास गया था, तभी पहले से घात लगाए बैठे आरोपियों ने उसे घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आरोपी उसे धमकाते हुए कह रहे थे कि “तू दूसरों के मामलों में ज्यादा नेता बनता है, आज तुझे सबक सिखाते हैं।” जांच में यह सामने आया कि घटना से लगभग 15-20 दिन पहले आरोपियों का किसी अन्य व्यक्ति से विवाद हुआ था, जिसमें सोनू ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया था। इसी बात को लेकर आरोपी उससे रंजिश रखने लगे थे और बाद में इस हत्या की योजना बनाई गई। घटना के दौरान अनिल आदिवासी और उसके पिता वीरू आदिवासी ने सोनू के हाथ पकड़ लिए, ताकि वह किसी तरह बचाव न कर सके। इसी बीच मुख्य आरोपी सुनील आदिवासी ने लोहे का धारदार चाकू निकालकर सोनू के सीने और पसलियों पर कई वार कर दिए। हमले के बाद सोनू गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़ा और शादी समारोह स्थल पर अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। परिजन घायल सोनू को तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन गंभीर आंतरिक चोटों के कारण डॉक्टरों ने उसे बचा नहीं सके और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस जघन्य हत्या के मामले में अदालत में पेश गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी पाया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह हमला पूर्व नियोजित था और बदले की भावना से किया गया था। फैसले के बाद पीड़ित पक्ष ने राहत की सांस ली है, जबकि पुलिस और प्रशासन ने भी अदालत के निर्णय को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

ग्वालियर में दर्दनाक सुसाइड: भाई को वीडियो कॉल कर युवक ने खुद को मारी गोली

ग्वालियर । ग्वालियर शहर के डफरीन सराय इलाके में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात उस समय सनसनी फैल गई जब नगर निगम में क्रेन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत युवक ने अपनी लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। यह घटना करीब रात 1 बजे की बताई जा रही है। मृतक की पहचान गौरव भदौरिया के रूप में हुई है, जिसने आत्महत्या से पहले अपने बड़े भाई को वीडियो कॉल किया और उसी कॉल के दौरान 315 बोर की राइफल मुंह पर रखकर ट्रिगर दबा दिया। घटना के बाद परिवार और आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, गौरव भदौरिया ने आत्महत्या से पहले सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट भी किया था, जिसमें उसने अपने ही परिवार के कई सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने अपने पिता रणवीर सिंह भदौरिया, मां सत्यवती भदौरिया, बहन नीतू सिकरवार और मामी सीमा परमार पर मानसिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। पोस्ट में गौरव ने लिखा कि उसे लगातार पैसे और जमीन में हिस्सा देने का दबाव बनाया जा रहा था। उसने यह भी दावा किया कि उससे 5 लाख रुपए की मांग की गई थी और मांग पूरी न करने पर उसे जहर देकर मारने की धमकी दी गई थी। इसी तनाव और दबाव के चलते वह आत्महत्या करने के लिए मजबूर हुआ। गौरव ने यह भी लिखा कि वह अपनी बहन को पहले ही 2.40 लाख रुपए दे चुका था, इसके बावजूद उससे और पैसे मांगे जा रहे थे और मकान में हिस्सेदारी देने का दबाव बनाया जा रहा था। उसने आरोप लगाया कि इन सभी बातों के कारण वह मानसिक रूप से बेहद परेशान था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में पुलिस सभी आरोपों और पारिवारिक विवाद के पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। परिवार और रिश्तेदारों के बीच इस घटना के बाद माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो कॉल की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि मामला केवल पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव का है या इसके पीछे कोई और गहरी वजह भी शामिल है।

20 जून से पहले मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव, संगठन और सरकार में व्यापक बदलाव की तैयारी तेज

