SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने बड़ा अवसर जारी किया है। संस्थान ने असिस्टेंट कोच के कुल 100 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) के आधार पर की जाएगी। जारी अधिसूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 26 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 27 जून 2026 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑफलाइन माध्यम से भेजना होगा। इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रारंभ में 3 वर्षों के लिए की जाएगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 7 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है। योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास एसएआई/एनएस-एनआईएस पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों या विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता या संबंधित खेल कोटा के अंतर्गत योग्य उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। सरकारी विभागों में कार्यरत वे अधिकारी भी पात्र हैं जिनके पास समान पद पर अनुभव या लेवल-5 में कम से कम 6 वर्ष की नियमित सेवा हो। अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 26 मई 2026 के आधार पर की जाएगी। चयन प्रक्रिया में पात्रता जांच, इंटरव्यू और मेरिट सूची शामिल होगी। चयनित उम्मीदवारों को 35,400 रुपये से लेकर 1,12,400 रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा, साथ ही अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को SAI की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर उसे भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म को निर्धारित पते पर डाक के माध्यम से भेजना अनिवार्य है।
सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी

नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस बल से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों व कर्मियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने वर्ष 1897 में अपनी स्थापना के बाद से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे एक अनुशासित और जनसेवा से जुड़ा हुआ पुलिस बल बताया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल की व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि नियंत्रण और आदेशों का सख्ती से पालन कराना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस व्यवस्था में एक समय ‘गुलामी की मानसिकता’ विकसित हो गई थी, जिसे अब बदलने की आवश्यकता है। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए इस सोच से पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा मजबूत हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अधिक नागरिक-हितैषी बनना चाहिए, जिससे लोग बिना भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और समाज में सुरक्षा तथा कानून के प्रति सम्मान मजबूत होगा। उन्होंने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। सिक्किम पुलिस ने अपने व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली के जरिए जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।
देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन

नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी गई, जिसमें दोनों नेताओं की तस्वीर भी साझा की गई। PMO ने अपने पोस्ट में बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया और इसे प्रेरणादायक अनुभव कहा। मुलाकात के बाद सीएम फडणवीस ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र में चल रहे विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से हर मुलाकात उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया। हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि बैठक में महाराष्ट्र के विकास कार्यों के अलावा किसानों से जुड़े मुद्दों, विशेषकर प्याज उत्पादक किसानों की स्थिति और सहकारी चीनी उद्योग से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई। इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने नई दिल्ली में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी थी। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में कई विकास परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता मानी जा रही है।
