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सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी


नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस बल से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों व कर्मियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने वर्ष 1897 में अपनी स्थापना के बाद से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे एक अनुशासित और जनसेवा से जुड़ा हुआ पुलिस बल बताया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल की व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि नियंत्रण और आदेशों का सख्ती से पालन कराना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस व्यवस्था में एक समय ‘गुलामी की मानसिकता’ विकसित हो गई थी, जिसे अब बदलने की आवश्यकता है।

राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए इस सोच से पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा मजबूत हो सके।

उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अधिक नागरिक-हितैषी बनना चाहिए, जिससे लोग बिना भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और समाज में सुरक्षा तथा कानून के प्रति सम्मान मजबूत होगा।

उन्होंने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। सिक्किम पुलिस ने अपने व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली के जरिए जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।

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