BSNL का धमाकेदार ऑफर: सिर्फ ₹51 में 28 दिन अनलिमिटेड कॉल, 2GB डेली डेटा और फ्री सिम

नई दिल्ली। सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL नए ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए एक खास लिमिटेड टाइम ऑफर लेकर आई है। कंपनी ने इस योजना को “स्मार्ट स्टार्ट प्लान” नाम दिया है, जिसके तहत बेहद कम कीमत में यूजर्स को हाई वैल्यू बेनिफिट्स मिल रहे हैं। क्या है BSNL का ₹51 स्मार्ट स्टार्ट प्लान?इस ऑफर के तहत नए ग्राहकों को सिर्फ ₹51 में ये सुविधाएं मिल रही हैं: 28 दिनों की वैलिडिटी अनलिमिटेड लोकल और एसटीडी कॉलिंग रोजाना 2GB हाई-स्पीड डेटा हर दिन 100 फ्री SMS फ्री BSNL सिम कार्ड (नए यूजर्स के लिए) ऑफर की वैलिडिटी और शर्तेंकंपनी के अनुसार यह ऑफर 22 मई 2026 से 30 जून 2026 तक सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगा। सिर्फ नए ग्राहक ही इस ऑफर का लाभ ले सकते हैं मौजूदा BSNL यूजर्स इस प्लान के लिए पात्र नहीं हैं सिम कार्ड नजदीकी कस्टमर सर्विस सेंटर या रिटेलर से लिया जा सकता है पहले भी आए ऐसे ऑफरBSNL इससे पहले भी नए ग्राहकों के लिए ₹1 का पहला रिचार्ज कूपन (FRC) जैसी योजनाएं ला चुका है, जिसमें शुरुआती यूजर्स को किफायती दरों पर कॉलिंग और डेटा बेनिफिट्स दिए गए थे। क्यों ला रही है BSNL ऐसे ऑफर?BSNL देशभर में अपने 4G नेटवर्क विस्तार पर काम कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नए ग्राहकों को जोड़ना और निजी टेलीकॉम कंपनियों के मुकाबले अपनी पकड़ मजबूत करना है।
36 घंटे में बदलेगा मौसम का मिजाज, 17 राज्यों में भारी बारिश-आंधी का अलर्ट; 90 किमी रफ्तार से चल सकती हैं हवाएं

नई दिल्ली । भीषण गर्मी से जूझ रहे देश के कई हिस्सों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। आगामी 36 घंटों के दौरान मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कई राज्यों में तेज बारिश, आंधी और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं के साथ बारिश का यह दौर कई इलाकों में सामान्य जनजीवन को प्रभावित कर सकता है। किसानों को भी फसलों की सुरक्षा को लेकर सावधान रहने की चेतावनी दी गई है।गर्मी के बीच मौसम ने बदली चाल लगातार बढ़ते तापमान और लू के हालात के बीच मौसम में यह बदलाव राहत लेकर आ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण बिहार और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके साथ ही पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी और आसपास के इलाकों में भी एक मजबूत मौसम प्रणाली विकसित हुई है। इन प्रणालियों के प्रभाव से पूर्वी और उत्तरी भारत में मौसम तेजी से बदलने की संभावना है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, असम, मेघालय, त्रिपुरा और पश्चिमी मध्य प्रदेश सहित 17 राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। कई इलाकों में 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका जताई गई है।पूर्वी राज्यों में ज्यादा असर की आशंका मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार पूर्वी भारत के राज्यों में मौसम का प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है। इसके साथ ही बिजली गिरने और वज्रपात का भी खतरा बना रहेगा। ऐसे हालात में लोगों को खुले मैदानों और पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचने की सलाह दी गई है। बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और तेज आंधी की संभावना जताई गई है। राजधानी पटना में तापमान में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं झारखंड के कई क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ बारिश का असर दिखाई दे सकता है। पश्चिम बंगाल के दक्षिणी और उत्तरी हिस्सों में भी मौसम का प्रभाव बना रहेगा। दिल्ली-यूपी समेत उत्तर भारत पर नजर राष्ट्रीय राजधानी और उत्तर भारत के कई हिस्सों में भी मौसम तेजी से बदल सकता है। दिल्ली में फिलहाल तापमान ऊंचा बना रहेगा, लेकिन आने वाले दिनों में तेज हवाओं और बारिश की संभावना जताई गई है। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और पूर्वी जिलों में बारिश के साथ तेज हवा चलने के संकेत हैं। कई शहरों में मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया गया है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है। तेज हवाओं और बारिश के चलते यात्रा करने वाले लोगों को मौसम अपडेट देखने के बाद ही सफर करने की सलाह दी गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस बदलाव से कई क्षेत्रों को भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है, हालांकि तेज हवाओं और वज्रपात के कारण सतर्कता बेहद जरूरी रहेगी।
