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प्लेऑफ में आरसीबी का धमाकेदार प्रदर्शन, अनिल कुंबले बोले- यह टीम के आत्मविश्वास और चरित्र का प्रमाण

नई दिल्ली । इंडियन प्रीमियर लीग 2026 के पहले क्वालीफायर में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने क्रिकेट विशेषज्ञों और पूर्व खिलाड़ियों को भी प्रभावित किया है। धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले में Royal Challengers Bengaluru ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 254 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया और फिर गेंदबाजी में बेहतरीन अनुशासन दिखाते हुए Gujarat Titans को 162 रनों पर समेटकर 92 रनों की बड़ी जीत दर्ज की। इस जीत के बाद टीम के पूर्व कप्तान और दिग्गज स्पिनर Anil Kumble ने आरसीबी के प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि टीम के चरित्र और आत्मविश्वास का स्पष्ट प्रमाण है। कुंबले के अनुसार प्लेऑफ जैसे दबाव वाले मुकाबले में इतना बड़ा स्कोर बनाना किसी भी टीम के लिए आसान नहीं होता, लेकिन आरसीबी ने जिस आक्रामकता और संतुलन के साथ बल्लेबाजी की, उसने मैच की दिशा पहले ही तय कर दी। उन्होंने कहा कि पिच बल्लेबाजी के अनुकूल जरूर थी, लेकिन इतने बड़े मुकाबले में मानसिक दबाव को संभालना और लगातार रन बनाना ही असली चुनौती होती है, जिसे आरसीबी के बल्लेबाजों ने पूरी तरह से सफलतापूर्वक निभाया।A को रेखांकित किया, जब साई सुदर्शन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से आउट हुए और उसके बाद मैच का पूरा रुख बदल गया। कुंबले ने कहा कि उस एक विकेट ने आरसीबी को खेल पर पकड़ बनाने का मौका दिया, जिसके बाद गेंदबाजों ने लगातार अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ खेल को नियंत्रित किया। उन्होंने इसे एक क्लिनिकल परफॉर्मेंस बताया जिसमें बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों विभागों में टीम ने शानदार तालमेल दिखाया। पूर्व भारतीय कप्तान ने कप्तान रजत पाटीदार के प्रदर्शन को भी विशेष रूप से सराहा, जिन्होंने 33 गेंदों पर नाबाद 93 रनों की विस्फोटक पारी खेली और टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। कुंबले के अनुसार बड़े मैचों में इस तरह का प्रदर्शन कप्तान के प्रति ड्रेसिंग रूम का भरोसा और सम्मान बढ़ाता है, जिससे टीम और अधिक एकजुट होकर खेलती है। उन्होंने कहा कि प्लेऑफ जैसे मुकाबले में जीत हासिल करना सिर्फ अंक या रिकॉर्ड का मामला नहीं होता, बल्कि यह टीम के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देता है और आगे के मुकाबलों के लिए मानसिक बढ़त भी प्रदान करता है। कुंबले ने यह भी कहा कि आरसीबी की सबसे बड़ी ताकत यह है कि हर मैच में कोई नया खिलाड़ी जिम्मेदारी उठाता है, जिससे टीम का संतुलन मजबूत बना रहता है। उनके अनुसार जब हर खिलाड़ी योगदान देता है तो वही टीम वास्तविक अर्थों में चैंपियन बनने की क्षमता रखती है। इस जीत ने न केवल आरसीबी को फाइनल में पहुंचाया है बल्कि पूरे टूर्नामेंट में उनकी दावेदारी को और मजबूत कर दिया है।

DNA बदलकर दिल की बीमारी खत्म करने का दावा! एक इंजेक्शन से 62% घटा खराब कोलेस्ट्रॉल

