PM मोदी की मितव्ययिता की अपील पर मारुति सुजुकी में लागू किया वर्क फ्रॉम होम

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी (Country Largest Car Maker) मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड (एमएसआईएल) (Maruti Suzuki India Limited – MSIL) ने वर्क फ्रॉम होम (Work From Home) को लागू कर दिया है। सप्ताह के दूसरे दिन यानी मंगलवार को कहा कि कंपनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया में युद्ध के प्रभाव को कम करने की जरूरत को ध्यान में रखते हुए कई कदम उठाए हैं, जिनमें संभव होने पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू करना और विदेशी यात्राओं पर रोक शामिल है। क्या कहा कंपनी ने?कंपनी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा कि वह प्रधानमंत्री की मितव्ययिता की अपील और पश्चिम एशिया युद्ध के संभावित प्रभाव को कम करने के आह्वान को अत्यधिक महत्व देती है। मारुति सुजुकी ने कहा कि यह सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने और उन्हें अधिक कुशल बनाने का उपयुक्त समय है, ताकि राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ-साथ कारोबार के स्वास्थ्य को भी बेहतर किया जा सके। कंपनी के अनुसार, प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई उपायों को संस्थागत रूप देने का संदेश दिया है। इसके तहत जहां संभव हो वहां पर ‘वर्क फ्रॉम होम’ लागू किया जा रहा है, ताकि आवागमन से जुड़े ईंधन की खपत कम की जा सके। कंपनी ने कहा कि यह कदम उसकी मौजूदा रिमोट वर्किंग नीति के अनुरूप है। विदेश यात्रा पर क्या कहा?इसके अलावा, विदेश यात्राओं को केवल बेहद जरूरी व्यावसायिक जरूरतों तक सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनी ने कर्मचारियों को बैठकों के लिए वर्चुअल माध्यम को प्राथमिकता देने और घरेलू यात्राओं को भी न्यूनतम रखने को कहा है। मारुति सुजुकी ने कर्मचारियों को भी कार पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग जैसे उपाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। साथ ही, कार्यालय और घर दोनों जगह ऊर्जा संरक्षण पर जोर देते हुए एयर कंडीशनर, पंखे और रोशनी के बचत के हिसाब से इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। कंपनी ने कहा कि इन सभी उपायों की जानकारी आंतरिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों तक व्यापक रूप से पहुंचाई जा रही है। हरियाणा में मैन्युफैक्चरिंग लैबइस बीच, मारुति सुजुकी ने सरकार के कौशल विकास मिशन के तहत हरियाणा के रोहतक में अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग लैब स्थापित की है। कंपनी ने बयान में कहा कि रोहतक स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) हसनगढ़ में स्थापित इस मैन्युफैक्चरिंग लैब में पहले वर्ष में लगभग 200 छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस लैब में छात्रों को वाहन असेंबली, वेल्डिंग और रंगाई जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी (कॉरपोरेट मामले) राहुल भारती ने कहा- इस लैब में आधुनिक मशीनों और कार्यस्थल जैसे वातावरण का उपयोग किया जाएगा। कौशल विकास मिशन के अनुरूप यह पहल छात्रों को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप तैयार होने और बदलते वाहन परिवेश के लिए प्रतिभा को निखारती है। मारुति सुजुकी देशभर में 31 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को सहयोग दे रही है और अब तक 18 ऐसी लैब स्थापित कर चुकी है।
बकरीद (ईद-उल-अज़हा): त्याग, आस्था और इंसानियत का सबसे पवित्र पर्व