नई दिल्ली । केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में पहले बड़े मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियों ने राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि 20 जून से पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया जा सकता है। यह बदलाव सरकार के नए कार्यकाल की रणनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है, जिसमें संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर व्यापक पुनर्गठन की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस संभावित विस्तार से पहले 10 जून को भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। यह बैठक आगामी नीतिगत दिशा और संगठनात्मक समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक के बाद ही मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप दिया जाएगा और नई टीम की घोषणा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस बीच राजनीतिक हलकों में दो केंद्रीय मंत्रियों के संभावित इस्तीफे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि हाल ही में संगठनात्मक जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद दो वरिष्ठ नेताओं को ‘एक व्यक्ति एक पद’ के सिद्धांत के तहत केंद्र सरकार में अपने पद छोड़ने पड़ सकते हैं। इससे खाली होने वाले स्थानों पर नए चेहरों को शामिल किए जाने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे संगठन और सरकार दोनों में बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, यह बदलाव केवल पदों की अदला-बदली तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य आगामी चुनावी रणनीति को मजबूत करना भी है। सरकार और संगठन दोनों स्तरों पर ऐसे नेताओं को जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा रहा है, जो जमीनी स्तर पर प्रभावी भूमिका निभा सकें और विभिन्न राज्यों में राजनीतिक समीकरणों को संतुलित कर सकें। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए इस संभावित फेरबदल को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात और मणिपुर जैसे राज्यों में आने वाले चुनावों के मद्देनजर सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा हाल ही में संपन्न चुनावों के बाद कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली में सक्रियता भी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलावों की रूपरेखा तैयार हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संभावित मंत्रिमंडल विस्तार केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा, बल्कि इसके पीछे दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति भी जुड़ी हुई है। सरकार की कोशिश है कि नई टीम के माध्यम से नीतियों के क्रियान्वयन में तेजी लाई जाए और विभिन्न राज्यों में पार्टी की स्थिति को और मजबूत किया जाए। फिलहाल आधिकारिक रूप से किसी भी बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चाओं का दौर लगातार जारी है। आने वाले दिनों में इस पर स्पष्ट तस्वीर सामने आने की संभावना है, जिससे केंद्र की राजनीति में एक बार फिर महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।

चितौली गांव शोक में डूबा: भजन-कीर्तन के बीच किसान की सर्पदंश से मौत

ग्वालियर । ग्वालियर जिले के बेलगढ़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत चितौली गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां भागवत कथा में भजन-कीर्तन कर रहे एक किसान की सांप के काटने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक की पहचान 50 वर्षीय मदनलाल रावत के रूप में हुई है, जो पिछले एक सप्ताह से लकेश्वरी माता मंदिर में आयोजित भागवत कथा में नियमित रूप से शामिल हो रहे थे। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण वे न केवल कथा सुनते थे, बल्कि भजन-कीर्तन में भी सक्रिय भागीदारी निभाते थे। जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 7:30 बजे कथा के दौरान जब मदनलाल रावत भजन गा रहे थे, तभी अचानक एक जहरीले सांप ने उन्हें काट लिया। शुरुआत में वहां मौजूद लोगों को इस घटना का अंदाजा नहीं हुआ और कार्यक्रम सामान्य रूप से चलता रहा। कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। परिजनों और श्रद्धालुओं ने तुरंत उन्हें नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया। हालांकि सांप के जहर का असर तेजी से फैल चुका था और तमाम प्रयासों के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका। देर रात करीब 1 बजे उपचार के दौरान मदनलाल रावत ने दम तोड़ दिया। इस घटना की जानकारी मिलते ही बेलगढ़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराया और बाद में परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया। इस हादसे ने पूरे चितौली गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। परिजनों का कहना है कि मदनलाल बेहद धार्मिक स्वभाव के व्यक्ति थे और किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि एक धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की दर्दनाक घटना घट जाएगी। गांव में शोक का माहौल है और लोग इस अप्रत्याशित घटना को लेकर स्तब्ध हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सांपों से सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

