8 जून को शुक्र का राशि परिवर्तन, इन जातकों पर बढ़ेगा खर्च और तनाव, रिश्तों में आ सकती हैं परेशानियां

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, प्रेम, सौंदर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। 8 जून 2026 को शुक्र देव मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे। कर्क जल तत्व की राशि मानी जाती है, ऐसे में शुक्र का यह राशि परिवर्तन कुछ जातकों के जीवन में आर्थिक दबाव, मानसिक तनाव और रिश्तों में उतार-चढ़ाव ला सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह गोचर खास तौर पर चार राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। आइए जानते हैं किन राशियों को इस दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। मिथुन राशिशुक्र का गोचर मिथुन राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में परेशानी बढ़ा सकता है। इस दौरान सुख-सुविधाओं और दिखावे पर जरूरत से ज्यादा खर्च होने की संभावना है, जिससे बचत प्रभावित हो सकती है। किसी को पैसा उधार देने से बचें। परिवार में बातचीत के दौरान शब्दों का चयन सोच-समझकर करें, नहीं तो विवाद की स्थिति बन सकती है। तुला राशितुला राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, इसलिए यह गोचर आपके लिए विशेष प्रभाव डाल सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं और सहकर्मियों के साथ तालमेल बैठाने में मुश्किलें आ सकती हैं। ऑफिस पॉलिटिक्स से छवि प्रभावित होने की आशंका रहेगी। इस समय जल्दबाजी में नौकरी बदलने या नया निवेश करने से बचना बेहतर रहेगा। धनु राशिधनु राशि वालों के लिए शुक्र का यह परिवर्तन अष्टम भाव में होगा, जिसे ज्योतिष में संवेदनशील स्थिति माना जाता है। सेहत से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं, खासकर आंखों और पेट संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं। अचानक खर्च बढ़ने से बजट बिगड़ सकता है। वहीं जीवनसाथी या प्रेम संबंधों में गलतफहमियां बढ़ने की आशंका भी रहेगी। मकर राशिमकर राशि के जातकों के लिए शुक्र का गोचर वैवाहिक और साझेदारी के मामलों में चुनौतियां ला सकता है। जीवनसाथी के साथ विचारों में मतभेद बढ़ सकते हैं और छोटी-छोटी बातों पर तनाव पैदा हो सकता है। यदि आप पार्टनरशिप में व्यापार करते हैं, तो लेनदेन को लेकर विवाद की स्थिति बन सकती है, जिससे कामकाज प्रभावित होगा। परेशानियों से बचने के उपायशुक्रवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे चावल, दूध, चीनी या सफेद मिठाई का दान करें।नियमित रूप से “ॐ शुं शुक्राय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।घर की महिलाओं और जीवनसाथी का सम्मान करें।शुक्रवार को साफ-सुथरे और हल्के रंग के कपड़े पहनना शुभ माना गया है।
गर्मी से मिलेगी जल्द राहत, भारत की ओर बढ़ रहा बादलों का विशाल सिस्टम, कई राज्यों में बारिश के आसार

नई दिल्ली। उत्तर-पश्चिम भारत में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम अब राहत की खबर लेकर आ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत की ओर करीब 2500 किलोमीटर चौड़ा बादलों का विशाल समूह तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कई राज्यों में बारिश और आंधी का दौर शुरू हो सकता है। भारत के मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस ने इस विशाल बादल प्रणाली की तस्वीरें कैद की हैं। मौसम विभाग के अनुसार, यह सिस्टम उत्तर और मध्य भारत में सक्रिय मौसम बदलाव का संकेत दे रहा है, जो आने वाले दिनों में तेज बारिश और तापमान में गिरावट ला सकता है। उत्तर भारत से मध्य भारत तक फैला बादलों का घना घेरामौसम विभाग द्वारा जारी सैटेलाइट तस्वीरों में पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कई हिस्सों तक बादलों का बड़ा जमावड़ा दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम भीषण गर्मी के बाद राहत देने वाला साबित हो सकता है। बादलों का यह घना समूह तूफानी गतिविधियों और प्री-मानसून बारिश का संकेत माना जा रहा है। दिल्ली में बारिश और तेज हवाओं से राहतगुरुवार शाम दिल्ली के कई इलाकों में तेज हवाओं और हल्की बारिश ने मौसम बदल दिया। लंबे समय से जारी गर्मी से लोगों को काफी राहत मिली। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, राजधानी में गरज-चमक के साथ आंधी चली, जिसमें पालम क्षेत्र में हवा की रफ्तार 61 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। तापमान में 5 डिग्री तक गिरावटमौसम में बदलाव के बाद दिल्ली के अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले राजधानी के कई इलाकों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। 31 मई तक जारी रह सकता है बारिश का दौरमौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में 31 मई तक गरज-चमक और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक राजस्थान के उत्तरी हिस्सों में पहले ही बारिश और आंधी शुरू हो चुकी है। यह मौसम प्रणाली धीरे-धीरे दिल्ली और अन्य उत्तर भारतीय राज्यों की ओर बढ़ रही है। गुजरात की ओर बढ़ेगा सिस्टमविशेषज्ञों का कहना है कि शुक्रवार को तूफानी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। यह सिस्टम 30 मई तक सक्रिय रहेगा और इसके बाद 30-31 मई के बीच गुजरात की ओर बढ़ने की संभावना है। इन वजहों से बदला मौसममौसम विभाग ने बताया कि पश्चिमी विक्षोभ, राजस्थान और आसपास बने चक्रवाती परिसंचरण तथा बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी भरी हवाओं के कारण मौसम में यह बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विभाग का कहना है कि इस बार होने वाली प्री-मानसून बारिश अप्रैल और मई की शुरुआत में हुई बारिश से अधिक प्रभावी और व्यापक हो सकती है।
सीएम बनने से पहले डीके शिवकुमार को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी विदेश यात्रा की मंजूरी

बेंगलुरु। कर्नाटक के भावी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बेंगलुरु की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें 2017 के आयकर चोरी मामले में दो साल की अवधि के लिए विदेश यात्रा करने की अनुमति दे दी है। हालांकि, यह अनुमति कुछ सख्त शर्तों के साथ दी गई है। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट केएन शिवकुमार ने डीके शिवकुमार की उस याचिका को मंजूरी दी, जिसमें उन्होंने आधिकारिक और व्यावसायिक कार्यों के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी थी। यह अनुमति उनकी जमानत शर्तों में संशोधन के तहत दी गई है। किन देशों की यात्रा कर सकेंगेअदालत ने डीके शिवकुमार को अगले दो वर्षों के दौरान कई देशों की यात्रा की अनुमति दी है, जिनमें शामिल हैं-अमेरिकायूरोपीय देशयूनाइटेड किंगडमऑस्ट्रेलियारूसअरब देश कोर्ट की सख्त शर्तें लागूअदालत ने स्पष्ट किया है कि हर विदेश यात्रा से पहले डीके शिवकुमार को अपने यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी जांच एजेंसी को देनी होगी। इसके अलावा उन्हें अदालत के समक्ष आवश्यकतानुसार पेश होना होगा। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है, तो जांच एजेंसी या अभियोजन पक्ष विदेश यात्रा की अनुमति रद्द कराने के लिए अदालत में आवेदन कर सकता है। 15 मई के आदेश में अदालत ने यह भी कहा था कि किसी भी तरह की चूक होने पर जांच एजेंसी आवश्यक कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होगी। क्या है पूरा मामलायह मामला 2017 में आयकर विभाग की छापेमारी से जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि बेंगलुरु-मैसूरु हाईवे स्थित ईगलटन गोल्फ रिजॉर्ट सहित कई स्थानों पर तलाशी के दौरान सबूतों को नष्ट करने की कोशिश की गई थी। इस दौरान लगभग 8.83 करोड़ रुपये नकद बरामद होने का दावा भी किया गया था। इस मामले में डीके शिवकुमार के साथ अन्य लोग भी आरोपी हैं और उनके खिलाफ आयकर अधिनियम तथा आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज है। हालांकि डीके शिवकुमार लगातार इन आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते रहे हैं। अदालत ने क्यों दी अनुमतिअदालत ने अपने आदेश में कहा कि डीके शिवकुमार को अपने विभागीय कार्यों और कारोबारी गतिविधियों के विस्तार के लिए विदेश यात्रा की आवश्यकता पड़ सकती है। उनके द्वारा दिए गए कारण प्रथम दृष्टया उचित प्रतीत होते हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि इसी मामले में एक अन्य आरोपी को पहले विदेश यात्रा की अनुमति दी जा चुकी है, इसलिए समान आधार पर उन्हें भी राहत दी गई है। साथ ही अदालत ने यह भी नोट किया कि कुछ सह-आरोपियों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई हुई है, ऐसे में फिलहाल ट्रायल के लिए उनकी व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य नहीं मानी गई है। राजनीतिक पृष्ठभूमि भी चर्चा मेंयह राहत ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन और मुख्यमंत्री पद को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कांग्रेस नेता सिद्धारमैया ने हाल ही में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया है, जिससे राज्य में सत्ता संतुलन को लेकर नई राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है।
एमपी में बदला मौसम का मिजाज, ग्वालियर-मुरैना में बारिश, कई जिलों में लू और ओलावृष्टि का अलर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। शुक्रवार सुबह से ग्वालियर में रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि मुरैना में तेज बारिश दर्ज की गई। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है। गुरुवार को भी दमोह सहित कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि हुई थी। मौसम विभाग ने शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में तीव्र लू का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं भोपाल, जबलपुर समेत 27 जिलों में हीटवेव का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इन जिलों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहने की संभावना है। 10 शहरों में पारा 45 डिग्री के पार, खजुराहो सबसे गर्मप्रदेश में 25 मई से नौतपा की शुरुआत के साथ ही तेज गर्मी का दौर जारी है। 18 मई से खजुराहो और नौगांव सबसे गर्म क्षेत्र बने हुए हैं, जहां तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच चुका है। गुरुवार को नौतपा के चौथे दिन प्रदेश के 10 शहरों में तापमान 45 डिग्री या उससे अधिक दर्ज किया गया। खजुराहो सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 46 डिग्री, दतिया में 45.7 डिग्री, नौगांव, दमोह और मलाजखंड में 45.5 डिग्री, टीकमगढ़ में 45.2 डिग्री, सतना में 45.1 डिग्री तथा मंडला और सागर में 45 डिग्री तापमान दर्ज हुआ। गुना में 44.7 डिग्री, श्योपुर में 44.6 डिग्री, रायसेन में 44.2 डिग्री और रीवा व छिंदवाड़ा में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 44.7 डिग्री दर्ज किया गया। जबलपुर में 44 डिग्री, भोपाल में 43.8 डिग्री, उज्जैन में 42.5 डिग्री और इंदौर में 41.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ। 30 मई से बदलेगा मौसम, आंधी-बारिश और ओलों की संभावनामौसम विभाग के अनुसार 30 मई से 1 जून तक प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। 30 मई को अधिकांश जिलों में आंधी और बारिश की चेतावनी जारी की गई है। हालांकि इंदौर और नर्मदापुरम संभाग में गर्मी का असर बना रह सकता है। 31 मई और 1 जून को भी प्रदेश में ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान है। इन तीन दिनों के दौरान कहीं भी हीटवेव का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। भोपाल में नौतपा के दौरान बारिश का रिकॉर्डभोपाल में पिछले 14 वर्षों में 7 बार नौतपा के दौरान बारिश दर्ज की गई है, जबकि 2 बार बूंदाबांदी हुई। इस बार भी नौतपा की शुरुआत में हल्की बूंदाबांदी देखने को मिली। वर्ष 2018 और 2019 में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी थी, जब औसत तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया था। आज का अलर्टऑरेंज अलर्ट (तीव्र लू): ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर।येलो अलर्ट (हीटवेव): भोपाल, विदिशा, रायसेन, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, नरसिंहपुर, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, जबलपुर, दमोह, कटनी, पन्ना, सतना, मैहर, उमरिया, शहडोल, खरगोन, भिंड, दतिया, खंडवा और बुरहानपुर।तेज गर्मी वाले जिले: इंदौर, उज्जैन, देवास, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार और रतलाम। आंधी-बारिश की संभावना:छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, अनूपपुर, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली। मौसम विभाग ने 29 मई से 1 जून तक का पूर्वानुमान जारी करते हुए कहा है कि शुक्रवार को प्रदेश में गर्मी, बारिश और ओलावृष्टि जैसे मिश्रित मौसम की स्थिति बनी रह सकती है, जबकि 30 मई से बारिश का दौर तेज होने की संभावना है।
उत्तराखंड में जंगलों की आग विकराल: मदद न करने वालों पर होगी जेल कार्रवाई, 2 लोगों की मौत

नई दिल्ली। उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी के साथ जंगलों में आग अब भयावह रूप लेती जा रही है। पहाड़ी इलाकों से शुरू हुई वनाग्नि अब मैदानी जिलों तक फैल चुकी है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि राज्य सरकार और वन विभाग को सख्त कदम उठाने पड़े हैं। लगातार फैल रही आग के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि जंगलों की आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों पर अब कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान रहेगा। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक राज्यभर में 460 से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें लगभग 380 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। गुरुवार को ही प्रदेश में 37 नई घटनाएं दर्ज की गईं। देहरादून जिला अब सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल हो गया है। यहां के चार वन प्रभागों में करीब 74 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं, जबकि चमोली जिले में 68 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग की चपेट में आया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान, बारिश की कमी, सूखी वनस्पतियों और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही है। कई क्षेत्रों में दुर्गम पहाड़ी रास्तों के चलते आग बुझाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्यभर में हाई अलर्ट जारी कर संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त टीमें तैनात कर दी गई हैं। सबसे ज्यादा नुकसान देहरादून के कालसी वन प्रभाग में हुआ है, जहां करीब 37 हेक्टेयर जंगल जल गए। वहीं चकराता, मसूरी और दून डिवीजन के जंगल भी आग की चपेट में हैं। दूसरी ओर चमोली जिले के बद्रीनाथ वन प्रभाग और अलकनंदा सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र में भी आग ने भारी तबाही मचाई है। यहां दो लोगों की मौत की भी पुष्टि हुई है। वन विभाग अब सख्त रुख अपनाने जा रहा है। बदरीनाथ-केदारनाथ वन प्रभाग के डीएफओ एसके दुबे ने कहा कि जंगलों में आग बुझाने में सहयोग नहीं करने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएंगे। इसमें वन उपज लेने वाले, लकड़ी कटान की अनुमति प्राप्त लोग, मवेशी चराने वाले और जंगलों के आसपास रहने वाले ग्रामीण भी शामिल हो सकते हैं। संशोधित नियमों के अनुसार दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक की जेल और दो हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। चकराता के देवघर रेंज क्षेत्र में बुधवार रात लगी आग को गुरुवार दोपहर तक काबू किया गया। इस आग में करीब साढ़े सात हेक्टेयर जंगल जल गए, जबकि वन विभाग ने करीब 428 हेक्टेयर जंगल को बचा लिया। वनकर्मियों ने लगातार 12 घंटे तक मशक्कत कर आग पर नियंत्रण पाया। मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया गया है। इधर त्यूणी और उत्तरकाशी के जंगल भी लगातार धधक रहे हैं। कई इलाकों में किसानों के बाग-बगीचों को भारी नुकसान पहुंचा है और सैकड़ों सेब के पेड़ जल गए हैं। देहरादून शहर में भी अलग-अलग जगहों पर आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जंगल, ट्रांसफॉर्मर और दुकानों तक को नुकसान पहुंचा है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि जंगलों में आग लगने की सूचना तुरंत प्रशासन को दें और आग बुझाने में सहयोग करें। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते हालात नियंत्रित नहीं हुए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
अब 100, 101, 108 नहीं… इमरजेंसी में सिर्फ 112 करेगा मदद, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

नई दिल्ली। देश में आपातकालीन सेवाओं को लेकर अब बड़ा बदलाव होने जा रहा है। पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिला हेल्पलाइन जैसे अलग-अलग नंबरों की जगह अब सिर्फ एक नंबर ‘112’ ही लोगों की मदद के लिए इस्तेमाल होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगले तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को तकनीकी और संचालन स्तर पर ‘112’ से जोड़ दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब सड़क हादसों और आपातकालीन स्थितियों में समय पर मदद नहीं मिलने के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों को समय पर ट्रॉमा केयर और आपातकालीन इलाज मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अहम हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि देशभर में इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को एक समान और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है। यह आदेश जस्टिस जेके माहेश्वरी और एएस चंदूरकर की पीठ ने जारी किया। अदालत ने कहा कि मौजूदा समय में अलग-अलग सेवाओं के लिए कई नंबर होने से आम लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एकीकृत हेल्पलाइन नंबर लागू करना जरूरी हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, अब 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे सभी हेल्पलाइन नंबरों को ‘112’ में समाहित किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि किसी भी तरह की इमरजेंसी में नागरिकों को सिर्फ एक नंबर डायल करना होगा और संबंधित सेवा तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने में इस व्यवस्था को पूरी तरह लागू करें और इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि ‘हेल्पलाइन 112’ को लेकर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि देश के हर नागरिक तक इसकी जानकारी पहुंच सके। सिर्फ हेल्पलाइन नंबर को एकीकृत करने तक ही अदालत ने खुद को सीमित नहीं रखा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ‘गुड समैरिटन कानून’ के तहत एक प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करने का भी आदेश दिया है। इसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन देना है। इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय को निर्देश दिया है कि तीन महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए एक राष्ट्रीय ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ तैयार किया जाए। यह प्रोटोकॉल जारी होने के बाद राज्यों को अगले तीन महीने में उसे अपने यहां लागू करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला देश में आपातकालीन सेवाओं को तेज, सरल और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। एकीकृत हेल्पलाइन सिस्टम लागू होने से हादसों और संकट की घड़ी में लोगों को तेजी से सहायता मिल सकेगी और कई जानें बचाई जा सकेंगी।
तलाक के दर्द के बाद टूटा भरोसा: सुजैन खान ने क्यों बना लिया था ‘नो लव’ नियम?

नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित एक्स कपल ऋतिक रोशन और सुजैन खान भले ही अब अलग हो चुके हों, लेकिन दोनों की निजी जिंदगी आज भी सुर्खियों में बनी रहती है। हाल ही में सुजैन खान ने अपने रिश्तों, तलाक और दोबारा प्यार को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि ऋतिक से अलग होने के बाद उन्होंने तय कर लिया था कि अब वह जिंदगी में दोबारा प्यार को जगह नहीं देंगी और पूरी तरह अपने बच्चों और काम पर ध्यान देंगी। एक समय बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा कपल माने जाने वाले ऋतिक और सुजैन ने साल 2000 में शादी की थी। दोनों की जोड़ी को फैंस काफी पसंद करते थे, लेकिन करीब 14 साल बाद 2014 में दोनों ने अलग होने का फैसला लेकर सभी को चौंका दिया। तलाक के बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते में सम्मान और दोस्ती बनाए रखी। उनके दो बेटे हैं, जिनकी परवरिश दोनों मिलकर कर रहे हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में सुजैन खान ने बताया कि तलाक के बाद वह भावनात्मक रूप से काफी टूट चुकी थीं। उन्होंने अपने मन में यह ठान लिया था कि अब उन्हें किसी नए रिश्ते में नहीं पड़ना है। सुजैन ने कहा कि उन्होंने खुद को “नो इमोशनल ड्रामा जोन” में रखने का फैसला किया था। उनका पूरा ध्यान अपने बेटों और प्रोफेशनल लाइफ पर था। सुजैन के मुताबिक, जिंदगी उस समय बदली जब उनकी मुलाकात अभिनेता अर्सलान गोनी से हुई। शुरुआत में उन्होंने रिश्ते को लेकर कोई उम्मीद नहीं रखी थी, लेकिन धीरे-धीरे दोनों के बीच गहरा जुड़ाव बन गया। सुजैन ने कहा कि अर्सलान से मिलते ही उन्हें एक अलग तरह का सुकून महसूस हुआ। उन्हें लगा जैसे दोनों एक-दूसरे को लंबे समय से जानते हों। उन्होंने यह भी बताया कि अतीत में उन्होंने अपनी मानसिक स्थिति को संभालने के लिए थेरेपिस्ट की मदद ली थी, लेकिन अब अर्सलान के साथ रहना उनके लिए किसी थेरेपी से कम नहीं है। दोनों पिछले कई वर्षों से साथ हैं और अक्सर सोशल मीडिया तथा सार्वजनिक कार्यक्रमों में साथ नजर आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि तलाक के बाद भी ऋतिक और सुजैन के बीच रिश्ते सौहार्दपूर्ण बने हुए हैं। दोनों अपने बच्चों के लिए अक्सर साथ दिखाई देते हैं। सुजैन के पिता संजय खान भी पहले कह चुके हैं कि ऋतिक और सुजैन का अलगाव कभी कड़वाहट भरा नहीं रहा। आज भले ही दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन फैंस अब भी उन्हें बॉलीवुड के सबसे परिपक्व और सम्मानजनक एक्स कपल्स में गिनते हैं। जहां ऋतिक अभिनेत्री सबा आजाद के साथ रिश्ते में हैं, वहीं सुजैन अर्सलान गोनी के साथ अपनी नई जिंदगी में खुश नजर आ रही हैं।
बॉलीवुड के चर्चित रिश्तों में शामिल महेश भट्ट की पहली शादी की कहानी

नई दिल्ली। बॉलीवुड के चर्चित फिल्ममेकर महेश भट्ट अपनी फिल्मों से ज्यादा कई बार अपनी निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। हाल ही में उनकी बेटी पूजा भट्ट ने अपने पिता की पर्सनल लाइफ और रिश्तों को लेकर खुलकर बातचीत की, जिसके बाद एक बार फिर महेश भट्ट की पहली पत्नी लॉरेन ब्राइट उर्फ किरण भट्ट चर्चा में आ गई हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि महेश भट्ट की जिंदगी का पहला प्यार किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था। इस रिश्ते में बेपनाह मोहब्बत, खून से लिखे खत, शादी और फिर दर्दनाक बिछड़ाव सब कुछ शामिल था। महेश भट्ट और लॉरेन ब्राइट की मुलाकात उस समय हुई थी जब दोनों बेहद कम उम्र के थे। बताया जाता है कि महेश महज 16 साल के थे और लॉरेन 14 साल की थीं। लॉरेन उस समय एक अनाथालय में रहती थीं, क्योंकि उनकी मां आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अच्छे स्कूल में नहीं भेज पाई थीं। महेश भट्ट ने पहली बार उन्हें स्कूल के बाहर देखा था और पहली नजर में ही दिल हार बैठे थे। हालांकि शुरुआती दौर में वे खुद को लॉरेन के लायक नहीं मानते थे, लेकिन वक्त के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ती चली गईं। उनकी प्रेम कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह था कि दोनों एक-दूसरे को खत लिखकर अपने