ईद-उल-अज़हा जिसे भारत में आमतौर पर बकरीद या बक्रीद कहा जाता है, इस्लाम धर्म का एक अत्यंत पवित्र और भावनात्मक पर्व है। यह त्योहार हर साल दुनिया भर में करोड़ों लोगों द्वारा गहरी आस्था, श्रद्धा और समर्पण के साथ मनाया जाता है। बकरीद केवल एक धार्मिक रस्म नहीं है, बल्कि यह त्याग, भरोसे और इंसानियत का संदेश देने वाला पर्व है। बकरीद का इतिहास पैगंबर हज़रत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) की उस महान परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें अल्लाह ने उनकी आस्था की परीक्षा ली थी। मान्यता के अनुसार, उन्हें अपने सबसे प्रिय पुत्र को अल्लाह की राह में कुर्बान करने का आदेश दिया गया था। हज़रत इब्राहिम ने बिना किसी हिचकिचाहट के अल्लाह के आदेश को स्वीकार किया और अपने बेटे को कुर्बान करने के लिए तैयार हो गए। उनकी इस अटूट आस्था और समर्पण को देखकर अल्लाह ने उनके पुत्र की जगह एक दुम्बा (भेड़) को कुर्बानी के लिए भेज दिया। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में बकरीद मनाई जाती है। इस पर्व का असली उद्देश्य केवल कुर्बानी देना नहीं है, बल्कि अपने अंदर की बुराइयों, लालच और अहंकार की कुर्बानी देना भी है। बकरीद हमें यह सिखाती है कि सच्चा धर्म वही है जिसमें त्याग, सेवा और इंसानियत हो। इस दिन लोग सुबह विशेष नमाज अदा करते हैं, जिसे ईद की नमाज कहा जाता है, और उसके बाद कुर्बानी की रस्म निभाई जाती है। कुर्बानी के बाद मांस को तीन हिस्सों में बांटा जाता है, जिसमें एक हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए रखा जाता है और तीसरा हिस्सा अपने परिवार के लिए उपयोग किया जाता है। यह परंपरा समाज में समानता और भाईचारे को मजबूत बनाती है। बकरीद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि इंसान को अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के लिए जीना चाहिए। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि असली खुशी केवल पाने में नहीं, बल्कि बांटने में है। आज के समय में जब समाज में दूरी और असमानता बढ़ रही है, बकरीद का संदेश और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाता है। यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि विश्वास और समर्पण से हर कठिन परीक्षा को पार किया जा सकता है। हज़रत इब्राहिम की कहानी आज भी हर इंसान को यह प्रेरणा देती है कि सच्चा ईमान वही है जिसमें बिना शर्त समर्पण हो। अंत में बकरीद केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि इंसानियत, करुणा और एकता का जीवंत संदेश है, जो हमें एक बेहतर समाज और बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। -बकरीद (ईद-उल-अज़हा)
ChatGPTने 80 साल पुराना गणित का सवाल हल किया, AI की ताकत से वैज्ञानिक जगत हैरान

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ जानकारी देने या सवालों के जवाब तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह अब जटिल समस्याओं को हल करने और नए तर्क विकसित करने की दिशा में भी आगे बढ़ता दिख रहा है। इसका ताजा उदाहरण ChatGPT द्वारा 80 साल पुराने अनसुलझे गणितीय सवाल को हल करने के रूप में सामने आया है। यह सवाल 1946 में मशहूर गणितज्ञ पॉल एर्डोश ने पूछा था, जिसमें यह समझना था कि किसी समतल सतह पर बने कई बिंदुओं में कितने जोड़े ऐसे हो सकते हैं जिनके बीच की दूरी ठीक 1 यूनिट हो। दशकों तक इस समस्या का कोई सर्वमान्य समाधान नहीं मिल पाया था। ChatGPT ने इस समस्या पर काम करते हुए ऐसे नए गणितीय पैटर्न और उदाहरण खोजे, जिनमें पहले से अधिक यूनिट डिस्टेंस जोड़े संभव