आठवें वेतन आयोग पर बढ़ीं उम्मीदें, फिटमेंट फैक्टर 4.0x पहुंचा तो केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में आ सकता है बड़ा उछाल

नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इन दिनों असामान्य गतिविधियों की खबरें चर्चा में हैं। राज्य में अवैध प्रवास और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर प्रशासनिक सक्रियता बढ़ने के बाद सीमावर्ती जिलों में हालात तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। उत्तर 24 परगना और मालदा जैसे सीमा क्षेत्रों से सामने आ रही जानकारियां यह संकेत दे रही हैं कि प्रशासन अब इस मुद्दे को अधिक गंभीरता से ले रहा है और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। हाल के दिनों में राज्य में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और जांच को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई नए प्रयास शुरू किए गए हैं। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाया गया है। इसके साथ ही सीमा पार से जुड़े मामलों की निगरानी और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। इससे सीमा क्षेत्रों में गतिविधियों का स्वरूप बदलता दिखाई दे रहा है। राज्य में हाल ही में सामने आई ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति ने इस पूरे विषय को नई दिशा दी है। इस नीति का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान करना बताया जा रहा है, जो निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं के बाहर देश में रह रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैध दस्तावेजों और कानूनी मानकों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में लोगों के बीच चर्चा और सतर्कता बढ़ी है। इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में होल्डिंग सेंटरों की स्थापना को भी महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन केंद्रों का उद्देश्य कानूनी स्थिति और दस्तावेजों की जांच से जुड़ी प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। मालदा जिले में इस दिशा में शुरुआत होने की जानकारी सामने आई है, जहां निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को मजबूत बनाया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे संबंधित मामलों की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो सकेगी। सुरक्षा और प्रवास से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार चर्चा होती रही है। इसी क्रम में नागरिकता और सीमा सुरक्षा से संबंधित नियमों को लेकर भी अलग-अलग स्तर पर विचार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। कुछ पक्ष इस कार्रवाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ समूह इसके सामाजिक और मानवीय पहलुओं पर भी चर्चा कर रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ी गतिविधियों के बीच सुरक्षा एजेंसियां तकनीक आधारित निगरानी प्रणालियों का भी उपयोग कर रही हैं। बायोमेट्रिक पहचान, डेटा सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड जैसे उपायों को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जा रहा है। इससे जांच व्यवस्था अधिक संगठित और प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल सीमा सुरक्षा, नागरिकता और प्रवास से जुड़ा यह मुद्दा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बना हुआ है। आने वाले समय में इन नीतियों और व्यवस्थाओं का असर किस रूप में सामने आता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
तमिलनाडु में नई राजनीतिक हलचल, चार विधायकों के इस्तीफे से बदला समीकरण; उपचुनाव पर टिकी नजरें

