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सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज, उज्जैन के 100 चौराहे बनेंगे हाईटेक

उज्जैन । उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर शहरी विकास कार्यों को गति दे दी है। श्रद्धालुओं की संभावित भारी भीड़ और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए शहर के 100 प्रमुख चौराहों को हाईटेक बनाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। प्रशासन के अनुसार, इन चौराहों को आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जहां ट्रैफिक सिग्नल और कैमरों की लाइव फीड सीधे एक केंद्रीय कंट्रोल रूम से जुड़ी होगी। इससे शहर के किसी भी हिस्से में ट्रैफिक दबाव या भीड़ बढ़ने की स्थिति पर तुरंत निगरानी और कार्रवाई संभव हो सकेगी। कलेक्टर रौशन सिंह ने बताया कि शहर में पहले से ही सड़क चौड़ीकरण और नए मार्गों के विकास का काम चल रहा है। 60 से अधिक सड़कों को चार और छह लेन में विकसित किया जा रहा है, ताकि यातायात का प्रवाह निर्बाध बना रहे। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से चौराहों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। नई योजना में सभी चौराहों पर लेफ्ट टर्न और यू-टर्न को विशेष रूप से डिजाइन किया जाएगा, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति कम हो और वाहनों की आवाजाही तेज हो सके। प्रशासन का दावा है कि इन हाईटेक चौराहों के जरिए पूरे शहर की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। कंट्रोल रूम से निगरानी के माध्यम से न केवल ट्रैफिक व्यवस्था सुधरेगी बल्कि सिंहस्थ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित किया जा सकेगा। लक्ष्य है कि सिंहस्थ 2028 से पहले सभी प्रस्तावित काम पूरे कर लिए जाएं, ताकि आयोजन के दौरान शहर की व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाया जा सके।

CNG और PNG के दाम बढ़े, मुंबई में सफर से लेकर रसोई तक महंगा होगा जीवन; किराया बढ़ाने की मांग तेज

नई दिल्ली। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और उससे जुड़े महानगर क्षेत्र के लाखों लोगों को महंगाई का एक और झटका लगा है। घरेलू रसोई से लेकर रोजमर्रा के सफर तक अब अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ने वाला है। महानगर क्षेत्र में संपीड़ित प्राकृतिक गैस (CNG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की कीमतों में बढ़ोतरी लागू कर दी गई है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं, वाहन चालकों और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा। गैस दरों में हुई इस वृद्धि ने एक बार फिर शहरी जीवनयापन की बढ़ती लागत को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नई दरों के अनुसार CNG की कीमत में प्रति किलोग्राम 2 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जिसके बाद इसकी कीमत 86 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। वहीं घरेलू उपयोग के लिए उपलब्ध पाइप्ड नेचुरल गैस की दर में 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है और अब उपभोक्ताओं को 52 रुपये प्रति यूनिट की दर से भुगतान करना होगा। इस फैसले का असर महानगर क्षेत्र के 31 लाख से अधिक परिवारों पर पड़ेगा, जो घरेलू रसोई के लिए पाइप्ड गैस का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही लाखों लोग जो रोजाना CNG आधारित वाहनों से यात्रा करते हैं, उन्हें भी अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ सकता है। गैस वितरण क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और गैस खरीद की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण कीमतों में संशोधन आवश्यक हो गया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, महंगे गैस स्रोतों पर निर्भरता और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों ने गैस खरीद को पहले की तुलना में अधिक महंगा बना दिया है। इसी बढ़ी हुई लागत का प्रभाव अब उपभोक्ताओं तक पहुंचा है। गैस कीमतों में वृद्धि के बाद ऑटो-रिक्शा और टैक्सी संगठनों ने भी किराए में संशोधन की मांग को तेज कर दिया है। उनका कहना है कि लगातार बढ़ती ईंधन लागत के बीच मौजूदा किराया ढांचा वाहन संचालन की वास्तविक लागत को पूरा नहीं कर पा रहा है। परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि किराए में समय रहते संशोधन नहीं किया गया तो वाहन चालकों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसी कारण बेस किराए में वृद्धि की मांग संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष रखे जाने की तैयारी की जा रही है। टैक्सी संगठनों ने भी ईंधन लागत बढ़ने का हवाला देते हुए किराए में बढ़ोतरी की आवश्यकता जताई है। उनका तर्क है कि पिछले कुछ महीनों के दौरान CNG की कीमतों में कई बार संशोधन किया गया है, जिससे संचालन व्यय लगातार बढ़ा है। यदि किराए में संशोधन की अनुमति मिलती है तो इसका असर प्रतिदिन यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों की जेब पर भी दिखाई देगा। विशेष रूप से चिंता की बात यह है कि मई महीने में CNG की कीमतों में यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है। इससे पहले भी इसी महीने कीमतों में वृद्धि की गई थी, जबकि अप्रैल में भी दरों में इजाफा देखा गया था। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम उपभोक्ताओं की चिंताएं बढ़ रही हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में 12 लाख से अधिक वाहन CNG पर निर्भर हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा, टैक्सियां, निजी कारें, बसें और मालवाहक वाहन शामिल हैं। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में भी CNG की महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके कारण कीमतों में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर लाखों यात्रियों और पूरे शहरी परिवहन तंत्र को प्रभावित करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में गैस दरों के प्रभाव और संभावित किराया वृद्धि पर सभी की नजर बनी रहेगी।