हो सकते हैं। खास बात यह रही कि AI ने केवल पुरानी जानकारी नहीं दोहराई, बल्कि अलग-अलग गणितीय क्षेत्रों को जोड़कर एक नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समाधान में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि AI ने अल्जेब्रिक नंबर थ्योरी जैसे जटिल सिद्धांतों का उपयोग किया और उन्हें ज्यामितीय समस्या से जोड़कर एक नया समाधान रास्ता तैयार किया। गणितज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि AI की रीजनिंग क्षमता का बड़ा प्रमाण है, जहां मशीनें केवल गणना नहीं बल्कि गहराई से सोचकर नए निष्कर्ष निकालने में सक्षम हो रही हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि AI इंसानों की जगह नहीं लेगा। यह केवल समाधान सुझा सकता है, लेकिन यह तय करना कि कौन सा सवाल महत्वपूर्ण है और उसका वास्तविक अर्थ क्या है, यह भूमिका अभी भी इंसानों के पास ही रहेगी। कुल मिलाकर यह उपलब्धि दिखाती है कि AI आने वाले समय में विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और रिसर्च के क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।
पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि: आधुनिक भारत के शिल्पकार को नमन

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि हर साल 27 मई को पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाती है। इस दिन भारत उन्हें याद करता है, जिन्होंने आज़ाद भारत की नींव मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। नेहरू जी का निधन 27 मई 1964 को हुआ था, लेकिन उनके विचार, उनकी नीतियाँ और उनका आधुनिक भारत का सपना आज भी लोगों के बीच जीवित है। नेहरू जी को बच्चों से बेहद लगाव था, इसलिए उन्हें “चाचा नेहरू” के नाम से भी जाना जाता है। उनकी पुण्यतिथि के अवसर पर स्कूलों, संस्थानों और राजनीतिक संगठनों में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। लोग उन्हें फूल अर्पित कर उनके योगदान को याद करते हैं और उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लेते हैं। नेहरू जी का मानना था कि भारत का भविष्य शिक्षा, विज्ञान और तकनीक पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने देश में बड़े-बड़े उद्योगों, आईआईटी और वैज्ञानिक संस्थानों की स्थापना की दिशा में काम किया। उनके नेतृत्व में भारत ने लोकतंत्र को मजबूत किया और एक आधुनिक राष्ट्र बनने की ओर कदम बढ़ाए। आज भी नेहरू जी की नीतियों और सोच का असर भारतीय राजनीति और विकास मॉडल में देखा जा सकता है। उनके द्वारा दिया गया धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश भारत की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है। पुण्यतिथि के इस अवसर पर देश उन्हें केवल याद ही नहीं करता, बल्कि उनके दिखाए रास्ते पर चलने का संकल्प भी लेता है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेगा। नेहरू जी ने कहा था कि “भविष्य उन्हीं का है जो अपने सपनों की सुंदरता पर विश्वास करते हैं।” यही विचार आज भी हर भारतीय को आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। -पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि
घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए जानिए तुलसी रखने की 3 सबसे शुभ जगहें

नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में तुलसी के पौधे को विशेष महत्व दिया जाता है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं माना जाता, बल्कि वास्तु शास्त्र में भी इसे सकारात्मक ऊर्जा और शुभ प्रभाव से जोड़कर देखा जाता है। कई घरों में तुलसी का पौधा नियमित पूजा और परंपराओं का हिस्सा होता है। मान्यता है कि सही स्थान पर रखा गया तुलसी का पौधा घर के वातावरण को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है और परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में योगदान दे सकता है। घर के वातावरण पर विशेष प्रभाववास्तु शास्त्र के अनुसार तुलसी के पौधे को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उसे पर्याप्त धूप और स्वच्छ वातावरण मिल सके। माना जाता है कि स्वस्थ और हरा-भरा तुलसी का पौधा घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाने का काम करता है। इसी वजह से लोग तुलसी को केवल सजावट का हिस्सा नहीं बल्कि शुभता से जुड़ी मान्यताओं का केंद्र भी मानते हैं। पूर्व दिशा को माना गया शुभ स्थानतुलसी रखने के लिए घर की पूर्व दिशा को काफी शुभ माना जाता है। यह दिशा नई शुरुआत और प्रकाश का प्रतीक मानी जाती है। सुबह की पहली धूप इस दिशा में आसानी से पहुंचती है, जिससे पौधे को प्राकृतिक ऊर्जा मिलती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिशा में रखा गया तुलसी का पौधा घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक बनाए रखने में मदद करता है।उत्तर-पूर्व दिशा का भी है विशेष महत्ववास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर-पूर्व दिशा को आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति की दिशा माना जाता है। इसलिए इस हिस्से में तुलसी रखने को भी शुभ बताया जाता है। कहा जाता है कि यह स्थान घर में संतुलन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने से जुड़ा माना जाता है। कई लोग इसी कारण घर के इस हिस्से में तुलसी स्थापित करना पसंद करते हैं। उत्तर दिशा से जुड़ी समृद्धि की मान्यताकुछ वास्तु मान्यताओं में उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। इस कारण कई लोग तुलसी को इस दिशा में रखने को लाभकारी मानते हैं। हालांकि इसके साथ यह भी जरूरी माना जाता है कि पौधे की नियमित देखभाल हो और उसे पर्याप्त पानी व धूप मिलती रहे। पौधे की स्वच्छता और देखरेख को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया जाता है।तुलसी का पौधा केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं बल्कि भारतीय जीवनशैली में एक विशेष स्थान रखता है। चाहे इसे आस्था के रूप में देखा जाए या सकारात्मक वातावरण से जोड़कर, लोग आज भी इसे घर की शुभता और शांति का प्रतीक मानते हैं।
LPG VS Ethanol: LPG से सस्ता पड़ेगा एथेनॉल चूल्हा, जानिए क्या है नई टेक्नोलॉजी और कैसे करता है काम

नई दिल्ली। एथेनॉल चूल्हा एक नई पीढ़ी की कुकिंग तकनीक है, जिसमें ईंधन के रूप में लिक्विड या जेल एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता है।यह वही एथेनॉल है जिसे पेट्रोल में मिलाकर वाहनों में भी इस्तेमाल किया जाता है। यह चूल्हा LPG सिलेंडर का एक संभावित विकल्प माना जा रहा है क्योंकि यह: बिना धुआं जलता है बिना कालिख के खाना पकाता है तेज और स्थिर आंच देता है कम लागत में काम करता है एथेनॉल स्टोव कैसे काम करता है?एथेनॉल स्टोव की कार्यप्रणाली काफी सरल होती है: स्टोव के टैंक में लिक्विड या जेल एथेनॉल भरा जाता है इसे जलाया जाता है नियंत्रित बर्नर एथेनॉल को पूरी तरह जलाते हैं इससे LPG जैसी तेज और साफ आंच मिलती है इस तकनीक में गैस पाइपलाइन या सिलेंडर की जरूरत नहीं होती, जिससे रिस्क भी कम हो जाता है। LPG vs Ethanol: कौन कितना सस्ता?रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 लीटर एथेनॉल लगभग 15 घंटे तक आंच दे सकता है LPG की तुलना में इसका प्रति यूनिट कुकिंग खर्च कम पड़ता है लंबे समय में यह घरेलू बजट पर राहत दे सकता है यही वजह है कि इसे “स्मार्ट और सस्ता कुकिंग फ्यूल” कहा जा रहा है। पर्यावरण के लिए कितना फायदेमंद?एथेनॉल स्टोव को “ग्रीन टेक्नोलॉजी” माना जाता है क्योंकि: यह कार्बन न्यूट्रल फ्यूल है गन्ना, मक्का और बायोमास से बनता है धुआं और जहरीली गैसें नहीं निकलतीं जंगलों पर ईंधन निर्भरता कम हो सकती है LPG से कैसे अलग है?फीचर LPG एथेनॉल स्टोवईंधन फॉसिल फ्यूल बायोफ्यूलधुआं थोड़ा लगभग नहींसुरक्षा गैस लीकेज रिस्क कम रिस्कलागत अधिक कम होने की संभावनापर्यावरण प्रदूषण क्लीन एनर्जी नितिन गडकरी का विजनकेंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कई मंचों पर एथेनॉल आधारित कुकिंग टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की बात कही है।उनका मानना है कि अगर यह तकनीक बड़े स्तर पर अपनाई गई, तो: LPG पर निर्भरता कम होगी किसानों को एथेनॉल से नया बाजार मिलेगा भारत ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा सेहत और सुरक्षा के फायदेधुआं न होने से सांस की बीमारियों का खतरा कम बर्तन काले नहीं पड़ते आग फैलने का जोखिम LPG की तुलना में कम इनडोर एयर क्वालिटी बेहतर एथेनॉल स्टोव आने वाले समय में रसोई की दुनिया में बड़ा बदलाव ला सकता है। यह न सिर्फ LPG का विकल्प बन सकता है, बल्कि सस्ता, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल कुकिंग सिस्टम भी साबित हो सकता है।हालांकि इसका व्यापक उपयोग तभी संभव होगा जब इसका उत्पादन, सप्लाई और कीमत स्थिर रूप से विकसित हो।
जून 2026 का धार्मिक कैलेंडर तैयार परमा एकादशी से संत कबीर जयंती तक पूरे महीने रहेंगे पर्व और पूजा के खास संयोग

नई दिल्ली । जून 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से बेहद खास और पुण्यदायी माना जा रहा है। इस महीने एक साथ कई बड़े व्रत त्योहार और धार्मिक आयोजन होने जा रहे हैं जिनका इंतजार श्रद्धालु पूरे साल करते हैं। ज्येष्ठ मास और अधिक मास के विशेष संयोग के कारण इस बार परमा एकादशी सोमवती अमावस्या निर्जला एकादशी वट पूर्णिमा और संत कबीर जयंती जैसे पर्व पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाए जाएंगे। वहीं असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में लगने वाला अंबुबाची मेला भी लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा। जून महीने की शुरुआत ही धार्मिक अनुष्ठानों के माहौल के साथ होगी। 11 जून को परमा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। अधिक मास में आने वाली इस एकादशी को अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके बाद 15 जून को सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बन रहा है। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितरों के निमित्त तर्पण दान और स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन किए गए धार्मिक कार्यों से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन भी होगा। 17 जून को रंभा तृतीया व्रत रखा जाएगा। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए यह व्रत करती हैं जबकि अविवाहित कन्याएं अच्छे जीवनसाथी की इच्छा लेकर पूजा करती हैं। 20 जून को मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर की पूजा का विशेष पर्व मनाया जाएगा। मान्यता है कि मां विंध्यवासिनी अपने भक्तों को भय और संकटों से मुक्ति दिलाती हैं। इस दिन देवी की पूजा अर्चना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 22 जून को दुर्गाष्टमी और धूमावती जयंती का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन से 26 जून तक असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में अंबुबाची मेले का आयोजन होगा। यह मेला शक्ति साधना और देवी उपासना का सबसे बड़ा आयोजन माना जाता है जहां देश विदेश से साधु संत और श्रद्धालु पहुंचते हैं। 