क्या आम आदमी विकास से बाहर छूट रहा है?

-ललित गर्गस्वतंत्रता प्राप्ति के बाद नए भारत के निर्माण के जिन आधार स्तंभों की कल्पना की गई थी, उनमें शिक्षा और चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। यह माना गया था कि यदि देश के नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और जागरूक होंगे तो लोकतंत्र मजबूत होगा, सामाजिक असमानताएं कम होंगी और राष्ट्र विकास के पथ पर आगे बढ़ेगा। शिक्षा को व्यक्ति निर्माण और चिकित्सा को जीवन रक्षा का माध्यम माना गया था। लेकिन स्वतंत्रता के लगभग आठ दशकों बाद स्थिति चिंताजनक प्रश्न खड़े करती है कि क्या ये दोनों क्षेत्र अपने मूल उद्देश्य से भटककर व्यवसाय और बाजार के अधीन नहीं हो गए हैं? आज शिक्षा और चिकित्सा दोनों क्षेत्रों में जो विसंगतियां दिखाई देती हैं, वे केवल व्यवस्थागत संकट नहीं बल्कि सामाजिक संकट का रूप ले चुकी हैं। एक ओर शिक्षा व्यवस्था परीक्षा, अंकों और प्रतिस्पर्धा की आर्थिक मशीन बन गई है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सा सेवा लाभ-हानि के गणित में उलझती दिखाई देती है। इन दोनों क्षेत्रों की बढ़ती व्यावसायिकता ने आम आदमी को सबसे अधिक प्रभावित किया है। शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं था। शिक्षा अब डिग्री, नौकरी और प्रतिस्पर्धा तक सीमित होती दिखाई देती है। शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं का सबसे भयावह चेहरा कोटा, सीकर और अन्य कोचिंग एवं शिक्षा केंद्रों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है। कोटा, जो कभी देश की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र माना जाता था, अब विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, अकेलेपन और असफलता के भय के कारण आत्महत्या की घटनाओं से लगातार चर्चा में रहा है। कोटा, सीकर तथा अन्य कोचिंग नगरों में पिछले वर्षों में अनेक विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर किया है। राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या की घटना इसी विडंबना का उदाहरण है। परीक्षा रद्द होने से उत्पन्न अनिश्चितता और मानसिक तनाव ने एक संभावनाशील जीवन समाप्त कर दिया। यह घटना अकेली नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2024 में 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। औसतन हर 36 मिनट में एक विद्यार्थी जीवन समाप्त कर रहा है। यह केवल व्यक्तिगत विफलता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता है।शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं का सबसे भयावह चेहरा कोटा, सीकर और अन्य कोचिंग एवं शिक्षा केंद्रों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं के रूप में सामने आया है। कोटा, जो कभी देश की शैक्षणिक आकांक्षाओं का केंद्र माना जाता था, अब विद्यार्थियों पर बढ़ते मानसिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, अकेलेपन और असफलता के भय के कारण आत्महत्या की घटनाओं से लगातार चर्चा में रहा है। कोटा, सीकर तथा अन्य कोचिंग नगरों में पिछले वर्षों में अनेक विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने शिक्षा व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर किया है। राजस्थान के सीकर में नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र की आत्महत्या की घटना इसी विडंबना का उदाहरण है। परीक्षा रद्द होने से उत्पन्न अनिश्चितता और मानसिक तनाव ने एक संभावनाशील जीवन समाप्त कर दिया। यह घटना अकेली नहीं है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार वर्ष 2024 में 14,488 विद्यार्थियों ने आत्महत्या की। औसतन हर 36 मिनट