चुनाव आयोग की शक्तियों पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन

नई दिल्ली । देश में चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला फैसला सुनाया। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के लिए कराए जाने वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी विशेष गहन संशोधन को पूरी तरह संवैधानिक और वैध करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मतदाता सूची का समय-समय पर सुधार और शुद्धिकरण आवश्यक है तथा यह चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव आयोग को कानून के तहत विशेष परिस्थितियों में मतदाता सूची का विशेष संशोधन कराने का अधिकार प्राप्त है। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर इस प्रक्रिया को गलत नहीं ठहराया जा सकता कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है। यदि चुनाव आयोग को उचित कारण दिखाई देते हैं तो वह किसी भी समय मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण का आदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की व्यापक जिम्मेदारी देता है। इसी संवैधानिक दायित्व को प्रभावी बनाने के लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में आयोग को मतदाता सूची के संशोधन और शुद्धिकरण की शक्तियां दी गई हैं। अदालत ने माना कि विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया इन प्रावधानों के अनुरूप है और यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने का कार्य करती है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी मतदाता के दस्तावेजों में गंभीर विसंगति दिखाई देती है या नागरिकता को लेकर संदेह उत्पन्न होता है तो चुनाव आयोग को संबंधित नामों की जांच और आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार है। हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि दस्तावेज मांगने या सत्यापन कराने का अर्थ यह नहीं माना जा सकता कि संबंधित व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम रूप से सवाल खड़ा किया जा रहा है। यह केवल मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि चुनाव आयोग ने मतदाताओं को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए थे। नाम जोड़ने, सुधार कराने, आपत्ति दर्ज करने और अपील करने जैसी व्यवस्थाएं प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाती हैं। नोटिस जारी करना, सार्वजनिक सूचना देना और कानूनी उपाय उपलब्ध कराना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप माना गया। दरअसल, इस मामले में कई याचिकाएं दायर कर चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इतने बड़े स्तर पर मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराने का अधिकार चुनाव आयोग को प्राप्त नहीं है और यह प्रक्रिया नागरिकों के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। कुछ याचिकाओं में यह भी कहा गया था कि पूर्वजों से जुड़े दस्तावेज मांगना अत्यधिक कठोर शर्त है। अदालत ने इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और अद्यतन होना अनिवार्य है। यदि गलत या अपात्र नाम सूची में बने रहते हैं तो इससे लोकतंत्र की मूल भावना प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों की बड़ी पुष्टि माना जा रहा है और आने वाले समय में यह निर्णय चुनावी सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है।
दिग्विजय सिंह को फिर राज्यसभा भेजने की मांग तेज, दिल्ली में कांग्रेस करेगी मंथन

भोपाल । मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर एक बार फिर वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजने की मांग जोर पकड़ने लगी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने खुलकर कहा है कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए दिग्विजय सिंह को राज्यसभा भेजा जाना चाहिए। पीसी शर्मा ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार हाईकमान के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि जल्द ही कांग्रेस अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। उनके अनुसार दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे वरिष्ठ नेता भी इस मामले में अपना निर्णय और राय देंगे। इधर राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान के स्तर पर दिल्ली में रणनीतिक बैठक होने जा रही है। बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इस बैठक में मध्यप्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर विस्तार से चर्चा होगी और संभावित नामों पर मंथन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक तीन दिनों में दूसरी बार राज्यसभा उम्मीदवारों को लेकर चर्चा हो रही है। पार्टी के भीतर रायशुमारी कर एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस फिलहाल अपने एकमात्र संभावित सीट के लिए ऐसा चेहरा तलाश रही है जो संगठन और सियासी समीकरण दोनों के लिहाज से मजबूत माना जाए। वहीं कांग्रेस के इस मंथन पर बीजेपी ने भी तंज कसा है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस में नेताओं के बीच एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ मची हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की हालत ऐसी हो चुकी है कि उसकी हर बैठक विवाद और खींचतान का कारण बन रही है। राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम के अनुसार 1 जून 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। उम्मीदवार 8 जून तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 11 जून नाम वापसी की अंतिम तारीख तय की गई है। मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी। देश के 10 राज्यों की कुल 24 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। मध्यप्रदेश में तीन सीटों पर मतदान होगा। इनमें दिग्विजय सिंह, जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्तमान संख्या बल के हिसाब से भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं। इसी गणित के अनुसार बीजेपी को दो सीटें और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
बेंगलुरु एयरपोर्ट पर इबोला का अलर्ट, युगांडा से लौटी महिला में संदिग्ध लक्षण मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग हाई अलर्ट पर