25 जून को साल की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में शामिल निर्जला एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास करने से सभी एकादशियों का पुण्य फल प्राप्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए यह व्रत विशेष माना गया है। महीने के अंत में 29 जून को वट पूर्णिमा व्रत और संत कबीर दास जयंती मनाई जाएगी। वट पूर्णिमा पर सुहागन महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी उम्र की कामना करेंगी। वहीं संत कबीर जयंती पर देशभर में भजन सत्संग और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पूरे जून महीने में मंदिरों में विशेष पूजा पाठ भजन कीर्तन और धार्मिक आयोजनों की धूम देखने को मिलेगी। श्रद्धालुओं के लिए यह महीना भक्ति साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहने वाला है।
टैरो राशिफल 27 मई 2026: कर्क और मकर राशि वालों के लिए राहत भरा दिन, कई राशियों के इमोशंस रहेंगे भारी

नई दिल्ली। 27 मई 2026 का टैरो राशिफल संकेत देता है कि आज का दिन कई राशियों के लिए इमोशनल उतार-चढ़ाव से भरा रह सकता है। किसी पुरानी याद, अचानक बातचीत या रिश्तों से जुड़ी स्थिति मन पर असर डाल सकती है। वहीं कुछ राशियों को करियर और भविष्य को लेकर क्लैरिटी मिलने के संकेत हैं। दिन के दूसरे हिस्से में कई लोग खुद को थोड़ा स्थिर और शांत महसूस कर सकते हैं। कुल मिलाकर टैरो कार्ड्स बताते हैं कि आज छोटी-छोटी बातें भी ज्यादा असर डाल सकती हैं, इसलिए बिना सोचे-समझे रिएक्शन देने से बचना बेहतर रहेगा। कुछ राशियों के लिए यह दिन धीरे-धीरे चीजों के बेहतर होने और सुकून पाने का संकेत भी दे रहा है। राशिवार टैरो संकेत मेषआज मन पूरी तरह शांत नहीं रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे हालात में सुधार दिखेगा। पुरानी बातें बीच-बीच में परेशान कर सकती हैं, लेकिन कोई छोटी अच्छी खबर या बातचीत राहत दे सकती है। वृषभदिन काफी व्यस्त रह सकता है। आप अपने शांत और मैच्योर व्यवहार से लोगों का ध्यान खींचेंगे। पुरानी गलतफहमियां अब धीरे-धीरे खत्म होती दिख सकती हैं।मिथुनरिश्तों और इमोशंस को लेकर ज्यादा सोच सकते हैं। जल्दबाजी से बचें, चीजें समय के साथ साफ होंगी। कर्कचीजें धीरे-धीरे बेहतर होती नजर आएंगी। मानसिक बोझ हल्का होगा और फ्यूचर को लेकर क्लैरिटी मिलेगी। अंदर से सुकून महसूस होगा। सिंहआज मानसिक तनाव बढ़ सकता है। काम और रिश्तों में थोड़ी थकान महसूस होगी, इसलिए खुद को आराम देना जरूरी है। कन्यामूड में उतार-चढ़ाव रहेगा, लेकिन पहले से बेहतर स्थिति दिखेगी। किसी करीबी की बातचीत राहत दे सकती है। तुलापुरानी यादें मन को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन दिन आगे बढ़ने के साथ नया फोकस मिलेगा और मन हल्का होगा। वृश्चिकइमोशंस अस्थिर रह सकते हैं। कुछ दूरी बनाकर रखना आपके लिए बेहतर रहेगा। धनुकाम में देरी या कम मोटिवेशन से थोड़ी निराशा हो सकती है, लेकिन दिन के अंत में क्लैरिटी मिलेगी। मकरचीजें धीरे-धीरे बेहतर दिशा में जाएंगी। मन अब ज्यादा प्रैक्टिकल और शांत महसूस करेगा, सुकून मिलेगा। कुंभपुरानी बातें अब उतनी भारी नहीं लगेंगी। कॉन्फिडेंस धीरे-धीरे वापस आएगा। मीनइमोशंस और थॉट्स ज्यादा रहेंगे, लेकिन दिन के अंत में किसी की सराहना मन को राहत दे सकती है।आज का टैरो राशिफल बताता है कि दिन इमोशनली एक्टिव रहेगा, लेकिन कई राशियों के लिए यह धीरे-धीरे सुधार और मानसिक शांति की ओर बढ़ने का संकेत भी दे रहा है।