में एक विद्यार्थी जीवन समाप्त कर रहा है। यह केवल व्यक्तिगत विफलता नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता है। दूसरी ओर नीट, नेट, प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं तथा अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने, परिणामों में विवाद और अनिश्चितता की स्थितियों ने विद्यार्थियों में गहरा असंतोष और अविश्वास पैदा किया है। वर्षों की तैयारी करने वाले छात्र जब परीक्षा प्रणाली को ही अविश्वसनीय पाते हैं तो उनमें निराशा और मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक है। आज परीक्षा प्रणाली अविश्वसनीय होती जा रही है। प्रश्नपत्र लीक होना, परीक्षाओं का रद्द होना, मूल्यांकन विवाद, शोध कार्यों में साहित्यिक चोरी, पीएचडी प्रक्रियाओं का औपचारिक बन जाना और कोचिंग संस्कृति का बढ़ना शिक्षा के बाजारीकरण की तस्वीर प्रस्तुत करता है। शिक्षा अब ज्ञान से अधिक निवेश और प्रतिफल का विषय बनती जा रही है। धीरे-धीरे शिक्षा सेवा से व्यवसाय में बदलती गई। बड़े निजी विद्यालय, कोचिंग संस्थान और विश्वविद्यालय आज करोड़ों के उद्योग बन चुके हैं। डॉक्टर और इंजीनियर बनाने के सपनों का ऐसा व्यापार खड़ा हुआ जिसमें अभिभावक आर्थिक रूप से टूटने लगे। आज एक सामान्य परिवार अपने बच्चों की शिक्षा के लिए जीवन भर की बचत खर्च करने को विवश है। विद्यालयों की ऊंची फीस, निजी कोचिंग, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उच्च शिक्षा की महंगी व्यवस्था ने शिक्षा को आम आदमी की पहुंच से दूर कर दिया है। इसी प्रकार चिकित्सा क्षेत्र की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। चिकित्सा को कभी सेवा का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन आज निजी चिकित्सालयों की बढ़ती संख्या और उनकी व्यावसायिक प्रवृत्ति ने आम नागरिक को संकट में डाल दिया है। इलाज इतना महंगा हो गया है कि अनेक परिवार बीमारी के कारण आर्थिक रूप से टूट जाते हैं। निजी अस्पतालों में उपचार, जांच, आईसीयू, दवाओं का खर्च और नकली दवाओं में जीवन समाप्त होने की घटनाएं लगातार बढ़ी है। अनेक मामलों में अनावश्यक परीक्षण, अत्यधिक शुल्क और व्यावसायिक दृष्टिकोण की शिकायतें सामने आती रहती हैं। चिकित्सा सेवा का उद्देश्य रोगी को राहत देना था, लेकिन कई स्थानों पर वह लाभ कमाने की प्रणाली में बदलती दिखाई देती है। जगह-जगह खुले निजी अस्पताल और शिक्षण संस्थान एक प्रकार की प्रतिस्पर्धा में उतर आए हैं। लेकिन यह प्रतिस्पर्धा गुणवत्ता की अपेक्षा लाभ कमाने की अधिक दिखाई देती है। परिणाम यह हुआ कि शिक्षा और चिकित्सा दोनों ही सामान्य नागरिक की आर्थिक क्षमता से बाहर जाने लगी हैं। इन परिस्थितियों का एक सामाजिक दुष्परिणाम भी सामने आया है। आर्थिक दबाव, भविष्य की अनिश्चितता, शिक्षा का तनाव, महंगी चिकित्सा और रोजगार संकट के कारण अवसाद, मानसिक तनाव और आत्महत्या की घटनाएं बढ़ रही हैं। युवा पीढ़ी उपलब्धियों के दबाव में टूट रही है, जबकि परिवार आर्थिक बोझ से जूझ रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय को अधिक सशक्त, उत्तरदायी और कठोर भूमिका निभाते हुए परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और सुरक्षित बनाना होगा। इसी प्रकार चिकित्सा क्षेत्र में देशभर में स्थापित हुए नए एम्स संस्थानों एवं उच्च चिकित्सा केंद्रों का लाभ वास्तव में आम नागरिक तक सरल, सस्ती और सुलभ व्यवस्था के रूप में
सात्विकता में ही मनुष्य जीवन की श्रेष्ठता