नई दिल्ली । दुनियाभर में तेजी से बढ़ रही दिल की बीमारियों के बीच वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई थेरेपी विकसित करने का दावा किया है, जो भविष्य में हार्ट अटैक के खतरे को हमेशा के लिए कम कर सकती है। खास बात यह है कि इस इलाज में रोज दवाइयां खाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि सिर्फ एक इंजेक्शन शरीर के डीएनए में बदलाव कर लंबे समय तक खराब कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रख सकता है। यह नई तकनीक जीन-एडिटिंग यानी डीएनए में बदलाव करने वाली थेरेपी पर आधारित है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The New England Journal of Medicine में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक इस थेरेपी ने शुरुआती ट्रायल में बेहद उत्साहजनक परिणाम दिए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर आगे के बड़े अध्ययनों में भी ऐसे ही नतीजे मिले तो यह दिल की बीमारी के इलाज में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इस रिसर्च का नेतृत्व बायोटेक कंपनी Verve Therapeutics के सीईओ और वैज्ञानिक Dr. Sekar Kathiresan ने किया। अध्ययन में शामिल विशेषज्ञों के अनुसार यह थेरेपी शरीर में मौजूद खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL को लंबे समय तक कम रखने में सक्षम दिखाई दी है। रिसर्च के दौरान 85 मरीजों पर ट्रायल किया गया, हालांकि फिलहाल 35 मरीजों के डेटा का विश्लेषण सामने आया है। ये सभी मरीज आनुवंशिक रूप से हाई कोलेस्ट्रॉल या दिल की बीमारी से जूझ रहे थे। जिन मरीजों को इस नई दवा की सबसे ज्यादा डोज दी गई, उनमें सिर्फ एक इंजेक्शन के बाद LDL कोलेस्ट्रॉल में करीब 62 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि जिन मरीजों को 18 महीने पहले यह थेरेपी दी गई थी, उनमें भी कोलेस्ट्रॉल का स्तर लगातार कम बना हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह थेरेपी शरीर में एक खास जीन-एडिटिंग “मशीन” की तरह काम करती है। इंजेक्शन के जरिए इसे शरीर में पहुंचाया जाता है, जहां यह खून के रास्ते सीधे लिवर तक पहुंचती है। इसके बाद यह लिवर सेल के डीएनए में मौजूद PCSK9 नाम के जीन को टारगेट करती है। यही जीन खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है। थेरेपी इस जीन में बदलाव कर LDL को नियंत्रित कर देती है। दिल के विशेषज्ञ Dr. John H. P. Alexander ने इस शोध को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि यदि कोलेस्ट्रॉल और दिल की बीमारी का स्थायी इलाज संभव हो जाता है तो यह मेडिकल साइंस में गेम चेंजर साबित होगा। हालांकि वैज्ञानिकों ने साफ किया है कि यह तकनीक अभी शुरुआती चरण में है और इसे पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी साबित करने के लिए बड़े स्तर पर और अध्ययन किए जाएंगे। इसके बावजूद शुरुआती नतीजों ने दुनियाभर के मेडिकल समुदाय का ध्यान खींचा है। आमतौर पर जीन थेरेपी बेहद महंगी मानी जाती है, लेकिन रिसर्च टीम का दावा है कि भविष्य में इस दवा को आम लोगों की पहुंच में लाने की कोशिश की जाएगी। कंपनी इसे सिर्फ दुर्लभ इलाज नहीं बल्कि सामान्य हार्ट ट्रीटमेंट का हिस्सा बनाना चाहती है। भारत जैसे देश के लिए यह शोध बेहद अहम माना जा रहा है। ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज रिपोर्ट के अनुसार देश में हर साल करीब 28 लाख लोगों की मौत दिल की बीमारियों से होती है। ऐसे में अगर यह थेरेपी सफल होती है तो लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है और हार्ट अटैक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

भारत के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट एएमसीए की रफ्तार तेज, 30 महीने में पहला प्रोटोटाइप उड़ान के लिए तैयार करने का लक्ष्य