लापता बच्ची की मौत का रहस्य: नदी किनारे मिला शव, हत्या की आशंका तेज

ग्वालियर । ग्वालियर के सिरोल थाना क्षेत्र से लापता हुई 12 वर्षीय 5वीं कक्षा की छात्रा का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। पांच दिन से लापता बच्ची का शव शुक्रवार रात भिंड जिले के मौ क्षेत्र में सिंध नदी किनारे क्षत-विक्षत हालत में बरामद किया गया। आशंका जताई जा रही है कि शव का कुछ हिस्सा जलीय जीवों, संभवतः मगरमच्छों द्वारा क्षतिग्रस्त किया गया है। मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब बच्ची के सौतेले पिता ने दावा किया कि 24 मई को बच्ची ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसके अनुसार, बदनामी और पुलिस कार्रवाई के डर से उसने शव को भिंड ले जाकर नदी किनारे दफना दिया। हालांकि पुलिस इस बयान को संदिग्ध मान रही है और हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है। बच्ची के लापता होने की रिपोर्ट 25 मई को सिरोल थाने में दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट सौतेले पिता द्वारा ही दर्ज कराई गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में ही पुलिस को उसके बयानों और व्यवहार पर संदेह होने लगा था। पुलिस ने उसे निगरानी में रखा और मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश जारी रखी। शुक्रवार रात भिंड के मौ इलाके में सिंध नदी किनारे से जब बच्ची का शव बरामद हुआ, तो पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया। शव की स्थिति बेहद खराब थी, जिसके चलते पुलिस ने तुरंत उसे पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया। संभावना जताई जा रही है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा, ताकि मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। एक ओर सौतेला पिता इसे आत्महत्या के बाद शव छिपाने की बात बता रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस इसे संदिग्ध हत्या मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। मृत बच्ची पिछले करीब आठ वर्षों से अपने सौतेले पिता और मां के साथ रह रही थी। परिवार में उसकी दो छोटी बहनें भी हैं, जिनकी उम्र 6 और 8 वर्ष बताई जा रही है। सौतेला पिता पेशे से टैक्सी चालक है और ट्रैवल्स एजेंसी के लिए ईको वैन चलाता है। पुलिस ने बच्ची के माता-पिता दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। वहीं, नदी किनारे और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान भी चलाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार के सबूत जुटाए जा सकें। यह मामला अब पूरी तरह से संदिग्ध बन चुका है और पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है कि यह वास्तव में आत्महत्या थी या फिर इसके पीछे कोई गंभीर अपराध छिपा हुआ है।

कान्हा टाइगर रिजर्व मामला: बाघों की मौतों पर हाईकोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब

जबलपुर । मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) में बाघों की लगातार हो रही मौतों का मामला अब न्यायालय की चौखट तक पहुंच गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA), राज्य सरकार और वन विभाग सहित छह पक्षों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। यह जनहित याचिका मुंबई के चेम्बूर निवासी वन्यजीव प्रेमी और अधिवक्ता सुबित चक्रवर्ती द्वारा दायर की गई है। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच में जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी द्वारा की गई। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई में ही मामले को गंभीर प्रकृति का मानते हुए सभी संबंधित पक्षों से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि 2 अप्रैल 2026 से अब तक कान्हा टाइगर रिजर्व में 10 बाघों की मौत कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) संक्रमण के कारण हुई है। इसके बावजूद संक्रमण को रोकने और नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। याचिका में यह भी मांग की गई है कि NTCA की गाइडलाइंस के अनुसार एक स्वतंत्र उच्चस्तरीय समिति गठित की जाए, जो इन मौतों की निष्पक्ष जांच करे। समिति को यह भी देखना होगा कि संक्रमण का वास्तविक कारण क्या है, रोग नियंत्रण के लिए क्या उपाय किए गए और क्या प्रशासनिक स्तर पर कोई लापरवाही हुई है या नहीं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वन विभाग ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए। साथ ही, पार्क के बफर जोन और आसपास के गांवों में आवारा कुत्तों के टीकाकरण की स्थिति पर भी कोई स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार संक्रमण का प्रमुख स्रोत यही हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस अत्यंत संक्रामक और घातक बीमारी है, जो बाघों और अन्य वन्यजीवों के श्वसन, तंत्रिका और पाचन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। यदि इस संक्रमण को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया तो इसका असर पूरे टाइगर लैंडस्केप पर पड़ सकता है। याचिका में कुछ प्रमुख बाघों की मौतों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें बाघिन टी-122 (सुनैना), बाघिन टी-141 (अमाही) और उसके चार शावक तथा बाघ टी-220 (महावीर) शामिल हैं। हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप के बाद अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जो जून के अंतिम सप्ताह में होगी। अदालत के रुख के बाद यह मामला वन्यजीव संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बन गया है।

