इंदौर सड़क चौड़ीकरण में दर्दनाक हादसा: डॉक्टर के सिर पर गिरा खंभा, ब्रेन सर्जरी के बाद घर पर लगाया तंज भरा बैनर

इंदौर । इंदौर के छावनी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए चल रही नगर निगम की कार्रवाई एक दर्दनाक हादसे में बदल गई, जहां एक होम्योपैथिक डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें ब्रेन सर्जरी तक करानी पड़ी। घटना 22 मई की बताई जा रही है, जब नगर निगम की टीम भारी मशीनों और पुलिस बल के साथ क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने पहुंची थी। इसी दौरान बिजली के तार जेसीबी मशीन में उलझ गए। उन्हें हटाने के प्रयास में मशीन ऑपरेटर ने जोर लगाया, जिससे एक बिजली का खंभा उखड़ गया और सीधे डॉक्टर कपिल दीक्षित के सिर पर गिर पड़ा। हादसे में वे मौके पर ही बेहोश हो गए और उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टर के अनुसार, उनके सिर में गंभीर चोट आई और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि तुरंत ब्रेन सर्जरी करनी पड़ी। कई दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद 27 मई को उन्हें डिस्चार्ज किया गया। इस पूरी घटना ने उनके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। डिस्चार्ज के बाद जब डॉक्टर अपने घर लौटे तो उन्होंने अपने मकान के बाहर एक बैनर लगाया, जिस पर लिखा था— “जीवित छोड़ देने के लिए नगर निगम और प्रशासन का धन्यवाद!” यह बैनर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। डॉक्टर ने बताया कि कार्रवाई के दौरान भारी मशीनें मकानों के बेहद करीब चलाई जा रही थीं। इसी दौरान अचानक की गई कार्रवाई में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, जिससे यह बड़ा हादसा हुआ। उनका आरोप है कि पहले चरणबद्ध तरीके से हटाने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में 24 घंटे का नोटिस देकर अचानक कार्रवाई शुरू कर दी गई। परिवार का कहना है कि कार्रवाई के दौरान उनके घर की दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो गईं और घरेलू सामान नीचे गिर गया। यदि उनके बुजुर्ग पिता उस समय कमरे में होते तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। वहीं, नगर निगम की ओर से छावनी क्षेत्र में करीब 124 मकानों के बाधक हिस्सों को हटाया गया था। कार्रवाई में भारी पुलिस बल और कई जेसीबी-पोकलेन मशीनें शामिल थीं। इस घटना ने नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और जल्दबाजी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास जरूरी है, लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज करके किया गया कोई भी कदम जानलेवा साबित हो सकता है।
इंदौर में शिकायत के बाद परिवार पर हमला, CCTV में कैद हुई पूरी घटना

इंदौर । इंदौर में एरोड्रम थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक नाबालिग लड़की को अश्लील मैसेज भेजने के विवाद ने गंभीर हिंसा का रूप ले लिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायत करने के बाद उन्हें न्याय मिलने के बजाय मारपीट और धमकियों का सामना करना पड़ा। मामले की शुरुआत 23 मई को हुई बताई जा रही है, जब अंबिकापुरी निवासी एक महिला की नाबालिग बेटी को विश्व प्रताप सिंह ठाकुर द्वारा मोबाइल पर अश्लील मैसेज भेजे गए। इस घटना के बाद पीड़ित महिला अपने पति और बेटे के साथ आरोपी के घर बात करने पहुंची थी। परिजनों के अनुसार, बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और आरोपी पक्ष आक्रामक हो गया। आरोप है कि आरोपी विश्व प्रताप के साथ उसके परिजन भी मौके पर आ गए और बिना किसी बात को सुने मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान लकड़ी, स्टंप और लात-घूंसों से हमला किया गया, जिसमें महिला और उनकी नाबालिग बेटी भी घायल हो गईं। महिला का कहना है कि मारपीट के दौरान वह बेहोश हो गई थीं। घटना के बाद परिवार ने 112 पर कॉल कर पुलिस को बुलाया, जिसके बाद घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि पीड़ित पक्ष का आरोप है कि पुलिस ने मामले को गंभीर धाराओं में दर्ज करने के बजाय केवल सामान्य मारपीट की धाराओं में FIR दर्ज की है। महिला का यह भी आरोप है कि आरोपी पक्ष प्रभावशाली है और राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के चलते पुलिस ने सख्त कार्रवाई नहीं की। पीड़ित परिवार ने इस मामले में डीसीपी से भी मुलाकात की है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। इधर, घटना का CCTV वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। वीडियो में मारपीट की पुष्टि होने के बाद भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद से उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं और पुलिस से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन यह मामला अब केवल मारपीट का नहीं बल्कि पुलिस कार्रवाई और सिस्टम की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
लोन और कर्ज से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए ज्योतिषीय उपायों की बढ़ती चर्चा, जानें कौन से दिन माने जाते हैं शुभ

नई दिल्ली । लोन लेना या देना कोई बड़ी बात नहीं है लेकिन अगर कुछ बड़ी बातों का ध्यान रखें तो दिया हुआ लोन या कर्ज जल्द वापस मिल सकता है और लिया गया लोन या कर्ज जल्द चुकता किया जा सकता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोन लेने या देने के लिए सप्ताह के कुछ दिन ही शुभ माने गए हैं. ऐसे में एक चूक आपकी परेशानी को बढ़ा सकती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो कर्ज लेने या देने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि दिन कौन सा है, साथ ही कौन से ऐसे ज्योतिष टिप्स का ध्यान रखें कि किसी तरह की बड़ी से बचा जा सके. आइए इस बारे में विस्तार से जानें. कर्ज लौटाने व देने का समय क्या हो? कर्ज लौटाने के लिए सप्ताह का मंगलवार व बुधवार का दिन सही माना जाता है. कर्ज देने लिए बुधवार और गुरुवार के दिन को कतई न चुनें. शुक्रवार को कर्ज लेना और देना ये दोनों ही काम शुभ फलदायी माने जाते हैं. अगर ऐसी कोई प्लानिंग है कि आपको किसी बचत योजनाओं में पैसे जमा करवाना है तो आपको इसके लिए बुधवार और गुरुवार का दिन चुनना चाहिए, इसके ये दोनों दिन अति शुभ होते हैं. गुरुवार के दिन भूलकर भी किसी को कर्ज दें, ऐसा करने से दो गुना धन हानि होने की संभावना बढ़ जाती है. गुरुवार के दिन कर्ज लेने से कर्ज जल्द चुकता हो जाता है.कर्ज लेने से पहले किन बातों का रखें ध्यान?सोमवार का दिन कर्ज के लेन-देन के लिए शुभ माना गया है. मंगलवार कर्ज लेने से धन की हानि की संभावना बढ़ जाती है और आर्थिक तंगी भी बढ़ सकती है. बुधवार को कर्ज देने वाले व्यक्ति को हानि होता है. शुक्रवार का दिन ऋण लेने और देने दोनों के लिए शुभ होता है. शनिवार को लिया ऋण जल्द उतरता है. रविवार ऋण विनाशक भगवान सूर्य नारायण का दिन है और पैसों का लेन-देन के लिए इन दिन को शुभ नहीं माना गया है. लोन चुकाने में दिक्कतें आती रहती हैं. रविवार के दिन न तो कर्ज दें और न लें. लोन लेने और देने के लिए जरूरी टिप्स• पंचांग की माने तो वृद्धि योग, द्विपुष्कर योग के अलावा त्रिपुष्कर योग में कोई भी नया कर्ज न लें.• कोई भी बड़ा आर्थिक लेनदेन करना हो तो इस बात का ध्यान रखें कि उस तय समय पर राहुकाल न चल रहा हो.• लोन लौटाने के लिए वृद्धि योग अति शुभ माना गया है. हस्ति नक्षत्र में कर्ज चुकाएं तो धन हानि या लेट लतीफी नहीं होगी.• लोन उतर नहीं पा रहा है तो मंगलवार को हनुमान जी की उपासना करें. हनुमान जी के सामने बैठकर ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें.• अगर बैंक से लोन ले रहे हैं तो लोन के पेपर्स पर सिग्नेचर करने या कुछ भी लिखने के लिए काले पेन का इस्तेमान न करें. नीले या लाल रंग शुभ होगा.• लोन की फाइल पर सिग्नेचर कर रहे हैं या लोन की किस्त जमा कर रहे हैं तो दिशा का ध्यान रखें. इस दौरान अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें.