नई दिल्ली । इबोला वायरस को लेकर दुनियाभर में बढ़ती चिंता के बीच कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक संदिग्ध मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। युगांडा से भारत पहुंची 28 वर्षीय महिला में इबोला संक्रमण से जुड़े संभावित लक्षण दिखाई देने पर उसे तत्काल आइसोलेशन में भर्ती कराया गया है। एयरपोर्ट पर मेडिकल जांच के दौरान महिला की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने बिना किसी देरी के स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक प्रोटोकॉल लागू कर दिए। इस घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार महिला हाल ही में अफ्रीकी क्षेत्र से यात्रा करके बेंगलुरु पहुंची थी। एयरपोर्ट पर नियमित स्क्रीनिंग के दौरान उसके स्वास्थ्य को लेकर संदेह पैदा हुआ। प्रारंभिक जांच में शरीर दर्द और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आने के बाद मेडिकल टीम ने अतिरिक्त सावधानी बरतते हुए उसे तुरंत निगरानी में ले लिया। बाद में महिला को शहर के निर्धारित महामारी अस्पताल में शिफ्ट किया गया, जहां विशेष आइसोलेशन वार्ड में उसका इलाज और निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्वास्थ्य स्थिति पर नजर बनाए हुए है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने महिला के सैंपल एकत्र कर उन्हें पुणे स्थित राष्ट्रीय स्तर की वायरोलॉजी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने तक महिला को पूर्ण चिकित्सा निगरानी में रखा जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों के अनुसार दोबारा परीक्षण भी कराया जाएगा ताकि किसी प्रकार की आशंका को पूरी तरह स्पष्ट किया जा सके। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है और स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। बताया जा रहा है कि बेंगलुरु पहुंचने के बाद महिला एक होटल में रुकी थी। वहीं उसे शरीर में असहजता और दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी मिली। सूचना मिलते ही मेडिकल टीम सक्रिय हुई और महिला को होटल से सीधे अस्पताल पहुंचाया गया। इसके साथ ही उसके संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है ताकि आवश्यकता पड़ने पर एहतियाती निगरानी की जा सके। इबोला वायरस को विश्व के सबसे गंभीर और घातक संक्रमणों में गिना जाता है। हाल के महीनों में अफ्रीकी देशों में इसके मामलों में वृद्धि देखी गई है। इसी स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने पहले ही कई देशों को सतर्क रहने की सलाह दी थी। कर्नाटक सरकार ने भी प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए विशेष निगरानी व्यवस्था लागू कर रखी है। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग बढ़ाई गई है और विदेश से लौटने वाले यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी निर्देश दिए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने संभावित संक्रमण से निपटने के लिए विशेष अस्पतालों और क्वारंटाइन केंद्रों की व्यवस्था पहले से तैयार कर रखी है। बेंगलुरु सहित तटीय क्षेत्रों में भी अलग आइसोलेशन सुविधाएं बनाई गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार सतर्कता, समय पर जांच और संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन ही ऐसे मामलों में सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।
रीवा में सिलेंडर ब्लास्ट से बड़ा हादसा, मकान में लगी भीषण आग, परिवार के 4 लोग झुलसे