-सुरेश गोयल धूप वाला भारतीय संस्कृति सदैव उच्च जीवन मूल्यों, नैतिक आदर्शों और आध्यात्मिक चेतना पर आधारित रही है। हमारे ऋषि-मुनियों ने जीवन को केवल भौतिक सुखों तक सीमित नहीं माना, बल्कि उसे आत्मिक उन्नति और मानव कल्याण का माध्यम बताया। यही कारण है कि भारतीय जीवन पद्धति में “सात्विकता” को विशेष महत्व दिया गया। आज आधुनिकता और पाश्चात्य प्रभाव के कारण मनुष्य का जीवन भले ही सुविधासंपन्न हो गया हो, किंतु मानसिक शांति, संतोष और आत्मिक सुख उससे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे समय में सात्विक जीवन शैली ही मनुष्य को वास्तविक श्रेष्ठता प्रदान कर सकती है। सात्विकता का अर्थ केवल भोजन की शुद्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के आहार, विचार और व्यवहार की पवित्रता से जुड़ी हुई है। सात्विक व्यक्ति सत्य, संतोष, विनम्रता, करुणा और परोपकार जैसे गुणों को अपने जीवन में अपनाता है। उसके भीतर ईर्ष्या, द्वेष, छल-कपट और दिखावे के लिए कोई स्थान नहीं होता। वह स्वयं के साथ-साथ समाज के कल्याण की भावना रखता है। सात्विक जीवन का सबसे प्रमुख आधार शुद्ध और सादा आहार है। भारतीय आयुर्वेद में कहा गया है कि जैसा अन्न होता है, वैसा ही मन बनता है। इसलिए सात्विक भोजन ऐसा माना गया है जो प्रकृति से प्राप्त, ताजा, शाकाहारी और सुपाच्य हो। मौसमी फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज, दूध, दही और मेवे शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ मन को भी शांत और निर्मल बनाते हैं। इसके विपरीत अत्यधिक मसालेदार, तामसिक और बासी भोजन मनुष्य में आलस्य, क्रोध और असंयम को बढ़ाता है। आज अनेक बीमारियों का मुख्य कारण भी असंतुलित खानपान ही बन चुका है। यदि मनुष्य सात्विक आहार अपनाए तो उसका शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रह सकता है। सात्विकता का दूसरा महत्वपूर्ण आधार सत्य और अहिंसा है। हमारे धर्मग्रंथों में सत्य को ही परम धर्म बताया गया है। सत्य बोलने वाला व्यक्ति आत्मविश्वास और सम्मान प्राप्त करता है। इसी प्रकार अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से बचना नहीं, बल्कि अपने व्यवहार और वाणी से भी किसी को कष्ट न पहुंचाना है। मधुर वाणी, विनम्र व्यवहार और सभी जीवों के प्रति दया का भाव सात्विक जीवन की पहचान हैं। आज समाज में बढ़ती कटुता, तनाव और विवादों का एक बड़ा कारण सहनशीलता और संवेदनशीलता की कमी है। यदि मनुष्य सात्विक गुणों को अपनाए तो परिवार और समाज दोनों में सौहार्द का वातावरण बन सकता है। भारतीय संस्कृति में प्रकृति के साथ तालमेल को भी सात्विक जीवन का आवश्यक अंग माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त में उठना, योग-प्राणायाम करना, नियमित दिनचर्या अपनाना और प्रकृति के नियमों के अनुसार जीवन जीना मनुष्य को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ बनाता है। आधुनिक जीवन शैली में देर रात तक जागना, कृत्रिम साधनों पर निर्भरता और भागदौड़ भरा जीवन मनुष्य को तनाव और अवसाद की ओर ले जा रहा है। इसके विपरीत सात्विक जीवन प्रकृति से जुड़कर मन और शरीर में नई ऊर्जा का संचार करता है। सात्विकता का सबसे बड़ा गुण संतोष है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे की दौड़ में इतना उलझ गया है कि उसके जीवन से शांति समाप्त होती जा रही है। अधिक पाने की लालसा ने उसे असंतुष्ट और तनावग्रस्त बना दिया है। जबकि सात्विक जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक सुख बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि और मानसिक शांति में है। संतोषी व्यक्ति कम साधनों में भी प्रसन्न रहता है और दूसरों की सफलता से ईर्ष्या नहीं करता।सात्विकता का सबसे बड़ा गुण संतोष है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं और दिखावे की दौड़ में इतना उलझ गया है कि उसके जीवन से शांति समाप्त होती जा रही है। अधिक पाने की लालसा ने उसे असंतुष्ट और तनावग्रस्त बना दिया है। जबकि सात्विक जीवन हमें सिखाता है कि वास्तविक सुख बाहरी प्रदर्शन में नहीं, बल्कि आंतरिक संतुष्टि और मानसिक शांति में है। संतोषी व्यक्ति कम साधनों में भी प्रसन्न रहता है और दूसरों की सफलता से ईर्ष्या नहीं करता। वास्तव में सात्विकता केवल एक जीवन शैली नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने का मार्ग है। यह मनुष्य को संयम, सदाचार और आत्मिक शांति की ओर ले जाती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अंधाधुंध पाश्चात्य जीवन शैली की नकल करने के बजाय अपनी भारतीय संस्कृति के सात्विक मूल्यों को अपनाएं। जब मनुष्य का आहार शुद्ध, विचार सकारात्मक और व्यवहार विनम्र होगा, तभी समाज में शांति, प्रेम और मानवता का विस्तार संभव हो सकेगा। निस्संदेह सात्विकता में ही मनुष्य जीवन की वास्तविक श्रेष्ठता निहित है।
मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन, 91 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

भोपाल। “उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए…” अपनी शायरी से करोड़ों दिलों को छूने वाले मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र अब इस दुनिया में नहीं रहे। आधुनिक गजल को नई पहचान देने वाले बद्र साहब ने 91 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और कला जगत में गहरा शोक व्याप्त है। डॉ. बशीर बद्र ने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे भोपाल के ईदगाह हिल्स स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) और उम्र संबंधी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर फैलते ही देश-विदेश में फैले उनके चाहने वालों, साहित्य प्रेमियों और शायरी के प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ साहित्यकारों और शायरों ने उनके निधन को उर्दू अदब की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे।डॉ. बशीर बद्र का जन्म 15 फरवरी 1935 को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में हुआ था। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से पीएचडी भी पूरी की। बाद में वे मेरठ कॉलेज में उर्दू विभागाध्यक्ष रहे और लंबे समय तक शिक्षण एवं साहित्य सेवा से जुड़े रहे। बशीर बद्र ने उर्दू गजल को आम लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी शायरी में मोहब्बत, तन्हाई, जिंदगी और रिश्तों की सादगी भरी गहराई दिखाई देती थी। उनकी नर्म लहजे वाली गजलें और मखमली आवाज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। उनके जाने से उर्दू शायरी की दुनिया में एक ऐसा खालीपन पैदा हुआ है, जिसे भर पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।
IIM Mumbai Recruitment 2026: मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए वैकेंसी, जानें योग्यता और सैलरी

नई दिल्ली। भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई ने मैनेजमेंट ट्रेनी के 10 संविदात्मक पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। संस्थान ने विभिन्न विभागों में इन नियुक्तियों के लिए योग्य, ऊर्जावान और गतिशील पेशेवरों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार कुल 10 पदों में विश्लेषण एवं निर्णय विज्ञान, संचालन एवं आपूर्ति शृंखला, सतत प्रबंधन और ओबीएचआर प्रबंधन में 1-1 पद शामिल हैं। वहीं, मार्केटिंग विभाग में 2 और प्रशासनिक कार्यों के लिए 4 पद निर्धारित किए गए हैं। इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 27 मई से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 16 जून 2026 शाम 5 बजे तक आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। संस्थान ने स्पष्ट किया है कि आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। शैक्षणिक योग्यता के तहत उम्मीदवारों के पास संबंधित क्षेत्र में कम से कम 60 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री या बीटेक/समकक्ष व्यावसायिक डिग्री होना आवश्यक है। साथ ही, संबंधित क्षेत्र में अनुभव रखने वाले या पीएचडी कर रहे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। आयु सीमा अधिकतम 32 वर्ष निर्धारित की गई है, हालांकि पीएचडी धारक या अनुभवी उम्मीदवारों को 35 वर्ष तक की छूट दी जाएगी। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा या कौशल परीक्षा, साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और मेरिट सूची शामिल होगी। चयनित उम्मीदवारों को प्रतिमाह 35,000 से 45,000 रुपये तक का वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा 8,000 रुपये आवास भत्ता, 2,000 रुपये यात्रा भत्ता और 500 रुपये मोबाइल खर्च प्रतिपूर्ति भी दी जाएगी। यह नियुक्ति पूरी तरह संविदात्मक आधार पर होगी, जिसकी प्रारंभिक अवधि एक वर्ष की रहेगी। प्रदर्शन और संस्थान की आवश्यकता के आधार पर इसे अधिकतम चार वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।