बाजार में भारी बिकवाली के बीच चुनिंदा शेयरों का दमदार प्रदर्शन, एक महीने में 20% तक का रिटर्न

नई दिल्ली । सप्ताह और महीने के अंतिम कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1092 अंकों की बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ, जिससे बाजार में व्यापक दबाव का माहौल बना रहा। अधिकांश क्षेत्रों में बिकवाली हावी रही और निवेशकों की सतर्कता साफ दिखाई दी। इसके बावजूद कुछ चुनिंदा लार्ज-कैप शेयरों ने बाजार की इस कमजोरी को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए नया 52-वीक हाई हासिल किया। इन कंपनियों के प्रदर्शन ने यह संकेत दिया कि मजबूत बुनियादी स्थिति और भविष्य की विकास संभावनाएं रखने वाले शेयरों में निवेशकों का भरोसा अब भी कायम है। बाजार में गिरावट के बीच नौ प्रमुख कंपनियों के शेयर एक साल के अपने सर्वोच्च स्तर तक पहुंचने में सफल रहे। किसी भी शेयर का 52-वीक हाई पर पहुंचना निवेशकों के सकारात्मक दृष्टिकोण और उस कंपनी की संभावित विकास क्षमता का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है। ऐसे समय में जब व्यापक बाजार दबाव में हो और प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे हों, तब चुनिंदा शेयरों का रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचना उनकी विशेष मजबूती को दर्शाता है। सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाला शेयर सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया रहा। कंपनी के शेयर ने नया उच्च स्तर बनाते हुए पिछले एक महीने में लगभग 20 प्रतिशत का मजबूत रिटर्न दिया। इसी तरह अक्षय ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और करीब 19 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए नया 52-वीक हाई हासिल किया। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग और दीर्घकालिक निवेश संभावनाओं ने इन कंपनियों के प्रति निवेशकों का विश्वास मजबूत किया है। सीमेंस एनर्जी इंडिया और पॉलीकैब इंडिया भी इस सूची में प्रमुख रूप से शामिल रहे। दोनों कंपनियों के शेयरों में पिछले एक महीने के दौरान लगभग 17 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। बिजली, ऊर्जा अवसंरचना और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाओं में बढ़ती गतिविधियों का लाभ इन कंपनियों को मिलता दिखाई दे रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि देश में जारी इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं इन कंपनियों के लिए सकारात्मक कारक बनी हुई हैं। ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल ने भी निवेशकों को प्रभावित किया। कंपनी के शेयर ने नया रिकॉर्ड स्तर छूते हुए पिछले एक महीने में करीब 14 प्रतिशत का रिटर्न दिया। वहीं अडानी पावर ने लगभग 12 प्रतिशत की तेजी के साथ नया 52-वीक हाई बनाया, जिससे ऊर्जा क्षेत्र में निवेशकों की बढ़ती रुचि का संकेत मिला। धातु क्षेत्र की बड़ी कंपनी हिंदाल्को इंडस्ट्रीज भी नए उच्च स्तर तक पहुंचने में सफल रही। वैश्विक मांग में सुधार और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी की उम्मीदों ने कंपनी के शेयरों को समर्थन दिया। इसी क्रम में अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस ने भी नया रिकॉर्ड स्तर हासिल किया और पिछले एक महीने में सकारात्मक रिटर्न दर्ज किया। ऊर्जा ट्रांसमिशन और वितरण क्षेत्र में कंपनी की मजबूत उपस्थिति निवेशकों को आकर्षित करती रही है। JSW एनर्जी भी उन चुनिंदा कंपनियों में शामिल रही जिन्होंने बाजार की कमजोरी के बीच मजबूती दिखाई। भले ही इसकी मासिक बढ़त अन्य शेयरों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन नया 52-वीक हाई बनाना कंपनी के प्रति निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, व्यापक गिरावट के बावजूद इन शेयरों का रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचना यह बताता है कि निवेशक अभी भी मजबूत व्यवसाय मॉडल, बेहतर आय संभावनाओं और दीर्घकालिक विकास क्षमता वाली कंपनियों पर दांव लगाने को तैयार हैं। आने वाले समय में इन शेयरों की चाल पर बाजार प्रतिभागियों और निवेशकों की विशेष नजर बनी रहने की संभावना है।