नई दिल्ली । तमिलनाडु की राजनीति में एक नया सियासी मोड़ सामने आया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। प्रमुख विपक्षी दल के चार विधायकों के अचानक इस्तीफे ने न सिर्फ राजनीतिक समीकरण बदलने की अटकलों को हवा दी है, बल्कि आने वाले दिनों में सत्ता और विपक्ष के बीच रणनीतिक संघर्ष को भी और दिलचस्प बना दिया है। बताया जा रहा है कि इन विधायकों के कदम से राज्य की राजनीति में नए गठजोड़ और नए शक्ति संतुलन की संभावना बढ़ गई है। इस्तीफों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मीराजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि इस्तीफा देने वाले चारों विधायकों में से तीन ने नई राजनीतिक राह चुन ली है, जबकि चौथे नेता के भी जल्द नए दल के साथ जुड़ने की संभावना जताई जा रही है। इन इस्तीफों के बाद विधानसभा के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम आने वाले उपचुनावों को भी काफी प्रभावित कर सकता है।सूत्रों के अनुसार इन विधायकों ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया है। अब यह मामला पूरी तरह संवैधानिक और प्रक्रियात्मक स्तर पर पहुंच चुका है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस्तीफे स्वीकार होते हैं, तो आगामी उपचुनाव राज्य की राजनीति की नई दिशा तय कर सकते हैं। बदलते समीकरणों से बढ़ी विजय की ताकततमिलनाडु की राजनीति में नए नेतृत्व का प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में और नेता राजनीतिक पाला बदलते हैं, तो इसका सीधा लाभ नई उभरती राजनीतिक ताकत को मिल सकता है। इससे विधानसभा के अंदर संख्याबल और राजनीतिक प्रभाव दोनों में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है।विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल चार विधायकों का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे व्यापक राजनीतिक असंतोष और संगठनात्मक चुनौतियों के संकेत भी छिपे हो सकते हैं। यदि पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता है, तो आने वाले समय में और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं। नेतृत्व ने संभाला मोर्चाइस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्षी दल का नेतृत्व भी सक्रिय हो गया है। पार्टी की ओर से विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर इस्तीफों पर तत्काल फैसला न लेने की मांग की गई है। पार्टी का तर्क है कि संबंधित विधायकों से जुड़े कुछ कानूनी और संगठनात्मक मुद्दे अभी विचाराधीन हैं, इसलिए जल्दबाजी में कोई निर्णय उचित नहीं होगा।राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस तरह की परिस्थितियों में पार्टी नेतृत्व आमतौर पर संगठन को टूटने से बचाने और विधायकों को वापस मनाने की कोशिश करता है। हालांकि, मौजूदा हालात में यह रणनीति कितनी प्रभावी साबित होगी, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। चुनावी आंकड़ों ने बढ़ाई उत्सुकताहालिया चुनाव परिणामों ने पहले ही तमिलनाडु की राजनीति को बेहद प्रतिस्पर्धी बना दिया था। अलग-अलग दलों के बीच सीटों का अंतर और नए राजनीतिक चेहरों की लोकप्रियता ने राज्य के चुनावी परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। ऐसे में विधायकों का यह कदम भविष्य की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
मेरे लिए पहले से सोच चुके थे प्रधानमंत्री’, शिवराज सिंह चौहान की किताब से निकले राजनीतिक सफर के अहम खुलासे

नई दिल्ली । मध्य प्रदेश की राजनीति में वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद हुए बड़े बदलावों ने उस समय व्यापक राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया था। लंबे समय तक राज्य की कमान संभालने के बाद सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के चयन को लेकर कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। अब इन घटनाओं से जुड़ी कई अहम बातें सामने आई हैं, जिन्हें केंद्रीय मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने अपनी नई पुस्तक में विस्तार से साझा किया है। राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़े इन अनुभवों ने एक बार फिर उस दौर की चर्चाओं को ताजा कर दिया है। अपनी पुस्तक में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद से केंद्रीय राजनीति तक के सफर का जिक्र करते हुए कई व्यक्तिगत और राजनीतिक अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने लिखा कि विधानसभा चुनावों में बड़ी जीत के बाद पार्टी ने