हिरासत में मौतों पर हाईकोर्ट सख्त, पुलिस थानों में CCTV को लेकर निर्देश

जबलपुर । छतरपुर जिले में पुलिस हिरासत में हुई चार संदिग्ध मौतों के मामले ने अब न्यायिक स्तर पर गंभीर मोड़ ले लिया है। जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। खजुराहो निवासी समाजसेवी पीयूष दीक्षित द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की वेकेशन बेंच, जिसमें जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी शामिल थे, ने यह आदेश जारी किए। अदालत ने राज्य सरकार से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि छतरपुर जिले के विभिन्न थानों में पिछले दो महीनों के भीतर चार युवकों की पुलिस हिरासत में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। इन घटनाओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं और पुलिस पर थर्ड डिग्री यातना के आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित थानों के सभी सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी भी प्रकार के साक्ष्य को नष्ट होने से बचाया जा सके। साथ ही अगली सुनवाई की तारीख 14 जुलाई तय की गई है, जिसमें राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को अपना पक्ष रखना होगा। याचिका में यह भी मांग की गई है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए और दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया जाए। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड तुरंत जब्त करने की भी मांग की गई है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता केसी घिल्डियाल और अधिवक्ता जितेंद्र कुमार दीक्षित ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली उपस्थित रहे। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि चार में से दो मामलों में न्यायिक जांच के आदेश पहले ही दिए जा चुके हैं। हालांकि याचिकाकर्ता ने सवाल उठाया कि पुलिस द्वारा लगभग हर मामले में एक जैसी कहानी दी जा रही है—या तो आत्महत्या या फिर जहर खाने की बात कही जाती है, जो संदेह पैदा करती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के शरीर पर चोटों के निशान पाए गए हैं, जो कथित रूप से पुलिस यातना की ओर इशारा करते हैं। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि सुरक्षित माने जाने वाले थानों के भीतर जहर या आत्महत्या के साधन कैसे पहुंच रहे हैं। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख के बाद अब पूरा मामला राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है, क्योंकि अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि किसी भी तरह की लापरवाही या साक्ष्य छुपाने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाएगा।

जबलपुर में 12 किलो का जिंदा बम मिला, मकान निर्माण के दौरान मचा हड़कंप

जबलपुर । जबलपुर जिले में उस समय हड़कंप मच गया जब डुमना एयरपोर्ट के पास स्थित ग्राम गदेरी में मकान निर्माण के दौरान जमीन के अंदर एक जिंदा बम मिलने का मामला सामने आया। यह घटना शुक्रवार शाम की है, जिसने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों द्वारा पिलर के लिए की जा रही खुदाई में करीब 3 से 4 फीट नीचे एक लोहे जैसी भारी वस्तु दिखाई दी। शुरुआत में इसे सामान्य कबाड़ समझा गया, लेकिन जब इसकी बनावट पर ध्यान दिया गया तो यह बम जैसा प्रतीत हुआ। इसके बाद मजदूरों ने तुरंत काम रोक दिया और मकान मालिक को इसकी जानकारी दी। मकान मालिक द्वारा सूचना दिए जाने के बाद खमरिया थाना पुलिस और बम निरोधक दस्ता (BDS) मौके पर पहुंचा। जैसे ही जांच शुरू हुई, पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया और स्थानीय लोगों को सुरक्षित दूरी पर हटाया गया। प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई कि यह एक जिंदा अनएक्सप्लोडेड ऑर्डनेंस (UXO) बम है, जिसका वजन 12 किलो से अधिक बताया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसकी मारक क्षमता लगभग 50 मीटर तक हो सकती है, जिससे इसकी गंभीरता और खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस के अनुसार यह बम जिस स्थान पर मिला है, वह आयुध निर्माणी फैक्ट्री खमरिया से लगभग 6 किलोमीटर दूर है। यह क्षेत्र पहले भी सैन्य गतिविधियों और परीक्षणों से जुड़ा रहा है, ऐसे में बम के यहां मौजूद होने की संभावना जताई जा रही है। बम मिलने की खबर फैलते ही मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए, जिससे कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। खमरिया थाना पुलिस ने तत्काल सेना के बम निरोधक विशेषज्ञों को सूचना दी। इसके बाद बम को सावधानीपूर्वक कब्जे में लेकर सेना के अधिकारियों को सौंप दिया गया। अब सेना की टीम द्वारा इसे सुरक्षित तरीके से डिफ्यूज करने की प्रक्रिया की जा रही है। थाना प्रभारी राजकुमार खटीक ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय किए गए हैं और किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचाव सुनिश्चित किया गया है। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बम यहां तक कैसे पहुंचा और क्या इसके पीछे कोई ऐतिहासिक या तकनीकी कारण है। इस घटना ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीन के भीतर छिपे ऐसे विस्फोटक कितने बड़े खतरे का कारण बन सकते हैं, और समय रहते उनकी पहचान कितनी जरूरी है।