उज्जैन में नौतपा के बीच मौसम ने ली करवट, तेज बारिश और ठंडी हवाओं से राहत

उज्जैन । उज्जैन में नौतपा के छठे दिन शनिवार सुबह अचानक मौसम बदल गया। तेज बारिश और ठंडी हवाओं ने भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत दी। पिछले कई दिनों से जारी लू और उमस के बीच तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। सुबह करीब 7 बजे शहर में तेज बारिश शुरू हुई और ठंडी हवाओं ने वातावरण को सुहावना बना दिया। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार, सुबह का तापमान लगभग 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले दिनों की तुलना में काफी कम है। बीते दिनों में उज्जैन लगातार गर्मी की चपेट में था। 28 मई को अधिकतम तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि 29 मई को यह लगभग 40 डिग्री रहा। रात के समय भी तापमान 27 से 28 डिग्री के बीच बना रहने से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही थी। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच हवा में नमी का स्तर भी अधिक रहा, जिससे उमस और बेचैनी बढ़ गई थी। ऐसे में शनिवार सुबह हुई बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। मौसम विभाग के अनुसार, दिन का अधिकतम तापमान 37 से 39 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है, जबकि रात में भी बारिश की संभावना बनी हुई है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत अस्थायी हो सकती है और गर्मी का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। बारिश के बाद शहर के लोगों ने राहत महसूस की और लंबे समय से चल रही भीषण गर्मी से कुछ समय के लिए राहत मिली।