नई दिल्ली । भारत ने अपनी वायुसेना को आधुनिक और स्वदेशी तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए कार्यक्रम के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी कर दिया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी इस आरएफपी के साथ ही देश के पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट के विकास की प्रक्रिया ने अब तेज रफ्तार पकड़ ली है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय वायुसेना के लिए एक ऐसा आधुनिक लड़ाकू विमान तैयार करना है जो स्टील्थ तकनीक, अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और लंबी दूरी तक प्रभावी संचालन क्षमता से लैस हो। आरएफपी के अनुसार बिडिंग प्रक्रिया 11 जून से शुरू होगी और 27 जुलाई को समाप्त होगी, जबकि 28 जुलाई को बोली खोली जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया के तहत चयनित साझेदार को कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के मात्र 30 महीनों के भीतर पहले प्रोटोटाइप की उड़ान सुनिश्चित करनी होगी। परियोजना के तहत कुल पांच लो-ऑब्जर्वेबल प्रोटोटाइप विमान तैयार किए जाएंगे, जिससे परीक्षण और विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा एक स्ट्रक्चरल टेस्ट स्पेसिमेन भी बनाया जाएगा ताकि विमान की मजबूती और प्रदर्शन का व्यापक मूल्यांकन किया जा सके। इस पूरे विकास कार्य की जिम्मेदारी एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को सौंपी गई है, जो डिजाइन डेटा और तकनीकी ड्रॉइंग्स के आधार पर निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ इस परियोजना को आगे बढ़ाएगी। चयनित बोलीदाता को न केवल निर्माण कार्य करना होगा बल्कि फ्लाइट टेस्टिंग, टाइप सर्टिफिकेशन और तकनीकी मूल्यांकन में भी सहयोग देना होगा। विमान को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में उच्च स्तर की दक्षता और उत्तरजीविता क्षमता प्रदान कर सके। एएमसीए परियोजना के लिए देश के तीन प्रमुख निजी क्षेत्र नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिनमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड, लार्सन एंड टुब्रो के साथ भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा भारत फोर्ज के साथ बीईएमएल जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह मॉडल भारत में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है। इस फाइटर जेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी स्टील्थ तकनीक होगी, जिसके तहत इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह दुश्मन के रडार पर आसानी से दिखाई न दे। इसमें हथियारों और मिसाइलों को बाहरी हिस्सों की बजाय विमान के अंदरूनी कम्पार्टमेंट में रखा जाएगा, जिससे इसकी रडार क्रॉस सेक्शन क्षमता और कम हो जाएगी। यह विमान दो इंजन वाला मध्यम श्रेणी का लड़ाकू विमान होगा, जो लगभग 1.2 से 1.8 मैक की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम होगा। रक्षा क्षेत्र के जानकारों के अनुसार यह प्रोजेक्ट भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्तमान में भारतीय वायुसेना निर्धारित स्क्वाड्रन क्षमता से कम विमानों के साथ संचालन कर रही है। ऐसे में एएमसीए, तेजस के उन्नत संस्करणों के साथ मिलकर भविष्य में वायुसेना की ताकत को नई दिशा देगा। भारत पहले ही तेजस फाइटर जेट के जरिए स्वदेशी विमान निर्माण क्षमता को मजबूत कर चुका है और अब इस परियोजना के जरिए अगली पीढ़ी की लड़ाकू तकनीक में प्रवेश कर रहा है।

दिल्ली में मोदी–विजय बैठक, मेकेदातु विवाद के बीच तमिलनाडु सीएम की पीएम से पहली औपचारिक भेंट