रीवा । मध्यप्रदेश के रीवा जिले में गैस सिलेंडर ब्लास्ट से बड़ा हादसा हो गया। शहर के पैपखरा इलाके में हुए इस धमाके के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। हादसे में एक मकान में भीषण आग लग गई, जिसमें परिवार के चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए। घायलों को इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाका इतना जोरदार था कि आसपास के लोग दहल उठे। कुछ देर तक लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। देखते ही देखते आग ने पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया और मकान जलकर लगभग खाक हो गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड और पुलिस को सूचना दी। इसके बाद लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर घर में फंसे परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला। आग पर काबू पाने के लिए दमकल की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार घर में रखे गैस सिलेंडर का रेगुलेटर खुला हुआ था। इसी दौरान एक बछड़ा वहां टकरा गया, जिससे सिलेंडर की पाइप निकल गई और पूरे घर में गैस फैल गई। बताया जा रहा है कि चूल्हे की आग के संपर्क में आते ही गैस ने विकराल रूप ले लिया और जोरदार धमाका हो गया। इस हादसे में यशोदानंद शुक्ला, इंद्रकली शुक्ला और दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए हैं। सभी घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही आग लगने और सिलेंडर ब्लास्ट के सही कारणों की भी जांच की जा रही है।
केरल में हाई प्रोफाइल वित्तीय जांच से बढ़ी सियासी हलचल, पिनाराई विजयन और बेटी के ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली । केरल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखने को मिला जब प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष पिनाराई विजयन तथा उनकी बेटी वीणा विजयन से जुड़े कई ठिकानों पर एक साथ व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। यह कार्रवाई कथित वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में की गई है, जिसके बाद राज्य की राजनीतिक गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं। जांच एजेंसी की टीमों ने अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू की। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला कथित फर्जी कंसल्टेंसी सेवाओं और करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कुछ निजी कंपनियों के माध्यम से बिना वास्तविक सेवा दिए आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया, जिसकी वित्तीय जांच अब और गहराई से की जा रही है। इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है और विपक्ष तथा सत्तापक्ष दोनों एक-दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस मामले की नींव उस विस्तृत रिपोर्ट पर आधारित है जिसमें वित्तीय लेनदेन और कंपनियों के बीच हुए समझौतों की पड़ताल की गई थी। रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि एक निजी आईटी कंपनी को कई वर्षों तक लगातार भुगतान प्राप्त हुए, जबकि उसके बदले किसी प्रकार की वास्तविक सेवा उपलब्ध कराने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। इसी आधार पर आगे की जांच को विस्तार दिया गया और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। इस विवाद की शुरुआत कई वर्ष पहले सामने आई वित्तीय जांच से जुड़ी बताई जा रही है, जब कुछ कारोबारी परिसरों में तलाशी अभियान के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और लेनदेन रिकॉर्ड सामने आए थे। जांच के दौरान कथित तौर पर उन भुगतानों का विवरण मिला जिन पर बाद में विभिन्न एजेंसियों ने अलग-अलग स्तर पर पड़ताल शुरू की। मामले के राजनीतिक रूप लेने के बाद वित्तीय अनियमितताओं की जांच को और व्यापक बनाया गया। अब प्रवर्तन निदेशालय की ताजा कार्रवाई को उसी जांच का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है। एजेंसी का मानना है कि कथित रूप से प्राप्त धन का इस्तेमाल विभिन्न आर्थिक गतिविधियों और संपत्तियों में किया गया हो सकता है। इसी कारण जांच एजेंसियां दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारियों को खंगाल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर आने वाले समय में केरल की राजनीति पर भी दिखाई दे सकता है। राज्य में पहले से ही कई मुद्दों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है और अब इस मामले ने राजनीतिक बहस को और तीखा बना दिया है। हालांकि अब तक इस मामले में संबंधित पक्षों की ओर से विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन पूरे घटनाक्रम पर देशभर की नजर बनी हुई है। फिलहाल जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों के बीच यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
इंदौर का रेती मंडी ब्रिज बना इंजीनियरिंग फेलियर का नया उदाहरण, MANIT ने पकड़ी बड़ी खामी

इंदौर । इंदौर का बहुप्रतीक्षित रेती मंडी ब्रिज अब तकनीकी लापरवाही और खराब प्लानिंग को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। भोपाल के चर्चित 90 डिग्री ब्रिज विवाद के बाद अब यह प्रोजेक्ट भी इंजीनियरिंग की गंभीर चूक का उदाहरण बनता नजर आ रहा है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद चार साल से निर्माणाधीन यह ब्रिज अब तक पूरा नहीं हो पाया है और नई तकनीकी खामी सामने आने के बाद इसका काम फिर से करीब छह महीने आगे बढ़ गया है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि यदि समय रहते इस गलती को नहीं पकड़ा जाता तो भविष्य में यहां बड़ा हादसा हो सकता था। दरअसल रेती मंडी ब्रिज के टर्निंग पॉइंट पर सड़क की चौड़ाई केवल 7.50 मीटर रखी गई थी। जब मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी MANIT की विशेषज्ञ टीम ने प्रूफ चेक किया तो इसे गंभीर तकनीकी खामी बताया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी कम चौड़ाई वाले टर्न पर भारी वाहनों और तेज रफ्तार ट्रैफिक के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता था। इसके बाद लोक निर्माण विभाग को पूरे डिजाइन में बदलाव करना पड़ा है। अब इस टर्निंग पॉइंट की चौड़ाई 7.50 मीटर से बढ़ाकर 10 मीटर की जा रही है। नई चौड़ाई को सपोर्ट देने के लिए दो अतिरिक्त पिलर भी लगाए जाएंगे। यानी जो काम शुरुआती प्लानिंग में होना चाहिए था, उसे अब निर्माण के बीच में बदलना पड़ रहा है। इससे न केवल प्रोजेक्ट की लागत बढ़ेगी बल्कि काम पूरा होने में भी और देरी होगी। तकनीकी विशेषज्ञ अतुल सेठ ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस खामी की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। उनके अनुसार किसी भी बड़े टर्निंग पॉइंट पर इतनी कम चौड़ाई पर्याप्त नहीं मानी जाती। अगर समय रहते सुधार नहीं किया जाता तो भविष्य में यह ब्रिज गंभीर हादसों का कारण बन सकता था। मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने लोक निर्माण विभाग पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर को प्रयोगशाला बनाकर बिना उचित प्लानिंग के निर्माण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कभी 90 डिग्री ब्रिज बनाया जाता है, कभी पिलर गायब हो जाते हैं और अब रेती मंडी ब्रिज में तकनीकी खामी सामने आ रही है। रेती मंडी ब्रिज अब केवल अधूरा प्रोजेक्ट नहीं बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और इंजीनियरिंग की कमजोरियों पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।
केरल में ED की हाई-प्रोफाइल रेड, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और बेटी की कंपनी पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप

नई दिल्ली । केरल में प्रवर्तन निदेशालय की ताजा कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के आवास समेत कई स्थानों पर हुई छापेमारी के बाद राजनीतिक माहौल अचानक गर्म हो गया। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े उस मामले में की गई है, जिसमें एक निजी कंपनी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन जांच एजेंसियों के दायरे में हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की सियासत को एक बार फिर तीखे राजनीतिक टकराव के केंद्र में ला खड़ा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार कार्रवाई का केंद्र एक ऐसी कारोबारी व्यवस्था रही, जिसमें वर्षों के दौरान हुए भुगतान और सेवाओं के बीच असमानता के आरोप सामने आए हैं। इसी सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े कुछ व्यक्तियों और कंपनियों की भूमिका भी जांच के घेरे में आई है। अधिकारियों ने राज्य के अलग-अलग शहरों में एक साथ कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद पूरे दिन राजनीतिक बयानबाजी का दौर जारी रहा। बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां उन वित्तीय दस्तावेजों और कारोबारी लेनदेन की जांच कर रही हैं, जिनमें करोड़ों रुपये के भुगतान का उल्लेख है। आरोप है कि कुछ कंपनियों को भारी रकम दी गई, लेकिन उसके बदले सेवाओं के स्पष्ट रिकॉर्ड या पर्याप्त व्यावसायिक गतिविधियों के प्रमाण सामने नहीं आए। इसी आधार पर वित्तीय अनियमितताओं और धन शोधन की आशंकाओं को लेकर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री की बेटी से जुड़ी कंपनी भी चर्चा में है। एजेंसियों का दावा है कि संबंधित कंपनी को एक औद्योगिक समूह से लगातार भुगतान हुआ था। जांच के दौरान कॉर्पोरेट दस्तावेजों, बैंकिंग लेनदेन और व्यावसायिक समझौतों की भी विस्तार से समीक्षा की जा रही है। इसी मामले में पहले भी कई स्तरों पर पूछताछ और दस्तावेजों की जांच हो चुकी है, लेकिन ताजा छापेमारी ने पूरे विवाद को फिर सुर्खियों में ला दिया है। राजनीतिक स्तर पर इस कार्रवाई के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दे पर पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं दूसरी ओर वामपंथी दलों ने इस कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध की रणनीति बताते हुए जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से इस तरह की कार्रवाई की जा रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामले का दायरा और व्यापक हो सकता है। जांच एजेंसियां अब उन सभी वित्तीय गतिविधियों की पड़ताल कर रही हैं, जिनका संबंध संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों से रहा है। इस कारण आने वाले दिनों में और दस्तावेजी खुलासे तथा पूछताछ की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। केरल की राजनीति में यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े नाम सामने आए हैं। ऐसे में राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इसकी गंभीरता लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। फिलहाल पूरे मामले पर देशभर की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष राजनीतिक माहौल पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
सतना में सनसनी, पति-पत्नी के शव घर में फांसी के फंदे पर मिले