इंदौर के छावनी क्षेत्र में तोड़फोड़ के खिलाफ विरोध तेज, ‘न्याय रैली’ आज

इंदौर।  इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर हुई तोड़फोड़ को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक विरोध तेज हो गया है। जनहित पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन की कार्रवाई को “अमानवीय” बताते हुए शनिवार शाम 7 बजे ‘न्याय रैली’ निकालने की घोषणा की है। पार्टी का आरोप है कि छावनी क्षेत्र की 136 साल पुरानी बसाहट को बिना उचित प्रक्रिया, बिना सहमति और बिना पर्याप्त मुआवजा दिए तोड़ दिया गया। दावा किया गया है कि कई लोगों को केवल दो दिन पहले सूचना दी गई और फिर भारी पुलिस बल व जेसीबी मशीनों के साथ कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिससे लोगों को अपना सामान तक निकालने का समय नहीं मिला। विरोध कर रही पार्टी का कहना है कि कई प्रभावित परिवारों के पास संपत्तियों की वैध रजिस्ट्री मौजूद है, बावजूद इसके बड़े पैमाने पर मकानों और दुकानों को ध्वस्त किया गया। आरोप यह भी है कि जहां 10 फीट तक हटाने की बात थी, वहां कई जगह 20 फीट तक निर्माण गिरा दिया गया। जनहित पार्टी ने मांग की है कि प्रभावित लोगों को बाजार मूल्य से दोगुना मुआवजा दिया जाए, एफएआर और टीडीआर जैसे नियमों पर पुनर्विचार हो और छोटे व्यापारियों व फेरी वालों की आजीविका सुरक्षित रखी जाए। साथ ही शहर के विकास कार्यों में पारदर्शिता और सहमति को अनिवार्य करने की मांग उठाई गई है। पार्टी ने नागरिकों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर अपनी आवाज उठाएं, क्योंकि उनका कहना है कि यदि ऐसे ही कार्रवाई चलती रही तो अन्य पुराने क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है। इस कार्रवाई के दौरान हुए नुकसान और विरोध के चलते मामला अब पूरी तरह राजनीतिक रूप लेता जा रहा है और शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है।

इंदौर में देर रात बड़ा सड़क हादसा: दो कारों की टक्कर में एक वाहन पलटा, शराब की बोतलें मिलने से हड़कंप

इंदौर । इंदौर के बीआरटीएस स्थित रसोमा चौराहे पर देर रात तेज रफ्तार में दो कारों की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक कार कई बार पलट गई, जबकि दूसरा वाहन भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में एक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार यह हादसा शुक्रवार देर रात करीब 3 बजे हुआ। एक कार मेदांता अस्पताल की ओर से और दूसरी एलआईजी क्षेत्र की तरफ से आ रही थी। चौराहे पर पहुंचते ही दोनों वाहनों में जबरदस्त टक्कर हो गई, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। एलआईजी की ओर से आ रही कार अनियंत्रित होकर दो बार पलट गई। इस कार में सवार देव चौहान को गंभीर चोटें आईं, खासकर कंधे में फ्रैक्चर बताया जा रहा है। घटना के बाद एक कार में सवार युवतियों के मौके से चले जाने की बात सामने आई है। पुलिस के पहुंचने से पहले वे वहां से जा चुकी थीं। कार के अंदर शराब की तीन बोतलें मिलने से मामला और गंभीर हो गया है, हालांकि पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद करने की बात कही है। वहीं, एयरबैग खुलने के कारण दूसरी कार में सवार लोगों की जान बाल-बाल बच गई। पुलिस ने दोनों वाहनों को जब्त कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और संभावित नशे में ड्राइविंग को हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। 

इंदौर में स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल: निगमकर्मियों पर खुले में कचरा फेंकने और जलाने के आरोप

इंदौर। इंदौर में देश की सबसे स्वच्छ शहरों की सूची में लगातार शीर्ष पर रहने वाली छवि पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजा मामलों में नगर निगम के कर्मचारियों पर ही खुले में कचरा डंप करने और उसे रात के समय जलाने के आरोप लगे हैं, जिससे रहवासी इलाकों में धुआं और बदबू फैलने से लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वार्ड क्रमांक-53, नेत्रराम का बगीचा और डेली कॉलेज के सामने जैसे इलाकों से सामने आए वीडियो में ट्रैक्टर-ट्रॉली से कचरा लाकर बीच रहवासी क्षेत्र में फेंका जाता दिख रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन में खुले में कचरा डाला जाता है और रात होते ही उसी कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे पूरा इलाका धुएं से भर जाता है। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन निगमकर्मी नहीं मानते। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 27 मई की रात कचरे में लगी आग ने विकराल रूप ले लिया और फायर ब्रिगेड को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। वहीं 28 मई को भी दरोगा की मौजूदगी में कचरा डंप किए जाने का वीडियो सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक पिछले दो महीनों में शहर में कचरा जलाने की 50 से अधिक शिकायतें फायर ब्रिगेड तक पहुंच चुकी हैं। औसतन रोजाना दो से तीन ऐसी घटनाएं दर्ज हो रही हैं, जिनमें कई बार आग आसपास की दुकानों और संपत्तियों तक पहुंचकर नुकसान भी पहुंचा चुकी है। नगर निगम की ओर से वार्ड पार्षद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए अधिकारियों से शिकायत की है और कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की बात कही है। वहीं जोन प्रभारी ने जांच के आदेश देते हुए कहा है कि दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह मामला स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सामने आने से नगर निगम की कार्यप्रणाली और कचरा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