नई दिल्ली । तमिलनाडु के मुख्यमंत्री Vijay ने बुधवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi से नई दिल्ली में मुलाकात की, जिसे दोनों नेताओं के बीच पिछले एक दशक से अधिक समय के बाद हुई महत्वपूर्ण राजनीतिक भेंट माना जा रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनकी प्रधानमंत्री से पहली औपचारिक मुलाकात रही, जिससे राजनीतिक हलकों में इस बैठक को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई, जिसमें इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया। हालांकि आधिकारिक बयान में विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया, लेकिन माना जा रहा है कि बातचीत का केंद्र तमिलनाडु से जुड़े विकास मुद्दे, केंद्र प्रायोजित योजनाएं और राज्य में चल रही परियोजनाएं रहीं। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब दक्षिण भारत की राजनीति में कावेरी जल विवाद से जुड़े मेकेदातु प्रोजेक्ट को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। तमिलनाडु सरकार लंबे समय से इस परियोजना का विरोध कर रही है और मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना है कि कावेरी नदी पर किसी भी नए बांध या परियोजना से तमिलनाडु के हिस्से के जल प्रवाह पर असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। इसी पृष्ठभूमि में यह मुलाकात राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। मुख्यमंत्री विजय का राजनीतिक सफर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाते हुए राज्य में नई पार्टी का गठन किया और धीरे-धीरे जनाधार मजबूत किया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने युवा मतदाताओं और शहरी क्षेत्रों में प्रभावशाली समर्थन हासिल किया, जिससे पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों में बदलाव देखने को मिला। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी यह दिल्ली यात्रा पहली बड़ी औपचारिक राजनीतिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है। जानकारी के अनुसार, विजय और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात लगभग 12 साल बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कोयंबटूर में हुई थी, जब विजय एक अभिनेता के रूप में राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अब दोनों नेताओं का मिलना पूरी तरह से अलग राजनीतिक संदर्भ में हुआ है, जहां एक तरफ प्रधानमंत्री देश के शीर्ष नेतृत्व में हैं और दूसरी ओर विजय एक राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में केंद्र से संवाद कर रहे हैं। बैठक के दौरान प्रशासनिक सहयोग, विकास योजनाओं और केंद्र-राज्य समन्वय से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु सरकार का जोर राज्य में बुनियादी ढांचे, औद्योगिक निवेश और कृषि क्षेत्र के विकास पर है, जिसके लिए केंद्र सरकार के साथ बेहतर तालमेल को जरूरी माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भेंट नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक दिशा को भी संकेत देती है। विशेषकर मेकेदातु जैसे संवेदनशील मुद्दे और राज्य-केंद्र संबंधों की पृष्ठभूमि में यह बैठक आने वाले समय में नीतिगत फैसलों पर असर डाल सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों ने इसे सकारात्मक और औपचारिक बातचीत बताया है, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों पर नजर बनी हुई है।

45°C की आग उगलती गर्मी में ऐसे बचाएं खुद को, नौतपा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