जज्बात जाहिर करते थे। कहा जाता है कि महेश भट्ट लॉरेन को अपने खून से खत लिखा करते थे। एक दर्जी उनके बीच डाकिए का काम करता था और खत पहुंचाता था। यह रिश्ता धीरे-धीरे इतना गहरा हो गया कि महेश भट्ट ने महज 20 साल की उम्र में लॉरेन से शादी कर ली। शादी के बाद लॉरेन का नाम किरण भट्ट हो गया। इस रिश्ते से उनके दो बच्चे हुए- पूजा भट्ट और राहुल भट्ट। शादी के शुरुआती साल बेहद खूबसूरत रहे, लेकिन बाद में रिश्ते में दूरियां आने लगीं। इसी दौरान महेश भट्ट की जिंदगी में मशहूर अभिनेत्री परवीन बाबी की एंट्री हुई। परवीन बाबी के साथ बढ़ती नजदीकियों ने उनकी शादीशुदा जिंदगी में हलचल मचा दी। धीरे-धीरे महेश भट्ट अपनी पत्नी और परिवार से दूर होते चले गए। परवीन बाबी से रिश्ता खत्म होने के बाद कुछ समय के लिए वे फिर परिवार के करीब आए, लेकिन तब तक बहुत कुछ बदल चुका था। इसी बीच उनकी मुलाकात अभिनेत्री सोनी राजदान से हुई। महेश भट्ट सोनी राजदान से शादी करना चाहते थे, लेकिन वे पहली पत्नी को तलाक नहीं देना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने इस्लाम धर्म अपनाकर अपना नाम अशरफ रखा और साल 1986 में सोनी राजदान से शादी कर ली। समय के साथ महेश भट्ट की जिंदगी आगे बढ़ती रही, लेकिन लॉरेन ब्राइट गुमनामी में चली गईं। साल 2003 में 66 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनकी मौत की असली वजह कभी सामने नहीं आ सकी। हालांकि बॉलीवुड में जब भी महेश भट्ट की जिंदगी के सबसे गहरे और शिद्दत भरे प्यार का जिक्र होता है, तो लॉरेन ब्राइट यानी किरण भट्ट का नाम जरूर लिया जाता है।
बारिश ने बिगाड़ा खेल तो कौन पहुंचेगा फाइनल? GT vs RR मैच का पूरा गणित

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 का रोमांच अपने चरम पर पहुंच चुका है और अब सभी की नजरें गुजरात टाइटंस और राजस्थान रॉयल्स के बीच खेले जाने वाले क्वालिफायर-2 मुकाबले पर टिकी हैं। न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में शुक्रवार को होने वाला यह मुकाबला तय करेगा कि रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के खिलाफ फाइनल में कौन सी टीम उतरेगी। हालांकि मैच से पहले मौसम सबसे बड़ा चिंता का विषय बन गया है। बारिश की आशंका ने फैंस की धड़कनें बढ़ा दी हैं और हर किसी के मन में यही सवाल है कि अगर मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया तो किस टीम की किस्मत खुलेगी। आईपीएल प्लेऑफ मुकाबलों में इस बार रिजर्व डे की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में अगर बारिश के कारण मैच प्रभावित होता है, तो सबसे पहले अंपायर और मैच रेफरी सीमित ओवरों का मुकाबला कराने की कोशिश करेंगे। यदि मौसम लगातार खराब बना रहता है और पूरा मैच संभव नहीं हो पाता, तो सुपर ओवर कराने का विकल्प मौजूद रहेगा। लेकिन अगर हालात इतने खराब हो जाएं कि सुपर ओवर भी नहीं कराया जा सके, तब आईपीएल के नियम के अनुसार लीग स्टेज की अंक तालिका के आधार पर विजेता टीम तय की जाएगी। यहीं पर गुजरात टाइटंस को बड़ा फायदा मिलता दिखाई दे रहा है। लीग चरण में गुजरात ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अंक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया था। टीम ने 18 अंकों के साथ प्लेऑफ में जगह बनाई थी और उसका नेट रनरेट भी मजबूत रहा। दूसरी ओर राजस्थान रॉयल्स चौथे स्थान पर रही थी और उसके खाते में 16 अंक थे। ऐसे में यदि मुकाबला पूरी तरह धुल जाता है और कोई परिणाम नहीं निकलता, तो गुजरात टाइटंस सीधे फाइनल में पहुंच जाएगी। राजस्थान रॉयल्स के लिए यह स्थिति किसी बड़े झटके से कम नहीं होगी, क्योंकि टीम शानदार लय में नजर आ रही है। एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान ने सनराइजर्स हैदराबाद को हराकर क्वालिफायर-2 में जगह बनाई थी। उस मैच में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने विस्फोटक बल्लेबाजी कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। उन्होंने मात्र 29 गेंदों में 97 रन ठोककर राजस्थान