भोपाल की वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी में 13 वर्षीय खिलाड़ी के साथ विवाद और आरोपों का मामला

भोपाल । भोपाल से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 13 वर्षीय सेलर ध्रुवी टंडन और उनके परिवार ने वॉटर स्पोर्ट्स एकेडमी के अधिकारियों पर मानसिक प्रताड़ना, पक्षपात और खेल करियर बाधित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि ध्रुवी को “लड़कों के साथ घूमने” जैसे आधारहीन आरोप लगाकर एकेडमी से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद से वह पिछले तीन वर्षों से दोबारा प्रवेश के लिए संघर्ष कर रही हैं। परिवार का आरोप है कि ध्रुवी को प्रतियोगिताओं में कमजोर और फटे उपकरण दिए गए, जिससे उनका प्रदर्शन प्रभावित हुआ। वहीं, उनकी छोटी बहन सिद्धि टंडन, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल जीत चुकी हैं, के चयन में भी अनियमितताओं और 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं। परिजनों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई और उन्हें लगातार निराशा ही हाथ लगी। आर्थिक तंगी के चलते परिवार ने अपनी संपत्ति तक गिरवी रख दी और कई बार यात्रा के दौरान मुश्किल परिस्थितियों का सामना किया। वहीं दूसरी ओर, परिवार इसे पुरानी रंजिश और बदले की भावना से जुड़ा मामला बता रहा है। आरोप है कि शिकायतें करने के बाद से ही दोनों बहनों को लगातार परेशान किया जा रहा है। यह मामला अब खेल व्यवस्था, चयन प्रक्रिया और खिलाड़ियों के संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

भोपाल: बशीर बद्र की याद में जुटेगा साहित्यिक जगत, राज सदन में होगी श्रद्धांजलि सभा

भोपाल । भोपाल का साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण एक बार फिर भावनात्मक माहौल में डूबने जा रहा है, क्योंकि शहर के ख्यात पद्मश्री शायर Bashir Badr को श्रद्धांजलि देने के लिए एक सामूहिक सभा का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 30 मई को शाम 5 बजे दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय के राज सदन में आयोजित होगा। 28 मई को उनके निधन के बाद से ही देशभर के साहित्यिक जगत में शोक की लहर है। भोपाल, जो उनकी साहित्यिक कर्मभूमि में से एक रहा है, वहां विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक संस्थाएं मिलकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगी। इस श्रद्धांजलि सभा में दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, मध्यप्रदेश लेखक संघ, वनमाली सृजन पीठ, मध्यप्रदेश लेखिका संघ, हिन्दी भवन, अभिनव कला परिषद, प्रभात साहित्य परिषद, कला मंदिर, अखिल भारतीय साहित्य परिषद, वरिष्ठ नागरिक मंच और अंतरराष्ट्रीय विश्व मैत्री मंच सहित कई प्रमुख संस्थाएं शामिल होंगी। शहर के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और शायर भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल औपचारिक श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि शायर Bashir Badr के रचनात्मक योगदान को याद करना और उनकी शायरी की विरासत को जीवंत रखना है। इस दौरान उनकी प्रसिद्ध गजलों और शेर-ओ-शायरी के माध्यम से उन्हें याद किया जाएगा, जिससे माहौल पूरी तरह साहित्यिक और भावुक हो उठेगा। दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय की निदेशक करुणा राजूकर ने शहर के सभी साहित्य प्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं से अपील की है कि वे इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर शायर को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। उनका कहना है कि यह अवसर न केवल एक महान शायर को याद करने का है, बल्कि हिंदी और उर्दू साहित्य की समृद्ध परंपरा को भी सम्मान देने का है। भोपाल हमेशा से साहित्य और शायरी का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, और Bashir Badr की उपस्थिति ने इस शहर को एक विशेष पहचान दी है। ऐसे में उनकी स्मृति में आयोजित यह सभा साहित्यिक दुनिया के लिए एक भावपूर्ण क्षण साबित होगी, जहां शब्दों के जरिए उनके योगदान को सलाम किया जाएगा।