नई दिल्ली । नौतपा के नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं। इस दौरान सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं और तापमान कई शहरों में 40 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तेज धूप, गर्म हवाएं और लू शरीर पर तेजी से असर डालती हैं। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी डीहाइड्रेशन, हीट एग्जॉशन और हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा बढ़ जाता है जिन्हें रोजमर्रा के काम, नौकरी, व्यापार या यात्रा के कारण घर से बाहर निकलना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नौतपा में सबसे जरूरी है कि शरीर को ज्यादा गर्म होने से बचाया जाए और पानी की कमी न होने दी जाए। डॉक्टरों का कहना है कि अगर सही सावधानी बरती जाए तो इस भीषण गर्मी के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर से बाहर निकलते समय कुछ जरूरी चीजें हमेशा साथ रखनी चाहिए। पानी की बोतल, ORS या ग्लूकोज, छाता या टोपी, सनग्लास, गमछा या कॉटन कपड़ा, हल्का स्नैक और जरूरी दवाइयां साथ रखना बेहद जरूरी माना गया है। धूप में निकलते समय सिर और चेहरे को ढंकना लू से बचाने में काफी मदद करता है। नौतपा के दौरान सुबह 6 बजे से 10 बजे तक और शाम 5 बजे के बाद बाहर निकलना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक का समय सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। इस दौरान गर्म हवाएं और तेज धूप शरीर का तापमान तेजी से बढ़ा देती हैं। यदि जरूरी काम न हो तो इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए। पैदल चलने वालों और बाइक सवारों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बाइक चलाते समय फुल स्लीव कपड़े, ग्लव्स और हेलमेट का इस्तेमाल करें। हेलमेट के अंदर कॉटन का कपड़ा लगाने से सिर जल्दी गर्म नहीं होता। वहीं पैदल चलने वाले लोग बीच-बीच में छांव में रुककर आराम करें और हर 20 से 30 मिनट में पानी पीते रहें। खाली पेट बाहर निकलना भी खतरनाक हो सकता है। डॉक्टरों के अनुसार कुछ शारीरिक संकेतों को कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, ज्यादा पसीना आना या अचानक पसीना बंद हो जाना, तेज कमजोरी, उल्टी, सांस लेने में दिक्कत, शरीर का तापमान बढ़ना, बेहोशी या दिल की धड़कन तेज होना हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत छांव या ठंडी जगह पर जाएं और मेडिकल मदद लें। नौतपा में सिर्फ पानी पीना काफी नहीं होता। शरीर से पसीने के साथ जरूरी मिनरल्स भी निकल जाते हैं। इसलिए ORS, नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी और बेल या आम पना जैसे देसी पेय शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा चाय, कॉफी, शराब और कोल्ड ड्रिंक्स से बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों को इस मौसम में खास देखभाल की जरूरत होती है। बच्चों को धूप में खेलने से बचाएं और उन्हें बार-बार पानी या तरल पदार्थ देते रहें। वहीं बुजुर्गों को लंबे समय तक गर्मी में न रहने दें। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर, शुगर, हार्ट या सांस की बीमारी है उन्हें अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। नौतपा के दौरान लाइफस्टाइल में भी बदलाव जरूरी है। हल्का और सुपाच्य भोजन करें। तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फल डाइट में शामिल करें। ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर में हवा का संचार बना रहे। पर्याप्त नींद और आराम भी शरीर को गर्मी से लड़ने की ताकत देता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। सही सावधानी और जागरूकता ही इस भीषण गर्मी में सबसे बड़ा बचाव है।

चारधाम यात्रा पर भारी पड़ रही ऊंचाई और गर्मी, 39 दिन में 105 श्रद्धालुओं की मौत

नई दिल्ली । उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस बार आस्था के साथ-साथ चिंता का विषय भी बनती जा रही है। यात्रा शुरू होने के महज 39 दिनों के भीतर 105 से ज्यादा श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। इनमें ज्यादातर मौतें हार्ट अटैक, हाई एल्टीट्यूड सिकनेस, सांस की तकलीफ और पुरानी बीमारियों के कारण हुई हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार मौतों का आंकड़ा कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा है, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रा प्रबंधन पर सवाल खड़े होने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल 14 मई तक 40 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी, लेकिन इसके बाद बढ़ती गर्मी और लगातार बढ़ती भीड़ के बीच सिर्फ 14 दिनों में 65 और लोगों ने जान गंवा दी। सबसे ज्यादा 50 मौतें केदारनाथ धाम में हुई हैं, जबकि बद्रीनाथ में 30, यमुनोत्री में 15 और गंगोत्री-गौमुख क्षेत्र में 10 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। हाल ही में टिहरी जिले के देवप्रयाग में महाराष्ट्र से आए दो श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत हो गई। मृतकों में 49 वर्षीय किशन नरहरि और 81 वर्षीय विमल ज्ञानोबा शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि ज्यादातर श्रद्धालु ऊंचाई वाले इलाकों में शरीर पर पड़ने वाले दबाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसका खामियाजा जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। चारधाम यात्रा में इस बार रिकॉर्ड भीड़ देखने को मिल रही है। अब तक 23 लाख से ज्यादा श्रद्धालु गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम पहुंच चुके हैं, जबकि रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा 42 लाख के पार पहुंच गया है। सबसे ज्यादा भीड़ केदारनाथ धाम में उमड़ी है, जहां 9 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। बद्रीनाथ में 6 लाख 42 हजार, यमुनोत्री और गंगोत्री में 4-4 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। सरकार लगातार दावा कर रही है कि यात्रा मार्ग पर पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। मेडिकल कैंप, डॉक्टर, एम्बुलेंस और स्वास्थ्य टीमों की तैनाती की गई है। यात्रा शुरू होने से पहले एडवाइजरी जारी कर बुजुर्गों, हृदय रोगियों, हाई ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई थी। बावजूद इसके लगातार बढ़ रही मौतों ने यात्रा की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सुबोध उनियाल ने कहा कि कई श्रद्धालु अति उत्साह में शरीर के संकेतों को नजरअंदाज कर तेजी से यात्रा पूरी करने की कोशिश करते हैं। ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और लगातार चढ़ाई की वजह से हार्ट अटैक और हाई एल्टीट्यूड सिकनेस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि अगर सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द या कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर चिकित्सकीय मदद लें। चारधाम यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ हुई थी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। कपाट खुलने के बाद से ही चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। आस्था के इस महापर्व में जहां करोड़ों श्रद्धालु भगवान के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं, वहीं लगातार बढ़ती मौतों ने यह साफ कर दिया है कि पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों की यात्रा को हल्के में लेना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा पर बड़ा सवाल, खजाने से गायब हुए सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषण

नई दिल्ली । केरल के ऐतिहासिक और विश्वप्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। मंदिर के खजाने से सोने और हीरे के बहुमूल्य आभूषणों के गायब होने की खबर सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच और पुलिस रिपोर्ट में मंदिर की इन्वेंट्री में कई महत्वपूर्ण वस्तुओं की कमी दर्ज की गई है, जिसके बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। देश के सबसे समृद्ध और प्रतिष्ठित मंदिरों में शामिल इस धार्मिक स्थल से जुड़े इस घटनाक्रम ने श्रद्धालुओं और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पुलिस महानिदेशक द्वारा गृह विभाग को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार मंदिर के रिकॉर्ड में लगभग 78 ग्राम सोने के आभूषण कम पाए गए हैं। इसके साथ ही ‘वैरम नामा’ नामक हीरे से जड़ा एक अत्यंत कीमती आभूषण भी रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं मिला। बताया जा रहा है कि यह आभूषण कई महीने पहले मरम्मत के लिए बाहर भेजा गया था, लेकिन अब तक उसे वापस मंदिर में जमा नहीं कराया गया। इसी प्रकार मंदिर का एक सोने का दीया भी रखरखाव कार्य के लिए बाहर भेजा गया था, जो अभी तक वापस नहीं आया है। मामले के सामने आने के बाद मंदिर प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। सदियों पुराने इस मंदिर में मौजूद संपत्तियों और बहुमूल्य धरोहरों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही विशेष सतर्कता बरती जाती रही है, लेकिन अब सामने आई इस चूक ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता को चुनौती दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इतने संवेदनशील और ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर में रिकॉर्ड प्रबंधन और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है। रिपोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए कई अहम सुझाव भी दिए गए हैं। इसमें मंदिर की सभी सोने और चांदी की वस्तुओं को सुरक्षित तिजोरियों में रखने की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे के लिए अलग और सुरक्षित लॉकर व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दिया गया है। मंदिर परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सख्त जांच सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है, ताकि बिना उचित सत्यापन के कोई भी संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंच न सके। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध माना जाता है। तिरुवनंतपुरम स्थित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और दक्षिण भारत की श्री वैष्णव परंपरा में इसका विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर को देश ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे धनी मंदिरों में गिना जाता है। वर्षों पहले मंदिर के गुप्त तहखानों से मिले बहुमूल्य खजाने ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया था। ऐसे में अब आभूषणों के गायब होने की खबर ने सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। प्रशासन फिलहाल पूरे मामले की गहन जांच में जुटा हुआ है। मंदिर से जुड़े रिकॉर्ड, मरम्मत प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं श्रद्धालुओं की मांग है कि मंदिर की प्राचीन धरोहरों की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक और पारदर्शी निगरानी प्रणाली को तत्काल लागू किया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।

एयर इंडिया पर बढ़ा परिचालन दबाव: तकनीकी खराबी से बीच सफर लौटी फ्लाइट, अब घरेलू उड़ानों में भी कटौती की तैयारी

नई दिल्ली । एयर इंडिया की दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एक अंतरराष्ट्रीय उड़ान बुधवार को तकनीकी खराबी के कारण बीच रास्ते से वापस लौट आई। करीब आठ घंटे तक हवा में रहने के बाद विमान की दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षित इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। इस घटना के दौरान विमान में लगभग 230 यात्री सवार थे, जिनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पायलट ने एहतियातन उड़ान को वापस दिल्ली मोड़ने का फैसला लिया। घटना के बाद एयर इंडिया ने विमान की विस्तृत तकनीकी जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार बोइंग 777-300 ईआर विमान ने निर्धारित समय पर दिल्ली से उड़ान भरी थी और वह सैन फ्रांसिस्को के लिए लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर था। उड़ान भरने के कुछ घंटों बाद विमान के तकनीकी सिस्टम में गड़बड़ी के संकेत मिले। उस समय विमान विदेशी हवाई क्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था। संभावित जोखिम को देखते हुए पायलट और एयरलाइन की तकनीकी टीम ने तत्काल स्थिति की समीक्षा की और सुरक्षा मानकों के तहत विमान को वापस दिल्ली लाने का निर्णय लिया गया। विमान की सुरक्षित लैंडिंग के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। एयरपोर्ट पर एयर इंडिया की ग्राउंड टीम ने यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था शुरू की। प्रभावित यात्रियों को होटल, भोजन और दूसरी उड़ानों की सुविधा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की गई। एयरलाइन ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और विमान की गहन तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही आगे कोई निर्णय लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर देश में विमान सुरक्षा और एयरलाइंस के बढ़ते परिचालन दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन साथ ही तकनीकी रखरखाव, ईंधन लागत और परिचालन खर्च भी लगातार बढ़ रहे हैं। विमानन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी की उड़ानों में तकनीकी निगरानी और रखरखाव की जिम्मेदारी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि ऐसे विमानों में छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है। इसी बीच एयर इंडिया की ओर से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती की तैयारी की खबर ने भी यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। बढ़ती ईंधन कीमतों और भारी परिचालन लागत के कारण एयरलाइन आने वाले महीनों में अपनी उड़ानों के फेरों को सीमित करने की योजना बना रही है। जानकारी के मुताबिक जून से अगस्त 2026 के बीच कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर उड़ानों की संख्या कम की जा सकती है। एयरलाइन का कहना है कि यह कदम परिचालन लागत को नियंत्रित करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए उठाया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उड़ानों में कटौती का असर यात्रियों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है। टिकटों की उपलब्धता कम होने से किराए बढ़ सकते हैं और यात्रियों को शेड्यूल में बदलाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। वहीं एयर इंडिया के सामने एक ओर सुरक्षा मानकों को बनाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी ओर आर्थिक दबाव के बीच परिचालन संतुलन कायम रखना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। फिलहाल एयरलाइन ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और तकनीकी जांच पूरी होने तक संबंधित विमान को सेवा में शामिल नहीं किया जाएगा।

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हलचल बढ़ी, BJP सांसद का दावा- हरी झंडी मिलते ही TMC में बड़ा टूट संभव