Airtel का बड़ा दावा: ‘नेट न्यूट्रैलिटी का उल्लंघन नहीं’, प्रायोरिटी पोस्टपेड सर्विस पर सरकार के सामने रखा पक्ष

नई दिल्ली। एयरटेल (Airtel) की नई ‘प्रायोरिटी पोस्टपेड सर्विस’ को लेकर उठे विवाद के बीच कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) की कमिटी के सामने अपना पक्ष रखा है। कंपनी का कहना है कि यह सेवा 5G नेटवर्क स्लाइसिंग तकनीक पर आधारित है और इससे नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं होता। साथ ही, इसका असर प्रीपेड या अन्य ग्राहकों की इंटरनेट स्पीड और सेवा गुणवत्ता पर नहीं पड़ेगा। एयरटेल ने स्पष्ट किया है कि उसकी यह प्रायोरिटी सर्विस पूरी तरह कंटेंट-न्यूट्रल है और इसमें किसी भी ऐप या वेबसाइट के साथ भेदभाव नहीं किया जाता। न तो किसी ऐप को ब्लॉक किया जाता है, न उसकी स्पीड कम की जाती है और न ही किसी को अतिरिक्त प्राथमिकता देकर अन्य यूजर्स को नुकसान पहुंचाया जाता है। कंपनी के अनुसार, 5G क्षमता का वर्तमान उपयोग पीक टाइम में लगभग 38% है, जिसमें प्रायोरिटी पोस्टपेड ट्रैफिक की हिस्सेदारी बेहद कम है। इसलिए प्रीपेड यूजर्स के लिए पर्याप्त नेटवर्क क्षमता हमेशा उपलब्ध रहती है और उनकी सर्विस क्वालिटी प्रभावित नहीं होगी। एयरटेल ने यह भी तर्क दिया है कि अगर 5G नेटवर्क स्लाइसिंग जैसी तकनीकों के उपयोग पर रोक लगाई गई, तो भारत में 6G तकनीक के विकास की संभावनाओं पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है। कंपनी का कहना है कि यह तकनीक भविष्य की उन्नत कनेक्टिविटी का आधार है। हाल ही में लॉन्च हुई इस सर्विस के तहत पोस्टपेड यूजर्स को भीड़भाड़ वाले इलाकों में बेहतर नेटवर्क और कम कॉल ड्रॉप जैसी सुविधाएं देने का दावा किया गया है। यह सेवा 449 रुपये के शुरुआती प्लान से उपलब्ध है। नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां किसी भी वेबसाइट या ऐप के साथ भेदभाव नहीं कर सकतीं, न ही किसी को पैसे लेकर तेज या धीमा इंटरनेट दे सकती हैं। इसी को लेकर इस नई सर्विस पर बहस तेज हो गई है।
इबोला वायरस का कहर: 900 से ज्यादा संदिग्ध केस, WHO ने घोषित किया Global Health Emergency; भारत में अलर्ट

नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने इसे अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित कर दिया है। इस बार संक्रमण दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से फैल रहा है, जिसके लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। WHO की रिपोर्ट के मुताबिक अब तक 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें 101 मामलों की पुष्टि हुई है। कांगो के इटुरी प्रांत को इसका केंद्र बताया जा रहा है, जहां लाखों लोग संघर्ष और अस्थिरता के बीच रह रहे हैं। यूएस CDC के अनुसार कांगो में अब तक 119 संदिग्ध मौतें और 10 पुष्ट मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि युगांडा में भी नए मामले सामने आने के बाद स्थिति गंभीर बनी हुई है। वायरस अब स्थानीय समुदायों में फैलता जा रहा है, जिससे नियंत्रण और मुश्किल हो गया है। इसी बीच भारत सरकार ने भी एहतियात के तौर पर एडवाइजरी जारी की है। कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग बढ़ा दी गई है और एयरपोर्ट्स पर निगरानी कड़ी कर दी गई है। हालांकि भारत में अभी तक इबोला का कोई पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने लोगों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।