पुराने कपड़ों से पोछा लगाना क्यों माना जाता है अशुभ? वास्तु शास्त्र में बताए गए महत्वपूर्ण संकेत

नई दिल्ली ।  वास्तु शास्त्र के मुताबिक, जिस घर में साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है वहां पर धन की देवी मां लक्ष्मी वास करती हैं. जबकि, जिन घरों में लोग स्वच्छता का खास ख्याल नहीं रखते वहां पर दरिद्रता निवास करने लगती है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर महिलाएं नियमित तौर पर घर में पोछा लगाती हैं. पोछा लगाने में अक्सर लोग पुरान कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि घर में पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए कपड़े भी दुर्भाग्य और दरिद्रता का करण बनते हैं. दरअसल, वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में पोछा लगाने के लिए कुछ कपड़ों को भूलकर भी इस्माल में नहीं लाना चाहिए. आइए, वास्तु शास्त्र के नियम के मुताबिक समझते हैं. पोछा के लिए किन कपड़ों का ना करें इस्तेमालवास्तु शास्त्र के अनुसार, पोछा लगाने के लिए इस्तेमाल किए हुए अंडरवियर, फटे कपड़े या टी-शर्ट और शर्ट इत्यादि को प्रयोग में लाना बेहद अशुभ है. वास्तु शास्त्र के जानकार बताते हैं कि ऐसा करने से घर की पॉजिटिव एनर्जी भी नष्ट हो जाती है. यह आदत घर की सुख-समृद्धि को भी नष्ट करने लगती है. इतना ही नहीं, सफाई से जुड़ी यह गलती धन-दौलत में भी बरकत नहीं होने देती. शुक्र ग्रह होने लगता है खराब ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में कपड़ों को शुक्र ग्रह से जोड़कर देखा गया है. खासतौर पर सफेद कपड़ा शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है. शुक्र ग्रह को धन, ऐश्वर्य, विलासिता और सुख का कारक माना गया है. यही वजह है कि पुराने या इस्तेमाल किए गए कपड़ों से पोछा लगाने पर कुंडली का शुक्र ग्रह बिगड़ जाता है. शुक्र ग्रह के नकारात्मक प्रभाव के परिणामस्वरूप धन हानि और कर्ज जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है. पुरानी शर्ट या अंडरवियर से क्यो नहीं लगाना चाहिए पोछावास्तु शास्त्र के मुताबिक, कपड़ों से इंसान की ऊर्जा और भावनाएं जुड़ी होती हैं. ऐसे में जब इन्हीं कपड़ों से घर में पोछा लगाया जाता है, तो सकारात्मक ऊर्जा नष्ट होने लगती है. इसके अलावा घर का माहौल भी अशांत होने लगता है, जिसके परिणामस्वरूप परिवार के सदस्यों की मानसिक स्थिति बिगड़ने लगती है. यह आदत आर्थिक स्थिति को भी बुरी तरह से प्रभावित करती है. जमा किया हुआ धन भी नष्ट होने लगता है. घर में पोछा लगाने के वास्तु नियमवास्तु शास्त्र के अनुसार, पोछा लगाने के लिए हमेशा साफ और नए कपड़ों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. साथ ही इसके लिए हमेशा सफेद रंग के कपड़ों का ही इस्तेमाल करना चाहिए. ऐसा इसलिए सफेद रंग के कपड़ों पर शुक्र ग्रह का सबसे अधिक प्रभाव रहता है. इसके अलावा सफेद रंग के कपड़ों से पोछा लगाने से शुक्र ग्रह की शुभता प्राप्त होती है, जिसके परिणामस्वरूप आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है.