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़े राजनीतिक बदलाव की अटकलों ने सियासी माहौल को गर्म कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद सौमित्र खान के एक बयान ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने दावा किया है कि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 20 सांसद और 50 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं और पार्टी नेतृत्व की अनुमति मिलते ही वे पाला बदल सकते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद राज्य की राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया है। लगातार तीसरी बार लोकसभा पहुंचे सौमित्र खान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तृणमूल कांग्रेस के कई जनप्रतिनिधि अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली और नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर लंबे समय से असंतोष का माहौल बना हुआ है और कई नेता राजनीतिक भविष्य को लेकर नई संभावनाओं की तलाश में हैं। खान ने कहा कि यदि भाजपा नेतृत्व चाहे तो आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है। हालांकि उन्होंने उन नेताओं के नाम सार्वजनिक नहीं किए जो कथित तौर पर भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इस दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में दल-बदल विरोधी कानून को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं, जबकि भाजपा के पास 12 और कांग्रेस के पास एक सीट है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ पार्टी बदलते हैं तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर खतरा नहीं रहता। ऐसे में 29 सांसदों वाली पार्टी के लिए यह आंकड़ा लगभग 19 से 20 सांसदों का बनता है, जो सौमित्र खान के दावे के काफी करीब माना जा रहा है। दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा सांसद के बयान को पूरी तरह निराधार बताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि भाजपा जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है और ऐसा कोई राजनीतिक संकट तृणमूल कांग्रेस में मौजूद नहीं है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इस तरह के दावे कर रही है, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। तृणमूल कांग्रेस ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट है और नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह की नाराजगी जैसी बातें केवल राजनीतिक प्रचार का हिस्सा हैं। पश्चिम बंगाल में दलबदल की राजनीति कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले भी तृणमूल कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने भाजपा का दामन थामा था। हालांकि चुनाव के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और कई नेता फिर से अपनी पुरानी पार्टी में लौट गए। लेकिन इस बार राज्य की राजनीति पहले से अलग नजर आ रही है। बीते कुछ समय में तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों पर असंतोष जाहिर किए जाने की घटनाओं ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए पश्चिम बंगाल में सियासी समीकरण तेजी से बदल सकते हैं। भाजपा लगातार राज्य में अपने संगठन को मजबूत करने में जुटी है, जबकि तृणमूल कांग्रेस अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सक्रिय रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में सौमित्र खान का यह बयान आने वाले समय में बंगाल की राजनीति को और अधिक दिलचस्प बना सकता है।

मई का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई को, प्रदोष काल में करें शिव पूजा, मिलेगा विशेष फल

नई दिल्ली । मई 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत बेहद खास माना जा रहा है। इस बार ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है, लेकिन गुरुवार के संयोग के कारण इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का भी विशेष महत्व बढ़ जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर शिवजी और विष्णुजी दोनों की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन के दुख और बाधाएं दूर होती हैं। पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि का आरंभ 28 मई 2026 गुरुवार सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। वहीं यह तिथि 29 मई शुक्रवार सुबह 9 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल के आधार पर व्रत और पूजा 28 मई को ही की जाएगी। गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। हिंदू धर्म में प्रदोष काल का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। इस बार प्रदोष काल 28 मई को शाम 6 बजकर 12 मिनट से रात 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। सूर्यास्त का समय शाम 7 बजकर 12 मिनट बताया गया है। सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और बाद का समय प्रदोष काल माना जाता है। गुरु प्रदोष व्रत की पूजा के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें। घर के मंदिर को साफ कर चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें और घी का दीपक जलाएं। शाम के समय प्रदोष काल में शिव मंदिर जाकर भगवान शिव का जल, दूध, दही, शहद और शक्कर से अभिषेक करें। शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें और चंदन लगाएं। इसके बाद शिव मंत्रों का जप करें तथा प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर भोग अर्पित करें और प्रसाद परिवार में बांटें। चूंकि यह व्रत गुरुवार को पड़ रहा है, इसलिए भगवान विष्णु की पूजा करना भी अत्यंत शुभ माना गया है। विष्णुजी के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी आराधना करने से सुख-समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है।