ICU में भर्ती बुजुर्ग महिला का सोने का कंगन गायब, मौत के बाद हुआ खुलासा; दूसरी घटना में वॉक कर रही महिला से मंगलसूत्र लूटा

इंदौर । इंदौर में एक ओर जहां अस्पताल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह से सोने के कंगन चोरी होने का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर सड़क पर बदमाशों ने महिला से मंगलसूत्र लूटकर सनसनी फैला दी है। दोनों घटनाओं ने शहर की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला मामला एमजी रोड थाना क्षेत्र के अर्पण अस्पताल का है, जहां मूसाखेड़ी के मयूर नगर निवासी ज्योति गुप्ता की मां उमा सूर्यवंशी को 16 अप्रैल को अचानक तबीयत बिगड़ने पर भर्ती कराया गया था। उन्हें ICU में रखा गया, जहां उनके दोनों हाथों में सोने के कंगन थे। परिजनों के अनुसार, शाम को जब मरीज को ICU से बाहर लाया गया, तो एक हाथ का कंगन गायब मिला। इसके बाद उन्हें आगे इलाज के लिए गोकुलदास अस्पताल रेफर किया गया, जहां उनकी मौत हो गई। परिवार का कहना है कि दुख की घड़ी के कारण तत्काल शिकायत दर्ज नहीं कराई जा सकी। बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा और एमजी रोड पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ चोरी का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब अस्पताल के CCTV फुटेज खंगाल रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कंगन कब और कैसे गायब हुआ। इसी बीच शहर में दूसरी घटना ने दहशत बढ़ा दी। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र में वीआईपी परस्पर नगर इलाके में रात के समय टहल रही आशा सोनी नाम की महिला से बदमाश ने मंगलसूत्र लूट लिया। पुलिस के अनुसार, महिला वॉक कर रही थीं, तभी एक्टिवा सवार बदमाश अचानक उनके पास पहुंचा और झपट्टा मारकर गले से मंगलसूत्र छीनकर फरार हो गया। घटना के बाद महिला ने घर पहुंचकर अपने पति को जानकारी दी और अगले दिन पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने संदिग्ध की तलाश शुरू कर दी है और आसपास के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। इन दोनों घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी और डर का माहौल है। अस्पताल से लेकर सड़कों तक बढ़ती ऐसी वारदातें पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल छोड़ रही हैं।
इंदौर में नौतपा के बावजूद राहत जैसी गर्मी: पारा 42 डिग्री से नीचे, उमस से लोग बेहाल

इंदौर । इंदौर में नौतपा शुरू हुए चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस बार मौसम का मिजाज कुछ अलग ही देखने को मिल रहा है। आमतौर पर नौतपा के दौरान भीषण गर्मी और लू का असर रहता है, लेकिन इस बार अधिकतम तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही दर्ज किया जा रहा है। इसके बावजूद शहरवासियों को राहत नहीं मिल रही है, क्योंकि तेज धूप और बढ़ती उमस ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया है। गुरुवार को इंदौर में अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26 डिग्री के करीब बना रहा। पिछले तीन दिनों