को यादगार जीत दिलाई थी। टीम का आत्मविश्वास फिलहाल सातवें आसमान पर है। दूसरी ओर गुजरात टाइटंस की टीम भी संतुलित और मजबूत दिखाई दे रही है। कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में टीम ने पूरे सीजन लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में गुजरात मजबूत नजर आई है। ऐसे में अगर मैच पूरा खेला जाता है, तो फैंस को एक हाई-वोल्टेज मुकाबला देखने को मिल सकता है। अब सभी की निगाहें मौसम पर टिकी हैं। अगर बारिश बीच में नहीं आती, तो दोनों टीमों के बीच फाइनल का टिकट हासिल करने के लिए जबरदस्त जंग देखने को मिलेगी। लेकिन अगर मौसम ने साथ नहीं दिया, तो अंक तालिका का नियम राजस्थान के सपनों को तोड़ सकता है और गुजरात की राह सीधे फाइनल तक खोल सकता है।
Summer Skin Care Tips: गर्मी में टैनिंग, पिंपल्स और डलनेस से ऐसे बचाएं अपनी स्किन

नई दिल्ली। गर्मियों का मौसम आते ही सबसे ज्यादा असर हमारी त्वचा पर दिखाई देने लगता है। तेज धूप, पसीना, धूल और बढ़ता प्रदूषण स्किन को बेजान और रूखा बना देता है। कई लोगों को टैनिंग, पिंपल्स, ऑयली स्किन और रैशेज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अगर सही तरीके से स्किन की देखभाल की जाए, तो गर्मी के मौसम में भी त्वचा को हेल्दी, फ्रेश और चमकदार बनाए रखा जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार गर्मियों में त्वचा को सबसे ज्यादा जरूरत सफाई, हाइड्रेशन और सन प्रोटेक्शन की होती है। दिन में कम से कम दो बार चेहरे को हल्के फेसवॉश से साफ करना चाहिए ताकि त्वचा पर जमा धूल, पसीना और अतिरिक्त तेल हट सके। ऑयली स्किन वाले लोगों को जेल बेस्ड फेसवॉश का इस्तेमाल करना चाहिए, जबकि ड्राई स्किन वालों के लिए मॉइश्चराइजिंग फेसवॉश बेहतर माना जाता है। गर्मियों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल बेहद जरूरी होता है। धूप में निकलने से पहले SPF 30 या उससे अधिक वाला सनस्क्रीन लगाने से त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से बचाया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाहर जाने से करीब 20 मिनट पहले सनस्क्रीन लगाना चाहिए और लंबे समय तक बाहर रहने पर हर तीन से चार घंटे में दोबारा लगाना चाहिए। त्वचा को अंदर से स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। गर्मियों में शरीर जल्दी डिहाइड्रेट होता है, जिसका असर चेहरे की चमक पर साफ दिखाई देता है। दिनभर में कम से कम आठ से दस गिलास पानी पीना चाहिए। नारियल पानी, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन भी त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। गर्मियों में भारी और ऑयली क्रीम की जगह हल्के जेल या वॉटर बेस्ड मॉइश्चराइजर का उपयोग करना बेहतर माना जाता है। इससे त्वचा को जरूरी नमी मिलती है और चिपचिपाहट भी महसूस नहीं होती। इसके अलावा घरेलू उपाय भी स्किन को प्राकृतिक निखार देने में मददगार साबित होते हैं। दही, बेसन और हल्दी का फेस पैक टैनिंग कम करने में मदद करता है, जबकि मुल्तानी मिट्टी और गुलाब जल ऑयली स्किन को फ्रेश बनाए रखते हैं। एलोवेरा और खीरे का रस त्वचा को ठंडक देने के साथ ग्लो भी बढ़ाते हैं। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि खानपान का सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। गर्मियों में तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। तरबूज, खीरा, पपीता और संतरे जैसे फल स्किन के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। पर्याप्त नींद और तनाव से दूरी भी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रात में सोने से पहले चेहरा साफ करना और हल्की नाइट क्रीम या एलोवेरा जेल लगाना त्वचा की मरम्मत में मदद करता है। वहीं ज्यादा मेकअप और बार-बार स्क्रबिंग से बचना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है। अगर गर्मियों में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच भी त्वचा को लंबे समय तक हेल्दी, मुलायम और चमकदार बनाए रखा जा सकता है।