राज्य में नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था। उन्होंने इस बदलाव को संगठन का निर्णय मानते हुए पूरी सहजता के साथ स्वीकार किया। उनके अनुसार राजनीति में पद से अधिक महत्वपूर्ण संगठन और जिम्मेदारी होती है। पुस्तक में एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने उनसे दिल्ली आने और बातचीत करने की बात कही थी। उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र नए मुख्यमंत्री थे, लेकिन बाद में जब उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके भविष्य को लेकर पहले से एक सोच तैयार की जा चुकी थी। उन्होंने लिखा कि बाद में यह स्पष्ट हुआ कि उनके लिए नई भूमिका को लेकर योजना पहले से तय थी। शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक जीवन के उस महत्वपूर्ण दौर का भी उल्लेख किया, जब मध्य प्रदेश में नए मुख्यमंत्री के रूप में Mohan Yadav के नाम की घोषणा हुई। उन्होंने लिखा कि स्वाभाविक रूप से ऐसी परिस्थितियों में भावनात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती थीं, लेकिन संगठन के संस्कार और पारिवारिक सीख ने उन्हें संयम बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने इसे एक कार्यकर्ता की वास्तविक परीक्षा बताया। उन्होंने अपनी पुस्तक में यह भी लिखा कि उनकी पार्टी अनुशासन और त्याग के सिद्धांतों पर आधारित है और वह किसी पद से जुड़े रहने की मानसिकता में विश्वास नहीं करते। उनके अनुसार संगठन जो जिम्मेदारी देता है, उसे स्वीकार करना ही एक कार्यकर्ता का कर्तव्य होता है। यही सोच उन्हें नए दायित्व की ओर आगे बढ़ाने में सहायक बनी। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद उन्होंने आगामी लोकसभा चुनाव को नई जिम्मेदारी की तरह लिया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने पूरे समर्पण के साथ चुनावी अभियान में काम किया और उन क्षेत्रों तक पहुंचे जहां पहले संगठन को सीमित सफलता मिली थी। चुनाव परिणामों को उन्होंने सामूहिक प्रयास और संगठन की शक्ति का परिणाम बताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पुस्तक केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दौर की अंदरूनी झलक भी पेश करती है। इससे सत्ता परिवर्तन, संगठनात्मक निर्णयों और नेतृत्व की प्रक्रिया को समझने का एक नया दृष्टिकोण सामने आता है।
असम में यूसीसी बिल पर बढ़ा राजनीतिक विवाद, ओवैसी ने उठाए संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों के सवाल

नई दिल्ली । असम में समान नागरिक संहिता को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में संबंधित विधेयक पेश किए जाने के बाद अब इस मुद्दे पर विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। इसी क्रम में हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi ने प्रस्तावित व्यवस्था पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इस कानून के कई प्रावधानों को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यह मुद्दा केवल कानून का नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों और सामाजिक संरचना से भी जुड़ा हुआ है। उनके बयान के बाद इस विषय पर राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। असम सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव के तहत विवाह, तलाक, विरासत और पारिवारिक कानूनों से जुड़े कई प्रावधानों में समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार बहुविवाह और एक से अधिक विवाह को गैर-कानूनी बनाए जाने का प्रावधान रखा गया है। इसके अलावा उत्तराधिकार और संपत्ति से जुड़े मामलों में महिलाओं को समान अधिकार देने की भी बात कही गई है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रावधान सामाजिक समानता और कानूनी स्पष्टता को बढ़ावा देंगे। हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने अपनी असहमति व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की व्यवस्था कुछ समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों और धार्मिक परंपराओं को प्रभावित कर सकती है। उनके अनुसार कानून यदि समानता के उद्देश्य से लाया जा रहा है तो उसका दायरा और प्रभाव भी सभी वर्गों पर एक जैसा होना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि कुछ वर्गों या समुदायों को विशेष छूट दी जाती है तो फिर समानता के सिद्धांत पर बहस स्वाभाविक हो जाती है। ओवैसी ने यह भी कहा कि संविधान के अंतर्गत विभिन्न समुदायों को अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का अधिकार प्राप्त है। उनके अनुसार किसी भी कानून को लागू करते समय संवैधानिक संतुलन और सामाजिक विविधता का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने विरासत और उत्तराधिकार के मामलों को लेकर भी अपनी चिंताएं सामने रखीं और कहा कि इन विषयों पर व्यापक चर्चा आवश्यक है। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों को एक समान कानूनी ढांचे के अंतर्गत लाना और महिलाओं को अधिक सुरक्षा एवं अधिकार उपलब्ध कराना है। प्रस्ताव में विवाह पंजीकरण को अनिवार्य करने और वैवाहिक नियमों को अधिक स्पष्ट बनाने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इस मुद्दे ने अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस विषय पर और अधिक प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह मुद्दा केवल कानून तक सीमित नहीं बल्कि समाज और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट निर्देश के बाद चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचे रणवीर सिंह, कई विवादों के बीच बढ़ी चर्चाएं

नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता Ranveer Singh इन दिनों लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल के दिनों में उनका नाम कई अलग-अलग विवादों से जुड़ा रहा है, जिसके कारण फिल्म जगत से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चाओं का दौर जारी है। एक ओर फिल्म ‘कांतारा’ से जुड़े एक मंचीय प्रस्तुतीकरण को लेकर विवाद खड़ा हुआ, वहीं दूसरी ओर ‘डॉन 3’ से जुड़े घटनाक्रम ने भी नए सवाल पैदा कर दिए। इसी बीच अभिनेता का चामुंडेश्वरी मंदिर पहुंचना अब चर्चा का नया विषय बन गया है। जानकारी के अनुसार रणवीर सिंह ने कर्नाटक स्थित Chamundeshwari Temple पहुंचकर पूजा-अर्चना की। यह यात्रा विशेष परिस्थितियों में हुई, जिसे कानूनी प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा जा रहा है। मंदिर पहुंचकर अभिनेता ने श्रद्धाभाव से दर्शन किए और धार्मिक अनुष्ठान में हिस्सा लिया। उनकी यह यात्रा ऐसे समय हुई है जब वे लगातार सार्वजनिक चर्चाओं और विवादों के केंद्र में बने हुए हैं। दरअसल, पिछले वर्ष एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान रणवीर सिंह द्वारा फिल्म ‘कांतारा’ के चर्चित दृश्य की प्रस्तुति चर्चा का कारण बन गई थी। कुछ लोगों ने इस प्रस्तुति को धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए आपत्ति जताई थी। इसके बाद मामले ने कानूनी रूप ले लिया और अभिनेता को लेकर बहस शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर रणवीर सिंह की ओर से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट किया गया था कि उनका उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा था कि यह प्रस्तुति केवल कलाकार की प्रतिभा और अभिनय की सराहना के उद्देश्य से की गई थी। बाद में अभिनेता की ओर से बिना शर्त माफी भी पेश की गई। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत की ओर से कुछ निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद अभिनेता ने संबंधित प्रक्रिया का पालन करते हुए मंदिर पहुंचकर पूजा की। इस घटनाक्रम को कई लोग विवादों के बीच उनकी जिम्मेदार प्रतिक्रिया के रूप में भी देख रहे हैं। इसी बीच रणवीर सिंह एक और मामले के कारण सुर्खियों में आ गए। फिल्म ‘डॉन 3’ से जुड़े घटनाक्रम ने भी मनोरंजन जगत में चर्चा को बढ़ा दिया। खबरों के अनुसार फिल्म से अचानक दूरी बनाने के बाद उद्योग से जुड़े कुछ संगठनों ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद पूरे मामले ने और ध्यान खींचा। इस घटनाक्रम के बाद फिल्म जगत में अभिनेता के आगामी प्रोजेक्ट्स और पेशेवर संबंधों को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। रणवीर सिंह का करियर हमेशा प्रयोगात्मक भूमिकाओं और ऊर्जावान व्यक्तित्व के लिए जाना जाता रहा है। हालांकि वर्तमान समय में वह लगातार विवादों और चर्चाओं के बीच दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में चामुंडेश्वरी मंदिर की उनकी यात्रा को कई लोग व्यक्तिगत आस्था और परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। आने वाले समय में इन विवादों और अभिनेता के अगले कदमों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