से रात का तापमान लगभग स्थिर बना हुआ है, जिससे रातों में भी गर्मी का एहसास कम नहीं हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही पारा रिकॉर्ड स्तर तक नहीं पहुंच रहा हो, लेकिन हवा में नमी की अधिकता के कारण “फील लाइक टेम्परेचर” काफी ज्यादा महसूस हो रहा है। दिन के समय तेज धूप के कारण सड़कें तपने लगती हैं और दोपहर के वक्त बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। लोग घरों और दफ्तरों में भी पसीने और उमस से परेशान हैं। खासकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच स्थिति ज्यादा असहज हो जाती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो से तीन दिनों तक तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच ही बना रहेगा। हालांकि, राहत की कोई बड़ी संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक हवा की गति कम होने और नमी बढ़ने से उमस और अधिक महसूस हो रही है। इस बीच मौसम के पिछले रिकॉर्ड भी चर्चा में हैं। वर्ष 1994 में इंदौर में मई महीने में 46.6 डिग्री सेल्सियस तक तापमान दर्ज किया गया था, जो अब तक का सबसे अधिक रिकॉर्ड है। वहीं पिछले वर्षों में मई महीने के दौरान बारिश और मौसम में बदलाव भी देखने को मिला है, जिससे गर्मी का असर कुछ कम हो जाता है। फिलहाल नौतपा के बीच भले ही तापमान अपेक्षाकृत कम बना हुआ हो, लेकिन उमस और धूप का संयुक्त असर लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। आने वाले दिनों में मौसम के रुख पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल के बीच TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य को लेकर गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज

नई दिल्ली । बंगाल से आई भ्रष्टाचार की एक तस्वीर की चर्चा पूरे देश में हो रही है. उत्तर 24 परगना ज़िले में एक खेत में नोट से भरी हुई बोरियां बरामद हुई हैं. पुलिस को बोरियों में मिले ये नोट गिनने में कई घंटे लग गए. जब नोटों की गिनती ख़त्म हुई तो पता चला कि कुल मिलाकर 2 करोड़ 24 लाख रुपये खेत में गाड़े गए थे. ये नोट बदुरिया नगरपालिका के चेयरमैन और TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के हैं. TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य का भ्रष्टाचार उजागरदीपांकर भट्टाचार्य वही नेता है जिसको 3 दिन पहले भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. गिरफ़्तारी के समय भी दीपांकर के पास से 80 लाख रुपये बरामद हुए थे. इस तरह पुलिस ने अभी तक दीपांकर की काली कमाई के 3 करोड़ 4 लाख रुपये ज़ब्त कर लिए हैं. जनसेवा के नाम पर राजनीति में आने वाले दीपांकर भट्टाचार्य ने दोनों हाथों से जनता को लूटा और नोटों की बोरी खेत में दबा दी. ज़ी न्यूज की टीम ने बदुरिया के उस खेत में जाकर पता लगाया कि पैसे किस तरह छिपाकर रखे गए थे. कैसे पुलिस को बोरियों में छिपाकर रखे गए पैसे का पता चला. आख़िर दीपांकर भट्टाचार्य के पास इतने पैसे कहां से आए. एक समय में जो दीपांकर मज़दूरी का काम करता था, वो करोड़ों का मालिक कैसे बन गया. कहते हैं कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते लेकिन बंगाल में पैसे इन दिनों खेत से निकल रहे हैं और ये पैसे भ्रष्टाचार के हैं. खेत में दबी मिली नोटों की बोरीउत्तर 24 परगना के बदुरिया में जूट का यही वो खेत है जहां नोटों से भरी बोरियां और ट्रॉली बैग मिले थे. कोई सोच भी नहीं सकता था कि लगभग 7 फीट लंबे जूट के पौधों के बीच पैसे से भरी बोरियां और बैग छिपाए गए होंगे. स्थानीय लोगों के मुताबिक़ जूट का ये खेत शमीम नाम के व्यक्ति का है. शमीम को बदुरिया नगरपालिका के अध्यक्ष दीपांकर भट्टाचार्य का दाहिना हाथ बताया जाता है. एक व्यक्ति जब घास काटने के लिए खेत में आया तो उसे ये गड्ढे दिखाई दिए. फिर उसने एक स्थानीय नेता के जरिए पुलिस को इसकी जानकारी दी. इसी सूचना के आधार पर आधे घंटे में पुलिस खेत में पहुंच गई. कुछ घंटों की जांच-पड़ताल के बाद नोटों से भरी ये बोरियां मिलीं. मजदूर से शुरू करके बना भ्रष्ट नेतास्थानीय लोगों के मुताबिक, दीपांकर का शुरुआती जीवन बेहद साधारण था. उसके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी. शुरुआत में उसने दिहाड़ी मज़दूर का भी काम किया. बाद में परिवार की मदद से एक कार खरीदी. उसी गाड़ी से वो सवारी ढोने का काम करने लगा.वर्ष 2010 के करीब राजनीति में एंट्री के बाद उसकी ज़िंदगी बदल गई. दीपांकर ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की. लेकिन 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद वो TMC में शामिल हो गया. यहीं से उसकी ज़िंदगी बदल गई. पहले वो पार्षद बना और उसके बाद बदुरिया नगरपालिका का चेयरमैन भी बन गया. आरोप है कि वो सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों से वसूली करता था. इन्हीं पैसों को उसने खेत में छिपा रखा था. योजनाओं के नाम पर लेता था रिश्वतरिपोर्टर अमित भारद्वाज से बातचीत में एक व्यक्ति ने बताया कि लोगों से आवास योजना के नाम पर दीपांकर रिश्वत लेता था. खुद उस व्यक्ति ने 40 हज़ार रुपये दिए. लेकिन सरकार बदलते ही दीपांकर भट्टाचार्य के बुरे दिन शुरू हो गए. उसके खिलाफ शिकायत की गई कि उसने सरकारी तिरपाल लोगों के बीच बांटने के बदले अपने पास रख लिए. इसी सिलसिले में पुलिस ने उसके गोदाम पर छापा मारा तो 4,000 सरकारी तिरपाल ज़ब्त हुए. बाद में उसके कंप्यूटर सेंटर से 80 लाख रुपये भी मिले. इसी के बाद 25 मई को पुलिस ने दीपांकर भट्टाचार्य को गिरफ़्तार किया. खेत में दबे उसके पैसे का कभी सुराग नहीं मिलता, अगर अनजाने में स्थानीय व्यक्ति की नज़र नहीं गई होती. आलीशान घर में रहता था भ्रष्ट दीपांकर नोटों से भरी बोरियां मिलने के बाद बदुरिया में TMC नेता दीपांकर भट्टाचार्य के ख़िलाफ़ जांच का दायरा बढ़ता ही जा रहा है. दीपांकर के जिस आलीशान घर पर दिन में ताला लगा हुआ था, वहां शाम होते-होते पुलिस पहुंच गई. CRPF की टीम के साथ स्थानीय पुलिस ने दीपांकर के घर की जांच की. जिस नेता ने खेत में पैसा छिपा रखा था, उसने घर में भी अपने भ्रष्टाचार का कोई न कोई निशान ज़रूर छोड़ा होगा. घर में तलाशी पूरी होने के बाद ही सच्चाई सामने आ पाएगी.