SRH पर राजस्थान रॉयल्स का कहर, 243 रन बनाकर 47 रन से जीता मुकाबला

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रन से हराकर क्वालीफायर-2 में प्रवेश कर लिया। यह मुकाबला महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला गया, जहां टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी राजस्थान की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट पर 243 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। राजस्थान की शुरुआत धमाकेदार रही। वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल की सलामी जोड़ी ने 48 गेंदों में 125 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूत आधार दिया। वैभव सूर्यवंशी ने मात्र 16 गेंदों में अर्धशतक पूरा कर दिया और 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 12 छक्के और 5 चौके शामिल रहे। हालांकि, यशस्वी जायसवाल 29 रन बनाकर ज्यादा देर क्रीज पर नहीं टिक सके। इसके बाद कप्तान रियान पराग और ध्रुव जुरेल ने पारी को संभाला। दोनों के बीच 21 गेंदों में 55 रनों की तेज साझेदारी हुई। ध्रुव जुरेल ने भी आक्रामक अंदाज दिखाते हुए 21 गेंदों में 50 रन ठोक दिए, जिसमें 3 छक्के और 5 चौके शामिल थे। अंत में डोनोवन फरेरा और रवींद्र जडेजा ने छोटी लेकिन उपयोगी पारियां खेलीं और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। सनराइजर्स हैदराबाद की ओर से प्रफुल हिंगे सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 54 रन देकर 3 विकेट लिए। उनके अलावा ईशान किशन, शिवांग कुमार और नितीश रेड्डी को 1-1 सफलता मिली। लक्ष्य का पीछा करने उतरी SRH की शुरुआत बेहद खराब रही और दूसरी ही गेंद पर अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए। इसके बाद ईशान किशन और ट्रेविस हेड ने 15 गेंदों में 51 रनों की तेज साझेदारी कर वापसी की कोशिश की, लेकिन ईशान के आउट होते ही टीम दबाव में आ गई। SRH ने 6.5 ओवर में 5 विकेट गंवा दिए थे और स्कोर 81 रन तक सिमट गया। इसके बाद नितीश रेड्डी और सलिल अरोड़ा ने 56 रनों की साझेदारी कर संघर्ष जरूर किया, लेकिन टीम लक्ष्य से दूर रह गई। SRH की पूरी टीम 19.2 ओवर में 196 रन पर ऑलआउट हो गई। राजस्थान की ओर से जोफ्रा आर्चर सबसे सफल गेंदबाज रहे, जिन्होंने 3 विकेट झटके। इसके अलावा नांद्रे बर्गर, सुशांत मिश्रा और रवींद्र जडेजा ने भी अहम विकेट लेकर जीत सुनिश्चित की। इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स ने क्वालीफायर-2 में जगह बना ली है, जहां अब उसका सामना गुजरात टाइटंस से होगा।
IPL 2026: प्लेऑफ इतिहास में सबसे ज्यादा छक्के, RR की जीत ने बनाए कई रिकॉर्ड

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच खेला गया मैच क्रिकेट इतिहास में एक यादगार पन्ना जोड़ गया। इस मुकाबले में न सिर्फ रन बरसे, बल्कि छक्कों की ऐसी बारिश हुई कि प्लेऑफ इतिहास का नया रिकॉर्ड बन गया। दोनों टीमों के बल्लेबाजों ने मिलकर कुल 26 छक्के लगाए, जो अब तक किसी भी आईपीएल प्लेऑफ मैच में सबसे अधिक हैं। इससे पहले यह रिकॉर्ड साल 2025 में मुंबई इंडियंस और गुजरात टाइटंस के बीच खेले गए एलिमिनेटर के नाम था, जिसमें कुल 25 छक्के लगे थे। लेकिन बुधवार को हुए इस हाई-वोल्टेज मुकाबले ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। महाराजा यादवेंद्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेले गए इस मैच में राजस्थान रॉयल्स ने टॉस गंवाकर पहले बल्लेबाजी करते हुए आक्रामक शुरुआत की। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल ने पहले विकेट के लिए सिर्फ 48 गेंदों में 125 रनों की धमाकेदार साझेदारी की। यशस्वी जायसवाल ने 29 गेंदों में 29 रन बनाए, लेकिन असली तूफान वैभव सूर्यवंशी के बल्ले से आया। वैभव ने मात्र 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 5 चौके और 12 छक्के शामिल रहे। उनकी इस पारी ने पूरे मैच का रुख ही बदल दिया। मिडिल ऑर्डर में ध्रुव जुरेल ने भी तेजतर्रार बल्लेबाजी करते हुए 21 गेंदों में 50 रन बनाए, जिसमें 5 चौके और 3 छक्के शामिल थे। कप्तान रियान पराग ने 12 गेंदों में 26 रन जोड़कर रन गति को और बढ़ाया, जबकि रविंद्र जडेजा ने 9 गेंदों में नाबाद 12 रन बनाए।राजस्थान रॉयल्स ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 243 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की शुरुआत बेहद खराब रही। अभिषेक शर्मा बिना खाता खोले आउट हो गए, जबकि ट्रेविस हेड सिर्फ 17 रन बनाकर पवेलियन लौटे। ईशान किशन ने 11 गेंदों में 33 रन जरूर बनाए, लेकिन बड़ी पारी में बदल नहीं सके। हेनरिक क्लासेन भी 18 रन पर आउट होकर निराश हुए। हालांकि नीतीश कुमार रेड्डी ने 38 रनों की सबसे बड़ी पारी खेली, जबकि साहिल अरोड़ा ने 35 रन और शिवांग कुमार ने 27 रन बनाकर संघर्ष किया। आरआर की गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर सबसे सफल रहे, जिन्होंने 3 विकेट झटके। नांद्रे बर्गर, सुशांत मिश्रा और रवींद्र जडेजा ने 2-2 विकेट लेकर एसआरएच की पारी को 196 रन पर समेट दिया। इस मुकाबले ने साबित कर दिया कि आईपीएल सिर्फ एक क्रिकेट टूर्नामेंट नहीं, बल्कि रिकॉर्ड्स और रोमांच का सबसे बड़ा मंच है।
IPL 2026: वैभव सूर्यवंशी बने रन किंग, भुवनेश्वर कुमार का गेंदबाज़ी में दबदबा कायम

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के एलिमिनेटर मुकाबले में राजस्थान रॉयल्स ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सनराइजर्स हैदराबाद को 47 रनों से हराकर टूर्नामेंट में अपनी दावेदारी मजबूत कर ली। इस मैच के सबसे बड़े हीरो 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी रहे, जिन्होंने मात्र 29 गेंदों में 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर क्रिकेट जगत को चौंका दिया। राजस्थान रॉयल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 8 विकेट के नुकसान पर 243 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। टीम की ओर से वैभव सूर्यवंशी के साथ ध्रुव जुरेल ने भी अहम अर्धशतकीय पारी खेली, जिससे टीम को मजबूत शुरुआत और अंत मिला। 244 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी सनराइजर्स हैदराबाद की टीम शुरुआत से ही दबाव में नजर आई। लगातार गिरते विकेटों के कारण टीम कभी भी लक्ष्य के करीब नहीं पहुंच सकी और अंततः 19.2 ओवर में 196 रन बनाकर पूरी टीम पवेलियन लौट गई। इस मुकाबले में वैभव सूर्यवंशी की पारी ने न सिर्फ मैच का रुख बदल दिया, बल्कि ऑरेंज कैप की दौड़ भी पूरी तरह पलट दी। वैभव अब 15 मैचों में 680 रन बनाकर शीर्ष पर पहुंच गए हैं। उन्होंने इस प्रदर्शन के साथ गुजरात टाइटंस के साई सुदर्शन को पीछे छोड़ दिया, जो 652 रनों के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गए हैं। सनराइजर्स हैदराबाद के हेनरिक क्लासेन 624 रनों के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल 618 रन बनाकर चौथे स्थान पर बने हुए हैं। ईशान किशन 602 रन के साथ पांचवें, विराट कोहली 600 रन के साथ छठे और केएल राहुल 593 रन के साथ सातवें स्थान पर मौजूद हैं। गेंदबाजी में भी रोमांच बरकरार है, जहां रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने पर्पल कैप पर अपना कब्जा कायम रखा है। उन्होंने 15 मैचों में 26 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया है। हालांकि, गुजरात टाइटंस के कगिसो रबाडा भी 26 विकेट लेकर बराबरी पर पहुंच चुके हैं, जिससे मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। जोफ्रा आर्चर 24 विकेट के साथ तीसरे स्थान पर हैं, जबकि चेन्नई सुपर किंग्स के अंशुल कंबोज 21 विकेट लेकर चौथे और सनराइजर्स हैदराबाद के ईशान मलिंगा 20 विकेट के साथ पांचवें स्थान पर बने हुए हैं। इस जीत के साथ राजस्थान रॉयल्स ने एक बार फिर साबित कर दिया कि युवा प्रतिभा और आक्रामक क्रिकेट के दम पर वह किसी भी टीम को हराने का माद्दा रखती है।