MP का ‘बंगला पान’ बना इंटरनेशनल पसंद, बढ़ी मांग, अब सरकार किसानों को देगी ₹1 करोड़ की मदद

भोपाल। मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध ‘बंगला पान’ अब देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी खास पहचान बना रहा है। अपनी सुगंध, कोमल बनावट और बेहतरीन स्वाद के कारण छतरपुर का बंगला पान अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने पान उत्पादक किसानों के लिए 1.03 करोड़ रुपये की विशेष सहायता योजना लागू की है। विदेशों तक पहुंचा एमपी का पानछतरपुर जिले में उगाया जाने वाला बंगला पान अपनी पतली बनावट, हल्की मिठास और लंबे समय तक ताजगी बनाए रखने की क्षमता के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि इसकी मांग भारत के साथ-साथ पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी लगातार बढ़ रही है। किसानों के लिए सरकार की खास योजनापान उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 10 प्रमुख जिलों को शामिल करते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार की है। इसके लिए 1 करोड़ 3 लाख रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना के तहत किसानों को आधुनिक खेती तकनीकों की जानकारी, उन्नत किस्म की पौध सामग्री, विशेष प्रशिक्षण, और ‘बरोज’ निर्माण के लिए आर्थिक व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन जिलों में होती है प्रमुख खेतीमध्य प्रदेश के छतरपुर, रीवा, मंदसौर, नरसिंहपुर और टीकमगढ़ जिले पान उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं। यहां वर्षों से पान की खेती किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है। रीवा का पान भी खूब लोकप्रियरीवा जिले के महसांव क्षेत्र के दो गांवों में उत्पादित पान की भी अलग पहचान है। यहां तैयार होने वाला पान उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक भेजा जाता है। इन बाजारों में मध्य प्रदेश के पान की विशेष मांग बनी रहती है। क्या है ‘बरोज’ मॉडल?पान की खेती के लिए विशेष प्रकार का संरक्षित ढांचा तैयार किया जाता है, जिसे ‘बरोज’ कहा जाता है। इसमें तापमान और नमी को नियंत्रित रखा जाता है, जिससे पान की नाजुक बेलों का बेहतर विकास हो सके। मध्य प्रदेश में यह परंपरागत खेती मुख्य रूप से चौरसिया समाज द्वारा की जाती है, जो पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। बरोज प्रणाली की वजह से उच्च गुणवत्ता वाला पान तैयार होता है और यही मॉडल अब देशभर में चर्चा का विषय बन रहा है। चुनौतियों के बावजूद बनी हुई है मांगपारंपरिक पान व्यवसाय को पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों से चुनौती मिल रही है। बदलती जीवनशैली और युवाओं की पसंद के कारण पान की खपत पर असर पड़ा है, जिससे किसानों की आय भी प्रभावित हुई है। इसके बावजूद भारतीय संस्कृति और परंपराओं में पान का महत्व आज भी बरकरार है। पूजा-पाठ, विवाह समारोह, मांगलिक आयोजनों और अतिथि सत्कार में पान का विशेष स्थान होने के कारण इसकी बाजार मांग स्थिर बनी हुई है। किसानों के लिए नई उम्मीदसरकार की नई योजना और बढ़ती निर्यात मांग के चलते पान उत्पादक किसानों को बेहतर आय की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आधुनिक तकनीकों और बरोज मॉडल को व्यापक स्तर पर अपनाया जाए, तो मध्य प्रदेश का बंगला पान वैश्विक बाजार में और मजबूत पहचान बना सकता है।