केन-बेतवा लिंक परियोजना पर बढ़ा विवाद, 44,600 करोड़ की योजना को लेकर पीएम मोदी ने राज्यों को दिए तेजी से समाधान के निर्देश

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच प्रस्तावित केन-बेतवा लिंक परियोजना एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गई है। लगभग 44,600 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी जल परियोजना को लेकर प्रधानमंत्री स्तर पर हुई हालिया बैठक में इसके क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से विचार किया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने संबंधित राज्यों को निर्देश दिए कि परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों का जल्द समाधान किया जाए ताकि इसे निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाया जा सके। यह परियोजना देश की प्रमुख नदी जोड़ो योजनाओं में से एक मानी जाती है, जिसका उद्देश्य जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा को मजबूत करना है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मध्य प्रदेश की केन नदी को उत्तर प्रदेश की बेतवा नदी से जोड़ा जाना प्रस्तावित है। इस योजना के माध्यम से दोनों नदियों के जल प्रवाह को संतुलित कर बुंदेलखंड क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना पर केंद्र सरकार का बड़ा निवेश प्रस्तावित है, जबकि इसका अधिकांश वित्तीय भार केंद्र द्वारा वहन किया जा रहा है। इस योजना के तहत नहर प्रणाली, बांध निर्माण और जल वितरण ढांचे का व्यापक विकास किया जाएगा, जिससे लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है। परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका भौगोलिक और पर्यावरणीय प्रभाव है। केन नदी मध्य प्रदेश के कैमूर क्षेत्र से निकलकर उत्तर प्रदेश में यमुना में मिलती है, जबकि बेतवा नदी रायसेन जिले से शुरू होकर आगे बढ़ते हुए यमुना में समाहित होती है। इन दोनों नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को जोड़ने के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाना है, जिसमें बांध, नहरें और पावर उत्पादन इकाइयाँ शामिल हैं। इस परियोजना के माध्यम से कुछ क्षेत्रों में बिजली उत्पादन और जल आपूर्ति को भी बेहतर बनाने की योजना है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी योजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों का पुनर्वास और विस्थापन है। परियोजना के कारण लगभग दो दर्जन गांव प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें कई गांव जलभराव क्षेत्र में आते हैं, जबकि कुछ वन्यजीव अभयारण्यों के दायरे में स्थित हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, जिसके चलते विरोध की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीणों और प्रशासन के बीच इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से बातचीत जारी है, लेकिन समाधान पूरी तरह सामने नहीं आ सका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन बेहद आवश्यक है। जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही कारण है कि केंद्र सरकार ने राज्यों को निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित पक्षों से चर्चा कर समाधान निकाला जाए ताकि परियोजना आगे बढ़ सके। फिलहाल केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की सबसे चर्चित जल परियोजनाओं में शामिल है, जो भविष्य में बुंदेलखंड क्षेत्र की जल समस्या को काफी हद तक हल कर सकती है। लेकिन इसके साथ जुड़े सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दे इसे एक जटिल परियोजना भी बनाते हैं। आने वाले समय में इस पर होने वाले निर्णयों पर पूरे क्षेत्र की निगाहें टिकी रहेंगी।
बशीर बद्र: शेरों से ज्यादा इंसानियत के लिए याद किए जाएंगे, दोस्तों ने सुनाए भावुक किस्से

उर्दू अदब के महान शायर बशीर बद्र के निधन के बाद पूरे साहित्यिक जगत में शोक की लहर है। उनकी शायरी जितनी गहरी और सरल थी, उतना ही उनका व्यक्तित्व भी सहज और अपनापन से भरा हुआ था। भोपाल में उनके साथ जुड़े साहित्यकारों, पत्रकारों और शायरों ने उन्हें याद करते हुए कई ऐसे किस्से साझा किए, जो उनकी इंसानियत और विनम्रता को और अधिक उजागर करते हैं। मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी की पूर्व निदेशक नुसरत मेहंदी ने एक मुशायरे का जिक्र करते हुए बताया कि जब एक नई शायरा मंच पर घबराकर गजल पढ़ रही थीं और श्रोता हूटिंग करने लगे थे, तब बशीर बद्र खुद उठकर खड़े हो गए। उन्होंने माइक लेकर कहा कि अच्छी शायरी को समझने में वक्त लगता है और शायरा को पूरा मौका मिलना चाहिए। उनके इस हस्तक्षेप के बाद पूरा माहौल शांत हो गया और शायरा ने अपनी प्रस्तुति पूरी की, जिसे बाद में खूब सराहा गया। शायर बद्र वास्ती ने भी उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार बशीर बद्र अपने साथियों के साथ घर आए और चाय की बात हुई। जब कहा गया कि “हमें चूल्हा जलाना नहीं आता, आप बना लीजिए”, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया—“हमें किसी के घर में आग लगाना नहीं आता।” इस मजाक ने पूरे माहौल को हंसी से भर दिया और उनकी सहजता को और भी खास बना दिया। वरिष्ठ साहित्यकारों के अनुसार, बशीर बद्र जब मध्यप्रदेश उर्दू अकादमी के अध्यक्ष थे, तब भी उनका दफ्तर किसी सरकारी कार्यालय जैसा नहीं बल्कि एक साहित्यिक घर की तरह लगता था। उनका कमरा हमेशा खुला रहता था, जहां नए-पुराने शायरों की महफिलें सजती थीं। वे फाइलों पर हस्ताक्षर करते हुए भी हल्के-फुल्के अंदाज में शेर सुनाने से नहीं चूकते थे। कौसर सिद्दीकी ने भी उन्हें याद करते हुए बताया कि 1968 में शाहजहांपुर के एक ऑल इंडिया मुशायरे में उन्होंने पहली बार अपने शेर सुनाए थे, जहां बशीर बद्र ने उन्हें दाद दी थी। यह उनके जीवन का अविस्मरणीय क्षण था, जिसने उनके साहित्यिक सफर को नई दिशा दी। पत्रकारों के अनुसार, बशीर बद्र की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी थी। उनकी शायरी आम इंसान की जिंदगी से जुड़ी होती थी, जो सीधे दिल तक पहुंचती थी। उम्र के आखिरी दौर में भी उनकी याददाश्त भले कमजोर हो गई थी, लेकिन उनका अपनापन और सम्मान देने का अंदाज हमेशा कायम रहा। उनके निधन के साथ उर्दू साहित्य ने एक बड़ा सितारा खो दिया है, लेकिन उनके साथ जुड़े ये किस्से और उनकी शायरी उन्हें हमेशा जिंदा रखेंगे।
कर्नाटक की राजनीति में बड़ा मोड़, 36 साल से अजेय डीके शिवकुमार के सामने अब सबसे कठिन अग्निपरीक्षा

नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में हालिया नेतृत्व परिवर्तन ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस संगठन के भीतर सहमति बनने के बाद डीके शिवकुमार को राज्य की कमान सौंपे जाने के फैसले को आने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस नई जिम्मेदारी के साथ उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि क्या वे राज्य में पिछले लगभग चार दशकों से चले आ रहे सत्ता परिवर्तन के पैटर्न को बदल पाएंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार कर्नाटक में पिछले करीब 40 वर्षों से यह प्रवृत्ति देखी गई है कि कोई भी सरकार लगातार दोबारा सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है। हर चुनाव में मतदाताओं ने बदलाव का रुख अपनाया है, जिससे किसी भी दल के लिए अपनी सत्ता को बरकरार रखना एक कठिन चुनौती साबित हुआ है। इसी संदर्भ में डीके शिवकुमार के नेतृत्व को कांग्रेस की भविष्य की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है, जहां लक्ष्य केवल शासन चलाना नहीं बल्कि आगामी चुनाव में फिर से जनादेश हासिल करना भी है। डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर लंबे संघर्ष और संगठनात्मक कौशल से भरा रहा है। वे छात्र राजनीति से निकलकर राज्य की मुख्यधारा की राजनीति तक पहुंचे और धीरे-धीरे कांग्रेस संगठन में एक मजबूत स्तंभ के रूप में स्थापित हुए। अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई चुनावों में सफलता हासिल की है और अब तक पराजय का सामना नहीं करना पड़ा है, जो उन्हें राज्य के प्रमुख नेताओं में एक अलग पहचान देता है। पार्टी संगठन को मजबूत करने और संकट के समय विधायकों को एकजुट रखने में उनकी भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कांग्रेस ने 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली सफलता के बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी, जहां उन्होंने