Lava Shark 5G लॉन्च: 6000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ 15 हजार से कम में नया 5G स्मार्टफोन

नई दिल्ली। भारतीय स्मार्टफोन बाजार में Lava Shark 5G लॉन्च हो गया है, जो कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा बैटरी वाला फोन माना जा रहा है। इस फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh बैटरी, 5G कनेक्टिविटी और 120Hz रिफ्रेश रेट डिस्प्ले है। कंपनी ने इसे बजट सेगमेंट में उतारा है ताकि कम कीमत में ज्यादा बैटरी और बेहतर परफॉर्मेंस चाहने वाले यूजर्स को आकर्षित किया जा सके। कीमत और उपलब्धताLava Shark 5G की भारत में कीमत 11,999 रुपये रखी गई है।यह स्मार्टफोन 10 जून से Lava के रिटेल आउटलेट्स पर बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। कंपनी ने इसे ऑफलाइन मार्केट को ध्यान में रखकर लॉन्च किया है। डिजाइन और डिस्प्लेइस फोन में बड़ा और स्मूथ डिस्प्ले दिया गया है: 6.75 इंच का HD+ LCD डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट बड़ा स्क्रीन एक्सपीरियंस वीडियो और गेमिंग के लिए बेहतर 120Hz रिफ्रेश रेट इस प्राइस रेंज में इसे एक आकर्षक विकल्प बनाता है। प्रोसेसर और परफॉर्मेंसLava Shark 5G में दिया गया है: Unisoc T8200 चिपसेट (6nm प्रोसेस) Mali-G57 MC2 GPU 4GB LPDDR4X RAM 64GB UFS 2.2 स्टोरेज माइक्रोSD कार्ड सपोर्ट (1TB तक एक्सपेंडेबल स्टोरेज) यह कॉम्बिनेशन इसे बेसिक से मिड-लेवल यूज के लिए उपयुक्त बनाता है। बैटरी और चार्जिंगफोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी बैटरी है: 6000mAh बैटरी 18W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट इस बैटरी के साथ यूजर को लंबा बैकअप मिलने की उम्मीद है, खासकर वीडियो देखने और सोशल मीडिया इस्तेमाल में। कैमरा फीचर्सकैमरा सेटअप बजट कैटेगरी के अनुसार दिया गया है: 13MP रियर कैमरा 5MP फ्रंट कैमरा यह सेटअप बेसिक फोटोग्राफी और वीडियो कॉलिंग के लिए पर्याप्त माना जा सकता है। अन्य फीचर्ससाइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर (पावर बटन में) 5G + 4G नेटवर्क सपोर्ट IP64 रेटिंग (धूल और हल्के पानी के छींटों से सुरक्षा) वजन लगभग 210 ग्राम क्या यह फोन खरीदना चाहिए?Lava Shark 5G अपने प्राइस सेगमेंट में कुछ मजबूत फीचर्स लेकर आता है: बड़ी 6000mAh बैटरी 120Hz डिस्प्ले 5G सपोर्ट एक्सपेंडेबल स्टोरेज कमियां: कैमरा औसत स्तर का परफॉर्मेंस मिड-रेंज ही माना जाएगा अभी तक पूरी तरह रिव्यू आधारित फीडबैक उपलब्ध नहीं है कुल मिलाकर यह फोन उन यूजर्स के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है जो कम बजट में लंबी बैटरी और 5G स्मार्टफोन चाहते हैं। Lava Shark 5G बजट सेगमेंट में एक मजबूत एंट्री है, खासकर उन लोगों के लिए जो लंबी बैटरी और बड़ा डिस्प्ले चाहते हैं। हालांकि कैमरा और प्रोसेसर परफॉर्मेंस में यह फ्लैगशिप लेवल अनुभव नहीं देता, लेकिन 12 हजार रुपये के अंदर यह एक संतुलित 5G पैकेज साबित हो सकता है।
स्किन के दाग-धब्बे होंगे गायब: हल्दी के साथ 2 घरेलू चीजों का कमाल, मिलेगा नेचुरल ग्लो

नई दिल्ली । सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा और ड्राई स्किन के कारण चेहरा रूखा, बेजान और डल नजर आने लगता है। ऐसे में अगर आप केमिकल प्रोडक्ट्स की बजाय घरेलू नुस्खे अपनाते हैं तो त्वचा को प्राकृतिक रूप से निखारा जा सकता है। हल्दी को आयुर्वेद में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो स्किन को साफ और चमकदार बनाने में मदद करते हैं। अगर हल्दी में दो खास चीजें मिलाकर फेस पर लगाया जाए तो चेहरा सर्दियों में भी खिला-खिला और ग्लोइंग नजर आ सकता है। 