सतना । मध्यप्रदेश के सतना जिले में बुधवार को एक दर्दनाक और सनसनीखेज मामला सामने आया, जहां पति-पत्नी के शव घर के अंदर फांसी के फंदे पर लटके मिले। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया और इलाके में शोक का माहौल है। यह मामला रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र के तिवनी गांव का है। पुलिस के अनुसार मृतकों की पहचान 45 वर्षीय मंगलदीन कोरी और उनकी 43 वर्षीय पत्नी शकुंतला कोरी के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक बुधवार सुबह घर का दरवाजा खुला हुआ था, लेकिन काफी देर तक अंदर से कोई हलचल नहीं होने पर पड़ोसियों को शक हुआ। इसके बाद आसपास के लोगों ने घर के अंदर जाकर देखा तो पति-पत्नी के शव फांसी के फंदे पर लटके मिले। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ भी की। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई और वजह है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। घटना के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
UN में भारत का पाकिस्तान पर तीखा प्रहार, पी हरीश बोले- सीमा पार आतंकवाद के गंभीर परिणाम भुगतने होंगे

नई दिल्ली । संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद सख्त और स्पष्ट रुख अपनाते हुए पड़ोसी देश को कड़ा संदेश दिया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर पाकिस्तान की टिप्पणियों का जवाब देते हुए कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का पूरा अधिकार रखता है। संयुक्त राष्ट्र में दिए गए अपने बयान में पी हरीश ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से भारत लगातार पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और सीमा पार आक्रामक गतिविधियों का सामना करता आया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से पाकिस्तान ने आतंकवाद को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है, जिससे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति पूरी तरह स्पष्ट और कठोर है तथा इस मुद्दे पर किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति और संवाद की बात करता रहा है, लेकिन व्यवहार में वह लगातार आतंकवाद और कट्टरपंथ को बढ़ावा देता आया है। उन्होंने यह भी कहा कि सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों के पर्याप्त प्रमाण अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मौजूद हैं और दुनिया अब इन तथ्यों को अच्छी तरह समझ चुकी है। पी हरीश ने अपने संबोधन में यह भी उल्लेख किया कि पाकिस्तान की ओर से भारत को अस्थिर करने की रणनीति कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि दशकों से भारत के खिलाफ छद्म युद्ध और आतंकवादी नेटवर्क को समर्थन देने की नीति अपनाई जाती रही है, जिसका असर केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ा है। भारत ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट कार्रवाई आवश्यक है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है और इस विषय पर किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। भारतीय प्रतिनिधि ने कहा कि पाकिस्तान को अपने यहां मौजूद आतंकवादी ढांचे और कट्टरपंथी नेटवर्क पर कार्रवाई करनी चाहिए, बजाय इसके कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल भारत विरोधी प्रचार के लिए करे। पी हरीश ने दो-टूक शब्दों में कहा कि भारत अपनी सुरक्षा के खिलाफ किसी भी खतरे को गंभीरता से लेता है और आवश्यक होने पर निर्णायक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने की नीति के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। भारत के इस सख्त रुख को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत लगातार वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति मजबूती से रख रहा है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपेक्षा कर रहा है।
महाकालेश्वर मंदिर का श्रावण महोत्सव 2026, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की होगी प्रस्तुति

उज्जैन । उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में आगामी 30 जुलाई से 21वें अखिल भारतीय श्रावण महोत्सव 2026 का भव्य आयोजन शुरू होने जा रहा है। धार्मिक आस्था और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस प्रतिष्ठित महोत्सव में देशभर के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह महोत्सव वर्ष 2004 से लगातार आयोजित किया जा रहा है। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रावण और भाद्रपद माह में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी, जिसमें संगीत, नृत्य और कला की विविध विधाओं का संगम देखने को मिलेगा। मंदिर समिति के अनुसार महोत्सव का आयोजन 30 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक किया जाएगा। इस दौरान श्रावण और भाद्रपद माह के प्रत्येक शनिवार को विशेष सांस्कृतिक संध्याएं आयोजित होंगी। इन कार्यक्रमों में देश के विभिन्न राज्यों से कलाकारों को आमंत्रित किया जाएगा, जो अपनी कला से श्रद्धालुओं और दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे। महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित होने वाला यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं को मंच देने वाला एक बड़ा सांस्कृतिक उत्सव माना जाता है। हर साल हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। उज्जैन की आध्यात्मिक गरिमा और सांस्कृतिक विरासत को और भव्य बनाने वाला यह महोत्सव इस बार भी देशभर के कला प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र रहेगा।