सरकार और संगठन दोनों स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई। अब मुख्यमंत्री के रूप में उनकी जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें न केवल प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखनी है, बल्कि आगामी चुनाव के लिए मजबूत जनाधार भी तैयार करना है। राज्य की सामाजिक और राजनीतिक संरचना भी इस चुनौती को और जटिल बनाती है। कर्नाटक में विभिन्न समुदायों की भूमिका चुनावी परिणामों को प्रभावित करती रही है। ऐसे में सभी प्रमुख सामाजिक समूहों के बीच संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए आवश्यक होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी प्रकार का असंतुलन आगामी चुनाव में सीधे परिणामों पर असर डाल सकता है। कांग्रेस के लिए यह बदलाव एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य संगठन को नई ऊर्जा देना और मतदाताओं के बीच एक नया संदेश पहुंचाना है। वहीं विपक्षी दल भी इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि डीके शिवकुमार अपने प्रशासनिक अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के दम पर कर्नाटक की राजनीति में स्थापित इस लंबे ट्रेंड को बदलने में सफल हो पाते हैं या नहीं। आने वाले दो वर्ष न केवल उनके नेतृत्व की परीक्षा होंगे, बल्कि यह भी तय करेंगे कि कर्नाटक की राजनीति में बदलाव की परंपरा जारी रहती है या कोई नया अध्याय शुरू होता है।
गांधीनगर में STF की बड़ी कार्रवाई: नशीले कफ सिरप का अवैध जाल उजागर, 10 हिरासत में

भोपाल । भोपाल के गांधीनगर थाना क्षेत्र में देर रात STF ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध कफ सिरप बनाने की फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। यह पूरा अवैध कारोबार एक सामान्य से दिखने वाले मकान के सिर्फ दो कमरों में संचालित किया जा रहा था, जहां नशीले कफ सिरप का उत्पादन, पैकिंग और स्टोरेज किया जा रहा था। STF की टीम को लंबे समय से सूचना मिल रही थी कि इलाके में प्रतिबंधित और नशीले तत्वों से युक्त कफ सिरप की सप्लाई का नेटवर्क सक्रिय है। इसी इनपुट के आधार पर गुरुवार देर रात करीब 12 बजे छापा मारा गया, जो शुक्रवार तड़के 3 बजे तक चला। कार्रवाई के दौरान 700 से अधिक पेटियां, पैकिंग मशीनें और बड़ी मात्रा में तैयार माल बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपये बताई जा रही है। मकान के भीतर ‘आफ कफ’ नाम से अवैध सिरप तैयार किया जा रहा था। एक कमरे में उत्पादन से जुड़ा सामान रखा गया था, जबकि दूसरे कमरे को स्टोरेज और पैकिंग यूनिट के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। मौके से मिले सैंपलों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है, ताकि सिरप में मौजूद रसायनों और नशीले तत्वों की पुष्टि की जा सके। कार्रवाई के दौरान STF ने मौके से 10 लोगों को हिरासत में लिया है। पूछताछ में सामने आ रहा है कि यह नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि कई जिलों में इसकी सप्लाई की जा रही थी। अब STF यह पता लगाने में जुटी है कि इस पूरे रैकेट के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और सप्लाई चैन किन-किन राज्यों या शहरों तक फैला हुआ है। दिलचस्प बात यह रही कि पूरी कार्रवाई की भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग सकी। STF अधिकारियों के मुताबिक यह एक सुनियोजित छापेमारी थी, ताकि नेटवर्क को मौके पर ही दबोचा जा सके। मकान किसके नाम पर है, इसकी भी जांच की जा रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार यह मकान किसी मालवीय नामक व्यक्ति का बताया जा रहा है, हालांकि उससे अभी संपर्क नहीं हो पाया है। STF अब इस बात की भी जांच कर रही है कि अवैध कफ सिरप किन-किन मेडिकल स्टोर्स या अवैध चैनलों के जरिए सप्लाई किया जा रहा था। साथ ही अन्य ठिकानों पर भी दबिश की संभावना जताई जा रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में कफ सिरप की गुणवत्ता और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कुछ मामलों में जहरीले केमिकल मिलने से बच्चों की मौत तक की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे इस तरह के अवैध नेटवर्क पर सख्ती और बढ़ा दी गई है।