1. हल्दी + दही: प्राकृतिक मॉइश्चराइजर पैकदही में मौजूद लैक्टिक एसिड त्वचा को एक्सफोलिएट करता है और डेड स्किन हटाने में मदद करता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को अंदर से साफ करता है। कैसे बनाएं पैक:1 चुटकी हल्दी2 चम्मच ताजा दहीदोनों को मिलाकर पेस्ट बना लें और चेहरे पर 15–20 मिनट लगाएं। फिर हल्के गुनगुने पानी से धो लें। फायदे:ड्राई स्किन से राहतदाग-धब्बे हल्के होते हैंचेहरा मुलायम और चमकदार बनता है 2. हल्दी + शहद: ग्लो बढ़ाने वाला नेचुरल फेस मास्कशहद एक बेहतरीन नेचुरल मॉइश्चराइजर है जो त्वचा को हाइड्रेट रखता है। हल्दी के साथ मिलकर यह स्किन को ग्लोइंग बनाता है और पिंपल्स कम करता है। कैसे बनाएं पैक:1 चुटकी हल्दी1 चम्मच शहदइसे अच्छे से मिक्स करके चेहरे पर लगाएं और 15–20 मिनट बाद धो लें। फायदे:स्किन में नेचुरल ग्लो आता हैमुंहासे और दाग कम होते हैंत्वचा सॉफ्ट और हाइड्रेट रहती हैध्यान रखने वाली बातेंहल्दी बहुत ज्यादा न लगाएं, वरना स्किन पीली पड़ सकती हैपहले पैच टेस्ट जरूर करेंहफ्ते में 2–3 बार ही इस्तेमाल करें हल्दी के साथ दही या शहद का इस्तेमाल सर्दियों में त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है। यह न केवल चेहरे को साफ करता है बल्कि उसे प्राकृतिक रूप से चमकदार भी बनाता है। नियमित उपयोग से स्किन चांद जैसी निखरी और हेल्दी दिख सकती है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस: महिलाओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की वैश्विक आवाज

अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस (International Day of Action for Women’s Health) हर साल महिलाओं के स्वास्थ्य, उनके अधिकारों और सुरक्षित चिकित्सा सेवाओं के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह दिन दुनिया को याद दिलाता है कि महिलाओं का स्वास्थ्य केवल एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक और वैश्विक विकास का अहम आधार है। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सुरक्षित मातृत्व सेवाएं और प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े अधिकार दिलाना है। यह दिवस इस बात पर जोर देता है कि हर महिला को समान और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिलनी चाहिए। कई देशों में आज भी महिलाएं जरूरी चिकित्सा सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे मातृ मृत्यु दर और स्वास्थ्य असमानता जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसी कारण यह दिन नीति-निर्माताओं, सरकारों और समाज को महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करता है। महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार के लिए आंकड़ों और सांख्यिकी (Statistics) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह जानना जरूरी है कि कितनी महिलाएं सुरक्षित प्रसव सुविधाओं से वंचित हैं, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं में कितना अंतर है और महिलाओं को समय पर इलाज मिल पा रहा है या नहीं। सही डेटा के बिना कोई भी स्वास्थ्य नीति प्रभावी तरीके से नहीं बनाई जा सकती। इसलिए यह दिन “डेटा आधारित स्वास्थ्य सुधार” की जरूरत पर भी जोर देता है। आज भी दुनिया के कई हिस्सों में महिलाएं स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इनमें सुरक्षित प्रसव सुविधाओं की कमी, प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव, जागरूकता की कमी और सामाजिक बाधाएं प्रमुख हैं। कई जगह महिलाओं को अपने स्वास्थ्य से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता भी नहीं मिलती, जो उनकी स्थिति को और कमजोर बनाता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर कई संगठनों की भूमिका को भी उजागर करता है, जैसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), संयुक्त राष्ट्र महिला (UN Women) और विभिन्न गैर-सरकारी संगठन। ये संस्थाएं महिलाओं के लिए स्वास्थ्य कैंप, जागरूकता कार्यक्रम और सुरक्षित मातृत्व योजनाएं चलाकर उनकी स्थिति सुधारने का प्रयास करती हैं। अगर महिलाओं के स्वास्थ्य पर सही ध्यान दिया जाए और ठोस नीतियां लागू हों, तो मातृ मृत्यु दर में भारी कमी लाई जा सकती है और हर महिला को बेहतर जीवन मिल सकता है। यही कारण है कि यह दिन सिर्फ एक जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि एक वैश्विक आंदोलन है, जो समानता और अधिकारों की दिशा में काम करता है। अंत में यह दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ महिला ही एक स्वस्थ परिवार और मजबूत समाज की नींव होती है। इसलिए महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। -अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस